<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/forest-department/tag-2008" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Forest Department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/2008/rss</link>
                <description>Forest Department RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2 साल से फाइलों में अटका अभेड़ा कंजरर्वेशन रिजर्व, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा स्थित 1100 हैक्टेयर वनभूमि को कोटा वन्यजीव में शामिल करने का मामला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-conservation-reserve-project-stalled-in-paperwork-for-two-years/article-159921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा में वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू करने के लिए अभेड़ा कंजरर्वेशन रिजर्व बनाने की योजना 2 साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल सकी। वन्यजीव विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव फाइलों में ही दबकर रह गए। जबकि, इसके लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद ट्यूरिज्म बढ़ाने को लेकर उच्चाधिकारियों द्वारा सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।<br />दरअसल, बायोलॉजिकल पार्क के सामने वन विभाग की जमीन है, जिसकी सीमा अभेड़ा से ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट के सामने हाइवे से पहले तक है, यह 1100 हैक्टयर वनभूमि है, जिसमें से करीब 900 हैक्टयर कोटा वनमंडल की है और लगभग 200 हैक्टयर भूमि बूंदी वनमंडल में आती है। जिसे वन्यजीव विभाग में शामिल करने के लिए वाइल्ड लाइफ डीएफओ ने दोनों डिविजन को प्रस्ताव भेजे थे, जिसमें से कोटा वनमंडल ने सहमति दे दी लेकिन बूंदी से अब तक सहमति नहीं मिली। इस वजह से यह प्रोजेक्ट अटका हुआ है। बता दें, वन्यजीव विभाग ने गत 20 जुलाई 2024 को विधानसभा सत्र-2 में विधायक संदीप शर्मा द्वारा लगाए सवालों के जवाब में इस योजना की जानकारी दी थी।</p>
<p><strong>अभेड़ा से एयरपोर्ट तक सफारी चढ़ी परवान</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटा वनक्षेत्र, प्रस्तावित कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शंभुपुरा तक 1100 हैक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें बड़ी संख्या में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी है। कंजरर्वेशन रिजर्व बनने से यह वनक्षेत्र संरक्षित हो जाएगा और जंगली-जानवरों व जंगल का प्रोटेक्शन भी बढ़ जाएगा। हालांकि, अभेड़ा से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तक वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी।</p>
<p><strong>जयपुर की तर्ज पर यहां भी शुरू हो लेपर्ड सफारी</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सकतपुरा वनखंड में भालू और लेपर्ड की संख्या अधिक है। इसके अलावा भेड़िया, चिंकारा, जैकाल, फॉक्स, नीलगाय, जंगली खरगोश, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, सिवेट, मोनिटर लिजार्ड सहित कई वन्यजीवों का बड़ी संख्या में बसेरा है। ऐसे में इस वनक्षेत्र में जयपुर के झलाना की तर्ज पर लेपर्ड सफारी शुरू की जा सकती है। जिससे न केवल सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा भी मजबूत हो सकेगी। लेकिन, यह अधिकारियों की इच्छा शक्ति से ही संभव हो सकेगा।</p>
<p><strong>अभेड़ा तालाब में 250 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि अभेड़ा तालाब में 250 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा है। जिनमें मुख्य रूप से पेन्टेड स्टार्क, बार हैडेगूज, स्टेपी ईगल, हैरीयर सहित कई तरह के पक्षियों का बसेरा है। उपयुक्त वैटलैंड होने से यहां सर्दी-गर्मी में बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पक्षियों का कलरव गूंजता है। इधर, वन्यजीव प्रेमियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए कन्जरर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने के वन्यजीव विभाग के प्रयास को सराहा है।</p>
<p><strong>अवैध गतिविधियां रुकेगी, वन्यजीवों की सुरक्षा बढ़ेगी</strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि नागर का कहना है कि यदि, इस वनक्षेत्र में अभेड़ा कंजरर्वेशन रिवर्ज बन जाता है तो यह संरक्षित हो जाएगा। क्योंकि, चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण होगा, जिससे अवैध खनन, संदिग्ध घुसपैठ व अवैध चराई जैसी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। जिससे वहां ग्रासलैंड विकसित होगा। जिसका असर वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित होगा और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। जिससे फू्रड चैन व पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।</p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित कोटा वनमंडल के सकतपुरा वनखंड व बूंदी वनमंडल की 1100 हैक्टेयर वनक्षेत्र को वन्यजीव विभाग में शामिल किए जाने के प्रयास किए। इस क्षेत्र में चिंकारा,इंडियन वुल्फ सहित अन्य शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों का मूवमेंट है। यहां वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने ट्यूरिज्म के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। इसको लेकर पूर्व में दोनों फोरेस्ट डिविजन को प्रस्ताव भेजे थे, जिसमें से कोटा वनमंडल द्वारा अपनी जमीन वन्यजीव विभाग में शामिल किए जाने की सहमति दे दी है लेकिन बूंदी से अब तक सहमति नहीं मिली है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, निर्वमान उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग</strong></p>
<p>ट्यूरिज्म बढ़ाने की दिशा में यह अच्छा प्रयास है। कोटा डीएफओ की ओर से सहमति मिल चुकी है लेकिन बूंदी से आना बाकी है। जैसे ही सहमति मिलती है तो प्रस्ताव बनाकर हैडक्वार्टर भेजा जाएगा।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक कोटा मुकुंदरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-conservation-reserve-project-stalled-in-paperwork-for-two-years/article-159921</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-conservation-reserve-project-stalled-in-paperwork-for-two-years/article-159921</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 14:48:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/1200-x-600-px%29-%281%2944.png"                         length="1989320"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : वन विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी को थमाया नोटिस, दर्ज की एफआईआर</title>
                                    <description><![CDATA[ विशेषज्ञ बोले-एफसीए कानून का उल्लंघन वन अफसरों की मिलीभगत का परिणाम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--forest-department-issues-notice-to-airport-construction-agency-and-registers-an-fir/article-158837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की प्रत्यावर्तित जमीन के बाहर वन भूमि पर 50 विद्युत पोल लगाने व पत्थरों का भारी मात्रा में अवैध स्टॉक करने के मामले में शुक्रवार को वन विभाग हरकत में आ गया। विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, क्षेत्रिय वन अधिकारी डाबी द्वितीय द्वारा वन अधिनियम में एफसीए उल्लंघन के मामले में एफआईआर कर केस दर्ज किया है। कार्रवाई से निर्माण एजेंसी में हड़कम्प मच गया। गौरतलब है कि बूंदी वन मंडल की डाबी रेंज के रामपुरिया नाका क्षेत्र स्थित जाखमुण्ड वनखंड में निर्माण एजेंसी द्वारा बिना अनुमति के वन भूमि पर विद्युत पोल लगवाए और जगह-जगह पत्थरों का स्टॉक कर वन अधिनियम 1980 का उल्लंघन किया। जिसका खुलासा गत 24 जून को डाबी सहायक वन संरक्षक द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद जारी हुए निरीक्षण नोट से हुआ।</p>
<p><strong>मामला खुला तो मचा हड़कम्प</strong><br />दैनिक नवज्योति के 3 जुलाई के प्रकाशित अंक में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी ने लांघी वन सीमा, लगा दिए 50 बिजली पोल,खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग में हड़कम्प मच गया। वन अधिकारी दिनभर कार्रवाई में जुटे रहे। जांच में पाया गया कि यह गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम-1980 के प्रावधानों का उल्लंघन हैं, जिसके बाद कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong>पर्यावरणविदों ने उठाए वन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल</strong><br />पर्यावरणविदों का कहना है कि वन क्षेत्र में 50 बिजली के पोल लगाना, उनमें विद्युत आपूर्ति शुरू करना और 8 से 10 फीट ऊंचे पत्थरों के बड़े-बड़े ढेर जमा करना स्थानीय वन अधिकारियों की जानकारी या मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उनका तर्क है कि डाबी रेंज में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के रेंजरों के अलावा नाकेदार, वन रक्षक, सहायक वनपाल और फॉरेस्टर समेत कई अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी अवैध गतिविधियां बिना विभागीय जानकारी के होना गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की जांच की जाना चाहिए।</p>
<p><strong>केएमएल मैप और जीपीएस से वन अपराध का खुलासा</strong><br />एसीएफ द्वारा जारी निरीक्षण नोट के अनुसार, उन्होंने मौके पर ही सर्वेयर से एयरपोर्ट के लिए प्रत्यावर्तित वन भूमि का केएमएल मैप मंगवाया। जीपीएस कोर्डिनेट्स व लोकेशन का मिलान करने पर स्पष्ट हुआ कि पत्थरों का स्टॉक और बिजली के पोल एयरपोर्ट के लिए हस्तांतरित भूमि में नहीं, बल्कि उससे बाहर वन विभाग की भूमि पर हैं।</p>
<p><strong>गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की हो जांच</strong><br />पूरे मामले में गार्ड से लेकर रेंजर स्तर तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण और एफसीए कानून के उल्लंघन की घटनाओं पर रोक लग सके। इतनी बड़ी मात्रा में वन भूमि पर अवैध पत्थरों का स्टॉक जमा करना व विद्युत पोल लग जाना, बिना अफसरों की जानकारी या मिली भगत के संभव नहीं है।<br /><strong>-बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी पीपुल फॉर एनिमल्स</strong></p>
<p><strong>नोटिस देकर एफआईआर दर्ज की</strong><br />इस मामले में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, वन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।<br /><strong>-मनीष शर्मा, रेंजर द्वितीय डाबी, बूंदी वन मंडल</strong></p>
<p>नोटिस मिलने की जानकारी मिली है। अभी मैं बहार हूं, लौटकर आने के बाद मामले में कुछ कह पाएंगे।<br /><strong>-जितेंद्र कुमार, लाइजनिंग ऑफिसर एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--forest-department-issues-notice-to-airport-construction-agency-and-registers-an-fir/article-158837</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--forest-department-issues-notice-to-airport-construction-agency-and-registers-an-fir/article-158837</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 13:31:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/1200-x-600-px%291.png"                         length="816760"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फोलोअप: प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास ने मांगा जवाब, महकमे में मचा हड़कम्प</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर वन मुख्यालय ने कोटा सीसीएफ से मांगी रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/follow-up--principal-chief-conservator-of-forests--development--demands-explanation--turmoil-ensues-in-the-department/article-155959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/85644.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वन मंडल द्वारा बोटनीकल गार्डन में फायर लाइन के नाम पर किया गया 38 लाख रुपए घोटाले का मामला खुलने के बाद वन महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। गबन की आंच जयपुर वन मुख्यालय तक पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) शिखा मेहरा ने बुधवार को कोटा वन उच्चाधिकारी से जवाब तलब किया है। उन्होंने इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इस पर सीसीएफ व डिविजन कार्यालय में हलचल तेज रही। इधर, वन विशेषज्ञों का कहना है कि 40 हैक्टेयर का बोटनीकल गार्डन, जो सम्पूर्ण पठारी क्षेत्र है और निरीक्षण पथ से कवर्ड होने के बावजूद फायर लाइन के नाम पर लाखों रुपयों का घोटाला संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। मामले की तुरंत उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम गठित कर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।</p>
<p><strong>नोटिफाइड होती है हर फायर लाइन, मनमर्जी से नहीं बन सकती</strong><br />वन विशेषज्ञों का कहना है कि हर फायर लाइन नोटिफाइड होती है, कहीं भी मनमर्जी से नई फायर लाइन नहीं बनाई जा सकती। यदि, बनानी भी होती है तो उसकी डिजाइन बनाकर मुख्यालय को भेजनी होती है, जहां वह नोटिफाइड होती है। क्योंकि, हर नोटिफाइड फायर लाइन के संधारण के लिए हर बजट आता है और वह 2 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से जारी होता है। असल में फायर लाइन घने जंगलों में, जहां ऊंचे-ऊंचे पेड़ हो और भीषण आग लगने की हिस्ट्री रही हो, वहीं बनाई जाती है। चूंकि, बोटनीकल गार्डन का एरिया पठारी है और यहां घना जंगल भी नहीं है। ऐसे में यहां फायर लाइन के नाम पर कागजों में दर्शाया गया 38 लाख का खर्च सीधे तौर पर गबन है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इतना बजट तो कभी कोटा डिविजन के सम्पूर्ण वनक्षेत्र में फायर लाइन के लिए नहीं मिला, जो अकेले बोटनीकल गार्डन में खर्च किया गया।</p>
<p>मामले को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-शिखा मेहरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/follow-up--principal-chief-conservator-of-forests--development--demands-explanation--turmoil-ensues-in-the-department/article-155959</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/follow-up--principal-chief-conservator-of-forests--development--demands-explanation--turmoil-ensues-in-the-department/article-155959</guid>
                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:28:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/85644.png"                         length="1442255"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर वन विभाग 1 और 2 मई को जिले के 85 से अधिक वॉटर होल्स पर वन्यजीव गणना आयोजित करेगा। यह गणना 24 घंटे चलेगी, जिसमें वन कर्मी पग-मार्क और प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर आंकड़े जुटाएंगे। पुष्कर, किशनगढ़ और नसीराबाद सहित सभी क्षेत्रों के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)29.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वन विभाग की ओर से एक व 2 मई को जिले के जंगलों में वन्य जीव गणना की जाएगी। यह गणना वॉटर होल्स पद्धति से होगी। जिले के जंगलों के 85 से अधिक वाटर होल्स पर यह गणना होगी। वन कार्मिक वॉटर्स होल्स पर पानी पीने के लिए आने वाले जीवों को देखकर उनकी संख्या निर्धारित प्रपत्रों में दर्ज करेंगे। साथ भी उनके पग मार्ग, मल मूत्र को भी गणना का आधार बनाएंगे। उपवन संरक्षक पी बालामुरुगन ने बताया कि गणना 1 मई को सुबह 8:00 बजे शुरू होकर 2 मई को सुबह 8:00 बजे संपन्न होगी। अजमेर सहित ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, सरवाड़ व पुष्कर के जंगलों में वाटर होल्स पर होने वाली गणना के लिए टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम के कार्मिकों को गणना का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गणना के दिन अधिकारियों की टीम वॉटर होल्स का औचक निरीक्षण भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/111200-x-600-px%29-%283%2929.png"                         length="1758814"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीषण गर्मी में वन्यजीवों को राहत: झालाना, आमागढ़ और बीड पापड़ में रोज ट्यूबवेल से भर रहे जलस्रोत; वन्यजीव गणना की तैयारियां भी तेज </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के झालाना, आमागढ़ और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में वन्यजीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन किया गया है। भीषण गर्मी के बीच 40 से अधिक वाटर प्वाइंट्स को रोजाना ट्यूबवेल से भरा जा रहा है। वन विभाग ने अगले महीने होने वाली वन्यजीव गणना के लिए भी इन जलस्रोतों पर निगरानी तेज कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-to-wildlife-in-the-scorching-heat-water-sources-are/article-151485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jhalana.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तेज गर्मी के बीच वन विभाग ने जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। झालाना लेपर्ड रिजर्व, आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में लेपर्ड, हायना, नीलगाय सहित कई प्रजातियों के लिए बनाए गए वाटर प्वाइंट्स इन दिनों जीवनरेखा बने हुए हैं। वन विभाग की टीम रोजाना ट्यूबवेल के जरिए इन जलस्रोतों को भर रही है, ताकि भीषण गर्मी में वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। जानकारी के अनुसार झालाना के तीन जोन में करीब 17, आमागढ़ में 11 और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में 7 से 8 वाटर प्वाइंट्स बनाए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि तापमान बढ़ने के साथ जल स्रोतों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी इन क्षेत्रों में बनी रहती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। वहीं, अगले महीने प्रस्तावित वन्यजीव गणना को लेकर भी विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वाटर प्वाइंट्स के आसपास गतिविधियों पर नजर रखकर आंकड़े जुटाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे वन्यजीवों की सटीक संख्या और स्थिति का आकलन किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-to-wildlife-in-the-scorching-heat-water-sources-are/article-151485</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-to-wildlife-in-the-scorching-heat-water-sources-are/article-151485</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:51:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/jhalana.png"                         length="1286585"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड के कोड़रमा में हाथियों का कहर : दो की मौत, तीन घायल, ग्रामीणों में दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड के कोडरमा में हाथियों के झुंड ने ईंट भट्ठा मजदूरों पर हमला कर 12 वर्षीय बच्चे और एक युवक को कुचलकर मार डाला। घटना में तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। क्षेत्र में बढ़ती हाथियों की दहशत और वन विभाग की निष्क्रियता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पिछले एक माह में जिले में 7 मौतें हो चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/elephants-wreak-havoc-in-jharkhands-koderma-two-dead-three-injured/article-151277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jharkhand.png" alt=""></a><br /><p>कोडरमा। झारखंड के कोडरमा जिले में जयनगर थाना क्षेत्र के कंझियाडीह गांव में बीती रात हाथियों के हमले में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान बिहार के फतेहपुर गांव निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कंझियाडीह स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई जब हाथियों का झुंड अचानक पहुंच गया। हाथियों ने झोपड़ियों को तोड़ना शुरू कर दिया, जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान एक छोटा बच्चा झोपड़ी में फंस गया। उसे बचाने के प्रयास में परिवार के लोग वापस वहां पहुंचे, लेकिन अफरा-तफरी के बीच बच्चा हाथियों के झुंड के पास पहुंच गया, जहां उसे कुचलकर मार डाला गया।</p>
<p>घटना इतनी भयावह थी कि शव के टुकड़े हो गए। हमले में राजकुमार मांझी की पत्नी गौरी देवी, लवकुश की मां कारी देवी और एक अन्य बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। वहीं, सतगावां थाना क्षेत्र के मीरगंज पंचायत स्थित कानीकेंद्र गांव में भी हाथियों ने एक मिट्टी का मकान ध्वस्त कर दिया और उसमें रखे अनाज को नष्ट कर दिया। हालांकि, उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। लगातार बढ़ रही घटनाओं से इलाके में दहशत का माहौल है। पिछले एक महीने में जिले में हाथियों के हमले से करीब सात लोगों की मौत हो चुकी है। जयनगर, मरकच्चो और सतगावां समेत कई प्रखंड इससे प्रभावित हैं। वहीं घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यशैली के प्रति भारी आक्रोश है और लोगों ने जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/elephants-wreak-havoc-in-jharkhands-koderma-two-dead-three-injured/article-151277</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/elephants-wreak-havoc-in-jharkhands-koderma-two-dead-three-injured/article-151277</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:57:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/jharkhand.png"                         length="1658877"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुकुंदरा-रामगढ़ में बाघिनों की लाइफ स्टडी, तीसरे चरण से पहले हर मूवमेंट पर पैनी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[एमपी से लाई गई बाघिनों के व्यवहार, शिकार व टेरिटरी बनाने की प्रक्रिया पर हो रही रिसर्च।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-study-of-tigresses-in-mukundra-ramgarh--a-keen-watch-on-every-movement-ahead-of-phase/article-151085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में लाई गई मध्यप्रदेश की बाघिनों पर इन दिनों विशेष स्टडी की जा रही है। इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट के तीसरे चरण से पहले वन विभाग बाघिनों के व्यवहार, मूवमेंट और शिकार जैसी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण कर रहा है। इसी आधार पर आगे नई बाघिनों को लाने का फैसला लिया जाएगा।<br />वन विभाग के अनुसार, इस अध्ययन में बाघिनों के शिकार करने की क्षमता, नई टेरिटरी बनाने की प्रक्रिया, बाघों के साथ इंटरेक्शन और एनटीसीए के प्रोटोकॉल का पालन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>जंगल को एक्सप्लोर कर रही टाइग्रेस</strong><br />सीसीएफ ने कहा, दोनों बाघिनें फिलहाल नए वातावरण में खुद को ढालते हुए जंगल को एक्सप्लोर कर रही हैं। वे अपनी टेरिटरी स्थापित करने की कोशिश में हैं। रेडियो कॉलर के जरिए उनकी 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे उनकी लोकेशन और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाघिनों का व्यवहार सामान्य है और वह नियमित रूप से शिकार भी कर रही हैं।</p>
<p><strong>एमपी और हाड़ौती के जंगल में बड़ा अंतर</strong><br />उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के जंगल घने और अधिक नमीयुक्त होते हैं, जबकि हाड़ौती के जंगल अपेक्षाकृत खुले पठारी और कम घनत्व वाले हैं। ऐसे में यह अध्ययन महत्वपूर्ण है कि बाघिनें इस नए वातावरण में खुद को कैसे ढालती हैं और स्थानीय नर बाघों के साथ उनका व्यवहार कैसा रहता है।</p>
<p><strong>जंगल में स्वच्छंद वितरण कर रही बाघिनें</strong><br />बांधवगढ़ से 27 फरवरी को बाघिन एमटी-10 को सड़क मार्ग से कोटा मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। जिसे 28 फरवरी को झामरा वैली के एक हेक्टेयर सॉफ्ट एंक्लोजर में छोड़ा था। इसके बाद 7 मार्च को हार्ड रिलीज के लिए एनक्लोजर का गेट खोल दिया था लेकिन उसने 9 मार्च को तड़के खुले जंगल में कदम रखा। इसके बाद से वह जंगल में स्वछंद विचरण कर रही है।</p>
<p><strong>टेरीटरी बना रही आरवीटीआर-9</strong><br />इधर, 22 दिसंबर 2025 को पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन पीएन 224 को रामगढ़ लाया गया था। जिसे 23 दिसंबर को बजालिया क्षेत्र में छोड़ा था। इसको हवाई मार्ग से जयपुर तक लाया गया था फिर वहां से सड़क मार्ग से बूंदी पहुंची थी। इसे आरवीटी-9 नाम दिया गया था। बाद में 27 दिसंबर को एनक्लोजर का गेट खोल 28 दिसंबर की सुबह हार्ड रिलीज किया गया। खुले जंगल में आने के बाद वह लंबी दूरी तक विचरण कर रही है।</p>
<p><strong>नई बाघिन लाने से पहले स्टडी अहम</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट के अगले चरण से पहले बाघिनों की यह स्टडी बेहद अहम मानी जा रही है। इससे यह तय होगा कि हाड़ौती के जंगल नए बाघों के लिए कितने अनुकूल हैं और भविष्य में टाइगर आबादी बढ़ाने की योजना किस तरह आगे बढ़ेगी।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र से आएंगी अगली बाघिनें</strong><br />संभागीय वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत कुल 5 बाघिनों को लाने की अनुमति है। अब तक मध्यप्रदेश से दो बाघिन लाई जा चुकी हैं। तीसरे चरण में महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व से दो और बाघिन लाई जाएंगी। इसके बाद ही अंतिम चरण में पांचवीं बाघिन लाई जाएगी। तीसरा चरण मानसून के बाद शुरू होने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-study-of-tigresses-in-mukundra-ramgarh--a-keen-watch-on-every-movement-ahead-of-phase/article-151085</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-study-of-tigresses-in-mukundra-ramgarh--a-keen-watch-on-every-movement-ahead-of-phase/article-151085</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:57:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/111200-x-600-px%29-%282%2923.png"                         length="1862509"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमडीआर-183 पर अधूरी सड़क बनी मुसीबत,वन विभाग की रोक से अटका 5.9 किमी निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[साढ़े तीन साल बीत जाने के बावजूद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/incomplete-road-on-mdr-183-becomes-a-nightmare--5-9-km-of-construction-stalled-due-to-forest-department-restrictions/article-150741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(8)6.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र में एमडीआर-183 मुख्य मार्ग पर दो स्थानों पर अधूरी सड़क निर्माण के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भरने से हालात और भी गंभीर हो गए हैं।  क्षेत्र में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा धनावा से वाया दबलाना, बांसी होते हुए नैनवां तक करीब 45 किमी सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन दो स्थानों पर वन विभाग की आपत्ति के चलते निर्माण कार्य अधूरा रह गया।<br />जानकारी के अनुसार एक स्थान पर लगभग 2.9 किमी और दूसरे स्थान पर करीब 3 किमी सड़क का निर्माण रुका हुआ है। इन अधूरे हिस्सों में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसाती पानी भरने से वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालक अक्सर संतुलन खोकर गिर रहे हैं, जबकि चौपहिया और लोडिंग वाहन भी हिचकोले खाते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब साढ़े तीन साल बीत जाने के बावजूद सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग नैनवां व हिण्डोली उपखंड सहित करीब 50 गांवों को बूंदी जिला मुख्यालय से जोड़ता है। अधूरी सड़क के कारण रोजाना हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>स्वीकृति के बावजूद शुरू नहीं हुआ निर्माण </strong><br />दबलाना से बांसी के बीच सांवतगढ़-फोकी पिपलिया मार्ग पर वन सीमा का हवाला देकर निर्माण कार्य रोका गया था। इसी तरह मानपुरा की डुंगरिया से नैनवां की ओर भी करीब 3 किमी क्षेत्र में कार्य अटका रहा। हालांकि अब वन विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>गड्ढों के कारण लगते हैं तेज झटके</strong><br />स्थानीय निवासी नीरूशंकर शर्मा व अवधेश कुमार जैन ने बताया कि बसों में सफर के दौरान गड्ढों के कारण तेज झटके लगते हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। वहीं डेयरी संचालक कौशल किराड़ ने बताया कि वाहन में दूध की केन हिचकोलों के कारण गिर जाती है, जिससे नुकसान उठाना पड़ता है।</p>
<p>वन विभाग की समस्या का समाधान हो चुका है और स्वीकृति भी मिल गई है। करीब 10 करोड़ 16 लाख रुपए की राशि भी उपलब्ध हो चुकी है। नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शेष सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा।<br /><strong>-हरिराम मीणा, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/incomplete-road-on-mdr-183-becomes-a-nightmare--5-9-km-of-construction-stalled-due-to-forest-department-restrictions/article-150741</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/incomplete-road-on-mdr-183-becomes-a-nightmare--5-9-km-of-construction-stalled-due-to-forest-department-restrictions/article-150741</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 11:20:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/111200-x-600-px%29-%288%296.png"                         length="1311570"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथी गांव में लगा स्वास्थ्य जांच कैंप : हाथियों की सेहत पर वन विभाग की खास नजर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लिए सैंपल</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली रोड स्थित हाथी गांव में वन विभाग की ओर से विशेष हाथी स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन। इस दौरान नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के उप निदेशक डॉ. अरविंद माथुर, जयपुर चिड़ियाघर के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अशोक तंवर सहित विशेषज्ञ टीम मौजूद रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-check-up-camp-set-up-in-elephant-village-forest-department/article-149852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली रोड स्थित हाथी गांव में वन विभाग की ओर से विशेष हाथी स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन किया गया। इस दौरान नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के उप निदेशक डॉ. अरविंद माथुर, जयपुर चिड़ियाघर के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अशोक तंवर सहित विशेषज्ञ टीम मौजूद रही।</p>
<p>कैंप में हाथियों के रक्त, मल व अन्य आवश्यक सैंपल लेकर उनकी गहन जांच की गई। सभी सैंपलों को आगे की जांच के लिए राज्य रोग निदान केंद्र भेजा गया है। इस दौरान रेंजर गौरव चौधरी, हाथी मालिक बल्लू खान और महावत भी मौजूद रहे। वन विभाग का यह प्रयास हाथियों के बेहतर स्वास्थ्य और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-check-up-camp-set-up-in-elephant-village-forest-department/article-149852</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-check-up-camp-set-up-in-elephant-village-forest-department/article-149852</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:20:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/1200-x-600-px%2911.png"                         length="1014722"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोडरमा में जंगली हाथी का कहर: महुआ चुनने गई महिला की मौत, 4 दिनों में 3 लोगों की खा गए जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड के कोडरमा में जंगली हाथी के हमले में 55 वर्षीय सीता देवी की मौत हो गई। महुआ चुनने गई महिला को हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला। वन विभाग ने ₹25,000 की तत्काल सहायता और ₹4 लाख के मुआवजे का आश्वासन दिया है। क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/wild-elephant-wreaks-havoc-in-koderma-woman-who-went-to/article-148333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/elephant-attack.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के कोडरमा जिले के मरकच्चो थाना क्षेत्र अंतर्गत जामू स्थित हरलाडीह गांव में रविवार सुबह एक दर्दनाक घटना में जंगली हाथी के हमले से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान 55 वर्षीय सीता देवी के रूप में हुई है, जो रामचंद्र साहू की पत्नी थीं। परिजनों के अनुसार, सीता देवी सुबह करीब 5:30 बजे गांव की अन्य महिलाओं के साथ जंगल में महुआ चुनने गई थीं। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया। हाथी को देखते ही अन्य महिलाएं अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहीं, लेकिन सीता देवी समय पर नहीं निकल सकीं।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाथी ने सीता देवी को अपनी सूंड से उठाकर जमीन पर दो से तीन बार पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद साथ गई महिलाओं ने शोर मचाया, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह हाथी को वहां से खदेड़ा। इस घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं लगातार बढ़ रही हाथियों की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। परिजनों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों को भगाने के लिए विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार, कोडरमा जिले में बीते एक वर्ष के दौरान हाथियों के हमलों में एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं पिछले एक सप्ताह में ही दो महिलाओं और एक पुरुष की मौत हो चुकी है, जिससे लोगों में भय का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।</p>
<p>डीएफओ सौमित्र शुक्ला ने बताया कि मृतका के परिजनों को तत्काल 25 हजार रुपये दाह-संस्कार के लिए दिए जाएंगे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद वन अधिनियम के तहत चार लाख रुपये तक मुआवजा प्रदान किया जाएगा। साथ ही क्षेत्र में हाथियों को खदेड़ने के लिए चार टीमें तैनात की गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/wild-elephant-wreaks-havoc-in-koderma-woman-who-went-to/article-148333</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/wild-elephant-wreaks-havoc-in-koderma-woman-who-went-to/article-148333</guid>
                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:32:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/elephant-attack.png"                         length="461854"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथी गांव में दिखा लेपर्ड: फोटो हो रही वायरल, लोगों को सतर्क रहने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी के हाथी गांव में देर रात लेपर्ड दिखने से हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो में तेंदुए को हाथी सवारी ट्रैक के पास घूमते देखा गया। विकास समिति के अध्यक्ष शफीक खान ने इसकी पुष्टि की है। वन विभाग की हलचल के बीच स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में खौफ का माहौल बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/leopard-photo-seen-in-hathi-village-is-going-viral-people/article-147919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/leopard.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में लगातार वन्यजीवों की हलचल के बीच हाथी गांव में एक लेपर्ड के दिखाई देने की खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक फोटो में लेपर्ड को हाथी गांव के भीतर हाथी सवारी वाले ट्रैक के आसपास देर रात घूमते हुए देखा गया। यह तस्वीर करीब चार से पांच दिन पुरानी बताई जा रही है।</p>
<p>हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष शफीक खान (बल्लू खान) के अनुसार पिछले दिनों देर रात लेपर्ड की गतिविधि देखी गई थी। जिसके बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/leopard-photo-seen-in-hathi-village-is-going-viral-people/article-147919</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/leopard-photo-seen-in-hathi-village-is-going-viral-people/article-147919</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:59:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/leopard.png"                         length="1232949"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश सरकार ने दी राहत : वन गार्डों को मिली 11 बाइक, अब क्षेत्र की गस्त होगी आसान</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने विश्व वानिकी दिवस पर वन विभाग को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में 460 नई मोटरसाइकिलें वितरित की हैं। इनमें से अजमेर जिले को 11 बाइकें मिली हैं। जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा ने बाइकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बाइकें फील्ड स्टाफ को सौंपी गई हैं, जो जंगलों में नियमित गश्त करते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/state-government-gave-relief-to-forest-guards-got-11-bikes/article-147530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)36.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राज्य सरकार ने विश्व वानिकी दिवस पर वन विभाग को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में 460 नई मोटरसाइकिलें वितरित की हैं। इनमें से अजमेर जिले को 11 बाइकें मिली हैं। जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा ने बाइकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बाइकें फील्ड स्टाफ को सौंपी गई हैं, जो जंगलों में नियमित गश्त करते हैं। अजमेर डीएफओ पी. बालामुरुगन ने बताया कि इससे अजमेर के जंगलों में अब पेट्रोलिंग अधिक सक्रिय हो सकेगी, जिससे वन्यजीव और वन संपदा की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।</p>
<p>पहले दुर्गम जंगलों, पहाड़ी और घने क्षेत्रों में पैदल या पुराने साधनों से गश्त करना कठिन था। अब बाइक के जरिए फील्ड स्टाफ तेजी से मौके पर पहुंच सकेगा। इससे समय की बचत के साथ अधिक क्षेत्र कवर होगा। अवैध कटाई, शिकार, अतिक्रमण और वन्यजीव तस्करी पर नजर रखना आसान होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/state-government-gave-relief-to-forest-guards-got-11-bikes/article-147530</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/state-government-gave-relief-to-forest-guards-got-11-bikes/article-147530</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:57:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%29-%282%2936.png"                         length="1144243"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        