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                <title>thalassemia - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कुदरत के साथ अस्पताल भी दे रहा दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार ने तो अस्पतालों में मरीजों के लिए उपचार से लेकर दवाई तक और जांचों से लेकर पर्ची तक की सुविधा नि:शुल्क कर दी है, लेकिन अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को  बीमारी से अधिक व्यवस्थाओं के दर्द के पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/along-with-nature--the-hospital-is-also-giving-pain/article-11821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/13245.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने तो अस्पतालों में मरीजों के लिए उपचार से लेकर दवाई तक और जांचों से लेकर पर्ची तक की सुविधा नि:शुल्क कर दी है, लेकिन अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को  बीमारी से अधिक व्यवस्थाओं के दर्द के पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। ऐसा ही स्थिति जे.के. लोन अस्पताल में आने वाले थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों व उनके परिजनों की है। अस्पताल में संचालित थैलीसीमिया वार्ड को कुछ समय पहले अस्पताल परिसर में ही नए बने भवन जीएमएमटीसीा में शिफ्ट किया है, जबकि अस्पताल के थैलीसीमिया वार्ड को एनआईसीयू बना दिया है। वहीं थैलीसीमिया का नया वार्ड नए ओपीडी ब्लॉक में तैयार किया जा रहा है। <br /><br /><strong>एक घंटे का उपचार, चार घंटे का इंतजार</strong><br />थैलीसीमिया वार्ड में बच्चों को रक्त चढ़वाने आए परिजनों ने बताया कि उन्हें रक्त चढ़वाने में अधिक समय नहीं लगता है। उससे अधिक समय बच्चों को अस्पताल में भर्ती  व डिस्चार्ज करवाने की व्यवस्थाओं में लग रहा है। साथ ही परेशानी भी अधिक हो रही है। रंगबाड़ी निवासी तीरथ सिंह व स्वामी विवेकानंद नगर निवासी सुरजीत सिंह ने बताया कि उनके बच्चे थैलीसीमिया पीड़ित हैं। जिन्हें हर सप्ताह रक्त चढ़वाने के लिए जे.के. लोन अस्पताल लाना पड़ रहा है। अस्पताल में बच्चों को रक्त चढ़वाने से पहले काउंटर पर पर्ची बनवाने और उसके बाद भामाशाह काउंटर पर औपचारिकताएं पूरी करने में समय अधिक लग रहा है। भामाशाह काउंटर पर ही थैलीसीमिया पीडितों का भी काम किया जा रहा है। ऐसे में काउंटर पर बैठे कर्मचारी पहले भामाशाह के मरीजों का काम करते हैं, फिर उसके बाद बच्चों का। ब्लड बैंक से ब्लड लाने तक का काम उन्हें ही करना पड़ रहा है। रक्त चढ़ाने के बाद डिस्चार्ज के समय फिर से वही औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं। जिससे समय अधिक लग रहा है। <br /><br /><strong>हर सप्ताह पूरी औपचारिकताएं</strong><br />बच्चों के परिजनों का कहना है थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को हर सप्ताह रक्त चढ़वाने के लिए अस्पताल लाना पड़ रहा है। उसमें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हर सप्ताह भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक पूरी औपचारिकताएं करनी पड़ रही हैं। जिससे परेशानी अधिक हो रही है। परिजनों का कहना है कि औपचारिकताओं को पूरा करने में जितना समय लगता है उतनी देर तक बच्चे भी उनके साथ ही कतार में खड़े रहते हैं। यदि  हर सप्ताह की जगह एक महीने का कार्ड बना दिया जाए तो यह परेशानी समाप्त हो सकती है। <br /><br />जे.के. लोन  अस्पताल में 30 बैड का थैलीसीमिया वार्ड है। उसमें वर्तमान में आईसीयू संचालित हो रहा है। थैलीसीमिया वार्ड को फिलहाल जीएमएमटीसी में संचालित किया जा रहा है। थैलीसीमिया का नया वार्ड नए ओपीडी में बन रहा है। जहां 30 बैड का वार्ड होगा। उसके तैयार होने के बाद वार्ड को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। बच्चों व परिजनों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए व्यवस्था को सही करवा देंगे। <strong>- डॉ. एच.एल. मीना, अधीक्षक जे.के. लोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 16:16:40 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व थैलेसीमिया दिवस आज: प्रदेश में थैलेसीमिया के तीन हजार से ज्यादा रोगी, नहीं मिलती सरकार से मदद</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर में कई ऐसे युवा हैं जो थैलेसीमिया के शिकार होने के बावजूद अपने मनोबल को मजबूत बनाकर कामयाबी हासिल कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-news--world-thalassemia-day-today--more-than-three-thousand-patients-of-thalassemia-in-the-state--do-not-get-help-from-the-government/article-9341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/18.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। थैलेसीमिया के प्रदेश में तीन हजार से ज्यादा रोगी हैं। थैलेसीमिया में रोगी को खून की कमी होने लगती है औार एक निश्चित अवधि के बाद उसे खून चढ़ाना होता है। थैलेसीमिया पीड़ित लोगों को बीमारी के साथ-साथ दोस्त, सहयोगी और समाज द्वारा नकारे जाने जैसी परेशानियों से भी दो चार होना पड़ता है। इन्हें सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिलती। इन सब के बावजूद थैलेसीमिया पीड़ित लोग इन चुनौतियों का सामना करते हुए सकारात्मक और सामान्य जीवन जी रहे हैं। शहर में कई ऐसे युवा हैं जो थैलेसीमिया के शिकार होने के बावजूद अपने मनोबल को मजबूत बनाकर कामयाबी हासिल कर रहे हैं। <br /><br /><strong>थैलेसीमिया के लक्षण</strong><br />थैलेसीमिया होने पर सर्दी-जुकाम बना रहता है, शरीर बीमार सा लगता है। सांस लेने में तकलीफ महसूस होना, शरीर में कमजोरी और दर्द बना रहना, दांतों का बाहर की ओर निकलना, उम्र के अनुसार शारीरिक विकास न होना, शरीर का पीला पड़ना, उदासी बने रहना। यह सभी थैलेसीमिया के ही लक्षण हैं।<br /><br /><strong>जर्नलिस्ट बनना चाहती है मितुल</strong><br />वैशाली नगर में रहने वाली 21 वर्षीय मितुल टांक बीएससी सैकेंड ईयर में पढ़ती हैं। वह पैरामेडिकल की पढ़ाई भी कर रही हैं। वह थैलेसीमिया चिल्ड्रेन सोसायटी से साढ़े चार साल से जुड़ी हुई हैं। मितुल ने थैलेसीमिया को कभी अपने रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। वह कला के जरिए खुद को अभिव्यक्त करती हैं। उनके पिता बताते हैं कि मितुल ने कुछ शॉर्ट फिल्मों में काम किया है और इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज के टॉप 16 में भी पहुंची है। वह कविताएं भी लिखती हैं जो अखबारों में प्रकाशित होती रहती है। सोसायटी के कार्यक्रमों में वह अक्सर हिस्सा लेती हैं और खुद को बेहतर करने की कोशिश में रहती है। वह जर्नलिस्ट बनना चाहती है।<br /><br /><strong>खुद का ख्याल रखने में सक्षम हूं: अनीता</strong><br />इंद्रपुरी कॉलोनी में रहने वाली 21 साल की अनिता बासवानी सात वर्ष से थैलेसीमिया चिल्ड्रेन सोसायटी से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। पिता किराना की दुकान पर काम करते हैं। अनिता कहती हैं कि वह खुद का ख्याल रखने में सक्षम हैं। उन्हें हर 15वें दिन खून चढ़ता है और वह अकेले ही अस्पताल आती हैं। चार महीने पहले उन्होंने अपने पसंद के लड़के से शादी भी की। अनिता बताती है कि जब वह नवी कक्षा में थी, तब उनकी सहपाठी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनके साथ डांस करने से मना कर दिया था, लेकिन थैलेसीमिया को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। आज वह सोसायटी के डांस प्रोग्राम्स में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती हैं।<br /><br /><strong>हमेशा सकारात्मक बदलाव दिखा</strong><br />पंद्रह वर्षीय भाविका आसवानी न्यू इन्द्रपुरी कॉलोनी में रहती हैं। वह दसवीं कक्षा में है और 8 मई को अंतरराष्टÑीय थैलेसीमिया दिवस पर होने वाले डांस प्रोग्राम में हिस्सा ले रही हैं। मां भूमिका बताती हैं कि भाविका 4 महीने की ही थी जब पता चला कि उसे थैलेसीमिया है। शुरुआत में चिंता हुई और भाविका को दवा से चिड़चिड़ापन भी होता था, लेकिन अब स्कूल में या सोसायटी में दोस्तों और लोगों से घुलने मिलने से उसे एक हौसला मिला है। भूमिका कहती हैं कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। भाविका उन्हें कभी भी अलग नहीं लगी। उसके अंदर हमेशा सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।<br /><br />घर की सारी जिम्मेदारियां संभाली<br />18 साल की मुस्कान खान घाटगेट की रहने वाली है। 4 साल की उम्र में मुस्कान की इस लाइलाज बीमारी के बारे में परिवार को पता चला। 6 साल की उम्र में मुस्कान की मां का देहांत हो गया। जिंदगी के थपेड़ों की वजह से मुस्कान पढ़ने से वंचित रह गई। वह अपने इलाज के लिए अकेले सफर करती है और सोसायटी की सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए हमेशा आगे रहती है। घर की सारी जिम्मेदारियां मुस्कान ने संभाली, इन सब के बावजूद वह कभी निराश नहीं रहती। मुस्कान कहती है कि अगर वह पढ़ पाती तो डॉक्टर बनती।<br /><br />ह मने हमेशा सरकार से यह मांग की है कि थैलेसीमिया को लेकर लोगों को जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। अनजाने में लोग जीवनभर की मुश्किले मोल लेते हैं। लोग शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच करा ले। थैलेसीमिया माइनर की शादी थैलेसीमिया माइनर से ना हो इसका ध्यान नहीं रखें तो आने वाले बच्चों में यह बीमारी नहीं होगी। -<strong>नरेश भाटिया, अध्यक्ष , थैलेसीमिया चिल्ड्रेन सोसायटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 14:56:13 +0530</pubDate>
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