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                <title>chambal river - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मुकुंदरा और शेरगढ़ के जंगलों में आबाद हो रही उल्लुओं की दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[गराड़िया से गैपरनाथ तक चंबल की कराइयों में पर्यटकों को दिखाई दे रहे उल्लूओं के बच्चे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-world-of-owls-flourishes-in-the-forests-of-mukundra-and-shergarh/article-148715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रात का सन्नाटा, पेड़ों की ऊंची डालियां और चट्टानों की दरारों में चमकती आंखें, यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि कोटा के जंगलों उल्लुओं की मौजूदगी का संकेत है। एक समय लोगों की नजरों से दूर रहने वाला आउल अब मुकुंदरा और शेरगढ़ के जंगलों में अच्छी संख्या में दिखाई देने लगे हैं। खास बात यह है कि अब चंबल सफारी करने वाले पर्यटकों को गरड़िया से गैपरनाथ तक चंबल की कराइयों में उल्लुओं के बच्चे भी नजर आ रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यहां का जंगल इन पक्षियों के लिए सुरक्षित घर बनता जा रहा है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, भैंसरोडगढ़ और शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के जंगलों में इन दिनों उल्लुओं की दुनिया आबाद हो रही है। कालीसिंध-गागरोन क्षेत्र से लेकर चंबल नदी की कराइयों तक इनकी दुनिया फल-फूल रही है। </p>
<p><strong>अब तक नहीं हुआ उल्लुओं का सर्वे</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, उल्लू शिकारी पक्षी होता है, ईको सिस्टम में इसकी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि, इनकी वास्तविक संख्या का आंकड़ा वन विभाग के पास भी नहीं है, क्योंकि अब तक इनका सर्वे नहीं करवाया गया। लेकिन, फोरेस्ट अधिकारी व वाइल्ड लाइफर द्वारा इनकी संख्या अच्छी मात्रा में बताई जाती है। मुकुंदरा की कोलीपुरा रेंज में मोटल वुड प्रजाति का ऑउल पाया जाता है, जो काफी रेयर होता है।</p>
<p><strong>मुकुंदरा में 6 प्रजाति के आउल</strong><br />बायोलॉजिस्ट उर्वशी शर्मा बताती हैं, कालीसिंध-गागरोन से चंबल की कराइयों तक मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में उल्लूओं की 6 प्रजाति पाई जाती है। जिनमें इंडियन इगल ओवल, स्पोट्रेड ओवल, ब्राउन फिश ओउल, डस्की इगल ओवल, इंडियन स्कूप ओठल, बान ओवल शामिल हैं। उल्लूओं की कोई भी प्रजाति कॉमन नहीं है, यह सभी संकटग्रस्त हैं। गागरोन, जवाहर सागर, चंबल घड़ियाल सेंचुरी, भैंसरोडगढ़ व शेरगढ़ की कराइयों में उल्लूओं की आबादी पनप रही है।  </p>
<p><strong>270 डिग्री तक घुमा सकता है गर्दन</strong><br />उल्लू अपनी गर्दन को लगभग 270 डिग्री तक घुमा सकता हैं। साथ ही इस पक्षी की रात में देखने की क्षमता अन्य पक्षियों की अपेक्षा कहीं ज्यादा होती है। साथ ही इनकी सुनने की शक्ति भी काफी तेज होती है। ईको सिस्टम में इनका अहम योगदान है। यह कीट, पतंगे, चूहे खाकर इंसानों को बीमारियों से बचाते हैं। चूहे खेतों में घुसकर फसले बर्बाद करते हैं, ऐसे में चूहों का शिकार करने से यह किसान मित्र भी कहलाते हैं।</p>
<p><strong>चोटिल ऑउल का रेस्क्यू कर करा रहे इलाज</strong><br />बायोलॉजिस्ट उर्वशी ने बताया कि ट्यूरिस्ट को चंबल सफारी कराने के दौरान नदी किनारे जंगल को वॉच करते हैं। कोटा से गरड़िया महादेव और गैपरनाथ तक ऑउल के बच्चे नजर आते हैं। कई बार उड़ने की कोशिश में वह चट्टानों पर गिरकर घायल हो जाते हैं। गत वर्ष करीब 4 बेबी ऑउल घायल अवस्था में मिले थे, जिनका नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में इलाज करवाया। ठीक होने के बाद वन्यजीव विभाग ने उसे उनके हैबीटाट में रिलीज कर किया। चंबल सफारी के दौरान उर्वशी अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक घायल उल्लुओं की जान बचा चुकी है।</p>
<p><strong>जन्म के डेढ़ माह बाद देख पाते हैं बेबी ऑउल</strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर बताते हैं, एक मेटिंग सीजन में मादा उल्लू करीब 15 अंडे देती है। जन्म के करीब डेढ़ माह बाद यह देख पाते हैं। जब उल्लू के बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता अपने बच्चों को खाना खिलाते हैं और उन्हें सीने से लगाकर गर्म रखते हैं। बच्चे करीब 1 साल तक माता-पिता के साथ रहते हैं।</p>
<p><strong>कोलीपुरा में दुर्लभ प्रजाति का मोटलवुड ऑउल</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, कोलीपुरा में दुर्लभ प्रजाति का मोटलवुड ओवल पाया जाता है। यह अपना घौंसला पेड़ों के अंदर हॉल करके बनाता है। मुकुंदरा के कोर एरिया कोलीपुरा के जंगलों में डायन का टोला व शिवकुडी इलाके में अच्छी संख्या में पाया जाता है। इसके अलावा अन्य ऑउल खण्हर बिल्डिंग, वीरान घरों में घौंसला बनाते हैं।</p>
<p><strong>रेडियो तरंगों से लगाता है शिकार का पता</strong><br />मुकुंदरा, भैंसरोडगढ़, शेरगढ़ में उल्लू अच्छी संख्या में आबाद हो रहे हैं। यह अपने शिकार का पता लगाने के लिए रेडियो तरंगे छोड़ता है, जो शिकार से टकराकर वापस आती है। इससे यह शिकार की वास्तिविक लॉकेशन को ट्रैस कर लेते हैं और एक ही निशाने में शिकार को दबोच लेते हैं। खास बात यह है, उल्लू के पंजे शिकार पकड़ने पर इंटरलॉक हो जाते हैं। इनकी उम्र 5 से 12 साल होती है। जब बच्चे अंडे से बाहर निकलते हैं तो वह गुलाबी रंग के होते हैं और एक माह तक अंधे रहते हैं। वह अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं। उल्लू के दांत नहीं होते हैं, इसलिए सांप की तरह शिकार को निगलते हैं। बच्चे एक साल तक मां-बाप के साथ रहते हैं और 2 से 3 साल की उम्र में परिवार से अलग हो जाते हैं। चंबल के इलाकों से कई उल्लू रेस्क्यू होकर आते हैं, जिनका इलाज करवाकर वापस उनके हैबीटाट में छोड़ देते हैं। यह शेड्यूल वन का एनिमल है, लेकिन अभी तक इसका सर्वे नहीं हुआ है। हालांकि, वर्तमान में इनका सर्वे किए जाने की जरूरत है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:45:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जमुनिया आईलैंड में आबाद हो रही जल मानुष की दुनिया, आसपास के इलाकों में भी बढ़ रहा इनका फैलाव</title>
                                    <description><![CDATA[चंबल के साफ पानी और प्राकृतिक माहौल में पनप रहा ऊदबिलाव का कुनबा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-world-of-the-%22water-man%22-takes-root-on-jamuniya-island/article-146936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी के बीच बसे शांत और खूबसूरत जमुनिया आईलैंड में इन दिनों प्रकृति की खास दुनिया फलफूल रही है। यहां ऊदबिलाव का परिवार तेजी से बढ़ रहा है। दुलर्भ प्राणियों की श्रेणी में शामिल जलमानूष जितना शातिर है, उतना ही दिलेर भी होता है। दो साल  पहले यहां केवल एक जोड़ा यहां पहुंचा था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर छह हो गई है। खास बात यह है कि इनमें एक मादा गर्भवती भी है, जिससे आने वाले समय में यह परिवार और बड़ा होने की उम्मीद है। यह चंबल नदी के स्वच्छ पानी और बेहतर प्राकृतिक वातावरण का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>नेचर प्रमोटर ए. एच. जैदी ने बताया कि वर्ष 2024 में ऊदबिलाव का एक जोड़ा कोटा बैराज की डाउनस्ट्रीम से निकलकर जमुनिया आईलैंड पहुंचा था। कुछ समय तक यह जोड़ा चंबल रिवर फ्रंट के आसपास भी देखा गया था। पिछले दो वर्षों में इस जोड़े का परिवार बढ़कर अब छह सदस्यों का हो गया है और यह आईलैंड की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहा है।उन्होंने बताया कि मानस गांव के पास बहने वाली चंद्रलोही नदी चंबल में आकर मिलती है। हाल ही में इस संगम क्षेत्र में भी ऊदबिलाव दिखाई दिए हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि अब इनका फैलाव आसपास के इलाकों में भी बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>बूंदी और कोटा के बीच बसा जमुनिया आईलैंड</strong><br />बूंदी जिले के केशवरायपाटन के नोताडा और कोटा के बालापुरा के बीच चंबल नदी में कई छोटे-बड़े आईलैंड बने हुए हैं। हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक विविधता के कारण यह क्षेत्र वन्यजीवों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जमुनिया आईलैंड भी इन्हीं में से एक है, जहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है।</p>
<p><strong>प्रकृति प्रेमियों के लिए उम्मीद की नई कहानी</strong><br />जमुनिया आईलैंड पर ऊदबिलाव के बढ़ते परिवार ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्राकृतिक स्थलों को संरक्षण मिले तो वन्यजीव अपने आप लौट आते हैं। चंबल की लहरों के बीच खेलते जलमानुस अब इस आईलैंड की नई पहचान बनते जा रहे हैं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। </p>
<p><strong>परिवार का कभी नहीं छोड़ते साथ</strong><br />ऊदबिलाव जितना बहादुर है, उतना ही परिवारवादी भी है। यह समूह में परिवार बनाकर रहते हैं। कोटा में जवाहर सागर की चंबल में परिवार सहित रहते हैं। इनकी फैमिली में 6 से 8 सदस्यों की संख्या होती है। जब इनमें से कोई एक सदस्य खो जाता है तो उसे आवाज देकर ढूंढते हैं। यह विश्वास और एकता के सूत्र से बंधे होते हैं। जब परिवार के किसी सदस्य पर कोई आंच आती है तो उससे निपटने के लिए पूरा परिवार एकजुट हो जाता है और मदद के लिए सभी एक साथ दौड़ पड़ते हैं।<br /><strong>- जुनेद शेख, वन्यजीव प्रेमी </strong></p>
<p><strong>इसीलिए जल मानुष कहलाते हैं </strong><br />ऊदबिलाव मनुष्य की तरह पैरों पर खड़ा हो जाता है, तब इसका शरीर इंसान जैसा दिखता है। जल व थल दोनों में रहता है इसलिए इसे जल मानुष कहते हैं। यह चिकनी खाल तथा बालों वाला जानवर है। इसकी औसत लम्बाई करीब 15 से 17 इंच होती है। शिकार एवं इसके आवास की कमी के कारण अब यह जीव संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में आ गया है। पूरी दुनिया में 13 तरह के ऊदबिलाव पाए जाते हैं। इसमें से तीन तरह के भारत में मिलते हैं। हमारे देश में कभी इनकी गिनती नहीं हुई है इसलिए इनका सही आंकड़े नहीं मिलते।<br /><strong>- ओजस्वी माहेश्वरी, स्कॉलर </strong></p>
<p><strong>कोटा का शुभंकर किया घोषित</strong><br /> राजस्थान सरकार ने 2016 में ऊदबिलाव को कोटा जिले का शुभंकर घोषित किया है ताकि लोगों को इस प्रजाति को संरक्षित करने के लिए जागरूक किया जा सके। यह मीठे पानी के जलीय आवास में पाया जाता है, जो मछलियों के शिकार करने का शौकीन होता है।आईयूसीएन की सूची में इसे खतरों के प्रति संवदेनशील प्रजाति माना है।<br /><strong>- ए.एच. जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 15:11:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चम्बल के तीर बिना नीर- सूखे कण्ठ से यात्रा की मजबूरी </title>
                                    <description><![CDATA[संजय नगर रोडवेज बस स्टैण्ड यात्री सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/without-water-on-the-banks-of-the-chambal-river--the-compulsion-to-travel-through-a-dry-gorge/article-143928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैण्ड जिसे शहर का आधुनिक बस अड्डा कहा जाता है, आज यात्री सुविधाओं के नाम पर बदहाली की मिसाल बन चुका है। 22.76 लाख लीज किराया देने वाला यह परिसर सुविधाओं के नाम पर धेला तक खर्च नहीं करता । वर्ष 2013 से संचालित यह बस स्टैण्ड अब मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यात्रियों का कहना है कि आधुनिक और भव्य भवन होने के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल व्यवस्था की है, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कोटा शहर जिसे देशभर में 24 घन्टे पेयजल की आपूर्ति के लिये जाना जाता है उस शहर में रोडवेज के उपयोगकतार्ओं को यहां के दयनीय हालात पर गुस्सा आना लाजमी है।</p>
<p><strong>नल टूटे, कनेक्शन कटे, प्याऊ अलमारी बन गये</strong><br />बस स्टैण्ड भवन पोर्च एरिया में बनी प्याऊ में एक भी नल नहीं है। इस प्याऊ के तो कनेक्शन तक हटा दिए गए हैं। जिस स्थान पर यात्रियों को पानी पीना चाहिए, वहां सफाई कर्मचारियों ने झाड़ू और अन्य सामान रख दिया है।प्रबंधन का तर्क है कि इस प्याऊ में पानी चालू करने पर सेनेटरी लाइन चौक हो जाती है, जिससे बरामदे में पानी भर जाता है। हालांकि प्रबंधन मरम्मत का आश्वासन दे रहा है, लेकिन फिलहाल यात्रियों को तत्काल राहत का कोई रास्ता नहीं निकाला जा रहा है।</p>
<p><strong>दो अन्य प्याऊ भी लेकिन पानी सिर्फ एक नल से</strong><br />मंदिर के पास स्थित एक अन्य प्याऊ पर 80 लीटर का वाटर कूलर रखा हुआ है, लेकिन उसका बिजली व पानी का कनेक्शन कटा हुआ है। दूसरा,  बस स्टैण्ड के प्रवेश द्वार के पास एक संस्था द्वारा संचालित प्याऊ ही किसी तरह चालू है। यहां भी दो में से एक नल टूटा हुआ है, जबकि दूसरे में भी टंकियां चोक होने से पानी का प्रेशर नहीं है । पूरे बस स्टैण्ड की जलापूर्ति इसी एक नल पर निर्भर है। गर्मी के मौसम में जब यात्रियों की संख्या और पानी की जरूरत बढ़ जाती है, तब यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी ।</p>
<p><strong>पीना तो दूर हाथ धोने तक के लिए खरीदना पड़ रहा पानी</strong><br />प्रतिदिन कईं यात्री इस बस स्टैण्ड से आवागमन करते हैं। पानी की सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है ।निगम की तरफ से हाथ धोने तक का पानी नहीं मुहैय्या नहीं कराया जा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। कई यात्रियों ने बताया कि बस का इंतजार करते समय प्यास लगने पर उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।</p>
<p><strong>सबसे बड़े अधिकारी का कार्यालय फिर भी यह हाल</strong><br />सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी बस स्टैण्ड परिसर में रोडवेज के वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय भी स्थित है। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दशार्ती है। यही नहीं कोटा आगार का पूरा मेनेजमेंन्ट स्टाफ इसी परिसर में ड्यूटी बजाता है। ऐसे में भी यहां रोड़वेज की छवि को खराब करने वाली यह दुर्दशा पर किसी का ध्यान ना जाना प्रशासनिक अधिकारियों की असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है</p>
<p><strong>राजस्व और छवि पर भी असर</strong><br />सुविधाओं की लगातार कमी के कारण बस स्टैण्ड का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। खराब अनुभव के चलते कई यात्री निजी वाहनों या अन्य साधनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी कारण यहां से यात्री भार लगातार कम होता जा रहा है। वर्तमान में ड़िपो की कुल आय का मात्र 2 प्रतिशत से भी कम यहां से प्राप्त होती है।</p>
<p>मै स्वयं संजय नगर रहता हूँ लेकिन इस बस स्टैण्ड़ पर सुविधाओं के नाम कोई जिम्मेदार नहीं इसलिये कोई यात्री परिवार के साथ आना  पसन्द नहीं करता, टेक्सी लेकर नयापुरा जाना बेहतर है।<br /><strong>- गोविन्द सिंह गौड़, निवासी संजय नगर</strong></p>
<p>हमारी संस्था द्वारा एक पक्की प्याऊ लगायी गयी है, जिसे जन सुविधा की दृष्टि से हम देख्रेख भी करवा रहे है, इसे 2 दिनों साफ सफाई करवाकर चालू करवा देंगे ।<br /><strong>- महावीर नागर , कोषाघ्यक्ष श्री धरणीधर जनसेवा संस्थान</strong></p>
<p>मेरी जानकारी में आया है इसके लिये एक टीम बनवाकर शीघ्र ही निस्तारण करवा दिया जायेगा।<br /><strong>- अजय कुमार मीणा मुख्य प्रबंधक कोटा आगार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 15:01:44 +0530</pubDate>
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                <title>चंबल नदी उफान पर: पालीघाट पर 22 सेमी बढ़ा जलस्तर, झरेल बालाजी पुलिया पर आधा फीट पानी, राहगीर जान जोखिम में डालकर कर रहे आवागमन।</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी का जलस्तर 22 सेंटीमीटर बढ़ गया है। झरेल बालाजी पुलिया डूबने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/water-level-rises-by-22-cm-at-palighat-due-to/article-138911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/sawai-madhopur.png" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। कस्बे से करीब 8 किलोमीटर दूर पालीघाट पर चंबल नदी का जलस्तर बीते दो दिनों में 22 सेंटीमीटर तक बढ़ गया है। इसके चलते झरेल बालाजी की निचले स्तर की पुलिया पूरी तरह पानी में डूब गई है और पुलिया के ऊपर से करीब आधा फीट से अधिक पानी की चादर बह रही है। इसके बावजूद राहगीर, श्रद्धालु और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस पुलिया को पार कर रहे हैं।</p>
<p>बुधवार देर रात चंबल नदी में 10 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा, जबकि गुरुवार को इसमें 12 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण कोटा बैराज से करीब 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाना तथा कोटा की नहरों का अतिरिक्त पानी चंबल नदी में आना बताया जा रहा है। हालांकि 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन नहरों से आ रहे पानी के कारण चंबल का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p>झरेल बालाजी पुलिया के क्षतिग्रस्त और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद खंडार प्रशासन एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस की ओर से न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई है और न ही राहगीरों को रोकने के लिए मौके पर कोई तैनाती की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खंडार प्रशासन इस गंभीर स्थिति में भी मूकदर्शक बना हुआ है।</p>
<p>पुलिया डूबने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं झरेल बालाजी के दर्शनार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में जलस्तर और बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>इनका कहना...पहले चंबल नदी का जलस्तर करीब 6 मीटर था, जो नहरों का पानी आने से बढ़कर 6.22 मीटर हो गया है। यानी 22 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 17:50:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंबल के किनारे बसी आबादी को नहीं मिल रहा पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[अवैध कनेक्शन से मोटर  जलने  और केबल चोरी की घटनाएं आम हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/population-living-along-the-chambal-river-banks-not-receiving-drinking-water/article-138584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px13.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोड़गढ़। राणा प्रताप सागर बांध से पूरे प्रदेश में जलापूर्ति होने के बावजूद रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में कई वर्षां से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणें का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और अवैध नल कनेक्शन के चलते पीने के पानी की आपूर्ति बूंद-बूंद तक सीमित हो गई है। जबकि निजी कनेक्शन के माध्यम से पानी की बबार्दी जारी है। ग्रामवासियों ने बताया कि नगर पालिका में विलय के बाद से उन्हें पानी के लिए लगातार टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अवैध कनेक्शन से मोटर पर अत्यधिक लोड पड़ता है। जिसके बार-बार मोटर जल जाती है और केबल चोरी की घटनाएं आम बात हो गई है। इसके चलते न केवल पीने का पानी प्रभावित हुआ है,बल्कि ग्रामीणों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ गया है।     </p>
<p><strong>मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग लगने से बढी परेशानी </strong><br />ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि  मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग और चोरी की घटनाएं हो रही है, बावजूद इसके पुलिस और नगर पालिका द्वारा कोई ठेोस कार्रवाई नहीं की जा रही। तहसीलदार और नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेक्स्ट संदेश के माध्यम से शिकायतें तो प्राप्त हुई, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया। </p>
<p>कई स्थानों पर कर्मचारी अपने घर पर पानी का उपयोग खेती के लिए कर रहे है, जबकि निजी वाहन धोने के लिए भी पानी का उपयोग किया जा रहा है। <br /><strong>-अंजलि, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे घरों में तो पीने का पानी नहीं आ रहा, वहीं नगर पालिका द्वारा नियुक्त कर्मचारी चार महीने से भुगतान न मिलने के कारण समय पर नहीं खोलते।                                                             <br /><strong>-ममता, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे यहां जिस मोटर से पानी आता है वहां की कभी केबल चोरी हो जाती है तो कभी केबल में आग लगा दी जाती है।  पूर्व में ना तो किसी सचिव ने और वर्तमान में किसी कर्मचारी या नगर पालिका ने केबल चोरी की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की।  जिसे चोरों के हौसले बुलंद है। <br /><strong>-मयंक, ग्रामवासी। </strong></p>
<p>समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाएगा। जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कदम उठाए जा रहे है। <br /><strong>- विवेक गरासिया, तहसीलदार। </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:00:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चंबल नदी का जलस्तर बढ़ा, कोटा बैराज के दो गेट खोले :  7466 क्यूसेक पानी छोड़ा, आरपीएस व जवाहर सागर से हो रहा बिजली उत्पादन </title>
                                    <description><![CDATA[मानसून के रफ्तार पकड़ते ही चंबल के बांधों में बरसाती पानी की आवक होने लगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-level-of-chambal-river-increased-two-gates-of-kota/article-118162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(3)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून के रफ्तार पकड़ते ही चंबल के बांधों में बरसाती पानी की आवक होने लगी है। कोटा जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को सुबह से ही बरसात दौर जारी रहने से चंबल नदी के कैचमेंट में पानी की अच्छी आवक होने लगी है। जिससे चंबल के बांधों का जलस्तर बढ़ने लगा है। राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध पर विद्युत उत्पादन कर 6758 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।</p>
<p>इसके चलते शनिवार को कोटा बैराज के दो गेट खोलकर 7466 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलसंसाधन विभाग के अनुसार राणाप्रताप सागर और जवाहरसागर से बिजली उत्पादन कर लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में कोटा बैराज के दो गेट सुबह सात बजे करीब 6-6 फीट खोले गए हैं। इस साल गांधीसागर को छोड़कर चंबल के तीनों बांध लबालब भरे हुए हैं। इसके चलते बरसाती पानी की आवक होते ही निकासी की जा रही है। कोटा बैराज के पूर्व में भी गेट खोलकर पानी की निकासी की गई थी।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Jun 2025 13:06:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यटकों को तरसती डीजे व रेस्टोरेंट बोट, शहर के बीच ही नहीं आ रहे पर्यटक</title>
                                    <description><![CDATA[औद्योगिक से शिक्षा और अब पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर में एक तरफ तो नए-नए पर्यटन स्थलों का विकास व निर्माण कर विदेशी पर्यटकों के कोटा आने की संभावना जताई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dj-and-restaurant-boats-yearning-for-tourists/article-112310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। औद्योगिक से शिक्षा और अब पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर में एक तरफ तो नए-नए पर्यटन स्थलों का विकास व निर्माण कर विदेशी पर्यटकों के कोटा आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ शहर के बीच किशोर सागर तालाब में चल रही डीजे व रेस्टोरेंट बोट ही पर्यटकों को तरस रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत जहां कोटा शहर को स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा था। वह तो पूरा नहीं हो सका। वहीं अब शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने का दावा किया जा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने व पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां नए-नए पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे है। चम्बल नदी के किनारे रिवर फ्रंट का निर्माण किया गया। आईएल फैक्ट्री परिसर में ऑक्सीजोन सिटी पार्क का निर्माण किया गया। सेवन वंडर्स पार्क बनाया गया। गणेश उद्यान समेत कई अन्य विकास कार्य भी करवाए गए। लेकिन उसके बाद भी यहां जितने विदेशी व बाहरी पर्यटक आने चाहिए थे वह नहीं आ पाए। </p>
<p><strong>शहर के बीच ही नहीं आ रहे पर्यटक</strong><br />पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से शहर के बीच किशोर सागर तालाब में डीजे साउंड वाली और रेस्टोरेंट वाली बड़ी बोट शुरु की गई थी। इन बोट का संचालन सेवन वंडर्स पार्क से किया जा रहा है। लेकिन हालत यह है कि शुरुआत में तो इन बोट में पर्यटक आए। लेकिन वर्तमान में दोनों ही बोट पर्यटकों को तरस रही है। दोनों बोट की जितनी क्षमता है उससे काफी कम पर्यटक इनमें सैर कर रहे हैं। पहले जहां शाम से रात तक तालाब में बोट का डीजे साउंड दूर से ही सुनाई देता था उसकी आवाज भी कम हो गई है। </p>
<p><strong>250 व 350 रुपए है किराया</strong><br />केडीए की ओर से इन बोट का संचालन संवेदक के माध्यम से किया जा रहा है। हालांकि तालाब में बारहद्वारी की तरफ से भी छोटी मोटर बोट चल रही है। उनमें तो फिर भी लोग सैर कर रहे हैं। जबकि दोनों बड़ी बोट में कम लोग जा रहे है। जबकि डीजे साउंड सिस्टम वाली बोट का किराया प्रति व्यक्ति प्रति चक्कर 250 रुपए और रेस्टोरेंट बोट का किराया 350 रुपए है। रेस्टोरेंट बोट में फास्ट फूड और कैफे टेरिया की सुविधा है। </p>
<p><strong>40 से 60 मिनट का चक्कर</strong><br />बोट का संचालन करने वाले बनवारी ने बताया कि दोनों बोट की बैठक क्षमता 20 से 30 की है। एक बोट का चक्कर 40 मिनट व दूसरी का 60 मिनट का है। निर्धारित किराए में पर्यटकों को तालाब का चक्कर लगवाया जाता है। इन बोट में लोग डीजे साउंड होने से पार्टी का आयोजन कर सकते हैं। लेकिन हालत यह है कि इन बोट में शुरुआत से ही पर्यटकों की संख्या कम रही है। अभी गर्मी के सीजन में शाम 6 से 7 बजे बाद लोग आते हैं। जबकि दिनभर खाली बैठे रहते हैं। </p>
<p><strong>सेवन वंडर्स में ही कम आ रहे पर्यटक</strong><br />संवेदक का कहना है कि बोट का संचालन सेवन वंडर्स पार्क से किया जा रहा है।  बोटिंग का समय तो सुबह 10 से रात 10 बजे तक का है। अभी तो गर्मी अधिक है इस कारण से शाम तक तो कोई नहीं आता। शाम के बाद भी गिनती के ही लोग बोट में बैठ रहे है। इसका कारण सेवन वंडर्स में ही लोग बहुत कम आ रहे है। उनका आरोप है कि यहां पिछले कई दिन से लाइटें बंद रहने से अंधेरा छाया हुआ है। व्यवस्थाएं सही नहीं होने व पार्क पर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं होने से जब पार्क में ही लोग कम आ रहे हैं तो बोट में लोगों की संख्या कम रहना स्वाभाविक है। पर्यटकों व लोगों के कम आने से  बोट के गिनती के ही चक्कर लग रहे हैं। संवेदक का कहना है कि शहर के बीच केएसटी ऐसी जगह हैं जहां यदि अधिकारी ध्यानं दे तो  पर्यटक अधिक आ सकते हैं। साथ ही टूरिस्ट गाइड को भी इस तरफ पर्यटकों को लाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>गर्मी की छुट्टियों में आएंगे लोग</strong><br />इधर कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि केडीए ने तालाब में बोटिंग की सुविधा शुरु की है। बोट का संचालन संवेदक के माध्यम से किया जा रहा है। यह सुविधा शहर के बीच है। लेकिन हो सकता है अभी गर्मी अधिक होने व स्कूलों में अवकाश नहीं होने से पर्यटक व स्थानीय लोगों की संख्या कम हो। लेकिन कुछ समय बाद स्कूलों में ग्रीष्म कालीन अवकाश शुरु होने वाले हैं। उसके बाद स्थानीय और बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।</p>
<p><strong>किराया अधिक होने से हिम्मत नहीं होती</strong><br />तालाब में बोटिंग की सुविधा तो अच्छी है। लेकिन उनका किराया बहुत अधिक है। परिवार के दो से तीन सदस्य भी यदि एक बार जाएंगे तो एक से डेढ़ हजार रुपए तो किराए में ही लग जाएंगे। कोटा जैसे शहर में इतना अधिक किराया देना हर किसी के लिए संभव नहीं है। छोटी बोट का किराया कम होने से लोग उनमें ही जाते हैं। बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह आकर्षण हो सकता है। लेकिन स्थानीय लोगों के लिए महंगा सौदा है। <br /><strong>- शंकर सुमन, नयापुरा</strong></p>
<p><strong>पार्क में हो पर्याप्त रोशनी</strong><br />तालाब में बोटिंग की सुविधा तो अच्छी है। लेकिन इसके लिए पहले सेवन वंडर्स जाना पड़ता है। वहां दस रुपए का टिकट लेकर जाने के बाद अंदर घूमेंगे तभी तो बोट में बैठ पाएंगे। लेकिन सेवन वंडर्स पार्क में ही शाम के समय अंधेरा रहता है। ऐसे में वहां परिवार व बच्चों के साथ जाने में ही डर लगता है। पार्क में रोशनी की पर्याप्त सुविधा हो तो बोट में भी लोग बैठेंगे।<br /><strong>- सीमा माखीजा, सिंधी कॉलोनी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 17:19:33 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - नए सिरे से होंगे टैंडर, कोटा बैराज के बदलेंगे गेट</title>
                                    <description><![CDATA[बैराज की दायीं और बायीं जर्जर नहरों की भी मरम्मत कराई जाएगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---tenders-will-be-issued-afresh--gates-of-kota-barrage-will-be-changed/article-111718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर स्थित तीनों बांधों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट करीब एक साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इन बांधों की मरम्मत के लिए संवेदक कंपनियां साहस नहीं जुटा पा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि तीन बार टेंडर करने के बावजूद कोई भी कंपनी उसमें भाग लेने ही नहीं पहुंची। अब बांधों के लिए नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। इसके तहत कोटा बैराज के सभी पुराने गेटों को बदला जाएगा। वहीं टेल क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए बैराज के दोनों नहरों की मरम्मत के कार्य भी प्राथमिकता से करवाए जाएंगे। मंगलवार को कोटा दौरे पर आए जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार बांधों की मरम्मत के लिए गम्भीर है और जल्द ही इसके लिए नए सिरे प्रयास किया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था जर्जर बांधों का मुद्दा     </strong><br />चंबल वैली प्रोजेक्ट के तहत राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर (जेएस) बांध और कोटा बैराज के जीर्णोद्धार का काम होना है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत राशि भी स्वीकृत हो गई है, लेकिन अभी बांधों की मरम्मत नहीं हो पाई है। यहां पर 236.23 करोड़ रुपए में रिनोवेशन का काम करवाया जाना प्रस्तावित किया है। इसके लिए तीन बार टैंडर आमंत्रित किए गए, लेकिन फर्मो के रुचि नहीं लेने से मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि बांध में पानी काफी भरा रहता है और इस दौरान ही गेट और अन्य उपकरणों की मेंटेनेंस होनी है, जो हर कोई नहीं कर सकता है। अब जल संसाधन मंत्री ने नए सिरे से टैंडर प्रक्रिया करने की बात कही है, इससे अब बूढे बांधों को नवजीवन मिलने की उम्मीद जगी है।</p>
<p><strong>बैराज हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण </strong><br />जल संसाधन मंत्री रावत ने बताया कि कोटा बैराज हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इससे हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए सुविधा उपलब्ध होती है। इसलिए सरकार कोटा बैराज सहित अन्य बांधों की मरम्मत कराने के लिए गम्भीर है। पूर्व में बांधों की मरम्मत के लिए टैंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन किसी कारणवश वह पूरे नहीं हो पाए हैं। अब नए सिरे टैंडर निकाले जाएंगे और कोटा बैराज के पुराने गेटों को बदला जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के टेल तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए बैराज की दायीं और बायीं नहर की मरम्मत कराई जाएगी। जहां पर गे्रेविटी से पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां पर लिफ्ट के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 13:27:54 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - चंबल के बांधों को मिलेगी संजीवनी, डीपीआर हुई तैयार </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा बैराज सहित तीनों बांधों की बजट जारी होने के बाद भी मरम्मत नहीं होने के मामले में दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---chambal-dams-will-get-a-new-lease-of-life--dpr-is-ready/article-106694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कोटा बैराज समेत चंबल नदी परबने तीनों बांधों की मरम्मत का मामला उठाया। धारीवाल ने सवाल पूछा कि राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध एवं कोटा बैराज की मरमत के लिए क्या डीपीआर तैयार हो चुकी है? और वर्कआॅर्डर भी जारी किया जा चुका है? इसकी जानकारी दी जाए। सरकार ने इसके जवाब में कहा कि चंबल नदी पर स्थित राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर एवं कोटा बैराज की मरम्मत के लिए विश्व बैंक एवं एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) द्वारा वित्त पोषित बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के तहत केन्द्रीय जल आयोग के विशेषज्ञों एवं बांध सुरक्षा समीक्षा पैनल (डीएसआरपी) के सुझावों के अनुरूप प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग टैपलेट (पीएसटी) अर्थात डीपीआर तैयार की गई है। अभी कार्यों के लिए वर्कआर्डर जारी नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>केन्द्रीय जल आयोग ने सौंपी निरीक्षण की रिपोर्ट </strong><br />विधानसभा में सरकार की ओर से बताया गया कि राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर एवं कोटा बैराज के कार्य विशिष्ट तकनीकी श्रेणी में आते हैं। इन कार्यों को तकनीकी विशेषज्ञों की राय के अनुसार कराया जाना प्रस्तावित है। इसी क्रम में फरवरी माह के दौरान केन्द्रीय जल आयोग के विशषेज्ञों की टीम  ने दोनों बांधों एवं बैराज का तकनीकी परीक्षण किया था। इसकी रिपोर्ट 21 फरवरी को प्राप्त हो चुकी है। इस रिपोर्ट के अनुसार इस जटिल कार्य को चरणबद्ध रूप से करवाया जाना प्रस्तावित है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर की थी बांधों की दुर्दशा</strong><br />कोटा बैराज सहित तीनों बांधों की बजट जारी होने के बाद भी मरम्मत नहीं होने के मामले में दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि चंबल नदी पर स्थित तीन बांधों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट काफी समय पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इन बांधों की मरम्मत के लिए संवेदक कंपनियां तैयार नहीं हो रही है। तीनों बांध करीब 60 से 65 साल पुराने बने हुए हैं। हाइड्रो मैकेनिकल वर्क में पुराने गेट व स्लूज गेट बदलने हैं। पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि बांध में पानी काफी भरा रहता है और इस दौरान ही गेट और अन्य उपकरणों की मेंटेनेंस होनी है, जो हर कोई नहीं कर सकता है। इस सम्बंण में केन्द्रीय जल आयोग की टीम ने तकनीकी निरीक्षण किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 15:59:27 +0530</pubDate>
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                <title>9 फरवरी को ही पता लग गया था चंबल में पड़ी लाश, फिर भी नहीं करवाया पोस्टमार्टम</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम उठाने को  कार्यवाही करनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। वन अधिकारियों की लापरवाही से वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/on-february-9--it-was-known-that-the-dead-body-was-lying-in-chambal--still-the-post-mortem-was-not-done/article-105501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)55.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधीन राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में गत दिनों संदिग्ध परिस्थितियों में मिली अजगर और मगरमच्छ की लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वन विभाग को पहले दिन से ही पता लग गया था कि चंबल नदी में अजगर और मगरमच्छ की लाश पड़ी है। इसके बावजूद शवों को कब्जे में लेकर प्रोटोकॉल के तहत निस्तारण करवाने के बजाए आंखें मूंदी  रखी। वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारों की घोर लापरवाही उजागर हुई तो अफसरों की नींद खुली और शवों को ढूंढने के लिए सर्च किया। लेकिन, तब तक फिशिंग जाल में फंसे अजगर और  संदिग्ध मगरमच्छ का शव गायब हो चुके थे।  नतीजन, शेड्यूल-वन के एनिमल्स के शव के साथ उनकी मौत के कारण भी रहस्य बन गए।  दरअसल, दैनिक नवज्योति के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि वन विभाग को 9 फरवरी को ही चंबल घड़ियाल सेंचुरी में दोनों एनीमल के  शव पड़े होने की जानकारी मिल चुकी थी। इसके बावजूद मामले को छिपाते रहे और जनता को गुमराह किया।</p>
<p><strong>पता होने के बाद भी मामलाछिपाना संदेहप्रद :</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चंबल घड़िया  सेंचुरी में गत 9 फरवरी को ही विभाग को भंवरकुंज के पास फिशिंग नेट में फंसी अजगर की लाश और भंवरकुंज के पास संदिग्ध हालात मिली 12 फीट लंबे मगरमच्छ की डेड बॉड़ी पड़ी होने की सबूत के साथ जानकारी मिल गई थी। इसके बावजूद उनके शवों को कब्जे में ना लेना, मौका पंचनामा न बनवाना, पोस्टमार्टम न करवाना सहित गंभीर मामले को छिपाकर वन उच्चाधिकारियों और जनता गुमराह करना वन कर्मियों व अफसरों की कार्यशैली को सवालों के घेरे में लाता है। साथ ही मंशा पर संदेह पैदा करता है। </p>
<p><strong>एफआईआर दर्ज नहीं करना घोर लापरवाही :</strong><br />मामला उजागर होने के बाद भी एफआईआर दर्ज  नहीं करना घोर लापरवाही दर्शाता है। जबकि, प्रोटोकॉल के अनुसार, वन अधिकारियों को शेड्यूल वन के एनिमल के शव मिलने पर प्रकरण दर्ज कर मौका पंचनामा बनाना था। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल जांच के लिए लैब भिजवाने थे। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम उठाने को  कार्यवाही करनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। वन अधिकारियों की लापरवाही से वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। </p>
<p><strong>प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन, 18 दिन से शव  लापता :</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञ नागार्जुन बिंदू कहते हैं, जानकारी होने के बावजूद विभाग द्वारा छिपाया जाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।  शेड्यूल वन के एनिमल  की लाश गायब है। डेड बॉडी गायब हुई या करवा दी गई।  इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाकर पर्दाफाश करना चाहिए। हालांकि, फिशिंग नेट में फंसी अजगर की लाश से जाहिर होता है कि घड़ियाल सेंचुरी में अवैध मत्सत्याखेट करने वालों का गिरोह सक्रिय है। जिससे  चंबल में बसी बेजुबानों की दुनिया खतरे में है। </p>
<p><strong>पोस्टमार्टम होता तो मौत के रहस्यों से उठता पर्दा :</strong><br />चंबल घड़ियाल सेंचुरी में मृत मिले वन्यजीवों की डेड़बॉडी मिलना बेहद जरूरी है। ताकि, पोस्टमार्टम में मौत के सटीक कारणों का पता लग सके। पीएम नहीं होने से कई तरह के सवाल जहन में उठते हैं, जिसमें पानी में जहर, प्रदूषण का स्तर, जानवरों में फैली बीमारी सहित अन्य शामिल है। समय पर कारणों का पता लगने से अन्य जलीय जीवों की जान बचाई जा सके। उच्चाधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>-बाबूलाल जाजू, पर्यावरणविद् एवं प्रदेशाध्यक्ष पीपुल्स फॉर एनिमल सोसायटी </strong></p>
<p><strong>हर दिन मर रहे मगरमच्छ,रिकॉर्ड में नहीं ले रहा विभाग :</strong><br />चंबल सेंचुरी में इनलीगल फिशिंग करने वालों का समूह पूर्णरूप से सक्रिय है। ऐसे में जाल में फंसने से आए दिन मगरमच्छ सहित अन्य वन्यजीवों की मौत होती है। लेकिन, मुकुंदरा प्रशासन उनको रिकॉर्ड में नहीं लेता। यही वजह है विभाग के पास हर माह वन्यजीवों की मौत का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जिसका खामियाजा, वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर   पॉलिसी नहीं बन पाने के रूप में भुगतना पड़ता है। मुकुंदरा उपवन संरक्षक की इससे बड़ी लापरवाही क्या होगी कि 9 फरवरी को ही मामले की जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों की लचरता से बेजूबानों की जान खतरे में पड़ गई है। उच्चाधिकारियों को मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- तेपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट</strong></p>
<p><strong>गंभीर अपराध पर सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू ने साधी चुप्पी, जवाब से बचती रहीं :</strong><br />शेड्यूल वन एनीमल के शवों का गायब होना तथा जानकारी होने के बावजूद प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन किए जाने के मामले में मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) शिखा मेहरा ने चुप्पी साध ली है। मामले में उनका पक्ष जानने के लिए नवज्योति ने फोन किए लेकिन उन्होंने रिसिव नहीं किए। इसके बाद उन्हें मैसेज किए, जिसे पढ़कर भी जवाब नहीं दिया। वन्यजीवों की सुरक्षा का दायित्व होने के बावजूद गंभीर मामले को नजरअंदाज करना समझ से परे है।</p>
<p> मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, संभागीय वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:49:14 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रामीणों ने मटकियां फोड़ निकाला गुस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[एक माह से पानी के लिए भटकने का लगाया आरोप।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/villagers-broke-their-pots-to-express-their-anger/article-95576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोडगढ़। चंबल नदी के किनारे होते हुए भी रावतभाटा के ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में पानी को तरसते महिलाओं सहित क्षेत्रवासियों ने पंचायत कार्यालय पर गुरुवार को मटकियां फोड़ कर आक्रोश जताया। इस दौरान विवाद होने पर क्षेत्रवासियों और सचिव में नोंक झोंक हो गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर पानी की समस्या का जल्द ही निराकरण नहीं किया गया तो स्थानिय विधायक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 1 महीने गुजर जाने के बावजूद भी ग्राम पंचायत बाड़ोलिया के निवासियों को चंबल नदी के किनारे होते हुए भी पानी को तरसना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो गए की ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत कार्यालय बाड़ोलिया पर  सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर पानी की मटकियां फोड़ी गई। ग्रामीणों का सचिव के साथ भी तीखी नोंक झोंक हुई। पंचायत कर्मचारी नाहर सिंह पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए क्षेत्रवासियों में रोष जाहिर किया।  </p>
<p><strong>एक महीने से ग्रामीण पानी के लिए भटक रहे</strong><br />इस मौके पर ग्रामीण शिक्षक मधुसूदन शर्मा ने बताया कि हमारा परिवार दिवाली से ही लगभग एक महीने अंतराल से पानी के लिए तरस रहे है। निरंतर अतिरिक्त जिला कलेक्टर बीडीओ सभी संबंधित अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद भी अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ और नहीं पानी मिला है और ना ही अधिकारी गंभीरता से इस विषय पर कुछ भी बोलने को तैयार।</p>
<p>सपना शर्मा ने बताया कि परिवार में छोटे बच्चे तथा दो व्यक्ति दिव्यांग है ऐसे में पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता है लेकिन कोई सुनवाई करने वाला ही प्रशासन में नहीं लगभग 1 महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p>दिव्यांग रचना शर्मा ने बताया कि घर में छोटे बच्चे हैं वह भी स्कूल जाते हैं मैं और मेरे पति दोनों ही दिव्यांग है। ऐसे में पानी के लिए निरंतर तरसना पड़ता है हम जैसे लोगों की सुनवाई भी यदि सरकार नहीं कर सकती तो क्या लाभ है ऐसी सरकार का।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />पानी के लिए पहले भी पाइपलाइन डाली गई थी वो चोरी हो गई और बाद में डाली हुई पाइपलाइन पर किसी ने आग लगा दी। इसलिए सभी ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।<br /><strong>- भीमराज माली, सचिव ग्राम पंचायत बाड़ोलिया</strong></p>
<p>पानी की समस्या की जानकारी मिली है। जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- ममता भील, सरपंच  ग्राम पंचायत बाड़ोलिया </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 15:37:04 +0530</pubDate>
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                <title>‘चिड़ी’ का इंतजार कर रही 190 करोड़ की फाइल</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त विभाग से संशोधित प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-file-of-rs-190-crore-is-waiting-for--chidi/article-95392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/2574rtrer-(1).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर बने बांध उम्रदराज होते जा रहे हैं। ऐसे में इन बांधों को मरम्मत की दरकार है। नदी पर 60 के दशक में कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध का निर्माण किया गया था। अब इनकी उम्र लगातार बढ़ती जा रही है। कोटा बैराज तो बुधवार को अपना 64वां जन्मदिन मनाएगा। इतनी उम्र होने के बाद भी बांध की सेहत पूरी तरह से सुधर नहीं पाई है। बांधों की मरम्मत के लिए 190 करोड़ का बजट जारी हो चुका है और इसके अनुमोदन की फाइल वर्तमान में जयपुर में वित्त विभाग के पास भेज रखी है। वहां से अभी तक फाइल को हरी झंडी नहीं मिलने से बांधों की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। </p>
<p><strong>लागत बढ़ने पर भेजा था संशोधित प्रस्ताव</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार चंबल के तीनों बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध के लिए जीर्णोद्धार के लिए 183 करोड़ का प्रोजेक्ट विश्व बैंक ने मंजूर किया था। इसके बाद 12 सितम्बर 2023 को तकनीकी स्वीकृति जारी कर तीनों बांधों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी, लेकिन किसी भी कंपनी और ठेकेदार ने निविदा नहीं भरी। दूसरी बार 10 अक्टूबर 2023 और तीसरी बार 20 जनवरी 2024 को निविदा आमंत्रित की गई, लेकिल लागत बढ़ने से कोई कम्पनी नहीं आई। इसके बाद विभाग की ओर 190 करोड़ का संशोधित प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे वर्ल्ड मंजूर कर दिया और इसे राज्य सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा है, लेकिन वहां से अभी तक अनुमोदन नहीं हुआ है। </p>
<p><strong>ऐसे तो कम हो जाएगी बांधों की लाइफ</strong><br />चम्बल नदी पर तीनों ही बांध 1960 के दशक बने हुए हैं। बांध की मशीनों और हाइड्रों उपकरणों की उम्र 40 साल होती है। जबकि बांध के सिविल वर्क की उम्र 100 साल मानाी जाती है। अब लगभग 64 वर्ष गुजरने वाले हैं। ऐसे में यदि इनका समय पर जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो बांध की लाइफ और कम हो जाएगी। स्थिति यह है कि राणाप्रताप सागर बांध के स्लूज गेट 37 सालों से नहीं खुले हैं। गेटों से रिसाव हो रहा है। जवाहर सागर बांध का एक गेट अटका हुआ है। कोटा बैराज के गेटों की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके बाद जीर्णोद्धार का कार्य बार-बार टल रहा है।</p>
<p><strong>रोबोटिक जांच में बताई थी मररम्मत की जरूरत </strong><br />केन्द्रीय जल आयोग व जल संसाधन विभाग ने तीनों बांधों के सिविल स्ट्रक्चर की रोबोटिक जांच करवाई थी। रोबोट के जरिए पानी के अंदर सिविल स्ट्रक्टर की पूरी वीडियोग्राफी व अंडर वाटर सर्वे कप्यूराइड जांच करवाई गई थी। इसकी पूरी रिपोर्ट सॉप्टवेयर के जरिए तैयार की गई थी, जिसमें स्ट्रक्चर के क्रेक व नुकसान के बारे में भी बताया गया था। जल आयोग के एक्सपर्ट की टीम ने बांधों की सुरक्षा को लेकर अध्ययन किया था, जिसमें बांधों की मरम्मत अत्यंत जरूरी बताई थी। इसके बाद विभाग की ओर से बांधों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए थे। </p>
<p><strong>स्काडा सिस्टम से जुड़ेंगे बैराज के गेट</strong><br />कोटा बैराज के 1980 से बंद पड़े स्लूज गेट बदले जाएंगे। इसके अलावा बैराज के सभी 19 गेटों की हालत ठीक है, लेकिन लीकेज हो रहा है। इन गेटों की पूरी मेट्रोलॉजी बदली जाएगी। इन गेटों पर मेटल चढ़ाया जाएगा, रबर सील बदली जाएगी, जिससे यह मजबूत हो जाएंगे। डेम की गैंट्री क्रेन को बदला जाएगा। कच्चे एरिया में मिट्टी की पिचिंग, पुलिया व रैलिंग की मरमत होगी। डाउन स्ट्रीम रोक स्टेबलाइजेशन, स्लीप वे ब्रिज, कन्ट्रोल रूम व चबल रेस्ट हाउस की मरमत व सुदृढ़ीकरण का कार्य होगा। वहीं चंबल के अन्य बांध राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांध के भी नए गेट लगाए जाएंगे।</p>
<p>चंबल के बांधों की मरम्मत के लिए 190 करोड़ का बजट जारी हो चुका है और इसके अनुमोदन की फाइल वर्तमान में जयपुर में वित्त विभाग के पास भेज रखी है। वहां से अनुमोदन होने के बाद टैंडर प्रक्रिया होगी। इसके बाद मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जलसंसाधन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 16:14:31 +0530</pubDate>
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