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                <title>two years - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में मकानों के ऊपर व पास से निकल रही हैं हाइटेंशन लाइनें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conditions-remain-unchanged-despite-accidents/article-159102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  <strong>केस एक:</strong> अनंतपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरड़ा बस्ती में एक दिन पहले हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से फेले करेंट से एक महिला की मौत हो गई और करीब 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। वहीं हादसे में दो गायों की भी मौत हो गई।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित काली बस्ती में मार्च 2024 में धार्मिक यात्रा के दौरान झंडा हाईटेंशन लाइन से छू जाने के कारण लगे करेंट से करीब एक दर्जन लोग झुलस गए थे। हादसे में तीन लोगों की मौत भी हो गई थी।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा काली बस्ती में ही जुलाई 2025 में छत पर कपड़े सुखाते समय करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं महिला को बचाने के प्रयास में उनके पति भी करंट लगने से झुुलस गए थे।</p>
<p>ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। उन घटनाओं व हादसों को बताने के लिए जो हाइटेंशन लाइनों के कारण हुए हैं। शहर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं। पिछले करीब दो साल में ही आधा दर्जन से अधिक मामले हाइटेंशन लाइनों से करंट लगने के हो चुके हैं। जिनमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक भी हालात नहीं सुधरे हैं। अभी भी शहर के इलाके हो या आस-पास के ग्रामीण इलाके। वहां मकानों के ऊपर व पास से 33 केबी व 11 केबी की हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। जिनसे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में है। उसके बाद भी न तो ये लाइनें शिफ्ट हो रही हैं और न ही लोग वहां से हट रहे हैं। नतीजा हजारों लोगों के सिर पर रोजाना जान का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह है हाइटेंशन लाइनें</strong><br />शहर के इलाके हो या ग्रामीण क्षेत्र के हाइटेंशन लाइनें हर जगह पर है। फिर चाहे वह अनंतपुरा स्थित बरड़ा बस्ती हो या शिवपुरा क्षेत्र। दादाबाड़ी का वक्फ नगर हो या कुन्हाड़ी का नांता क्षेत्र। इतना ही नहीं डीसीएम क्षेत्र के प्रेम नगर व गोविंद नगर या काली बस्ती। रेलवे कॉलोनी, भीमगंजमंडी, नयापुरा, पाटनपोल समेत शहर के सभी क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। इनमें से अधिकतर जगह पर ये लाइनें मकानों के ऊपर से व मकानों के नजदीक से गुजर रही हैं।</p>
<p><strong>बरसात में अधिक खतरा</strong><br />हाइटेंशन लाइन से हर समय खतरा है। इन लाइटों में इतना अधिक करंट होता है कि वह करीब 3 से साढ़े तीन फीट से कम की दूरी पर लोगों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जिन घरों के ऊपर व पास से ये लाइनें गुजर रही हैं उनके लिए बरसात में खतरा अधिक है। बरसात के समय ऐसी जगह पर करंट फेलने व करंट लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने दिए थे लाइन शिफ्ट करने के निर्देश</strong><br />करीब दो साल पहले सकतपुरा की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइन से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत व एक दर्जन लोगों के झुलसने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने यहां से हाइटेंशन लाइनें शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। लोगों का कहना है कि अभी तक भी वहां से लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। ऐसा एक ही जगह पर नहीं कई जगह पर है लेकिन लाइनें वहीं के वहीं है।</p>
<p><strong>खतरनाक लाइनें हों शिफ्ट</strong><br />लोगों का कहना है कि हाइटेंशन लाइनों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसे में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुन्हाड़ी निवासी मोहन सिंह सोलंकी का कहना है कि नदी पार क्षेत्र की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइनों से कई बार हादसे हो चुके हैं उसके बाद भी लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। जबकि चाहे मकान बाद में बने हों लेकिन हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना बिजली विभाग का काम है। शिवपुरा निवासी महेश कुमार नागर का कहना है कि हाइटेंशन लाइनें शहर से दूर व आबादी क्षेत्र से नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि कई लोगों ने मकान बाद में बनाए जिससे लाइनें उनके मकान के पास से निकल रही है। लेकिन मकान बनने के बाद जब लोग वहां रहने लगे हैं तो उन लाइनों को शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएं। जिससे लोगों की जान को खतरा नहीं हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोगों को लाइट की सुविधा चाहिए तो इसके लिए जीएसएस से ट्रांसफार्मर तक लाइट हाइटेंशन के माध्यम से ही आती है। बिना हाइटेंशन के लाइट की सुविधा निर्बाध रूप से मिलना मुश्किल है। लेकिन हाइटेंशन लाइनें पहले डली हुई है। लोगों ने मकान बाद में बनाए हैं। जिससे वे लाइनों के नजदीक पहुंचे है। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती में अवैध खनन के कारण इंसुलेटर टूटने से हादसा हुआ है। हाइटेंशन लाइनों से एक निर्धारित मानक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को नोटिस व चेतावनी दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी जहां अधिक लोगों के जानमाल को नुकसान का खतरा रहता है। वहां से अन्य स्थानों पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट की जा सकती है। लेकिन उसका आधा खर्चा लोगों को वहन करना होता है। साथ ही लाइन के साथ ही खम्बे शिफ्ट करने की जगह भी होनी चाहिए। पूर्व में कई जगह पर ऐसा किया भी गया है।<br /><strong>- शिवचरण जांगिड़, अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:29:55 +0530</pubDate>
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                <title>रिकवरी के दो साल बाद भी पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना महामारी का दंश इतना भयावह है कि इससे लोग अभी उभर नहीं पाए है। कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी अस्पताल में भर्ती हुए 50 फीसदी लोगों में कम से कम एक लक्षण अभी मौजूद है। सबसे ज्यादा लोग थकान, सांस फूलने, और नींद नहीं आने की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corona-is-not-giving-up-even-after-two-years-of-recovery/article-9939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/recovery-ke-do-saal-baad-corona.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोरोना महामारी का दंश इतना भयावह है कि इससे लोग अभी उभर नहीं पाए है। कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी अस्पताल में भर्ती हुए 50 फीसदी लोगों में कम से कम एक लक्षण अभी मौजूद है। कोरोना महामारी ने आम आदमी के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। इससे मरीजों के जीवन का स्तर पहले की तुलना में काफी खराब हो जाता है। <br /><br />कोटा के एमबीएस अस्पताल, न्यू मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेद अस्पताल में दो साल पहले कोरोना से ठीक हुए मरीज कोरोना के किसी एक लक्षण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा लोग थकान, सांस फूलने, और नींद नहीं आने की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। मौसमी बीमारियों और पोस्ट कोविड के कोंबो लोगों समझ ही नहीं आ रहा है कि उन्हें मौसमी बीमारी परेशान कर रही है या पोस्ट कोविड के लक्षण । अस्पताल में रोज 50 से 60 मरीज कोरोना से जुडी पुराने लक्षण की शिकायत लेकर पहुंच ही रहा है।<br /><br /><strong>कोरोना से रिकवर हुए मरीजों में ये लक्षण मौजूद</strong> <br />डॉ. जगदीश सोनी ने बताया कि पोस्ट कोविड का इलाज लेने के बाद भी कई लोगों में कोरोना एक ना एक लक्षण अभी दिखाई दे रहा है। अस्पताल में रोज मरीज कोविड के लक्षण वाली शिकायतें लेकर आ रहे हैं। कोविड में लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में थकान, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में दर्द और नींद से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं। इन्हें लॉन्ग कोविड के लक्षणों के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मतलब, भले ही शरीर से वायरस निकल गया हो, पर उसके लक्षण खत्म नहीं होते। ये लक्षण कुछ हफ्तों, महीनों या सालों तक भी बने रह सकते हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद रिकवर हुए कोरोना मरीजों की एक्सरसाइज करने की क्षमता, मेंटल हेल्थ, आॅर्गन फंक्शनिंग और जीवन स्तर बुरी तरह प्रभावित होते हैं। <br /><br /><strong>मांसपेशियों में कमजोरी , हरारत, सबसे कॉमन लक्षण</strong><br />कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी मरीजों की सेहत अच्छी न हो सकी। एमबीएस अस्पताल में कोरोना के कोई कोई शिकायत लेकर मरीज अभी आ रहे है। शरीर में हरारत और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण कोरोना से ठीक होने के 6 महीने में 52 प्रतिशत से गिरकर 30 प्रतिशत पर आ गए थे। लेकिन बाद में इनकी संख्या में फिर से इजाफा होने लगा है। पिछले दो साल में  गंभीर संक्रमण हो चाहे न हो, रिकवरी के बाद 80 फीसदी लोग अपने काम पर वापस लौट गए है। लेकिन  कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी मरीजों की सेहत अभी अच्छी नहीं हो सकी है। जहां 20 फीसदी लोगों की मांसपेशियां अब भी कमजोर हैं, वहीं 30 फीसदी लोग नींद की परेशानी से जूझ रहे हैं। कई लोगों को जोड़ों में दर्द, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और सिर दर्द जैसी समस्याएं अभी बनी हुई है। अस्पताल में ऐसी समस्याए लेकर मरीज आ रहे है। <br /><br />कोरोना के दो साल बाद भी  रिकवर हुए अधिकांश मरीज मांसपेशियों में दर्द, डिप्रेशन, नींद नहीं आना, स्वाद नहीं आना,शरीर में हरारत जैसी शिकायते लेकर अस्पताल में आ रहे है। कोरोना बीमारी के ठीक होने के बाद भी शरीर में कुछ लक्षण मौजूद रहते ही जो परेशानी देते है। वैक्सीन की दोनों डोज और बूस्टर डोज लगाने से यह परेशानियां कम हो जाती है। दूसरा लोगों अपनी आहार विहार और दिनचर्या में कुछ बदलाव करने से भी इन परेशानियों से निजात मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से शरीर स्वस्थ्य रहता है। <br /><strong>-डॉ. अभिमन्यु शर्मा,  टीकारण व जांच प्रभारी कोटा </strong><br /><br /><strong>रिकवरी के बाद भी नजर आ रहे लक्षण</strong><br />वैज्ञानिकों ने कुछ मरीजों की  सेहत का आकलन 6 महीने, 1 साल और 2 साल के अंतराल में किया। स्टडी में कई तरह के टेस्ट्स शामिल किए गए, जैसे- 6 मिनट वॉकिंग, कोरोना लक्षणों की जांच, मेंटल हेल्थ टेस्ट, काम से जुड़े सवाल आदि। नतीजों के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के 6 महीने बाद 68 प्रतिशत लोगों में लॉन्ग कोविड का कम से कम एक लक्षण पाया गया। वहीं दो साल बाद 50 फीसदी लोगों में एक लक्षण पाया गया।<br /><strong>- डॉ. ओपी मीणा, जनरल फिजिशियन </strong><br /><br /><strong>लंबे समय तक कोविड रहने से बढ़ रहा अवसाद</strong> <br />लंबे समय तक कोरोना संक्रमण रहने से  मेंटल हेल्थ में  10 -15  लोगों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षण आ रहे हैं। मेंटल हेल्थ की बात करें तो 35 फीसदी लोगों को सिर दर्द और 20 फीसदी लोगों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षण आ रहे हैं। लॉन्ग कोविड के ज्यादातर मरीजों को मोबिलिटी और एक्टिविटी से जुड़ी परेशानियां भी होती हैं। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि लॉन्ग कोविड के खतरे को कम करने के लिए इन लक्षणों पर और ज्यादा रिसर्च की जा रही है। <br /><strong>- डॉ. अशोक मूंदडा, एचओडी, एमबीएस अस्पताल </strong><br /><br /><strong>असाध्य रोगों के लिए लोग पंचकर्म का ले रहे सहारा</strong> <br />कोटा संभाग में कोरोना संक्रमण के बाद से ही आयुर्वेद के पंचकर्म पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। कोरोना को तीनों लहर में शहर के 69786  लोग संक्रमित हुए।  जिसमें से  68973 रिकवर हुए। इनमें से ठीक होने के बाद भी 50 फीसदी की माइग्रेन, बदन दर्द, आंखों में पानी, कमजोरी जैसी समस्याएं आने लगी। बीते दो साल में ऐसे 21 हजार  मरीजों ने पंचकर्म का सहारा लिया तो इनमें से 90 फीसदी की समस्याएं पूरी तरह खत्म हो गई। अकेल बूंदी जिले में पंचकर्म ओटी में 20 हजार मरीज पंचकर्म से ठीक हुए।  इस कारण कोटा, बूंदी, बारां में आयुर्वेद अस्पतालों में मरीजों की संख्या 50 फीसदी तक बढ़ गई।  पिछले दो सालों में करीब 10 हजार से अधिक मरीज पंचकर्म करावा चुके है। पोस्ट को कोविड सबसे ज्यादा लोगों ने पंचकर्म का सहारा लिया। वर्तमान में अस्पताल में प्रतिदिन 8 से 10 मरीज पोस्ट कोविड की बिमारियों की समस्या लेकर आ रहे है। उनका पंचकर्म से इलाज किया जा रहा है। <br /><strong>-डॉ.अंजना शर्मा, उप अधीक्षक,  कोटा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 16:04:31 +0530</pubDate>
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                <title>दो साल बाद सावों की धूम के चलते बाजारों में लौटी रौनक </title>
                                    <description><![CDATA[ ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो वर्ष से अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर लॉकडाउन के चलते विवाह नहीं हो सके थे। दो सालों की तुलना में इस बार शादी ब्याह में छूट के चलते बाजार गुलजार हुए। टेंट, रेडीमेड कपड़ों का व्यापार, ज्वेलर्स, बर्तन जैसे बिजनेस में इस साल में अब तक 2 करोड़ का कारोबार हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-two-years--due-to-the-pomp-of-savo--the-market-returned-to-the/article-9425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/19.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर के बाजारों में कोरोना महामारी के चलते लगे लॉक डाउन के बाद से ही बाजारों में खामोशी छाई हुई थी जिसके चलते व्यापारियों में निराशा छाई हुई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो वर्ष से अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर लॉकडाउन के चलते विवाह नहीं हो सके थे। साथ ही बाजार बंद होने से भी व्यापारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था। दो सालों की तुलना में इस बार शादी ब्याह में छूट के चलते बाजार गुलजार हुए। टेंट, रेडीमेड कपड़ों का व्यापार, ज्वेलर्स, बर्तन जैसे बिजनेस में इस साल में अब तक 2 करोड़ का कारोबार हुआ है। बाजार गुलजार होने से व्यापारियों में उत्साह का माहौल है।<br /><br /> ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष  शादी विवाह के सावे है। साथ ही किसानों की फसलें भी बढ़िया हुई है जहां सरसों की फसल की पैदावार बढ़िया होने के साथ ही भाव भी अच्छे मिल रहे हैं जिससे किसानों का मनोबल भी बढ़ा है लेकिन लहसुन के भाव और पैदावार कम होने के कारण मिलाजुला असर देखने को मिला। अब तक किसान खेतों में अपनी फसलों को तैयार करने के लिए लगे हुए थे इसके चलते बाजारों में खामोशी छाई हुई थी लेकिन सावो के अवसर को देखते हुए कस्बे सहित क्षेत्र में सैकड़ों शादियां हो चुके हैं और कई शादियां होनी बाकी है जिसके चलते बाजार में पिछले कुछ दिनों से अच्छी खासी रौनक छाई हुई है जिससे व्यापारियों की बांछें खिल गई है। दीपावली पर्व के बाद से ही व्यापारी बाजार में खरीदारी नहीं होने से खामोश बैठे हुए थे लेकिन अबूझ सावे की रौनक को देखते हुए खरीदारी बढ़ने लगी है। <br /><br /> पंडित विमल आचार्य  एवं  संदीप आचार्य ने बताया कि  ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया के अबूझ सावे  में शादियों की धूम धाम देखने को मिली क्योंकि अक्षय तृतीया को ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा पर्वत माना जाता है साथ ही अक्षय तृतीया के 1 दिन पूर्व 2 मई को भी इस वर्ष शादी विवाह के लिए बहुत अच्छा योग होने के कारण 2 मई के भी अत्यधिक शादियों के सावे थे। शादी विवाह की धूम देखी गई जिससे ग्रामीण लोग शादियों की खरीदारी करने में लग गए हैं लेकिन अब सावों के खुलने एवं अक्षय तृतीया का अबूझ सावा खत्म होने के बाद भी बाजारों में खरीदारी बढ़ गई है। इसी के तहत बाजारों में रौनक छाई रही।  कस्बे के मुख्य बाजार में किराना की दुकानें, रेडीमेड कपड़ों के व्यापार, बर्तन की दुकान, आभूषणों,टेंट और डकोरेशन की दुकानों पर भी रौनक दिखाई दी। <br /><br /><strong>रेडीमेड कपड़ों की बढ़ी डिमांड</strong><br />रेडीमेड व्यापारी अमन खंडेलवाल, उमेश शर्मा,बंटी ऋषि अश्वनी नामा का कहना है कि युवाओं में रेडीमेड कपड़ों के प्रति अधिक रुझान देखने को मिल रहा है पिछले 2 वर्षों से व्यापार कोरोना का हाल के चलते ठप पड़ा हुआ था इस वर्ष रेडीमेड व्यापारियों की अच्छी चांदी हुई है। कस्बे में करीब 40 लाख रुपए तक का कारोबार हुआ है। आगामी समय में शादी विवाह के मुर्हूत होने से बाजार में अच्छा व्यापार होने की उम्मीद है। <br /><br /><strong>मैरिज गार्डन, बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज</strong><br />इस वर्ष कोरोना महामारी का प्रभाव नहीं होने के कारण शादियों की धूम के चलते कस्बे में मैरिज गार्डन बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज रही। सावा होने के चलते मैरिज गार्डन कहीं माह पूर्व ही बुक हो चुके है। ऐसे में कई विवाह समारोह करने वाले अभिभावकों को शादी के लिए जगह मिलना भी मुश्किल हो रहा है। यही हाल है बैंड बाजा की भी है क्योंकि दो और तीन के अधिक सावे होने से बैंड बाजे की बुकिंग पूर्व में ही हो चुकी है। बस संचालक जय प्रकाश शर्मा,अब्दुल कयूम, हमीद अंसारी का कहना है कि सावा होने के कारण मार्च माह में ही बसों की बुकिंग पूर्ण हो चुकी है जिन लोगों ने आनन-फानन में शादी की तारीख तय की है ऐसे लोगों को बसे तक नहीं मिल पा रही है। मैरिज गार्डन संचालक रामदयाल नामा रामस्वरूप नामा का कहना है कि इस बार सावे खुलने के कारण अच्छी बुकिंग आ रही है पिछले 2 वर्षों से कोरोना के चलते हैं मैरिज गार्डन व्यवसाय का धंधा चौपट हो गया था। इस वर्ष सावो की धूमधाम होने के कारण अच्छा व्यवसाय हुआ। शादी-विवाह के सीजन में इस वर्ष करीब 3 लाख का कारोबार हुआ है।<br /><br /><strong>बाजारों में देखने को मिल रही है ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खरीददारों की भीड़</strong><br />कस्बे के बाजार में अब शादी विवाह के सावो के चलते ग्रामीणों की भीड़ देखने को मिल रही है कस्बे के मुख्य बाजार में बर्तन की दुकानों, कपड़ों की दुकानों, रेडीमेड की दुकानों, किराने की दुकानों  एवं सरार्फा बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल दिखाई दिए हैं। शादियों के लिए सामान खरीदने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सुबह से ही आने लगे हैं जिससे बाजारों में चहल-पहल देखने को मिल रही है। बर्तन व्यवसायी राजेंद्र शर्मा, रामस्वरूप नामा, पंकज नागर का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष बर्तनों की रेट में करीब 30 से 40% का इजाफा होने इसका असर खरीदारी पर देखने को मिल रहा है क्योंकि पूर्व में शादी के सामान खरीदने के लिए ग्रामीणों का जो बजट हुआ करता था उसमें महंगाई के चलते इजाफा हो गया है 2020 एवं 2021 में कोरोना काल के चलते लॉक डाउन लग गया था जिससे व्यापार प्रभावित हुआ था इस वर्ष कस्बे के बर्तन व्यापारियों ने सावो के दौरान करीब 20 लाख रुपए का कारोबार किया है। कपड़ा व्यापारी इमामुद्दीन खान, सुरेश बडेरा का कहना है कि व्यापारियों के द्वारा शादियों के सीजन को देखते हुए खरीदारी पूर्ण कर ली गई है नई नई वैरायटी के कपड़े बाजार में आए। कपड़ा व्यापारियों ने 50 लाख का कारोबार शादी विवाह के सीजन में किया है। <br /><br /><strong>सामूहिक विवाह सम्मेलन की रहेगी धूम</strong><br />नगर सहित क्षेत्र में सामूहिक विवाह की धूम रहेगी। क्षेत्र में नागर समाज, मीणा समाज, मेघवाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन प्रस्तावित है। सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। भगवान गणपति को निमंत्रण दिया जा चुका है। आगामी दिनों में सामूहिक विवाह के आयोजनों से बाजार भी गुलजार रहेंगे।<br /><br /><strong>पिछले साल की अपेक्षा इस साल तीन माह में 350</strong> <br />शादियां हुईसुल्तानपुर पंडित संदीप आचार्य एवं पंडित मयंक गौतम ने बताया कि गत तीन साल में अप्रैल, मई जून में शादियों के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष में कोरोना महामारी नहीं चलने के कारण 150 शादियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जहां 2020 में अप्रैल, मई, जून में शादियों का सीजन आने से पहले ही कोरोना वायरस का प्रभाव चालू हो जाने से शादियां नहीं हो पाई थी। 2021 में शादियां तो शुरू हो गई थी करीब 200 शादियां हो पाई थी कि कोरोना का प्रभाव तेज होने के कारण सरकार ने शादियां नहीं करने की गाइडलाइन निकाल दी थी जिस पर शादियों पर रोक लग गया था। इस वर्ष सुल्तानपुर कस्बे सहित क्षेत्र में करीब 350 शादियां अब तक हुई है करीब ढाई सौ शादियां आगे भी होनी बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 16:56:35 +0530</pubDate>
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