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                <title>innovation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ईरान, तुर्की के बाद दुनिया में एक और ड्रोन सेना के सुपर पावर का जन्म: ड्रोन इंडस्ट्री में बहुत तेजी से पैर पसार रहा ताइवान, हर साल लाखों ड्रोन बनाने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी ड्रोन की तबाही के बीच ताइवान चुपचाप दुनिया का नया ड्रोन हब बन रहा है। चीन के खतरे को देखते हुए ताइपे ने 1 लाख से अधिक स्वदेशी ड्रोन यूक्रेन भेजे हैं। 2030 तक सालाना 1.80 लाख ड्रोन बनाने का लक्ष्य रखने वाला ताइवान अब अमेरिका और भारत जैसे देशों के लिए सप्लाई चेन का सुरक्षित विकल्प बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-iran-and-turkey-the-birth-of-another-drone-army/article-147162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trukey.png" alt=""></a><br /><p>ताइपे। ईरान और अमेरिका की जंग में विस्फोटक ड्रोन विमानों की ताकत देखकर दुनिया हैरान है। ईरान सऊदी अरब से लेकर कतर तक में तबाही मचा रहा है और सुपरपावर अमेरिका तथा इजरायली सेना इसे पूरी तरह से रोकने में नाकाम साबित हो रही है। अमेरिका के थॉड और पेट्रियट तथा इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी शाहेद ड्रोन के आगे फेल हो गए हैं। इससे खाड़ी देशों में भारी नुकसान पहुंचा है। दुनियाभर के सैन्य रणनीतिकार विस्फोटक ड्रोन को लेकर अब बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। इससे पहले यूक्रेन युद्ध में भी रूस ने ईरानी शाहेद ड्रोन की मदद से यूक्रेन में भारी तबाही मचाई थी। </p>
<p>वहीं, यूक्रेन तुर्की के बायरकतार सीरिज के ड्रोन पर भरोसा करता है। तुर्की एवं ईरान के बाद अब एक और देश है जो अगला ड्रोन सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस देश का नाम ताइवान है जिसे चीन अपना हिस्सा कहता है। दुनिया में ड्रोन सेना की बढ़ती मांग के बीच ताइवान बहुत चुपचाप तरीके से बहुत बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक की मदद से ड्रोन बना रहा है। यही नहीं ताइवान इन हमलावर ड्रोन को यूक्रेन को निर्यात कर रहा है जो रूस के साथ जंग लड़ रहा है। इससे अब ताइवान में यह ड्रोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से पैर पसार रही है। ताइवान में ड्रोन निर्माण को एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था लेकिन ताइपे ने पिछले एक साल में ही 1 लाख ड्रोन का यूक्रेन को निर्यात किया है। यह बिक्री पोलैंड और चेक रिपब्लिक की मदद से की गई है।</p>
<p>चीन की धमकियों का सामना कर रहे ताइवान के लिए हमलावर ड्रोन उसके अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भी बहुत ही जरूरी हैं। ताइवान ने ड्रोन बनाया है जो मध्यम ऊंचाई तक लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। इसके अलावा ताइवान ने Chien Hsiang कामीकाजी ड्रोन बनाया है जो ईरान के शाहेद की तरह से ही निगरानी करने, इलेक्ट्रानिक हमले और हाई वैल्यू टारगेट पर लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। ताइवान न केवल खुद से ड्रोन बना रहा है, बल्कि अमेरिका से भी ड्रोन खरीद रहा है। ताइवान का इरादा साल 2030 तक हर साल 1 लाख 80 हजार ड्रोन बनाने का है। ताइवान अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों को ड्रोन की सप्लाई कर रहा है जिसका नागरिक और सैन्य दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। </p>
<p><strong>चीन के हमले का खतरा</strong></p>
<p>असल में ताइवान उन देशों को विकल्प मुहैया करा रहा है जो चीनी उपकरणों से मुक्त ड्रोन चाहते हैं। यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे जापान, भारत, यूरोपीय देशों के लिए मददगार है जो अपने सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहते हैं। ताइवान पर चीन के हमले का खतरा मंडरा रहा है, इसी वजह से ताइपे बहुत तेजी से घरेलू ड्रोन उद्योग को खड़ा करना चाहता है। आज ताइवान में 260 कंपनियां ड्रोन के पूरे सिस्टम को खुद से बना रही हैं और एकीकृत कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:08:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच राजनाथ ​सिंह का बड़ा बयान: बोले-ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन' में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता के लिए MSMEs और स्टार्टअप्स को AI व रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर 'अदिति' और 'iDEX' चुनौतियों के नए संस्करण भी लॉन्च किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-west-asia-crisis-rajnath-singhs-big-statement-said/article-147099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने के मिशन मोड में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है। </p>
<p>राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गुरुवार को 'उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां' विषय पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार विजेताओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी रक्षा कंपनियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव तक चल रहे संघर्ष इस बात के प्रमाण हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और प्रतिरोधी ड्रोन प्रौद्योगिकियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल उत्पाद स्तर पर ही नहीं बल्कि कलपुर्जे के स्तर पर भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, ड्रोन के ढांचों से लेकर उसके सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरियों तक, सब कुछ भारत में ही निर्मित होना चाहिए। यह कोई आसान कार्य नहीं है। अधिकांश देशों में जहां ड्रोन बनाए जाते हैं, वहां अनेक महत्वपूर्ण कलपुर्जे वर्तमान में चीन से आयात किए जाते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण बड़े उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों और नवोन्मेषकों के योगदान पर निर्भर करता है, साथ ही सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया ताकि भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के 14वें संस्करण और आईडेक्स ढांचे के अंतर्गत 'अदिति चुनौतियों' के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से प्राप्त कुल 107 समस्या विवरण जारी किए गए, जिनमें 82 रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के अंतर्गत और 25 अदिति चुनौतियों के अंतर्गत शामिल हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से संबंधित 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों द्वारा डिजाइन-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इन चुनौतियों को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और विजेता नव-उद्यमों को मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाएँ तथा उनकी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित एकीकरण के अवसर प्रदान किए जाएँगे।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने आईडेक्स और अदिति को परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नव-उद्यमों, नवोन्मेषकों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रक्षा बलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 नव-उद्यम, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा व्यक्तिगत नवोन्मेषक रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियाँ शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रतिरूपों को लगभग 3853 करोड़ रुपये के मूल्य पर खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 2326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि नवाचार धीरे-धीरे ठोस उत्पादों और प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित हो रहा है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन है। उन्होंने इन उद्यमों और नव-उद्यमों से इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और समेकित करने का आह्वान किया ताकि संसाधनों और क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी और संयोगात्मक विनिर्माण जैसी प्रौद्योगिकियां वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप दे रही हैं, जबकि डिजिटल ट्विजन और उन्नत अनुकरण उपकरण नई संभावनाओं को खोल रहे हैं। डिजिटल ट्विजन का अर्थ वास्तविक प्रणाली का आभासी मॉडल तैयार करना है, जिससे जटिल प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ करने के लिए कई पहलें की हैं। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इन्हें इक्विटी, तरलता और व्यावसायिक समर्थन प्रदान करने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे ये अग्रणी उद्यम बन सकें। इसका उद्देश्य इनके विकास को तेज करना और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। पंजीकरण और पहचान को सरल बनाने के लिए उद्यम पोर्टल और उद्यम सहायक पोर्टल जैसे डिजिटल मंच शुरू किए गए हैं, ताकि छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि उद्यमिता की बढ़ती भावना को दर्शाती है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि नव-उद्यम अपने अनूठे विचारों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बन रहे हैं और कई अल्प समय में ही यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त कर रहे हैं। निकट भविष्य में और भी ऐसे उद्यम सामने आएँगे। इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों से नवाचार करने, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।</p>
<p>रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना तथा डिजाइन, विकास और निर्माण से लेकर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि 200 समस्या विवरण इन उद्यमों, उद्योगों, नव-उद्यमों और युवा नवोन्मेषकों को आधुनिक उत्पाद विकसित करने और अपने कौशल को बढ़ाने का अवसर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को सुधार वर्ष के रूप में मनाते हुए मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, गुणवत्ता प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाना शामिल है। रक्षा क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों का एक डिजिटल डाटाबेस 'सृजन दीप' भी बनाया गया है, जिसमें 40,000 से अधिक उद्योग सूचीबद्ध हैं, ताकि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिल सके।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग के पाँच प्रकाशनों का विमोचन भी किया, जिनका उद्देश्य नीतिगत पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करना और उद्योग हितधारकों के लिए व्यापार सुगमता सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्री ने एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, जिसमें 20 बड़ी रक्षा कंपनियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भागीदार, आपूर्तिकर्ता और नवोन्मेषक के रूप में शामिल करने के लिए अपने कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही 24 भारतीय और विदेशी कंपनियां उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों जैसे स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, संयोगात्मक विनिर्माण और स्मार्ट सामग्री का प्रदर्शन कर रही हैं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ क्रायोजेनिक इंजन सीई—20 का सफल परीक्षण किया, भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता वाले सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण कर अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास रचा है। नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम से लैस यह इंजन एलवीएम3 रॉकेट की पेलोड ले जाने की क्षमता को बढ़ाएगा। 165 सेकंड के इस परीक्षण ने भविष्य के भारी उपग्रह मिशनों के लिए भारत की शक्ति को और सुदृढ़ कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने क्रायोजेनिक इंजन सीई20 का 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सफल परीक्षण किया है। इसरो ने एक बयान में बताया कि क्रायोजेनिक इंजन सीई20 में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टमÓ(एनपीएस) और एक मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग करके 10 मार्च को समुद्र तल के स्तर पर सफल परीक्षण किया गया।</p>
<p>इससे पहले, एनपीएस का उपयोग करते हुए समुद्र-स्तर पर 19-टन थ्रस्ट क्षमता वाले परीक्षण किए जा रहे थे। सीई20 क्रायोजेनिक इंजन एलवीएम3 प्रक्षेपण वाहन के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है। इसरो एलवीएम3 की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ाने के लिए भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>इसरो ने बताया कि 165 सेकेंड के पूरे परीक्षण के दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा दोनों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप रहा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” का पोस्टर लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग द्वारा "एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026" का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को इसका पोस्टर जारी किया गया। 8 मार्च को संविधान क्लब में होने वाले इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। नामांकन हेतु ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/poster-launch-of-%E2%80%9Cexcellence-awards-2026%E2%80%9D-on-the-occasion-of/article-145407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajasthali.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थली एम्पोरियम, जयपुर के सहयोग से आयोजित किए जाने वाले प्रतिष्ठित “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” का पोस्टर गुरुवार को जारी किया गया।<br />इस अवसर पर राजस्थली एम्पोरियम की निदेशक माया ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य उन प्रेरणादायी महिलाओं को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट नेतृत्व, नवाचार और समर्पण के माध्यम से समाज में उल्लेखनीय योगदान दिया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में उद्योग एवं उद्यमिता, हैंडलूम एवं हस्तशिल्प, खेल, रक्षा एवं सार्वजनिक सेवा, स्टार्टअप एवं नवाचार तथा सोशल मीडिया एवं क्रिएटिव लीडरशिप जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” से सम्मानित किया जाएगा। श्रीमती माया ठाकुर ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन 8 मार्च 2026 को संविधान क्लब ऑफ राजस्थान, जयपुर में किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कैबिनेट मंत्री, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरकार उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं से अपील की कि वे इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए अपनी या अन्य योग्य महिलाओं की नामांकन प्रविष्टि अवश्य भेजें। नामांकन के लिए ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिलाओं की उपलब्धियों को मंच प्रदान करने और समाज में उनके योगदान को सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 18:17:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने बनाया मूंगफली के छिलकों से ग्राफीन: बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया, ऊर्जा उपकरणों के लिए मूल्यवान घटक</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने खोजी मूंगफली के छिलकों को ग्राफीन में बदलने की नई तकनीक। मात्र $1.3 प्रति किलो की लागत। बैटरी और सौर पैनलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला कार्बन बनाना। जैविक कचरे के निपटान में भी क्रांतिकारी होगी साबित। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australian-researchers-make-graphene-from-peanut-shells-which-can-change/article-144587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/grafeen.png" alt=""></a><br /><p>सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने मूंगफली के फेंके गए छिलकों को ग्राफीन में बदलने का एक तरीका विकसित किया है। ग्राफीन इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा उपकरणों के लिए एक मूल्यवान घटक है। ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इस विकास से सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स और उर्जा भंडारण के लिए नये रास्ते खुलेंगे। मूंगफली के छिलकों से बना ग्राफीन बैटरी, सौर पैनल, टच स्क्रीन, लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स और सुपर-फास्ट ट्रांजिस्टर के लिए उपयोग किया जा सकेगा।</p>
<p>शोध दल ने पाया कि लिग्निन की उपस्थिति के कारण मूंगफली के छिलकों को उच्च तापमान पर ग्राफीन में बदला जा सकता है। उल्लेखनीय है कि लिग्निन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पॉलिमर है, जिसमें प्रचुर मात्रा में कार्बन पाया जाता है। केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल एडवांस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस दो चरणों वाली विधि में छिलकों को लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है, फिर मिलीसेकंड के लिए लगभग 3,000 डिग्री पर उन्हें गर्म किया जाता है, जो रसायनों के बिना कार्बन परमाणुओं को एक परत वाले में पुनर्गठित कर देता है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने कहा, उनकी गणना बताती है कि इस पद्धति का उपयोग करके एक किलोग्राम ग्राफीन का उत्पादन केवल 1.3 अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा लागत पर किया जा सकता है, जबकि उत्सर्जन भी काफी घट जाता है और उत्पादन समय घटकर लगभग 10 मिनट रह जाता है। शोधकर्ता अगले तीन से चार वर्षों के भीतर बड़े पैमाने पर, टिकाऊ, वाणिज्यिक ग्राफीन निर्माण के लिए कॉफी के अवशेष या केले के छिलकों जैसे अन्य कार्बनिक कचरे का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं।</p>
<p>यूएनएसडब्ल्यू के स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग के अध्ययन के प्रमुख लेखक गुआन येओह ने कहा, हमने मूंगफली को एक परीक्षण मामले के रूप में उपयोग किया है, लेकिन इस प्रक्रिया का मुख्य घटक लिग्निन है, जो कई अलग-अलग पौधों में मौजूद होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 17:16:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी दो दिवसीय यात्रा पर इजरायल रवाना:  बोलें-दोनों देशों के संबंध और होंगे मजबूत, साझा विजन से भविष्य होगा खुशहाल </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार। यात्रा के दौरान वह नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय पीएम बनेंगे। विज्ञान, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर, दोनों देश एक साझा भविष्य और खुशहाल विजन की नींव रखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-leaves-on-two-day-visit-to-israel-says-relations/article-144516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी इजरायल यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे तथा साझा विजन से दोनों देशों का भविष्य खुशहाल होगा। पीएम मोदी ने बुधवार को इजरायल की दो दिन की यात्रा पर रवाना होने से पहले एक वक्तव्य में कहा कि वह अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत के लिए उत्सुक हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वह इजरायल के राष्ट्रपति से भी मिलेंगे, इजरायल की संसद को संबोधित करेंगे और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के साथ भी संवाद करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच एक मजबूत और कई तरह की रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के सालों में जबरदस्त बढ़ोतरी और तेजी देखी गई है। उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अपनी बातचीत का इंतजार कर रहा हूँ, जिसका मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि , जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार तथा निवेश के साथ ही लोगों के बीच संबंधों सहित अलग-अलग क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है। हम आपसी फ़ायदे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार शेयर करेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस दौरान इजरायल के राष्ट्रपति आइजौक हर्जोगा से भी मिलेंगे। उन्होंने कहा, मुझे इजरायली संसद, नेसेट को संबोधित करने वाले पहले प्रधानमंत्री का भी सम्मान मिलेगा, यह एक ऐसा मौका होगा जो हमारे दोनों देशों को जोडऩे वाले मजबूत संसदीय और लोकतांत्रिक संबंधों को श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि वह भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करने का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जो लंबे समय से भारत और इजरायल की खास दोस्ती को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनकी यात्रा से दोनों देशों के बीच के पक्के रिश्तों को और मजबूती मिलेगी, रणनीतिक साझेदारी के नए लक्ष्य तय होंगे और मजबूत तथा नवाचार पर आधारित खुशहाल भविष्य के लिए हमारे साझा विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:18:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी में भारत का बड़ा कदम, पैक्स सिलिका में हुआ शामिल, जानें कैसे और कहां होगा फायदा?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने इसे तकनीकी नेतृत्व और युवा पीढ़ी के सुनहरे भविष्य के लिए ऐतिहासिक निवेश बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-big-step-in-technology-and-economic-strategic-partnership-joining-pax/article-143892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pax-silica.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग की मौजदूगी में हस्ताक्षर किये गये।</p>
<p>भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हस्ताक्षर समारोह में पैक्स सिलिका में भारत के औपचारिक प्रवेश की घोषणा की। उन्होंने इसे एक निर्णायक कदम करार दिया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा। गोर ने हाल ही में संपन्न अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार प्रवाह और आयात शुल्क सूचियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतंत्रों की एक साथ मिलकर निर्माण करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>यह घोषणा भारत और अमेरिका के बीच गहरे होते रणनीतिक तालमेल को रेखांकित करती है, जो भारत को अगली पीढ़ी के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में, पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को साझा समृद्धि, तकनीकी नेतृत्व और लोकतांत्रिक सहयोग में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस.जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दृष्टिकोण के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट और विकसित हो रही सिलिकॉन आपूर्ति शृखंला साझेदारी को संभव बनाने का श्रेय भी उनके नेतृत्व को दिया।</p>
<p>अश्विनी वैष्णव ने जोर देते हुए कि भारत 28 वर्ष की औसत आयु के साथ दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। उन्होंने कहा, हम यहां केवल एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं, हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में भी भारत की औसत आयु 37 वर्ष होगी, जो तकनीक और नवाचार के दम पर दशकों तक निरंतर विकास और अवसरों को सुनिश्चित करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:10:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू चार्लटन एआई इम्पैक्ट समिट में होंगे शामिल, बोलें-इस समिट से भारत बनेगा दुनिया का नया 'AI पावरहाउस'? </title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई मंत्री डॉ. एंड्रयू चार्लटन भारत में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में भाग लेंगे। वह सुरक्षित एआई और 'ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक अनुसंधान कोष' की 20वीं वर्षगांठ पर द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australias-andrew-charlton-will-attend-the-ai-impact-summit-he/article-143471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/andrew-charlton.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के सहायक मंत्री (विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था) डॉ. एंड्रयू चार्लटन भारत में आयोजित हो रहे एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे, जहां वह सुरक्षित, समावेशी और सतत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करेंगे तथा निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एआई-प्रेरित विश्व में श्रमिकों की अहम भूमिका को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे।</p>
<p>सहायक मंत्री समिट के दौरान राष्ट्रीय हित में और ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लाभ के लिए एआई के उपयोग के प्रति ऑस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता को उजागर करेंगे। डॉ. चार्लटन एआई के बढ़ते उपयोग के बीच श्रमिकों की आवाज को सशक्त बनाने के महत्व पर भी अपनी बात रखेंगे और सतत एआई अवसंरचना तथा सुरक्षित एवं समावेशी नवाचार में निवेश के लिए ऑस्ट्रेलिया को एक पसंदीदा साझेदार के रूप में प्रस्तुत करेंगे। </p>
<p>उन्होंने अपनी यात्रा को लेकर कहा, यह समिट सतत एआई अवसंरचना तथा सुरक्षित और समावेशी एआई नवाचार के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की क्षेत्रीय नेतृत्वकारी छवि को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। मैं समावेशी एआई तैनाती को लेकर ऑस्ट्रेलिया के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं, ताकि इसके लाभ सभी तक पहुंचें और सामाजिक स्वीकृति के साथ लागू हों। ऑस्ट्रेलिया और भारत लंबे समय से व्यापार और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग की साझा प्रतिबद्धता रखते हैं। मैं ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक अनुसंधान कोष की 20वीं वर्षगांठ मनाने के लिए भी उत्सुक हूं। </p>
<p>एआई इम्पैक्ट समिट में राष्ट्रीय नेता, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, शैक्षणिक विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एआई नीति और शासन के भविष्य को आकार देने के लिए एकत्र होंगे। डॉ. चार्लटन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और भारत सहित कई देशों के समकक्षों से मुलाकात कर ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक और आर्थिक हितों के अनुरूप साझेदारियों को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p>वह प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ भी चर्चा करेंगे, ताकि राष्ट्रीय एआई योजना के अनुरूप ऑस्ट्रेलिया के एआई पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके। यह योजना एंथनी अल्बानीज की लेबर सरकार के एआई सुरक्षा संस्थान (एआईएसआई) के समर्थन से संचालित है और एआई सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। डॉ. चार्लटन की यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक अनुसंधान कोष (एआईएसआरएफ) की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है, जिसने वर्ष 2006 से दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक संयुक्त अनुसंधान को समर्थन दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 18:27:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया ने की अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने कावेरी निवास पर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-siddaramaiah-met-us-ambassador-sergio-gore-and-discussed/article-143533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/karnataka-cm.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु दौर पर आए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के साथ चर्चा की है। यह बैठक मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास कावेरी में आयोजित की गई, जहाँ दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने सहित आपसी हित के मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।</p>
<p>बातचीत के दौरान, मंत्री एम सी सुधाकर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह बातचीत भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते जुड़ाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसमें आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। </p>
<p>मुख्यमंत्री कार्यालय ने वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। इससे पहले  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद तेजस्वी सूर्या ने राजदूत का बेंगलुरु में स्वागत किया जहाँ दोनों के बीच अनौपचारिक बातचीत के दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर  चर्चा हुईं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:36:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का दावा, बोलें-एआई समिट के नतीजे प्रगतिशील, नवाचारी और अवसरों से भरपूर भविष्य का करेंगे निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में पांच दिवसीय 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का उद्घाटन किया। उन्होंने 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' थीम के साथ मानवता के कल्याण हेतु सुरक्षित तकनीक पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-claim-the-results-of-the-ai-summit-will/article-143330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार से यहां शुरू हो रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन 'ए आइ इम्पैक्ट समिट' में हिस्सा लेने वाले दुनिया भर के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उम्मीद जतायी है कि इस सम्मेलन के नतीजे के प्रगतिशील, नवाचारी और अवसरों से भरपूर भविष्य के निर्माण में सहायक होंगे ।</p>
<p>बीस फरवरी तक चलने वाले इस पांच दिन के सम्मेलन से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने सिलसिलेववार पोस्ट में कहा कि इस सम्मेलन की विषय वस्तु 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय', यानी सभी का कल्याण, सभी के लिए खुशी, मानव केन्द्रीत प्रगति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, आज से भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट होस्ट कर रहा है। मैं इस समिट के लिए दुनिया भर के लीडर्स, इंडस्ट्री के कैप्टन्स, इनोवेटर्स, पॉलिसीमेकर्स, रिसर्चर्स और टेक के शौकीनों का दिल से स्वागत करता हूं। समिट की थीम है सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, यानी सभी का कल्याण, सभी के लिए खुशी, जो ह्यूमन-सेंट्रिक प्रोग्रेस के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने के हमारे साझा कमिटमेंट को दिखाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, आज एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई क्षेत्रों को बदल रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट एआई के अलग-अलग पहलुओं, जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदारी से इस्तेमाल और भी बहुत कुछ पर वैश्चिक बातचीत को बेहतर बनाएगा। मुझे विश्वास है कि समिट के नतीजे एक ऐसे भविष्य को बनाने में मदद करेंगे जो प्रोग्रेसिव, इनोवेटिव और मौकों पर आधारित हो।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, भारत के 1.4 अरब लोगों की बदौलत, हमारा देश एआई बदलाव में सबसे आगे है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर एक वाइब्रेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम और कटिंग-एज रिसर्च तक, एआई में हमारी तरक्की एम्बिशन और जिम्मेदारी दोनों को दिखाती है।</p>
<p>इससे पहले उन्होंने एक और पोस्ट में कहा, यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:41:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>केंद्र सरकार ने दी 10,000 करोड़ रूपए के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी, उद्यम पूंजी की सुविधा बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी दी। यह कोष डीप-टेक और नवाचार-आधारित विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/central-government-approves-rs-10000-crore-startup-india-fund-20/article-143202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(17).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने देश में बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए 10 हजार करोड़ रु. के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी प्रदान की है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप इकाइयों के लिए उद्यम पूंजी कोष को अधिक सुलभ बनाना है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सूचना प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना भारत के स्टार्टअप सफर के अगले चरण को तेज करने के लिए तैयार की गई है। </p>
<p>वर्ष 2016 में शुरू की गयी स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत शुरू किये गये इस कोष के बारे में सरकार ने कहा है, इस कोष के गठन का उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू पूंजी को आकर्षित करना, वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाना और देशभर में नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसे देश में नवाचारों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार किया गया है। यह डीप टेक और तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में ऐसे नवाचारों को उद्यम पूंजी सहाता करने को प्राथमिकता देगा जिन्हें दीर्घकालिक और धैर्यपूर्ण पूंजी की आवश्यकता होती है।</p>
<p>देश में स्टार्टअप वातावरण का अभूतपूर्व रूप से विकास हुआ है। पिछले एक दशक में पंजीकृत एवं उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों की संख्या जो 500 से भी कम थी, बढ़ कर दो लाख से अधिक हो चुकी है। स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 का गठन स्टार्ट अप के लिए शुरू किये गये पहले फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस 1.0) की मजबूत सफलता पर आधारित है। एफएफएस 1.0 के अंतर्गत 10,000 करोड़ रुपये की पूरी राशि से 145 वैकल्पिक निवेश कोषों(एआईएफ) की मदद की गयी। इन वैकल्पिक निवेश कोषों ने देशभर के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश पाने वाली इकाइयों में कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल, क्लीन टेक, उपभोक्ता वस्तुएं एवं सेवाएं, ई-कॉमर्स, शिक्षा, फिनटेक, खाद्य एवं पेय पदार्थ, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, स्पेस टेक और बायोटेक्नोलॉजी सहित अनेक क्षेत्रों में काम करने वाली स्टार्टअप इकाइयां शामिल हैं। </p>
<p>सरकार का कहना है कि एफएफएस 1.0 ने पहली बार उद्यम शुरू करने वाले संस्थापकों को समर्थन देने, निजी पूंजी को आकर्षित करने और भारत के वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 नवप्रवर्तनकारी विचारों के साथ शुरू की गयी इकाइयों को उनके काम के शुरुआती विकास चरण में उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए बनाया जा रहा है। ऐसी इकाइयों के लिए शुरुआती चरण में धन की कमी के कारण विफलता का जोखिम ज्यादा होता है।</p>
<p>इसमें बड़े महानगरों से दूर के इलाकों में भी निवेश को प्रोत्साहित कर देश के हर कोने में नवाचार को बढ़ावा देने, उद्यम पूंजी की बड़ी कमी का समाधान करने तथा आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अधिक पूंजी का प्रवाह सुनिश्चित करना है। इससे घरेलू उद्यम पूंजी आधार मजबूत होने छोटे निवेश कोषों के लिए को काम का परिदृश्य मजबूत होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 18:39:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>&quot;इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026&quot; में शामिल होंगे ब्रिटेन के पूर्व पीएम ऋषि सुनक, कर्टेन रेजर कार्यक्रम को करेंगे संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के कर्टेन रेजर में ऋषि सुनक संबोधित करेंगे। मैक्रों, गुटेरेस सहित वैश्विक नेता एआई सहयोग, नवाचार और शासन पर चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/former-uk-pm-rishi-sunak-will-attend-india-ai-impact/article-142876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पूर्वावलोकन कार्यक्रम (कर्टेन रेजर)'एआई फॉर ऑल: रीइमेजिनिंग ग्लोबल कोऑपरेशन में वक्तव्य देंगे। सार्वजनिक नीति शोध संस्था कार्नेगी इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में  कहा, हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, इस आयोजन के लिए 100 से अधिक देशों के 35,000 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें 500 से अधिक स्टार्टअप सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे और इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उनकी यह यात्रा उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से एआई के क्षेत्र में सहयोग को लेकर दोनों राष्ट्रों की प्राथमिकता को रेखांकित करती है।</p>
<p>अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के साथ होराइजन 2047 रोडमैप के अंतर्गत द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक चर्चा करेंगे। वे मुंबई में संयुक्त रूप से भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का भी उद्घाटन करेंगे। नयी दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पांच दिवसीय कार्यक्रम है, जो नीति, अनुसंधान, उद्योग और सार्वजनिक सहभागिता पर केंद्रित है।</p>
<p>'जनमानस, पृथ्वी और प्रगति के तीन आधारभूत स्तंभों पर आधारित यह शिखर सम्मेलन वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं, नवाचारियों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा, ताकि शासन, नवाचार और सतत विकास में एआई की भूमिका पर विचार किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उन्होंने एआई की चुनौतियों के समाधान में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की है। उन्होंने एआई को अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा और अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल में शामिल होने के लिए भी भारत को आमंत्रित किया है। यह 40 सदस्यीय विशेषज्ञ निकाय एआई के विकास का आकलन करने, वैश्विक संवाद को बढ़ावा देने और आधिकारिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए गठित किया गया है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के बी. रविंद्रन और भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक विपिन कुमार को सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पैनल दुनिया को तथ्यों और कल्पनाओं के बीच अंतर करने में सहायता करेगा, जो निष्पक्ष समझ के लिए आज अनिवार्य है।</p>
<p>यह शिखर सम्मेलन एआई के प्रति भारत के विकास-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है और इंडिया एआई मिशन तथा डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है। इसका मुख्य बल वैश्विक एआई चर्चाओं को व्यावहारिक और लोगों के हित में परिवर्तित करने पर है। इस सम्मेलन में यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएएसआईएसपीएफ) की भागीदारी होगी। यह मंच अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>शिखर सम्मेलन से पूर्व, यूएएसआईएसपीएफ ने बोर्ड एआई टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस कार्यबल का नेतृत्व जॉन चैंबर्स करेंगे और इसका मुख्य केंद्र एआई तंत्र को सशक्त बनाना, इसके उत्तरदायी उपयोग में तीव्रता लाना और व्यापक स्तर पर इसके सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित करना होगा। कार्यबल के शुभारंभ पर जॉन चैंबर्स ने कहा, जैसा कि पीएम मोदी ने कहा है, एआई का अर्थ अमेरिका और इंडिया है। सिलिकॉन वैली के अपने अनुभव से मैं देख सकता हूं कि एआई हमारे समय की निर्णायक तकनीक बनेगी, ठीक वैसे ही जैसे भारत-अमेरिका संबंध इस युग की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। इस कार्यबल के माध्यम से, हम दोनों देशों के लगभग दो अरब लोगों के लिए एआई के उत्तरदायी विकास और क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अपने गहन अनुभव का उपयोग करेंगे। भारत की प्रगति को लेकर मेरा विश्वास अटूट है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 13:16:41 +0530</pubDate>
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