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                <title>innovation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>innovation RSS Feed</description>
                
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                <title>दक्षिण एशिया राउंड टेबल में बोले टिम कर्टिस, यूनेस्को चेयर्स को बताया शिक्षा और नवाचार की सबसे बड़ी ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय राउंड टेबल में यूनेस्को के क्षेत्रीय निदेशक टिम कर्टिस ने हिस्सा लिया। भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने 'ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस' और नैतिक एआई जैसे नीतिगत विषयों पर चर्चा की। अमृता विश्वविद्यालय तीन यूनेस्को चेयर्स वाला भारत का एकमात्र संस्थान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speaking-at-the-south-asia-round-table-tim-curtis-called/article-154953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px4.png" alt=""></a><br /><p>केरल। यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय राउंड टेबल के दौरान कहा कि यूनेस्को चेयर्स संगठन के वैश्विक नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और नीति-स्तर की चर्चाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं। इस कार्यक्रम में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से 22 से अधिक प्रतिनिधियों, यूनेस्को चेयरधारकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शोध और सामुदायिक पहलों को यूनेस्को की 2026–2027 की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना था। प्रमुख विषयों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और प्रदूषण जैसी “ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस”, डिजिटल परिवर्तन, नैतिक एआई, लैंगिक समानता और युवाओं की भागीदारी शामिल रहे।</p>
<p>कार्यक्रम में बांग्लादेश के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि सुसान वाइज और नेपाल के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि जैको डु टॉइट भी शामिल हुए। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कुलाधिपति माता अमृतानंदमयी देवी से भी मुलाकात की। अमृता विश्व विद्यापीठम भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां तीन यूनेस्को चेयर्स स्थापित हैं—जेंडर इक्वैलिटी एंड वीमेन एम्पावरमेंट (डॉ.भवानी राव के नेतृत्व में), एक्सपीरिएंशियल लर्निंग फॉर सस्टेनेबल इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (डॉ.मनीषा वी.रमेश के नेतृत्व में) और असिस्टिव टेक्नोलॉजीज़ इन एजुकेशन (डॉ.प्रेमा नेदुंगाडी के नेतृत्व में)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पूरी दुनिया में पीएम मोदी का डंका : 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से हुए सम्मानित, बोले- ये करोड़ों किसानों, वैज्ञानिकों का सम्मान है</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम में FAO मुख्यालय में प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक (2026) से सम्मानित किया गया है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास में उनके असाधारण नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार मिला। पीएम मोदी ने इस वैश्विक सम्मान को भारतीय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modis-sting-all-over-the-world-those-honored-with/article-154552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi11.png" alt=""></a><br /><p>रोम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा रोम स्थित एफएओ मुख्यालय में वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत तथा वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके असाधारण नेतृत्व के सम्मान में प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह पुरस्कार एफएओ के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंग्यू से प्राप्त किया। उन्होंने यह सम्मान भारतीय किसानों और भारतीय कृषि वैज्ञानिक समुदाय को समर्पित किया, जो भारतीयों तथा विश्वभर के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत में कृषि जीवन की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि मातृभूमि और भारतीय जनमानस के बीच एक पवित्र संबंध है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भारत का वैज्ञानिक और नवाचार-आधारित दृष्टिकोण एक सतत, जलवायु-सहिष्णु और भविष्य के लिए तैयार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहा है। इस दिशा में उन्होंने कहा कि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' जैसी पहल तथा सूक्ष्म सिंचाई और सटीक कृषि के लिए मिशन-आधारित दृष्टिकोण भारत की कृषि नीतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि समाधानों पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परामर्श प्रणाली, ड्रोन, दूरसंवेदी प्रौद्योगिकियाँ तथा सेंसर-आधारित मशीनें भारतीय किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक कृषि आय प्राप्त करने में सहायता कर रही हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने लगभग 3,000 जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विज्ञान-आधारित कृषि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही है, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए। प्रधानमंत्री ने याद किया कि एफएओ के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत को वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और भूख-मुक्त विश्व को बढ़ावा देने के लिए संगठन के साथ कार्य करने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के आयोजन के माध्यम से स्वस्थ खाद्य विकल्पों को प्रोत्साहित करने हेतु भारत के साथ कार्य करने के लिए एफएओ का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी की एफएओ मुख्यालय की यह यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय शासनाध्यक्ष द्वारा की गई पहली यात्रा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नीति आयोग की रिपोर्ट में राजस्थान का डंका, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में राजस्थान के 'शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान' और एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली को 'गुड स्टेट प्रैक्टिसेज' के रूप में सराहा है। तकनीक-आधारित इस मॉडल के तहत प्रदेश के 75 लाख से अधिक विद्यार्थियों की 70 स्वास्थ्य मानकों पर स्क्रीनिंग कर रिकॉर्ड बनाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/niti-aayogs-latest-report-on-school-education-system-in-india/article-154488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/secratrait1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में किए गए स्वास्थ्य निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। नीति आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया-टेम्पोरल एनालिसिस एण्ड पॉलिसी रौडमेप फॉर क्वालिटी इन्हेंसमेंट’ में राजस्थान के ‘शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान’ एवं मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली को ‘गुड स्टेट प्रैक्टिसेज’ के रूप में उल्लेखित किया गया है। नीति आयोग ने इस रिपोर्ट में राजस्थान द्वारा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण, फिटनेस एवं स्वास्थ्य निगरानी के लिए विकसित तकनीक आधारित मॉडल की सराहना की है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 75 लाख से अधिक विद्यार्थियों की 70 से अधिक स्वास्थ्य मानकों पर स्क्रीनिंग की गई। इसके तहत विद्यार्थियों की दृष्टि, श्रवण क्षमता, पोषण स्तर, दंत स्वास्थ्य व शारीरिक फिटनेस सहित विभिन्न पहलुओं की जांच एवं मोबाइल ऐप आधारित फॉलो-अप प्रणाली विकसित की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एलजी ने लॉन्च की नई प्रीमियम होम अप्लायंसेज रेंज, फ्रेंच डोर फ्रिज और एआई वॉशिंग मशीन समेत कई उत्पाद पेश</title>
                                    <description><![CDATA[एलजी ने नोएडा में अपना नया होम अप्लायंसेज पोर्टफोलियो पेश किया है। एसेंशियल सीरीज के तहत एआई वॉशिंग मशीन और स्मार्ट रेफ्रिजरेटर जैसे आधुनिक उत्पाद लॉन्च किए गए। 'Make-in-India' विजन के साथ कंपनी इन उत्पादों को 22 देशों में निर्यात करेगी, जिससे भारतीय तकनीक वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/lg-launches-new-premium-home-appliances-range-introduces-many-products/article-153983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नोएडा में एल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वर्ष 2026 के लिए अपने होम अप्लायंसेज पोर्टफोलियो का बड़ा विस्तार करते हुए नई प्रीमियम और किफायती-प्रीमियम ‘एसेंशियल सीरीज’ बाजार में उतारी है। कंपनी ने फ्रेंच डोर रेफ्रिजरेटर, एआई डीडी वॉशिंग मशीन, कन्वर्टिबल माइक्रोवेव ओवन और ट्रू स्टीम डिशवॉशर जैसे आधुनिक उत्पाद लॉन्च किए हैं।</p>
<p>कंपनी का कहना है कि नई रेंज भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे आधुनिक तकनीक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके। एलजी ने ‘मेक-इन-इंडिया’ और ‘मेक-फॉर-इंडिया’ पहल को मजबूत करने के साथ ‘मेक-इंडिया-ग्लोबल’ रणनीति पर भी जोर दिया है। कंपनी ने बताया कि 2026 में एसेंशियल सीरीज के उत्पाद एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के 22 देशों में निर्यात किए जाएंगे।</p>
<p>नई रेंज में 225 लीटर से 276 लीटर तक के रेफ्रिजरेटर, 8 से 12 किलोग्राम क्षमता वाली वॉशिंग मशीन, कन्वर्टिबल माइक्रोवेव ओवन और प्रीमियम फ्रेंच डोर फ्रिज शामिल हैं। कंपनी ने 574 लीटर से 610 लीटर क्षमता वाले फ्रेंच डोर रेफ्रिजरेटर भी पेश किए हैं, जिनमें ऑटो आइस मेकर और स्मार्ट कूलिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं।</p>
<p>एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर होंग जू जीयोन ने कहा कि भारत कंपनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार है और नई रेंज भारतीय उपभोक्ताओं की जीवनशैली और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी हर बजट के ग्राहकों के लिए आधुनिक और भरोसेमंद तकनीक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 10:15:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'कलम और कवच' संवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में साइबर खतरों और हाइब्रिड युद्ध से निपटने के लिए नवाचार और रणनीतिक समन्वय जरूरी है। भारत अब रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण पर केंद्रित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singh-cannot-depend-on-old-methods-in-the-rapidly/article-153829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करने का आह्वान किया है और कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा अब पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां प्रमुख रणनीतिक संवाद 'कलम और कवच' में अपने वर्चुअल संदेश में कहा कि इस मंच का नाम ही देश के भविष्य के सुरक्षा ढांचे की सशक्त दृष्टि को दर्शाता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा , "कलम विचारों, तर्क और आगे की सोच रखने के साहस का प्रतीक है। कवच शक्ति, सुरक्षा और राष्ट्र की रक्षा करने की क्षमता का प्रतीक है। जो देश स्पष्ट रूप से सोच सकता है और मजबूती से अपनी रक्षा कर सकता है, वही दुनिया में ऊंचा खड़ा होता है। हम ऐसे ही भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं।" वैश्विक संघर्षों के बदलते स्वरूप पर राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया भर में रणनीतिक परिदृश्य लगातार अधिक अनिश्चित, प्रतिस्पर्धी और प्रौद्योगिकी-आधारित होता जा रहा है। उन्होंने भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, साइबर खतरे, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी और हाइब्रिड युद्ध के उभरते स्वरूपों को देशों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौती बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ऐसी दुनिया में राष्ट्रीय सुरक्षा पुराने आयामों पर आधारित नहीं रह सकती। इसके लिए हमारी तैयारी, लचीलापन, नवाचार और रणनीतिक आत्मविश्वास आवश्यक है।" रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि भारत के लिए रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "जो राष्ट्र महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यधिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहता है, वह संकट के समय कमजोर बना रहता है। हमें अपने राष्ट्रीय तंत्र के भीतर ही प्रमुख प्रणालियों का डिज़ाइन, विकास, उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन करना होगा। इसी तरह हम अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रख पाएंगे।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने विभिन्न हितधारकों के बीच अधिक समन्व्य की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि आधुनिक युद्ध में कई क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा, "आधुनिक युद्ध पारंपरिक सीमाओं का सम्मान नहीं करता। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपनी थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष सेनाओं को कितनी दक्षता से एक साथ ला पाते हैं। यह इस पर भी निर्भर करेगा कि हमारी प्रयोगशालाएं, उद्योग, स्टार्टअप, नीति निर्माता और सैन्य संस्थान कितनी निकटता से मिलकर काम करते हैं।"</p>
<p>रक्षा तैयारियों में तेज़ी से नवाचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में वही देश आगे रहेंगे जो विचारों को तेजी से परिचालन क्षमता में बदल सकें। उन्होंने कहा, "किसी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर अधिक निर्भर करेगी कि उसकी प्रयोगशालाएं, उद्योग और सशस्त्र सेनाएं कितनी जल्दी एकजुट होकर सोच और कार्य कर सकती हैं। भविष्य के युद्धक्षेत्र उन देशों के लिए अनुकूल होंगे जो किसी विचार, प्रोटोटाइप और परिचालन तैनाती के बीच का समय कम कर सकें।" राजनाथ सिंह ने संयुक्तता, स्वदेशी विनिर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और वैश्विक साझेदारियों पर होने वाली चर्चाओं को भारत की व्यापक रक्षा दृष्टि के परस्पर जुड़े स्तंभ बताया।</p>
<p>उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का रक्षा निर्यात बढ़ रहा है, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ रही है और सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी और हितधारकों से भारत के रक्षा तंत्र को लगातार मजबूत करते रहने का आग्रह किया। राजनाथ सिंह ने कहा, "कलम को और अधिक साहसी विचार लिखते रहना चाहिए। कवच को और अधिक मजबूत होते रहना चाहिए।" उन्होंने नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने के लिए आयोजकों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि इन विचार-विमर्शों से ऐसे व्यावहारिक परिणाम निकलेंगे जो सशस्त्र सेनाओं और राष्ट्र दोनों के लिए लाभकारी होंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:01:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया में रोबोट बना बौद्ध भिक्षु : जोग्येसा मंदिर में ली शपथ, पारंपरिक बौद्ध वस्त्र धारण कर भिक्षुओं के साथ प्रार्थना सभा में लिया हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया के जोग्येसा मंदिर में रोबोट भिक्षु 'गाबी' को आधिकारिक दीक्षा दी गई। बुद्ध पूर्णिमा से पहले हुए इस ऐतिहासिक समारोह में ह्यूमनॉइड रोबोट ने पंचशील के आधुनिक नियमों की शपथ ली। 24 मई को होने वाले 'लालटेन उत्सव' से पहले यह नवाचार धर्म और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का प्रतीक बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/in-south-korea-a-buddhist-monk-became-a-robot-took/article-153179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/gabi.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर से पहले बौद्ध दीक्षा देकर पहले रोबोट भिक्षु 'गाबी' को आधिकारिक रूप से आध्यात्मिक सेवा में शामिल किया है। देश की राजधानी सोल स्थित जोग्येसा मंदिर के द्युंगजेयोन हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान बुधवार को 130 सेंटीमीटर ऊंचे इस रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र धारण कर भिक्षुओं के साथ प्रार्थना में भाग लिया। चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित इस ह्यूमनॉइड रोबोट 'जी1' को जोग्ये ऑर्डर ऑफ कोरियन बुद्धिज्म द्वारा आयोजित दीक्षा समारोह में 'गाबी' नाम दिया गया। 'सुग्ये' नामक इस अनुष्ठान में रोबोट ने बुद्ध की शिक्षाओं और मठवासी समुदाय के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट को बौद्ध दीक्षा दी गई है।</p>
<p>दीक्षा के दौरान रोबोट ने 'योनबी' नामक शुद्धिकरण अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार, नए भिक्षुओं की भुजाओं पर धूप से हल्के निशान बनाए जाते हैं, लेकिन रोबोट की भुजा पर प्रतीक स्वरूप 'कमल लालटेन उत्सव' का स्टीकर लगाया गया और उसके गले में 108 मोतियों की माला पहनाई गई। इस अवसर पर रोबोट भिक्षु के लिए बौद्ध धर्म के पांच प्रमुख नियमों (पंचशील) को भी नए रूप में परिभाषित किया गया। इन नियमों में जीवन की रक्षा करना, अन्य रोबोट या संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना, मनुष्यों का सम्मान और आज्ञा का पालन करना, धोखाधड़ी से बचना और आवश्यकता से अधिक चार्ज न करके ऊर्जा का संरक्षण करना शामिल है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया में इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 24 मई को मनाई जा रही है। कोरियाई पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार, यह हर साल चौथे चंद्र मास के आठवें दिन मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'सोक्का तांसिनिल' या 'बुचोनिम ओसिन नाल' कहा जाता है। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया में भव्य आयोजन किए जाते हैं, जिनमें 'योन द्युंग हो' (कमल लालटेन उत्सव) सबसे प्रमुख है। चूंकि 24 मई को रविवार है, इसलिए सरकार ने 25 मई (सोमवार) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि लोग इस उत्सव का आनंद ले सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस-भारत ने 'विला स्वागतम' रेजीडेंसी कार्यक्रम के चौथे संस्करण के शुरू होने की घोषणा, सांस्कृतिक और रचनात्मक आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी दूतावास ने भारत और फ्रांस के बीच कलात्मक आदान-प्रदान के लिए 'विला स्वागतम' 2026-27 की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत कलाकार, लेखक और शोधकर्ता एक-दूसरे के देशों में रहकर नवाचार करेंगे। 31 मई 2026 तक आवेदन खुले हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों और रचनात्मकता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-india-announce-the-start-of-the-fourth-edition-of-villa/article-152997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-and-france.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। भारत में फ्रांसीसी संस्थान और फ्रांसीसी दूतावास ने 'विला स्वागतम' क्रॉस-रेजीडेंसी कार्यक्रम के चौथे संस्करण की शुरुआत की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य फ्रांस और दक्षिण एशिया के बीच सांस्कृतिक और रचनात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। वर्ष 2026-2027 की रेजीडेंसी के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। यह कार्यक्रम भारतीय और फ्रांसीसी कलाकारों, लेखकों, अनुवादकों, डिजाइनरों, विद्वानों और रचनात्मक पेशेवरों को फ्रांस और दक्षिण एशिया के विभिन्न संस्थानों में रहने और सीखने के अवसर प्रदान करता है।</p>
<p>साल 2023 में अपनी शुरुआत के बाद से, विला स्वागतम एक प्रमुख भारत-फ्रांसीसी सांस्कृतिक पहल के रूप में विकसित हुआ है, जो साहित्य, दृश्य कला, शिल्प, डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देता है। यह कार्यक्रम एक से तीन महीने की रेजीडेंसी प्रदान करता है और पारस्परिकता के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत दोनों देशों के प्रतिभागियों को एक साझा ढांचे के भीतर एक-दूसरे के देशों में मेजबानी प्रदान की जाती है।</p>
<p>भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथु ने इस पहल को एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया जो रचनाकारों को संस्कृतियों, प्रथाओं और विचारों के बीच सेतु बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि नया संस्करण ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ (इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026) के हिस्से के रूप में विशेष महत्व रखता है। पिछले तीन संस्करणों में, विला स्वागतम ने लगभग 100 प्रतिभागियों का समर्थन किया है और विभिन्न कलात्मक और साहित्यिक क्षेत्रों में सहयोग की सुविधा प्रदान की है। कई प्रतिभागियों ने इंडिया आर्ट फेयर, <br />कोच्चि-मुज़िरिस बिनाले और केरल साहित्य महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने काम का प्रदर्शन किया है।</p>
<p>चौथे संस्करण में कई नयी साझेदारियां और रेजीडेंसी प्रारूप पेश किये गये हैं। फ्रांस में, सिरेमिक रेजीडेंसी के लिए 'मुसी डी'आर्ट कंटेम्पोरेन डी लियोन' और बायो-डिज़ाइन एवं टिकाऊ रचनात्मक प्रथाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 'फोंडेशन थैली' के साथ नये सहयोग शामिल हैं। ला रीयूनियन में एक साहित्यिक रेजीडेंसी भी शुरू की गई है, जबकि 'इंस्टीट्यूट डी'एट्यूड्स एवांसी डी नान्तेस' मानविकी और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नई शोध रेजीडेंसी की मेजबानी करेगा।</p>
<p>दक्षिण एशिया में, यह कार्यक्रम पत्थर और संगमरमर आधारित कलात्मक प्रथाओं के लिए 'स्टोनएक्स ग्लोबल', साहित्य के लिए नयी दिल्ली में 'रेड हाउस' और कला एवं शिल्प के लिए बांग्लादेश में 'कॉसमॉस फाउंडेशन' के साथ साझेदारी के माध्यम से विस्तार कर रहा है। विला स्वागतम पहली बार भूटान तक भी पहुंचेगा, जहां 'वास्ट भूटान' एक ग्राफिक उपन्यासकार रेजीडेंसी की मेजबानी करेगा। भारत के कई शहरों में एक अभिनव और भ्रमणशील साहित्यिक रेजीडेंसी भी शुरू की गई है, जिससे एक प्रतिभागी विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा कर सकेगा और विविध समुदायों तथा सांस्कृतिक संदर्भों के साथ जुड़ सकेगा।वर्तमान में इस कार्यक्रम में भारत, श्रीलंका, बंगलादेश, भूटान और फ्रांस में 30 से अधिक भागीदार रेजीडेंसी शामिल हैं, जो साहित्य, कविता, अनुवाद, ग्राफिक उपन्यास, नृत्य, कपड़ा, सिरेमिक, कांच कला और क्यूरेटोरियल अभ्यास जैसे विषयों को कवर करते हैं। विला स्वागतम को 'इंस्टीट्यूट फ्रैंकैस' का समर्थन प्राप्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 13:02:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मदन दिलावर और सुरेश सिंह रावत ने जयपुर बाल महोत्सव में बच्चों की रचनात्मकता को सराहा</title>
                                    <description><![CDATA[सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में आयोजित जयपुर बाल महोत्सव 2026 में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने शिरकत की। मंत्रियों ने बच्चों द्वारा लगाई गई झांकियों और स्टॉल्स का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच बच्चों के आत्मविश्वास और नवाचार को बढ़ावा देकर उन्हें व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/madan-dilawar-and-suresh-singh-rawat-appreciated-the-creativity-of/article-152801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/madan-dilawr.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के मंत्री मदन दिलावर ने आज सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में आयोजित जयपुर बाल महोत्सव 2026 का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के मंत्री सुरेश सिंह रावत भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने विभिन्न जिलों से आए बच्चों द्वारा लगाई गई झांकियों, स्टॉल और प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। मंत्री मदन दिलावर ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि इस तरह के मंच शिक्षा को किताबों से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है।</p>
<p>मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि बच्चे अपने-अपने क्षेत्रों की विशेषताओं को जिस तरह प्रस्तुत कर रहे हैं, वह भविष्य में स्थानीय पहचान और विकास की नई दिशा तय कर सकता है। इस अवसर पर KogniVera के संस्थापक कमलेश शर्मा, जो इस आयोजन के सहयोगी के रूप में जुड़े हैं, ने बच्चों के साथ संवाद करते हुए उनकी प्रस्तुतियों को सराहा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने आसपास की वास्तविकताओं को समझकर उन्हें रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो वही सोच आगे चलकर नवाचार और उद्यमिता की नींव बनती है। डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को अपने जिले को समझने, उससे जुड़ने और उसे नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 : राजनाथ सिंह ने कहा-बदला है वार फेयर का चेहरा, तकनीक के चलते हुये क्रांतिकारी बदलाव, साइबर स्पेस में भी लड़े जा रहे युद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा त्रिवेणी का संगम बताया। उन्होंने आधुनिक युद्ध में AI और ड्रोन की भूमिका को गेम चेंजर करार दिया। सिंह ने भारतीय सेना से चौकन्ना रहने और वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/north-tech-symposium-2026-rajnath-singh-said-the-face/article-152620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में शुरु हुये नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को ज्ञान व शक्ति का महाकुंभ बताते हुये कहा कि यह वास्तव में रक्षा त्रिवेणी का संगम है। राजनाथ सिंह ने तीन दिवसीय कार्यक्रम का उदघाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि हर काल खंड में वार फेयर का चेहरा बदला है,विश्व युद्ध के बाद नई तकनीक का समावेश होते हुए दुनिया ने देखा है। 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी के नए युग का आगाज हुआ है। उन्होने कहा कि यह इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। आज साइबर स्पेस में भी युद्ध लड़े जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि बीते 10-15 वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर उन्होने कहा कि दोनों के बीच पारंपरिक युद्ध शुरू हुआ, लेकिन अब यह युद्ध ड्रोन और सेंसर युद्ध के रूप में गेम चेंजर बनकर उभरा है। आज सब कुछ वैपनाइज किया जा सकता है। आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे भारतीय सेना का शौर्य याद आता है। ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल हुए नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया था। रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना से सक्रिय ही नहीं बल्कि चौकन्ना भी रहने का आह्वान करते हुये कहा कि तभी हम आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा में नई टेक्नोलॉजी एक साल बाद भी लागू कर सकते हैं,लेकिन सेना में अगर हमने देरी की तो काफी पीछे हो जाएंगे,रक्षा मंत्री ने सेना से सरप्राइज एलिमेंट विकसित करने का आह्वान किया,सरप्राइज एलिमेंट ऐसा हो जिसे दुश्मन देश ने सोचा भी ना हो। उन्होने कहा कि आगे बढ़ने का एक ही मंत्र अनुकूलनशीलता है। सेना में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, यूपी में डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस का निर्माण किया जा रहा है, यूपी में हाल में ही लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे को भी डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बताया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियन दी गई हैं। रक्षा मंत्री ने इंडस्ट्री और एकेडमिया से अपील की, कि वे डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर का भी निर्माण करें। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि सबके सामूहिक प्रयास से ही भारत विश्व पटल पर सैन्य ताकत के रूप में स्थापित होगा, सबके प्रयासों से ही भारत वैश्विक महाशक्ति बनेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह का दो दिवसीय प्रयागराज दौरा आज : नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का करेंगे उद्घाटन, तकनीक और भविष्य की जरूरतों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज प्रयागराज में भारतीय सेना के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। 4 मई को वे नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करेंगे, जहाँ स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन होगा। आयोजन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना है। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singhs-two-day-visit-to-prayagraj-will-inaugurate-north-tech/article-152520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh.png-3.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आएंगे। वह शाम को अरैल में भारतीय सेना की ओर से आयोजित कल्चरल इवेंट में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। चार मई को न्यू कैंट के कोबरा ऑडीटोरियम में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का इनॉगरेशन करेंगे। यह आयोजन 4 से 6 मई तक सिम्पोजियम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य मंत्री (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) जीतेंद्र सिंह की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। यह कार्यक्रम न्यू कैंट स्थित कोबरा ऑडिटोरियम के पास होगा। आयोजन हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा।</p>
<p>इसमें सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत से जुड़े लोग मौजूद रहेंगे।आधुनिक रक्षा उपकरणों का होगा प्रदर्शन सिम्पोजियम में सेना में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा। कई उपकरणों का लाइव डेमो भी दिखाया जाएगा। ताकि लोग समझ सकें कि ये तकनीकें कैसे काम करती हैं।</p>
<p>ड्रोन और सैन्य वाहनों पर रहेगा फोकस कार्यक्रम में ड्रोन, ऑल-टेरेन वाहन, सर्विलांस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी तकनीकों को खास तौर पर दिखाया जाएगा। स्वदेशी यानी भारत में तैयार तकनीकों पर ज्यादा जोर रहेगा।इस आयोजन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थानों और सेना को एक मंच पर लाना है। यहां रक्षा तकनीक और भविष्य की जरूरतों को लेकर चर्चा भी होगी।कार्यक्रम के दौरान रक्षा नवाचार, सैन्य निर्माण और नई तकनीकों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञ बताएंगे कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कैसे आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन के मद्देनजर अरैल घाट पर कड़ा सुरक्षा पहरा लगाया गया है। यहां लोकल पुलिस के साथ ही मिलिट्री पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं। उधर पुलिस की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर अरैल घाट को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया गया है। यह प्रतिबंध दो मई की शाम पांच बजे से शुरू हो गया हैं।और यह रविवार रात 12 बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान अगर कोई ड्रोन उड़ाता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:28:45 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/operation-sindoor-gave-a-message-to-the-world-about-the/article-152209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"</p>
<p>पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। </p>
<p>आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।</p>
<p>प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"</p>
<p>एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"<br />हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                <title>2025 बैच के 7 आईएएस से राजस्थान कैडर को मजबूती, मुख्य सचिव ने कराया शासन एजेंडे से परिचय </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान कैडर के 2025 बैच के 7 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने "मैक्सिमम गवर्नेंस—मिनिमम गवर्नमेंट" और डिजिटल सुधारों पर जोर दिया। अधिकारियों से विकसित राजस्थान @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पारदर्शिता, समर्पण और तकनीक-आधारित प्रशासन के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-cadre-strengthened-with-7-ias-of-2025-batch-chief/article-151875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ias1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान कैडर में शामिल हो रहे वर्ष 2025 बैच के 7 आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने एचसीएम रीपा में संवाद कर उनका स्वागत किया। उन्होंने अधिकारियों को राज्य की गौरवशाली प्रशासनिक परंपरा से अवगत कराते हुए “मैक्सिमम गवर्नेंस—मिनिमम गवर्नमेंट” के सिद्धांत पर कार्य करने का संदेश दिया। संवाद के दौरान मुख्य सचिव ने नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल की विस्तार से जानकारी दी। </p>
<p>उन्होंने समयबद्ध जन-शिकायत निवारण, पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, आधारभूत ढांचे के विकास, डिजिटल गवर्नेंस, प्रशासनिक सुधार और संस्थागत पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। साथ ही मिशन कर्मयोगी, तकनीक-आधारित प्रशासन, प्रभावी जनसंपर्क, मुख्यमंत्री ग्राम विकास अभियान, राज उन्नति और महिला सशक्तीकरण जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रेया गुहा ने भी अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें संवैधानिक मूल्यों, निष्पक्षता और लोक सेवा की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से नवाचार, समर्पण और नेतृत्व के साथ कार्य करते हुए विकसित राजस्थान @2047 और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:29:59 +0530</pubDate>
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