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                <title>free medicine - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>रक्तदान और जांच शिविर का आयोजन: सिविल लाइंस विधायक  गोपाल शर्मा ने ब्लड डोनर्स को प्रशस्ति-पत्र देकर किया सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[देवी नगर में आयोजित शिविर में 40 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने रक्तदाताओं को सम्मानित किया। शिविर में शुगर, ईसीजी और थायरॉयड की निशुल्क जांच के साथ दवाइयां वितरित की गईं। इस दौरान चिकित्सा और मीडिया क्षेत्र की हस्तियों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/civil-lines-mla-honored-blood-donors/article-146596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/gopal-sharam.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में न्यू सांगानेर रोड स्थित देवी नगर में रविवार को रक्तदान और जांच शिविर का आयोजन हुआ। इस दौरान सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया और उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।</p>
<p>मानव समाज सेवा संस्थान अध्यक्ष डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि सुबह 9 से 2 बजे तक कैंप का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक की मदद से 40 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। कैंप में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायरॉयड, बीएमडी और ईसीजी समेत जांचें की गईं। वहीं दवाइयों का भी वितरण किया गया।यह शिविर इंडियन इंस्टीट्यूट आफ़ होम्योपैथिक फिजिशियंस,राज आँगन फाउंडेशन,ढंड डायबिटीज एसोसिएशन व श्री वार्ष्णेय वैश्य स्पोर्ट्स क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।</p>
<p>कैंप में डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. अशोक लादुना, डॉ. महेश सिंघल, डॉ. दीप शिखा अग्रवाल, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. अमिता अग्रवाल, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. सुनीता जैन, डॉ. अभिनव शर्मा, डॉ. मोहम्मद अमान और डॉ. मोहम्मद अब्बास ने अपनी सेवाएं दीं। वहीं एक्सपर्ट लैब के डायरेक्टर जय करण चारण ने ईसीजी और थायरॉयड की जांच निशुल्क की। कैंप में मरीजों को होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इस दौरान आशीष पोरवाल, विजय सैनी,शोर्य शर्मा,विपिन गुप्ता अर्पिता माथुर,इशिता बिंद्रा, डॉ ओम बालोदिया,बिजय गुप्ता,एनएल भाटिया, चेतन गोस्वामी, राकेश गर्ग, प्रदीप यादव आदि मौजूद रहे। इस दौरान स्वास्थ्य एवं मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालो को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 17:26:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title> अस्पतालों में नई व्यवस्था : दवाओं का दर्द बन रहा अब नया मर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[मरीज को अस्पताल में डॉक्टर से दिखाने से लेकर दवा लेने तक 5 से 6 घंटे लग रहे हैं। उस पर दवाएं नहीं मिलने से बाजार से दवा खरीदना मजबूरी बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-system-in-hospitals--now-the-pain-of-medicines-is-becoming-a-new-merge/article-11344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/hospital-dawao-ka-dard...-kota-news-4.6.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के बड़े एमबीएस और जेकेलोन अस्पताल में अव्यवस्थाओं का दर्द तो मरीज पहले ही झेल रहे थे अब दवाओं का टोटा दोहरा दर्द दे रहा है। अस्पतालों में नये वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही दवाओं की सप्लाई गड़बड़ाने का सिलसिला  जारी है। जहां एक ओर  सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज नि:शुल्क  कर दिया है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि सामान्य दवा भी मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को नहीं मिल पा रही है।  ऐसे में अस्पतालों के बदतर हालात नि:शुल्क दवा की पोल खोल रहे है।  इससे मरीजों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। <br /><br /><strong>यूं जांची नवज्योति ने व्यवस्था</strong><br /> संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में आप इलाज के लिए जा रहे हैं तो घर से पहले घंटों लाइन में खड़े रहने के लिए तैयार होकर ही जाएं। यहां पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर तक दिखाने में घंटों लाइन में धक्के खाना पड़ेगा। डॉक्टर को दिखाने के बाद नि:शुल्क दवा लेने टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अस्पताल में आए दिन मरीजों को इस समस्या से दो चार होना पड़ा रहा है। दैनिक नवज्योति ने मरीजों की इस समस्या जानने के लिए पर्ची काउंटर से लेकर दवा लेने तक लाइन खड़े रहकर जांच की तो एक मरीज को अस्पताल में डॉक्टर से दिखाने से लेकर दवा लेने तक 5 से 6 घंटे लग रहे हैं। उस पर दवाएं नहीं मिलने से बाजार से दवा खरीदना मजबूरी बना हुआ है। <br /><br /><strong>समय सुबह 9 बजे</strong> <br />नवज्योति टीम का एक सदस्य एमबीएस अस्पताल में  9 बजे पर्ची काउंटर में लाइन में लगा। करीब 15 मिनट के कतार में खड़ा रहने के बाद पर्ची बनी। <br /><br /><strong>दवा लेने में लगे दो घंटे</strong><br />मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा केंद्र पर11 बजे लाइन में लगे। लाइन इतनी लंबी थी की हमारे काउंटर तक पहुंचने में पौन घंटा लग गया। उसके बाद पर्ची में छह दवा में से दो दवा मिली . चार दवा पास वाले काउंटर पर लेने के लिए कहा। दवा लेकर दूसरे काउंटर पर लाइन में लगे तो एक सज्जन ने बताया कि पहले पर्ची की जैराक्स करा कर लाएं. फिर ही दवा मिलेगी। उसके बाद टीम का सदस्य पर्ची की फोटा काफी कराने गया. वहां भी लाइन लगी थी. करीब 15 मिनट के इंतजार के बाद फोटो कापी लेकर दवा काउंटर की लाइन में लगे तो करीब आधा घंटे बाद नंबर आया। इस काउंटर पर भी 3 तीन दवा ही मिली। एक दवा बाहर से खरीदी। <br /><br /><strong>9.15 बजे से 10.50 बजे आउटडोर की कतार में</strong><br />पर्ची बनाने के बाद टीम का सदस्य 9.15 बजे कमरा नं. 104 में आउटडोर में दिखाने के लिए मरीजों की लाइन में लगा। करीब 1 घंटा 35 मिनट डॉक्टर को दिखाने में लगे। उसके बाद डॉक्टर से बुखार, चक्कर आने उल्टी दस्त की दवाई लिखी पर्ची लेकर मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटर पर पहुंचे।<br /><br /><strong>कई काउंटर पर पेरासिटामोल तक नहीं मिल रही</strong> <br /> हनुमान प्रसाद राठौड़ ने बताया कि सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज नि:शुल्क कर दिया है। सरकारी अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी को नि:शुल्क करने का निर्देश दिया गया है। सीटी स्कैन और अन्य कई बड़ी जांचें तक नि:शुल्क हो रही है, लेकिन अस्पतालों के हालात ऐसे हैं कि सामान्य मेडिसिन भी मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं।  एंटी कोल्ड दवा हो या फिर एंटी एलर्जी यह सामान्य दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। ये हालात मेडिकल कॉलेज कोटा के  जुड़े अस्पतालों के हैं।  अस्पतालों में दवाइयां ही उपलब्ध नहीं है। <br /><br /><strong>एंटीकोल्ड, बीपी की दवा के लिए भी लगाने पड़ते हैं चक्कर</strong><br />तीमारदार उमेरुद्दीन ने बताया कि एंटीकोल्ड, टिटनेस, वैक्सीन, बीपी के मरीजों के काम आने वाली लोसार्टन 50, दस्त की दवा मेट्रोजिल, एंटी एलर्जी सीपीएम, दर्द की डॉइक्लोफिनेक और सीरिंज 5 और 2 एमएल जैसी दवाइयां नहीं हैं।  साथ ही एंजायटी में काम आने वाली क्लोनजपम भी लंबे समय से नहीं आ रही हैं। एक कांउटर से दूसरे काउंटर पर दवा के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। दवा नहीं मिलने पर दूसरे काउंटर के लिए दवा की पर्ची की फोटो कापी देनी पड़ती है। ऐसी लच्चर व्यवस्था के कारण नि:शुल्क दवा लाभ नहीं मिल रहा बाहर से दवा खरीदना मजबूरी बन गया है। डॉक्टर बाहर की दवा लिख नहीं सकते ऐसे मरीज के हाल बुरे हो रहे है। <br /><br /><strong>कई काउंटरों के चक्कर लगाकर मिल रही दवाइयां</strong> <br />तीमारदार नाथूलाल ने बताया कि मरीज  अस्पताल में डॉक्टर के पास से पर्ची पर दवाइयां लिखकर पहले एक काउंटर पर जाता है लेकिन वहां दवाइयां नहीं मिलती हैं।  मरीज को ऐसे ही कई काउंटरों के चक्कर लगाने पड़ते है लेकिन इसके बावजूद उसे दवाइयां नहीं मिल पा रही है।  जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना उठाना पड़ रहा है।  एमबीएस अस्पताल में बीते ढाई महीने से यूरिन बैंग की सप्लाई भी नहीं हो रही है।  ऐसे में मरीजों के परिजनों को इमरजेंसी होने पर निजी मेडिकल स्टोर की तरफ भागना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>5 लाख टेबलेट सीपीएम हो रही खपत</strong><br /> एक ही महीने में जुकाम और स्किन एलर्जी में उपयोग आने वाली सीपीएम की खपत करीब 5 लाख टेबलेट की हो रही है।  बीपी के मरीज के काम आने वाली लोसर्टन व सर्दी जुकाम में उपयोगी एंटी कोल्ड की खपत 30-30 हजार गोलियां हैं।  डॉइक्लोफिनेक 50 एमजी टेबलेट की खपत भी हर माह करीब एक लाख रहती है।  ऐसे में बड़ी मात्रा में मरीजों को यह सामान्य दवा भी नहीं मिल पा रही है।  हालात ये भी हैं कि अस्पतालों में हर माह एक लाख सीरिंज की जरूरत है, लेकिन यह बीते 2 से 3 महीने से नहीं आ रही है।  अस्पताल को एनओसी मिलने पर कुछ खरीद स्थानीय स्तर पर कर लेता है लेकिन स्टॉक तुरंत खत्म हो जाता है।  दूसरी तरफ अस्पतालों को यह महंगी भी पड़ रही है। राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ओपीडी और आईपीडी जैसी सुविधाएं नि:शुल्क की हैं। <br /><br /><strong>पांच से सात दवाओं रोज कटती एनओसी</strong><br />कई दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन से ही सप्लाई नहीं हो रही है।  ऐसे में इन सभी दवाओं की खरीद स्थानीय स्तर पर करने के लिए एनओसी जारी की जा रही है। एमबीएस के ड्रग वेयरहाउस की बात की जाए तो वहां से लगातार पांच से सात दवाइयों की एनओसी जारी हो रही है। इनमें से कई दवाएं तो ऐसी है जिनकी खरीद के लिए प्रदेश स्तर पर राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन का रेट कॉन्ट्रेक्ट ही खत्म हो गया है।  ऐसे में अब दोबारा रेट कॉन्टेÑक्ट होगा, उसमें समय लगेगा, तब तक अस्पतालों में यह दवाओं की उपलब्धता नहीं रहेगी। इनकी एनओसी काटकर मंगवाई जा रही है। <br /><br /><strong>20 फीसदी दवाएं नहीं है उपलब्ध</strong><br />राज्य सरकार के मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में करीब 969 दवाएं मरीजों को फ्री देनी है।  लेकिन इनमें से 20 फीसदी यानी करीब 180 दवा उपलब्ध ही नहीं है। केवल 791 दवाएं ही अस्पताल में मिल रही है।  अधिकांश जो दवाइया उपलब्ध नहीं है, वहीं रूटीन सर्वाधिक उपयोग में आने वाली दवाइयां है।  एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना का कहना है कि वे स्थानीय स्तर पर खरीदकर मरीजों को दवा उपलब्ध करवाते हैं।  जैसे ही दवा खत्म होती है और उसकी ड्रग वेयरहाउस से सप्लाई बंद हो जाती है। उसके बाद एमसीडीडब्ल्यू से एनओसी लेकर दवा खरीद ली जाती है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />हर साल मार्च के बाद अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होता है। ऐसे में दवाओं खरीद के आर्डर लगते है। एक आर्डर में एक से दो महीने सप्लाई में लग जाते ऐसे में दवा उपलब्धता कम हो जाती है। करीब एक हजार तरह की दवा की सप्लाई होती है। कुछ दवाएं खत्म होने पर ड्रग वे हाउस से एनओसी जारी कर दी जाती  है। जिससे लोकल स्तर पर खरीद अस्पताल प्रशासन कर सकता है। <br /><strong>- सुनील सोनी,  औषधी भंडार प्रभारी मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 16:45:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अस्पताल में दवा का चक्कर दे रहा दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाओं की सुविधा तो कर दी लेकिन मरीजों को वह दवा काउंटरों पर उपलब्ध ही नहीं हो रही है। एमबीएस में एक ही काउंटर पर दवा दी जा रही है वहां भी आधी दवाओं के लिए एनओसी जारी की जा रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-pain-of-medicine-in-the-hospital/article-9470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/55555555.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाओं की सुविधा तो कर दी लेकिन मरीजों को वह दवा काउंटरों पर उपलब्ध ही नहीं हो रही है। एमबीएस में एक ही काउंटर पर दवा दी जा रही है वहां भी आधी दवाओं के लिए एनओसी जारी की जा रही है। जिसके लिए मरीजों व तीमारदारों को इधर से उधर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। <br /><br />ऐसे ही कई मामले सोमवार को एमबीएस अस्पताल में देखने को मिले। सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर पर गए तो उन्हें 13 नम्बर काउंटर पर भेजा गया। वहां जाने पर आधी ही दवा उपलब्ध थी। जबकि आधी दवा के लिए उन्हें एनओसी जारी की जा रही है। लेकिन एनओसी के लिए पहले उसी डॉक्टर से हस्ताक्षर करवाने, उप अधीक्षक के हस्ताक्षर करवाने और फिर उस पर्ची की दो जेरोक्स करवाकर लाने की मशक्कत । इसमें मरीजों व तीमारदारों का इतना अधिक समय लग रहा है साथ ही परेशानी इतनी हो रही है कि वे गर्मी में घबराने लगे हैं। पूरे अस्पताल का चक्कर काटने और अस्पताल परिसर में बाहर दुकान से जेरोक्स करवाकर लाने की परेशानी इतनी अधिक हो रही है कि मरीज नि:शुल्क दवा लेने से तो बाजार से दवा लेना पसंद कर रहा है। लेकिन हालत यह है कि सरकारी पर्चे पर लिखी दवाई बाहर से भी नहीं ले सकते। <br /><br />ऐसा किसी एक दो मरीज के साथ नहीं हुआ। कई मरीजों के साथ हुआ। जिससे मरीज परेशान होते रहे। कई मरीज तो गर्मी के कारण थक हार कर अस्पताल में जमीन पर ही बैठ गए। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज अधिक  परेशान हुए। मरीजों का कहना था कि सरकार ने दवा तो नि:शुल्क कर दी है। लेकिन व्यवस्था इतनी जटिल कर दी है कि उससे पार पाना मुश्किल हो रहा है। मरीजों का कहना था कि गर्मी में वैसे ही परेशानी हो रही है वहीं दवाई के लिए चक्कर  घिन्नी होने से झुंझलाहट भी होने लगी। इन व्यवस्थाओं के चलते दवा काउंटर, आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने और एनओसी जारी करवाने के लिए मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लग गई। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />इनडोर में भर्ती मरीजों को भी उनके वार्ड के काउंटर पर ही दवाई मिल रही है। आउटडोर में आने वाले मरीजों को दवा के लिए काउंडर पर जाना पड़ रहा है। जो दवाई उपलब्ध नहीं है उसके लिए एनओसी जारी की जाती है।  13 नम्बर काउंटर का प्रिंटर खराब होने से समस्या हुई थी। जानकारी आने पर मैने भी वहां का राउंड किया था। 125 नम्बर कमरे में अधिकतर समस्याओं का समाधान हो जाता है। फिर भी यदि किसी को परेशानी होती है तो मुझसे मिल लेता है। जेरोक्स की समस्या के लिए मशीन का आदेश कर दिया है। कुछ ही दिन में नई मशीन आ जाएगी। वह अस्पताल परिसर में ही गेट के पास लग जाएगी। जिससे उसके लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। सोमवार को भीड़ अधिक होने से कुछ लोगों को समस्या हो सकती है। <br /><strong>-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 15:29:57 +0530</pubDate>
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