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                <title>chambal river front - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> रिवर फ्रंट पर बढ़ा शादियों का क्रेज, दिसम्बर तक फुल</title>
                                    <description><![CDATA[किराया  दो गुना से अधिक करने के बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/weddings-on-the-river-front-are-on-the-rise--full-until-december/article-145820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बना रिवर फ्रंट पर्यटन स्थल के रूप में तो अपनी पहचान बना ही रहा है। वहीं दूसरी तरफ यह नया वेडिंग डेस्टीनेशन भी बन रहा है। रिवर फ्रंट पर शादियों का क्रेज लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यहां दिसम्बर तक शादियों के लिए अभी से बुकिंग हो गई है।कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 1445 करोड़ रुपए की लागत से बने रिवर फ्रंट के बैराज साइड पूर्वी छोर पर तो पर्यटकों की संख्या काफी अच्छी है। यहां दो सौ रुपए प्रति व्यक्ति प्रवेश टिकट होने के बाद भी अधिकतर लोग इसी तरफ उसे देखने के लिए जा रहे हं। जबकि इसके सकतपुरा साइड पश्चिमी छोर पर प्रवेश टिकट मात्र 50 रूपए किया हुआ है। उसके बाद भी वहां पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।</p>
<p><strong>पश्चिमी छोर के शौर्य घाट पर आयोजन</strong><br />रिवर फ्रंट के पश्चिमी छोर स्थित शौर्य घाट पर ही अधिकतर विवाह के आयोजन हो रहे हैं। यहां काफी बड़ा एरिया है। जहां एक बार में दो हजार से अधिक लोग एक साथ विवाह समारोह में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पहले यहां विवाह आयोजन करने पर किराया कम था। लेकिन आयोजनों के अधिक होने पर केडीए ने इसका किराया करीब दो गुना से अधिक कर दिया है। उसके बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।</p>
<p><strong>शौर्य घाट आयोजनों के लिए ही </strong><br />केडीए की ओर से शौर्य घाट को अधिकतर आयोजनों के लिए रिजर्व कर दिया है। यहां शादी समारोह व अन्य आयोजनों के साथ ही कोटा महोत्सव, ट्रेवल मार्ट या अन्य सांस्कृतिक आयोजन भी इसी तरफ हो रहे हैं। यहां बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगी हुई है। जिससे भारत के मैच का सीधा प्रसारण भी लोग देख सकते हैं।</p>
<p><strong>केडीए के लिए नुकसान का सौदा</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद से अभी तक केडीए के लिए नुकसान का ही सौदा रहा है। केडीए इसके संचालन पर जितना खर्चा कर रहा है। उससे आधी भी कमाई नहीं हो रही है। हालांकि यहां पर्यटकों की संख्या पहले से बढ़ी है। साथ ही वाटर पार्क, नाव व कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और संग्रहालय भी बना हुआ है। साथ ही शादी समारोह व अन्य आयोजनों से भी आय हो रही है। लेकिन यहां बनी दुकानों के शुरू नहीं होने और होटल रेस्टोरेंट नहीं होने से लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं नहीं मिल पा रही है। इस कारण से इसका संचालन भारी पड़ रहा है। हालांकि केडीए की ओर से इसका संचालन निजी फर्म के माध्यम से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दो बार टेंडर हो चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई फर्म इसके लिए योग्य साबित नहीं हुई है।</p>
<p><strong>पहले से बढ़ा है लोगों का क्रेज</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता ललित कुमार मीणा ने बताया कि रिवर फ्रंट के शौर्य घाट पर शादी समारोह के आयोजन करने के प्रति लोगों का क्रेज पहले से अधिक हुआ है। हालांकि शुरूआत में इसका किराया काफी कम था। लेकिन आयोजनों को देखते हुए कुछ समय पहले ही इसका किराया बढ़ाया है। उसके बाद भी लोगों का रूझान अच्छा है। यहां रविवार को भी विवाह समारोह का आयोजन हुआ। इस माह में हर दो से तीन दिन में एक आयोजन के लिए बुकिंग है। जबकि साल के अंत दिसम्बर तक शादियों की अभी से बुकिंग हो गई है। इसका कारण चम्बल नदी का किनारा, हैरिटेज लुक, पार्किंग की सुविधा और एक नई जगह होने से लोगों के लिए भी इसे देखने का उत्साह रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:55:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - केडीए ने अपलोड किया रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट, 8 जनवरी तक किए टेंडर आमंत्रित</title>
                                    <description><![CDATA[टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--kda-uploads-tender-document-for-river-front-operation--invites-tenders-until-january-8th/article-135262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन एक ही निजी फर्म के माध्यम से करवाने की योजना के तहत केडीए की ओर से इसका टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया है। जिसे केडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। एक माह में टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि रिवर फ्रंट का संचालन अभी केडीए कर रहा है। साथ ही कई अन्य कार्य निजी संवेदक फर्मों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। लेकिन केडीए का प्रयास है कि इसका संचालन एक ही फर्म द्वारा किया जाए। इसके लिए एक टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इसमें इस बार इसे 30 साल के लिए लीज पर देने की योजना है। इसमें शुरूआती दो साल तक तो संवेदक फर्म को कोई भी राशि केडीए को नहीं देनी होगी। लेकिन रिवर फ्रंट से संबंधित सभी खर्चों व जिम्मेदारियों का वहन फर्म को ही करने होंगे। तीसरे साल के लिए केडीए ने 5 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। इतनी राशि या इससे अधिक देने वाली फर्म को ठेका दिया जाएगा। उसके बाद हर साल 5 फीसदी राशि बढ़ती जाएगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर दिया है। जिसमें एक माह का समय दिया गया है। 8 जनवरी तक संवेदक फर्म व कम्पनियां जो इसका संचालन करने की इच्छुक होंगी वे टेंडर में हिस्सा लेंगी। 8 जनवरी के बाद टेंडर खोले जाएगे। जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में भी केडीए ने यह प्रयास किया था। उस समय 20 साल के लिए देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन सफलता नहीं मिली थी। अब संशोधन के साथ इसे दोबारा से जारी किया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />रिवर फ्रंट सचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। समाचार पत्र में 6 दिसम्बर को पेज 5 पर' तीसरे साल में 5 करोड़ या अधिक का भुगतान करने वाली फर्म करेगी संचालन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें टेंडर से संबंधित सभी जानकारी दी गई थी। उन्हीं जानकारियों के साथ केडीए ने टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर टेंडर अमंत्रित किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 14:32:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>4 राज्यों ने किया बैन : जिस पौधे को चंबल रिवर फ्रंट में जमकर लगाया, बिना जांच के सार्वजनिक स्थानों पर लगाए खतरनाक पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[कोनोकार्पस इरेर्क्ट्स पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही मानव स्वास्थ्य व बायोडायवर्सिटी के लिए घातक है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-plant-banned-by-four-states-was-planted-extensively-on-the-chambal-river-front-and-oxygen-zone/article-128345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(2)42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोनोकार्पस इरेर्क्ट्स पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही मानव स्वास्थ्य व बायोडायवर्सिटी के लिए घातक है। इसके बावजूद केडीए ने बिना जांच परख के शहर की सड़कों, डिवाइडर, पार्कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सैकड़ों कोनोकार्पस पौधे लगा दिए। जबकि, इस पौधें के दुष्प्रभाव को देखते हुए देश के 4 बड़े राज्यों ने इसे बैन कर दिया है। क्योंकि, इन पौधों के फूलों से निकलने वाले परागरण एलर्जिक हैं, जो अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। इतना ही नहीं, अस्थमा मरीजों को सम्पर्क में आने अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यह पौधा न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं। इसके बावजूद आंखें मूंद कर इन्हें लगाने की परमिशन दी जा रही है। इसके नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए राजस्थान बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी प्रदेश में कोनोकार्पस को बैन करने की सिफारिश  की है। </p>
<p><strong>पक्षी भी नहीं बनाते घौंसला, भूजल का  दोहन </strong><br />जेडीबी कॉलेज में बोटनी प्रोफेसर डॉ. पूनम जायसवाल ने बताया कि इस पौधे पर तो पंछी भी घोंसला नहीं बनाते। श्वांस संबंधी बीमारियों के साथ भूजल भी अधिक सोखते हैं।  जिससे आसपास उगने वाली स्थानीय प्रजाति के पेड़-पौधों को पानी नहीं मिल पाता और वह सूखकर मर जाते हैं।  </p>
<p><strong>चंबल रिवर फ्रंट व ऑक्सीजोन में लगे पौधे </strong><br />केडीए ने चंबल रिवर फ्रंट व ऑक्सीजोन पार्क में भी बड़ी संख्या में कोनोकार्पस पौधे लगा दिए। वर्तमान में यह पौधे पेड़ बन गए। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, ऐसे में वह जाने-अनजाने में श्वांस से संबंधित गंभीर बीमारियों की जद में आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि केडीए के अधीन होर्टिकल्चर विभाग भी कार्यरत हैं, जहां इंजीनियरों के साथ बोटनी से जुड़े प्रोफेशनल्स भी कार्यरत होते हैं। इसके बावजूद  बिना जांच-परख और वन अधिकारियों से बिना सलाह के खतरनाक प्लांट्स लगा दिए। </p>
<p><strong>इन 4 राज्यों ने लगाया कोनोकार्पस पर प्रतिबंध</strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि सड़कों से सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी मात्रा में कोनाकार्पस लगा दिए, जो मनुष्य व बायोडायवर्सिटी के लिए भी हानिकारक है। इसके नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए देश के 4 बड़े राज्यों ने इसे लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें गुजरात, आंधप्रदेश, महाराष्ट्र के बाद अब तेलंगाना सरकार ने भी इस पौधे को बैन कर दिया है। </p>
<p><strong>शहर में यहां लग रहे यह खतरनाक पेड़-पौधे</strong><br />शहर में चंबल रिवर फ्रंट, ऑक्सीजोन पार्क, गणेश उद्यान,  डीसीएम रोड स्थित डिवाइडर, संजय नगर चौराहा, माला फाटक, डीसीएम चौराहा, सीएडी रोड स्थित डिवाइडर, सीवी गार्डन, नयापुरा स्टेडियम के सामने डिवाइडर्स सहित कई प्रमुख इलाकों व जागरूकता के अभाव में लोगों ने अपने घरों व फॉर्म पर भी कोनोकार्पस पेड़-पौधे लगे हैं। तितलियों में इंफेक्शन तक का खतरा रहता है। </p>
<p><strong>विशेषज्ञ बोले-मानव स्वास्थ्य व ईको सिस्टम के लिए घातक है कोनोकार्पस</strong><br />कोनोकार्पस पौधा एक्जोटिक (विदेशी) मैंग्रोव प्रजाति का है। वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आया कि इस पौधे से सांस संबंधी बीमारियां, खांसी, अस्थमा और एलर्जी का कारण बनता है। साथ ही  पर्यावरण व जैव विविधता के लिए भी घातक है।  वायु की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। गुजरात में हुए वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है कि कोनोकार्प्स के रोपण से ग्रीन डेजर्ट जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसे गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र सरकार ने वन और गैर-वन क्षेत्रों  में लगाने पर बैन कर दिया है। <br /><strong>-डॉ. पूनम जायसवाल, प्रोफेसर बॉटनी जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>बायोडायवर्सिटी के लिए खतरनाक कोनोकार्पस पेड़  इको फ्रेंडली नहीं है। जमीन के अंदर का सारा पानी सोंख लेता है, आसपास के पेड़ों को पनपने नहीं देता है। शहर से इसे नहीं हटाया तो भू-जल खत्म कर देगा।  जिन्हें तत्काल हरियाली चाहिए, वो इसे लगाते हैं। इस पेड़ की बड़ी आबादी ने वाष्पीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है और इसकी जड़ें जल निकासी पाइपों को अवरुद्ध कर देती हैं।  बायोडायवर्सिटी के लिए बेहद खतरनाक है। <br /><strong>-एएच जैदी, पर्यावरणविद् </strong></p>
<p>इसके पराग आंखों में जलन, सर्दी, खांसी एलर्जी, अस्थमा जैसी सांस से संबंधित बीमारियां उत्पन्न करता है। इसकी जड़े पाइपलाइन, सीवर और दूरसंचार केबल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। भूमि की नमी को सोखती है, जिससे भूमि जल संकट पैदा होता है। विदेशी प्रजाति होने से स्थानीय पौधों को नुकसान पंहुचाता है। जिससे स्थानीय जैव विविधता प्रभावित होती है। इस पर पंछी भी घौंसला भी नहीं बनाते। इनकी जगह नीम, करंज,जंगल जलेबी,कचनार जैसे पर्यावरण के अनुकूल पेड़-पौधे लगा सकते हैं।<br /><strong>-डॉ. नीरजा श्रीवास्तव, प्रोफेसर बॉटनी, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा </strong></p>
<p>इसके नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए 4 राज्यों ने कोनोकार्पस के रोपण पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, राजस्थान बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी इसे प्रदेश में बैन करने की बात की है। इसकी जड़े अंडर वाटर को खत्म करती है। फूलों से जो परागण निकलते हैं वो मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है। अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति यदि इनके सम्पर्क में आते हैं तो उन पर अटैक का खतरा अधिक रहता है। यह ज्यूलीफ्लोरा से भी घातक है।<br /><strong>-सोनू कुमार, जिला कोर्डिनेटर, बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी भारत </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यदि ऐसा है तो इसका जांच व अध्ययन करवाकर स्थानीय पौधों से रिप्लेस करवाएंगे।<br /><strong>-मुकुेश चौधरी, सचिव केडीए </strong></p>
<p>कोनोकार्पस पर काफी रिसर्च हुई है। जिसमें सामने आया कि यह एलर्जिक है और अस्थमा जैसी बीमारियों का कारण बनता है। यह न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए बल्कि ईको सिस्टम के लिए भी घातक है। कोनोकार्पस दिखने में खूबसूरत है लेकिन उतना ही घातक भी है। लोगों को इसके दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक किया जाएगा। <br /><strong>-सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा </strong></p>
<p>कोनोकार्पस न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए बल्कि बायोडायवर्सिटी के लिए भी हानिकारक है। इसके परागण हवा के साथ उड़कर सांस में जाते हैं तो अस्थमा, लंग्स और हड्डियों में दर्द संबंधित बीमारियों का कारण बनता है। इसकी जड़े इतनी गहरी होती है कि सारा भूजल सोख लेता है और अपने आसपास लगे स्थानीय पौधों को पानी नहीं मिलने से मर जाते हैं। इसकी लकड़ी सूखी होती है, जिससे आगजनी का खतरा रहता है। इसके फूलों में मकरंद (पक्षियों के लिए अमृत)नहीं होता, जिससे  पक्षियों को न्यूट्रिशन नहीं मिलता। कोई भी पक्षी इस पर घौंसला नहीं बनाता। वन विभाग इस तरह के पौध नहीं लगाता है। हमारी ओर से जिला प्रशासन सहित अन्य डिपार्टमेंट को इसके रोपण पर रोक लगाने को लिखा जाएगा।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक वन्यजीव विभाग </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 18:54:42 +0530</pubDate>
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                <title> विश्व पर्यटन दिवस आज : टूर ऑपरेटर्स के प्लान में शामिल नहीं होने से नहीं बढ़ पा रहा विदेशी पर्यटकों का ग्राफ</title>
                                    <description><![CDATA[2025 में अभी तक साढ़े छह लाख पर्यटक शहर में आए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tourism-day-today--foreign-tourists-are-not-increasing-due-to-tour-operators-not-being-included-in-their-plans/article-128059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी के किनारे व प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर शहर में चंबल रिवर फ्रंट, ऑक्सीजोन सिटी पार्क, आच्छादित दुर्लभ भीतरिया कुंड, अनोखी अधर शिला, किशोर सागर के गहरे तालाब में खड़ा जगमंदिर, चंबल की कराइयों के बीच बसा गरड़िया महादेव, और शहर के बीच स्थित राजकीय संग्रहालय व मुकुंदरा हिल्स नेशनल पार्क तथा रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व सहित शहर में एक दर्जन से अधिक ऐतिहासिक व सौन्दर्य स्थल होने के बावजूद भी शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर तरह से सौन्दर्यीकरण किया गया। जिसमें मुकुंदरा को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया गया। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चंबल रिवर फ्रंट और आॅक्सीजोन सिटी पार्क विकसित किए गए। इनको बने करीब दो वर्ष हो चुके हैं, पर अभी तक शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या के ग्राफ को हम नहीं बढ़ा पाए। शहर में वर्ष 2023 में विदेशी पर्यटक 705, वर्ष 2024 में 1107 व 2025 में अगस्त तक 499 पर्यटक आए। वहीं देशी पर्यटकों में वर्ष 2023 में करीब साढ़े नौ लाख, 2024 में दस लाख व 2025 में अभी तक साढ़े छह लाख पर्यटक शहर में आए। कोटा में जब भी पर्यटकों की संभावना की बात होती है तो कहा जाता है एयरपोर्ट नहीं होना सबसे बड़ी कमी है। कोटा पर्यटन विभाग के अधिकारियों से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से लेकर अगस्त 2025 तक कोटा में कुल 2311 विदेशी पर्यटक आए।</p>
<p>मैं हिन्दुस्तान को पसन्द करती हूं, इंडिया आ चुकी हूं, काफी सुन्दर है। पुष्कर और वृन्दावन तो मैं कई कई दिन रुकी हूं। कोटा नहीं देखा है। मौका मिला तो आउंगी। आई लाइक इंडिया। <br /><strong>- स्टेला मेकरूफ, फ्रांसिसी पर्यटक नाइस </strong></p>
<p>टूर आॅपरेटर्स ने अपने टूर प्लान में बूंदी व जयपुर को शामिल कर रखा है, जिसके चलते शहर में खूबसूरत इमारतें होने के बावजूद भी बहुत ही कम तादाद में विदेशी पर्यटक आते हैं।<br /><strong>- अख्तर हुसैन रेलवे कॉलोनी कोटा </strong></p>
<p>शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए आगामी जनवरी में हाड़ौती ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जा रहा है, जिसके लिए अभी से ही टूर आॅपरेटर्स सहित अन्य लोगों से संपर्क किया जा रहा है।<br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव व्यापार संघ</strong></p>
<p>शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमने दशहरा मेले को विभिन्न आॅनलाइन प्लेटफार्म पर लाया है। साथ ही गरड़िया महादेव को जापान व फ्रांस के ट्रैवल मार्ट में प्रदर्शित किया है। साथ ही विभाग के सोशल मीडिया पेज पर समय-समय पर शहर की ऐतिहासिक जानकारी अपडेट करते हैं।<br /><strong>- संदीप श्रीवास्तव, सहायक निदेशक पर्यटन, कोटा</strong></p>
<p>शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शहर में सिटी पार्क, आॅक्सीजोन पार्क सहित अन्य विभिन्न स्थान हैं। साथ ही शहर में ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जा रहा है, जिससे शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विश्व पर्यटन दिवस पर विभिन्न आयोजन आयोजित होंगे। साथ ही हमारा मार्केटिंग विभाग भी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काम कर रहा है।<br /><strong>-विकास पांड्या, डायरेक्टर टूरिज्म विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 17:00:05 +0530</pubDate>
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                <title>सफेद हाथी बन गया रिवर फ्रंट का घाटा, अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर</title>
                                    <description><![CDATA[रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/river-front-has-become-a-white-elephant--incurring-losses/article-116244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास द्वारा बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसका संचालन करने वाली फर्म ही नहीं मिल रही है। जिससे रिवर फ्रंट से केडीए का हर महीने का घाटा कम नहीं हो रहा है। चम्बल नदी के दोनों छोर पर करीब 1442 करोड़ की लागत से बने रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में कोटा विकास प्राधिकरण  द्वारा ही किया जा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं के लिए गुरुग्राम की फर्म द्वारा मेनपावर उपलब्ध करवाई हुई है। जिसकी एवज में केडीए को हर महीने करीब एक से सवा करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है। उसके अलावा बिजली का बिल समेत अन्य व्यवस्थाओं पर भी केडीए को करीब एक करोड़ का खर्चा करना पड़ रहा है। हर महीने करीब दो करोड़ से अधिक का खर्चा करने के बाद भी केडीए को केवल आधी ही एक करोड़ रुपए करीब ही आय हो रही है। जिसमें  रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है। </p>
<p><strong>अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर</strong><br />केडीए की ओर से पूर्व में यहां दोनों छोर पर बनी दुकानों को किराए पर देने की योजना थी। लेकिन जब दुकानों से लेकर पूरे रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने की योजना बनी तो अभी तक उन दुकानों को भी किराए पर नहीं दिया जा सका है। </p>
<p><strong>हर साल 6 करोड़ देने को कोई तैयार नहीं</strong><br />केडीए की ओर से जिस तरह से रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। उस हिसाब से पहले साल में जो भी फर्म इसका संचालन करेगी उसे केडीए को कुछ नहीं देना होगा। दूसरे साल में 1.80 करोड़  रुपए सालाना केडीए को देना होगा। तीसरे साल में 3 करोड़ और चौथे साल में फर्म द्वारा 6 करोड़ रुपए वार्षिक केडीए को देना होगा। चौथे साल में जो फर्म 6 करोड़ या उससे अधिक का भुगातन केडीए को कर सकेगा उसी फर्म को इसका  ठेका दिया जाएगा। यह ठेका 20 साल के  लिए दिया जाना है। जानकारों के अनुसार हालत यह है कि अभी तक इतनी अधिक राशि का भुगतान करने वाली कोई भी फर्म केडीए को नहीं मिली है। जबकि वर्तमान में केडीए को हर महीने घाटा हो रहा है और केडीए मेन पावर उपलब्ध करवाने वाली फर्म को भुगतान कर रही है। जबकि केडीए के टेंडर डॉक्यूमेंट के अनुसार फर्म को उस घाटे को सहन करते हुए केडीए को भुगतना करना होगा।  सूत्रों का कहना है कि जब तक फर्म को इससे कमाई नहीं होगी तब तक कोई भी फर्म इसे लेकर नुकसान में नहीं जाना चाहती। ऐसे में यह केडीए के लिए सफेद हाथी बन गया है। </p>
<p><strong>बोट संचालक फर्म ने दी चुनौती</strong><br />सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने का जैसे ही टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार हुआ और आॅनलाइन अपलोड किया गया। वैसे ही रिवर फ्रंट एरिया में बोट संचालन फर्म ने केडीए को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। सूत्रों के अनुसार संचालक फर्म का कहना है कि उनका 15 साल का एमओयू हुआ है। ऐसे  में केडीए अब इसे किसी ओर को कैसे दे सकता है। इस संबंध में केडीए की ओर से कोर्ट में जवाब भी पेश किया गया है। </p>
<p><strong>एक ही फर्म को देने की योजना</strong><br />रिवर फ्रंट से केडीए को हर महीने हो रहे घाटे को कम करने के लिए केडीए द्वारा इसका संचालन एक ही फर्म को देने की योजना है। जिसके लिए केडीए द्वारा टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। ुजिसे आॅनलाइन अपलोड किया गया। करीब एक माह से अधिक का समय होने पर जयपुर की सिर्फ एक ही फर्म ने इसके संचालन के लिए टेंडर डाला। लेकिन वह फर्म भी तकनीकी बिड़  में सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। उसके बाद से अभी तक दोबारा नया टेंडर नहीं किया जा सका है। </p>
<p><strong>पर्यटन को बढ़ावा देने के हों प्रयास</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट न केवल कोटा वासियों के लिए वरन् पूरे देश में पर्यटन का बेहतर स्थल बना है। इसे देखने के लिए देशी विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। इसका निर्माण करने में जनता के करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। ऐसे में इसे कमाई का जरिया बनाने के स्थान पर पर्यटन को बढ़ाने देने  के लिए इसका देश विदेश व पर्यटन टूर में शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। देशी विदेशी पर्यटक अधिक आएंगे तो आय भी बढ़ेगी। <br /><strong>-महेश अग्रवाल, इंद्र विहार</strong></p>
<p><strong>प्रचार-प्रसार हो तो कई फर्म आ सकती हैं</strong><br /> रिवर फ्रंट अपने आप में अनोखा पर्यटन स्थल बनाया गया है। इसका संचालन करना वैसे तो आसान नहीं है। लेकिन केडीए अधिकारी यदि प्रयास करें और इसका उचित माध्यम से सही जगह पर प्रचार-प्रसार करें। देश विदेश में इस तरह के पर्यटन स्थलों का संचालन करने वाली बड़ी फर्मो से सम्पर्क करें तो ऐसी कई फर्म मिल सकती हैं जो इसका लाभ के साथ संचालन कर पाएंगी। घाटे में होने से इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। वरन् इसे बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिए। <br /><strong>-रिंकल माहेश्वरी, राजीव गांधी नगर </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट को एक ही फर्म द्वारा संचालित करने के लिए इसका टेंडर जारी किया था। जयपुर की एक फर्म ने टेंडर डाला था। लेकिन वह फर्म सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। फिलहाल अभी इसका दोबारा से कोई टेंडर नहीं किया गया है। वर्तमान स्थिति जस की तस है। रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में केडीए द्वारा ही किया जा रहा है। भविष्य में उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।  <br /><strong>-महेन्द्र सक्सेना, एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 15:20:32 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशी पावणे लाने वाले ऑपरेटर्स ने देखा कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर वर्तमान में पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध हो चुका है।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/foreign-tourists-operators-visited-kota/article-98761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(3)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  कोटा को हाड़ौती पर्यटक सर्किट से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है। जिसके लिए कोटा में विदेशी पर्यटकों का ठहराव हो यहां के पर्यटन उद्योग को पंख लग सकें। इसके लिए जर्मनी के 350 से अधिक टूर आॅपरेट करने वाले टूर आॅपरेटर जोगेंद्र देसवाल को चंबल रिवर फ्रंट का भ्रमण कराया और कोटा महोत्सव के साथ विभिन्न दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कराया गया। जिससे विदेशी पर्यटक कोटा आ सकें। हाड़ौती पर्यटन में कोटा जुड़ा नहीं होने से विदेशी सैलानी बूंदी देखकर ही लौट जाते है। जिससे कोटा हाड़ौती कला संस्कृति का व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो सका है। कोटा शहर वर्तामन में पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध हो चुका है।  विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के लिए कोटा शहर में वह सब कुछ है जो पूरे प्रदेश में कहीं नहीं हैं। बस इसको देश विदेश में पर्यटन के मानचित्र पर उभारने  आवश्यकता है। विदेशी पर्यटक कोटा के समीप बूंदी देखने तो आते हैं किन्तु कोटा नहीं आते। कुछ विदेशी पर्यटक अगर कोटा आते हैं तो वह निजी ट्रैवल कंपनियों व टूर आॅपरेटर्स की मेहनत का नतीजा है। कोटा में हवाई सेवा शुरू होने से भी पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>कोटा महोत्सव से कार्यक्रम अनवृत करने होंगे</strong><br />रॉयल हाडोती ट्रेवल्स के निदेशक नीरज भटनागर ने बताया कि विदेशी पर्यटकों हमेशा नया देखने को चाहिए। हमारे पास रिवर फ्रंट, सिटी पार्क, मुकुदरा टाइगर है। कई प्राचीन इमारते, किला, संग्रालय है। लेकिन विदेशों बंूदी के इतिहास और किलों वहां की लोक कला संस्कृति का हीव्यापक प्रचार प्रसार है लेकिन कोटा के इतिहास और यहां के वैभव का विदेशी सैलानियों के बीच व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने वो बूंदी से वापस लौट जाते है कुछ टूर वाले एक दिन के भ्रमण के लिए कोटा लाते लेकिन उनकी संख्या काफी कम है। कोटा महोत्सव जैसे कार्यक्रम यहां अनवरत करने होंगे तभी विदेशी पर्यटक आ सकेंगे। </p>
<p>कोटा को विदेशी पर्यटकों से जोडने के लिए सभी टूर आॅपरेटर अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है। कोटा जर्मन पर्यटकों से जोड़ने के लिए 22 दिसंबर  टीसीआई (एसआईटीए) के टूर जर्मन बाजार प्रमुख  जोगेंद्र देसवाल व अन्य टूर आॅपरेटर को कोटा भ्रमण कराया गया। साथ ही  चंबल रिवर फ्रंट  का भ्रमण  कराया गया साथ यहां के विदेशी पर्यटकों को भ्रमण कराने वाले स्थानों का भ्रमण कराया गया।  देसवाल ने राजस्थान में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए 350 से अधिक जर्मन समूहों को यहां भ्रमण करा चुके है। उनको आगामी टूर में कोटा को भी शामिल करने के लिए आग्रह किया है। विदेशियों तक पहुंचाने के लिए  दिल्ली मुंबई के टूर आॅपरेटरों से जोड़ने के लिए भी कहा है। <br /><strong>-नीरज भटनागर, हाडोती पर्यटन विकास सोसायटी (एचटीडीएस) के उपाध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>कोटा इतिहास की कई विदेशी टूर आॅपरेटरों नहीं है जानकारी</strong><br />कोटा में भ्रमण के बाद पता चला यहां विदेशी सैलानियों के अब भ्रमण के लिए कई दर्शनीय स्थल है। रिवर फ्रंट के अलावा गढ पैलेस, संग्रालय, सिटी पार्क, निश्चित ही विदेशी सैलानियों को आकर्षित कर सकें अभी यहां बेहतरीन होटल के चेंन की कमी है। विदेशी पर्यटक समूह में आते है। चालीस से पचास लोगों समूह आता यहां फॉरेन टूरिस्ट प्रमोट किए जा सके ऐसी होटलों की कमी है। अतिथि देवो भव वाली बात जो होती हैं वह हमारे क्षेत्र में नहीं हैं। लेकिन अब कोटा महोत्सव देकर यह भ्रांति भी खत्म हो गई। यहां लोगों को पर्यटकों लेकर अच्छा उत्साह है।  किसी भी ऐतिहासिक जगह  को टूर आॅपरेटर प्रमोट करता है। इसके लिए टूर आॅपरेटस और दिल्ली-मुंबई में ट्रेवल कंपनीयों को कोटा के लिए प्रमोट करना होगा। उन्हें वहां जाकर बताना होता है या बुलाना पड़ेगा कि हमारे पास ये चीजें हैं। इसे देखो और बताओ आपको क्या चाहिए । तभी पर्यटक बढ़ सकेंगे। मैने यहां स्थल देख लिए आगामी टूर लाने पर कोटा को भी शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। <br /><strong> - जोगेंद्र देसवाल, टीसीआई, एसआईटीए जर्मन टूर आॅपरेटर</strong></p>
<p><strong>पर्यटकों की संख्या बढ़ाने किए जा रहे प्रयास </strong><br />कोटा के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान की ओर से अनवरत प्रयास किए जा रहे है। दिल्ली, मुंबई और अन्य स्थानों के होटल, टूर आॅपरेटरों को कोटा महोत्सव व और कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लगातार जोड़ने  का प्रयास किया जा रहा है। देशी, विदेशी पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए पड़ोसी राज्यों की समाज सेवी संस्थाओं संपर्क उन्हें कोटा भ्रमण कराया जा रहा जिससे यहां पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार प्रसार हो सकें। <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, अध्यक्ष, होटल फेडरेशन आॅपर राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 16:27:47 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - अब अनजान व्यक्ति भी देख व पढ़कर समझ सकेंगे मॉन्यूमेंट के बारे में</title>
                                    <description><![CDATA[रिवर फ्रंट के मान्यूमेंट का डिस्प्ले नहीं होने का मामला दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---now-even-unknown-people-will-be-able-to-see-and-read-and-understand-about-the-monuments/article-98515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555445.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से चम्बल नदी के किनारे पर बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट पर उद्घाटन के सवा एक साल बाद मॉन्यूमेंट का नाम व उनका डिस्प्ले किया गया है। जिससे अब अनजान व्यक्ति भी वहां आने पर उन मॉन्यूमेंट को देखकर और उनके बारे में पढ़कर उनकी जानकारी प्राप्त कर सकेगा। रिवर फ्रंट का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद  सितम्बर 2023 में इसका उद्घाटन कर आमजन के लिए खोल दिया गया था। चम्बल नदी के दोनों छोर पर कोटा बैराज से नयापुरा स्थित रियासतकालीन पुलिया तक करीब साढ़े 5 कि.मी. एरिया में करीब 26 घाट बनाए गए हैं। करीब 1442 करोड़ की लागत से बनाने के बाद भी रिवर फ्रंट के घाटों पर बनी इमारतों व मॉन्यूमेंट के बारे में कोई जानकारी या विवरण नहीं दिया हुआ था। जिससे वहां आने वाले स्थानीय लोग हो या देशी विदेशी पर्यटक। उनके लिए अधिकतर मॉन्यूमेंट देखने में तो आकर्षक थे लेकिन बाकी कुछ पता नहीं लग रहा था कि वह क्या है। कहां से लिया गया है। इसे यहां क्यों बनाया गया है। पर्यटक आते थे उन मॉन्यूमेंट को देखकर आगे बढ़ जाते थे।</p>
<p><strong>न गाइड थे न जानकारी देने वाला</strong><br />रिवर फ्रंट पर बने मॉन्यूमेंट की जानकारी देने केी लिए केडीए की ओर से वहां न तो गाइड की व्यवस्था की गई थी और न ही उनका डिस्प्ले किया गया था। सिर्फ गोल्फ कार्ट का उपयोग करने वाले पर्यटकों को उनके  चालक ही यह बताते जाते थे कि वह क्या है। उसके अलावा उनकी पूरी जानकारी पर्यटकों को नहीं मिल रही थी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने कई बार उठाया था मामला</strong><br />रिवर फ्रंट के मान्यूमेंट का डिस्प्ले नहीं होने का मामला दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया था। समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया था। समाचार पत्र में पहले तो 22 मई 2024 को पेज 5 पर ‘ मॉन्यूमेंट तो अच्छे हैं उनका विवरण क्यों नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित ुकिया था।  उसके बाद 15 अक्टूबर 2024 को भी पेज 5 पर क्या देख रहे हैं, पर्यटकों को पता ही नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किए थे। उन समाचारों में वहां आने वाले लोगों व पर्यटकों की भावनाओं को देखते हुए मॉन्यूमेंट का डिस्प्ले किए जाने का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उस समय केडीए अधिकारियों ने आशवस्त किया था। यह व्यवस्था शीघ्र कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रिवर फ्रंट के दोनों छोर पर बने घाटों पर हर घाट का नाम, वहां बने मॉन्यूमेंट का नाम और उसके सामने उनका पूरा विवरण लिखा गया है। अंग्रेजी व हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखा गया है। जिससे देशी विदेशी पर्यटकों को उनकी जानकारी आसानीसे मिल सके। हालांकि  मॉन्यूमेंट का डिस्प्ले शुरुआत में होना था लेकिन उसमें कुछ देरी हुई है। <br /><strong>- भूपेन्द्र बंशीवाल, एक्सईएन कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2024 14:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>क्या देख रहे हैं, पर्यटकों को पता ही नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[उद्घाटन के बाद से लेकर अभी तक वही पुरानी सुविधाएं ही है। सिर्फ वाटर पार्क को शुरु किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-do-not-know-what-they-are-looking-at/article-93117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट को शुरु हुए एक साल हो चुका है।  लेकिन अभी तक भी यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया है। न तो पूरी दुकानें शुरू हुई और न ही मॉन्यूमेंट की पूरी जानकारी लिखी गई है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से कांग्रेस सरकार के समय में चम्बल नदी के दोनों किनारों पर रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया। करीब साढ़े पांच कि.मी. के इस रिवर फ्रंट को शुरु हुए अभी एक साल हो चुका है। इस दौरान केडीए की ओर से यहां कोई सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई है। उद्घाटन के बाद से लेकर अभी तक वही पुरानी सुविधाएं ही है। सिर्फ वाटर पार्क को शुरु किया गया है। </p>
<p><strong>गिनती की दुकानें, पर्यटकों को सुविधाएं नहीं</strong><br />रिवर फ्रंट पर नदी के दोनों किनारों पर एक से बेहतर एक घाट तो बनाए गए है। उन घाटों के बीच में  व्यवसायिक दुकानें भी बनाई गई है। लेकिन हालत यह है कि उनमें से गिनती की कुछ ही दुकानें शुरू हो सकी है। ऐसे में यहां घूमने आने वालों को खाने-पीने से लेकर खरीदारी की कोई सुविधा नहीं है। </p>
<p><strong>बरसात में बोटिंग भी हुई बंद</strong><br />रिवर फ्रंट पर आने वालों के लिए केडीए की ओर से बोटिंग की सुविधा शुरू की गई थी। इसे शुरू हुए अधिक समय भी नहीं हुआ था कि बरसात में बैराज से पानी छोड़ने के दौरान  उसे भी बंद कर दिया गया। अब अक्टूबर के बाद ही फिर से बोटिंग शुरू होने की संभावना है।  जानकारों के अनुसार केडीए ने आॅफ लाइनकेसाथ ही आॅनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा की वेबसाइट के माध्यम से की है। लेकिन वेबसाइट पर आॅनलाइन बुकिंग करवाने का रेस्पोंस कम आ रहा है। </p>
<p><strong>नदी में गिर रहा नालों का गंदा पानी </strong><br />रिवर फ्रंट पर नदी में नालों का गंदा पानीजाने से रोकने के लिए एसटीपी बनाया गया था। साथ  ही नदी में गिर रही सीवरेज लाइनों को भी शिफ्ट ुकिया गया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यहां के अधिकतम इंजीनियर भी बदल गए हैं। जानकारों के अनुसार वर्तमान में रिवर फ्रंट की तरफ नदी में नालों व सीवरेज का गंदा पानी गिर रहा है। ऐसा अधिकतर लाड़पुरा करबला व शिवदास घाट मुक्तिधाम की तरफ से हो रहा है। </p>
<p><strong>मॉन्यूमेंट के नाम हैं , जानकारी नहीं</strong><br />रिवर फ्रंट का निर्माण करते समय बनाए गए मॉन्यूमेंट के नाम तो सभी 26 स्थानों पर लिखे गए हैं। कई की पहचान तो इमारत देखने से ही हो रही है। लेकिन जिन लोगों को उनके बारे में पता नहीं है वे तो सिर्फ बिल्डिंग को देखकर ही आगे बढ़ रहे है। नदी के दोनों छोर पर जो 26 मॉन्यूमेंट व घाट बनाए गए हैं। वे कहां से लिए गए हैं। उनका क्या इतिहास है। उनके बारे में लोगों को कोई जानकारी अभी तक भी नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>बार कोड़ से जानकारी देने की थी योजना</strong><br />कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए रिवर फ्रंट पर उस समय इंजीनियरों व आर्किटेक्ट द्वारा बताया गया था कि हर मॉन्यूमेंट की जानकारी वहां लगे बार कोड़ से मिलेगी। जैसे ही मोबाइलसे बार कोड को स्केन किया जाएगा वैसे ही उसकी जानकारी मिलेगी। लेकिन हालत यह है न तो बार कोड़ लगे हैं और न ही लिखित में कहीं जानकारी दी गई है। </p>
<p><strong>अच्छी चीज है सुुविधाएं बढ़नी चाहिए</strong><br />लोगों का कहना है कि रिवर फ्रंट शहर में एक अच्छा पर्यटन स्थल बना है। जिसे कोटा ही नहीं देशभर से लोग देखने आ रहेहै। ऐसे में इसकी सही ढंग से रखरखाव व सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।  </p>
<p><strong>दादाबाड़ी निवासी महेश कुमार शर्मा</strong> ने बताया कि एक साल पहले जिस तरह की स्थिति थी अभी भी वही स्थिति है। न तो अधिक दुकानें शुरू हुई हैं और न ही कोई अन्य सुविधाएं है। </p>
<p><strong>बसंत विहार निवासी नीरज सुमन</strong> ने बताया कि रिवर फ्रंट पर टिकट की रेट बढ़ाकर गोल्फ कोर्ट की सुविधा दी गई है। लेकिन यदि कोई गोल्फ कोर्ट की जगह पैदल  ही घूमना चाहता है तब भी उसे प्रवेश टिकट तो उतना ही देना पड़ेगा। ऐसा करना गलत है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रिवर फ्रंट पर सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। यहां की दुकानों को किराए पर देने की योजना थी।लेकिन अब सभी दुकानों को एक साथ लीज देने की योजना से चलते दुकानों को शुरू करने में देरी हो रही है। मॉन्यूमेंट की जानकारी भी लिखी जाएगी। प्रवेश टिकट में 200 रुपए के साथ ही 100 रुपए गोल्फ कोर्ट के भी शामिल है।  <br /><strong>- भूपेन्द्र बंशीवाल, एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 16:32:52 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व पर्यटन दिवस आज- रिवर फ्रंट भी नहीं बढ़ा पाया विदेशी पर्यटकों का ग्राफ</title>
                                    <description><![CDATA[बूंदी प्राकृतिक, ऐतिहासिक धरोहर से समृद्ध शहर है। इस तरह की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत कोटा में नहीं है।     ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tourism-day-today---river-front-also-could-not-increase-the-graph-of-foreign-tourists/article-91692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल के खुले विहंगम पाट के नजदीक प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित दुर्लभ भीतरिया कुंड, अनोखी अधर शिला,किशोर सागर के गहरे तालाब में खड़ा जगमंदिर, चंबल की कराइयों में बसा गरडिया महादेव का प्राकृतिक सौन्दर्य, देश का कदाचित सबसे बड़ा रिवर फ्रंट और अद्भुत आक्सीजोन पार्क होने के बावजूद बूंदी के मुकाबले विदेशी पर्यटकों को कोटा लाने में हम सफल क्यों नहीं हो पा रहे हैं।  हाड़ौती में केवल बूंदी में ही सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोटा शहर का हर तरह से सौन्दर्यीकरण किया गया। मुकुंदरा को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया । विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए  चंबल रिवर फ्रंट और आॅक्सीजोन सिटी पार्क विकसित किए । इनको बने पूरा एक वर्ष हो गया किंतु विदेशी पर्यटकों की संख्या के ग्राफ को हम नहीं बढ़ा पाए। यहां पूरे एक साल में सिर्फ 400 विदेशी पर्यटक यहां आए हैं। जिनमें से 113 विदेशी पर्यटकों ने आॅक्सीजोन पार्क और 279 ने चंबल रिवर फ्रंट को देखा। कोटा में जब भी पर्यटकों की संभावना की बात होती है तो कहा जाता है  एयरपोर्ट  नहीं होना सबसे बड़ी कमी है। दूसरी तरफ देखें तो बूंदी में एयरपोर्ट नहीं होने के बावजूद भी विदेशी पर्यटक वहां खिंचे चले आते है।  कोटा व बूंदी पर्यटन विभाग के अधिकारियों से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से लेकर अगस्त 2024 तक कोटा में कुल 5970 विदेशी पर्यटक आए वहीं बूंदी  में  33,851 विदेशी सैलानी आए। </p>
<p>विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने पर्यटन विभाग के अधिकारी व शहर के लोगों से बात की कि क्या वजह है कि विदेशी  सैलानी बूंदी  तो काफी संख्या में आते है और कोटा वहां से नजदीक होने के बाद भी फॉरेन टूरिस्ट बहुत ही कम तादाद में आते हैं। उन लोगों  का कहना था कि बूंदी प्राकृतिक, ऐतिहासिक धरोहर से समृद्ध शहर है। इस तरह की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत कोटा में नहीं है।  पर्यटन उद्योग राजस्व के मुख्य स्त्रोतों में से एक होता है। विदेशी पर्यटक जितने ज्यादा आएंगें वह डॉलर में मुद्रा का निवेश करेंगें उससे उस शहर व राज्य के रेवेन्यू में इजाफा होगा । साथ ही उस शहर की इमेज भी बनती है। वह शहर व देश पर्यटन के नक्शे पर दुनिया में उभर कर सामने आता है।</p>
<p><strong>कोटा एवं बूंदी  में आने वाले विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा </strong><br /><strong>(स्त्रोत- कोटा एवं बूंदी पर्यटन विभाग)</strong><br /><strong>वर्ष    कोटा    बूंदी </strong><br />2019    2867    14,660<br />2020    721    4183<br />2021    154    52<br />2022    651    2379<br />2023     705    7406<br />2024     872    5171<br />(अगस्त माह तक)<br />कुल    5970    33,851</p>
<p>बूंदी  में भी कोरोना के बाद से विदेशी पर्यटक ज्यादा नहीं है।  चंबल  रिवर फं्रट विदेशी पर्यटकों के लिए नहीं बनाया यह टूरिज्म प्रमोशन के उद्देश्य के लिए बनाया और हमारा यह उद्देश्य सफल हो रहा है। प्रतिदिन डेढ़ से 2 हजार व्यक्ति इसे देख रहे हैं। कोटा का हाईली टूरिज्म है यहां हाइली पेड ट्यूरिस्ट आता है। बूंदी में 200-300 में कमरा मिल जाता है यहां पांच हजार से कम में अच्छा कमरा नहीं मिलता है। बूंदी में  हर तरह का टूरिस्ट आता है। बूंदी में कोई ऐसा बूम नहीं आया हुआ है। <br /><strong>- संदीप श्रीवास्तव, सहायक निदेशक पर्यटन, कोटा</strong><br /> <br />कोविड से पहले बूंदी में सालाना 15 हजार विदेशी पर्यटक  आते थे। उसके बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई ।  अब बूंदी  का पर्यटन पटरी पर आ रहा है ।  कोटा को नए शहर की तरह डवलप किया है। जैसे रिवर फ्रंट भी बनाया वह नए स्टाइल में बनाया है। विदेशों में ऐसे कई बने हुए है। बूंदी  में प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक और स्थल है उस तरह के कोटा में नहीं हैं। यहां  बावड़ियां और कुंड , झीलें, छतरियां है। विदेशी पर्यटक इन्हीं चीजों को देखने यहां आते हैं। पुरानी हेरीटेज, मॉन्यूमेंट्स कोटा में नहीं हैं।  बूंदी  की चित्रशैली विश्व विख्यात हैं।  वॉल पेंटिंग्स और रॉक पेंटिंग्स देखने विदेशी टूरिस्ट आते हैं।<br /><strong>- प्रेम शंकर सैनी, सहायक पर्यटन अधिकारी, बूंदी  जिला </strong></p>
<p>चंबल रिवर फ्रंट देखने फॉरेन ट्रिस्ट क्यों नहीं आ रहे हालांकि वह बहुत सुंदर है।  बूंदी में वहां के कल्चर और आर्ट से फॉरेनर्स आकर्षित है। वहां की मिनीएचर पेंटिंग्स दुनियाभर में प्रसिद्ध है।  कोटा में बहुत स्कोप है । हम टूरिज्म को प्रमोट कर सकते है।  हमारे यहां ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसे देखकर बोले कि एक्सक्लूसिव है।  कैथून का कोटा डोरिया को ग्रो करें।  उसके साथ ही आर्ट और कल्चर को दिखाएं तो काफी विदेशी टूरिस्ट यहां भी आएंगें।<br /><strong>- आभा जैन, डायरेक्टर, लॉरेट पब्लिक स्कूल</strong></p>
<p>बूंदी बहुत सालों से टूरिस्ट सर्किट में आया हुआ है।  बूंदी के पुराने शहर का लुक टिपिकल ओल्ड शहरों की तरह है जिसे विदेशी देखना चाहते हैं। ये उन्हें  बूंदी  में मिलता है।   बूंदी की छोटी-छोटी गलियों में बनी हवेलियां, होटल्स और रिसोटर््स में तब्दील हो गई है। उनमें प्राचीन व टिपिकल शैली देखने को मिलती है। वह विदेशियों को आकर्षित करती है। कोटा में बना सिटी पार्क मॉर्डन पार्क है टूरिस्ट को आकर्षित करने की चीज नहीं है।   विदेशी टूरिस्ट के लिए  कोटा में हेरीटेज होटल्स नहीं  है। कोटा में हेरीटेज को डेवलप करना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. जे.एस. सरोया, डायरेक्टर, सरोया आई हॉस्पिटल</strong></p>
<p>कोटा में पर्यटन को बढ़ाने के लिए अंतरराष्टÑीय स्तर पर प्रमोशन जरूरी है। इसके लिए ब्रांड अंबेसडर ऐसा चेहरा हो जो इसे प्रमोट करे। प्राकृतिक सौन्दर्य बिखेरे चंबल गार्डन पर कोई फोकस नहीं है। उसको भी डेवलप किया जाना चाहिए। कोटा को लेकर दुष्प्रचार किया हुआ है कि कानून व्यवस्था अच्छी नहीं है। विदेशी पर्यटक ठहरने के लिए लक्जरी व्यवस्था चाहते है।  यहां पांच व सात सितारा होटल की चेन नहीं है।  एयरपोर्ट बहुत जरूरी है।  मुकंदरा को भी राष्टÑीय व अंतरराष्टÑीय स्तर पर प्रमोट किया जाना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. इकराम खान, डायरेक्टर, महात्मा गांधी आईटीआई कॉलेज एवं महात्मा गांधी हॉस्पिटल बोरखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 17:52:33 +0530</pubDate>
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                <title>रिवर फ्रंट की दुकानों को लीज पर देने की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अधिकारियों ने इस संबंध में कार्यवाही शुरु कर दी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparation-to-lease-the-shops-of-river-front/article-90868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल पर अब आय बढ़ाने के लिए कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा यहां की दुकानों को लीज पर देने की तैयारी की जा रही है। जिससे केडीए को हर महीने करीब  करोड़ रुपए से अधिक की आय हो सकेगी। कांग्रेस सरकार के समय में रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया था। जिसका उद्घाटन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले 12 सितम्बर 2023 को किया गया था। उस समय जल्दबाजी में शुरु करने के कारण यहां प्रवेश टिकट की सुविधा तो शुरु कर दी गई थी। लेकिन दुकानों को पूरी तरह से शुरू नहीं किया जा सका था। इसका कारण दुकानों के आवंटन प्रक्रिया में देरी होना व दुकानदारों द्वारा दुकानें आवंटन करवाने के बाद भी शुरू नहीं करना रहा था। हालांकि एक कारण उस समय इसका मामला एनजीटी में विचाराधीन होना भी बताया जा रहा था। लेकिन अब एनजीटी से इसे क्लीन चिट मिल गई है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद अब इससे संबंधित विवाद भी समाप्त हो गए हैं। लेकिन हालत यह है कि उद्घाटन के एक साल बाद भी यहां अभी तक पूरी तरह से दुकानों का आवंटन व शुरुआत नहीं हो सकी है। जिससे यहां पर्यटन तो आ रहे हैं लेकिन उन्हें खाने-पीने व खरीदारी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>185 दुकानें हैं रिवर फ्रंट पर</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट के दोनों छोर पर कुल 185 दुकानें बनाई गई है। उन दुकानों को रेस्टोरेंट समेत अन्य उपयोग के लिए बनाया गया है। करीब 1 लाख 75 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में इन दुकानों का निर्माण किया गया है। लेकिन वर्तमान में उनमें से मात्र आधा दर्जन से अधिक ही दुकानें संचालित हो रही है। जबकि अधिकतर बंद हैं। आवंटन के बाद भी दुकानदार उन्हें शुरू नहीं कर रहे हैं। ऐसे में केडीए की ओर से उनका आवंटन निरस्त कर उनका नए सिरे से आवंटन किया जाना है। सूत्रों के अनुसार केडीए का प्रयास है कि इन दुकानों को अलग-अलग आवंटित करने के  स्थान पर एक ही कम्पनी को लीज पर दे दिया जाए तो वही अपने हिसाब से उन दुकानों का सचालन करेगी। जिससे दुकानों के लिए निर्धारित की गई प्रति वर्ग फीट 59 रुपए के हिसाब से 185 दुकानों को लीज पर देने से केडीए को हर महीने करीब 1 करोड़ 3 लाख 25 हजार रुपए की आय होगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर केडीए को आय से अधिक करीब दो गुना खर्चा करना पड़ रहा है। इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इस स्थिति को बयां किया था। दैनिक नवज्योति में 6 सितम्बर पेज दो पर आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद से अधिकारी यहां आय बढ़ाने के प्रयास में जुटे। गत दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया था। उस दौरान केडीए अधिकारियों को यहां आय बढ़ाने के निर्देश दिए थे। लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अधिकारियों ने इस संबंध में कार्यवाही शुरु कर दी है। </p>
<p><strong>प्रवेश टिकट से भी हर महीने 1 करोड़ की आय</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर उद्घाटन के बाद से ही यहां प्रवेश शुरु कर दिया था। प्रवेश के लिए दो सौ रूपए प्रति टिकट की दर निर्धारित की गई है। साथ ही विद्यार्थियों की यह दर आधी रखी गई है। रिवर फ्रंट पर होने वाली आय केडीए के खाते में जाती है लेकिन रिवर फ्रंट का संचालन करने के लिए मेन पावर गुरुग्राम की निजी फर्म द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है।  सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट पर रोजाना जितने लोग आ रहे हैं उनसे केडीए को करीब 1 करोड़ रुपए महीना आय हो रही है। </p>
<p><strong>नो प्रोफिट, नो लोस पर हो सकेगा संचालन</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर मेन पावर सप्लाई करने की एवज में केडीए द्वारा निजी फर्म को हर महीने करीब दो करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में केडीए को मात्र प्रवेश टिकट से 1 करोड़ रुपए की ही आय हो रही है। वहीं दुकानों को लीज पर देने से केडीए को हर महीने 1 करोड़ रुपए से अधिक की आय और हो सकेगी। हालांकि यहां शूटिंग, वाटर पार्क व अन्य व्यवस्थाओं से भी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन वर्तमान में आय से दो गुना खर्चा करना पड़ रहा है। जबकि दुकानों को लीज पर देने से केडीए द्वारा यहां हर महीने एक करोड़ रुपए और आय होने से कम से कम नो प्रोफिट नो लोस पर संचालन हो सकेगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रिवर फ्रंट की दुकानों को शीघ्र शुरु करने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। पूर्व में दुकानें अलग-अलग आवंटित करने की योजना थी। लेकिन अब सभी दुकानों को एक साथ निजी कम्पनी को लीज पर देनी की योजना है। जिससे केडीए को एक मुश्त करीब 1 करोड़ 3 लाख रुपए महीना की आय दुकानों से हो सकेगी। जो अधिक राशि देगा उसे ही दिया जाएगा। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 17:15:43 +0530</pubDate>
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                <title>सीवर से बिगड़ रहा रिवर फ्रंट का नजारा </title>
                                    <description><![CDATA[चम्बल नदी में गंदे नालों का पानी नहीं जाए उसे रोकने के लिए एसटीपी का निर्माण भी कराया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sewage-is-spoiling-the-view-of-the-river-front/article-90780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/seawar.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास ने करोड़ों रुपए खर्च कर विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का  निर्माण तो करवा दिया। लेकिन उसकी सही ढंग से देखभाल नहीं होने व सीवरेज का गंदा पानी गिरने से घाटों की दुर्दशा हो रही है। कई घाट तो काले पड़ गए हैं और गंदा पानी चम्बल नदी में जा रहा है। न्यास ने चम्बल नदी के दोनों किनारों  पर कोटा बैराज से नयापुरा की रियासत कालीन पुलिया तक करीब साढ़े 5 कि.मी. एरिया में रिवर फ्रंट का निर्माण कराया है। इसके बीच में आकर्षक घाट बनाए हैं। हर घाट अपने आप में अलग पहचान लिए हुए है। वहीं चम्बल नदी में गंदे नालों का पानी नहीं जाए उसे रोकने के लिए एसटीपी का निर्माण भी कराया गया है। लेकिन हालत यह है कि इतना सब कुछ करने के बाद भी इन घाटों की सही ढंग से देखभाल नहीं की जा रही। </p>
<p><strong>इन घाटों पर गिर रहा गंदा पानी</strong><br />रिवर फ्रंट के नयापुरा घाट की तरफ लाड़पुरा करबला की सीवर लाइन का गंदा पानी गिर रहा है। केडीए अधिकारियों ने करबला में फोर्ट वाल पर सीवर लाइन जाम होने पर ओपन ड्रेन बनाकर सीवर लाइन को रिवर फ्रंट के घाट की तरफ मोड़ दिया। जिससे उस पूरे क्षेत्र का गंदा पानी नयापुरा घाट की तरफ गिर रहा है। वहीं रामपुरा घाट की तरफ भी कई दिन से सीवरेज का गंदा पानी आने से उस घाट पर भी गंदगी व दुर्गंध तो हो ही रही है। साथ ही वह घाट काला पड़ने लगा है। </p>
<p><strong>न्यास इंजीनियरों की मेहनत पर पानी</strong><br />महावीर नगर निवासी राकेश नामा ने बताया कि  नगर विकास न्यास  के इंजीनियरों ने दिन रात मेहनत कर इस रिवर फ्रंट को तीन साल के कम समय में एक ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाया है।  हालांकि उनमें से वर्तमान में अधिकतर इंजीनियर व अधिकारी यहां पद स्थापित नहीं हैं।  लेकिन उनकी उस मेहनत व शहर के आकर्षक पर्यटन स्थल की दुर्दशा की जा रही है। </p>
<p><strong>विश्व धरोहर की सार संभाल हो</strong><br />रिवर  फ्रंट घूमने आए जयपुर निवासी महेश सिंघल ने बताया कि कोटा में विश्व स्तरीय धरोहर बनी है। जिसके बारे में काफी सुना थघा। अब समय मिला है तो परिवार समेत देखने आए है। लेकिन नयापुरा व रामपुरा घाटों की तरफ से सीवरेज का गंदा  यहां से बह रहा है। जिससे इनकी दुर्दशा हो रही है। जबकि अधिकारियों को इनकी सार संभाल करनी चाहिए। रिवर फ्रंट पर आए सवाई माधोपुर निवासी गंगाधर मीणा का कहना है कि राजस्थान ही नहीं पूरे देश में इस तरह का पर्यटन स्थल नहीं देखा। जहां विविधता के साथ विश्व की अलग-अलग कलाकृतियां बनाई गई है। रात के समय तो यहां का नजारा देखने लायक रहता है। लेकिन  दो घाट की तरफ से आ रहा  गंदा पानी चम्बल नदी में गिर रहा है। जिससे नदी का पानी भी दूषित होने लगा है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक उस स्थिति को देखकर यहां की छवि को अच्छी बनाने की जगह धूमिल लेकर जा रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लाड़पुरा करबला की सीवर लाइन को खाई रोड की तरफ स्क्रीन में मिलाने का काम किया जा रहा है। हालांकि वहां का गंदा पानी बहुत कम घरों का रिवर फ्रंट की तरफ आ रहा है। जिससे नयापुरा घाट की तरफ का कुछ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। रामपुरा घाट की तरफ सीवरेज का चैम्बर जाम होने से वह ओवर फ्लो होकर बह रहा है। पिछले कुछ दिन से यह स्थिति बनी है। जिससे उस रामपुरा घाट की तरफ से अधिक गनदा पानी नदी में जा रहा है। रामपुरा घाट का कुछ हिस्सा भी काला पड़ा है। हांलाकि प्रयास किए जा रहे हैं कि इसे शीघ्र ही  सही कर दिया जाएगा। <br /><strong>-भूपेन्द्र बंशीवाल, एक्सईएन कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Sep 2024 15:30:25 +0530</pubDate>
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                <title>आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या...</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में रिवर फ्रंट पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/income-is-8-paise--expenditure-is-one-rupee/article-89774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या...यह कहावत इन  दिनों सही साबित हो रही है चम्बल रिवर फ्रंट पर। नगर विकास न्यास की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर चम्बल नदी के किनारे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट तो बना दिया। लेकिन अब यह केडीए के लिए सफेद हाथी साबित होता जा रहा है। केडीए की ओर से यहां  हर महीने करीब दो करोड़ रुपए का खर्चा किया जा रहा है जबकि कमाई मात्र एक करोड़ रुपए के करीब हो ही रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास के माध्यम से करीब 1442 करोड़ रुपए खर्च करके चम्बल नदी के किनारे रिवर फ्रंट का निर्माण किया गया। कोटा बैराज से नयापुरा की रियासतकालीन पुलिया तक करीब पौने तीन किलोमीटर एक तरफ यानि दोनों तरफ करेीब साढ़े पांच कि.मी. का निर्माण किया गया। यहां नदी के दोनों किनारों पर करीब 26 घाट बनाए गए। जिन्हें देखने के लिए शहर ही नहीं दूरदराज से लोग तो आ रहे हैं लेकिन यह केडीए के लिए फायदे का सौदा नहीं बन सका है। </p>
<p><strong>एक साल हुआ उद्घाटन हुए</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट का उद्घाटन पिछले साल 12 सितम्बर 2023 को किया गया था। उसके बाद से शुरुआत के दो महीने तक यहां कोटा वालों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रखा गया। साथ ही बाहर से आने वालों से दो सौ रुपए प्रवेश टिकट लगाया गया। रिवर फ्रंट का उद्घाटन हुए एक साल का समय हो गया है। लेकिन अभी तक केडीए यहां न तो कमाई के संसाधनों को विकसित कर सका है और न ही इसे फायदे का सौदा बना सका है। </p>
<p><strong>मेन पावर सप्लाई पर दो करोड़ रुपए खर्चा</strong><br />पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय ही इस रिवर फ्रंट के संचालन का ठेका किया गया। गुरुग्राम की निजी फर्म को यहां मेन पावर सप्लाई का ठेका दिया गया। जिसमें साफ सफाई से लेकर सुरक्षा गार्ड तक और टिकट काटने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं के लिए कम्पनी ने यहां अपने कर्मचारी लगाए हुए हैंÞ। उसकी ऐवज में केडीए निजी फर्म को हर महीने दो करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। </p>
<p><strong>कमाई का जरिया सीमित</strong><br />रिवर फ्रंट पर कमाई का सबसे बड़ा जरिया यहां बनी करीब दो सौ दुकानें हैं। जिन्हें किराए पर देकर केडीए मोटी कमाई कर सकता है। लेकिन एक साल बाद भी अभी तक यहां गिनती की मात्र एक दर्जन दुकानें भी किराए पर नहीं दी जा सकी है। जिससे केडीए को कमाई बहुत कम हो रही है। वहीं दो सौ रुपए प्रवेश टिकट के अलावा यहां प्री वेडिंग शूटिंग, वाटर पार्क व अन्य शूडिंग के चार्ज भी घंटों के हिसाब से वसूल किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट पर हर दिन औसत करीब दो हजार से अधिक लोग घूमने के ुलिए आ रहे हैं। केडीए को यहां से हर महीने करीब एक से सवा करोड़ रुपए ही कमाई हो रही है जबकि खर्चा इससे दोगुना हो रहा है। </p>
<p><strong>दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया करेेंगे</strong><br />केडीए के सचिव कुशल कोठारी का कहना है कि रिवर फ्रंट पर दुकानें तो काफी संख्या में है जिनके आवंटन की पूर्व में प्रक्रिया की गई थी। लेकिन कई दुकानदारों ने एनजीटी के विवाद के चलते यहां दुकानें शुरू नहीं की थी। अब वहां से मामला स्पष्ट हो गया है। जिससे दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। वर्तमान में रिवर फ्रंट पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है। ऐसे में यहां कमाई के संसाधन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला कलक्टर व केडीए आयुक्त डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने गुरुवार शाम को केडीए कार्यालय में अधिकारियों की बैठक ली थी। जिसमें शहर के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही केडीए की आय बढ़ाने समेत कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2024 15:47:18 +0530</pubDate>
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