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                <title>penance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भीषण गर्मी में महंत कर रहे कोट धूणी तपस्या</title>
                                    <description><![CDATA[ बगरू। कस्बे में साकेतवासी लक्ष्मण दास महाराज और श्याम दास महाराज की अनुकंपा से सावां की बगीची बालाजी मंदिर के महंत पुरुषोत्तम दास महात्यागी महाराज मंदिर परिसर में विगत चार माह से कोट धूणी तपस्या कर रहे हैं। कोट धूणी तपस्या का आयोजन जनकल्याण की कामना से किया जा रहा है। क्षेत्र में अभी तापमान 42 से 45 डिग्री का हो रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bagru-news-mahant-doing-kot-dhuni-penance-in-scorching-heat/article-11710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bagru-new.jpg" alt=""></a><br /><p> बगरू। कस्बे में साकेतवासी लक्ष्मण दास महाराज और श्याम दास महाराज की अनुकंपा से सावां की बगीची बालाजी मंदिर के महंत पुरुषोत्तम दास महात्यागी महाराज मंदिर परिसर में विगत चार माह से कोट धूणी तपस्या कर रहे हैं। कोट धूणी तपस्या का आयोजन जनकल्याण की कामना से किया जा रहा है। क्षेत्र में अभी तापमान 42 से 45 डिग्री का हो रहा। इसी बीच अग्नि तपस्या कर महाराज जनकल्याण के लिए तपस्या कर रहे हैं। महंत पुरुषोत्तम दास ने बताया कि इस कोट धूणी तपस्या का शुभारंभ माघ शुक्ल बसंत पंचमी को किया गया था। जनकल्याण की कामना से किए जाने वाले इस हवन यज्ञ की परंपरा संत समाज में सदियों से चली आ रही है। महात्यागी संत समाज के हर संत को जीवन में 18 वर्षों तक प्रत्येक वर्ष चार माह तक यह तप करना होता है, जिसकी शुरूआत पंच अग्नि तप से होती है</p>
<p>18वें  वर्ष में खप्पर तप से पूणार्हुति होती है। हालांकि महंत पुरुषोत्तम दास महाराज अपनी 18 वर्ष की तपस्या पूर्ण कर चुके है, लेकिन जनकल्याण की भावना और अपने गुरु की आज्ञा से जब तक शरीर में सामर्थ्य है तब तक इस तपस्या को निरंतर जारी रखने का प्रण किया है। महाराज के सेवक पार्षद गिर्राज चौधरी, कुलद्विप कालुका ने बताया कि माघ शुक्ल बसंत पंचमी से लेकर आज तक महाराज की ओर से प्रतिदिन भरी दुपहरी में चारों ओर अग्नि प्रज्वलित कर जनकल्याण की भावना से कोट धूणी तपस्या की जा रही है। भीषण गर्मी में नौतपा के दौरान में भी कोट धूणी तपस्या निर्बाध रूप से जारी रही। महंत पुरुषोत्तम दास महाराज ने कहा कि मानव कल्याण के लिए तपस्या करना हर संत का परम धर्म है। कोट धूणी हवन का समापन ज्येष्ठ शुक्ल गंगा दशमी को श्रीराम अरचा महायज्ञ में पूर्णाहुति के साथ होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 13:03:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पंद्रह अग्नि कुंडों के बीच में संत गोवर्धननाथ की तपस्या</title>
                                    <description><![CDATA[दोपहर में तपते सूरज के सामने जब एक संत ने पंद्रह अग्नि कुंडों के बीच में अपना आसन लगाकर तपस्या प्रारंभ की, तो वहां उपस्थित लोग देखते ही रह गए। जब कुछ समय के लिए भी इस गर्मी में धूप में खड़ा हुआ नहीं जाता, ऐसे में वे संत तीन घंटे के लिए धूप में अग्निकुंंडों के बीच तपस्या कर रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--saint-govardhannath-s-penance-in-the-middle-of-fifteen-fire-pits/article-9578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dsc_1048.jpg" alt=""></a><br /><p> अजमेर। दोपहर में तपते सूरज के सामने जब एक संत ने पंद्रह अग्नि कुंडों के बीच में अपना आसन लगाकर तपस्या प्रारंभ की, तो वहां उपस्थित लोग देखते ही रह गए। जब कुछ समय के लिए भी इस गर्मी में धूप में खड़ा हुआ नहीं जाता, ऐसे में वे संत तीन घंटे के लिए धूप में अग्निकुंंडों के बीच तपस्या कर रहे थे। यह नजारा था बुधवार को शास्त्री कॉलोनी पुष्कर रोड स्थित श्री सोमनाथ धाम श्रीनाथजी की बगीची का। जहां योगीराज बाबा शंभूनाथजी के शिष्य महंत योगी गोवर्धननाथ ने यह तप प्रारंभ किया था। महाराज ने सवा बारह से सवा तीन बजे तक का वह समय चुना है जब सबसे अधिक तापमान होता है।</p>
<p><strong>31 दिन तक रोज एक कंडा बढ़ाकर रखा जाएगा।</strong></p>
<p>उन्होंने पूजा कर शंख ध्वनि के साथ अपना आसन जमाया और तप करने बैठ गए। इससे पूर्व उनके शिष्यों ने वहां बने पंद्रह अग्नि कुंडों में अग्नि प्रज्वलित की। कंडों में लगी अग्नि जल रही थी। महाराज पूरे तीन घंटे तक आसन लगाकर बैठे रहे। उनका यह क्रम 11 जून को 31 दिनों तक चलेगा। आज अग्नि कुंडों में 11 कंडे रखे गए थे। प्रतिदिन एक कंडा बढ़कर रखा जाएगा। इस तरह 11 जून को 42 कंडे रखे जाएंगे। </p>
<p><strong>देश और विश्व में शांति की कामना</strong></p>
<p>बगीची समिति के अध्यक्ष तुलसी सोनी ने बताया कि इस तपस्या के दौरान महाराज प्रतिदिन देश और विश्व में शांति की कामना कर रहे हैं। वे इस तपस्या से प्रकृति में होने वाले विभिन्न प्रकोपों से सुरक्षा, ज्ञान विज्ञान में उन्नति, वायुमंडल में शुद्धता और प्राणियों में सद्भावना की प्रार्थना करेंगे। आज तपस्या प्रारंभ होने के समय बाहर से आए संत और शिष्य भी उपस्थित रहे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 13:59:49 +0530</pubDate>
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