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                <title> असर खबर का- बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर बनाने के लिए राशि स्वीकृत, </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने रियासतकालीन चिड़ियाघर के जानवरों को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किए जाने तथा द्वितीय फेस के तहत  शेष रहे 22 एनक्लोजर का निर्माण करवाने सहित विभिन्न मुद्दों पर खबरें प्रकाशित कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---funds-approved-for-building-enclosures-in-the-biological-park/article-107145"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय फेस के निर्माण कार्य व शेष रहे 22 एनक्लोजर के निर्माण के लिए सरकार ने राशि स्वीकृत कर दी है। इसके लिए वन्यजीव विभाग ने भी 25 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिए हैं। कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में मुकुंदरा में वन्यजीवों के लिए पेयजल योजना स्वीकृत करने एवं अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर के लिए राशि स्वीकृत करने की जानकारी देते हुए कहा, सरकार  का यह प्रावधान कोटा के वन्य पर्यटन क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि कोटा के वन्य पर्यटन के सम्पूर्ण विकास के लिए मुकुंदरा अभ्यारण्य में बाघों की शिफ्टिंग शीघ्र करवाई जाने की आवश्यकता है, ताकि यहां पर्यटन बढ़ सके। वहीं, बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर बनने पर चिड़ियाघर से दो दर्जन से अधिक वन्यजीवों की शिफ्टिंग हो सकेगी। इससे पर्यटकों को ज्यादा वन्यजीव देखने को मिल सकेंगे और सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।  बता दें, दैनिक नवज्योति ने रियासतकालीन चिड़ियाघर के जानवरों को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किए जाने तथा द्वितीय फेस के तहत  शेष रहे 22 एनक्लोजर का निर्माण करवाने सहित विभिन्न मुद्दों पर खबरें प्रकाशित कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। जिसके बाद सरकार ने हाल ही में पेश किए बजट में बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर बनाने व द्वितीय फेस के निर्माण कार्य पूरा करवाने के लिए बजट की घोषणा की। </p>
<p><strong>प्लांटेशन को सुरक्षित रखने के लिएचारदीवारी बनाने की जरूरत</strong><br />विधायक शर्मा ने विधानसभा में कहा, वन एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ ही लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति भी हमारी ही जिम्मेदारी है, इसलिए वन क्षेत्र में बसी हुई पुरानी बस्तियों का भूमि प्रत्यावर्तन कर वन विभाग को अन्यत्र जमीन आवंटित की जाए ताकि लोगों का सुविधाएं मिल सके। इसी प्रकार भामाशाह मण्डी के विस्तार के लिए वन विभाग की भूमि की स्वीकृति, कर्णेश्वर वनखण्ड एवं आसपास के प्लांटेशन को सुरक्षित रखने व अतिक्रमण रोकने के लिए इनकी चारदिवारी ऊंची और सुदृढ़ करवाने, शहरी क्षेत्रों में प्राणवायु देने वाले जंगल विकसित करने के लिए अरबन ग्रीन लंग्स अनन्तपुरा को स्वीकृति प्रदान की मांग भी उन्होंने सदन में रखी।</p>
<p><strong>कांगे्रस पर लगाए आरोप</strong><br />उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए कुछ नहीं किया गया, गहलोत सरकार की स्पष्ट नीति और योजना के अभाव में इन्वेस्ट राजस्थान समिट फेल हो गया। भूमि आवंटन के अभाव में एनसीआर से जुड़े प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के इच्छुक कई बड़े निवेशक वापस लौट गए। जबकि हमारे शासन में एक स्पष्ट सोच, सकारात्मक मानसिकता और प्रदेश के विकास की प्रतिबद्धता, मजबूत इरादों के साथ राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सबमिट का सफल आयोजन किया गया।</p>
<p><strong>कोटा स्टोन पार्क स्थापनाकी मांग उठाई</strong><br />शर्मा ने विधानसभा में कोटा स्टोन पार्क की स्थापना की भी मांग उठाई। उन्होंने उद्योग मंत्री से आग्रह किया है कि सरकार द्वारा बजट में स्वीकृत गोपालपुरा औद्योगिक क्षेत्र में हाड़ौती के विशिष्ट उत्पादों कोटा स्टोन, कोटा डोरिया, मांगरोल खादी, धनिये, बूंदी सेंड स्टोन, बूंदी के बासमती चावल के विनिमय के लिए विशेष व्यवस्था हो और इन पर आधारित उद्योग स्थापित किए जाए। वहीं, कोटा में ट्रेचिंग ग्राउण्ड में वेस्ट टू वेल्थ पार्क बनाकर कचरे से ईंट बनाने के उद्योग की भी आवश्यकता उन्होंने सरकार के समक्ष रखी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 13:02:41 +0530</pubDate>
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                <title>बायोलॉजिकल पार्क में जल्द गूंजेगी टाइगर की दहाड़</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव विभाग बड़े एनिमल लाने की तैयारी में जुटा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tiger-s-roar-will-resonate-in-biological-park-soon/article-103378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/news3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में युवा बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने की कवायद तेज हो गई है। वन्यजीव विभाग की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व भोपाल चिड़ियाघर प्रशासन को पत्र भेजा जा चुका है। अब भोपाल-जू प्रशासन की स्वीकृति का इंतजार है। वहां से रजामंदी मिलने के बाद सेंट्रल-जू आॅथोरिटी से भी शिफ्टिंग को लेकर हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, कोटा वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट स्वीकृति मिलने की उम्मीद जता रहा है।  गौरतलब है कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बाघ नाहर की मौत व लॉयन नहीं होने से पार्क के राजस्व पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में वन्यजीव विभाग बड़े एनिमल लाने की तैयारी में जुटा है। </p>
<p><strong>भोपाल-जू से 4 से 6 वर्ष का जोड़ा लाना प्राथमिकता</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि भोपाल चिड़ियाघर में अच्छी संख्या में बाघ-बाघिन हैं। वहां से कम उम्र का ही जोड़ा लाना प्राथमिकता है। हमारी कोशिश है कि 4 से 6 वर्ष के बीच आयु के बाघ-बाघिन लाने की है। ताकि, ब्रिडिंग होने से बायोलॉजिकल पार्क में इनकी संख्या में इजाफा हो सके और भविष्य में यहां बाघों का कुनबा पनप सके। इस संबंध में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा जा चुका है। भोपाल चिड़ियाघर के अधिकारियों को भी प्रस्ताव भेजा है।  </p>
<p><strong>सुहासिनी के लिए भी ढूंढा जा रहा जोड़ा  </strong><br />डीएफओ भटनागर ने कहा, उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन द्वारा लॉयन देने से इंकार किए जाने के बाद देश के अन्य राज्यों के चिड़ियाघर में लॉयन की तलाश की जा रही है। ताकि, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही लॉयनेस सुहासिनी का जोड़ा बनाया जा सके। डेढ़ साल से एकाकी जीवन बिता रही है। इसी तरह करीब 8 माह से बाघिन महक भी अकेली ही रह रही है। गौरतलब है कि, सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ने लॉयन सफारी शुरू किए जाने का हवाला देते हुए लॉयन देने से मना दिया था। ऐसे में एक लॉयन अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मिले, इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को फिर से पत्र लिखा गया है।</p>
<p><strong> फुर्ति दिखाते तो 2 साल पहले ही आ जाता लॉयन</strong><br />जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में लॉयनेस व लॉयन का जोड़ा लाने की तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जयपुर से स्वीकृति दिसम्बर 2022 में ही मिल गई थी। वहीं, उदयपुर सज्जनगढ़ से भी हाईब्रिड लॉयन अली को दिए जाने की हरी झंडी मिल गई थी। लेकिन, कोटा वन्यजीव विभाग के तत्कालीन अधिकारी स्वीकृति मिलने के दो साल बाद भी केंद्रिय चिड़ियाघर प्राधिकरण से शिफ्टिंग की स्वीकृति नहीं ले सके। जिसकी वजह से शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी होती रही। इसका नतीजा यह रहा कि सज्जनगढ़ में लॉयन सफारी शुरू किए जाने के चलते उदयपुर वन्यजीव विभाग ने कोटा को लॉयन देने में असमर्थता जाहिर कर दी। </p>
<p><strong>इधर, शहरी रूट पर डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हुई सफारी</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबास रेंज शहरी सीमा से सटी है। रावतभाटा रोड स्थित दौलतगंज के सामने जंगल में सफारी का रुट तय है। इसके बावजूद मुकुंदरा प्रशासन  डेढ़ साल बाद भी जंगल सफारी शुरू नहीं कर पाया। जबकि, दरा अभयारणय शहर से करीब 70 किमी दूर है। वहीं, सफारी रूट में टाइगर भी नहीं है। ऐसे में पर्यटकों सफारी के लिए दरा सेंचुरी में जाने में रुचि नहीं दिखाते।  </p>
<p><strong>लॉयन-टाइगर नहीं होने से घटा पर्यटकों का रुझान </strong><br />विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, लॉयन व टाइगर जैसे बड़े एनीमल नहीं होने से न केवल अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की सालाना इनकम पर विपरीत असर पड़ रहा है बल्कि पर्यटकों का रुझान में भी गिरावट दर्ज हो रही है। जनवरी 2023 से 14 अक्टूबर 2024 तक बायोलॉजिकल पार्क को 63 लाख 25 हजार 82 रुपए का ही राजस्व एकत्रित हुआ है। राजस्व का यह आंकड़ा करीब दो साल का है। जबकि, वर्ष 2022 में ही राजस्व करीब 40 से 45 लाख रुपए था।  ऐसे में राजस्व में इजाफा हो,इसके लिए बड़े एनिमल लाए जाना चाहिए।</p>
<p><strong>पर्यटक बोले-चिड़ियाघर के जानवरों की हो शिफ्टिंग</strong><br />छत्रपुरा, संजय नगर निवासी इरशाद अंसारी व बिलाल खान ने बताया कि नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में करीब दो दर्जन से अधिक वन्यजीव हैं, जिन्हें बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाना चाहिए। ताकि, पर्यटकों को मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर, पहाड़ी कछुए, लव बर्ड्स, सारस, बोनट प्रजाती के बंदर देखने को मिल सके। महावीर नगर निवासी ऋषि कुमार, भावेश, जितेंद्र मीणा कहते हैं, यदि, चिड़ियाघर के जानवरों को बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट न करें तो चिड़ियाघर के दरवाजे पर्यटकों के लिए खोल दिए जाना चाहिए। ताकि, शहरवासियों को नांता जाना न पड़े और जू में पर्यटक आएंगे तो सरकार को राजस्व भी मिल सकेगा। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में भोपाल चिड़ियाघर से युवा बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  व भोपाल चिड़ियाघर अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। साथ ही सीसीएफ कोटा को भी प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।   <br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 16:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - लोकार्पण के 19 माह बाद शुरू हुआ डीलक्स कॉटेज वार्ड का नया अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[ एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड और नया अस्पताल भवन का लोकार्पण 19 माह बाद आखिर कार शुरू हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---new-hospital-of-deluxe-cottage-ward-started-19-months-after-inauguration/article-99880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(10)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड और नया अस्पताल भवन का लोकार्पण 19 माह बाद आखिर कार शुरू हो गया है। नए अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर मेडिकल वार्ड शुरू किया है वहीं सैंकड फ्लोर पर सर्जिकल आईसीयू शुरू किया गया। है। उल्लेखनीय है कि दैनिक नवज्योति में 19 नवंबर को पेज दो पर 68 करोड़ को सवा साल से उपयोग का इंतजार शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद से अस्पताल प्रशासन इसको शुरू करने की कवायद में जुट गया। दिसंबर माह में 13 को इसको चालू करने के आदेश जारी किए उसके बाद 23 को इसमें मेडिकल वार्ड के मरीजों को शिफ्ट किया गया।  वहीं 2 जनवरी को इसमें सर्जिकल आईसीयू को शुरू किया गया।  इस भवन का कांग्रेस सरकार ने 27 अप्रेल 2023 को इसका  लोकार्पण तो कर दिया लेकिन उसके बाद भाजपा सरकार आने से इस भवन का शिफ्टिंग कार्य धीमा हो गया था। कारण कि भवन में उपकरण से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी नहीं थी। जिसके चलते पिछले 19 माह से तैयार किए भवन पर अभी ताले लगे थे।  सरकार की ओर से 68 करोड़ रुपए लगाकर भवन तो तैयार कर दिया लेकिन इसको चालू करने में देरी हो रही थी। मरीजों की समस्याओं देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इसको खबर प्रकाशित होने के बाद इसमें जरूरी काम कराकर शुरू किया।  </p>
<p>68 करोड़ रुपए से तैयार शुरू हुआ उपयोग: 68 करोड़ रुपए की लागत से तैयार नए अस्पताल भवन और डीलेक्स कॉटेज वार्ड 2 जनवरी से उपयोग होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। पिछले 19 माह से यह भवन धूल खा रहा था नवज्योति में खबर प्रकाशित होने बाद अब इसका उपयोग होने लगा है। नया  अस्पताल चालू नहीं होने से यहां लोग ऑपरेशन कराने लगे है।  एमबीएस परिसर में तैयार हुए  नए अस्पताल में 340 बेड  है। अस्पताल का निर्माण कार्य यूआईटी द्वारा कराया गया है। जिसमें करीब 68 करोड़ खर्च किए गए है।  डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल भवन सभी अत्याधुनिक सुविधाएं है।  नया अस्पताल शुरू हो जाने से जगह की कमी नहीं रहेगी।</p>
<p><strong>मेडिकल वार्ड के 18 बेड पर मरीज कर रहे भर्ती :</strong></p>
<p> एमबीएस केमेडिकल वार्ड के मरीजों यहां शिफ्ट किया है। 23 दिसंबर से यहां मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया था। अभी ग्राउंड फ्लोर पर 18 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे है। यहां पर तीन पारियों में मेडिकल स्टाफ तैनात किया है। जो राउंड क्लॉक ड्यूटी दे रहा है। यह अस्पताल शुरू होने से अब मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड की कमी नहीं आएगी।</p>
<p><strong>सर्जिकल आईसीयू वार्ड शुरू :</strong></p>
<p>डिलक्स कोटेज वार्ड अस्पताल के सैकंड फ्लौर पर तीन आईसीयू वार्ड है। अभी सर्जिकल आईसीयू वार्ड शुरू किया है। जिसमें 13 बेड है। सभी में मरीज भर्ती है। वहीं शीघ्र ही मेडिकल आईसीयू भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सैकंड फ्लोर पर परिजनों के ठहरने और बैठने की अलग से व्यवस्था यहां लॉकर लगाए जिसमें परिजन अपना सामान रख सकते है। </p>
<p>एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल को नए साल में शुरू कर दिया है। अभी मेडिकल वार्ड व सर्जिकल आईसीयू वार्ड शुरू किया है। अन्य वार्ड भी शीघ्र शुरू कर दिए जाएंगे। अभी छोटे कार्य को ठीक कराया जा रहा है। जिससे मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। <br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2025 16:04:26 +0530</pubDate>
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                <title>68 करोड़ को सवा साल से उपयोग का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[ अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/68-crores-waiting-to-be-used-for-one-and-a-quarter-years/article-95328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p> कोटा । एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड और नया अस्पताल भवन का लोकार्पण हुए सवा साल  होने आया  लेकिन अभी तक इसके शिफ्टिंग का कार्य शुरू नहीं हुआ। कांग्रेस सरकार ने 27 अप्रेल 2023 को इसका  लोकार्पण तो कर दिया लेकिन उसके बाद भाजपा सरकार आने से इस भवन का शिफ्टिंग कार्य धीमा हो गया। अभी भवन में उपकरण से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं और स्टाफ लगाना बाकी है। ऐसे में  पिछले एक साथ से तैयार किए भवन पर अभी ताले लगे हुए है। सरकार की ओर से 68 करोड़ रुपए लगाकर भवन तो तैयार कर दिया लेकिन अभी इसको चालू करने में समय लग रहा है।  </p>
<p><strong>68 करोड़ रुपए से तैयार भवन का नहीं हो रहा उपयोग</strong><br />68 करोड रुपए की लागत से तैयार नए अस्पताल भवन और डीलेक्स कॉटेज वार्ड का पिछले सवा साल से कोई उपयोग नहीं हो रहा है। अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। जबकि एमबीएस अस्पताल में अच्छे डॉक्टर और संसाधन होने के बाद भी लोगों निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।  एमबीएस परिसर में तैयार हुए  नए अस्पताल में 340 बेड  है। अस्पताल का निर्माण कार्य यूआईटी द्वारा कराया गया है। जिसमें करीब 68 करोड़ खर्च किए गए है। एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने बताया कि डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब फर्नीचर और उपकरण लगाना बाकी है। इसमें सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होगी। इसके अलावा इसके पीछे प्रशासनिक भवन आकार ले चुका है। नया अस्पताल शुरू हो जाने से जगह की कमी नहीं रहेगी।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड की कमी से आती है परेशानी</strong><br />मौसमी बीमारियों के सीजन में सबसे ज्यादा बेड की कमी खलती है। नया अस्पताल शुरू हो जाए तो बेड की कमी से राहत मिलेगी।  अभी कई बार बेड की दिक्कत आती है।  खासकर मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड का कम होने से मरीजों को भर्ती करने में परेशानी आती है। नया अस्पताल शुरू होने से  नया अस्पताल शुरू होने से परेशानी दूर हो जाएगी। बेड की कमी के कारण अभी मरीजों को अन्य जगह रैफर करना होता था। पिछले साल भी डेंगू के समय  मरीज अधिक आने से  मरीजों को मेडिकल कॉलेज और रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल शिफ्ट  करना पड़ा था।  ऐसी परेशानियों से बचने के लिए अस्पताल का शुरू होना जरूरी है। लेकिन अभी तक इसमें कई छोटे बड़े तकनीकी कार्य बाकी होने से यह शुरू नहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>पीजी हॉस्टल का काम अभी नहीं हुआ पूरा</strong><br />एमबीएस के पीछे पीजी स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का कार्य भी  धीमी गति से चल रहा है। अभी इसमें फिनिंशिग वर्क बाकी है।  एक दो फ्लॉर का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। इसमें 120 रुम है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में 150 रुम है। इस तरह से 270 रुम हो जाएंगे। यानि कि स्टूडेंट्स के लिए पर्याप्त रूम की व्यवस्था हो जाएगी। हॉस्टल का निर्माण कार्य तो पहले ही शुरू हो गया था। हॉस्टल भवन में फिनिशिंग वर्क चल रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल  को शीघ्र शुरू करने के प्रयास किए जा रहे है। अभी स्टाफ और उपकरण कुछ कार्य बाकी है उनको पूरा किया जा रहा है। इसमें छोटे छोटे कार्य बाकी उनको एक एक पूरा कराया जा रहा है। उसके बाद इसमें शिफ्टिंग की जाएगी।<br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:01:35 +0530</pubDate>
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                <title>3 साल बाद भी नहीं मिले 25 करोड़, अटकी शिफ्टिंग </title>
                                    <description><![CDATA[जायका प्रोजेक्ट के तहत मिलना था बजट ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/25-crores-not-received-even-after-3-years--shifting-stuck/article-82150"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/3-saal-bd-bhi-nhi-mile-25-crore,-atki-shifting...kota-news-20-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रियासतकाली चिड़ियाघर में बंद 45 से ज्यादा वन्यजीवों की  तीन साल बाद भी अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग नहीं हो सकी। जबकि,  चिड़ियाघर में मगरमच्छ से लेकर घड़ियाल तक का जोड़ा है। चंबल क्षेत्र से लुप्त हो चुके घड़ियाल शहर में होने के बावजूद शहरवासी देख नहीं पा रहे। हालात यह हैं, बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण जनवरी 2021 में पूरा हो गया था। इसके द्वितीय फेस का निर्माण के लिए 25 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था लेकिन तीन साल से वन्यजीव विभाग को नहीं मिला। जिसकी वजह से 31 से ज्यादा एनक्लोजर का निर्माण नहीं हो सका। नतीजन, रियासतकालीन चिड़ियाघर में बंद पक्षियों व एनिमल्स के एनक्लोजर तैयार नहीं हो सके और शिफ्टिंग अटक गई।</p>
<p><strong>चिड़ियाघर में दें एंट्री</strong><br />आकाशवाणी निवासी शुभम मेहता, योगेंद्र कुमार, हरमेंद्र नागर ने बताया कि वन्यजीव विभाग या तो चिड़ियाघर के जानवरों को बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट करें या फिर चिड़िया घर पर्यटकों के लिए फिर से खोला जाए। ताकि, जो अभेड़ा न जा सके वह जू में आकर वन्यजीवों को देख सके। यहां 45 से ज्यादा वन्यजीवों को नजर बंद कर रखा है। </p>
<p><strong>31 एनक्लोजर बनना शेष </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जायका प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ का बजट अटका हुआ है। जिसकी वजह से द्वितीय चरण के तहत होने वाला निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। जबकि, वन्यजीव विभाग की ओर से कई बार सरकार को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इतना ही नहीं रिमाइंडर भी भेजा गया। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। ऐसे में जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बोनट (बंदर), कछुए सहित कई पक्षी बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। </p>
<p><strong>80 लाख का बजट हुआ लेप्स, नहीं बना पक्षीघर </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 80 लाख की लागत से पक्षी घर बनना था, लेकिन अधिकारियों की लेट लतीफी के कारण बजट लेप्स हो गया। लेकिन पक्षी घर  नहीं बना सका। इधर,   केशवपुरा निवासी शशांक मित्तल ने बताया कि पिछले साल से अब तक 5 बार अभेड़ा आ चुका हूं, लेकिन यहां नए एनीमल्स अब तक नहीं आए। जबकि, चिड़ियाघर में मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य प्रजाति के कई वन्यजीव हैं। साथ ही देशी विदेशी पक्षी भी हैं, जिन्हें अब तक यहां शिफ्ट नहीं किया गया।  टिकट का पूरा पैसा देने के बावजूद एनिमल देखने को मिल रहे।   </p>
<p><strong>द्वितीय फेस में यह होने हैं कार्य</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, वाटर कूलर सहित कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>सरकार को भेजे प्रस्ताव, नहीं हुई कार्रवाई</strong><br />वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जाइका प्रोजेक्ट के तहत बायलोजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। एनक्लोजर नहीं होने के कारण चिड़ियाघर से पक्षी व एनिमल मिलाकर करीब 48 तरह के वन्यजीवों  की शिफ्टिंग नहीं हो पा रही। </p>
<p><strong>चिड़ियाघर में यह हैं वन्यजीव</strong><br />कोटा चिड़ियाघर में वर्तमान में बंदरों की विशेष प्रजाति के 2 बोनट, 18 पहाड़ी कछुए, पानी के 5 कुछए, तीन फीट ऊंचे पेलिकन हवासिल, 8 से 10 फीट लंबे 4 अजगर  जोड़े में, 2 घड़ियाल, 2 मगरमच्छ तथा पक्षियों में इग्रेट, स्पॉट बिल्ड डक, विसलिंग टिल, कोम्ब डक, नाइट हेरोन, पोण्ड हेरोन, बारहेडेड गूज, राजहंस बतख, तोता, लवबर्ड्स सहित कुल 48 तरह के वन्यजीव हैं, जिन्हें शिफ्टिंग का इंतजार है। </p>
<p><strong>बजट मांगा है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 31 एनक्लोजर, वेटनरी हॉस्पिटल, कैफेटेरिया, स्टाफ क्वाटर के अलावा अन्य कार्य होने हैं। इसके लिए फिर से 25 करोड़ के बजट के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है। पिछले तीन साल से यह बजट नहीं मिलने की वजह से कई कार्य अधूरे पड़े हैं। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 15:06:45 +0530</pubDate>
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                <title>चिड़ियाघर के वन्यजीवों की 2 साल से अटकी शिफ्टिंग </title>
                                    <description><![CDATA[बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद  एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shifting-of-zoo-wildlife-stuck-for-2-years/article-46762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/chidiya-ghr-ki-vanjivo-ki-2-saal-s-atki-shifting...kota-news-26-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश का सबसे बड़ा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क दो साल से बजट को तरस रहा है। बजट के अभाव में सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही। पक्षियों के अधूरे एनक्लोजर पूरे नहीं हो पा रहे। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर से वन्यजीवों की 2 साल से बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग अटकी पड़ी है। यहां न तो कैफेटेरिया है और न ही ई-रिक्शा। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को चाय नाश्ते के लिए भटकना पड़ता है। जबकि, पर्यटकों से पैसा पूरा वसूला जाता है, लेकिन देखने के लिए पूरे एनिमल नहीं है। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। वन्यजीव विभाग प्रशासन सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। इसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। </p>
<p><strong>पक्षियों के पांच एनक्लोजर अधूरे </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में प्रथम चरण के तहत 18 एनक्लोजर बनाए जाने थे लेकिन 13 ही बन सके। वहीं, पक्षियों के 5 एनक्लोजर बजट के  अभाव में अधूरे पड़े हैं। इनमें सारस क्रेन, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी ऐमू सहित अन्य बर्ड्स शामिल हैं। यहां आने वाले पर्यटकों से टिकट का पूरा पैसा वसूला जाता है, इसके बावजूद उन्हें पूरे एनिमल देखने को नहीं मिलते। इससे पर्यटकों में भी नाराजगी है। </p>
<p><strong>द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>काम नहीं आया शासन सचिव का भरोसा  </strong> <br />वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जाइका प्रोजेक्ट के तहत बायलॉजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। गत वर्ष 4 जून को वन विभाग के शासन सचिव शिखर अग्रवाल के बायलॉजिकल पार्क निरीक्षण के दौरान समस्या से अवगत कराया था। इस पर उन्होंने जल्द ही बजट पास करवाने का भरोसा दिलाया था लेकिन दो साल बीतने के बाद भी बजट नहीं मिल पाया।   </p>
<p><strong>31 एनक्लोजर बनना बाकी </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, मगरमच्छ, बंदर व कछुए व ऐमु सारस क्रेन सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। तीन किमी पैदल चलना हो रहा मुश्किल: बायोलॉजिकल पार्क घूमने आए नयापुरा निवासी लोकेश कुमार, प्रहलाद मीणा, कविता, हर्षिता का कहना है, पार्क का ट्रैक करीब 3 किमी लंबा है और वन्यजीवों के एनक्लोजर भी दूर हैं। ऐसे में ई-रिक्शा चलाए जाने चाहिए। साथ ही कैफेटेरिया व बच्चों के लिए झूलों की सुविधा भी विकसित की जानी चाहिए। </p>
<p><strong>30 करोड़ से बना था बायोलॉजिकल पार्क </strong><br />वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवम्बर 2021 को काम पूरा हुआ। यहां प्रथम चरण में 18 एनक्लोजर बनाए जाने थे लेकिन बजट के अभाव में 13 ही बन सके। वहीं, पक्षियों के 5 एनक्लोजर भी अधूरे पड़े हैं।  </p>
<p><strong>बजट मिले तो सुधरे दशा </strong><br />द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थे, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। यूआईटी को पूर्व में प्रस्ताव भेजे गए हैं लेकिन अभी तक इस संबंध में अभी तक कुछ नहीं हुआ। वर्तमान में 31 एनक्लोजर बनने शेष हैं। जिसकी वजह से चिड़ियाघर से अन्य वन्यजीवों को बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं कर पा रहे। बजट मिले तो यहां वेटनरी हॉस्पिटल, स्टाफ  क्वार्टर, आॅडिटोरियम, कैफेटेरिया बने। हालांकि, बायोलॉजिकल पार्क में सुविधाएं विकसित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- दुर्गेश कहार, रैंजर, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 14:51:23 +0530</pubDate>
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                <title>बाघिन टी-107 दिखी शावकों के साथ</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। सवाई मधोपुर स्थित रंथम्भौर टाइगर रिज़र्व में बाघिन टी-107 अपने शावकों के साथ दिखाई दी। इसे देख पर्यटक भी रोमांचित हो गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/swaai-madhopur-news-tigress-t-107-seen-with-cubs/article-12112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bbbb.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सवाई मधोपुर</span>। सवाई मधोपुर स्थित रंथम्भौर टाइगर रिज़र्व में बाघिन टी-</span>107<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> अपने शावकों के साथ दिखाई दी। इसे देख पर्यटक भी रोमांचित हो गए। इस दौरान बाघिन अपने शावकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ़्ट करते हुए देखी गई। बाघिन शावकों को मुँह में लेकर कैमरों में क़ैद हुई। इस दौरान ड़ीएफओ महेंद्र शर्मा ने उस एरिया की निगरानी बड़ा दी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 14:19:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सड़क परियोजनाओं की सुस्त चाल: डीपीआर और यूटिलिटी शिफ्टिंग पर 33 करोड़ का लक्ष्य,  खर्च हो सके महज 2.94 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में विभिन्न सड़क निर्माण के लिए अवाप्त की गई भूमियों के अवार्डों का भुगतान करने के लिए पिछले साल 300 लाख रुपए का लक्ष्य रखा गया, लेकिन विभाग महज 154.08 लाख रुपए ही खर्च कर सका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-33-carore-target-on-dpr-and-utility-shifting/article-9731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/news-photo-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में विभिन्न सड़क निर्माण के लिए अवाप्त की गई भूमियों के अवार्डों का भुगतान करने के लिए पिछले साल 300 लाख रुपए का लक्ष्य रखा गया, लेकिन विभाग महज 154.08 लाख रुपए ही खर्च कर सका। साथ ही डीपीआर, यूटिलिटी शिफ्टिंग आदि कार्यों के लिए भी 33.85 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया, लेकिन दिसंबर 2021 तक केवल 2.94 करोड़ की खर्च हो सके। दरअसल आरएसएचडीपी-प्रथम एडीबी के तहत राज्य राजमार्गों को पीपीपी एन्यूटी व ईपीसी आधार पर विकसित करने के लिए वर्ष 2021-22 में 1268.15 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया।</p>
<p>इस परियोजना के अन्तर्गत 22 कार्य मंजूर किए गए थे, जिसमें से 12 कार्य ही पूरे हो सके तथा दस कार्य प्रगतिरत है। इस मद में वर्ष 2021-22 के अंतर्गत दिसंबर 2021 तक 443.08 करोड़ का ही व्यय हो सका है। पीडब्ल्यूडी के निष्पादन आय-व्ययक 2022-23 के अनुसार राज्य राजमार्गों को पीपीपी ईपीसी आधार पर विकसित करने के लिए विश्व बैंक के अन्तर्गत 570.88 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के अन्तर्गत 6 कार्य स्वीकृत किए गए है, जिसमें से दो कार्य पूर्ण कर लिए गए है। चार कार्य प्रगतिरत है। वर्ष 2021-22 में दिसंबर 2021 तक 44.56 करोड़ का व्यय किया गया।</p>
<p><strong>एनसीआर में 38 सड़कों की मंजूरी</strong><br />राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले अलवर जिले में आयोजना बोर्ड के माध्यम से 931.88 करोड़ की लागत से 629.67 किलोमीटर लंबाई के 38 सड़कों के विकास कार्य मंजूर किए गए थे। इन कार्यो के लिए दिसंबर 2021 तक 725.02 करोड़ का व्यय कर 585 किलोमीटर लंबाई में कार्य कर 29 कार्यों को पूर्ण किया, शेष प्रगति पर है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:57px;">
<td style="height:57px;width:246.217px;">कार्य का प्रकार    </td>
<td style="height:57px;width:82.7833px;">वर्ष    </td>
<td style="height:57px;width:81px;">कार्यों की संख्या   </td>
<td style="height:57px;width:84px;">लंबाई कि.मी.    </td>
<td style="height:57px;width:110px;">स्वीकृत लागत करोड़ में    </td>
<td style="height:57px;width:101px;">दिसंबर 2021 तक खर्च</td>
</tr>
<tr style="height:74px;">
<td style="height:74px;width:246.217px;">वीजीएफ    </td>
<td style="height:74px;width:82.7833px;">2017-18  </td>
<td style="height:74px;width:81px;">  3    </td>
<td style="height:74px;width:84px;">104.50   </td>
<td style="height:74px;width:110px;">312.79    </td>
<td style="height:74px;width:101px;">159.26</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:246.217px;">एन्यूटी-एडीबी    </td>
<td style="height:41px;width:82.7833px;">2017-18    </td>
<td style="height:41px;width:81px;">12   </td>
<td style="height:41px;width:84px;">745.73   </td>
<td style="height:41px;width:110px;">1778.03   </td>
<td style="height:41px;width:101px;">2415.98</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:246.217px;">ईपीसी एडीबी प्रथम   </td>
<td style="height:41px;width:82.7833px;">2017-18   </td>
<td style="height:41px;width:81px;">4    </td>
<td style="height:41px;width:84px;">233.96   </td>
<td style="height:41px;width:110px;">519.65  </td>
<td style="height:41px;width:101px;">  422.07</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:246.217px;"><br />ईपीसी-एडीबी-द्वितीय    </td>
<td style="height:41px;width:82.7833px;">2018-19    </td>
<td style="height:41px;width:81px;">6    </td>
<td style="height:41px;width:84px;">474.03    </td>
<td style="height:41px;width:110px;">1238.26    </td>
<td style="height:41px;width:101px;">716.60</td>
</tr>
<tr style="height:39.3667px;">
<td style="height:39.3667px;width:246.217px;">ईपीसी-विश्व बैंक    </td>
<td style="height:39.3667px;width:82.7833px;">2018-19    </td>
<td style="height:39.3667px;width:81px;">6    </td>
<td style="height:39.3667px;width:84px;">507.47    </td>
<td style="height:39.3667px;width:110px;">1344.34    </td>
<td style="height:39.3667px;width:101px;">603.97</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:246.217px;"><br />योग-   </td>
<td style="height:41px;width:82.7833px;">---    </td>
<td style="height:41px;width:81px;">31    </td>
<td style="height:41px;width:84px;">2065.69    </td>
<td style="height:41px;width:110px;">5193.07    </td>
<td style="height:41px;width:101px;">4345.08</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<p><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 12:02:59 +0530</pubDate>
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