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                <title>बस केयर-डे योजना की गति धीमी पड़ी तो बीच राह में अटकने लगी निगम की बसें </title>
                                    <description><![CDATA[रोडवेज में वर्तमान में 75 शिड्युल पर बसों का संचालन हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/when-the-pace-of-bus-care-day-scheme-slowed-down--the-corporation-s-buses-started-getting-stuck-in-the-middle-of-the-road/article-58955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/bus-care-day-ki-gati-dhimi-pdi-to-beech-raahme-atkne-lgi-nigam-ki-buse...kota-news-07-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यात्रियों को रोडवेज बसों में अच्छी सुविधाएं देने के लिए तीन साल पहले रोडवेज प्रशासन की ओर से अपनी बस केयर-डे योजना शुरू की थी। रोडवेज के तत्कालीन एमडी नवीन जैन ने तीन साल पहले रोडवेज की बसों की छवि सुधारने को लेकर यह योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत रोडवेज वर्कशॉप में कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर खराब बसों की मरम्मत कर उसे रूट पर चलने योग्य करने के टारगेट दिए थे। जिसके शुरुआती दौर में काफी सार्थक परिणाम भी आए थे। नवीन जैन के एमडी पद से हटते ही कई डिपो में यह कार्य धीरे पड़ गए।  लेकिन कोटा वर्कशॉप में यहां के मैकेनिक अभी हर माह दिए टारगेट के अनुसार बसों की मरम्मत कर यात्रियों की सुविधाजनक बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन लगातार बसों की संख्या घटने से बसे रूट पर ही चल रही मरम्मत के लिए उन्हें चार से पांच दिन वर्कशॉप में खड़े होने का समय ही नहीं मिल पा रहा जिसके चलते  बसों ठीक से मरम्मत नहीं हो पा रही है और आए दिन बसे रास्ते में ब्रेक डॉउन हो रही है। दूसरी वर्कशॉप में नई बसे आई उनकी मरम्मत के लिए प्रशिक्षित मेकेनिक नहीं है ऐसे में कंपनी के मैकेनिक बुलाकर ठीक कराने में समय लगता है। ऐसे में उस रूट पर दूसरी बस उतारी पड़ी जो बीच रास्ते में ही धोका दे देती है। </p>
<p><strong>पार्ट्स नहीं मिलने से होती है परेशानी</strong><br />वर्कशॉप में कई बसे पुरानी है उनके पार्ट्स नहीं मिलते है। जयपुर से पार्ट आने  समय लग जाता है।जिस बस आॅफ लाइन हो जाती है। वकशॉप में हर माह 30 टायर की आवश्यकता होती है लेकिन आते 8 ही ऐसे में बसों की ठीक से मरम्मत नहीं हो पाती है। कई बसों रूट पर चलाने के लिए एक दूसरी बसों के पार्ट लगाकर बस तैयार कर रूट पर चलाया जा रहा है। बेडे में अभी पांच नई बसे मिली वो अनुंबंधित है। </p>
<p><strong>75 शेड्यूल पर बसें हो रही संचालित </strong><br />रोडवेज में वर्तमान में 75 शिड्युल पर बसों का संचालन हो रहा है। ऐसे में बस केयर डे में बस की मरम्मत करने में परेशानी हो रही है। दूसरा स्टाफ की कम है। 28 मैनिक के भरोसे 76 बसों का भार है। बीएस -4 बसों मॉडल के बसों के प्रशिक्षित मैकेनिक नहीं है। </p>
<p><strong>वर्कशॉप में अभी 7 बसें कंडम </strong><br />कोटा वर्कशॉप में अभी सात बसें ऐसी हंै जो कंडम हैं। इनकी मरम्मत हो सकती है लेकिन इनके लिए मड रूट नहीं है। ऐसे में इनकी फिलहाल मरम्मत नहीं की जा रही है। इसके अलावा कुछ ग्रामीण परिवहन की बसें भी खटारा होकर पड़ी है। </p>
<p><strong>आरामदायक सफर के लिए शुरू की थी योजना</strong><br />तीन साल पहले राजस्थान रोडवेज की बसों में यात्रियों के सफर आरामदायक बनाने के लिए केयर-डे  योजना की शुरुआत की थी। एक साल तक तो इसके काफी सार्थक परिणाम भी आए। जिसमें  यात्रियों को सफर के दौरान रोडवेज की बसों में न तो हिचकोले खाने पड़े और न ही बसों में गंदगी नजर आई । ऐसा इसलिए संभव हो सका क्योंकि ‘केयर डे’ के दिन आगार प्रबंधन अपनी-अपनी बसों की ठीक से सार-संभाल कर रहे थे। 2020 से 2021 के मध्य यांत्रिक विभाग की मेहनत से कई खटारा हो चुकी बसें फिर से ठीक होकर रोड पर दौड़ने लगी जिससे बसों की कमी कुछ हद तक कम हुई । वर्तमान में बस केयर डे योजना ठंडे बस्ते चल रही है। </p>
<p><strong>पहले एबीसीडी योजना से पूरी जांच करते थे</strong><br />पिछले तीन साल में कोटा वर्कशॉप में 90 फीसदी बसों की मरम्मत एबीसीडी योजना के तहत की थी। लेकिन अब ये अभियान धीमा पड़ गया है। इस अभियान में  बस के बॉडीलुक-डे, बस पेंटिंग, डेंटिंग, साफ-सफाई, इलेक्ट्रिक-डे, बस की लाइट, बैटरी चैक, वायरिंग चैक, सेफ्टी-डे के कार्यक्रम शामिल थे। इसमें अलग-अलग प्रभारी लगाए गए थे, ताकि इसकी सही तरीके से मॉनिटरिंग की जा सके। आगार प्रबंधक बसों की संख्या व आवागमन को ध्यान में रखते थे प्रत्येक डे को दो या तीन दिन तक करते थे। इसमें बसों की फोटोग्राफी के साथ बसों के रखरखाव का पूरा ध्यान रखा जाता है। लेकिन अब समय अभाव से महीने में एक से दो बस की एबीसीडी जांच हो पाती है। नतीजा बस रास्ते में ब्रेक डाउन हो रही है। </p>
<p><strong>35 पुरानी गाड़ियां </strong><br />चालक जयसिंह ने  बताया कि रोडवेज आगार में करीब 35 बसें 2012-2013 मॉडल की है। जो काफी पुरानी हो चुकी हैं। कई बार उनकी मरम्मत की जा चुकी है। जिनकी फर्श से लेकर अब बाडी कमजोर हो चुकी है। इनकी अवधि खत्म हो गई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रोडवेज वर्कशॉप में बस केयर डे योजना के तहत हर माह एक से दो बसों की मरम्मत कर उन्हें यात्री सुविधा युक्त किया जाता है। <br /><strong>- सुचिता गुप्ता, आगार प्रबंधक संचालन कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 18:48:56 +0530</pubDate>
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                <title>पिछले 8 साल में धीमा पड़ा आर्थिक विकास, आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार हो: चिदंबरम</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार को बढ़ती महंगाई को देखते हुए आर्थिक नीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--economic-growth-slowed-in-last-8-years--economic-policies-should-be-reconsidered--chidambaram/article-9734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/nav.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की पिछले आठ वर्षों में धीमी आर्थिक विकास दर बड़ी चिंता का विषय है। मोदी सरकार आर्थिक नीतियों में पूरी तरह विफल साबित हुई है। केंद्र सरकार को बढ़ती महंगाई को देखते हुए आर्थिक नीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उदयपुर में कांग्रेस चिंतन शिविर में पहुंचे चिदंबरम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि उदारीकरण के 30 साल के बाद अब आर्थिक नीतियों को फिर से तय करने पर विचार किया जाए। वैश्विक और स्थानीय घटनाक्रमों के मद्देनजर यह जरूरी हो गया है। मेरी इस मांग का यह मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस उदारीकरण से पीछे हट रही है, बल्कि उदारीकरण के बाद पार्टी आगे की ओर कदम बढ़ा रही है। आज भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।</p>
<p><br />चिदंबरम ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार के दौरान कई तरह की कठिनाइयां रही है। पिछले पांच महीनों के दौरान समय समय पर ताजा विकास दर का आकलन कम किया जाता रहा है। आज महंगाई जिस स्तर पर पहुंच गई है, वह जनता को स्वीकार नहीं है, क्योंकि यह आगे भी और बढ़ने की आशंका है। गैर भाजपा शासित राज्यों से केंद्र सरकार भेदभाव पूर्ण रवैया कर रही है। राज्यों को उनका जीएसटी हिस्से का पैसा नहीं दिया जा रहा, जिससे गैर भाजपा शासित राज्यों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। केंद्र और राज्यों के बीच के राजकोषीय संबंधों की समग्र समीक्षा की जानी चाहिए। भारत सरकार कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पर महंगाई का ठीकरा नहीं फोड़ सकती। किसान विरोधी केंद्र सरकार पर्याप्त गेहूं खरीदने में विफल रही है। आज देश में बेरोजगारी बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। रुपया और डॉलर की कीमत में आए अंतर पर चिदंबरम ने कहा कि मोदी सरकार 2014 में डॉलर के मुकाबले 40 रुपए लाने की बात करती थी लेकिन वह आज तक ऐसा नहीं कर पाए।</p>
<p>पूजा स्थल कानून- 1991 के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए: पी. चिदंबरम</p>
<p>कांग्रेस ने कहा है कि पूजा स्थल कानून- 1991 के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। बल्कि इसकी भावना को बनाए रखा जाना चाहिए। कानून का पालन सभी के हित में होगा। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने आज यहां एक सवाल के जवाब में कहा कि पूर्व पीएम नरसिंह राव सरकार के कार्यकाल में यह कानून बनाया गया था। ऐसे में देश के सभी पूजा स्थालों की साल 1947 के पूर्व की स्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए। असल में, चिदंबरम से वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद एवं आगरा के ताजमहल में प्रस्तावित सर्वे को लेकर सवाल किया गया था। जिस पर चिदंबरम ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और समाज में ध्रुवीकरण करने का कोई मेल नहीं है। ध्रुवीकरण हमेशा राजनीतिक मकसद से किया जाता है। ऐसे में पूजा स्थल कानून- 1991 की भावना का ख्याल जाना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की कोशिश नहीं होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 12:51:35 +0530</pubDate>
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