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                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरित ऊर्जा परियोजना समझौते पर डेनमार्क-जर्मनी ने किए हस्ताक्षर, 2030 तक 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की बनाई योजना</title>
                                    <description><![CDATA[डेनमार्क और जर्मनी ने बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड पवन परियोजना पर सहमति जताई। यह सीमा-पार पहल यूरोपीय ऊर्जा बाजार को जोड़ते हुए हरित बिजली आपूर्ति बढ़ाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/denmark-germany-sign-green-energy-project-agreement-plan-to-invest-95/article-140986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(13)2.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। डेनमार्क ने जर्मनी के साथ मिलकर बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड नामक एक प्रमुख अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमति व्यक्त की है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। फ्रेडरिक्सन ने हैम्बर्ग में उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह एक सीमा पार परियोजना है जो यूरोपीय ऊर्जा बाजार को एकीकृत करती है। यह जर्मन घरों, डेनमार्क के घरों और हमारी कंपनियों को हरित विद्युत प्रदान करती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह की पहली परियोजना है। डीपीए की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन में जर्मनी और डेनमार्क ने बाल्टिक सागर में बोर्नहोम द्वीप पर एक संयुक्त ऊर्जा केंद्र स्थापित एवं संचालित करने के लिए भी एक समझौता पर हस्ताक्षर किया। </p>
<p>गौरतलब है कि, इस द्वीप को बाल्टिक सागर में स्थित अपतटीय पवन ऊर्जा संयंत्रों से जर्मनी और डेनमार्क तक विद्युत पहुंचाने वाले केंद्र के रूप में उपयोग करने की योजना है। परियोजना के अंतर्गत दोनों देशों ने आवश्यक उपकरणों के निर्माण एवं रखरखाव की लागत साझा करने पर सहमति व्यक्त की है। </p>
<p>इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया कि शिखर सम्मेलन में उपस्थित बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम के ऊर्जा मंत्रियों ने क्षेत्र में पवन ऊर्जा के विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस उद्योग में 2030 तक लगभग 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की योजना है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा, ग्रीनलैंड में अपने दूतावास के उद्घाटन पर गश्ती पोत भेजेगा कनाडा</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा ग्रीनलैंड के नूक में वाणिज्यिक दूतावास उद्घाटन के दौरान आर्कटिक गश्त हेतु तटरक्षक पोत तैनात करेगा, जिससे क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-anita-anand-said-canada-will-send-patrol-vessel/article-140976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अगले हफ्ते अपने वाणिज्यिक दूतावास के उद्घाटन के मौके पर कनाडा एक गश्ती पोत भेजेगा। कनाडाई मीडिया ने विदेश मंत्री अनीता आनंद के हवाले से यह जानकारी दी है।</p>
<p>आनंद ने सोमवार को एक साक्षात्कार में कहा कि तैनात किये जाने वाले पोत को विशेष रूप से आर्कटिक क्षेत्रों में गश्त के लिये तैयार किया गया है। विदेश मंत्री के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह एक कनाडाई तटरक्षक पोत होगा, न कि शाही कनाडाई नेवी पोत। पिछले हफ्ते आनंद ने कहा था कि कनाडा आर्कटिक में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का इरादा रखता है और इसी सिलसिले में ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्यिक दूतावास खोलेगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के समय में कई बार उसे खरीदने या 'कब्जा' करने की मंशा जताते हुए कहा है कि यह उनके देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये जरूरी है। </p>
<p>डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने ही अमेरिका को कोई गलत कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी दी है और अपनी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिये कहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:21:41 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीनलैंड खरीदने निकले ट्रंप पर पुतिन का तंज, बताई नई कीमत, यूरोप को दिखाया कूटनीतिक आईना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/putin-taunts-trump-who-set-out-to-buy-greenland-shows/article-140490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/greeland-dispute.png" alt=""></a><br /><p>ग्रीनलैंड। ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं। दरअलस, राष्ट्रपति पुतिन ने डेनमार्क पर ग्रीनलैंड के साथ औपनिवेशिक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस द्वीप की कीमत आज के समय में महज 200 से 250 मिलियन डॉलर आंकी जा सकती है। राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की ओनरशिप के विवाद से रूस का कोई लेना-देना नहीं है और यह मामला अमेरिका व डेनमार्क को आपस में सुलझाना चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने 1867 में अमेरिका द्वारा रूस से अलास्का की खरीद का उदाहरण दिया और महंगाई के हिसाब से उसकी मौजूदा कीमत का हवाला देकर ग्रीनलैंड का तुलनात्मक मूल्य बताया। पुतिन के इस बयान को यूरोप के लिए तंज माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन यूरोप-अमेरिका के टकराव को यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में राजनीतिक संतुलन के तौर पर देख रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 14:43:20 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका फाइन ग्रीनलैंड विधेयक: अमेरिकी सांसद ने ग्रीनलैंड के विलय और राज्य का दर्जा देने के लिए पेश किया विधेयक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी कांग्रेस में ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का विधेयक पेश किया गया। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-fines-greenland-bill-us-mp-introduced-bill-for-the/article-139420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-on-greeland.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के लिए अमरीकी कांग्रेस में एक विधेयक अमेरिकी संसद में पेश किया है। सांसद फाइन के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम सोमवार को फ्लोरिडा के रिपब्लिकन ने पेश किया। विधेयक के बताए गए लक्ष्यों में ग्रीनलैंड के विलय और उसके बाद उसे राज्य का दर्जा देना शामिल है। </p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आज, मुझे ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम पेश करते हुए गर्व हो रहा है, यह एक ऐसा विधेयक है जो राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को संघ में लाने के लिए जरूरी तरीके खोजने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं, हमारे दुश्मन आर्कटिक में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा नहीं होने दे सकते। ग्रीनलैंड को हासिल करके हम अपने दुश्मनों को आर्कटिक क्षेत्र को नियंत्रित करने से रोकेंगे और रूस और चीन से अपने उत्तरी हिस्से को सुरक्षित करेंगे।</p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ग्रीनलैंड कोई दूर का इलाका नहीं है जिसे हम नजरअंदाज कर सकें, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत जरूरी संपत्ति है। जो भी ग्रीनलैंड को नियंत्रित करेगा, वह आर्कटिक के मुख्य शिङ्क्षपग रास्तों और अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। अमेरिका उस भविष्य को ऐसे शासनों के हाथों में नहीं छोड़ सकता जो हमारे मूल्यों से नफरत करते हैं और हमारी सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं।</p>
<p>विधेयक में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसे कदम उठाने का अधिकार है जो जरूरी हो सकते हैं, जिसमें डेनमार्क के साथ बातचीत करने की कोशिश करना भी शामिल है, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिका के क्षेत्र के रूप में मिलाया जा सके या किसी और तरह से हासिल किया जा सके। ट्रंप को अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने के बाद विधेयक के तहत कांग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करेगा, जिसमें उन संभावित संघीय क़ानूनों में बदलावों का विवरण होगा, जिन्हें राष्ट्रपति नए अधिग्रहित क्षेत्र को एक राज्य के रूप में शामिल करने के लिए आवश्यक समझें।</p>
<p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कल कहा कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए कोई खास समय-सीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कोई समय-सीमा तय नहीं की है लेकिन यह निश्चित रूप से उनके लिए एक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने कल रात बहुत साफ कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो आखिरकार इसे चीन या रूस द्वारा हासिल कर लिया जाएगा, या शायद दुश्मनी से कब्जा कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 12:27:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हमें अमेरिकी होना मंजूर नहीं, हमें आजादी पसंद, खुद भविष्य तय करेंगे, ग्रीनलैंडवासियों ने ट्रम्प को सुनाई खरी-खरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड के सभी पांच राजनीतिक दलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहाँ के लोग तय करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/we-do-not-accept-being-americans-we-like-freedom-we/article-139148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगेन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर धमकी भरा लहजा अपनाया हुआ है। इतना ही नहीं अमेरिकी नेता भी ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इस बीच  ग्रीनलैंड की संसद के सभी पांच प्रमुख राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक जवाब दिया है। राजनीतिक दलों ने ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की धमकियों को कड़े शब्दों में खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकन नहीं होगा और उसका भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों की तरफ से तय किया जाना चाहिए।</p>
<p>बयान में पांचों दलों, जिसमें प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन सहित विपक्षी दल नालेराक के नेता भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि वे किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण के गंभीर रूप से असम्मानजनक रुख के खिलाफ हैं। देर रात जारी बयान में नेताओं ने साफ कहा कि हम अमेरिकी नहीं होंगे, हम डेनिश नहीं होंगे, हम ग्रीनलैंडवासी हैं। सभी दलों की यह एकता विशेष रूप से इसलिए अहम है,  क्योंकि इसमें विपक्षी पार्टी नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग भी शामिल हैं, जो वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए सबसे अधिक इच्छुक रही हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले ब्रोबर्ग ने ग्रीनलैंड से डेनमार्क को दरकिनार करते हुए सीधे अमेरिका के साथ बातचीत करने का आह्वान किया था। अब बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रीनलैंड का भविष्य खुद ग्रीनलैंड के लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय कानून और आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।</p>
<p>यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद अपनी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस और चीन को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमरिकी कब्जे को जरूरी बता रहे हैं, लेकिन ग्रीनलैंड के लोगों ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया है और उन्हें दोटूक कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की उनकी कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी। ग्रीनलैंडवासियों ने कहा कि ग्रीनलैंड के लोग स्वतंत्रताप्रिय हैं और उनकी स्वतंत्रता से कोई खिलवाड़ नहीं करे। </p>
<p><strong>डेनमार्क में भी राजनीतिक हलचल तेज </strong></p>
<p>ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर डेनमार्क में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने अमेरिका के रुख को न सिर्फ परेशान करने वाला बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। रासमस जारलोव ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे सहयोगी देश द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा, यह अभूतपूर्व है कि आप अपने ही मित्र देशों को धमकाएं ऐसे देशों को, जिन्होंने कभी आपके खिलाफ कुछ नहीं किया और हमेशा वफादार रहे।</p>
<p><strong>वफादार दोस्तों को धमकाने का हैरतअंगेज रवैया</strong></p>
<p>डेनिश सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर डेनमार्क जैसे देश को इस तरह की आक्रामक भाषा का सामना करना पड़ सकता है, तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा अगर डेनमार्क सुरक्षित नहीं है, तो फिर कोई भी देश सुरक्षित नहीं। ग्रीनलैंड के संदर्भ में यारलोव ने ट्रंप के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की ओर से न तो कोई खतरा है और न ही किसी प्रकार की शत्रुता। उन्होंने जोड़ा ग्रीनलैंड के मामले में किसी भी तरह का बहाना नहीं बनता, न कोई धमकी है, न दुश्मनी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 12:14:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी: डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर कहा कि रूस और चीन के खतरे को देखते हुए अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। डेनमार्क ने इस दावे को 'तर्कहीन' बताकर सिरे से खारिज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/greenland-is-strategically-important-for-america-donald-trump/article-138528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फिर दोहराया कि अमेरिका को रणनीतिक दृष्टिकोण के मद्देनजर ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। विमान एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है, क्योंकि इस समय यह बहुत रणनीतिक जगह है और वहां हर जगह रूस और चीन के जहाज फैले हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्हें ग्रीनलैंड की आवश्यकता है और डेनमार्क इसे संभालने में सक्षम नहीं होगा। उन्होंने दावा भी किया कि यूरोपीय संघ भी उनके इस विचार का समर्थन करता है और वह इस बात को जानते हैं।</p>
<p>ट्रंप की यह टिप्पणी वेनेजुएला में वाशिंगटन के सैन्य अभियान के बाद आई है। एक संप्रभु देश के खिलाफ अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई ने ग्रीनलैंड को लेकर उन आशंकाओं को फिर बढ़ा दिया है, जिसके बारे में ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि वह आर्कटिक में इसकी रणनीतिक स्थिति के मद्देनजर इसका विलय करना चाहते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने पहले भी कई बार कहा है कि वह अटलांटिक महासागर स्थित एक विशाल और संसाधन संपन्न द्वीप ग्रीनलैंड अपने देश में विलय करना चाहते हैं। ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है। </p>
<p><strong>किसी का भी विलय करने का कोई अधिकार नहीं  </strong></p>
<p>ट्रंप के इस बयान के बाद डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका के राष्ट्रपति से इस क्षेत्र को धमकी देना बंद करने का आग्रह किया है। फ्रेडरिक्सन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को आवश्यक बताया जाना पूरी तरह से तर्कहीन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को डेनमार्क साम्राज्य के तीन देशों में से किसी का भी विलय करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अमेरिका से एक ऐतिहासिक रूप से करीबी सहयोगी और दूसरे देश तथा वहां के लोगों के खिलाफ धमकियां बंद करने का पुरजोर आग्रह करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि वे बिक्री के लिए नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि वर्तमान में दुर्लभ खनिज सामग्री की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर चीन का दबदबा है। इसलिए अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और इन महत्वपूर्ण संसाधनों पर चीन के नियंत्रण का मुकाबला करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:40:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपील दोहराई, यूरोपीय संघ ने जताई आ​पत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग दोहराई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/donald-trump5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी अपील दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, खनिजों के लिए नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा, वे कहते हैं कि डेनमार्क इसका मालिक है। </p>
<p>डेनमार्क ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया है और न ही कोई सैन्य सुरक्षा प्रदान की है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है और द्वीप से संबंधित सैन्य क्षमताएं बनाए रखता है।</p>
<p>रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, हमें ग्रीनलैंड हासिल करना ही होगा और वह (लैंड्री) इस अभियान का नेतृत्व करना चाहते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया में धीरे-धीरे बढ़ रहा है हिजाब पर प्रतिबंध का दायरा, यूरोप सहित कई देशों में सार्वजनिक स्थानों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक में रोक</title>
                                    <description><![CDATA[डेनमार्क सरकार ने बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध को स्कूलों व विश्वविद्यालयों तक बढ़ाने का ऐलान किया है। आप्रवासन मंत्री रासमस स्टॉकलंड के अनुसार, चेहरा ढकने वाले परिधान शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं हैं। प्रस्ताव फरवरी 2026 में संसद में आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-scope-of-ban-on-hijab-is-gradually-increasing-in/article-136465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hijab.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डेनमार्क सरकार ने ऐलान किया है कि वह बुर्का और निकाब (पूरे चेहरे को छुपाने वाले इस्लामी आवरण) पर पहले से लागू प्रतिबंध को अब स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक भी बढ़ाना चाहती है। इस बात की घोषणा डेनमार्क के आप्रवासन और समावेशन मंत्री रासमस स्टॉकलंड ने की, जिन्होंने कहा, बुर्का, निकाब या अन्य किसी ऐसे परिधान का शैक्षणिक वातावरण में कोई स्थान नहीं होना चाहिए जो लोगों के चेहरे को छुपाता हो। यह प्रस्ताव संसद में फरवरी 2026में पेश किया जाएगा। डेनमार्क में पहले से ही 1 अगस्त 2018 से सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लागू है, जिसके तहत उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कानून व्यापक रूप से लागू नहीं होता क्योंकि बुर्का/निकाब पहनने वाली महिलाओं की संख्या कम है। </p>
<p><strong>अब तक कितने देशों में बुर्का/चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध</strong></p>
<p>पूरे दुनिया भर में कई देश ऐसे हैं जिन्होंने बुर्का, निकाब या चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा रखा है। इनमें से अधिकतर यूरोपीय देश हैं, जबकि कुछ अन्य देशों में भी ऐसे नियम हैं। </p>
<p><strong>प्रमुख देश जहां प्रतिबंध लागू है</strong></p>
<p>    फ्रांस :  2011 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाया गया था। <br />    बेल्जियम : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/निकाब बैन। <br />    बुल्गारिया : पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधान पर प्रतिबंध। <br />    डेनमार्क :  2018 से सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध, अब स्कूल/विश्वविद्यालय भी शामिल। <br />    ऑस्ट्रिया : कुछ जगहों पर हेडस्कार्फ और बालों ढकने पर प्रतिबंध के साथ नया कानून। <br />    नीदरलैंड : सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में प्रतिबंध। <br />    स्विट्जरलैंड : 1 जनवरी 2025 से बैन लागू। <br />    जर्मनी :  कुछ राज्यों में प्रतिबंध। <br />    इटली :  कुछ स्थानीय अधिकार क्षेत्र में प्रतिबंध। <br />    स्पेन (कैटलोनिया) : कुछ क्षेत्रों में बैन। <br />    लक्समबर्ग : पूर्णतया बैन। <br />    नॉर्वे : नर्सरी, स्कूल और यूनिवर्सिटी में प्रतिबंध। <br />    कोसोवो : सार्वजनिक स्कूलों में बैन। <br />    बोस्निया और हजेर्गोविना : न्यायिक संस्थानों में प्रतिबंध। </p>
<p><strong>यूरोप के बाहर कहां-कहां बुर्का/नकाब पर प्रतिबंध</strong></p>
<p><strong>यूरोप (ईयू से बाहर)</strong><br />   </p>
<p>    ब्रिटेन  : राष्ट्रीय बैन नहीं, लेकिन स्कूलों, अदालतों व कार्यस्थलों में स्थानीय नियम<br />    रूस :  राष्ट्रीय स्तर पर बैन नहीं, कुछ क्षेत्रों/स्कूलों में प्रतिबंध</p>
<p><strong>एशिया</strong></p>
<p>    चीन (शिनजियांग) : बुर्का, निकाब और धार्मिक प्रतीकों पर सख्त प्रतिबंध<br />    श्रीलंका :  2019 आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से चेहरा ढकने पर रोक<br />    ताजिकिस्तान : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/विदेशी परिधान बैन<br />    उज्बेकिस्तान : आंशिक प्रतिबंध, सार्वजनिक स्थलों पर नियंत्रण</p>
<p><strong>अफ्रीका</strong></p>
<p>    चाड : आतंकी घटनाओं के बाद बुर्का पर प्रतिबंध<br />    कांगो : सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर रोक<br />    गैबॉन : सुरक्षा कारणों से बुर्का/निकाब बैन</p>
<p><strong>मध्य-पूर्व  </strong></p>
<p>    तुर्की : पहले सरकारी संस्थानों में बैन था, अब अधिकांश प्रतिबंध हटाए गए।</p>
<p><strong>विवाद और बहस</strong></p>
<p>बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध का मुद्दा गहन विवाद में रहा है। समर्थक इसका तर्क देते हैं कि यह समाजिक एकीकरण और पहचान की स्पष्टता के लिए जरूरी है, जबकि आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। मानवाधिकार समूहों का मानना है कि यह कानून धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। डेनमार्क सरकार भी यह साफ कर चुकी है कि यह कानून धर्म की आजादी को खत्म नहीं करता, बल्कि उसका मकसद लोकतंत्र और समाज में खुलापन बनाए रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 11:47:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेनमार्क ने चीन के साथ हरित परिवर्तन सहयोग के लिए किया आह्वान, सोरेन गाडे ने कहा- डेनमार्क और चीन के बीच हरित साझेदारी और मजबूत होगी</title>
                                    <description><![CDATA[ डेनमार्क संसद के अध्यक्ष सोरेन गाडे ने कहा है कि डेनमार्क और चीन को  हरित प्रौद्योगिकी और टिकाऊ उद्योगों में आपसी सहयोग और मजबूत करना चाहिए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/denmark-called-for-green-change-with-china-soren-gade-said/article-118472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(3)35.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। डेनमार्क संसद के अध्यक्ष सोरेन गाडे ने कहा है कि डेनमार्क और चीन को  हरित प्रौद्योगिकी और टिकाऊ उद्योगों में आपसी सहयोग और मजबूत करना चाहिए। डेनमार्क में चीन के दूतावास की ओर से दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगां पर सोमवार को आयोजित समारोह में गाडे ने मीडिया से कहा कि उन्हें विश्वास है कि डेनमार्क और चीन के बीच हरित साझेदारी और मजबूत होगी। खासकर, वैश्विक सतत विकास और हरित बदलाव की आवश्यकता को देखते हुए। उन्होंने कहा कि हम हरित प्रौद्योगिकी में बहुत अधिक सक्रिय हैं और चीन भी इसमें शामिल है। हम आने वाले वर्षों में हरित बदलाव पर सहयोग करना जारी रखेंगे। </p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग गहरा हुआ है। उन्होंने विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुस्सेन की हालिया चीन यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती का प्रतीक बताया। संसद अध्यक्ष ने पवन ऊर्जा, बैटरी तकनीक और नयी ऊर्जा वाहनों में चीन-डेनमार्क के बीच मजबूत सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र भविष्य में सहयोग के मुख्य केंद्र बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन इन क्षेत्रों में अग्रणी है और आने वाले वर्षों में दोनों देशों का सहयोग और गहराना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 12:12:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा के खेतों में दिखेगी डेनमार्क व नीदरलैंड की झलक, विदेशा यात्रा पर जाएंगे किसान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षण लेने के बाद किसानों द्वारा कोटा संभाग के खेतों में डेनमार्क और नीदरलैंड की खेती की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-glimpse-of-denmark-and-netherlands-will-be-seen-in-the-fields-of-kota/article-106000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश के 100 प्रगतिशील व नवाचारी किसानों को सरकार खेती में आधुनिक तकनीक व नवाचार से रूबरू करवाने के लिए जल्द ही विदेश यात्रा पर भेजेगी। इनमें कोटा संभाग के 9 किसान भी शामिल हैं। अब तक किसानों को इजरायल भेजा जाता रहा है। पिछले कुछ समय इजरायल व हमास के बीच चल रहे संघर्ष को देखते हुए इस बार सरकार ने किसानों को डेनमार्क व नीदरलैंड भेजने का निर्णय किया है। वहां इन किसानों को हाईटेक खेती व डेयरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक सप्ताह के इस भ्रमण कार्यक्रम को लेकर किसानों का चयन हो चुका है। कोटा सहित जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर और अन्य संभागों के किसानों को यह मौका दिया जाएगा। प्रशिक्षण लेने के बाद किसानों द्वारा कोटा संभाग के खेतों में डेनमार्क और नीदरलैंड की खेती की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p><strong>कोटा जिले के तीन किसानों का चयन</strong><br />उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकार की ओर से किसानों का चयन करने के लिए अंक निर्धारित किए गए थे। इन अंकों के आधार पर कोटा जिले के तीन किसानों का चयन किया गया है। इनमें दो किसान सांगोद और एक किसान सीमल्या क्षेत्र का है। नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत 75 फीसदी किसानों का चयन विभागीय स्तर पर हो चुका है। अब शेष पच्चीस प्रतिशत किसानों का चयन राज्य सरकार के स्तर पर होना है। कोटा संभाग के कुल 9 किसानों का चयन किया गया है। इनमें एक पशुपालन क्षेत्र का शामिल किया गया है। उद्यान विभाग ने अंकों के आधार पर किसानों का पैनल बनाकर सरकार के पास भेज दिया था। बाद में सरकार द्वारा विदेश यात्रा के लिए किसानों का चयन किया गया है।   </p>
<p><strong>प्रथम चरण में जाएंगे सौ किसान</strong><br />उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसानों को विदेशों में भेजने की घोषणा राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में की थी। इस सम्बंध में किसानों से दस सितम्बर तक आवेदन मांगे गए थे। चयनित होने वाले किसानों में एसटी, एससी, महिला कृषक के साथ-साथ बीस प्रतिशत पशुपालकों को शामिल किया गया। कुल अस्सी किसानों व बीस पशुपालकों का चयन किया गया। प्रथम चरण में कुल सौ किसान विदेश जाएंगे। वहां नई तकनीक सीखकर राजस्थान में अन्य किसानों को सिखाएंगे व खुद भी उसका उपयोग करेंगे।  </p>
<p><strong>128 किसानों ने किया था आवेदन</strong><br />सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा करने के लिए किसानों में होड़ मची गई थी।  नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत किसानों से विदेशा यात्रा के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके तहत कोटा संभाग से 128 किसानों ने विदेश यात्रा के लिए आवेदन किया था। यानी अधिकांश किसान सरकारी खर्च पर विदेश जाना चाहते थे। उद्यान विभाग ने अंकों के आधार पर किसानों का पैनल बनाकर सरकार के पास भेज दिया था। इसके बाद सरकार ने कोटा संभाग के 9 किसानों को चयन कर लिया है। संभाग के एक किसान का चयन सरकार द्वारा किया जाएगा। सरकार द्वारा सभी संभा्रगों से किसानों का चयन करने के बाद जल्द ही इनकों को विदेश यात्रा पर भेजा जाएगा।  </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-100 प्रगतिशील किसान जाएंगे विदेश<br />- 09 किसानों का कोटा संभाग से चयनित<br />- 128 किसानों ने किया था आवेदन<br />- 25 फीसदी किसानों का चयन सरकार करेगी</p>
<p>राज्य सरकार का यह प्रोग्राम युवा किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करने का अच्छा प्रयास है। विदेशों में हाईटेक तरीके से खेती की जाती है। यहां के किसानों को वहां पर खेती की उन्नत तकनीक सीखने को मिलेगी। इससे अन्य किसानों को भी खेती की जानकारी मिलेगी।<br /><strong>-लक्ष्मीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>राज्य सरकार नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत किसानों को जल्द डेनमार्क व नीदरलैंड हाईटेक खेती के प्रशिक्षण के लिए भेजेगी। कोटा संभाग से 9 किसानों का चयन कर लिया गया है। एक किसान का चयन सरकार करेगी। इसके लिए 128 किसानों ने आवेदन किया था। <br /><strong>-आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 16:23:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की लिस्ट जारी : डेनमार्क सबसे ईमानदार, भारत कितने नंबर पर; पाकिस्तान का नाम फिर से फिसड्डियों में</title>
                                    <description><![CDATA[ लगभग 6.8 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है, जो दुनिया की कुल आबादी के 85 प्रतिशत के बराबर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/list-of-the-worlds-most-corrupt-countries-released-denmark-the/article-103976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)23.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने मंगलवार को करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2024 की रैंकिंग जारी कर दी है। भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक के तहत दुनिया भर के सबसे भ्रष्ट और सबसे ईमानदार देशों की रैंकिंग की जाती है। लिस्ट जारी करने के लिए सीपीआई 180 देशों और क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कथित स्तरों के आधार पर रैकिंग को जारी करता है। देशों को 0 से 100 के बीच अंक दिए जाते हैं, जिसके सबसे अधिक अंक पाने वाले सबसे साफ सुथरा और कम अंक पाने वाले को सबसे भ्रष्ट देश घोषित किया जाता है। रिपोर्ट के ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बर्लिन ने जारी किया है। सीपीआई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक रूप से उच्च बना हुआ है। रिपोर्ट में दुनिया भर में गंभीर भ्रष्टाचार सामने आया है। दो तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 100 में से 50 से नीचे है। लगभग 6.8 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है, जो दुनिया की कुल आबादी के 85 प्रतिशत के बराबर है।</p>
<p><strong>ये हैं सबसे ईमानदार देश</strong><br />सबसे कम भ्रष्टाचार वाले देशों में डेनमार्क लगातार 7वें साल टॉप पर रहा, जिसने 90 अंक प्राप्त किया। उसके बाद फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) का स्थान रहा। इसके बाद न्यूजीलैंड (83) और लग्जमबर्ग (81) शामिल हैं। टॉप रैकिंग वाले देशों में नॉर्वे और स्विटजरलैंड को भी 81 अंक मिले हैं। वहीं, स्वीडन को 80 अंक मिले हैं।</p>
<p><strong>ये हैं सबसे भ्रष्ट देश</strong><br />दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की लिस्ट में दक्षिणी सूडान टॉप पर है। इंडेक्स के अनुसार इसे 8 अंक हासिल हुए हैं और इसे सबसे नीचे की 180वीं रैंक दी गई है, जो इसके सबसे भ्रष्ट देश होने का प्रमाण है। इसके बाद सोमालिया 179वें और वेनेजुएला 178वें स्थान पर है। लिस्ट में सीरिया 177वें और यमन, लीबिया, इरीट्रिया, इक्वाटोरियल गिनी 13 अंकों के साथ 173वें स्थान पर हैं। निकारागुआ 14 अंकों के साथ 172वीं रैंक पर है।</p>
<p><strong>भारत-पाकिस्तान की रैंकिंग</strong><br />कंगाल पाकिस्तान रैकिंग में 135वें स्थान पर है, जो साल 2023 के मुकाबले दो अंकों की गिरावट है। 27 अंक पाने वाला पाकिस्तान रैकिंग में माली, लाइबेरिया और गबोन जैसे देशों के साथ खड़ा है। करप्शन इंडेक्स में भारत की रैकिंग पाकिस्तान से बहुत ऊपर है। हालांकि, 2023 के मुकाबले इसमें 1 अंक की गिरावट आई है, जिसके रैंकिंग पर 3 का अंतर आया है। साल 2024 की रैकिंग में भारत 38 अंकों के साथ 96वें स्थान पर है। भारत का एक और पड़ोसी चीन 42 अंकों के साथ रैकिंग में 76वें स्थान पर है। बांग्लादेश 23 अंक के साथ 151वें स्थान पर है, जबकि श्रीलंका को 32 अंक मिले हैं और वह 121वें स्थान पर है। तालिबान राज में अफगानिस्तान को 17 अंक मिले हैं और वह 165वें स्थान पर है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 10:06:51 +0530</pubDate>
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