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                <title>dilapidated - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हाडौती के मंदिरों की विरासत संभालने वाला विभाग खुद बेहाल, भवन की स्थिति जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[ न रास्ता सुगम, न पार्किंग की जगह  देवस्थान कार्यालय पहुंचना फरियादियो के लिए बनी अग्निपरीक्षा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-department-responsible-for-preserving-the-temple-heritage-of-hadauti-is-itself-in-a-sorry-state/article-160213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)49.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के खाई रोड स्थित देवस्थान विभाग सहायक आयुक्त कार्यालय इन दिनों अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। जिन कंधों पर शहर सहित हाड़ौती अंचल के दर्जनों ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती धार्मिक संपत्तियों, ट्रस्टों और व्यवस्थाओं को सहेजने का जिम्मा है, वही कार्यालय आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खोता नज़र आ रहा है। पुजारियों व फरियादियों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी भारी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावा, कार्यालय तक पहुँचने का रास्ता सुगम न होने के कारण फरियादियों को यहाँ आने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने से यहाँ आने वाले लोगों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>भवन की स्थिति जर्जर, रिकॉर्ड भीगने की आशंका </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्यालय वर्षों पुराना है और इसकी इमारत दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। बारिश के दिनों में छत टपकने से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और फाइलें भीगने की नौबत आ जाती है। विभाग के पास रियासतकालीन व ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती जमीनों और जमींदारियों से जुड़े कई संवेदनशील कागजात मौजूद हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में अलमारियों में रखी फाइलें बारिश के समय भीग जाती हैं। नियमित साफ-सफाई न होने से इन फाइलों पर लंबे समय से धूल जमी हुई है, जिससे इन पर दीमक लगने और रिकॉर्ड नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।</p>
<p><strong>डर के साए में काम करने को मजबूर </strong><br />कार्यालय की इस खस्ताहाल स्थिति का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। जर्जर छत के नीचे बैठकर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। हाड़ौती भर के दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले पुजारियों और फरियादी राम कुमार व दिनेश ने बताया, "हम यहाँ मंदिर से संबंधित कार्य के लिए आए हैं, लेकिन कार्यालय की छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि बारिश में पानी टपकने का डर बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और मंदिर प्रतिनिधियों ने मांग की है कि हाड़ौती की इस ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत को बचाने के लिए जर्जर भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, रियासतकालीन संवेदनशील फाइलों का तत्काल डिजिटलाइजेशन कराया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके।</p>
<p><strong>रास्ता सुगम नहीं, पहुँचने में छूट रहे पसीने</strong><br />देवस्थान विभाग कार्यालय में मंदिर संबंधी आवेदन लेकर बूंदी से आए दिनेश कुमार ने बताया, "बस वाले ने हमें बस स्टैंड पर उतार दिया। इसके बाद यहाँ आने के लिए ऑटो किया, लेकिन ऑटो वाले को भी कार्यालय का रास्ता पता नहीं था। जैसे-तैसे समझाकर लाए, लेकिन कार्यालय पहुँचने वाली सड़क पर घुमावदार घाटी होने के कारण ऑटो को चढ़ाने में काफी परेशानी हुई।"</p>
<p>वहीं, बारां से फरियाद लेकर आए मोहनलाल ने बताया कि वे लोगों से रास्ता पूछते-पूछते यहाँ पहुँचे। रास्ता इतना घुमावदार और ढलान भरा है कि उन्हें पैदल आने में एक-दो जगह विश्राम करना पड़ा।</p>
<p><strong>पार्किंग और छाया के लिए स्थान नहीं </strong><br />कहने को तो यह कार्यालय हाड़ौती भर के मंदिरों और ट्रस्टों के पंजीकरण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संभालता है, लेकिन इसके बाहर न तो ठीक ढंग से वाहन पार्किंग की जगह उपलब्ध है और न ही फरियादियों के बैठने के लिए छायादार स्थान। इसके चलते भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में यहाँ आने वालों की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय काफी पुराना व जर्जर अवस्था में है। यहां बैठने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही उचित व्यवस्था। बारिश के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। कार्यालय एक कोने में स्थित होने के कारण आसानी से मिलता भी नहीं है, जिससे बुजुर्ग लोगों को आने-जाने में भारी असुविधा होती है।<br /><strong>-रौनक आनंद, विहिप मंदिर एवं अर्चक पुरोहित प्रमुख, चित्तौड़ प्रांत</strong></p>
<p> मैं सांगोद से यहाँ काम के सिलसिले में आया था। बस स्टैंड से पर्सनल ऑटो करके आया, लेकिन रास्ता घुमावदार होने के कारण ऑटो चालक को यहाँ तक आने में काफी परेशानी हुई।<br /><strong>-रामलाल, फरियादी</strong></p>
<p>नया ऑफिस बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही इसकी मंजूरी आएगी, नए भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।"<br /><strong>- के.के. खंडेलवाल, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खिलाड़ियों के सपनों पर बदहाल मैदान मार रहे किक : खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा 'होम ग्राउंड'</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिला तो सपने भी अधूरे रह जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-grounds-are-crushing-players--dreams--sporting-talent-lacks-a--home-ground/article-159101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । देश में फुटबॉल के प्रति बढ़ते उत्साह और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बावजूद कोटा शहर में फुटबॉल की बुनियादी सुविधाएं आज भी गंभीर संकट से जूझ रही हैं। शहर में खेल मानकों के अनुरूप एक भी ऐसा फुटबॉल मैदान नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकें। मैदानों की बदहाल स्थिति, सीमित संसाधन और खेल सुविधाओं के अभाव का सीधा असर उभरती प्रतिभाओं पर पड़ रहा है। शहर में करीब चार से पांच ऐसे मैदान हैं जहां फुटबॉल खेली जा सकती है, लेकिन अधिकांश मैदान जर्जर अवस्था में हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय वोकेशनल ग्राउंड है, जिसकी हालत पिछले करीब दो वर्षों से खराब बनी हुई है। यही वह मैदान है, जहां से कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ियों ने अपने खेल की शुरुआत की थी। आज उसी मैदान पर गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और अव्यवस्थाओं के कारण नियमित अभ्यास तक मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>एक मैदान पर कई खेल, खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा असर</strong><br />शहर के नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम और श्रीनाथपुरम स्टेडियम में फुटबॉल खिलाड़ी अभ्यास तो करते हैं, लेकिन इन मैदानों पर अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर आयोजित होने वाले सामाजिक एवं सरकारी कार्यक्रमों के कारण मैदान कई दिनों तक खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते। ऐसे में फुटबॉल खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास का अवसर नहीं मिल पाता। शहर में सरकारी स्तर पर महिला वर्ग के दो और पुरुष वर्ग के सात से आठ फुटबॉल कोच कार्यरत हैं, जबकि निजी स्तर पर भी आठ से दस कोच खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों के लिए समुचित खेल मैदान और आधुनिक सुविधाओं वाली सरकारी फुटबॉल अकादमी का अभाव दिखाई देता है।</p>
<p><strong>सुविधाओं के अभाव में घट रहा रुझान, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सपना अधूरा</strong><br />खेल विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल ऐसा खेल है जो बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक फिटनेस विकसित करता है। लेकिन शहर में सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का रुझान धीरे-धीरे व्यक्तिगत खेलों की ओर बढ़ने लगता है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। वर्तमान में कोटा में ऐसा कोई मैदान उपलब्ध नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित कराई जा सके। यदि खेल अवसंरचना को समय रहते विकसित नहीं किया गया तो शहर की प्रतिभाएं आगे बढ़ने से पहले ही संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देंगी।</p>
<p><strong>खेल मानकों के अनुरूप एक भी फुटबॉल मैदान नहीं</strong><br />-4–5 मैदान हैं, लेकिन अधिकांश जर्जर हालत में।<br />-वोकेशनल ग्राउंड करीब 2 साल से बदहाल।<br />-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने लायक मैदान का अभाव।<br />-सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं।<br />-लड़कों के लिए केवल हॉस्टल, सुविधाएं सीमित।<br />-महिला वर्ग के 2 और पुरुष वर्ग के 7–8 सरकारी कोच।<br />-8–10 निजी कोच खिलाड़ियों को दे रहे प्रशिक्षण।<br />-एक ही मैदान पर कई खेल और अन्य कार्यक्रम होने से अभ्यास प्रभावित।</p>
<p><strong>खिलाड़ी बोले...</strong><br />बारिश के बाद मैदानों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि कई दिनों तक अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छी सुविधाएं मिलें तो हम भी बड़े स्तर पर शहर का नाम रोशन कर सकते हैं।<br /><strong>- हर्षित शर्मा, युवा फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p>प्रतियोगिताओं से पहले नियमित अभ्यास सबसे जरूरी होता है, लेकिन मैदान उपलब्ध नहीं होने से हमारी तैयारी प्रभावित होती है।<br /><strong>-आदित्य मीणा, खिलाड़ी</strong></p>
<p>कोटा शिक्षा नगरी के साथ खेल नगरी भी बन सकता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक फुटबॉल मैदान और खेल सुविधाओं का विकास जरूरी है। जब तक खिलाड़ियों को बेहतर मैदान और सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक शहर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर तैयार करना मुश्किल होगा। खेलों में निवेश भविष्य की पीढ़ी में निवेश है। जरूरत इस बात की है कि खेल मैदानों को केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की प्रयोगशाला माना जाए। यदि प्रशासन और सरकार समय रहते फुटबॉल मैदानों का विकास, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित अकादमी उपलब्ध कराएं तो कोटा की धरती एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बहतरिन फुटबॉल खिलाड़ी तैयार कर सकती है।<br /><strong>-राहुल शर्मा, खेल प्रेमी</strong></p>
<p>लड़कों के लिए केवल हॉस्टल की व्यवस्था है, लेकिन सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं है। हॉस्टल परिसर में बना फुटबॉल मैदान भी पिछले दो वर्षों से खराब स्थिति में है। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि मैदान विकसित हो जाए तो शहर से राष्ट्रीय स्तर के और अधिक खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।<br /><strong>-तीरथ सांगा, जिला फुटबॉल संघ सचिव</strong></p>
<p>शहर में मैदान तो हैं, लेकिन किसी की भी स्थिति खेल योग्य नहीं है। बड़े मैदानों पर कई खेल एक साथ संचालित होते हैं, जिससे फुटबॉल का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है। फुटबॉल टीम गेम है और इसके लिए समर्पित मैदान की आवश्यकता होती है।<br /><strong>-मीनू सोलंकी, सरकारी फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>शहर में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए खेल मानकों के अनुरूप मैदान उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग के अधीन एक भी खेल मैदान नहीं है। शहर के अधिकांश मैदान या तो यूआईटी (नगर विकास न्यास) अथवा नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार आग्रह किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मैदानों के अभाव में खिलाड़ियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि विभाग इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।<br /><strong>-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:18:53 +0530</pubDate>
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                <title>7 साल से टूटी पुलिया व जर्जर सड़क बनी मुसीबत, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[सात करोड़ की मंजूरी और वन विभाग की अनुमति के बावजूद शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/broken-culvert-and-dilapidated-road-become-a-seven-year-ordeal/article-152192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)71.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। रावतभाटा क्षेत्र की लुहारिया ग्राम पंचायत में पिछले सात वर्षों से टूटी पुलिया और जर्जर सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। हर बारिश में कई गांवों का संपर्क कट जाता है और अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन करोड़ों की मंजूरी और विभागीय अनुमति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जानकारी के अनुसार लुहारिया ग्राम पंचायत में पिछले सात वर्षों से से कटूटी पुलिया और जर्जर सड़क ग्रामीणों के लिए मौत का रास्ता बन चुकी है। हर मानसून में आधा दर्जन से अधिक गांवों का का संपर्क पूरी पूरी तरह कट जाता है। करीब तीन महीने तक ग्रामीणों का आवागमन बाधित रहता है और गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं। </p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2019 से पुलिया क्षतिग्रस्त पड़ी है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया। हालात इतने गंभीर हैं कि अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद और जनप्रतिनिधि समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष वे आपस में चंदा एकत्रित कर अस्थायी पुलिया तैयार करते हैं, लेकिन तेज बारिश और बहाव में वह कुछ ही दिनों में बह जाती है। इसके बाद गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>प्रशासनिक उदासीनता पर उठाए सवाल</strong><br />ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण के लिए सीएसआर मद से करीब 7 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल चुकी है। वन विभाग की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इससे प्रशासनिक प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>शिक्षा और इलाज पर पड़ रहा असर</strong><br />बरसात के दौरान हालात इतने खराब हो जाते हैं कि मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। कई बारग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए जान जोखिम में डालकर पानी से गुजरना पड़ता है। अब मानसून नजदीक आते ही ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हर साल ग्रामीण आपस में पैसे एकत्रित कर अस्थायी रास्ता तैयार करते हैं। लेकिन तेज बारिश और बहाव में वह बह जाता है। ऐसे हालात बन जाते हैं कि गांव से बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं बचता और लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। <br /><strong>- मुकेश मीणा, ग्रामीण</strong></p>
<p>वनविभाग की ओर से निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। अनुमति दी जा चुकी है। काम शुरू नहीं होने के कारणों की जानकारी विभाग के पास नहीं है।<br /><strong>-विनीत मंगल, रेंजर, सेटल डेम रेंज</strong></p>
<p>पुलिया निर्माण कार्य फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण शुरू नहीं हो सका है। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास किए जाएंगे।<br /><strong>- विनोद मल्होत्रा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, चित्तौड़गढ़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:27:45 +0530</pubDate>
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                <title>अधूरी सड़क बनी मुसीबत : 2 किमी खंड से बढ़ा हादसों का खतरा, सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के चलते हिस्सा निर्माण से रहा वंचित </title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे से एनएच-52 को जोड़ने वाली 9 किमी सीसी सड़क का 2 किमी हिस्सा अधूरा और जर्जर होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। 7 किमी सड़क तैयार है, लेकिन बाकी हिस्सा खतरनाक बन चुका है। हादसे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, पर बजट के अभाव में काम अटका है। अधिकारी ने जल्द निर्माण का भरोसा दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/unfinished-road-becomes-a-hazard--two-kilometer-stretch-heightens-risk-of-accidents/article-151671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>नमाना। कस्बे से नमाना रोड होते हुए एनएच-52 को जोड़ने वाली सीसी सड़क का अधूरा निर्माण अब आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गया है। करीब 9 किलोमीटर लंबी इस सड़क में से 7 किलोमीटर हिस्सा तो बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन शेष 2 किलोमीटर का हिस्सा अधूरा रह गया, जो अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के चलते यह हिस्सा निर्माण से वंचित रह गया। वर्तमान में इस जर्जर मार्ग से गुजरना वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। कई बार दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो चुके हैं और हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बजट के अभाव में अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p>स्थानीय निवासी दुर्गालाल ने बताया कि यह सड़क जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए स्वीकृत हुई थी, लेकिन अधूरा छोड़ा गया हिस्सा अब सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बन गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शेष 2 किलोमीटर सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और संभावित हादसों से बचाव हो सके।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />इस रोड की सेक्सन बनाकर आगे भिजवाई गई है, लेकिन बजट के अभाव में सेंक्सन नहीं मिलने के कारण मरम्मत का काम अटका  हुआ है। सेंक्सन आते ही उबड़-खाबड़ रोड को समतल बनाकर तैयार किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल बागड़ी, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, बूंदी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/unfinished-road-becomes-a-hazard--two-kilometer-stretch-heightens-risk-of-accidents/article-151671</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:29:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रंगराजपूरा मुख्य सड़क जर्जर : किनारों पर मिट्टी फैलने से मार्ग संकरा, नवीन निर्माण की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ डामर उखड़ने से कच्चे मार्ग में तब्दील, जगह-जगह गड्ढे होने से आमजन परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/rangrajpura-main-road-in-dilapidated-state--encroaching-soil-narrows-path--demand-for-new-construction/article-148855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। अरनेठा क्षेत्र के रंगराजपूरा गांव की मुख्य सड़क इन दिनों जर्जर हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं तथा डामर उखड़ने से मार्ग कच्चे रास्ते में तब्दील होता जा रहा है। ग्रामीण किशन गोपाल मीणा ने बताया कि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित की गई थी, लेकिन लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और किनारों पर मिट्टी फैलने से मार्ग संकरा हो गया है। इसके चलते पैदल राहगीरों, किसानों एवं वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>ग्रामीणों को सिर पर सामान लेकर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है, वहीं दोपहिया वाहन चालक भी सावधानीपूर्वक गुजर रहे हैं। प्रतिदिन विद्यालय आने-जाने वाले बच्चे भी सड़क की खराब स्थिति के कारण चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही सड़क का नवीन निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रंगराजपूरा की क्षतिग्रस्त सड़क मेरी जानकारी में हैं। इसको इब्ल्यूएम डलवाकर ठीक करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- राजाराम मीणा, एक्सईएन, पीडब्लूडी, लाखेरी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/rangrajpura-main-road-in-dilapidated-state--encroaching-soil-narrows-path--demand-for-new-construction/article-148855</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:27:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कस्बे में पेयजल स्रोतों की स्थिति खराब : अव्यवस्थित प्याऊ, जर्जर व गंदे जल स्रोत बने खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[खेळ में काई, गंदा पानी जमा होने व आसपास  जर्जर लोहे के टुकड़े बिखरे होने से मवेशियों की जान  को खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/poor-state-of-drinking-water-sources-in-town--neglected-water-kiosks-and-dilapidated-sources-become-a-hazard/article-148852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास में पेयजल  व्यवस्था की बदहाल स्थिति अब गंभीर खतरे का रूप ले चुकी  है। गंदे पानी और  विद्युत करंट के खतरे से आमजन और मवेशियों की जान जोखिम में बनी हुई है।कस्बे में पेयजल स्रोतों की अनदेखी के चलते हालात चिंताजनक हो गए हैं। मवेशियों और आमजन के लिए बनाए गए जल स्रोत जहां अस्वच्छ हो चुके हैं, वहीं कई स्थानों पर करंट का - खतरा भी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार कस्बे में मवेशियों के लिए केवल तीन पानी के खेळ हैं, जबकि पंचायत समिति सदस्य महावीर मेरोठा द्वारा ग्रामीणों और राहगीरों के लिए करीब 6 से 7 ठंडे पानी के प्याऊ स्थापित किए गए थे। लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में इनकी स्थिति खराब हो चुकी है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि प्याऊ पर उपलब्ध पानी गंदा और अस्वच्छ है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। वहीं कई प्याऊ विद्युत चालित होने के कारण उनमें पहले भी करंट आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मवेशियों के लिए बनी पानी की खेळों की स्थिति भी खराब है। वहां गंदा पानी जमा है और आसपास नुकीले व जर्जर लोहे के टुकड़े व पत्थर बिखरे पड़े हैं, जिससे मवेशियों के घायल होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार चित्तौड़ा कुंड स्थित खेळ पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने लगाई प्रशासन से गुहार</strong><br />स्थानीय ग्रामीण घनश्याम कुमावत, राम प्रताप बेरवा और मुकुट मेरोठा ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कपिल गौतम, बंसीलाल वर्मा, धर्मेंद्र बेरवा और मुकेश मिस्त्री ने बताया कि प्याऊ की नियमित सफाई और विद्युत कनेक्शन की जांच नहीं होने से खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल स्रोतों की तत्काल सफाई, मरम्मत और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा विद्युत कनेक्शनों की जांच कर संभावित हादसों को रोका जाए।</p>
<p>मामले की जांच करवाकर सफाई करवा दी जाएगी तथा बिजली कनेक्शन की भी जांच कराई जाएगी। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।<br /><strong>-कुशलेश्वर सिंह, बीडीओ, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:26:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर भवनों को मालिक खुद तोड़ दे, वरना निगम करेगा कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/owners-must-demolish-the-dilapidated-buildings-themselves--or-the-corporation-will-take-action/article-144943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा की ओर से शहर में जर्जर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिनमें उन्हें खुद तोड को कहा है। उनके ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। जिनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन अधिक हैं। उन भवनों पर लाल निशान तो लगाए हुए हैं। साथ ही अब निगम की ओर से सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं जर्जर भवन</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। हालांकि बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>..तो निगम वसूलेगा खर्चा</strong><br />आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे स्वयं उन्हें अपने स्तर पर हटा लें। यदि निर्धारित समय में वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम उन भवनों को ध्वस्त करेगा। उसका पूरा खर्चा हजार्ना भवन मालिकों से वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>हादसों की आशंका अधिक</strong><br />आयुक्त ने बताया कि निगम की ओर से हर साल अनंत चतुर्दशी से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कर उन पर लाल निशान लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन भवनों को अभी तक नहीं तोड़ा गया है। जिससे अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान भीड़ के उन मकानों पर चढ?े से हादसों की आशंका बनी रहती है।ऐसे में पहले से ही कार्यवाई की जाएगी तो हादसे व अनहोनी को टाला जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:00:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का .... जर्जर नहरों की होगी सफाई, मिलेंगे 25 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने जर्जर नहरों का प्रमुखता से उठाया था मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---dilapidated-canals-will-be-cleaned--25-crore-rupees-will-be-provided/article-144900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोटा सहित संभाग के लिए कई घोषणाएं की। विधानसभा में घोषणा के अनुसार कोटा-बूंदी जिले में चंबल की दायीं और बायीं सहित अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य किए जाएंगे। कोटा-बूंदी जिले में इन नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य के लिए 25 करोड़ रुपए दिए गए हैं। चंबल की दोनों नहरों की पर्याप्त सफाई नहीं होने से टेल क्षेत्र तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसानों को परेशानी को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति ने गत 12 नवंबर को वितरिकाओं की नहीं हुई सफाई, कैसे पहुंचेगा टेल तक पानी शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। अब सरकार ने नहरों के लिए 25 करोड़ रुपए मंजूर कर किसानों को राहत दी है। इसके अलावा नगर पालिका रामगंजमंडी, इटावा सुल्तानपुर में विभिन्न विकास कार्य होंगे। सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।</p>
<p><strong>कोटा सहित संभाग के लिए यह हुई घोषणाएं</strong><br />-संभाग में टाउन प्लानिंग योजना लाई जाएगी।<br />-कोटा और बूंदी जिले की मिसिंग लिंक सड़कों के लिए 70 करोड़ की घोषणा।<br />-सावनभादो से कनवास के रास्ते पर अरु नदी पर पुलिया निर्माण कार्य (सांगोद) 2 करोड़।<br />-मानसगांव पंचायत मानसगांव गोपीलाल यादव के खेत से बावड़ी के हनुमान जी तक सड़क निर्माण का कार्य 3 किमी (लाडपुरा) 2 करोड़।<br />-रामराजपुरा पंचायत मानस गांव से रामराजपुरा से भीमपुरा माताजी तक सड़क 3.8 किमी (लाडपुरा) 3 करोड़ 80 लाख।<br />-कोटा- बूंदी जिले में एमएलसी और आरएमसी व अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य (25 करोड)।<br />-कोटा में नगरपालिका रामगंजमंडी,सुल्तानपुर, इटावा में विभिन्न विकास कार्य के लिए 15 करोड।<br />-कोटा सांगोद (50 बेड क्षमता) सावित्रीबाई फुले छात्रावास।<br />-कोटा और बूंदी जिले में तीन-तीन नए उप स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। 3 उप स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिर में, 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केदो को सामुदायिक केदो में कमोन्नत किया जाएगा।<br />-बावड़ी खेड़ा में स्कूल के पीछे चिवड़िया के खाल पर एनिकट निर्माण कार्य (लाडपुरा) 70 लाख।<br />-सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।<br />-केशोरायपाटन बूंदी में शुगर मिल के पीपीपी मोड पर संचालन के आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर वाटर कूलर स्टैंड से हादसे की आशंका, ग्रामीणों ने की शीघ्र मरम्मत की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[जनहानि की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने बताई शीघ्र मरम्मत की दरकार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-water-cooler-stand-threatens-accidents/article-143650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। कस्बे के हाट चौक के सामने वर्षों से लगा वाटर कूलर इन दिनों दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। लगभग 2000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी जिस लोहे के स्टैंड पर रखी हुई है, वह पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कई स्थानों से टूट भी गया है। ऐसी स्थिति में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। वाटर कूलर के आसपास कई दुकानें संचालित होती हैं। रविवार को यहां ग्रामीण हाट भी लगता है। जिससे दिन भर भीड़ बनी रहती है। वाटर कूलर के एक ओर कोटा-छबड़ा मेगा हाइवे तथा दूसरी ओर आम रास्ता है। दोनों मार्ग अत्यधिक व्यस्त रहते हैं। ऐसे में टंकी या स्टैंड के गिरने की स्थिति में जनहानि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत प्रशासन ने लंबे समय से इस ओर ध्यान नहीं दिया है। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और लोगों को पेयजल की आवश्यकता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र मरम्मत कर वाटर कूलर को सुरक्षित रूप से चालू कराया जाए।</p>
<p>वाटर कूलर की टंकी और स्टैंड की मरम्मत का कार्य पूर्ण होने पर ही संबंधित को भुगतान किया जाएगा।<br /><strong>- रविंद्र कुमार गुप्ता, सरपंच, ग्राम पंचायत बपावरकलां</strong></p>
<p>यदि सरपंच द्वारा लिखित आदेश दिया जाता है तो तत्काल प्रभाव से मरम्मत का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- मुरलीधर वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी, बपावरकला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 15:08:52 +0530</pubDate>
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                <title> मोड़क स्टेशन सीएचसी की जर्जर इमारत का कमरा ढहा, घटना के समय कोई मौजूद नहीं होने से टला बड़ा हादसा </title>
                                    <description><![CDATA[ छह दशक पुराना अस्पताल भवन जर्जर हो चुका है बारिश के दौरान टूट चुकी हैं पट्टियां  । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-room-in-the-dilapidated-modak-station-chc-building-collapsed--a-major-tragedy-was-averted-as-no-one-was-present-at-the-time/article-142895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>मोड़क स्टेशन। क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया। अस्पताल की करीब 60 वर्ष पुरानी जर्जर इमारत का एक कमरा अचानक भरभरा कर गिर गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ी जनहानि हो सकती थी। घटना के बाद अस्पताल भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पंचायत समिति सदस्य नईमुद्दीन कुरैशी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। कुरेशी ने पत्र में उल्लेख किया है कि मोड़क स्टेशन का यह अस्पताल लगभग छह दशक पुराना है और अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की हालत ऐसी है कि यहां आने वाले मरीजों और कार्यरत कर्मचारियों की जान हर समय जोखिम में बनी रहती है।</p>
<p><strong>पूर्व में हुए हादसों से नहीं लिया सबक</strong><br />जानकारी के अनुसार तीन माह पूर्व बारिश के दौरान इस सीएचसी के एक कमरे की पट्टियां टूट गई थीं। इसके अलावा एक अन्य घटना में कमरे की छत पर लगे पंखे के कड़े टूट जाने से पंखा नीचे गिर गया था। इन घटनाओं के बावजूद भवन की मरम्मतं या पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p><strong>दो करोड़ रुपए की स्वीकृति की मांग</strong><br />पंचायत समिति सदस्य कुरैशी ने सरकार से मांग की है कि पुरानी जर्जर इमारत को तत्काल हटाकर नए भवन का निर्माण कराया जाए। उन्होंने अस्पताल के पुनर्निर्माण के लिए दो करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत करने की पुरजोर मांग की है। ताकि क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।</p>
<p>मोड़क स्टेशन सीएचसी की हालत बेहद चिंताजनक है। रोजाना सैकड़ों मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। लेकिन भवन की जर्जर दीवारें किसी भी समय गिर सकती हैं। स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षा की व्यवस्था मजबूत की जाए और जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक अस्थायी सुरक्षित व्यवस्था की जाए।<br /><strong>- दीपक आहूजा, समाजसेवी</strong></p>
<p>मोडक स्टेशन सीएचसी भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है और कई जगहों पर दीवारें अपने आप ढहने की स्थिति में हैं। यह आमजन और मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। प्रशासन से मांग की है कि तत्काल भवन का निरीक्षण कर मरम्मत या नए भवन का निर्माण कराया जाए ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले समाधान निकाला जा सके।<br /><strong>- अब्दुल सत्तार, कांग्रेस जिला अल्पसंख्यक उपाध्यक्ष</strong></p>
<p>पंचायत समिति की ओर से इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा। संबंधित विभाग को ज्ञापन देकर जल्द कार्रवाई की मांग की जाएगी। यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा।<br /><strong>- नईमुद्दीन कुरैशी, पंचायत समिति सदस्य</strong></p>
<p>सीएचसी भवन की जर्जर स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। विभाग को लिखित सूचना भेजी जा चुकी है और जल्द ही समाधान की उम्मीद है।<br /><strong>- डॉ. पंकज राठौर, वरिष्ठ चिकित्सक, सीएचसी, मोड़क स्टेशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 14:50:53 +0530</pubDate>
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                <title>पूरी तरह जर्जर हुआ समरानिया-निवाड़ी लिंक रोड</title>
                                    <description><![CDATA[दर्जनों गांवों और मध्यप्रदेश सीमा की ओर प्रतिदिन गुजरते हैं हजारों वाहन
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/samrania-niwari-link-road-completely-dilapidated/article-140114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)32.png" alt=""></a><br /><p>समरानिया। समरानिया कस्बे से निवाड़ी की ओर जाने वाली लिंक रोड की जर्जर हालत से ग्रामीणों में रोष है। दर्जनों गांवों और मध्यप्रदेश सीमा को जोड़ने वाला यह मार्ग लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रहा है।समरानिया कस्बे से निकलकर निवाड़ी की ओर जाने वाली लिंक रोड क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ती है। इसी मार्ग से होकर मध्यप्रदेश सीमा की ओर भी प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। लेकिन सड़क की हालत अत्यंत खराब होने से आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई।</p>
<p><strong>एक महीने से अधिक नहीं टिकती मरम्मत  </strong><br />देवेन्द्र सिंह भानावत ने बताया कि जब इस सड़क का निर्माण किया गया था, तब ठेकेदार द्वारा पुलिया का नया निर्माण नहीं कर पुरानी पुलिया की ही मरम्मत कर दी गई, जो अब फिर से जर्जर हो चुकी है। कुंदन सिंह भानावत ने बताया कि सड़क पर कई बार पेचवर्क कराया गया, लेकिन यह मरम्मत एक महीने से अधिक नहीं टिक पाती।</p>
<p><strong>किसानों को हो रहा नुकसान</strong><br />ग्रामीण रामा चौधरी, रविन्द्र मेहता, कुलदीप शहरिया, थान सिंह मेहता, रवि मेहता, नीलू मेहता सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यदि इस सड़क का शीघ्र निर्माण नहीं हुआ तो किसानों को फसल मंडी तक पहुंचाने में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सड़क खराब होने के कारण किसानों को वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि इस लिंक रोड का नए सिरे से निर्माण किया जाए।</p>
<p><strong>कभी भी हो सकता है हादसा</strong><br />कपिल मेहता ने बताया कि इस मार्ग से रोजाना हजारों वाहन और स्कूल बसें गुजरती हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं रामकुमार मेहता ने कहा कि लगभग 6 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर सामान्य स्थिति में जहां 10 मिनट लगने चाहिए, वहां अब 30 मिनट से अधिक समय लग रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सड़क और पुलिया की मरम्मत का कार्य शीघ्र ही करा दिया जाएगा जिससे लोगों को राहत मिल सकेगी।<br /><strong>- बसंत गुप्ता, अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 16:21:16 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रामीण संपर्क सड़कें वर्षों से मरम्मत के अभाव में जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[उखड़ रहा डामर, पगडंडी में बदल गए  रास्ते,  ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/rural-connectivity-roads-are-dilapidated-due-to-years-of-lack-of-repair/article-135169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। ग्रामीण क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक संपर्क सड़कें पिछले लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुकी हैं। कई मार्गों पर डामर पूरी तरह उखड़ गया है, वहीं कुछ सड़कों पर जंगल कटिंग नहीं होने से रास्ता पगडंडी में बदल गया है। हालात इतने खराब हैं कि वाहन चालक जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि राज्य सरकार जहां हाईवे व प्रमुख राजमार्गों की घोषणाओं में व्यस्त है, वहीं गाँवों की सड़कों की सुध नहीं ली जा रही। गड्ढों में तब्दील मार्गों पर रोजाना बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। कई गंभीर रूप से घायल लोग लंबे समय से इलाज करा रहे हैं। चौपहिया वाहन भी गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। खराब सड़कों के कारण मिनटों का सफर घंटों में पूरा हो रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच, प्रधान, प्रमुख, विधायक, सांसद सहित प्रशासन के अनेक अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायतें देने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला, कार्य शुरू नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>ये लिंक रोड हैं बदहाल</strong><br />क्षेत्र में लबान-गुहाटा लिंक रोड, बगली लिंक रोड, बहड़ावली लिंक रोड, खाकता रोड, कोटड़ी लिंक रोड, मालिकपुरा लिंक रोड, नोटाडा लिंक रोड और ढगारिया लिंक रोड पर डामर उखड़ने से हालत बेहद खराब है। वहीं चहिचा लिंक रोड पर जंगल कटिंग नहीं होने से मार्ग पगडंडी की स्थिति में पहुंच गया है।</p>
<p>क्षेत्र में संपर्क सड़कों की मरम्मत और नवीनकरण के प्रस्ताव मुख्यालय भेजे गए हैं। कुछ मार्गों की स्वीकृति मिल गई है, जिन पर जल्द ही टेंडर जारी कर कार्य शुरू किया जाएगा। शेष सड़कों के लिए भी बजट स्वीकृति के प्रयास जारी हैं।<br /><strong>- हिमांशु दाधीच, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, लाखेरी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 15:04:32 +0530</pubDate>
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