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                <title>cows - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गोपाष्टमी पर गायों का पूजन : श्रद्धा और उत्साह का रहा माहौल, धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं ने खिलाया चारा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में गोपाष्टमी पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। गोविंद देव जी मंदिर सहित विभिन्न गौशालाओं में विधिवत गौपूजन, आरती और दान हुआ। भक्तों ने गायों को हरा चारा, गुड़ और दलिया खिलाया। हिंगोनिया, सांगानेर व अन्य स्थानों पर दिनभर भक्ति, सेवा और सद्भाव का वातावरण बना रहा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cows-were-worshiped-on-gopashtami-there-was-an-atmosphere-of/article-130980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गोपाष्टमी के अवसर पर शहर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। विभिन्न मंदिरों, घरों और गौशालाओं में गायों का विशेष पूजन किया गया। गोविंद देव जी मंदिर में विधि-विधान से गौपूजन और आरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में गौसेवा और दान का पुण्य अर्जित किया। शहर की प्रमुख गौशालाओं, सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल, दुर्गापुरा, हिंगोनिया, ढहर के बालाजी, खोले के हनुमानजी, हाथोज और बगरू में भक्तों की भीड़ रही। सुबह प्रभात फेरी के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों ने हरिनाम संकीर्तन करते हुए गायों को हरा चारा, गुड़, दलिया, फल-सब्जियां और औषधीय लड्डू खिलाए।</p>
<p>गौभक्तों ने बड़ी संख्या में गौ सवा मणि और गौ छप्पन भोग के आयोजन किए। हिंगोनिया गौशाला में विशेष सजावट के बीच गौमाता का पूजन किया गया। दिनभर भक्ति, सेवा और सद्भाव का वातावरण बना रहा। शहरभर में गोपाष्टमी पर्व पर गायों के प्रति आस्था और सेवा की अनूठी मिसाल देखने को मिली।</p>
<p><strong>गोपाष्टमी पर गोविंद देव जी मंदिर में हुआ गायों का पूजन :</strong></p>
<p>गोपाष्टमी के पावन अवसर पर जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में श्रद्धापूर्वक गायों का पूजन किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गौमाता की आरती उतारी और उन्हें हरा चारा, गुड़ व दलिया खिलाया। भक्तों ने गौसेवा का संकल्प लेते हुए दान भी किया। मंदिर परिसर में भक्ति संगीत और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। गोपाष्टमी पर्व पर गायों के प्रति श्रद्धा और सेवा भावना का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 17:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौवंश की मौत का कारण बन रही पॉलिथीन, निगम गौशाला में दो बैल के पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/polythene-is-the-cause-of-death-of-cows/article-112644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है। इसका खुलासा बुधवार को निगम की बंधा गौशाला में एक ही दिन में मरे एक दर्जन से अधिक गौवंश में से दो बैल के पोस्ट मार्टम से हुआ। उनके पेट से चारे की जगह पर पॉलिथीन के करीब 40 से 50 किलो के गुच्छे निकले। शहर में बड़ी संख्या में लावारिस हालत में गाय और सांड घूम रहे हैं। उनके द्वारा सड़कों पर पड़े कचरे व खाद्य सामग्री को खाकर ही पेट भरा जा रहा है। लेकिन हालत यह है कि वे उस कचरे व खाद्य सामग्री के साथ इतनी अधिक मात्रा में पॉलिथीन खा रहे हैं कि उनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। </p>
<p><strong>12 की मौत, दो का पोस्टमार्टम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के गौशाला समिति अध्यक्ष व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। गर्मी व चक्कर आकर गिरने की बीमारी से आए दिन गौवंश की मौत हो रही है। पिछले कई दिन से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ी है। सिंह ने बताया कि बुधवार को भी करीब एक दर्जन गाय व बैल की मौत हुई थी। उनमें से पशु चिकित्सा अधिकारी की मौजूदगी में दो बैल का पोस्ट मार्टम किया गया। जिनमें दोनों के ही पेट से काफी मात्रा में पॉलिथीन निकली है। यही उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>40 से 50 किलो के निकले गुच्चे</strong><br />इधर वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी व प्रभारी जिला मोबाइल यूनिट डॉ. भंवर सिंह चौधरी ने बताया कि उनकी मौजूदगी में रैंडमली दो बैल का पोस्ट मार्टम निगम की गौशाला में किया गया। दोनों के ही पेट से करीब 40 से 50 किलो पॉलिथीन के गुच्छे निकले हैं। ये तो उदाहरण है। अधिकतर गौवंश की यही हालत है।  डॉ. चौधरी ने बताया कि लावारिस हालत में घूमने पर गाय व बैल अधिकतर पॉलिथीन खा रहे है। जिससे इनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। जब वे चारा नहीं खा पा रहे हैं तो उनमें कमजोरी आ रही है। साथ ही उनके लीवर डीमेज हो रहे हैं। यही उनकी मौत का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले भी मिली थी यही स्थिति</strong><br /><strong>डॉ. चौधरी ने बताया</strong> कि इससे पहले भी निगम की गौशाला में गौवंश की बड़ी संख्या में मौत हुई थी। उस समय भी जब गायों का पोस्ट मार्टम किया गया था तब भी उनके पेट से पॉलिथीन के गुच्छे निकले थे। </p>
<p><strong>पॉलिथीन में न डालें खाद्य पदार्थ</strong><br /><strong>डॉ. भंवर सिंह चौधरी व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया </strong>कि गायों की मौत का कारण  पॉलिथीन बन रही है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे खाद्य पदार्थ को पॉलिथीन में नहीं फेंके। खाद्य पदार्थ खाने के चक्कर में गाय पॉलिथीन तक को खा रही है। जिससे वे चारा व रोटी नहीं खा पा रही और यही उनकी मौत का कारण है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 17:47:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निगम की गौशाला में गौवंश के लिए गर्मी से बचाव के नहीं हैं पुख्ता इंतजाम </title>
                                    <description><![CDATA[निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-no-proper-arrangements-for-the-cows-to-protect-them-from-the-heat-in-the-corporation-s-cowshed/article-110973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer80.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जहां गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है और यह 40 डिग्री से अधिक हो गया है। ऐसे में इंसान ही नहीं पशु पक्षी भी इस गर्मी से त्रस्त है। नगर निगम की ओर से आमजन के लिए तो आश्रय स्थल, छाया व पानी की व्यवस्था की जा रही है। जबकि निगम की गौशाला में गौवंश को छाया तक नसीब नहीं हो रही है। शहरी क्षेत्र में ही इतनी अधिक गमी है तो ग्रामीण क्षेत्र में  पड़ रही गर्मी का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। वहां शहर से अधिक तापमान रहता है। वहीं खुले स्थान पर गर्मी अधिक लगती है। इस गर्मी में जहां नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से आमजन के लिए जगह-जगह पर आश्रय स्थल बनाए गए हैं। छाया और पानी की व्यवस्था की गई है। लेकिन नगर निगम की ओर से गौवंश की सुध नहीं ली जा रही है।</p>
<p><strong>गिनती के गौवंश के लिए शेड़</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। उनमें से गिनती के गौवंश के लिए ही छाया की व्यवस्था है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में बहुत कम जगह पर शेड लगा हुआ है। साथ ही पिछले साल बचा हुआ ग्रीन नेट इस बार काम में लिया गया है। जिससे एक से तीन नम्बर के बाड़े में ही लगाया  है। जितने शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें गिनती के ही गौवंश रह पा रहे है। जबकि क्षमता से अधिक होने से उनके लिए पर्याप्त छाया तक की व्यवस्था नहीं है। सिंह ने बताया कि अधिकतर गौवंश को दिनभर खुले में धूप में ही रहना पड़ रहा है। जिससे पहले जहां सर्दी से वहीं अब गर्मी से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ने लगी है।  </p>
<p><strong>बीमार व घायल को शेड</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गर्मी में छाया की सबसे अधिक आवश्यकता बीमार व घायल गौवंश को है। ऐसे में जो शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें इसी तरह के गौवंश को रखा हुआ है। जबकि अधिकतर को तो खुले में ही रहना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>पंखे लगे न नेट</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने बताया कि गौशाला में जितनी जगह है उसके हिसाब से खैल बनाई गई है। जहां गौवंश आसानी से चारा व पानी खा-पी सकते है। लेकिन दोनों निगमों की ओर से घेरा डालकर पकड़े गए मवेशियों के कारण यहां क्षमता से अधिक गौवंश हो गए हैं। जिनके लिए शेड पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वे गौशाला में हरी नेट व 200 पंखे लगाने के लिए निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते। जिससे अभी तक भी इस भीषण गर्मी में न तो वहां पंखे लगे हैं और न ही शेड व हरी नेट लगाई गई है। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में भी गौवंश तो क्षमता से अधिक है लेकिन वहां शेड पर्याप्त होने से इतनी अधिक समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि गौशाला में गौवंश के लिए पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में है। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि गौशाला समिति अध्यक्ष द्वारा पूर्व में जो भी काम बताए गए हैं वह सभी करवाए गए हैं। गत वर्ष गर्मी में गौशाला में हरी नेट भी लगाई गई थी। अब यदि आवश्यकता है तो उसे भी शीघ्र पूरा कर दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 15:14:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सड़कों पर घूमने को मजबूर निराश्रित गौंवश, आश्रय देने को नहीं कोई तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में निराश्रित गोवंश और नंदी को रखने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। इसके कारण वह सड़कों पर भटकने को मजबूर है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/destitute-cows-helpless--no-one-ready-to-give-shelter/article-107065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)41.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में निराश्रित गोवंश और नंदी को रखने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। इसके कारण वह सड़कों पर भटकने को मजबूर है। राज्य सरकार ने पंचायत समिति स्तर पर नंदीशाला खोलने की घोषणा की थी। कोटा जिले में इसके लिए अब तक दो बार टैंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं, लेकिन किसी गौशाला और संस्था ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इस कारण अभी तक नंदीशाला कागजों से बाहर निकल कर धरातल पर नहीं आ सकी। नंदीशाला के अभाव में निराश्रित गौवंशों को कहीं भी सहारा नहीं मिल रहा है और न ही उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था हो रही है।</p>
<p><strong>दो बार टैंडर आमंत्रित, कोई नहीं आया</strong><br />जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने गत वर्ष बजट घोषणा में प्रदेश में प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर नंदी गौशाला खोलने की घोषणा की थी। कोटा जिले की पांच पंचायत समितियों में भी सरकार की घोषणा के अनुसार नंदी गौशाला खोलनी थी। इसके लिए अब तक पशुपालन विभाग दो बार टैंडर आमंत्रित कर चुका है, लेकिन किसी भी गौशाला और संस्था ने इसमें भाग नहीं लिया। पशुपालन विभाग की ओर पिछले साल ई-टेण्डर आमंत्रित किए गए, लेकिन इसमें किसी ने रूचि नहीं दिखाई। इसके पश्चात दूसरी बार फिर टेण्डर आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए भी किसी ने आवेदन नहीं किया। ऐसे में नंदीशाला खोलने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />05 पंचायत समितियों में खुलेगी नंदीशाला<br />90 फीसदी अनुदान देगी राज्य सरकार<br />10 फीसदी संस्था को करना होगा वहन<br />02 बार कर चुके टैंडर आमंत्रित<br />90 फीसदी अनुदान, फिर भी नहीं रुझान</p>
<p>पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पंचायत समिति स्तर पर  नंदीशाला निर्माण के लिए 1.57 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें 90 फीसदी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। मात्र 10 फीसदी राशि नंदी गौशाला का संचालन करने वाली संबंधित संस्था को खर्च करना होगा। सरकार की ओर से 90 फीसदी अनुदान की व्यवस्था करने के बाद भी कोई भी संस्था इसके लिए आगे नहीं आ रही है। संस्थाएं 10 फीसदी राशि खर्च करने से भी पीछे हट रही हैं। नंदी गौशाला में निराश्रित गौवंशों व  नंदी को आश्रय दिया जाना प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य था कि नंदीशाला खुलने से सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को आश्रय मिल सकेगा और इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही किसानों की फसलों का भी बचाव होगा। </p>
<p><strong>दस बीघा जमीन पर फंसा पेंच</strong><br />जानकारी के अनुसार नंदीशाला खोलने के लिए गौशाला या संस्था के पास दस बीघा जमीन होना जरूरी है। दस बीघा जमीन होने वाली संस्थाएं इसके लिए पात्र मानी गई थी। ऐसे में अधिकांश गौशालाओं और संस्थाओं ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। कोटा जिले में अधिकांश गौशालाओं के पास दस बीघा से कम जमीन हैं। जमीन की व्यवस्था नहीं होने से नंदीशाला की योजना धरातल पर उतर नहीं पाई। अधिकारियों के अनुसार चयनित संस्था को आधारभूत संरचना निर्माण के लिए 90 फीसदी राशि गौपालन विभाग की ओर से अनुदान के रूप में दी जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पंचायत समिति में नंदी शाला खोलने के लिए दस बीघा जमीन होना अनिवार्य किया गया है। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अधिकांश गौशालाओं के पास इतनी जमीन नहीं है। इस कारण आवेदन नहीं किया है। सरकार को जमीन की मात्रा को घटाना चाहिए।<br /><strong>- हरिमोहन नागर, गौशाला संचालक</strong></p>
<p>जिले की पंचायत समितियों में नंदीशाला खोलने के लिए अब तक दो बार टैंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी गौशाला और संस्था ने इसमें भाग नहीं लिया है। दस बीघा से कम जमीन करने का मामला सरकार के स्तर पर हो सकता है।<br /><strong>- डॉ. ओ. पी. मीणा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 16:08:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - गायों को पिलाने लगे कीड़े मारने की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने किया था समाचार प्रकाशित । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---cows-started-being-given-deworming-medicine/article-96424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाने का अभियान शुरु किया है। जिससे यह दवा उनके लीवर को डेमेज होने से बचाएगी और उनकी पाचन क्रिया बढ़ाएगी। नगर निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 2500 से अधिक गौवंश है। जिनमें अधिकतर कमजोर व बीमार है। सड़कों  पर निरािश्रत हालत में घूमने के दौरान  इनके द्वारा पॉलिथीन अधिक खाने से इनके  पेट में कीड़े अधिक हो गए हैं। इन कीड़ों के कारण अधिकतर गायों के लीवर व किडनी डेमेज हो गई है। जिससे न तो यह सही ढंग से व भरपेट चारा खा पा रही है और न ही घूम पा रही है।ऐसे में उनके कमजोर होने पर बैठक लेने से अधिकतर दोबारा से उठ नहीं पाती और उनकी मौत हो जाती है। गौशाला के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नंद किशोर वर्मा ने बताया कि एक दिन पहले ब्लड सैम्पल से जब  गायों के लीवर व  किडनी  डेमेज होने की जानकारी मिली। उसका कारण अधिकतर गायों के पेट में कीड़े होना है। ऐसे में पशु पालन विभाग के माध्यम से गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाना शुरु किया है। डॉ. वर्मा ने बताया कि इस दवा के असर से पेट के  कीड़े तो मरेंगे ही। साथ  ही इस दवा के असर से लीवर को सपोर्ट मिलेगा। गायों की पाचन क्रिया बढ़ने से उनकी खुराक बढ़ेगी। जिससे पशुओं के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 25 सौ से अधिक गौवंश है। उन सभी को दवाई पिलाई जाएगी। सभी को दवाई पिलाने तक यह अभियान लागातर जारी रहेगा। गौशाला के साथ ही किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में भीगायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाई जाएगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि गौशाला की गायों में से अधिकतर के लीवर व किडनी डेमेज होने का समाचार दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 30 नवम्बर के अंक में पेज 7 पर ‘पॉलिथीन खाने से डेमेज हो रहे गायों के लीवर व किडनी’ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जिसमें गायों की स्थिति को दर्शाया गया था। उसके बाद पशु पालन विभाग के माध्यम से गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाने के अभियान को तेज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 14:53:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गौवंश को अब आवारा और बेसहारा नहीं कह सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[आदेश जारी होने के बाद गाय को निराश्रित ही लिखना होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cows-will-no-longer-be-called-strays-and-destitutes/article-94017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/jogaram-patel.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब गौवंश खासकर गायों को आवारा और बेसहारा नहीं कहा जाएगा। इन शब्दों की जगह गौवंश के लिए निराश्रित शब्द का उपयोग करना होगा। सरकार सोमवार को इसके आदेश जारी करने जा रही है। गौपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने इसकी पुष्टि की है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि गौवंश के लिए यह आदेश सभी विभागों को भेज जाएंगे। विभागीय कार्यवाही में अभी सड़कों पर मिलने वाले या जिसका कोई मालिक नहीं होता है, उस गौवंश के लिए आवारा और बेसहारा शब्द का उपयोग विभागीय पत्रावली में किया जाता है।</p>
<p>आदेश जारी होने के बाद गाय को निराश्रित ही लिखना होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में करीब  1 करोड़ 39 लाख गौवंश है। इस संबंध में वे सोमवार को विस्तार से मीडिया को बुलाकर जानकारी भी देंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 11:49:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़क पर बेसहारा घूम रहे गोवंश, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[चारे का इंतजाम न होने से गोशाला खाली पड़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/cows-roaming-helpless-on-the-road--not-paying-attention-to-those-responsible/article-67009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/cow.jpg" alt=""></a><br /><p>कापरेन। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण गोवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है। साथ ही खाने-पीने की तलाश में वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटनाग्रस्त हो रहा है। गोवंश सड़कों पर डेरा जमाए रहती है जिससे हर पल हादसों का खतरा बना रहता है। गोवंश की दुर्दशा को देखकर गोसेवक कई व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग कर चुके हैं, परंतु अभी तक किसी ने गोसेवकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण गोवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है। साथ ही खाने-पीने की तलाश में वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटनाग्रस्त हो रहा है। गोवंश की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>सड़कों पर रहता है गौवंश का डेरा लोग होते हैं परेशान</strong><br />बेसहारा गोवंश शहर की सड़कों पर डेरा डाल लेती हैं। इसके संरक्षण के लिए बनाई गई गोशाला में शासन द्वारा 300 गायों के रखने की व्यवस्था की गई है, परंतु वहां खाने पीने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण केवल नाम मात्र की गाय ही बची हैं और वह भी घायल अवस्था में हैं। गोवंश के चारे के लिए लाखों रुपये का फंड जारी होने के बाद भी नगर पालिका द्वारा केवल सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा है। चारे का इंतजाम न होने से गोशाला खाली पड़ी है।</p>
<p><strong>किसानों को करना पड़ती है फसलों की रखवाली</strong><br />सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों से अपनी फसल को बचाने के लिए किसानों को खेतों पर ,रातभर जागकर रखवाली करनी पड़ रही है। आवारा मवेशियों से फसल को बचाने के लिए किसानों को दिन-रात जागकर ड्यूटी देना पड़ रही है। हालांकि सड़क पर घूम रहे गोवंश की परेशानी का मुख्य कारण किसान ही है, क्योंकि दूध देना बंद करने के बाद वे खुद गायों को  छोड़ देते है। इस कारण बेसहारा मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है।</p>
<p><strong>गोशाला में रसीदें कटवा कर गाये रखी </strong><br />रमेश मेघवाल ने बताया कि  उसने गाय को गोशाला में 1500 सौ रूपए कि रसीद कटवाकर रखी थी।लेकिन कुछ समय बाद गोशाला समिति ने मनमानी के चलते गाय बाहर निकाल दी है, में चार बार गाय को गोशाला में छोड़कर आया पर चारों बार ही गाय बाहर निकाल दी।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गोशाला में जितनी संख्या में गौवंश होना चाहिए उतना नही है,किसानों व आमजन की समस्या को देखते हुए बाहर सड़को पर घूम रहे गौवंश को गोशाला में रखा जाए जिससे इन्हें दुर्घटना का शिकार होने से बचाया जा सके।<br /><strong>- ओमप्रकाश सुमन, किसान </strong></p>
<p>जिन लोगो ने रसीदें कटवाकर अपने गोवंश गोशाला में रखे थे उनको भी बाहर निकाल दिया है जिससे वह अब सड़को पर घूम रहे है। इस पूरे मामले की जांच की जाए तथा जिम्मेदारी व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।<br /><strong>- राधेश्याम मीणा, किसान।</strong></p>
<p>कस्बे में गोशाला के शुरू होने पर खुशी हुई है लेकिन संचालन सही तरीके से नही होने से अधिकतर गोवंश बाहर सड़को पर घूम रहा है जो आये दिन दुर्घटना का शिकार हो रहा है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नही है।<br /><strong>- राजाराम गुर्जर, किसान </strong></p>
<p>गोशाला में गायों को रखने की बजाय बाहर निकाल दिया जिससे वह अब किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है,इसके चलते क्षेत्र के किसानों को रात भर जागकर खेतो में रखवाली करनी पड़ रही है।इन पशुओं को गोशाला में रखे तो किसानों को राहत मिले।<br /><strong>-  गुर्जर किसान </strong></p>
<p>गोशाला में 200 गायें रखने कि क्षमता है। वर्तमान में करीब 125 गायें मौजूद हैं। 2100 रूपए की रसीद कटवाकर गाय को गोशाला में रख सकते हैं। जो गोशाला समिति पर आरोप लगाए जा रहे हैं वो सब गलत है। गायों को रजका व भूसा खिलाया जा रहा है।<br /><strong>- शिवनारायण शर्मा, गोशाला समिति अध्यक्ष</strong></p>
<p>गौशाला में अभी बाउंड्री टीन सेड नहीं है,मैंने इसके लिए बजट भी बनाया था। आचार संहिता लगने से वह कैंसिल हो गया,अभी गोशाला में 100 गोवंशों  की रखने की क्षमता है जो अभी मौजुद है, करीब बीस लाख रुपए का बजट बनाया था, पर नई सरकार ने कैंसिल कर दिया। जल्दी ही टीन सेंड बाउंड्री करवा कर बाहर घूम रहे मवेशियों को गोशाला में रखा जाएगा।<br /><strong>- मनोज कुमार मालव, नगरपालिका ईओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jan 2024 19:30:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कटने के लिए जा रहे 27 गोवंश को आजाद करवाया</title>
                                    <description><![CDATA[लालसोट पुलिस व गौ रक्षक दल ने गत रात्रि को कार्रवाई करते हुए कटने के लिए ले जाए जा रहे 27 गोवंशों को मुक्त करवाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/27-cows-going-for-slaughter-were-freed/article-64676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/dausa.png" alt=""></a><br /><p>लालसोट। लालसोट पुलिस व गौ रक्षक दल ने गत रात्रि को कार्रवाई करते हुए कटने के लिए ले जाए जा रहे 27 गोवंशों को मुक्त करवाया। जानकारी के अनुसार बीती रात आरटीओ की रोड पर चेकिंग के दौरान यह मामला सामने आया। जबकि इधर पुलिस रात्री गश्त करने का दम भरते नहीं थकती। कई बार गौरक्षक दल द्वारा कटने के लिए जा रहे गोवंशों को बचाने की खबरें समय-समय पर सामने आती रही है।  मंगलवार देर रात्रि को आरटीओ गश्ती टीम द्वारा वाहनों की की जा रही जांच के दौरान एमपी नंबर इस ट्रक को रुकवाया। ट्रक रुकते ही ट्रक चालक और खलासी फरार हो गए। मध्य प्रदेश नंबर ट्रक की जब जांच की गई तो सामने आया कि ट्रक में जाली लगाकर ऊपर तूडे के कट्टे रखे हुए हैं तथा नीचे ठूंस- ठूंस कर गोवंश भरे हुए हैं। गिनती करने पर पता चला कि इस ट्रक में 27 गोवंशों को भरा गया है। जिसकी सूचना परिवहन इंस्पेक्टर हनुमान ने लालसोट थाने को दी। लालसोट अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामचंद्र सिंह नेहरा ने बताया कि परिवहन अधिकारी हनुमान की सूचना पर लालसोट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने गोवंश भरे  वाहन को नंदिनी गौशाला पहुंचा कर में गोवंश को वहां छोड़ा। गोवंशों से भरे इस ट्रक को देखने से पता चलता है कि स्पेशल रूप से जानवरों को लाने ले जाने के लिए काम लिया जाता है। पकड़े जाने के बाद ट्रक चालक और खलासी दोनों फरार है। इसके बाद अब लालसोट पुलिस मध्य प्रदेश नंबर इस ट्रक के मालिक की जानकारी जुटाने में लगी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि राजस्थान पुलिस जहां एक और रात्रि कालीन गश्त का दावा करती है वहीं दूसरी ओर परिवहन अधिकारी द्वारा गोवंश से भरे इस ट्रक को जांच के लिए रुकवाने के बाद लालसोट थाने को सूचना दी। उसके बाद लालसोट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। वहीं जनता गौरक्षा दल के कमांडो ब्रजमोहन सैनी ने बताया कि आरटीओ हनुमान मीणा की सूचना पर घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिस व गौरक्षकों की सहायता से 27 गोवंश को ग्राम पंचायत इंदावा में संचालित नंदनी गोशाला में सुरक्षित छोड़ा गया। लालसोट पुलिस मामले में कार्रवाई कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 18:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यहां गायें भी झूमती हैं संगीत की धुन पर, मृत्यु दर में आ रही कमी</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/here-even-cows-dance-to-the-tune-of-music--death-rate-is-decreasing/article-56664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/yha-gaye-bhi-jhoomti-h-sangeet-ki-dhun-pr,-mrtyu-dr-me-aarhi-kami...kota-news-09-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां बड़ी संख्या में लावारिस हालत में लाया गया गौवंश है। वहां उन्हें संगीत थैरेपी देने के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। जिससे गौशाला में खुशनुमा व भक्तिमय माहौल बना रहे। देश व प्रदेश में कई बड़ी व निजी और ट्रस्ट की गौशालाओं की तर्ज पर ही कोटा में नगर निगम की गौशाला में भी म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में पहले जहां करीब 4 हजार से अधिक गौवंश था। अधिकतर गाय लावारिस व बीमार हालत में होने से उनकी मृत्यु दर भी अधिक थी। रोजाना 10 से 15 गायों की मौत हो रही थी। इसे देखते हुए वहां की व्यवस्थाओं में सुधार किया गया। जिसके तहत गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। इस पर पूरी गौशाला में सुबह-शाम तो भजन व संगीत चलता ही रहता है। आवश्यकता होने पर दिन में भी भजन चलाए जाते हैं। भजनों को सुनने के बाद गायों के व्यवहार में बदलाव दर्ज किया गया है। अब गायें संगीत सुनते हुए दूध तो ज्यादा देती ही हैं। उनके आक्रामक व्यवहार में भी कमी आई है। बीमार गायों की स्वस्थ होने की दर भी बढ़ती नजर आ रही है। </p>
<p><strong>पूरी गौशाला में 12 हॉर्न</strong><br />निगम की गौशाला काफी बड़ी है। जिसमें वर्तमान में करीब 25 सौ गौवंश है। उन्हें अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। पूरी गौशाला में गायों को संगीत सुनाने व भजनों की सरिता बहाने के लिए निगम कीओर से 12 हॉर्न लगाए गए हैं।  जिन पर धीमी आवाज में भजन चलते रहते हैं। </p>
<p><strong>वातावरण में शुद्धि और गायों में खुशहाली</strong><br />नगर निगम की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर लावारिस हालत में पकड़ी गई गाय हैं जो बीमार व घायल  थी। जिससे उनकी मृत्यु दर भी अधिक हो रही थी। इसे सुधारने के लिए गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया। जिससे गायों को संगीत थैरेपी दी जा रही है। इससे गौशाला में भक्ति व वातावरण में शुद्धि हुई है। साथ ही गायों को भी  खुशनुमा माहौल मिल रहा है। ऐसे में उनकी खुराक बढ़ी है और मृत्युदर में भी कमी हुई है। सिंह ने बताया कि वर्तमान में केवल बीमार गायों के बाड़े में ही गायों की मौत हो रही है। उसमें भी काफी कमी आई है। साथ ही  दुधारू गायों के दूध में भी बढ़ोतरी हुई है। </p>
<p><strong>12 हॉर्न व माइक सिस्टम लगाया</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता सचिन यादव ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले ही 12 हॉर्न व एम्प्लीफायर सिस्टम लगाया गया है। जिससे गायों को भजन व संगीत के साथ ही किसी भी तरह की उद्घोषणा करनी हो तो वह भी की जा सकती है। उसके लिए माइक भी लगाए गए हैं। </p>
<p><strong>गौशाला में सुधार की दिशा में प्रयास</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के गौशाला प्रभारी दिनेश शर्मा ने बताया कि गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। उसी दिशा में प्रयास करते हुए समिति अध्यक्ष के निर्देश पर गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया है। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगाए हॉर्न से कम आवाज में भजन व संगीत चलता रहता है। जिससे गौशाला में माहौल में भक्ति व शुद्धता बनी हुई है। इससे गायों पर ही नहीं वहां काम करने वाले कर्मचारियों के काम में भी फर्क पड़ा है।  शर्मा ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था निजी गौशालाओं के अलावा कई ट्रस्ट की गौशालाओं में भी है। जिसे भी यहां अपनाया गया है। उसका फर्क भी महसूस किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 16:58:16 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात में फिर बढ़ गया गायों की मौत का आंकड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-death-toll-of-cows-increased-again-in-the-rain/article-52611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/barsaat-me-fr-bdh-gya-gayo-ki-maut-ka-hamla...kota-news-24-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की गौशाला में गायों की मौत का आंकड़ा बरसात में एक बार फिर से बढ़ गया है। यहां रोजाना 10 से अधिक गौवंश की मौत हो रही है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में मात्र करीब 2 हजार ही गौवंश है। पिछले कुछ महीनों में इनकी संख्या आधी रह गई है। इसका कारण एक तो यहां से जिले की अन्य गौशालाओं को करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को शिफ्ट करना है। वहीं दूसरा कारण गौवंश की लगातार हो रही मौत है। गौशाला में गायों की अधिक मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुछ समय पहले यहां मौत का आंकड़ा कम होकर 5 से 6 के बीच हो रह गया था। लेकिन बरसात का सीजन शुरू होते ही एक बार फिर से गायों की मौत अधिक होने लगी है। </p>
<p><strong>बरसात में कीचड़ और बैठक लेने से होती मौत</strong><br />गौशाला में पहले जहां क्षमता से अधिक गौवंश था तो उन्हें घूमने की जगह नहीं मिल पा रही थी। जिससे उनकी आपस में टकराने से मौत हो रही थी। वर्तमान में वहां इनकी संख्या तो कम हो गई है लेकिन गौशाला में जिस तरह का कच्चा व पक्का फर्श है। उस पर बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है। जिससे वे एक बार बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती हैं। ऐसे में कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाती है। </p>
<p><strong>बीमार गाय अधिक होना भी कारण</strong><br />जानकारों के अनुसार निजी गौशालाओं में जहां स्वस्थ गाय अधिक हैं। वहां अधिकतर दूध देने वाली गाय हैं। जिनकी देखभाल व खानपान भी अच्छा होता है। जबकि निगम की गौशाला में अधिकतर बीमार व लावारिस हालत में ही गौवंश आते हैं। जिससे उनकी मौत अधिक हो रही है। </p>
<p><strong>पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में गौवंश की अधिक मौत का कारण जानने के लिए ही गत दिनों निगम अधिकारियों व महापौर की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम ने तीन गायों का पोस्ट मार्टम किया था। जिसमें उनके पेट से पॉलिथीन निकली थी। उसकी मात्रा अधिक होने से ही गायों की मौत हो रही है। बरसात में यह आंकड़ा हमेशा बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>11 सौ से अधिक को किया शिफ्ट</strong><br />गौशाला से करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को जिले की निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है। जिससे इनकी संख्या तो सीमित हो गई है। लेकिन बरसात में फिर से गौवंश की मौत का आंकड़ा कुछ बढ़ा है। कुछ समय पहले तक जहां गौवंश की मौत का आंकड़ा 5 या उससे कम हो गया था। वह बरसात में बढ़कर 10 या उससे अधिक हो गया है। इसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। बरसात में कीचड़ की सफाई करवाने व बाड़ों को सही करने का काम किया जा रहा है। साथ ही गौशाला में निर्माण के काम भी शुरू हो गए हैं। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 17:52:11 +0530</pubDate>
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                <title>हर रोज 10 से 12 गायों की गौशाला में मौत</title>
                                    <description><![CDATA[गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/every-day-10-to-12-cows-die-in-the-cowshed/article-51104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/har-roz-10-se-12-gaayo-ki-gausahala-me-maut...kota-news-07-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की और से संचालित बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गौवंश के मरने का सिलसिला अनवरत जारी है। गौशाला में शहर में पकड़ लाई गई बीमार और प्लास्टिक खाई हुई प्रतिदिन 10 -12 गाये काल का ग्रास बन रही है। इसके पीछे नगर निगम के अधिकारियों का कहना है। गायों पेट में तीस से चालीस किलो प्लास्टिक है। यहां चारा और पानी की सुविधा होने से गाए भरपेट खाना खा रही जिससे उनका चारा पच नहीं रहा है। ऐसे रात के समय गाय बैठ जाती है तो फिर उठ नहीं पाती है उसकी मौत हो जाती है। गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है। </p>
<p><strong>क्षमता से अधिक हैं पशु</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। क्षमता से अधिक गौवंश होने से वहां गायों को घूमने और फिरने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। दूसरा स्वस्थ्य और बीमार गायों को एक साथ रखा जाता है। जिससे स्वस्थ्य गाये भी बीमार हो रही है। वहां सभी गौवंश को बरसात से बचने के लिए पूरे शेड तक बने हुए नहीं हैं। ऐसे में बरसात होते ही अधिकतर गाय, बैल व बछड़े उससे बचने के लिए शेड की तरफ भागते हैं। शेड की संख्या कम होने से उसमें सीमित ही गौवंश आ पा रहे हैं। जिससे वे एक दूसरे को धक्का देकर बचने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में उनके चोटिल होने के साथ ही गिरने से मौत हो रही है। </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय नहीं होने से समय पर नहीं मिलता इलाज</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गायों को पर्याप्त खाना पानी दिया जा रहा है। लेकिन गौशाला में प्लास्टिक खाई हुई गाए ज्यादा है। यहां खाना ज्यादा खाने के बाद गाये पानी पीती है और उनका पेट फूलने लगता है। पेट प्लास्टिक होने से उनकी पाचन क्षमता पहले से कमजोर हो चुकी है। ऐसे में उनके पेट फूल जाता है रात को खाना पचाने के लिए बैठती है तो फिर उठ ही नहीं पाती है उनकी मौत हो जाती है। गौशाला में रोज कभी 5 तो कभी 7 और अधिकतम 12 -14 गायों की ही मौत होती है।  बंधा धर्मपुरा गौशाला के पास पास पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा तब गायों की मौत को रोक पाना मुश्किल हम गायों की देखभाल कर सकते है इलाज के लिए तो डॉक्टर और कंम्पाउडर की जरूरत होती है। रात में गाये बैठती है तो सुबह उठती ही नहीं है। मौत हो जाती है। जब यहां 10 से 12 डॉक्टर और20 कम्पाउंटर वाला पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा गायों की मौत नहीं रोक पाएंगे। अधिकांश मौत रात के समय होती है। ऐसे 24 घंटे वाला अस्पताल की जरूरत है। </p>
<p><strong>दिन में स्वस्थ्य दिखती रात में हो जाती बीमार</strong><br />गौशाला में अधिकांश बीमार गाये आ रही है। उनके पेट में 25 से 30 किलो प्लास्टिक होता है। उनकी जांच और इलाज के लिए यहां पर्याप्त डॉक्टर और कंम्पाउंडर नहीं है। दिन में गाये स्वस्थ्य दिखती है। एक एक गाय को आधा आधा किलो आहार तो तौल कर नहीं खिला सकते है। गाये आवश्यकता से अधिक भूसा चारा खा जाती उसके बाद पानी पीते ही उनका अर्जीण होने लगता है। रात में जो गाय बैठती सुबह मरी मिलती है। गौशाला के कर्मचारी अनवृत गायों को उठाते लेकिन वो इतनी कमजोर होती है कि एक बार बैठ गई तो फिर नहीं उठती है। </p>
<p><strong>1100 गौवंश को किया शिफ्ट</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले तक 4 हजार से अधिक गौवंश हो गया था। जिसे रखने की जगह तक नहीं थी। ऐसे में गौवंश की मृत्यु दर अधिक हो रही थी। जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले की अन्य गौशालाओं को गौवंश शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। जिसकी पालना में वर्तमान में करीब 1100 गौवंश को अन्य निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है।<br /><strong>- नगर निगम की गौशाला है या मौत शाला</strong></p>
<p>कोटा नगर निगम कोटा दक्षिण वैसे तो गौशाला को लेकर बड़े बड़े दावे करता हुआ आ रहा है पर सच्चाई कुछ और ही नजर आ रही है अव्यवस्थाओ का आलम ऐसा है की हर तरह गंदगी के साथ मरी हुई गाय नजर आ रही है व्यवस्था बनाने की बजाय अव्यवस्था ज्यादा फैलती हुई नजर आ रही है गायों को पोषाहार का कही कोई नामोनिशान नहीं है रोजाना 20 से 25 गायों की रोजाना मृत्यु हो रही है कारण सिर्फ सूखा भूसा ही खिलाना है। <br /><strong>- सुरेंद्र राठौर, पार्षद नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>गौशाला में गायों की पूरी देखभाल की जा रही है। प्लास्टिक खाई हुई और बीमार गायों की ही मौत हो रही है। गायों को डॉक्टर को दिखाकर इलाज भी कराया जा रहा है। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 19:35:20 +0530</pubDate>
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                <title>वो बेजुबान किससे कहें कि हमें भी भूख लगती है</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में निगम की गौशाला में न तो भूसा है और न ही हरा चारा। ऐसे में पशुओं को सिर्फ मक्का की कुट्टी खाकर ही काम चलाना पड़ रहा है। इसका कारण निगम अधिकािरयों द्वारा समय पर भूसे व चारे का टेंडर नहीं करना है। वर्तमान में भी भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए और निगम अधिकारियों ने भूसे के टेंडर को सोमवार को फाइनल किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/to-whom-should-the-voiceless-say-that-we-too-feel-hungry/article-28958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/wo-bezubaan-kis-se-kahe-ki-hamei-bhi-bhookha-lagti-hai.....kota-news...8.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की गौशाला में सैकड़ों की संख्या में गाय व अन्य पशु हैं लेकिन उनके लिए गौशाला में भूसा तक नहीं है। जिससे उन्हें भूखे रहना पड़ रहा है। इसका कारण हर बार भूसे के टेंडर में देरी होना है। साथ ही टेंडर शर्त की पालना नहीं करने पर संवेदक के खिलाफ भी नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।  नगर निगम द्वारा बंधा धर्मपुरा में गौशाल और किशोरपुरा में कायन हाउस का संचालन किया जा रहा है। गौशाला में करीब 2 हजार से अधिक गौवंश है। जिनमें गाय से लेकर बैल तक शामिल हैं। हालांकि अधिकतर पशु बिना दूध देने वाले और बीमार हालत में आने वाले है। ऐसे में गौशाला में आने वाले पशुओं का पेट भरने की जिम्मेदारी भी नगर निगम की है। इसके लिए नगर निगम द्वारा गौशाला में भूसा, हरा चारा, चापड़ और गुड़ व खल समेत अन्य पशु आहार क्रय किया जाता है। जिस पर हर साल लाखों रुपए खर्च करने का बजट भी है। लेकिन हालत यह है कि निगम अधिकारी समय पर भूसे व चारे का टेंडर तक नहीं कर पा रहे हैं। जिससे नया टेंडर होने से पहले ही भूसा व चारा खत्म हो रहा है। जब तक नया टेंडर अस्तित्व में आता है और भूसा व चारा गौशाला में सप्लाई होता है तब तक इसके अभाव में गौवंश को भखा रहने या कम भूसा खाने और इसके विकल्प से ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसा निगम की गौशाला में पिछले  कई दिन से हो भी रहा है। वर्तमान में निगम की गौशाला में न तो भूसा है और न ही हरा चारा। ऐसे में पशुओं को सिर्फ मक्का की कुट्टी खाकर ही काम चलाना पड़ रहा है। इसका कारण निगम अधिकािरयों द्वारा समय पर भूसे व चारे का टेंडर नहीं करना है। वर्तमान में भी भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए और निगम अधिकारियों ने भूसे के टेंडर को सोमवार को फाइनल किया है। </p>
<p><strong>कई बार आ चुकी समस्या</strong><br />निगम की गौशाला में गौवंश के लिए चारे व भूसे की समस्या आए दिन की बात हो गई है। यहां कभी भूसा नहीं रहता है तो कभी हरा चारा। भूसा व चारा सप्लाई होता भी है तो उसकी मात्रा इतनी कम रहती है कि वह पशुओं को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। जिससे उन्हें अधूरे पेट ही रहना पड़ रहा है।  हालत यह है कि वैसे तो टेंडर एक साल का होता है लेकिन कई बार शॉर्ट टर्म के लिए भी टेंडर जारी किए जाते हैं। संवेदक भी कम दर पर टेंडर तो ले लेते हैं लेकिन बाद में भूसे की कीमत बढ़ने  पर या तो कम मात्रा में सप्ताई करने लगते हैं। ऐसा भी नहीं होने पर भूसे की क्वा लिटी खराब कर दी जाती है। </p>
<p><strong>पहले भी पकड़ी जा चुकी भूसा सप्लाई में गड़बड़ी</strong><br />नगर निगम का नया बोर्ड बनने के बाद कोखा दक्षिण के आयुक्त व महापौर ने वहां की व्यवस्थाएं सुधारने के काफी प्रयास किए। पहले संवेदक द्वारा न तो पर्याप्त मात्रा में भूसा सप्लाई किया जा रहा था और न ही उसकी क्वालिटी सही थी। जिसे महापौर राजीव अग्रवाल ने कुछ समय पहले पकड़ा था। उसके बाद कुछ दिन स्थिति में सुधार हुआ। लेकिन वापस वही स्थिति हो गई। </p>
<p><strong>मक्का की कुट्टी से चला रहे काम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के भाजपा पार्षद सुरेन्द्र राठौर का आरोप है कि गौशाला में भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए। गायों को सिर्फ मक्का की कुट्टी खिलाई जा रही है। उसकी मात्रा में बहुत कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम अधिकारी समय पर भूसे के टेंडर नहीं करते जिससे हर बार इस तरह की समस्या हो रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> गौशाला में हरा चारा तो काफी समय से नहीं आ रहा है। भूसे का टेंडर अधिकािरयों ने कर दिया है लेकिन वह देरी से किया है। जिससे भूसा समय पर सप्लाई नहीं हो पाया। हालाकि गौशाला में गायों को भूखा नहीं रखा गया। उन्हें मक्का की कुट्टी खिलाफ गई। अधिकारियों को समय पर टेंडर करने के लिए कई बार कहा जा चुका है। लेकिन सुनवाई ही नहीं करते। <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, गौशाला व्यवस्था समिति</strong></p>
<p>भूसे का टेंडर तो काफी समय पहले ही कर दिया  था। लेकिन दीपावली अवकाश समेत छुट्टियां अधिक होने से उसे फाइनल नहीं किया जा सका था। सोमवार को नेगोसिएशन कर टेंडर को फाइनल कर दिया है। मंगलवार से गौशाला में भूसा सप्लाई होना शुरू हो जाएगा। साथ ही संवेदक द्वारा गौशाला के गोदाम में निर्धारित मात्रा में भूसे का स्टॉक नहीं रखने पर उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 16:21:47 +0530</pubDate>
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