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                <title>heatstroke - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ह्यूमिड हीटवेव सेहत के लिए बेहद खतरनाक, कुछ ही घंटों में हो सकता है हीटस्ट्रोक : अध्यन्न</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिकों ने केरल के तटीय क्षेत्रों में ह्यूमिड हीटवेव (उमस भरी लू) को लेकर अलर्ट जारी किया है। अध्ययन के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश रुकने पर गर्मी और नमी का जानलेवा मेल हीटस्ट्रोक का कारण बन सकता है। पसीना न सूखने से शरीर ठंडा नहीं हो पाता, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/humid-heatwave-is-very-dangerous-for-health-heatstroke-can-occur/article-150985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/heatwave.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वैज्ञानिकों ने एक जरूरी चेतावनी जारी की है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, मानसून के दौरान जब बारिश रुकती है, तो उस समय पड़ने वाली उमस भरी गर्मी (ह्यूमिड हीटवेव) सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। ब्रिटेन की 'यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग' के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में की गयी एक रिसर्च में बताया गया है कि तटीय क्षेत्रों में अब केवल बढ़ता तापमान ही बड़ी बात नहीं है, बल्कि गर्मी और नमी का जो मेल बन रहा है, वह शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।</p>
<p>आम तौर पर चलने वाली लू के मुकाबले यह उमस वाली गर्मी इसलिए ज्यादा घातक है क्योंकि हवा में नमी अधिक होने की वजह से शरीर का पसीना नहीं सूख पाता। जब पसीना नहीं सूखता, तो शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। ऐसे में तापमान बहुत ज्यादा न होने पर भी इंसान को कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक हो सकता है या दिल पर दबाव बढ़ सकता है। अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. अक्षय देवरस ने बताया कि केरल के तटीय जिले अंदरूनी इलाकों के मुकाबले इस खतरे की चपेट में ज्यादा हैं। खासकर जब मानसून के दौरान बारिश का दौर थमता है, तब यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।</p>
<p>इस खतरे को मापने के लिए वैज्ञानिकों ने 'वेट-बल्ब' तापमान का इस्तेमाल किया है। यह एक ऐसा पैमाना है जो बताता है कि गर्मी और नमी का स्तर कब इतना बढ़ गया है कि पसीना निकलना भी बेकार हो जाए और इंसान की जान जोखिम में पड़ जाए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऐसी उमस वाली गर्मी का पता करीब एक महीना पहले ही लगाया जा सकता है। अगर प्रशासन को इसकी जानकारी समय पर मिल जाए, तो वह बचाव के इंतजाम कर सकता है।</p>
<p>इस समय का उपयोग अस्पतालों में तैयारी करने, आम लोगों के लिए 'कूलिंग सेंटर' बनाने, स्कूलों के समय में बदलाव करने और बिजली की सप्लाई बेहतर करने के लिए किया जा सकता है। यह पूरी रिपोर्ट 1940 से 2023 तक के यानी पिछले 84 सालों के मौसम और बारिश के आंकड़ों को परखने के बाद तैयार की गई है। वैज्ञानिकों ने मानसून के आने और रुकने के सैकड़ों चरणों का बारीकी से विश्लेषण किया है। इस खास शोध में 'यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स', 'यूके मेट ऑफिस' और भारत के 'उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान' ने भी हाथ बटाया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में लोग लू के बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस उमस भरी गर्मी को गंभीरता से नहीं लेते। जबकि यह कहीं ज्यादा जानलेवा हो सकती है। इसलिए इसके प्रति लोगों को जागरूक करना और सही सरकारी नीतियां बनाना बहुत जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भीषण गर्मी: तापघात पशुओं पर कर रहा अटैक</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में हर दिन 15 से 20 पशु बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-heat--heatstroke-is-attacking-animals/article-80338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नौतपा के चलते तापमान में वृद्धि के कारण लगातार पड़ रही भीषण गर्मी ने जहां मानव जीवन को प्रभावित कर रखा है वहीं गर्मी मवेशियों के लिए भी उतनी ही घातक साबित हो रही है। कोटा जिले में लगातार भीषण गर्मी का दौर जारी है। भीषण गर्मी एवं पानी की कमी के कारण आवरा पशु ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं पालतू पशुओं में बुखार एवं डायरिया बीमारी का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। जिले में हर दिन 15 से 20 पशु बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। इनका पशु चिकित्सकों टीमों द्वारा उपचार किया जा रहा है। </p>
<p><strong>रोजाना डेढ़ दर्जन पशुओं का उपचार</strong><br />गर्मी, लू एवं तापमान के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। पशु चिकित्सकों की माने तो तपन और लू के थपेड़े पशुओं की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। इस नौतपा के चलते तापमान में वृद्धि हो रही है, जो अब सीधे रूप से दुधारू पशुओं पर भी देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी से दूध उत्पादन में कमी दिख रही है। पशु चिकित्सकों ने बताया कि लू तापघात की चपेट में आने वाले पशु चारा खाना छोड़ देता है। मुंह से पानी गिरने लगता है और तेज बुखार चढ़ जाती है। वर्तमान में रोजाना डेढ़ दर्जन पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>दिन में पानी का कर रहे छिड़काव</strong><br />शंकरपुरा निवासी पशुपालक रोहिताश मीणा व राधेश्याम ने बताया कि पशुओं को गर्मी से बचाव को लेकर दिन में 4 बार पानी का छिड़काव कर रहे है। कई जगह पशुपालक बाड़े में पंखे चलाकर भी पशुओं को गर्मी से बचाव करने में जुटे है। गर्मी के कारण बुखार और डायरिया की चपेट में सबसे ज्यादा गायें आ रही है। पिछले दिनों उनकी चार गायें डायरिया की चपेट में आ गई थी। इस पर कैथून स्थित पशु अस्पताल में सूचना दी गई। पशु चिकित्सकों ने मौके पर आकर बीमार गायों का उपचार किया। गांव में अन्य पशु भी गर्मी से बेहाल हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पशुओं में दूध उत्पादन  हुआ कम</strong><br />गर्मी के कारण पशुओं खासकर गाय और भैंसों की दूध उत्पादन की क्षमता भी घटने लगी है। कोटा जिले में छह लाख से ज्यादा पशु हैं, इनमें से लगभग दो लाख से अधिक दुधारू पशु है। पशुपालकों के अनुसार पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ना शुरू हो गया है। आलम यह है कि गर्मी के कारण पशुओं में दूध की मात्रा 30 प्रतिशत तक कम हो गई है।  गर्मियों में पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर होता है। दुग्ध का उत्पादन भी कम हो जाता है। </p>
<p><strong>गर्मियों में इन बातों  का रखें ध्यान</strong><br />पशुओं को दिन के समय सीधी धूप से बचाएं<br />पशुओं को बांधने के लिए छायादार व हवादार स्थान का चयन करें<br />पशुओं के पास पीने का पानी और चारा हमेशा रखें<br />डेयरी शेड में दिन के समय कूलर-पंखे आदि का इस्तेताल करें<br />अधिक गर्मी की स्थिति में पशुओं के शरीर पर पानी का छिड़काव करें<br />पशुओं में असमान्य लक्षण नजर आने पर पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें</p>
<p>भीषण गर्मी की स्थिति में पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन एवं उपाय की आवश्यकता है। गर्मी से बचाव के लिए पशुओं को हरा चारा खिलाना जरूरी है। ठंडी जगह पर बांधने से पशुओं को राहत मिलती है। संभव हो तो पंखे-कूलर की व्यवस्था करनी चाहिए। दिन में पशु को तीन बार पानी पिलाना चाहिए। साथ ही सुबह 10 बजे से पहले नहलाना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. गिरिश साळफले, उपनिदेशक पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 16:29:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ते पारे ने बढ़ाया दिलो-दिमाग का पारा</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस और अन्य अस्पतालों में 30% तक गर्मी जनित बीमारियों के मरीज बढ़ गए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rising-mercury-increased-the-temperature-of-hearts-and-minds/article-80182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/heatwave.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हीटवेव और हीटस्ट्रोक का असर इन दिनों काफी बढ़ गया है। जयपुर की बात करें तो यहां अभी भी पारा 45 डिग्री के आसपास बना हुआ है। वहीं 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्ति जिनका वजन अधिक है, जिन्हें पहले से ही हार्ट, फेफड़े या गुर्दे की समस्या है वे विशेष रूप से हीट वेव प्रभाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। बढ़े तापमान के कारण रक्त वाहिकाएं फैल सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर में गिरावट हो सकती है। इसलिए ऐसे लोग हीटस्ट्रोक का जल्द शिकार होते हैं। राजस्थान की बात करें तो 50 या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है। हीटस्ट्रोक के कारण प्रदेश में अब तक 59 से ज्यादा लोग मौत के शिकार हो चुके हैं लेकिन चिकित्सा विभाग ने अब तक नौ लोगों की हीटस्ट्रोक के कारण मौत होने की पुष्टि की है। वहीं कुछ दिनों पहले एसएमएस अस्पताल में भर्ती गार्ड की की हीटवेव से मौत हो चुकी है।</p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा वितरीत असर</strong><br />वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश जैन ने बताया कि तेज गर्मी शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। व्यक्ति में गुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव जैसे लक्षण पैदा होने लगते हैं। साथ ही गर्मी के कारण नींद भी प्रभावित होती है जिससे मानसिक तनाव और बढ़ जाता है। गर्मी में डिहाईड्रेशन के कारण याददाश्त कमजोर हो सकती है और ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी हो सकती है और तनाव महसूस होता है। </p>
<p><strong>एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों में 30 प्रतिशत तक बढ़े मरीज</strong><br />अकेले एसएमएस अस्पताल की ओपीडी इन दिनों 12 हजार प्रतिदिन को पार कर गई है। अकेले मेडिसिन विभाग की ओपीडी ही तीन से चार हजार मरीज प्रतिदिन के बीच चल रही है और इनमें से करीब 25 से 30 प्रतिशत मरीज सिर्फ मौसमी बीमारियों से पीड़ित होकर आ रहे हैं। इनमें ज्यादा संख्या हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी जनित रोगों से ग्रसित होकर आने वालों की है। एसएमएस अस्पताल में ज्यादा गंभीर मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी बनाया गया है। चिकित्सकों की मानें तो तेज गर्मी की सबसे बड़ी समस्या होती है लू लगना। गर्मी में उच्च तापमान में ज्यादा देर तक रहने या गर्म हवा के झोको के संपर्क में आने से लू लगने की सम्भावना अधिक होती है। <br /><br /><strong>दिल के मरीजों के लिए इसलिए घातक है तेज गर्मी</strong><br />सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित सिंघल ने बताया कि 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्ति इन दिनों विशेष ध्यान रखें। साथ ही जिनका वजन अधिक है, जिन्हें पहले से ही हार्ट, फेफड़े या गुर्दे की समस्या है। ऐसे लोग हीटस्ट्रोक का जल्द शिकार होते हैं। कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों वाले मरीजों और उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को इन दिनों अपनी दवांए नियमित रूप से लेनी चाहिए साथ ही दोपहर में 12 बजे से शाम 5 बजे तक घर या दफ्तर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 11:13:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rajasthan Heatwave Update : जैसलमेर बॉर्डर पर बीएसएफ का जवान शहीद, हीटस्ट्रोक से गई जान  </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर भारत में चल रही हीटवेव के कारण जैसलमेर बॉर्डर पर एक सीमा सुरक्षा बल का जवान शहीद हो गया। शहीद हुए जवान का नाम अजय कुमार बताया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaisalmer/rajasthan-heatwave-update-bsf-soldier-martyred-on-jaisalmer-border-died/article-79494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jaisalmer-border.png" alt=""></a><br /><p>जैसलमेर। उत्तर भारत में चल रही हीटवेव के कारण जैसलमेर बॉर्डर पर एक सीमा सुरक्षा बल का जवान शहीद हो गया। शहीद हुए जवान का नाम अजय कुमार बताया जा रहा है। </p>
<p>सीमा सुरक्षा बल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अजय कुमार की मौत हीटस्ट्रोक आने से हुई है। रविवार को बॉर्डर पर तैनात जवान की गर्मी के कारण तबीयत खराब हो गई थी जिसके बाद रामगढ़ स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां जवान को हीटस्ट्रोक के कारण मृत घोषित कर दिया। </p>
<p>शहीद जवान अजय कुमार जलपाईगुढ़ी का रहने वाला था। अस्पताल से जोधपुर सड़क मार्ग ले जाकर वहां से हवाईजहाज के जरिए जलपाईगुढ़ी शव को ले जाया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जैसलमेर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 12:29:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की वर्षा की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से सोमवार को अधिकांश हिस्सों में लू से राहत मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--light-rain-likely-in-jaipur--bharatpur-and-bikaner-divisions--relief-from-heatstroke--mercury-also-dropped/article-9911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/garmi1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से सोमवार को अधिकांश हिस्सों में लू से राहत मिली। दिन के तापमान में दो से पांच डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन धूप ने फिर भी लोगों को परेशान किया। वहीं धौलपुर में तेज लू और चिलचिलाती धूप से लोग असहज रहे। यहां दिन का तापमान 46.1 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी जयपुर में दिन का तापमान 44.4 से गिरकर 41.3 डिग्री और रात का 33.1 से 32.3 डिग्री दर्ज किया गया। मौमस विभाग ने 17 मई को जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की वर्षा की संभावना जताई है, जबकि बीकानेर संभाग में धूलभरी आंधी चलेगी। <br /><br />अधिकांश हिस्सों में तापमान गिरा <br />राज्य के अनेक हिस्सों में सूर्य और बादलों के बीच लुकाछिपी का खेल चला, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हुई। अधिकांश हिस्सों में लू का प्रभाव नहीं रहा, लेकिन सूर्य की तेज किरणों ने लोगों को गर्मी से असहज कर दिया। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 11:05:46 +0530</pubDate>
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