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                <title>private schools - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आरटीई की राह में निजी स्कूलों की मनमानी, 5 महीने बाद भी सैकड़ों बच्चों को नहीं मिला प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मंत्री के गृह जिले में दांव पर लगा बच्चों का भविष्य, भटक रहे अभिभावक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/private-schools-flout-rte-norms--hundreds-of-children-denied-admission-even-after-five-months/article-162059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए आरटीई (शिक्षा का अधिकार) कानून बनाया, लेकिन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह जिले में हीतई स्कूल कानून की जमकर धज्जियां उड़ा रहे है। आरटीई लॉटरी में चयनित होने के 5 महीने बाद भी जिले में सैंकड़ों बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं मिला। कोई फीस मांग रहा तो कोई नॉन आरटीई के एडमिशन नहीं होने का बहाना बनाकर अभिभावकों को टरका रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार शिक्षा अफसर भी निजी स्कूलों की मनमानी के आगे लाचार नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं, विभाग के माध्यमिक व प्रारंभिक कार्यालय में शिकायतों का ढेर लगा हुआ है। राहत दिलाने की बजाए अफसर स्कूलों को पत्र भेज जवाब मांग रहे हैं लेकिन स्कूल संचालकों द्वारा अधिकतर शिकायतों का जवाब तक नहीं दे रहे। मजबूरन अभिभावकों ने जिला कलक्टर व राजस्थान सरकार के सम्पर्क पोर्टल 181 पर भी शिकायत कर चुके, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। नतीजन, नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए पांच महीने बीत गए लेकिन घर बैठे सैकड़ों बच्चे हर रोज अभिभावकों से सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं—पापा, मैं कब स्कूल जाऊंगा?</p>
<p><strong>7 दिन बाद भी निदेशालय ने नहीं दिया मार्गदर्शन</strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने कुछ निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन स्कूलों ने इनका जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद विभाग ने शिक्षा निदेशालय, बीकानेर से मार्गदर्शन मांगा, लेकिन सात दिन बाद भी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।</p>
<p><strong>मासूमों का सवाल, मैं कब स्कूल जाऊंगा?</strong><br />आरटीई में चयनित होने के बाद भी महीनों से घर बैठे मासूम बच्चों का यही सवाल अब शिक्षा अफसरों की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया। सरकार की योजना का लाभ पाने के बजाय यह बच्चे विभागीय लापरवाही और निजी स्कूलों की मनमानी के बीच अपना पूरा शैक्षणिक सत्र गंवाने की कगार पर हैं। उनका एक ही सवाल हैं, आखिर, मैं कब स्कूल जाऊंगा?</p>
<p><strong>अभिभावक बोले-सुविधा की जगह दुविधा बना कानून</strong><br />कंसुआ निवासी अब्दुल गफ्फार का आरोप है, वर्ष 2023 में बच्चे का आरटीई केतहत कंसुआ स्थित निजी स्कूल में एचकेजी में एडमिशन हुआ था। बच्चा आज तीसरी क्लास में पहुंच गया। लेकिन, मार्च 2026 से स्कूल संचालक तीन वर्ष पूर्व एचकेजी की फीस मांग रहा है। आरटीई का हवाला देने पर बच्चे को स्कूल में एंट्री देने से रोक दिया। वहीं, गत वर्ष कक्षा-2 की परीक्षा में दो पेपर के बाद आगे के पेपर देने के लिए परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया।</p>
<p>बोरखेड़ा निवासी अजय कुश्वाह ने बताया कि दोस्त धर्मेंद्र गोस्वामी के बेटे अर्नव का आरटीई लॉटरी में पहला नंबर है। डॉक्यूमेंट वेरिफाई होे गए और पोर्टल पर चयनित लिखा हुआ भी आ गया है। इसके बावजूद स्कूल संचालक द्वारा जयपुर द्वारा हमें पीपी-4 की सीटें अलॉट नहीं होने का हवाला देते हुए एडमिशन देने से मना कर दिया। अब हम क्या करें, 4 माह से बच्चा घर बैठा है।</p>
<p>मानपुरा निवासी नसरुद्दीन का कहना है, पोर्टल पर प्रवेशित होने के बावजूद एडमिशन नहीं मिला। दस्तावेज जमा करवाने गए तो स्कूल संचालक ने प्री-प्राइमरी कक्षा संचालित नहीं होने की बात कहते हुए एडमिशन देने से इंकार कर दिया। जबकि, फॉर्म भरते समय स्कूल की प्रोफाइल में प्री-प्राइमरी कक्षा का विवरण होने पर ही हमने नर्सरी के लिए आवेदन किया था।</p>
<p>इस तरह की शिकायतें मिल रहीं हैं। संबंधित स्कूलों को पत्र भेज जवाब मांग रहे हैं। फीस मांगने, नॉन आरटीई के एडमिशन नहीं होने सहित अन्य शिकायतों की वास्तविकता भी परखी जा रही है। वहीं, इस संबंध में शिक्षा निदेशालय बीकानेर को पत्र भेज मार्गदर्शन मांगा है, वहां से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-रामचरण मीणा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा</strong></p>
<p><strong>आरटीई उप निदेशक ने नहीं दिया जवाब</strong><br />नवज्योति ने इस संबंध में शिक्षा निदेशालय बीकानेर में राजस्थान की आरटीई उपनिदेशक चंद्रकिरण को फोन कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन फोन अटैंड नहीं किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:31:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निजी स्कूल में सेमिनार का आयोजन, विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन एवं मेंटल हेल्थ के लिए किया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[ईट राइट कैंपेन के तहत राजस्थान के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मानसरोवर के स्कूल में बच्चों को स्वस्थ खानपान और फास्ट फूड के नुकसान पर जागरूक कर रहे हैं। सेमिनार में ट्रांस फैट, अत्यधिक तेल, नमक, चीनी के नुकसान और मानसिक स्वास्थ्य, स्ट्रेस व डिप्रेशन से निपटने के टिप्स साझा किए गए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/seminar-organized-in-private-school-to-make-students-aware-about/article-134706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/newsw02.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ईट राइट कैंपेन अभियान के तहत आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण राजस्थान डॉक्टर टी शुभमंगला के निर्देशानुसार बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित करने के लिए ईट राइट कैंपेन के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में   मानसरोवर स्थित एक स्कूल में फूड टीम ने सेमिनार आयोजित किया गया।</p>
<p>सी एम एच ओ जयपुर द्वितीय- डॉ मनीष मित्तल ने बताया कि आजकल जंक फूड एवं फास्ट फूड जैसे पिज़ा, बर्गर, मोमोज, पेटीज, नूडल्स,केक,पेस्ट्रीज का सेवन विशेषकर बच्चों और युवाओं द्वारा किया जा रहा है। इनमें चीनी, नमक,तेल,मैदा,ट्रांस फैट,फूड कलर,प्रिजर्वेटिव आदि का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है, जिससे बच्चों और युवाओं में कम उम्र में ब्लड प्रेशर,डायबिटीज और  हृदय रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। इन खाद्य पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने  एवं पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेमिनार का आयोजन किया गया।</p>
<p>सेमिनार में बाजार में तेल को बार बार गर्म कर तैयार किए जा रहे कचोरी, समोसे एवं पकौड़ी आदि में ट्रांस फैट की अत्यधिक मात्रा से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया गया। मनोचिकित्सक डॉक्टर राजेश बागड़ा एवं डॉक्टर अनीता चौधरी ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में स्ट्रेस, डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान और इससे मुक्त होने संबंधी टिप्स बताए एवं किसी भी मानसिक समस्या होने पर टेलीमानस हेल्पलाइन के नंबर 14416 पर सलाह लेने की जानकारी दी। विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील चोटवानी, विनोद थारवान, रमेश चंद यादव, अवधेश गुप्ता, राजेश कुमार नागर और नंदकिशोर कुमावत ने फूड सेफ्टी पर जानकारी दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 16:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग के आदेशों की उडी धज्जियाँ : निजी स्कूल खुले रहे, जबकि सरकारी स्कूल बंद </title>
                                    <description><![CDATA[13 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक सरकारी और निजी स्कूलों मे अवकाश घोषित किया। आदेशों की पालना के तहत सरकारी स्कूल तो बंद रहे लेकिन निजी स्कूल अवकाश के पहले दिन खुले रहे। निजी स्कूलों में तो अभी परीक्षा कार्य भी चल रहा। राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए है कि शिविरा कलैण्डर की पालना कराई जाए। स्कूलों के खिलाफ राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्थान अधिनियम 1989 एवं नियम 1993 में वर्णित प्रावधानों के तहत कार्रवाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-departments-orders-flouted-private-schools-remain-open-while-government/article-129589"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/7896.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा विभाग ने दीपावली पर्व को देखते हुए 13 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक सरकारी और निजी स्कूलों मे अवकाश घोषित किया है, आदेशों की पालना के तहत सरकारी स्कूल तो बंद रहे लेकिन निजी स्कूल अवकाश के पहले दिन खुले रहे। कई निजी स्कूलों में तो अभी परीक्षा कार्य भी चल रहा है। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग के शिविरा पंचाग में राज्य के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग के निदेशक ने 13 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक अवकाश घोषित किया है। शहर के नामी स्कूल मसलन-सेंट जेवियर्स, कैम्बिज कोर्ट, राजश्री स्कूल सहित अन्य छोटे स्कूल भी सरकारी अवकाश के बावजूद खुले रहे। इस सन्दर्भ में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निदेशक सीताराम जाट से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। </p>
<p><strong>जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए निर्देश</strong><br />राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए है कि शिविरा कलैण्डर की पालना कराई जाए, यदि आदेशों की पालना नहीं होती है तो उन स्कूलों के खिलाफ राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्थान अधिनियम 1989 एवं नियम 1993 में वर्णित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। </p>
<p><strong>तेज बारिश में खुले थे स्कूल</strong><br />इस बार मानसूनी तेज बारिश के चलते जिला कलेक्टर ने स्कूलों में अवकाश घोषित किया था, लेकिन कलेक्टर के आदेशों के बावजूद निजी स्कूल खुल गए। इस पर जिला कलेक्टर ने वापस जिला शिक्षा अधिकारी को विद्यालय बंद रखने के आदेश जारी किए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />'निजी स्कूलों की निगाह में सरकार के आदेशों का कोई महत्व नहीं हैं, वे अपने विधान से चलते हैं। सरकार जब-जब छुट्टियों को लेकर घोषणा करती है तब-तब निजी स्कूल अपनी मनमर्जी से स्कूल चलाते हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात को लेकर की गई छुट्टी की घोषणा के लिए निजी स्कूलों के लिए कोई महत्व नहीं हैं।'<br />-अभिषेक जैन बिट्टू, <br />प्रदेश प्रवक्ता, संयुक्त अभिभावक संघ, जयपुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 10:10:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कड़ाके की सर्दी को निजी स्कूलों ने बनाया ‘विंटर मैजिक’ : कलक्टर के छुट्टियों के आदेश का निकाला तोड़, हॉबी क्लासेज के नाम पर बच्चों को बुला रहे स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के 21 जिलों के कलक्टरों ने अपने-अपने स्तर पर छुट्टियां घोषित भी कर दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-school-students-turn-harsh-winter-into-winter-magic-break/article-99968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिला कलक्टर ने कड़ाके की सर्दी की वजह से भले ही आठवीं तक के बच्चों की छुट्टियां कर दी हो, लेकिन कई निजी स्कूल वालों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। स्कूल संचालक हॉबी क्लासेज के नाम पर बच्चों को बुला रहे हैं और इसकी एवज भी फीस भी वसूल रहे हैं। प्रदेश में पड़ रही शीतलहर और कड़ाके की सर्दी के मद्देनजर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को सभी जिला कलक्टरों को निर्देश दिए थे कि वे अपने स्तर पर मौसम की समीक्षा कर स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की छुट्टियां कर सकते हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश भी जारी किए थे। इस पर प्रदेश के 21 जिलों के कलक्टरों ने अपने-अपने स्तर पर छुट्टियां घोषित भी कर दी। शीतकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को स्कूल खुलने वाले थे। जयपुर जिला कलक्टर ने भी अपने जिले की सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में सात और आठ जनवरी का अवकाश घोषित किया है।</p>
<p><strong>ऐसे निकाला तोड़ :</strong></p>
<p>पहले तो सभी स्कूल संचालकों ने कलक्टर के आदेश का हवाला देते हुए छुट्टियां की घोषणा कर दी। कई स्कूलों ने 15 जनवरी तक छुट्टियां की है। अब स्कूल संचालकों ने मंगलवार को अभिभावकों को संदेश भेजा है कि आठ जनवरी से 15 जनवरी तक विंटर मैजिक आयोजित किया जाएगा। इसका समय सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक रहेगा। इसमें आर्ट एण्ड क्राफ्ट, जुम्बा, ऐरोबिक्स, खान-पान की आदतें, जिम्नास्टिक, इंडोर गेम सहित अन्य गतिविधियां कराई जाएगी। इसके बदले अभिभावकों से दो हजार रुपए तक भी वसूले जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2025 12:21:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्राइवेट स्कूलों को महंगी पड़ सकती है अब एडमिशन में आनाकानी </title>
                                    <description><![CDATA[अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद विभाग ने दी सख्त हिदायत  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-now-private-schools-may-have-to-pay-a-heavy-price-for-their-reluctance-in-admission/article-87637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(1)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा आरटीई में चयनित विद्यार्थियों को एडमिशन देने में आनाकानी की जा रही है। अभिभाावकों की लागतार शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग अब एक्शन मोड में आ गया। विभाग की ओर से सभी प्राइवेट स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है कि सत्र 2024-25 में नर्सरी कक्षाओं में दाखिला देने में आनाकानी की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सरकार के आदेशों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। शिक्षा के अधिकार को लेकर सरकार गंभीर है। </p>
<p><strong>मान्यता समाप्ती तक की हो सकती है कार्रवाई</strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी की नर्सरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एसआर नम्बर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद कुछ प्राइवेट स्कूलों द्वारा एडमिशन नहीं दिए जाने को विभाग ने गंभीरता से लिया है। संबंधित विद्यालयों को विभाग द्वारा नोटिस देकर व फोन पर भी सख्त हिदायत दी जा रही है। इसके बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी जारी रहती है तो उनके खिलाफ आरटीई एक्ट के अर्न्तगत सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगालेंगे। जिनमें खामियां मिलने पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। </p>
<p><strong>आरटीई में पंजीकृत हैं 1104 स्कूल </strong><br />कोटा जिले में करीब 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर निजी स्कूल चयनित बच्चों को एडमिशन दे रहे हैं लेकिन कुछ स्कूल मनमानी कर रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, प्री-प्राइमरी कक्षाओं का पुनर्भरण राशि को लेकर निजी स्कूल संघ सरकार के आदेश के खिलाफ कोर्ट की शरण में जा चुका है। वर्तमान में हाईकोर्ट की डबल बैंच में मामला विचाराधीन है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रही 30 से ज्यादा शिकायतें  </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने सहित अन्य संबंधित 30 से ज्यादा शिकायतें प्रतिदिन मिल रही हैं। जिस पर तुरंत संबंधित स्कूलों को फोन कर समाधान करवाया जा रहा है। हालांकि, अधिकतर स्कूल एडमिशन दे रहे हैं लेकिन कुछ आनाकानी कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />केस 1 - मानपुरा स्थित निजी स्कूल में मेरी पुत्री का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। लेकिन, स्कूल वाले दाखिला नहीं दे रहे। जबकि, पोर्टल पर प्रवेशित लिखा आ रहा है। मामले की शिक्षा विभाग में शिकायत भी दी है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- ताराचंद मेहरा, मानपुरा </strong></p>
<p>केस 2 - तलवंडी स्थित कॉन्वेंट स्कूल में मेरे बालक का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वरियता सूची में क्रमांक 41 है। स्कूल वाले एडमिशन नहीं होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं। पहले भी शिक्षा विभाग को लिखित में शिकायत दे चुके हैं। लेकिन, समाधान नहीं हुआ।  <br /><strong>- पारसमल, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरी पुत्री कर्तिका (परिवर्तित नाम) का नर्सरी में नम्बर आया है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्कूल गया तो वहां 11 हजार रुपए फीस जमा करवाने को कहा गया। फीस के अभाव में एडमिशन नहीं देने की बात कही। विभाग को शिकायत की है, अब देखते हैं क्या होता है। <br /><strong>- अजय नागर, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में बदलाव करके अभिभावकों एवं निजी विद्यालयों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। न सरकार पैसा देना चाहती है और न ही अभिभावक। इस कारण से बच्चा निशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए की प्री-पाइमरी कक्षाओं का भुगतान करें ताकि आरटीई का लाभ बच्चों को मिल सके। हमने तो तीन साल बच्चे को पढ़ा दिया अब सरकार पैसे देने से मुकर रही है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ  </strong></p>
<p>प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन को लेकर निजी स्कूलों द्वारा आनाकानी  किए जाने के मामले आते हैं, जिस पर तुरंत संबंधित स्कूल को फोन कर सख्त हिदायत देकर समाधान करवाया जा रहा है। इसके बावजूद शिकायत मिलती है तो उन स्कूलों को नोटिस जारी किए जाएंगे। वहीं, किसी स्कूल की बड़े लेवल पर अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ मान्यता समाप्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक शिक्षा विभाग  </strong></p>
<p>इस तरह की शिकायतें आ रही हैं, जिनका कार्यालय द्वारा तुरंत प्रभाव से समाधान करवाया जा रहा है। आरटीई नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों को नोटिस देकर पाबंद किया जाएगा। इसके बावजूद चयनित विद्यार्थियों को दाखिला नहीं देते हैं तो निदेशालय के मार्गदर्शन में संबंधित स्कूलों के खिलाफ मान्यता संबंधी कार्रवाई के प्रस्ताव भिजवाए जा सकेंगे। <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक, शिक्षा विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 17:35:14 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार और प्राइवेट स्कूल के बीच पिस रहा अभिभावक</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग के चक्कर काट अभिभावक हो रहे परेशान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कोटा। आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की फीस को लेकर सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच विवाद में अभिभावक पिस रहा है। सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सत्र 2024-25 में निजी स्कूलों में नर्सरी से विद्यार्थियों को एडमिशन तो दिलवा दिए लेकिन पुनर्भरण राशि कक्षा-एक से दे रही है। जबकि, निजी स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों का पुनर्भरण किए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार के हाथ खड़े कर देने से प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर फीस का दबाव बना रहे हैं।  कहीं, नर्सरी में एडमिशन न देने तो कहीं पिछले साल नर्सरी से एलकेजी व एचकेजी में प्रमोट हुए बच्चों की फीस मांगी जा रही है। इस तरह की शिकायतें लेकर अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। प्राइवेट स्कूल और सरकार के बीच विवाद में अभिभावक चक्कर घन्नी हो रहे हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रहे 40 से 50 मामले </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीई में चयनित बच्चों को नर्सरी में एडमिशन न देने व प्रमोटी एलकेजी-एचकेजी के विद्यार्थियों से फीस मांगे जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। प्रतिदिन इस तरह के 40 से 50 मामले आ रहे हैं।  अभिभावकों द्वारा लिखित में शिकायत देने पर विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों को पाबंद भी किया जा रहा है। वहीं,  अभिभावकों का कहना है, विभाग द्वारा सख्ती किए जाने पर थोड़े दिन तो मामला शांत रहता है लेकिन, कुछ दिनों बाद फिर से फीस फीस मांगना शुरू कर देते हैं।   </p>
<p><strong>क्या है विवाद</strong><br />शिक्षा विभाग ने सत्र 2023-24 में आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी से प्रथम कक्षा तक में प्रवेश लिए थे। लेकिन, आरटीई का भुगतान प्रथम कक्षा से ही देने का फैसला लिया। जिसका निजी स्कूलों ने विरोध किया। इस पर शिक्षा विभाग की मान्यता को लेकर चेतावनी दिए जाने के बाद प्राइवेट स्कूलों ने प्रवेश दे दिया। वहीं, नए सत्र 2024-25 में शिक्षा विभाग ने नर्सरी और पहली कक्षा में ही प्रवेश देने के लिए बच्चों का चयन किया। कक्षा-एक में तो सरकार पुनर्भरण राशि का भुगतान कर रही लेकिन नर्सरी का नहीं कर रही है। जिसका विरोध करते हुए निजी स्कूल भुगतान की मांग कर रहे हैं।   </p>
<p><strong>एक हजार स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में करीब एक हजार निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। कुछ निजी स्कूलों द्वारा सरकार के आदेशानुसार चयनित बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन अधिकतर स्कूल फीस मांग रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>अधिकारी बोले- कर रहे पाबंद</strong><br />इस तरह के मामले आ रहे हैं। अभिभावक मौखिक व सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर रहे हैं लेकिन लिखित में शिकायत नहीं दे रहे। हालांकि, प्राइवेट स्कूलों को सरकार के दिशा-निर्देशानुसार पढ़ाने के लिए पाबंद किया जा रहा है।  <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, शिक्षा विभाग प्रारंभिक </strong></p>
<p>चयनित विद्यार्थियों को एडमिशन देने के लिए प्राइवेट स्कूल सरकार से बाध्य हैं। कार्यालय में जो भी शिकायतें आ रहीं हैं, इस पर संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर समाधान करवा रहे हैं। यदि, इस तरह की और भी कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी शिक्षा विभाग माध्यमिक</strong></p>
<p><strong>अभिभावकों का छलका दर्द: निजी स्कूल मांग रहे पैसा </strong><br />तलवंडी स्थित कॉन्वेंट स्कूल में मेरे बालक का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वरियता सूची में क्रमांक 41 है। स्कूल वाले एडमिशन नहीं होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं। जबकि, आरटीई पोर्टल पर प्रवेशित लिखा हुआ आ रहा है। स्कूल प्रशासन बच्चे को एडमिशन नहीं दे रहे। शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- पारसमल डाबी, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरी पुत्री रूचिका का नर्सरी में नम्बर आया है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्कूल गया तो वहां की प्राचार्य ने 15 हजार फीस जमा करवाने को कहा। फीस के अभाव में एडमिशन नहीं देने की बात कही। शिक्षा विभाग को 2 अगस्त को लिखित शिकायत दी है। फिर भी समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- पुरुषोत्तम नागर, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरे पुत्र भावेश महावर का नर्सरी कक्षा में आरटीई के तहत दाखिला हुआ है। लेकिन, स्कूल वाले एडमिशन नहीं दे रहे। प्राचार्य ने फीस जमा करवाने की बात कहते हुए कहा कि सरकार हमें नर्सरी से एचकेजी तक पैसा नहीं देती है। यदि, फीस दोगे तो ही बच्चे का एडमिशन हो सकेगा। <br /><strong>- नरेंद्र महावर, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं निजी स्कूल संचालक </strong><br />आरटीई एक्ट में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि प्राइवेट स्कूल फ्री में पढ़ाएगा। जबकि, सरकार द्वारा चयनित बच्चों का अलॉटमेंट करने पर उनकी फीस वह स्वयं देगी। सरकार ने दो साल पहले नर्सरी, एचकेजी, एचकेजी और फर्स्ट कक्षा में एडमिशन दे दिए लेकिन पेमेंट पहली कक्षा का ही दिया जा रहा। हमने तो तीन साल बच्चे को पढ़ा दिया अब सरकार पैसे देने से मुकर रही है। प्रत्येक स्कूल में प्री-प्राइमरी के तीन साल में करीब 30 बच्चे होते है और न्यूनतम 10 हजार रुपए फीस के हिसाब से इन बच्चों का सालाना बिल 3 लाख रुपए होता है। ऐसे में प्राइवेट स्कूल तीन लाख रुपए का नुकसान कैसे भुगतेगा। हम हाईकोर्ट से केस जीत चुके हैं। कोर्ट ने सरकार को फीस पुनर्भरण करने के आदेश भी दिए हैं लेकिन सरकार ने मामले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में लगाकर लटका दिया है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में बदलाव करके अभिभावकों एवं निजी विद्यालयों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। न सरकार पैसा देना चाहती है और न ही अभिभावक। इस कारण से बच्चा निशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए की प्री-पाइमरी कक्षाओं का भुगतान करें ताकि आरटीई का लाभ बच्चों को मिल सके। <br /><strong>- रमेशचंद सांमरिया, जिला उपाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1) के अंतर्गत गैर सरकारी विद्यालयों को पुनर्भरण के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन सरकार के उच्च अधिकारियों ने इस कानून में रुकावट उत्पन्न करके निजी स्कूल एवं अभिभावकों के बीच खाई बना दी। सरकार द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान आदेश प्रक्रिया जारी करें, ताकि गरीब -असहाय व दुर्बल वर्ग के बच्चों को शिक्षा का लाभ मिल सके।   <br /><strong>- नफीस खान, जिला उपाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 15:07:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>सरकार ने अटका दिए प्राइवेट स्कूलों के 22.50 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[ईसीएस के फेर में भुगतान अटकने के साथ लेप्स हुआ पिछले वित्तीय वर्ष का बजट ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-stuck-rs-22-50-crore-of-private-schools/article-76087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/sarkar-ne-atka-diye-private-schoolo-k-22.50-crore...kota-news-27-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-आरटीई के दायरे में आने वाले कोटा जिले के 1 हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पिछले तीन साल से अपने हक के पैसों के लिए तरस रहे हैं। सरकार ने ईसीएस के चक्कर में 22.50 करोड़ का भुगतान अटका दिया। जबकि,  भुगतान के बिल ट्रैजरी से पास भी हो गए थे। मगर, वित्त विभाग जयपुर से ईसीएस नहीं होने से पैसा स्कूलों के खातों में ट्रांसफर नहीं हो पाया। ऐसे में सरकार ने ट्रैजरी से सभी बिल वापस रिवर्ट भी करवा लिए। गत वित्तीय वर्ष की समाप्ती के साथ स्कूलों को भुगतान के लिए मिला बजट भी लेप्स हो गया। अब नए वित्तीय वर्ष का बजट मिलने के बाद ही प्राइवेट स्कूलों को भुगतान हो सकेगा। सरकार की लापरवाही से निजी स्कूलों का संस्था चलाना मुश्किल हो गया। जिसका खामियाजा आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी अप्रत्यक्ष रूप से भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह है मामला </strong><br />जिले में डीओ सैकंडरी व डीओ एलीमेंट्री को मिलाकर कुल 1207 प्राइवेट स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका सत्र 2021-22 की प्रथम व द्वितीय, 2022-23 की प्रथम व द्वितीय तथा 2023-24 की प्रथम किस्त को मिलाकर कुल तीन सत्र की 22.50 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ। जबकि, शिक्षा विभाग ने गत 26 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही आरटीई पुनर्भरण राशि का बिल बनाकर ट्रैजरी पहुंचा दिए थे। ट्रेजरी से बिल पास होकर वित्त विभाग जयपुर पहुंच भी गए। जहां से ईसीएस नहीं होने से बिल अटक गए। इसके कुछ दिनों बाद ही सरकार ने पुर्नभरण राशि के सभी बिल वापस रिवर्ट करवा कर रोके रखा। इधर, 1 अप्रेल की शुरुआत के साथ के साथ पिछला वित्तीय वर्ष भी समाप्त हो गया। जिससे शिक्षा विभाग को पुर्नभरण राशि का जो बजट मिला था वो भी लैप्स हो गया। ऐसे में जिले के प्राइवेट स्कूल फिर से अधरझूल में लटक गए। अब नए वित्तीय वर्ष का बजट मिलने के बाद ही निजी स्कूलों को अपने हक का पैसा मिल पाएगा। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले बजट मिलने की संभावना न के बराबर प्रतित होती है। </p>
<p><strong>सरकार ने जानबूझकर रोका पैसा</strong><br />प्राइवेट स्कूल संचालकों का कहना है, सरकार ने जानबूझकर प्राइवेट स्कूलों के तीन साल के आरटीई की पुनर्भरण राशि अटका दी है। मार्च क्लोजिंग से पहले शिक्षा विभाग ने निदेशालय से बजट मंगवाया। जब वित्तीय वर्ष समाप्ती के पायदान पर था तो बिल बनाकर ट्रैजरी में भिजवा दिए। इसके बाद बिल पास भी हो जाते हैं और वित्त विभाग ईसीएस न करके अटका देता है। फिर, 31 मार्च के आसपास सभी बिल रिवर्ट करवा कर बिल रोके गए। इसी बीच पिछले साल का वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ हमारा बजट भी लैप्स  हो गया। अब शिक्षा विभाग बजट न होने का रोना रो रहा है। सरकार ने चालबाजी कर निजी स्कूल संचालकों के साथ कुठाराघात किया है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा गत मार्च माह में पूरी तैयारी कर शिक्षा निदेशालय से बजट मंगवाकर सभी पैंडिंग बिल बनाकर समय पर ट्रैजरी भिजवा दिए थे। जहां से सभी बिल पास भी हो गए। लेकिन, ईसीएस न होने के कारण उनका भुगतान नहीं हो सका। अब निदेशालय से जैसे ही नए वित्तीय वर्ष का बजट प्राप्त होगा वैसे ही सभी रिवर्ट बिलों को फिर से ट्रैजरी भिजवा दिए जाएंगे। <br /><strong>- केके शर्मा, जिलाध्यक्ष, शिक्षा विभाग माध्यमिक</strong></p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूल संचालकों की पीड़ा</strong><br />ईसीएस तो बहाना है, सरकार ने जानबूझकर हमारा हक का पैसा अटकाया है। वित्त विभाग के अधिकारियों की लेट लतीफी के कारण निजी विद्यालयों को आरटीई  का भुगतान नहीं हो पाया। 28 मार्च तक जो बिल बन गए थे और शिक्षा विभाग द्वारा ट्रेजरी में भिजवा दिए गए थे, उनका भी भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया। हमारे लिए स्कूल चलाना मुश्किल हो गया है। शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों का मानदेय, बिजली का बिल, बिल्डिंग किराया व स्टेशनरी सहित स्कूल संचालन की कई व्यवस्थाएं चरमरा गई। हालात यह हैं, उधार मांगकर स्कूल चलाना पड़ रहा है।<br /><strong>- जमनाशंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>निजी स्कूल संचालक अब आरटीई में एडमिशन देने से परेशान होने लगे हैं ,क्योंकि शिक्षा विभाग खुद टाइम फ्रेम की पालन नहीं करता। भुगतान नहीं होने से कर्मचारी और विद्यालय से जुड़े स्टाफ को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार निजी स्कूल संचालकों के साथ कुठाराघात कर रही है। <br /><strong>- अरुण श्रीवास्तव, अध्यक्ष, निजी स्कूल सेवा संगठन </strong></p>
<p>सरकार तीन सालों से पैसा नहीं दे रही। स्कूल चलना मुश्किल हो रहा है। शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे। कभी अधिकारी मिलते नहीं तो कभी बजट नहीं होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में निजी स्कूल संचालक करे तो क्या करें। कोई सुनने वाला नहीं है।  सरकार एक तरफ आरटीई के तहत बच्चों मुफ्त शिक्षा देने की बात करती है और दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों का भुगतान अटका कर व्यवस्थाएं प्रभावित कर रही है।<br /><strong>- हेमलता चंद्रावत, जिला उपाध्यक्ष,निजी स्कूल सेवा संघ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2024 17:04:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>1207 प्राइवेट स्कूलों का अटका 22.50 करोड़ का भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले तीन सत्रों के पैंडिंग बिलों का प्राइवेट स्कूलों को भुगतान नहीं हो सका। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/payment-of-rs-22-50-crore-stuck-for-1207-private-schools/article-74366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/1207-private-schoolo-ka-atka-22.50-crore-ka-bhugtan...kota-news-03-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-आरटीई के दायरे में आने वाले कोटा जिले के 1 हजार से अधिक निजी स्कूलों का 22 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान अटक गया है। जिससे प्रावइेट स्कूलों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जबकि, शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष मार्च समाप्ती से पहले ही सभी पेंडिंग बिल बनाकर ट्रेजरी भिजवा दिए थे। जहां से बिल पास भी हो गए लेकिन वित्त विभाग जयपुर से ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों का भुगतान अटक गया। </p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><br />कोटा जिले में डीओ सैकंडरी व डीओ एलीमेंट्री को मिलाकर कुल 1207 प्राइवेट स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका सत्र 2021-22 की प्रथम व द्वितीय, 2022-23 की प्रथम व द्वितीय तथा 2023-24 की प्रथम किस्त को मिलाकर कुल तीन सत्र की 22.50 करोड़ रुपए की आरटीई पुनर्भरण राशि का बिल शिक्षा विभाग ने गत 26 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही बनाकर ट्रैजरी पहुंचा दिए थे। ट्रेजरी से भी बिल पास होकर वित्त विभाग जयपुर पहुंच गए। जहां से ईसीएस नहीं होने से बिल अटक गए। जिसकी वजह से संबंधित निजी स्कूलों के बैंक खातों में पुनर्भरण की राशि नहीं आ सकी। जबकि, वर्ष 2022-23 का वित्तीय वर्ष भी पूरा हो चुका है। लेकिन, पिछले तीन सत्रों के पैंडिंग बिलों का प्राइवेट स्कूलों को भुगतान नहीं हो सका। </p>
<p><strong>क्या होता है ईसीएस</strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ईसीएस का मतलब इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से संस्थाएं अपने बैंक को नियमित रूप से इलेक्ट्रोनिक लेनदेन की अनुमति देने के लिए अधिकृत करती है। इसका उपयोग आमतौर पर बिलों, ऋणों, बीमा प्रमियमों और अन्य आवर्ती खर्चों के स्वचलित भुगतान के लिए किया जाता है। </p>
<p><strong>डीओ सैकंड्री के 14 व एलीमेंट्री के 8 करोड़ अटके</strong><br />डीओ सैकंडी में 548 निजी स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका पिछले सत्र 2021 से 2024 तक के साढ़े 14 करोड़ रुपए का आरटीई पुनर्भरण बिल बना है, जिसका भुगतान वित्त विभाग से ईसीएस न होने के कारण अटक गए। जबकि, डीओ एलीमेंट्री में 659 निजी स्कूल आरटीई में आते हैं, जिनकी पुनर्भरण राशि 8 करोड़ रुपए है। इनके बिलों का भुगतान भी ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों को नहीं हो पाया। </p>
<p><strong>उधार मांगकर चला रहे स्कूल</strong><br />सरकार द्वारा समय पर पिछले तीन सत्र के आरटीई की पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं किए जाने से निजी स्कूलों पर आर्थिक संकट आ गया है। शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही सभी पैंडिंग बिल बनाकर कोषालय में भिजवा दिए लेकिन, वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने से हमारा भुगतान अटक गया। जिसकी वजह से शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों, का मानदेय, बिजली का बिल, बिल्डिंग किराया व स्टेशनरी सहित स्कूल संचालन की कई व्यवस्थाएं चरमरा गई। हालात यह हैं, पिछले तीन सत्र से अधिकतर स्कूलों को आरटीई पुनर्भरण का एक पैसा नहीं मिला। जिसकी वजह से संचालकों को उधार मांगकर स्कूल चलाना पड़ रहा है। पहले ही सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ रहे आरटीई चयनित विद्यार्थियों की फीस नहीं दे रही। लेकिन, जो कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों का पैसा तो समय पर दे। सरकार की लेटलतीफी के कारण प्राइवेट स्कूल आर्थिक संकट से गुजर रहा है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>स्कूल आ रहे परेशानी में </strong><br />सत्र 2021 से 2024 तक के आरटीई पुर्नभरण की राशि अब तक निजी स्कूलों को नहीं मिली। जिससे स्कूल का संचालन करना मुश्किल हो गया है। जबकि, हर साल आरटीई अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन दे रहे हैं। नर्सरी से कक्षा आठवीं तक आरटीई में विद्यार्थियों का एडमिशन होता है। हर स्कूल के पास 150 से 200 बच्चे होते हैं। जिनकी पुर्नभरण फीस समय पर नहीं मिलने से कई तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं। यदि, सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई में चयनित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण नहीं करती है तो वर्तमान सत्र में इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दिया जाएगा। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार द्वारा आरटीई में चयनित बच्चों को किताबें खरीदने के लिए स्कूलों को 202 रुपए दिए जाते हैं। यह पैसा पुनर्भरण राशि के साथ स्कूल को प्रथम किस्त में दिया जाता है। वर्तमान सिलेबस के अनुसार 202 रुपए में एक या दो ही किताब आ सकती है। जबकि, सरकारी विद्यालयों की किताबों का बाजार मूल्य 700 से 800 रुपए के बीच होता है। ऐसे में आरटीई के विद्यार्थियों की किताबों का आर्थिक भार अभिभावकों पर पड़ता है। ऐसे में कई बार अभिभावक व स्कूल संचालक के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। छात्रहित में सरकार को पुनर्भरण राशि सहित किताबों का शुल्क भी बढ़ाकर देना चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन सत्रों की बकाया पुनर्भरण राशि जल्द से जल्द स्कूल संचालकों को उपलब्ध करवानी चाहिए। <br /><strong>- कपिल विजय, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />शिक्षा विभाग ने जारी बजट वित्तीय वर्ष 2022-23 के आरटीई के बिल 2021-22 व 2022-23 की प्रथम व द्वितीय और 2023-24 की प्रथम किस्त के भुगतान स्वीकृति आदेश गत  26 मार्च को सभी बिल बनाकर ट्रेजरी भेजवा दिए थे। वहां से बिल पास भी हो गए लेकिन जयपुर वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाए। <br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>सभी विद्यालयों की पुनर्भरण राशि के बिल समय पर ट्रैजरी भिजवा दिए गए थे। जहां से बिल पास भी हो गए। लेकिन, ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जल्द ही होने की उम्मीद है। <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 17:14:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निजी स्कूलों की मनमानी : हर साल की तरह इस साल भी फीस और किताब-कॉपियों की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेशभर के स्कूलों में एक अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई प्रारंभ होना शुरू हो गया, लेकिन पढ़ाई का दौर शुरू होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/arbitrariness-of-private-schools-like-every-year-this-year-too/article-74317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। प्रदेशभर के स्कूलों में एक अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई प्रारंभ होना शुरू हो गया, लेकिन पढ़ाई का दौर शुरू होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। अभिभावकों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ पड़ने से चिंता की लकीरें भी देखने को मिल रही है। निजी स्कूल संचालकों ने हर सत्र की तरह इस सत्र में भी ना केवल स्कूल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर दी है, बल्कि किताब, कॉपियां, ड्रेस इत्यादियों के दामों में भी भारी बढ़ोतरी की है, जिसको लेकर अभिभावकों में आक्रोश देखा जा रहा है। बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावक चिंतित भी नजर आ रहे है। अभिभावकों का कहना है कि एक तरह निजी स्कूल है जो हर फीस में बढ़ोतरी करते आ रहे है। वहीं दूसरी तरह अभिभावक है, जो निजी कम्पनियों में कार्यरत है जिसकी पिछले दो-तीन सालों में तनख्वा तक ने बढ़ोतरी नहीं हुई है। स्कूलों में बच्चे अवकाश लेते है तब भी पूरी फीस देनी पड़ती है, किंतु एक कर्मचारी एक दिन का भी अवकाश ले लेता है तो एक दिन की सैलरी कट जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फीस एक्ट का नहीं दिख रहा प्रभाव </strong><br />प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस निर्धारण को लेकर बकायदा तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने वर्ष 2016 में फीस एक्ट बनाया था, जो फरवरी 2017 में प्रभाव में आ चुका था। इसके बाद इस कानून के खिलाफ निजी स्कूल कोर्ट चले गए थे, जिसके बाद से लेकर दिसंबर 2020 तक यह कानून केवल तारीखों में उलझता रहा जिसके चलते अभिभावकों को इस कानून की जानकारी नहीं हुई। कोरोना काल के दौरान जब फीस को लेकर अभिभावक सड़कों पर उतरे तब इस एक्ट की जानकारी लगी और अभिभावक एकजुट होने लगे। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि सरकार और प्रशासन के रवैए के चलते निजी स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है और हर साल अभिभावकों पर मनमानी फीस का भार थोपा जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दो हजार से किताबें पहुंची 7 हजार से अधिक </strong><br />संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा कि आज स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि स्कूलों में जो किताबों के सेट डेढ़-दो हजार रुपए में आता था, आज उसी किताबों के सेट के 7 से 10 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। केवल यही नहीं स्कूल ड्रेस तक में मनमानी फीस वसूली की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 09:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> शहर के कई निजी स्कूल नहीं दे रहे आरटीई में बच्चों को एडमिशन </title>
                                    <description><![CDATA[मामले में मुख्य जिला शिक्षाधिकारी ने शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/many-private-schools-of-the-city-are-not-giving-admission-to-children-in-rte/article-51678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/sheher-k-kayi-niji-school-nhi-de-rhe-rte-me-bachho-ko-admission...kota-news-13-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आरटीई के तहत सत्र 2023-24 के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन नहीं देने पर कई निजी स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। अभिभावकों की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस के जरिए चेताया है। इसके बावजूद मनमानी जारी रहती है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता समाप्त का प्रस्ताव बनाकर निदेशालय बीकानेर भिजवा दिए जाएंगे। मामले में मुख्य जिला शिक्षाधिकारी ने शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। </p>
<p><strong>नहीं तो रद्द हो सकती है मान्यता </strong><br />विभाग ने संबंधित स्कूलों को गत 10 जुलाई को ई-मेल के जरिए चेतावनी नोटिस जारी किया है। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को निर्धारित अवधि में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ आरटीई एक्ट के अर्न्तगत सख्त कार्रवाई अमल में आई जाएगी। विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आरटीई मान्यता, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगालेंगे। जिनमें खामियां मिलने पर रिपोर्ट तैयार कर 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रद्द की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बीकानेर निदेशालय को भेजी जाएगी। </p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी</strong><br />कोटा जिले में करीब 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। अधिकतर प्राइवेट स्कूलों ने चयनित बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं(नर्सरी से एचकेजी) में एडमिशन दे रखे हैं लेकिन शहर के कुछ प्राइवेट स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे। हाईकोर्ट में मामला चलने व अन्य बहाने बनाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। जबकि, सरकार ने चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने के आदेश दिए हैं, इसके बावजूद प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की जारी है।  </p>
<p><strong>स्कूल यह बना रहे बहाना</strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने, कागजों में कमियां निकालकर बहाने लगाने, शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाने सहित कई शिकायतें शामिल हैं। विभाग में प्रतिदिन 100 से ज्यादा अभिभावक शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि, कुछ स्कूलों ने तो एडमिशन दे दिए हैं लेकिन कुछ स्कूल कोई न कोई बहाना लगाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। इधर, अभिभावकों का कहना है कि जैसे-तैसे बच्चे का नंबर आया तो स्कूल कोर्ट में मामला होने का हवाला देकर प्रवेश देने से मना कर रहे हैं। जबकि, 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं।  </p>
<p><strong>इन स्कूलों को दिए नोटिस</strong><br />- बंसल पब्लिक स्कूल श्रीनाथपुरम<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सैकंडरी स्कूल  दादाबाड़ी मेन रोड<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सीनियर सैकंडरी स्कूल तलवंड़ी<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सी. सै. स्कूल विज्ञान नगर<br />- सेन्ट्रल चिल्ड्रन एकेडमी सैकंडरी स्कूल स्टेशन रोड<br />- सेन्ट्रल पब्लिक सी. सै. स्कूल माला रोड स्टेशन<br />- सेन्ट्रल पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल विज्ञान नगर<br />- ग्लोबल पब्लिक स्कूल इंदिरा विहार<br /><strong>- सेंट जॉन्स सीनियर सैकंडरी स्कूल बूंदी रोेड</strong></p>
<p><strong>स्कूल संचालकों के बयानों में अंतर </strong><br />शिक्षा विभाग कोर्ट में केस हार चुका है, सत्र 2022-23 के आरटीई के जितने एडमिशन हुए वो सब खारिज हो चुके हैं। हमने कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। जब सरकार इलेक्शन मोड में आई तो स्कूलों को नर्सरी से एडमिशन देने को बाउंड किया। जबकि, पुर्नभरण राशि (फीस) बच्चे का पहली कक्षा में आने के बाद किया जाएगा। यानी, तीन साल तक सरकार की ओर से कोई फीस नहीं दी जाएगी। ऐसे में नर्सरी से एचकेजी तक बिना फीस के कैसे पढ़ाएं। हम नियमानुसार पहली कक्षा से बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश दे रहे हैं। सरकार नर्सरी से एचकेजी तक का पैसा दे तो हम प्रवेश देंगे। हाईकोर्ट में केस लगा हुआ है। जिसमें कोटा के करीब 10 स्कूल शामिल हैं।  <br /><strong>- प्रतीक अग्रवाल, डायरेक्टर सेंट्रल अकेडमिक स्कूल ग्रुप</strong></p>
<p>इस संबंध  में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, प्राचार्य से बात करें। मैं कुछ नहीं कहना चाहता<br /><strong>- ओम माहेश्वरी, डायरेक्टर, ग्लोबल पब्लिक स्कूल इंद्राविहार</strong></p>
<p>सत्र 2023-24 के आरटीई बच्चों को नियमानुसार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन दे रहे हैं। हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। वहीं, शिक्षा विभाग से मिले नोटिस का भी जवाब दे चुके हैं। <br /><strong>- राकेश शर्मा, डायरेक्टर, सेंटजॉन सीनियर सैकंडरी स्कूल बूंदी रोड</strong></p>
<p>चयनित बच्चे को एसआर नम्बर अलॉट हो जाता है और दस्तावेज सही है तो विद्यालय को एडमिशन देना ही होगा। विद्यालय द्वारा प्रवेश देने में आनाकानी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। जिसे शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया और संबंधित प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी कर चेताया है। <br /><strong>- ध्वज शर्मा, आरटीई प्रकोष्ठ प्रभारी, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय कोटा</strong></p>
<p>आरटीई के तहत हम सभी बच्चों को एडमिशन दे रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक हमें कोई नोटिस नहीं मिला है। हमारी किसी से कोई डिमांड नहीं है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आॅफिस में सम्पर्क कर सकते हैं। <br /><strong>- अनुराग, डायरेक्टर, बंसल पब्लिक स्कूल श्रीनाथपुरम </strong></p>
<p><strong>जिला शिक्षाधिकारी ने नहीं उठाया फोन</strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने जिला शिक्षाधिकारी प्रदीप चौधरी को कई बार फोन किए लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। इसके बाद मैसेज व वाट्सएप के जरिए भी सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने रिप्लाई नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 15:36:08 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीई :  निजी स्कूल निरस्त नहीं कर सकेंगे आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने व्यवस्थाओं में बदलाव कर पोर्टल पर रिजेक्शन का आॅप्शन ही हटा दिया है। ऐसे में अब निजी स्कूल किसी भी आवेदन को निरस्त नहीं कर सकेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rte--private-schools-will-not-be-able-to-cancel-the-application/article-41585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/rte--niji-school-nirast-nahi-kar-sakege-avedan..kota-news.3.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम में शिक्षा विभाग ने बड़ा बदलाव करते हुए अभिभावकों को राहत दी है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसते हुए उनसे आवेदन फॉर्म रिजेक्ट करने का अधिकार छीन लिया है। इससे निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा। दरअसल, निजी स्कूल अब आरटीई में मिले आवेदन को सीधे रिजेक्ट नहीं कर पाएंगे, सिर्फ आवेदन को लेकर आॅब्जेक्शन लगा सकते हैं। उस आपत्ति की जांच शिक्षा विभाग कार्यालय द्वारा की जाएगी। आवेदन फॉर्म में जो भी खामियां व कमियां होगी, वो कार्यालय द्वारा पूरी की जाएगी। हालांकि, फॉर्म में आवश्यक दस्तावेज पूरे मापदंड पर नही हैं तो आवेदन अस्विकार करने का अधिकार भी कार्यालय को होगा। </p>
<p><strong>इसलिए छीना फॉर्म रिजेक्ट करने का अधिकार</strong><br />प्राइवेट स्कूलों द्वारा अब तक पोर्टल नहीं चलने, सर्वर डाउन होने, दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने सहित कई बहाने लगाकर आरटीई आवेदनों को निरस्त कर देते थे। पिछली बार भी शिक्षा विभाग को अभिभावकों द्वारा इस तरह की कई शिकायते मिली थी। इस पर सरकार ने व्यवस्थाओं में बदलाव कर पोर्टल पर रिजेक्शन का आॅप्शन ही हटा दिया है। ऐसे में अब निजी स्कूल किसी भी आवेदन को निरस्त नहीं कर सकेंगे। </p>
<p><strong>10 अप्रेल तक कर सकते हैं आवेदन </strong><br />आरटीई के तहत पहली बार प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से कक्षा एक तक एडमिशन दिए जाएंगे। शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए आवेदन प्रक्रिया 29 मार्च से शुरू हो चुकी है। अभिभावक अंतिम तिथि 10 अप्रेल तक बच्चों के एडमिशन के लिए आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभिभावकों की परेशानियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्री-प्राइमरी के आवेदन भी प्रथम कक्षा के साथ ही कराने का फैसला लिया है। सरकार द्वारा 12 अप्रेल को प्राथमिकता क्रम यानी लॉटरी जारी कर स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। इसी दिन अभिभावकों को संबंधित स्कूलों में रिपोर्टिंग करनी होगी। </p>
<p><strong>आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी </strong><br />आरटीई के तहत नर्सरी से कक्षा एक तक 3 से 7 वर्ष तक के बच्चे आवेदन के पात्र होंगे। अभ्यर्थियों की आयु की गणना 31 मार्च 2023 से होगी। अभिभावकों को आवेदन के दौरान तीन तरह के दस्तावेज आॅनलाइन अपलोड करने होंगे। </p>
<p><strong>इस बार नर्सरी से पहली कक्षा तक एडमिशन </strong><br />शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पहले बच्चों को कक्षा एक से ही प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन मिलता था लेकिन इस बार सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए नर्सरी से ही प्रवेश की व्यवस्था लागू की है। वहीं, अभिभावक अब आवेदन के दौरान एक साथ पांच स्कूलों का चयन कर सकते हैं। पहले अभिभावक मनपसंद स्कूल का विकल्प भरते थे। लेकिन इस बार उन स्कूलों का वरीयता क्रम तय करना होगा। साथ ही वार्ड सत्यापन का दस्तावेज भी आॅनलाइन अपलोड करना होगा।</p>
<p><strong>1104 स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। जहां प्री-प्राइमरी से कक्षा एक तक एडमिशन प्रक्रिया जारी है। 12 अप्रेल को आॅनलाइन लॉटरी के द्वारा स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद इसी दिन से 20 अप्रेल तक संबंधित विद्यालयों में अभिभावकों को रिपोटिंग करनी होगी। प्रवेश से संबंधित किसी भी तरह की कोई समस्या होने पर अभिभावक शिक्षा विभाग में सम्पर्क कर सकते हैं। </p>
<p><strong>एडमिशन नहीं दिया तो होगी कार्रवाई </strong><br />प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एडमिशन नहीं दिए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बच्चों को एसआर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद प्रवेश से वंचित रखे जाने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। जिसमें आरोप सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को सात दिन में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रदद की कार्रवाई की जा सकती है।  </p>
<p><strong>दस्तावेजों के साथ परिष्ठ-5 फॉर्म जरूर अपलोड करें</strong><br />आरटीई में सत्र 2023-24 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अभिभावक अंतिम तिथि 10 अप्रेल तक आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभिभावकों से आग्रह है कि आवेदन के दौरान एड्रेस पूफ्र के लिए जो भी आवेदन लगाएं उसके साथ परिष्ठ-5 फॉर्म भरकर जरूर अपलोड करें। इस फॉर्म में वार्ड पार्षद और राजपत्रिक अधिकारी के हस्ताक्षर करवाकर वेरिफाई करवाना जरूरी है। नहीं, तो स्कूल आवंटन के बाद प्राइवेट स्कूलों द्वारा आवेदन में आक्षेप की समस्या आ सकती है। इसके अलावा, लॉटरी निकलने के बाद अभिभावक अपने आवेदन के स्टेटस पर बराबर निगरानी रखें। किसी तरह की दिक्कत आने पर शिक्षा विभाग पर सम्पर्क करें।  <br /><strong>- ध्वज शर्मा, आरटीई प्रकोष्ठ प्रभारी, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>सख्त कार्रवाई की जाएगी</strong><br />राज्य सरकार द्वारा जारी टाइम फ्रेम की पालना सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिए हैं। इसमें लापरवाही बरतने पर संबंधित स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। <br /><strong>- प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी कोटा </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक </strong><br />आरटीई के तहत एडमिशन के दौरान निजी स्कूल संचालक मनमानी करते हैं। दस्तावेजों में कोई न कोई खामियां निकालकर आवेदन कर देते थे। सरकार ने स्कूल संचालकों की मनमानी पर नकेल कसते हुए आवेदन निरस्त करने का अधिकार छीनकर शिक्षा विभाग को दे दिए जाने से अभिभावकों को राहत मिली है। अब विभाग की निगरानी से व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार होगा। <br /><strong>-राम गुर्जर, केशवपुरा निवासी</strong></p>
<p>पिछली बार निजी स्कूलों द्वारा दस्तावेजों में कोई न कोई कमी निकाल बहाना लगाकर अभिभावकों को टरका देते थे। अब स्कूलों के पोर्टल पर आवेदन निरस्त करने का आॅप्शन हटा दिए जाने से सरकार ने अभिभावकों के हित में बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा अधिकारियों द्वारा समस्याओं का तुरंत समाधान  करवाया जा रहा है। <br /><strong>- मुरली लाल, बोरखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Apr 2023 14:56:37 +0530</pubDate>
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                <title>एडमिशन नहीं दिया तो रद्द होगी स्कूल की मान्यता</title>
                                    <description><![CDATA[प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एसआर नम्बर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद एडमिशन नहीं दिया जाता है तो संबंधित विद्यालयों को शिक्षा विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को सात दिन में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में आई जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-admission-is-not-given--the-recognition-of-the-school-will-be-canceled/article-39563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/admission-nahi-diya-to-radd-hogi-school-ki-manyata..kota-news..11.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । आरटीई के तहत सत्र 2022-23 के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन नहीं देने पर निजी स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ जाएगी। अभिभावकों की लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। विभाग अब निजी स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी में है। स्कूल प्रबंधन को नोटिस के जरिए चेताया जाएगा। इसके बावजूद मनमानी जारी रहती है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता समाप्ति का प्रस्ताव बनाकर निदेशालय बीकानेर भिजवा दिए जाएंगे। दरअसल, गुरुवार को जिला कलक्ट्रेट में आयोजित वर्चुअल बैठक में शिक्षा निदेशक ने इस मामले में शिक्षा अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p><strong>एडमिशन नहीं दिया तो रद्द होगी मान्यता </strong><br />जिला कलक्ट्रेट में गत गुरुवार को शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी शिक्षा अधिकारियों की वर्चुअल बैठक हुई थी। जिसमें अधिकारियों ने आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को निजी स्कूलों द्वारा एडमिशन न देने का मामला उठाया था। जिस पर निदेशक गौरव अग्रवाल ने सभी जिला शिक्षाधिकारियों को पाबंद करते हुए कहा, मान्यता आपके द्वारा जारी की जाती है। ऐसे में अपने स्तर पर निर्णय लेकर कमेटी गठित कर मामले की जांच करवाएं। यदि ऐसा प्रकरण सामने आता है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता समाप्ति का प्रस्ताव बनाकर निदेशालय को तुरंत भिजवाएं। </p>
<p><strong>स्कूल और विभाग के बीच पिस रहा अभिभावक</strong><br />आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया भले ही पूरी हो गई है। सरकार ने लॉटरी निकालकर बच्चों को स्कूल भी आवंटित कर दिए हैं। इसके बावजूद बच्चों को एडमिशन दिलाना अभिभावकों के लिए चुनौती बनी हुई है। अभिभावक जैसे ही रिपोटिंग के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं तो उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर टाला जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि पहले आवेदन के लिए मशक्कत करनी पड़ी। जैसे-तैसे बच्चे का नंबर आया तो स्कूल प्रवेश देने से मुकर रहे हैं। जबकि, आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं। वरियता के बाद भी बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे।  </p>
<p><strong>इस तरह होगी कार्रवाई </strong><br />प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एसआर नम्बर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद एडमिशन नहीं दिया जाता है तो संबंधित विद्यालयों को शिक्षा विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को सात दिन में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में आई जाएगी। इसके अलावा विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आरटीई मान्यता, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगाले। जिनमें खामियां मिलने पर रिपोर्ट तैयार कर 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रद्द की कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>जिले में 1104 स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। कुछ निजी स्कूल चयनित बच्चों को एडमिशन दे रहे हैं लेकिन अधिकतर स्कूल मनमानी कर रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, निजी स्कूल संघ सरकार के आदेश के खिलाफ कोर्ट की शरण में पहुंच गया। जिससे आरटीई बच्चों का प्रवेश अटक गया और वरियता होने के बावजूद एडमिशन नहीं दिया जा रहा।</p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रही 100 से ज्यादा शिकायतें </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने, कागजों में कमियां निकालकर बहाने लगाने, शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाने सहित कई शिकायतें शामिल हैं। विभाग में प्रतिदिन 100 से ज्यादा अभिभावक निजी स्कूलों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि, कुछ स्कूलों ने तो एडमिशन दे दिए हैं लेकिन अधिकतर स्कूल कोई न कोई बहाना लगाकर अभिभावकों को टरका रहे हैं। </p>
<p><strong>क्या है विवाद की जड़</strong><br />सत्र 2022-23 में निजी स्कूलों में नर्सरी से एचकेजी तक आरटीई के तहत बच्चों को एडमिशन देने की मांग को लेकर अभिभावकों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को आदेश जारी किया कि सत्र 2022-23 में सभी प्रवेशित बच्चों को आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन दिया जाए।  इस पर सरकार की सहमति से शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को बीच सत्र से ही आरटीई के तहत एडमिशन देने के निर्देश जारी कर दिए। लेकिन, सरकार द्वारा फीस की पुनर्भरण राशि बच्चे के कक्षा एक में आने के बाद से ही देने की बात कहीं गई। इस पर प्राइवेट स्कूल संचालकों ने सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। </p>
<p><strong>पुनर्भरण की स्थिति स्पष्ट करें सरकार</strong><br />सरकार का आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम एक्ट की मूल भावना के विपरीत है। प्राइवेट स्कूल बच्चों को एडमिशन देना चाहते हैं। लेकिन, इससे पहले सरकार को फीस पुनर्भरण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। नर्सरी, एलकेजी व एचकेजी तक बच्चे की फीस न सरकार वहन करना चाहती है और न ही अभिभावक। ऐसी स्थिति में स्कूल किस मद से तीन साल का खर्चा वहन करेगा। अधिकारी द्वारा मान्यता रद्द करने के आदेश जारी कर धमका रहे हैं और अभिभावक व स्कूलों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर रहे हैं। सरकार के आधारहीन आदेशों के खिलाफ स्कूल क्रांति संघ जयपुर की ओर से हाईकोर्ट में पुर्नविचार याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 17 फरवरी को है। <br /><strong>-जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ कोटा</strong></p>
<p>चयनित बच्चे को एसआर नम्बर एलॉट हो जाता है और दस्तावेज सही है तो विद्यालय को एडमिशन देना ही होगा। यदि, विद्यालय द्वारा किसी भी तरह की आनाकानी या राशि वसूलने की कोशिश की जाती है तो अभिभावक तुरंत शिक्षा विभाग को इसकी शिकायत दें। संबंधित स्कूल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद विद्यालय नियमों का पालन नहीं करते है तो मान्यता समाप्ति का प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय भिजवा दिया जाएगा। जहां से संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द भी हो सकती है। <br /><strong> -ध्वज शर्मा, आरटीई प्रकोष्ठ प्रभारी, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Mar 2023 15:42:19 +0530</pubDate>
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