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                <title>mangoes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आम का आनंद लीजिए, लेकिन सतर्क रहकर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में गर्मियों का मतलब केवल चिलचिलाती धूप नहीं होता, बल्कि यह वह समय होता है, जब बाजार आमों से भर जाते हैं और घरों में आम से जुड़ी तमाम रेसिपियां बनने लगती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/enjoy-mangoes-but-be-cautious/article-113402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>भारत में गर्मियों का मतलब केवल चिलचिलाती धूप नहीं होता, बल्कि यह वह समय होता है, जब बाजार आमों से भर जाते हैं और घरों में आम से जुड़ी तमाम रेसिपियां बनने लगती हैं। आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग साल भर इसके मौसम का इंतजार करते हैं, लेकिन बढ़ती मांग ने आम के उत्पादन और आपूर्ति को लेकर एक गंभीर समस्या को जन्म दिया है, जिससे न केवल उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। यह समस्या है रसायनों की मदद से आम पकाना, विशेष रूप से कैल्शियम कार्बाइड जैसे घातक रसायन का उपयोग करना। कैल्शियम कार्बाइड एक औद्योगिक रसायन है, जिसका मूल उपयोग वेल्डिंग और एसिटिलीन गैस बनाने में होता है। लेकिन कई फल व्यापारी इसका उपयोग फलों को जल्दी पकाने के लिए करते हैं, खासतौर से आम के मामले में। बाजार में समय पर आम पहुंचाने और अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में बहुत से व्यापारी प्राकृतिक पकने की प्रक्रिया का इंतजार नहीं करते और इन रसायनों का सहारा लेते हैं। </p>
<p>जब कैल्शियम कार्बाइड को नमी के संपर्क में लाया जाता है, तो यह एसिटिलीन गैस उत्पन्न करता है, जो प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले इथाइलीन हार्मोन की तरह काम करता है। यह गैस आम को तेजी से पकाती है और दो दिन के भीतर फल को पीला कर देती है। लेकिन यही प्रक्रिया स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है। एसिटिलीन गैस के साथ कैल्शियम कार्बाइड से आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे हानिकारक तत्व भी निकलते हैं, जो फल में अवशिष्ट रूप से रह सकते हैं। इनसे मनुष्य के शरीर में तरह-तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे गले में खराश, जलन, चक्कर आना, प्यास लगना, उल्टी आना, त्वचा में अल्सर और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। यही कारण है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग पर पूर्णत प्रतिबंध लगा रखा है। </p>
<p>बावजूद इसके, इसका गैरकानूनी उपयोग आज भी जारी है। समय-समय पर छापेमारी कर इस तरह के आमों की जब्ती की खबरें सामने आती रहती हैं। मई 2024 में कोयंबटूर में 575 किलो आम जब्त किए गए थे, जिन्हें अवैध रूप से कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस रसायन का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है और जागरूकता की कमी के कारण उपभोक्ता अनजाने में स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि उपभोक्ता स्वयं सतर्क रहें और कुछ आसान तरीकों से पहचान कर सकें कि उनके द्वारा खरीदा गया आम प्राकृतिक ढंग से पका है या रसायन के जरिए। सबसे आसान तरीका है पानी परीक्षण। एक बाल्टी में आम डालें, अगर आम डूब जाए तो समझिए कि वह प्राकृतिक रूप से पका हुआ है, लेकिन अगर वह तैरे तो उसके रसायन से पकने की संभावना अधिक है। </p>
<p>दूसरा तरीका है उसका रंग और बनावट देखना। प्राकृतिक रूप से पके आमों का रंग एक समान पीला होता है, जबकि रसायन से पके आमों में कभी बहुत पीला, कभी हरा या काले धब्बे दिखाई देते हैं। उनके ऊपर अक्सर अनियमित रंगों के चकत्ते होते हैं। ऐसे आम को छूने से भी अंतर पता चलता है, प्राकृतिक आम थोड़ा ठोस होगा जबकि रसायन से पका आम अत्यधिक नरम और बेडौल हो सकता है। स्वाद के आधार पर भी अंतर महसूस किया जा सकता है। अगर आम खाने के तुरंत बाद गले में जलन हो या जीभ पर तीखापन महसूस हो तो यह संकेत हो सकता है कि उसमें हानिकारक रसायन मौजूद हैं। हालांकि यह तरीका वैज्ञानिक नहीं है, परंतु अनुभव के आधार पर कई बार सटीक साबित होता है। इन तमाम खतरों को देखते हुए उपभोक्ताओं को सजग रहना चाहिए। </p>
<p>बाजार से आम खरीदते समय हमेशा ध्यान दें कि वह किस स्रोत से आ रहे हैं। जब भी संभव हो, स्थानीय किसानों से सीधे आम खरीदने का प्रयास करें, जो बिना रसायनों के आम उगाते हैं। फल को अच्छी तरह धोकर और कुछ समय पानी में भिगोकर ही खाएं ताकि उसकी सतह पर लगे किसी भी अवशिष्ट रसायन को हटाया जा सके। इसके साथ ही सरकार और प्रशासन को भी इस पर कड़ी निगरानी बनाए रखने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियमित जांच करनी चाहिए, जिससे बाजार में इस तरह के अवैध आम न पहुंच सकें। आम जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वह इस विषय को गंभीरता से लें और स्वस्थ फलों का चयन करें। आज जब स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, तब यह और भी जरूरी हो जाता है कि हम केवल स्वाद नहीं बल्कि सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। आम का आनंद लीजिए, लेकिन सतर्क रहकर, ताकि यह मीठा फल आपके स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचाए।</p>
<p><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 May 2025 11:45:12 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर प्रदेश का दशहरी और लंगड़ा आम बाजार में आया</title>
                                    <description><![CDATA[ आवक की धीमी गति ने भाव बढ़ा दिए हैं। दशहरी और लंगड़ा उतर प्रदेश से बादाम कर्नाटक से केसर गुजरात से आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dussehri-and-langra-mangoes-of-uttar-pradesh-arrived-in-the/article-81561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/22.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर प्रदेश का दशहरी और लंगड़ा आम की बाजार में भरपूर आवक हो रही है। मुहाना मंडी में रोजाना बीस से चालीस ट्रक की आवक हो रही है। केसर, बादाम, सफेदा की आवक कमजोर हो गई है। चौसा बरसात में आएगा। आवक की धीमी गति ने भाव बढ़ा दिए हैं। दशहरी और लंगड़ा उतर प्रदेश से बादाम कर्नाटक से केसर गुजरात से आ रहा है।</p>
<p>पिछले सीजन से आम बीस से तीस फीसदी महंगा बिक रहा है। चांदपोल फल मंडी में कारोबारी शेर खान ने बताया कि माल भाड़ा बड़ने और भीषण गर्मी से फलों के दामों में वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>फलों के भाव</strong><br />आम बादाम 80 से 120<br />आम दशहरी 80 से 120<br />आम केसर 160 से 200<br />आम लंगड़ा 160 से 180</p>
<p>भाव प्रति किलो की दर से है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 16:36:18 +0530</pubDate>
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                <title>हर साल सीजन में 18,000 टन आम खा जाते हैं कोटा वासी</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-residents-eat-18-000-tonnes-of-mangoes-every-year-in-season/article-53302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/630-400-size-की-कॉपी.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आम फलों का ही नहीं कोटा वालों के दिल का भी राजा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर सीजन में प्रतिदिन में 100 से 125 टन आम की बिक्री यहां होती है। कोटा की प्रमुख फल-सब्जी मंडी में पूरे सीजन में 9 से 10 वैरायटी के आम आते हैं। अलग-अलग समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों की मशहूर किस्मों की आवक यहां होती है, जो 50 रुपए से 250 रुपए प्रति किलो तक के भाव में बिकते हैं। कोटा में फरवरी माह से आम आना शुरू हो जाते हैं और जुलाई माह तक इनकी आवक जारी रहती है। वहीं अप्रैल से जून माह तक सीजन में जमकर आम खाए जाते हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 100 टन से अधिक बिक्री</strong><br />जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है। ऐसे में पूरे सीजन में 18000 टन आम लोग खा जाते हैं। कोटा में सर्वाधिक बिक्री बादाम, तोतापुरी और हापुस की होती है। हमारे यहां आम की आवक कर्नाटक, महाराष्टÑ, केरल,आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु व उत्तरप्रदेश से होती है।</p>
<p><strong>आम की लजीज डिशेज की भी डिमांड</strong><br />कोटा में आम से बनी डिशेज की काफी डिमांड बढ़ी है।  विभिन्न आयोजनों में मैंगो ज्यूस, मैंगो आइसक्रीम, मैंगो श्री, मैंगो केसर लस्सी, मैंगो आॅफर और मैंगो शेक को काफी पसंद किया जा रहा है। अब तो वैवाहिक आयोजनों में आम की डिशेज को शामिल किया जाने लगा है।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा इनकी होती है बिक्री</strong><br />फल व्यवसायी बताते हैं कि कोटा संभाग में सबसे ज्यादा बादाम, तोतापुरी और हापुस आमों की बिक्री होती है। सीजन में इन किस्मों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा बारिश के मौसम यानि जुलाई माह में लंगड़ा, दशहरी व चौसा किस्म के आम आते हैं।</p>
<p><strong>देशी आम के शौकीन भी कम नहीं</strong><br />कोटा के लोग देसी आम को भी काफी पसंद करते हैं। यहां की फल मंडी में बारां, झालावाड़ और कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न किस्म के देसी आम बिकने के लिए आते हैं। देसी आम भी अपने स्वाद के लिए काफी मशहूर हैं और सीजन के दौरान इनकी भी काफी बिक्री होती है।</p>
<p><strong>कहां से आता है कौनसा आम</strong><br />-हापुस: फरवरी से जून तक महाराष्टÑ व कर्नाटक से<br />-केसर: मार्च से जून तक गुजरात से<br />-तोतापुरी: फरवरी से जुलाई तक कर्नाटक व तमिलनाडु से<br />-सिंदुरी: फरवरी से मई तक कर्नाटक से<br />-नीलम: फरवरी से मई तक कर्नाटक व आंध्रप्रदेश से <br />-बादाम: फरवरी से मई तक कर्नाटक, केरल व आंध्रप्रदेश से<br />-लंगड़ा, दशहरी व चोसा: जून से अगस्त तक उत्तरप्रदेश से </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आम का स्वाद काफी पसंद आता हैं। इस कारण सीजन के दौरान आम की पेटी खरीद कर लाता था। उसका संयुक्त परिवार हैं। ऐसे में आम की ज्यादा जरूरत होती थी। बड़ों से लेकर बच्चों तक इसके स्वाद के दीवाने रहते हैं। इसलिए पूरे सीजन में वह आम खरीदकर लाता है।<br /><strong>- मुकेश गर्ग, ग्राहक</strong></p>
<p>छह माह के सीजन में अप्रैल से जुलाई तक प्रतिदिन कोटा संभाग में 100 से 125 टन आम की खपत होती है। इस दौरान त्यौहार और शादियां होने के कारण आम की बिक्री और बढ़ जाती है। कोटा की फल मंडी में देश के विभिन्न राज्यों से आम की आवक होती है। यहां की मंडी से माल कोटा संभाग के अन्य जिलों में भेजा जाता है। सीजन में आम की हजारों टनों की बिक्री होती है। <br /><strong>- शब्बीर वारसी, फल व्यवसायी, फल सब्जीमंडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 13:28:13 +0530</pubDate>
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                <title>शरारत या साजिश: एटीएस के सामने पड़े संदिग्ध बैग से मचा हड़कंप, मिले कच्चे आम</title>
                                    <description><![CDATA[ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बम स्क्वाड की मदद से जांच की तो बैग में कच्चे आम निकले। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--mischief-or-conspiracy--suspicious-bag-lying-in-front-of-ats-created-a-stir--raw-mangoes-found/article-9934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/amm.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आदर्श नगर थाना इलाके में घाटगेट के पास आतंकवादी निरोधक दस्ता (एटीएस) कार्यालय के सामने संदिग्ध काले रंग का बैग मिलने से हड़कंप मच गया। करीब दो घंटे तक जब बैग को लेने कोई नहीं आया तो एटीएस कार्यालय के कंट्रोल रूम से आदर्श नगर थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बम स्क्वाड की मदद से जांच की तो बैग में कच्चे आम निकले। तब जाकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। अब पुलिस बैग छोड़ने वाले की तलाश में जुट गई है। बताया गया कि यह या तो किसी की शरारत है या फिर किसी साजिश के पहले की चैकिंग है। थानाप्रभारी विष्णु खत्री ने बताया कि सोमवार दोपहर 12:40 बजे एटीएस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि एटीएस कार्यालय के सामने दो घंटे से एक काला बैग लावारिस हालत में पड़ा है। सूचना पर पुलिस टीम पहुंची। इसी दौरान बम स्क्वाड, डॉग स्क्वाड, सिविल डिफेंस, फायर बिग्रेड, एफएसएल टीमें भी पहुंच गईं। चैकिंग के बाद बैग में कच्चे आम निकले। <br /><br />दुकानें बंद कर यातायात डायवर्ट<br />खत्री ने बताया मौके पर पहुंचते ही आसपास की दुकानें बंद करवा दी गर्इं। यातायात को डायवर्ट कर अन्य रास्तों से निकाला गया। बैग को चैक करने तक की गई प्रक्रिया में करीब पौने तीन घंटे लग गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 14:41:03 +0530</pubDate>
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