<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/water-flow/tag-20976" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>water flow - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/20976/rss</link>
                <description>water flow RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक : </strong>उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।</p>
<p><strong>केस दो:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी</strong><br />पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।</p>
<p><strong>अभी भी नहा रहे नहर पर</strong><br />धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत</strong><br />एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।<br /><strong>- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:46:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/200-x-60-px%29-%283%296.png"                         length="1428729"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - पापड़ी माइनर से हटाई मिट्टी, विभाग ने मशीन भेजकर किया अवरोध दूर जलप्रवाह सुचारू</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नवज्योति ने खबर प्रकाशित कर किसानों की पीड़ा शासन-प्रशासन तक पहुँचायी थी। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---mud-removed-from-papadi-minor--department-dispatches-machinery-to-clear-obstruction--streamlines-water-flow/article-133915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)11.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा।  क्षेत्र की पापड़ी माइनर में जल प्रवाह शुरू होने के बावजूद जमा मिट्टी के कारण अवरुद्ध हो रहे बहाव को विभाग ने गुरुवार को हटाकर किसानों को राहत दी। माइनर के टेल क्षेत्र में पानी न पहुँचने से किसान चिंतित थे। गौरतलब है कि नवज्योति में बुधवार को नहर में भरी मिट्टी, जलप्रवाह बाधित शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद किसानों की पीड़ा शासन-प्रशासन तक पहुँची। खबर के प्रभाव में आते हुए विभाग ने गुरुवार को मशीन भेजकर मेगा हाईवे किनारे पापड़ी रेलवे ओवरब्रिज के पास नहर में जमा मिट्टी को हटाया और जल प्रवाह सुचारू किया।</p>
<p>जिला परिषद सदस्य के.सी. वर्मा, किसान रामावतार मीणा एवं किसान नेता राकेश मीणा ने कहा कि पापड़ी टेल क्षेत्र के किसानों को लंबे समय से पानी नहीं मिल पा रहा था। खबर के प्रकाशित होने से समस्या उजागर हुई और विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। ग्रामीणों ने जनसरोकार की इस पहल के लिए नवज्योति का आभार व्यक्त किया।</p>
<p>पापड़ी माइनर में जमा मिट्टी को हटाकर जलप्रवाह सुचारू कर दिया गया है। सतत पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि टेल क्षेत्र के किसानों को समय पर एवं पर्याप्त नहरी पानी मिल सके।<br /><strong>- विष्णु सेन, कनिष्ठ अभियंता, सीएडी विभाग। </strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---mud-removed-from-papadi-minor--department-dispatches-machinery-to-clear-obstruction--streamlines-water-flow/article-133915</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---mud-removed-from-papadi-minor--department-dispatches-machinery-to-clear-obstruction--streamlines-water-flow/article-133915</guid>
                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:20:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/11-%28700-x-400-px%2911.png"                         length="487396"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पापड़ी माइनर में भरी मिट्टी से अटका जल प्रवाह टेल क्षेत्र के किसानों में बढ़ी चिंता</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नहरों में जल प्रवाह शुरू,  खेतों तक पानी ले जाने वाली नालियों का निर्माण अधूरा ।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/flow-obstructed-by-mud-in-the-papadi-minor--raising-concerns-among-tail-end-farmers/article-133668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/777.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र में चंबल नहरों का जल प्रवाह शुरू कर दिया गया है, लेकिन प्रशासन ने नहरी तंत्र की मरम्मत और सफाई की स्थिति की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में जल प्रवाह आरंभ कर दिया। पाटन ब्रांच की पापड़ी माइनर में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां वर्षों से जमी मिट्टी और अवैध रास्ते के कारण पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जानकारी के अनुसार पापड़ी रेल्वे फाटक के समीप मेगा हाइवे किनारे स्थित इस माइनर में किसानों द्वारा खेतों में हंकाई और जुताई के लिए ट्रैक्टर ले जाने से बीचों-बीच रास्ता बन गया। लगातार आवाजाही से माइनर में मिट्टी भर गई और जल मार्ग अवरुद्ध हो गया। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने बिना आवश्यक मरम्मत कराए ही जल प्रवाह शुरू कर दिया, जिससे पानी शुरूआती हिस्से में ही रुक गया।</p>
<p>किसान रामावतार मीणा ने बताया कि जल प्रवाह शुरू होने से पहले कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया था। अधिकारी मौके पर पहुंचे भी, लेकिन नहर की सफाई और मरम्मत का कार्य नहीं करवाया गया। किसानों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचना मुश्किल हो जाएगा और आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई संकट गहरा सकता है। किसानों ने मांग की है कि पापड़ी माइनर की तुरंत सफाई कर जल प्रवाह को सुचारु बनाया जाए, ताकि खेतों तक पानी का बराबर वितरण सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>किसानों ने नहर की स्थिति से अवगत करवाया है विभाग के उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत करवा कर तत्काल मरम्मत के लिये कहा है<br /><strong> -के सी वर्मा जिला परिषद सदस्य</strong></p>
<p><strong>जाड़ला माइनर के धोरों पर नालियां नहीं, सरसों-गेहूं के पलेवे पर संकट</strong><br />पाटन ब्रांच की जाड़ला माइनर में चंबल नहर प्रणाली का जल प्रवाह शुरू हो गया है, लेकिन नहर पक्की होने के बावजूद धोरों पर नालियां नहीं रखने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। वर्षों पुरानी मांग के बाद माइनर का पक्का निर्माण तो पूरा कर दिया गया, किन्तु खेतों तक पानी ले जाने वाली नालियों का निर्माण अधूरा ही छोड़ दिया गया। ऐसे में सरसों और गेहूं के पलेवे का समय करीब आते ही किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। जिला परिषद सदस्य के.सी. वर्मा, माइनर अध्यक्ष कमला शंकर मीणा, किसान रामावतार मीणा, टिन्नू मीणा और कमलेश मीणा सहित अन्य किसानों ने बताया कि धान की फसल के दौरान भी नालियां नहीं होने से उन्हें डीजल पम्पों से पलेवा करना पड़ा था, जिससे हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा। अब एक बार फिर उसी स्थिति की पुनरावृत्ति हो रही है।</p>
<p>किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। ठेकेदार की मनमर्जी और कार्य में लापरवाही के कारण नालियों का निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है, जिससे आगामी फसल सीजन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।</p>
<p><strong>किसान का पक्ष</strong><br /> नालियां नहीं होने से खेतों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। नहर निर्माण के साथ ही नालियां रखनी चाहिए थीं, लेकिन लगातार अवगत कराने के बावजूद अब तक कार्य नहीं हुआ है, जबकि फसलों में पलेवे का समय आ चुका है।<br /><strong> - रामावतार मीणा, किसान। </strong></p>
<p><strong>अधिकारी का पक्ष</strong><br /> टेल क्षेत्र में नहर का पक्का कार्य पूरा कर दिया गया है। नालियां रखने में ठेकेदार द्वारा देरी की गई है। उसे तीन दिन में आवश्यक स्थानों पर नालियां रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कार्य समय पर नहीं हुआ तो ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- विष्णु सैनी, कनिष्ठ अभियंता, सीएडी विभाग।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/flow-obstructed-by-mud-in-the-papadi-minor--raising-concerns-among-tail-end-farmers/article-133668</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/flow-obstructed-by-mud-in-the-papadi-minor--raising-concerns-among-tail-end-farmers/article-133668</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 15:24:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/777.png"                         length="811305"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कचरे से अटी नहरें, खेतों में कैसे पहुंचेगा पानी?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। वहीं नहरों में जगह-जगह घुमाव दे दिए। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल की दायीं व बायीं मुख्य नहर में आगामी दिनों में जल प्रवाह शुरू होने वाला है, लेकिन अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। नहरों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट खर्च हो चुका है, लेकिन नहरों की सेहत पूरी तरह से नहीं सुधर पाई है। नहरों की जो पक्की लाइनिंग की गई थी, वह जगह-जगह से दरक गई। इस कारण प्रतिदिन 800 क्यूसेक पानी व्यर्थ बह जाता है। दायीं मुख्य नहर से कोटा और बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के किसानों की भी जमीन सिंचित होती है। साठ के दशक में बनी नहरों की समुचित मरम्मत नहीं होने से जल प्रवाह के वक्त बार-बार नहर टूट जाती है। इससे खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंच पाता। शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। वहीं नहरों में जगह-जगह घुमाव दे दिए। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। </p>
<p><strong>घास और झाड़ियों ने कर दी दुर्दशा</strong><br />यहां पर जगह-जगह नहरें टूटी पड़ी हैं। नहरें घास व झाड़ियों से अटी हुई हैं। बोरखेडा, कन्सुआ, काला तालाब क्षेत्र की छोटी नहरों पर अतिक्रमण हो रहा है। छावनी और डाढ़देवी रोड पर दायीं मुख्य नहर में ही अतिक्रमण कर मकान खड़े कर लिए हैं। इटावा, अयाना आदि क्षेत्र में नहरें टूटी पड़ी हुई हैं। गणेशगंज लिफ्ट परियोजना की नहरें दुर्दशा की शिकार हो रही हैं। इस कारण खेतों में पानी नहीं पहुंचा पाता है। इससे किसानों को खासी परेशानी होती है। जल प्रवाह शुरू होने से पहले नहरों व लिफ्ट परियोजना की सफाई की जाए तो टेल तक पानी पहुंच सकता है। चार दशक पहले शुरू की गई इस परियोजना की नहरों की बरसों से सुध नहीं लेने के कारण दर्जनों स्थानों पर टूट पड़ी हैं।</p>
<p><strong>किशनपुरा ब्रांच को बना दिया कचरा पात्र</strong><br />चम्बल की दायीं मुख्य नहर की किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी लम्बी नहर कचरे से अटी हुई है। अर्से से इस नहर की सफाई नहीं हुई है। किसान जल प्रवाह से पहले नहरों की सफाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक ज्यादातर नहरों में सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। दायीं मुख्य नहर से थेगड़ा से किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी नहर जगह-जगह से टूटी पड़ी है। शहरी क्षेत्र में होने के कारण लोगों ने इस नहर को कचरा पात्र बना दिया है। आसपास के लोग नहर में ही कचरा डालते हैं। किसानों ने बताया कि किशनपुरा ब्रांच से करीब 20 गांवों के किसानों के खेत सिंचित होते हैं, लेकिन सीएडी के अधिकारियों की अनदेखी के कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता है।</p>
<p><strong>इस तरह का है हाड़ौती का नहरी तंत्र</strong><br />965 किमी चम्बल नदी की कुल लंबाई<br />376 किमी तक बहती है राजस्थान में<br />2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की<br />2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की<br />29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई<br />6656 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />1500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />03 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दायीं मुख्य नहर से जुड़े आधा दर्जन माइनरों की समय पर साफ-सफाई नहीं होने से उनका अस्तित्व ही नष्ट हो गया। मुख्य नहर की कई स्थानों से टाइलें उखड़ने से जल संचालन में बाधा उत्पन्न होती है। माइनर झाड़ियों व घास से अटे हुए हैं। इस कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा पाता है।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, किसान जाखडोंद</strong></p>
<p> किशनपुरा ब्रांच पर प्रभावशाली लोगों ने जगह-जगह अतिक्रमण कर रखा है। धोरों को ही बंद कर दिया है। भ्किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दिनों जिला कलक्टर और सीएडी के क्षेत्रीय आयुक्त को किशनपुरा ब्रांच में हो रहे अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा है।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>नहरों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। मनरेगा श्रमिकों के माध्यम से सफाई करवाई जा रही है। इसके अलावा मशीनों के माध्यम से भी सफाई का कार्य हो रहा है। नहरों पर हो रहे अतिक्रमण हटाने के संबंध में भी अभियंताओं को निर्देश दिए जा चुके हैं। अभियंताओं को नहरों की मरम्मत कार्य पूरी गुणवत्ता से करवाने को कहा है।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 16:44:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer-%283%299.png"                         length="603919"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छलकने को आतुर हो रहे हाड़ौती के बांध</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पानी की आवक बढ़ने के साथ ही कोटा बैराज का एक गेट खोला गया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-dams-are-eager-to-overflow/article-50559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/chalakne-ko-atur-ho-rhe-hadoti-k-bandh...kota-news-01-07-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर इस बार बांधों में पानी की स्थिति अच्छी है। कोटा सभी बांधों में पर्याप्त पानी होने से से किसान इस बार जुलाई में ही नहरों में जल प्रवाह की मांग कर रहे है। इधर अधिकारियों का कहना है कि तीन माह तक लगातार नहरे नहीं चलाई जा सकती है। इसको लेकर किसानों तीन जुलाई तक समय दिया है । इधर मानसून सक्रिय होने से अधिकांश किसान कृषि कार्यो में जुट गए है। पिछले तीन चार दिन से हो रही अच्छी बारिश के कारण बांधों में पानी की आवक बढ़ गई है। कोटा बैराज में गुरुवार को पानी की आवक बढ़ने से 3700 क्यूसेक पानी एक गेटे को तीन फीट खोलकर छोड़ा गया। वहीं अन्य बांधों में लगातार पानी की आवक हो रही है। जवाहर सागर पन बिजलीघर में विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। वहीं शुक्रवार को कोटा बैराज के दो गेट खोलकर 7500 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। वहीं गांधी सागर, राणाप्रताप सागर, कोटा बैराज में लगातार पानी की आवक हो रही है। एक दो दिन झामाझम बारिश होती रही तो इन बांध लबाबल हो जाएंगे। गांधी सागर बांध में वर्तमान 1293.13 फीट  पानी है। वहीं इस बांध की क्षमता 13.13 फीट है। वहीं राणाप्रताप सागर में वर्तमान 1152.48 फीट पानी है। वहीं जवाहर सागर बांध में 974.30 फीट पानी है। जब कि इसकी क्षमता 978 फीट है। कोटा बैराज में वर्तमान में 853 .40 फीट पानी है। वहीं इसकी क्षमात 854 फीट है। पानी की आवक बढ़ने के साथ ही कोटा बैराज का एक गेट खोला गया।</p>
<p><strong>सबसे अधिक कोटा संभाग के बांधों में पानी</strong><br />कोटा के 82 बांधों में 74.80 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। जबकि पिछले साल आज के ही दिन कोटा संभाग के बांधों में 68.81 प्रतिशत भरा हुआ था। जबकि सबसे कम पानी उदयपुर संभाग के बांधों में दर्ज किया गया है। उदयपुर संभाग के 181 बांधों में 33.04 प्रतिशत पानी दर्ज हुआ है, जबकि पिछले साल 19.90 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया था। मध्यप्रदेश में अच्छी बारिश होने से आवक बढ़ी: कोटा बैराज में लगातार पानी की आवक हो रही है। हाड़ौती क्षेत्र मे हो रही अच्छी बारिश होने  के कारण बांध का गेज बढ गया है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी लगतार हो रही बारिश से आवक हो रही है। जिससे कोटा बैराज पानी लेवल बढ़ गया है। </p>
<p><strong>औसत बारिश से बांध छलक जाएंगे</strong><br />कोटा में औसत बारिश का रिकार्ड 600 से 700 एमएम है। जबकि वर्तमान 169.60 बारिश हो चुकी है। मानसून से शुरू होने से पूर्व ही एक चौथाई बारिश हो गई। लगातार तीन चार दिन बारिश होती रही तो सभी बांध छलक पड़ेंगे। इस बार सभी बांधों का गेज मेंटेन है। </p>
<p><strong>प्रदेश में पिछले साल की तुलना पानी अधिक</strong><br />बिपरजॉय तूफान से झमाझम और बाद में मानसून के आने के साथ ही पूरे प्रदेश में जमकर मेघ बरसने से बांधों में पिछले साल की तुलना में अब तक अधिक पानी दर्ज हुआ है। दरअसल, पिछले वर्ष 29 जून, 2022 को 690 बांधों में 4782.23 एम.क्यूएम पानी भरा हुआ था, जबकि इस बार 6360.40 एम.क्यूएम पानी दर्ज हुआ है। यदि इस आंकड़े को प्रतिशत में देखें तो पिछले वर्ष 29 जून को 38.01 प्रतिशत पानी बांधों में भरा हुआ था, जबकि इस साल 29 जून को 50.56 प्रतिशत पानी भरा हुआ है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 12.55 प्रतिशत अधिक है। </p>
<p><strong>690 बांधों में 6360.40 एम.क्यूएम पानी</strong><br />राज्य के छोटे-बड़े 690 बांधों की कुल भराव क्षमता 12580.03 एम.क्यूएम है, उसकी तुलना में गुरुवार को 63360.40 एम.क्यूएम बांधों में पानी दर्ज किया गया। </p>
<p><strong>रामगढ़ बांध में पानी नहीं </strong><br />रामगढ़ बांध में इस साल भी अभी तक पानी की आवक नहीं हुई है। बांध के भराव क्षेत्र में जगह-जगह अतिक्रमण होने से पानी करीब ढाई दशक से बांध में पानी नहीं आया है।</p>
<p><strong> 295 बांध खाली, 318 बांध आंशिक रूप से भरे हुए </strong><br />प्रदेश के 690 छोटे-बड़े बांधों में से 295 बांध बिल्कुल खाली है, जबकि 318 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं। 72 बांध पूर्ण रुप से भरे हुए हैं और पांच बांधों की सूचना जल संसाधन विभाग को मिलती नहीं हैं। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-dams-are-eager-to-overflow/article-50559</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-dams-are-eager-to-overflow/article-50559</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 13:19:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-07/chalakne-ko-atur-ho-rhe-hadoti-k-bandh...kota-news-01-07-2023.png"                         length="385036"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालों में मकान बने, पानी बहाव में हुआ अवरोध</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[शहर के विकास व विस्तार के साथ ही जहां दूरदराज तक बस्तियां व कॉलोनियां बन गई हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग नालों तक में मकान बनाकर रहने लगे हैं। जिससे वहां पानी के बहाव में अवरोध होने लगा है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-built-in-drains--obstruction-in-water-flow/article-13106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/naaloo-mei-makan-bane-pani-bahav-mei-avrodh.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही जहां दूरदराज तक बस्तियां व कॉलोनियां बन गई हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग नालों तक में मकान बनाकर रहने लगे हैं। जिससे वहां पानी के बहाव में अवरोध होने लगा है। मानसून सत्र शुरु होने वाला है। ऐसे में चार महीने तक होने वाली बरसात में उन नालों में पानी भरने से वहां रहने वालों को समस्या का सामना करना पड़ेगा। शहर में रहने के लिए लोगों ने एक ओर जहां कृषि भूमियों तक पर भूखंड काटकर मकान बना लिए है। वहीं दूसरी तरफ लोगों को जहां जगह मिल रही है। वहीं मकान बनाकर रहने लग रहे हैं। शहर में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां हर साल बरसात में पानी भरता है। उसके बावजूद भी लोग वहां सस्ते के लालच में जगह लेकर मकान बनाकर रहने लगे हैं। <br /><br /><strong>बढ़ती जा रही नाले में मकानों की संख्या</strong><br />झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा तालाब हो या पुराने थाने के पीछे का नाला। गोबरिया बावड़ी क्षेत्र का नाला हो या नदी पार नांता क्षेत्र का। हर जगह पर नालों में जहां बस्तियों के और बरसात में बरसाती पानी के निकास की जगह बनी हुई थी। वहां लोग मकान बनाकर रहने लगे हैं। ये मकान भी एक दो साल में नहीं वरन् पिछले कई सालों से बन रहे हैं। एक दूसरे को देखकर उनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। डूब क्षेत्र में होने से वहां हर साल आस-पास के क्षेत्रों का पानी बहकर आता है। जिससे वहां रहने वालों के मकान भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। उसके बाद भी लोग वहां से जाने को तैयार नहीं हैं। पिछले कई सालों से बरसात के समय में अनंतपुरा हो या देवली अरब रोड की कॉलोनियां वहां पानी भरने पर नावें चलाई जा रही हैं। जिससे रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुचाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। बरसात खत्म होते ही फिर से लोग वहां जा बसे। इस बार कुछ ही दिन में फिर से बरसात आने वाली है। तेज बरसात होने से इस साल एक बार फिर से पुरानी स्थिति होने की संभावना है। <br /><br /><strong>हर साल नए मकान बन रहे</strong><br />नगर निगम के गोताखोर विष्णु श्रृंगी ने बताया कि शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां हर साल बरसात में पानी भरता ही है। कुछ इलाकों में तो वर्ष 2006 से ही हर साल नाव चलाकर लोगों को रेस्क्यू किया जाता है। जब भी टीम रेस्क्यू के लिए जाती है। उस समय वहां उन्हें नए मकान बनते हुए ही नजर आते हैं। लोगों को उन जगह पर मकान नहीं बनाने के लिए समझाइश भी की जाती है। लेकिन उन लोगों का कहना है कि बरसात के समय कुछ दिन परेशानी आती है। उसके बाद पूरे साल उन्हें कोई परेशानी नहीं है। सस्ती जगह मिलने से गरीबों के लिए वही उचित जगह है। <br /><br /><strong>निगम ने किए नाले साफ, पानी नहीं भरेगा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा बरसात से पहले सभी छोटे-बड़े बरसाती नालों की सफाई का अभियान चलाया। करीब दो माह से जेसीबी व चैन माउंटेंड मशीनों से नालों की सफाई करवाई जा रहा है। महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि अधिकतर नालों की गहराई तक सफाई करवाई गई है। जिससे शहर में तो पानी भरने की समस्या नहीं होगी। फिर भी यदि कहीं परेशानी आई तो टीमें तैयार रहेंगी। लेकिन यदि कोई नालों में ही बस गया है तो वहां डूब क्षेत्र होने से पानी भरेगा है। उसका कोई समाधान नहीं है। लोगों को ही समझकर अपनी जान-माल की सुरक्षा करनी होगी। बरसात से पहले सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए। <br /><br /><strong>बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम स्थापित</strong><br />बरसात के समय में हर साल होने वाली समस्या को देखते हुए इस बार भी जिला प्रशासन ने 15 जून से ही बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। गोताखोर से लेकर रेस्क्यू टीम तक तैतार कर दी है। लेकिन इसकी जरूरत पानी अधिक भरने पर लोगों को राहत पहुंचाने के समय पड़ेगी। जबकि उससे पहले ही इस तरह की नौबत नही आए उसके लिए प्रशासन द्वारा कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। डूब क्षेत्र में या नालों में मकान बनाकर अवरोध करने वालों को समझाइश कर पहले से ही वहां से पुनर्वास करने जैसे कोई कदम अभी तक नहीं उठाए हैं। जिससे बरसात के समय में एक बार फिर से लोगों को मकानों में  पानी भरने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />गत दिनों जिला कलक्टर कीे अध्यक्षतरा में सभी विभागों की बैठक हुई थी। जिसमें बरसात से पहले नालों में अवरोध पैदा करने वालों को वहां से हटाने के न्यास अधिकारियों को निर्देश दिए थे। साथ ही डूब क्षेत्र के लोगों को वहां से हटाने को भी कहा था। बरसात में होने वाली समस्या से बचने के लिए लोगों को स्वयं ही उन जगहों से हटकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए। <br /><strong>राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-built-in-drains--obstruction-in-water-flow/article-13106</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-built-in-drains--obstruction-in-water-flow/article-13106</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 16:07:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/naaloo-mei-makan-bane-pani-bahav-mei-avrodh.jpg"                         length="50157"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहरों को बना दिया नाला, जलप्रवाह में आएगी बाधा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कोटा के हाड़ौती और मध्यप्रदेश के धरतीपुत्रों की जमीन को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने वाली नहरें दुर्दशा का शिकार हो रही है। मानसून आने में अब कम ही समय रह गया है इसके बावजूद नहरों की दशा सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। नहरों से निकलने वाली वितरिकाएं कई जगह से जर्जर हो रही है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-have-been-made-drains--water-flow-will-be-hindered/article-10991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nahro-ko-bana-diya-naala-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के हाड़ौती और मध्यप्रदेश के धरतीपुत्रों की जमीन को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने वाली नहरें दुर्दशा का शिकार हो रही है। मानसून आने में अब कम ही समय रह गया है इसके बावजूद नहरों की दशा सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। नहरों से निकलने वाली वितरिकाएं कई जगह से जर्जर हो रही है। वहीं कई शहरी क्षेत्रों में स्थित वितरिकाएं तो कचरे के कारण नालों में तब्दील हो गई है। हर साल मानसून से पूर्व सिंचाई विभाग की ओर से नहरों का रख रखाव किया जाता है, ताकि सिंचाई के लिए नहरों में जलप्रवाह में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो। इस बार वितरिकाओं की सार सम्भाल नहीं ली गई, जिससे आगामी समय में जलप्रवाह के दौरान परेशानी हो सकती है। <br /><br /><strong>सिंचाई के लिए दो नहरें</strong><br />चम्बल नदी पर बने कोटा बैराज बांध से सिंचाई के लिए दो नहरें निकाली गई है। इनमें दायीं नहर कोटा, बारां व मध्यप्रदेश में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराती है। यह 124 किमी राजस्थान में और 248 किमी मध्यप्रदेश में हैं। दायीं मुख्य नहर में कुल आठ लिफ्ट नहरें बनी हुई है। बायीं मुख्य नहर 178 किमी लंबी है। इससे बूंदी जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है। इस मुख्य नहर से जुड़ी वितरिकाओं से सैंकड़ों गांवों की भूमि सिंचित होती है।  <br /><br /><strong>जगह-जगह से हो रही जर्जर</strong><br />दायीं मुख्य नहर से जुड़ी थेगड़ा वितरिका इस समय जगह-जगह से जर्जर हो रही है। इस वितरिका के पत्थर उखड़े हुए है। <br />कई स्थानों पर पत्थर निकलने से बड़े-बड़े गड्ढे तक हो गए है। इसके चलते जलप्रवाह के दौरान परेशानी होती है। पूर्व के सालों में इस नहर की मरम्मत कराई जाती थी, लेकिन इस बार मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। सिंचाई के लिए जलप्रवाह करने के बाद स्थानीय बाशिंदें यहां पर नहाने के लिए आते हैं। ऐसे में इन गड्ढों के कारण हादसा होने की संभावना बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले यहां पर नहाने के दौरान डूबने के हादसे हो चुके हैं। इस पर वितरिका की मरम्मत की मांग उठाई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।<br /><br /><strong>इधर हो गया जंगलराज</strong><br />बारां रोड पर स्थित वितरिका में जंगलराज हो गया है। इस वितरिका में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। जिनकी सफाई नहीं कराई गई है। कई जगह पर बड़ी-बड़ी घास उग आई है। जिससे बाद में सुचारू जलप्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है। वितरिका में दोनों तरफ की दीवारें भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। वितरिका के समीप ही सड़क बनी हुई है। इससे तेज रफ्तार के दौरान वाहन चलाते समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। लोगों की मांग के बावजूद वितरिकाओं की क्षतिग्रस्त दीवारों को ठीक नहीं किया जा रहा है।<br /><br /><strong>कचराघर में किया तब्दील</strong><br />बोरखेड़ा क्षेत्र में स्थित वितरिका को स्थानीय लोगों ने कचरा घर में तब्दील कर दिया है। इस वितरिका के निर्माण के समय आसपास का क्षेत्र पूरा खाली पड़ा हुआ था। बाद में समय बदलने के साथ वितरिका के दोनों तरफ आवासीय कॉलोनियों बनती चली गई। कई कॉलोनियों के बीच में आ जाने से लोगों ने वितरिका में कचरा डालना शुरू कर दिया। वितरिका में कई स्थानों पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर तक लग चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक वितरिका की सफाई का कार्य शुरू नहीं किया गया है।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मुख्य नहरों से जुड़ी वितरिकाओं की बजट उपलब्ध होने पर मरम्मत करवाई जाती है। नहरों में पानी छोड़ने से पहले रखरखाव का प्रयास किया जाएगा। शहरी क्षेत्र से निकल रही वितरिकाओं को स्थानीय लोगों ने कचराघर बना दिया है। इस बारे में नगर निगम प्रशासन से चर्चा की गई है। शीघ्र ही नगर निगम के माध्यम से वितरिकाओं में जमा कचरे को हटवाया जाएगा। <br /><strong>-लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता सीएडी कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-have-been-made-drains--water-flow-will-be-hindered/article-10991</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-have-been-made-drains--water-flow-will-be-hindered/article-10991</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 16:36:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/nahro-ko-bana-diya-naala-kota.jpg"                         length="85905"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम में पानी के बहाव से पलटी ट्रेन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ असम में बाढ़ से 20 जिलों के लगभग दो लाख लोग पर प्रभाव पड़ा है। बारिश से भूस्खलन हुआ है। इसके कारण रेल एवं सड़क संपर्क टूट गया है। लगातार बारिश से नदियों में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/train-overturned-due-to-water-flow-in-assam/article-9945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/wwwww-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। असम में बाढ़ से 20 जिलों के लगभग दो लाख लोग पर प्रभाव पड़ा है। बारिश से भूस्खलन हुआ है। इसके कारण रेल एवं सड़क संपर्क टूट गया है। लगातार बारिश से नदियों में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>असम में भारी बारिश से रेलवे स्टेशन भी डूब गए है। हाफलोंग स्टेशन पर बाढ़ के पानी के बहाव के कारण स्टेशन पर खड़ीं ट्रेने भी पटरी से पलट गई। बारिश के कारण ट्रेनों में फंसे यात्रियों को निकला लिया गया है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/train-overturned-due-to-water-flow-in-assam/article-9945</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/train-overturned-due-to-water-flow-in-assam/article-9945</guid>
                <pubDate>Tue, 17 May 2022 16:27:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/wwwww-copy1.jpg"                         length="101928"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        