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                <title>एकनाथ शिंदे को मिली मारने की धमकी : ईमेल कर दी चेतावनी, कार को बम से उड़ा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंत्रालय (राज्य सचिवालय) के साथ गोरेगांव और जेजे मार्ग पुलिस स्टेशनों को भी धमकी भरे संदेश मिले हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/threatened-to-kill-eknath-shinde-email-warns-car-will-bomb/article-104988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(13)3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को किसी अज्ञात व्यक्ति ने ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी दी है। धमकी भरे ईमेल में चेतावनी दी गई है कि उनकी कार को बम से उड़ा दिया जाएगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंत्रालय (राज्य सचिवालय) के साथ गोरेगांव और जेजे मार्ग पुलिस स्टेशनों को भी धमकी भरे संदेश मिले हैं।</p>
<p>मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने भेजने वाले के आईपी एड्रेस का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। धमकी के बाद शिंदे के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 10:22:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>एकनाथ शिंदे ने दिया बड़ा बयान, मैं महाराष्ट्र सीएम पद की रेस में नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[उनके दिल में शिवसेना के प्रति क्या भावना क्या थी। उनमें हिम्मत है तो बालासाहेब को हिंदू ह्रदय सम्राट बोलकर दिखाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/eknath-shinde-give-the-big-statement--i-am-not-in-race-of-cm/article-95233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/shinde.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं महाराष्ट्र के सीएम पद की रेस में नहीं हूं, लेकिन ये भी तय है कि सीएम महायुति का ही होगा। इस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। शिंदे ने कहा कि कांग्रेस की नीति फूट डालो राज करो की है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि वे बालासाहेब को हिंदू हृदय सम्राट कब कहेंगे। मुख्यमंत्री शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक हैं तो सेफ  हैं’ नारे का भी समर्थन किया। इसके साथ ही राहुल गांधी द्वारा बालासाहेब की पुण्यतिथि पर दिए बयान पर शिंदे ने कहा कि ये अच्छी बात है लेकिन अभी तक उन्होंने ये बोलने की कोशिश नहीं की थी। उनके दिल में शिवसेना के प्रति क्या भावना क्या थी। उनमें हिम्मत है तो बालासाहेब को हिंदू ह्रदय सम्राट बोलकर दिखाएं।</p>
<p><strong>उद्धव ने तो धनुष-बाण कांग्रेस के गले में बांध दिया</strong><br />उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए शिंदे ने कहा कि जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे के विचार को छोड़ दिया, शिवसेना और धनुष-बाण कांग्रेस के गले में बांध दिया, क्या ये वफादारी है। हम बालासाहेब के आदर्शों पर चल रहे हैं, उद्धव तो उस कांग्रेस के साथ मिल गए, जिन्होंने बालासाहेब का अपमान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 13:09:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिंदे और अजीत पवार की बढ़ती हैसियत से भाजपा कार्यकर्ता हताश </title>
                                    <description><![CDATA[ शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट हमेशा शिवसेना से बेहतर रहता आया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्ट्राइक रेट शिवसेना (यूबीटी) शिवसेना राकांपा, और कांग्रेस से भी खराब रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-workers-frustrated-with-the-rising-status-of-shinde-and/article-80716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/bjpp.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में एनडीए की हार का बड़ा कारण राज्य में बढ़ा असंतोष माना जा रहा है। लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपानीत गठबंधन को अपेक्षित सफलता न मिल पाने में कई अन्य कारणों के अलावा सांगठनिक असंतोष ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। यदि समय रहते भाजपा ये असंतोष दूर न कर सकी तो कुछ ही महीनों बाद होने जा रहे विधानसभा चुनावों में उसे और तगड़ा झटका लग सकता है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी अपनी स्थापना के बाद से ही महाराष्ट्र में सांगठनिक दृष्टि से एक मजबूत और जुझारू पार्टी बन कर उभरी। संयोग से जनसंघ काल के बाद भाजपा की स्थापना भी मुंबई में ही हुई थी। स्थापना के बाद से ही भाजपा को राज्य में प्रमोद महाजन एवं गोपीनाथ मुंडे जैसे दो युवा चेहरे मिले। महाजन की पहल पर ही यहां के उभरते क्षेत्रीय दल शिवसेना से गठबंधन की शुरुआत हुई। दोनों दलों ने मिलकर यहां की मजबूत जनाधार वाली कांग्रेस से टक्कर लेकर 1995 में पहली बार अपनी सरकार बनाई।</p>
<p><strong>मराठा आंदोलन का असर<br /></strong>आज तो भाजपा एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री एवं अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री बनाकर भी मराठा आरक्षण आंदोलन से उपजी मराठों की नाराजगी दूर नहीं कर सकी। जबकि ये दोनों प्रमुख मराठा चेहरों में से एक हैं। उलटे इन दोनों को इनके वृहद कुनबे के साथ अपने साथ लाने से भाजपा के ही विधायकों में असंतोष पैदा हुआ है। क्योंकि इन दोनों के साथ आने से मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा विधायकों का ही हक मारा गया है।</p>
<p><strong>विधायकों से नीचे के स्तर पर भी असंतोष पनप रहा<br /></strong> विधायकों से नीचे के स्तर पर भी असंतोष पनप रहा है। महाराष्ट्र की 27 महानगरपालिकाओं एवं 300 से अधिक नगरपालिकाओं का कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो चुका है। इन स्थानीय निकायों के चुनाव लंबित हैं। युवा नेताओं की नई पौध स्थानीय निकायों से ही तैयार होती है। </p>
<p>पिछले दो साल से ये चुनाव भले कुछ न्यायिक कारणों से नहीं हो पा रहे हैं। लेकिन केंद्र एवं पिछले दो साल से ही राज्य में भी भाजपा के गठबंधन वाली सरकार होने से स्थानीय निकायों के चुनाव न होने का ठीकरा भी उसी पर फूट रहा है।</p>
<p><strong>कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता</strong><br />शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट हमेशा शिवसेना से बेहतर रहता आया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्ट्राइक रेट शिवसेना (यूबीटी) शिवसेना राकांपा, और कांग्रेस से भी खराब रहा है।</p>
<p>इसका एक बड़ा कारण संगठन में निचले स्तर के कार्यकर्ताओं का निष्क्रिय होना माना जा रहा है। चुनाव से पहले पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जहां बूथ प्रमुख एवं पन्ना प्रमुख के जरिए घर-घर पहुंचने का दावा कर रहा था। वहीं चुनाव परिणाम आने के बाद खुद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस मान रहे हैं कि वह सोयाबीन एवं कपास उत्पादक किसानों तक पहुंच बना पाने में नाकाम रहे। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले हार का ठीकरा जातिवाद की राजनीति को दे रहे हैं। जबकि इसी महाराष्ट्र में भाजपा नेता माली, धनगर एवं वंजारी (माधव समीकरण) जैसे अन्य पिछड़ा वर्गों को साथ लेकर मजबूत मराठा नेताओं को चुनौती देते रहे थे।</p>
<p><strong>निचले स्तर के संगठन की उपेक्षा</strong><br />दूसरी ओर नई पीढ़ी के नेता और कार्यकर्ताओं के उससे न जुड़ पाने के कारण निचले स्तर पर संगठन कमजोर होता जा रहा है। दो साल से राज्य में साझे की सरकार होने के बावजूद निगमों एवं महामंडलों में नियुक्तियां न होना एवं मंत्रिमंडल का विस्तार न होना भी सांगठनिक असंतोष का कारण बन रहा है। भाजपा के सांगठनिक ढांचे में प्रदेश स्तर से लेकर केंद्रीय इकाई तक संगठन महासचिव की बड़ी भूमिका होती है। इस पद पर बैठा व्यक्ति सामान्यत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रतिनिधि होता है। जो निरपेक्ष भाव से संगठन एवं सरकार के बीच की कड़ी बनकर काम करता है और सभी की बात सुनकर सामंजस्य बैठाता है। करीब तीन साल से महाराष्ट्र की प्रदेश इकाई में कोई पूर्णकालिक संगठन महासचिव का न होना भी प्रादेशिक संगठन की एक बड़ी कमजोरी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 12:31:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पिता का वचन झुठला कर उद्धव ने किया जनता को गुमराह : शिंदे</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला एवं प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन करने के बाद पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए शिंदे ने कहा ‘अयोध्या हमारी यात्रा पूरी तरह धार्मिक है लेकिन कई लोगों को इससे एलर्जी और दर्द हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uddhav-shinde-misled-the-public-by-denying-his-fathers-promise/article-42275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/shidee.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि एक प्रभु श्रीराम थे जिन्होंने पिता का वचन मानते हुए 14 वर्ष का वनवास काटा और एक पुत्र वे भी हैं जिन्होंने अपने पिता के वचन को झुठला करके सरकार बनाई थी और महाराष्ट्र की जनता को गुमराह किया था। हमने बाला साहेब ठाकरे की भावनाओं का आदर करते हुए उनके वचन का पालन करते हुए 2019 में भाजपा के साथ शिवसेना की सरकार बनाई। श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला एवं प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन करने के बाद पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए शिंदे ने कहा ‘अयोध्या हमारी यात्रा पूरी तरह धार्मिक है लेकिन कई लोगों को इससे एलर्जी और दर्द हो रहा है।</p>
<p>मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी रामलला और हनुमानगढ़ी मंदिर का दर्शन किए। उन्हें एक आवश्यक मीटिंग में  जाना था इसलिए वे दिल्ली चले गए।</p>
<p><strong>मंदिर राजनैतिक मुद्दा नहीं, आस्था का विषय</strong><br />शिंदे ने कहा कि मंदिर कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं है बल्कि वह आस्था का विषय है। कुछ लोगों को हिन्दुत्व से एलर्जी है और गलत अफवाह फैलाते हैं, यह उनकी जीवन प्रणाली है। बाला साहेब ठाकरे ने हिन्दुत्व का जीवन जिया है। शिंदे ने दावा किया कि 2024 के चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का परचम लहराएगा और भाजपा की सरकार बनेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 10:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चुनाव आयोग के फैसले पर रोक नहीं दोनों गुटों से 14 दिन में जवाब मांगा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने खुद को साबित किया है। इस स्थिति में अभी हम चुनाव आयोग के आदेश पर रोक नहीं लगा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/no-ban-on-the-decision-of-the-election-commission-sought/article-38003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(5)8.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और निशान सौंपे जाने के खिलाफ  उद्धव ठाकरे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर रोक नहीं लगाई है। हालांकि उद्धव गुट और शिंदे खेमे को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने खुद को साबित किया है। इस स्थिति में अभी हम चुनाव आयोग के आदेश पर रोक नहीं लगा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि उद्धव गुट अभी मिले अस्थायी नाम और चुनाव निशान का इस्तेमाल जारी रख सकता है।</p>
<p><strong>व्हिप को लेकर दिए निर्देश</strong><br />बेंच ने यह आदेश 26 फरवरी को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए दिया है। इस दौरान कोर्ट ने शिंदे गुट से कहा कि आप भी अभी ऐसा कोई व्हिप नहीं जारी करेंगे जिसे न मानने से उद्धव समर्थक सांसद और विधायक अयोग्य हो जाएं। इस पर शिंदे गुट के वकील नीरज किशन कौल ने सहमति जताई। उद्धव गुट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने बेंच से कहा कि पार्टी के कार्यालयों और बैंक खातों को शिंदे समूह द्वारा लिया जा रहा है। ऐसे में कोर्ट यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दे। हालांकि बेंच ने इसे मानने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>शिंदे शिवसेना के प्रमुख नेता घोषित</strong><br />चुनाव आयोग द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता और धनुष और तीर का चुनाव चिह्न देने के बाद शिंदे को आधिकारिक तौर पर पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मंगलवार शाम को मुंबई में हुई बैठक में पार्टी का ‘प्रमुख नेता’ घोषित किया गया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 10:03:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[पवार डरे हुए इतने कि एनसीपी की सारी इकाईयां भंग कर दीं। उनके भतिजे अजित पवार कह चुके जांच एजेंसी अपना काम कर रही। इसमें दिक्कत क्या?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/satrangi-politics/article-18226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/india-gate021.jpg" alt=""></a><br /><p>पवार मौन!<br />मराठा क्षत्रप शरद पवार ने अभी तक शिवसेना सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी पर मुंह तक नहीं खोला। जबकि राउत उनके लाडले। पवार डरे हुए इतने कि एनसीपी की सारी इकाईयां भंग कर दीं। उनके भतिजे अजित पवार कह चुके जांच एजेंसी अपना काम कर रही। इसमें दिक्कत क्या? राजनीतिक विरासत को लेकर परिवार में मतभेद अलग से चल रहा। फिर दिल्ली से विभिन्न मामलों में ईडी का शिकंजा कसता ही जा रहा। राज्य में अब जब नई भाजपा-शिंदे गुट की सरकार बन गई। तो एनसीपी के विधायक भी छिटकने की फुसफुसाहट! यहां तक कि चाणक्य वाला तमगा भी जाने की नौबत। क्योंकि नए सीएम शिंदे खुद मराठा। ऊपर से नए विधानसभा अध्यक्ष और सत्ताधारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी मराठा ही। सो, अब कोई यह आरोप भी नहीं लगा सकता कि मराठाओं की उपेक्षा हो रही। मतलब पवार चारों से घिरते जा रहे। ऐसे में भाजपा लगातार दबाव बढ़ा रही। इसीलिए संजय राउत पर पवार का मुंह नहीं खोलना। जानकारों को अखर रहा।</p>
<p>पांच अगस्त...!<br />कांग्रेस ने बीते शुक्रवार महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ काले कपड़े पहनकर राजधानी की सड़कों पर विरोध क्या किया। भाजपा ने इसे ‘ब्लैक फ्राइडे’ बताते हुए ट्वीस्ट कर डाला। कांग्रेस को यकायक जवाब देते नहीं बना। असल में, कांग्रेस नेताओं को भाजपा की ओर से ऐसे पलटवार की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पांच अगस्त को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 का खात्मा हुआ। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए शिलान्यास भी हुआ। ऐसे में भाजपा ने सवाल उठा दिया। कांग्रेस ने पांच अगस्त का दिन ही विरोध के लिए क्यों चुना? पांच अगस्त अब ऐतिहासिक दिन। शाह को आशंका। महंगाई बेरोजगारी तो बहाना। विरोध तो गांधी परिवार पर ईडी के कसते शिकंजे का। इससे पहले कांग्रेस पर सवाल उठा। वह आम जनता की समस्याओं के लिए क्यों नहीं सड़कों पर उतरती? सारी शक्ति गांधी परिवार के बचाव में क्यों लगाई जा रही। अब जब कांग्रेस सड़क पर उतरी। तो भाजपा ने इसे ‘ब्लैक फ्राइडे और पांच अगस्त’ से जोड़ दिया।</p>
<p>दीदी की मुसीबत!<br />आजकल ममता दीदी के हावभाव बता रहे। वह ढीली पड़ चुकीं। ईडी का शिकंजा कसता जा रहा। पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के भ्रष्टाचार की परतें ज्यों-ज्यों उघड़ रहीं। किसी को कल्पना भी नहीं होगी। टीएमसी में नंबर दो हैसियत रखने वाले पार्थ मंत्री पद ही नहीं पार्टी से भी बाहर। अब उनके विधायकी छोड़ने की भी चर्चा। दीदी चार दिन के दौरे पर दिल्ली तो आईं। लेकिन बात नहीं बनी। असल में, पार्थ तो बहाना। जांच की आंच खुद ममता दीदी और उनके भतिजे अभिषेक तक पहुंच रहीं। अभिषेक की पत्नी भी जांच एजेंसी के लपेटे में। सो, ममता की प्राथमिकता अपने परिवार को बचाने में। यह पार्थ भी समझ रहे। इसीलिए अब उनके और अर्पिता के सरकारी गवाह बनने की चर्चा। सवाल यह कि ऐसा हुआ तो बात कहां तक पहुंचेगी? पिछले साल मई की शुरूआत में जिस धमक के साथ दीदी बंगाल में सत्तारूढ़ हुई। अब वह कहीं तिरोहित होती नजर आ रही। और भाजपा लगातार पैठ बना रही।</p>
<p>आरसीपी बनेंगे ‘शिंदे’?<br />आखिरकार आरसीपी सिंह ने जदयू से विदाई ले ली। इसकी आशंका संभावना तभी से। जब उन्हें मंत्री होने के बावजूद नितिश कुमार ने राज्यसभा नहीं भेजा था। अब सवाल उठ रहा। क्या आरसीपी सिंह नितिश कुमार के लिए ‘शिंदे’ बनेंगे? उन्होंने नया दल बनाकर ताल ठोंकने का ऐलान कर दिया। अब कितनी सफलता मिलेगी। यह समय बताएगा। क्योंकि सिंह मूलत: राजनेता नहीं बल्कि नौकरशाह। लेकिन जिस तरह से उन्होंने बिना नितिश को भरोसे में लिए जदयू के कोटे से केन्द्र सरकार में मंत्री पद लिया। तभी से खटास बढ़ गई। इससे पहले ऐन चुनाव के मौके पर नितिश के दबाव में भाजपा को लोजपा को राजग से बाहर करना पड़ा। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान अब अकेले पार्टी सांसद बचे रह गए। उनके चाचा ने अलग गुट बना लिया। ऐसे में क्या आरएसीपी सिंह भी जदयू में तोड़फोड़ कर पाएंगे? क्योंकि यदि नितिश कुमार भाजपा से छिटके तो चुनावी मौके पर चिराग पासवान और आरसीपी सिंह का भाजपा के पाले में आना तय!</p>
<p>क्या होगा?<br />तो जगदीप धनखड़ अब देश के नए उपराष्ट्रपति। वह एक नए नए शक्ति केन्द्र के रूप में भी उभरेंगे। ऐसा अनुमान। ऐसा भी कहा जा रहा। धनखड रबड़ स्टैंप बनकर नहीं रहेंगे। क्योंकि ऐसा उनकी फितरत में नहीं। लेकिन सवाल अपने राजस्थान की राजनीति का। जहां अगले साल विधानसभा चुनाव। अब भाजपा में ही समीकरण नहीं बदलेंगे। बल्कि कांग्रेस भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगी। क्योंकि धनखड़ जाट समुदाय से। और यह समुदाय कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक। भाजपा वाजपेयी कार्यकाल में जाट समाज को आरक्षण देकर लुभा चुकी। अब इसी समाज से देश का उपराष्ट्रपति। सो, फर्क तो पड़ने वाला। लेकर कितना? इसके लिए सभी को इंतजार। यूपी विधानसभा चुनाव के समय जाट समाज के नेताओं ने अमित शाह से शिकायत की थी। उनकी उपेक्षा की गई। किसी भी राज्य या केन्द्र में उनका प्रभावी प्रतिनिधितव नहीं। जिसे अब उम्मीद से देकर पूरा कर दिया गया। जानकार बता रहे। निशाना राजस्थान। जहां जाट समाज से ही भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष भी।</p>
<p>अपने हाल पर महबूबा!<br />ज्यो-ज्यों जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ रही। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बयान बता रहे। उनकी राजनीतिक सेहत ठीक नहीं। ‘हर घर तिरंगा अभियान’ की बयार में उन्होंने पुराने जम्मू-कश्मीर का झंडा ट्वीटर पर बुलंद किया। कहा, इसे कोई हमसे अलग नहीं कर सकता। हालांकि आम जनता के मूड से लग रहा। उसने महबूबा को मानो उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया। क्योंकि अब लाल चौक समेत हर जगह तिरंगा नजर आ रहा। हालांकि एनसी के संरक्षक फारूख अब्दुल्ला ना नुकुर के साथ संतुलन बैठाते नजर आ रहे। क्योंकि बेटे उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक भविष्य का मामला। इस बीच, सरकार अपनी गति से आगे बढ़ रही। केवल एक महबूबा मुफ्ती ही बची रह गईं। जिनके बयान अभी भी पाक को साथ लेकर कश्मीर समस्या के समाधान की पैरोकारी कर रहे। लेकिन वह अच्छे से जानती हैं। केन्द्र सरकार ऐसा कभी नहीं करेगी। और यह बात आम जनता भी समझ चुकी। इसीलिए वह केन्द्र के साथ आगे बढ़ना पसंद कर रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 10:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>मौन सबसे अच्छा</title>
                                    <description><![CDATA[ ऐसे में कुछ भी बोलकर जोखिम क्यों लेना? हंसी मजाक में कुछ भी बोला गया। तो कहीं ऐसा न हो कि अवसर की संभावनाएं जाती रहें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/silence-is-the-best/article-15025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/india-gate.jpg" alt=""></a><br /><p>मौन रहने का मतलब कई इशारे और संकेत भी। शायद वह हो भी गया। असल में, बीती आठ जुलाई को 27 नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों ने शपथ ली थी। सभापति वैंकया नायडू ने उन्हें पद की शपथ दिलवाई। बाद में नए सांसदों को जलपान भी सभापति की ओर से करवाया गया। लेकिन स्वभाव के विपरित वैंकया नायडू चुप रहे। ज्यादा कुछ बोले नहीं। जिस पर कई सांसदों को थोड़ा अचरज हुआ। क्योंकि वैंकया नायडू स्वभाव से हंसी मजाक करने वाले। वैसे भी नए सांसदों से घुलने मिलने के लिए तो यह बनता है। लेकिन उस समय वहां मौजूद एक सांसद ने इसे कुछ अलग ही अर्थ में समझा। उपराष्ट्रपति पद का चुनाव नजदीक। ऐसे में कुछ भी बोलकर जोखिम क्यों लेना? हंसी मजाक में कुछ भी बोला गया। तो कहीं ऐसा न हो कि अवसर की संभावनाएं जाती रहें। सो, वैंकया नायडू चुप ही रहे! हालांकि अब राजग के उम्मीदवार की घोषणा हो चुकी। और शायद इसका अंदाजा वैंकया नायडू को रहा भी होगा!</p>
<p><strong>कहां पहुंच गए!</strong></p>
<p>इसमें कोई दो राय नहीं कि शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी। अब तो उन पर तीन बार शिवसेना को तोड़ने के आरोप भी लग रहे। उन्होंने ही 2019 में तीन दलों के एमवीए का गठजोड़ करवाया। लेकिन अचानक सरकार बीच में ही गिर गई। शिवसेना से एकनाथ शिंदे बागी गुट के नेता होकर उभरे। बाद में पवार ने दावा किया। यह सरकार अपने ही मतभेदों में उलझकर जल्दी ही गिर जाएगी। इसी बीच, पवार का नाम राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के रुप में भी चला। लेकिन वह उम्मीदवार बनने के बजाए इसकी चौसर बिछाते हुए नजर आए। इसी बीच, उन्होंने अचानक बीएमसी के चुनाव का राग अलापना शुरू कर दिया। पार्टी कार्यकतार्ओं से कहा, बीएमसी के चुनाव जीतने की तैयारी करो। हालांकि एनसीपी के अभी बीएमसी में एक दर्जन पार्षद भी नहीं। उसके बावजूद पवार अब मुंबई पर फोकस कर रहे। क्या हालत हो गई महाराष्ट्र के दिग्गज की। राष्ट्रपति चुनाव से सीधे गिरकर निगम चुनाव पर आ गए!</p>
<p><strong>दक्षिण पर नजर!</strong></p>
<p>ऐसा लग रहा। भाजपा उत्तर में अपना सर्वोच्च एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकी। इसीलिए उसकी नजर दक्षिण पर। कर्नाटक के अलावा अभी तक भाजपा किसी भी अन्य राज्य में ठीक से पैर नहीं जमा सकी। हालांकि तेलंगाना में केसीआर की हरकतें बता रही। भाजपा से उनको कांग्रेस से ज्यादा खतरा नजर आ रहा। इसी प्रकार ज्यों-ज्यों कांग्रेस या वामदल कमजोर होंगे। केरल में भाजपा का दायरा बढ़ेगा। वहीं, आंध्रप्रदेश में अभी जगनमोहन रेड्डी की वायएसआर कांग्रेस का जलवा। चूंकि टीडीपी लगातार गिर रही। लेकिन जगन आड़े वक्त में भाजपा के काम भी आते रहे। ऐसे में फिलहाल भाजपा उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहेगी। लेकिन भाजपा जमीन पर काम चल ही रहा होगा। हां, वह शायद खुलकर सामने नहीं आना चाहती हो। इसी प्रकार तमिलनाडु में भाजपा को एआईएडीएमके की आंतरिक लड़ाई से स्पेस मिल रहा। क्योंकि अम्मा की पार्टी की कलह सड़कों पर। जिससे भाजपा की प्रासंगिकता बढ़ रही। क्योंकि डीएमके के भाजपा पर तीखे हमले बहुत कुछ बयां कर रहे।</p>
<p><strong>सूद समेत !</strong></p>
<p>महाराष्ट्र में राजनीति अभी बाकी। नई एकनाथ शिंदे सरकार भले ही बन गई। जिसमें डिप्टी सीएम भाजपा के देवेन्द्र फड़नवीस। लेकिन अब नई सरकार का मंत्रिमंडल गठित होने की चर्चा। लेकिन अभी भी एमवीए का भूत पीछा नहीं छोड़ रहा। इस बीच, पिछली सरकार में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे मंत्री रह लिए। और अब मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे को मंत्री बनाए जाने की चर्चा। मतलब भाजपा सूद समेत उद्धव ठाकरे का कर्जा उतारने को आमादा। यहां तक कि फड़नवीस, राज ठाकरे के घर जाकर मिल आए। जिस तरीके से फड़नीवस का राज ठाकरे के घर पर स्वागत हुआ। इसके अपने मायने। हां, उद्धव ठाकरे एवं संजय राउत के बोल बहुत कुछ संकेत बता रहे। चर्चा यह भी कि पीएम मोदी और उनके अमित शाह 2014 से शिवसेना द्वारा किए गए अपमान को भुला नहीं पा रहे। इसीलिए उनका अब जवाब दिया जा रहा। ऐसे में, शिवसेना के पास बिलबिलाने के अलावा कोई विकल्प भी तो नहीं!</p>
<p><strong>हंगामा, भिड़ंत तय!</strong></p>
<p>संसद का मानसून सत्र सोमवार से राष्ट्रपति पद के लिए मतदान के साथ शुरू हो रहा। लेकिन पक्ष-विपक्ष के रवैये से लग रहा। सदन में हंगामा और भिड़ंत के आसार बन रहे। ऐसे में लगता नहीं कि सत्र शांतिपूर्ण ढंग से चलेगा। हालांकि पेगासस मामला पिछले सत्रों में चर्चा में रहा। लेकिन इस बार सत्र के पहले ही पूर्व के आदेश या रवायत टसल का कारण बन रही। पहले बुधवार को असंसदीय शब्दों पर पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। जिस पर खुद लोकसभा अध्यक्ष को भी सफाई देनी पड़ी। वहीं, अगले ही दिन संसद भवन परिसर में धरने, प्रदर्शन पर दोनों पक्षों के बीच अदावत सामने आ गई। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे आदेश संप्रग सरकार द्वारा भी जारी किए जाते रहे। इसके बावजूद कांग्रेस द्वारा यह मसला उठाया गया। इसी प्रकार नए संसद भवन की छत पर स्थापित किए गए राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर हंगामा हो चुका। मतलब कांग्रेस जितनी आक्रामक रहेगी। भाजपा उसे उतना ही चिढ़ाने वाली!</p>
<p><strong> परतें उघड़ीं !</strong></p>
<p>राष्ट्रपति पद की राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू की जीत अब महज औपचारिकता बची हुई। लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी की पसंद से विपक्ष की परतें मानो उघड़ सी गईं। राष्ट्रपति पद के लिए उन्होंने एक आदिवासी महिला को चुना। जिसके बाद विपक्ष को जवाब देते नहीं बन रहा। क्योंकि लगभग हर राज्य में वोटों की राजनीति के लिहाज से आदिवासी समाज का अपना एक गणित एवं समीकरण। ऐसे में, विरोध करे भी तो कैसे। इसीलिए जेएमएम, बसपा, शिवसेना, अकाली दल, जद-एस, यहां तक कि ओमप्रकाश राजभर भी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में आ खड़े हुए। उधर, विपक्षी यशवंत सिन्हा के समर्थन में कांग्रेस के अलावा टीएमसी, वामदल, सपा, राजद, एनसीपी, एनसी, डीएमके और आप जैसे दल ही बचे रह गए। हां, टीआरएस की यशवंत सिन्हा को समर्थन देने की मजबूरी। लेकिन ओडिशा की बीजद और आंध्रप्रदेश की वायएसआर कांग्रेस ने विरोध के लिए विरोध के बजाए राजनीतिक समझदारी दिखाई। ऐसे में 2024 के आम चुनाव से पहले विपक्षी एकता के राग की परतें उघड़ गईं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 10:45:39 +0530</pubDate>
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                <title>शिंदे महाराष्ट्र के नाथ, मुख्यमंत्री पद की ली शपथ </title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और स्वयं सरकार में शामिल न होने की घोषणा के चंद घंटों बाद ही भाजपा के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/eknath-shinde-take-oath-of-chief-minister/article-13335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/q-2-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और स्वयं सरकार में शामिल न होने की घोषणा के चंद घंटों बाद ही भाजपा के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राजभवन शाम 7 बजे एक समारोह में शिंदे और फडनवीस को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p><strong>फडनवीस ने पहले कहा, सरकार में शामिल नहीं होंगे</strong><br />शिंदे गोवा से लौटे थे और फडनवीस के साथ राज्यपाल से  मुलाकात की थी और सरकार बनाने का दावा पेश किया और उसके तुरंत बाद फडनवीस ने शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने जाने की सहमति की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वह स्वयं सरकार में शामिल नहीं होंगे, लेकिन मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के काम में पूरा सहयोग करेंगे।</p>
<p><strong>पार्टी ने दिए आदेश, तो बने डिप्टी सीएम</strong><br />उनके बयान के बाद पार्टी के अध्यक्ष ने दिल्ली में कहा कि फडनवीस को सरकार में शामिल होना चाहिए। पार्टी ने फडनवीस को उप-मुख्यमंत्री की शपथ लेने के लिए निर्देशित किया है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 10:01:14 +0530</pubDate>
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                <title> सियासी घमासान में भाजपा की एंट्री, एकनाथ शिंदे ने फडणवीस से की मुलाकात </title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के सियासी घमासान में अब भाजपा की एंट्री होती नजर आ रही है। शिवसेना के बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे एकनाथ शिंदे ने  महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वड़ोदरा में मुलाकात की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/eeknath-shinde-meet-to-fadnavis-in-mumbai/article-13036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/454564651.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी घमासान में अब भाजपा की एंट्री होती नजर आ रही है। शिवसेना के बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे एकनाथ शिंदे ने  महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वड़ोदरा में मुलाकात की। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह के भी वड़ोदरा में होने की खबर है लेकिन इस मुलाकात में ये मौजूद थे या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि शाह सर्किट हाउस में रुके हुए थे। शिंदे गुवाहाटी से रात 10.30 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुए। वे दिल्ली से चार्टर प्लेन से वड़ोदरा पहुंचे। फडणवीस भी मुम्बई से करीब 9 बजे दिल्ली के रास्ते चार्टर प्लेन से वडोदरा के लिए निकले। दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे वातचीत हुई। इसके बाद दोनों ही रवाना हो गए।</p>
<p><strong>अविश्वास प्रस्ताव किया खारिज</strong> <br />महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को शनिवार को खारिज कर दिया। यह नोटिस एकनाथ शिंदे ने भेजा था।</p>
<p><strong>बागी 16 विधायकों को नोटिस</strong><br />सूत्रों के अनुसार जिरवाल के कार्यालय ने बताया कि सेना बागी 16 विधायकों की सदन सदस्यता समाप्त करने के नोटिस भेजे गए हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए मुम्बई में हाजिर होने को कहा गया है।</p>
<p><strong>हम कोई नई पार्टी नहीं बनाएंगे : केसरकर</strong> <br />शिव सेना के बागी विधायकों में से एक दीपक वसंत केसरकर ने शनिवार को गुवाहाटी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कहा कि वह कोई नई पार्टी नहीं बनायेंगे। गुवाहाटी में बागी विधायकों की बैठक के बाद केसरकर ने कहा कि हमारे गुट के नेता एकनाथ शिंदे हैं और हम न तो कोई नई पार्टी बनाएंगे और न ही किसी पार्टी में विलय करेंगे। हमारे पास विधायकों के संख्या अधिक है इसलिए हम ही असली शिव सेना हैं, हमने अभी शिव सेना छोड़ी नहीं है। हम शिव सेना के टिकट पर चुनाव लड़े थे, इसलिए हम अभी भी शिव सैनिक हैं और हमारे पास दो तिहाई बहुमत है, ऐसे में विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल हमें अयोग्य नहीं ठहरा सकते। हमें जिरवाल की नोटिस स्वीकार नहीं है और वह इसके खिलाफ अदालत में जाएंगे। पार्टी ने बैठक के लिए व्हिप जारी किया था लेकिन व्हिप बैठक के लिए नहीं बल्कि विधानसभा में मतदान के समय उपयोग किया जाता है, इसलिए उनका व्हिप जारी करना गलत था।</p>
<p><strong>शिवसेना बाल ठाकरे की विचारधारा का पालन करेगी : राउत</strong><br /><strong>कार्यकारिणी की बैठक में छह प्रस्ताव पारित</strong><br />शिव सेना कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के विद्रोहियों समेत हिंदुत्व के मुद्दे पर भी चर्चा हुई और इसमें छह प्रस्ताव पारित किए गए।<br />- शिवसेना बालासाहब की हिंदुत्व की विचारधारा का पालन करेगी।<br />- बागियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उद्धव के पास बागियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है।  <br />- जो चले गए हैं वे बालासाहब के नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकते।<br />- ऐसा करने वालों के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत करेंगे। <br />- जिन नेताओं ने शिवसेना छोड़ दी है, वे शिवसेना और बालासाहेब के नाम पर वोट नहीं मांगें।<br />- हम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे।</p>
<p><strong>बागी विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन</strong><br />पुणे, ओस्मानाबाद और नांदेड़ में शिव सेना कार्यकर्ताओं ने शनिवार को अपनी पार्टी के बागी विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा उनके कार्यालयों में घुसकर तोड़ फोड़ की। ओस्मानाबाद में बागी विधायक तानाजी सावंत के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जो एकनाथ शिंदे की शिविर में शामिल हो गए हैं। शिवसेना कार्यकर्ताओं का एक समूह सावंत के कार्यालय के सामने जमा हो गया और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 10:55:58 +0530</pubDate>
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                <title>उद्धव ठाकरे की मुश्किलें नहीं हो रही कम, एकनाथ शिंदे के खेमे में गए शिवसेना के 2 और विधायक </title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। शिवसेना के दो और विधायक एकनाथ शिंदे के खेमे में चले गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/2-mla-went-to-camp-of-eknath-shinde/article-12891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/1-copy13.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। शिवसेना के दो और विधायक एकनाथ शिंदे के खेमे में चले गए। दूसरी तरफ शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि हम एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के लिए तैयार हैं। बस शिंदे मुंबई आकर उद्धव से बात करें। इसके अलावा बीजेपी ने शिंदे को सरकार बनाने का ऑफर भेज दिया है।</p>
<p>राउत के बयान के बाद राकांपा की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। राकांपा ने कहा है कि राउत सोच-समझ कर बयान दे। ऐसे बयानों से गठबंधन सरकार को खतरा हो सकता है।</p>
<p><strong>नौ सांसद भी छोड़ेंगे उद्धव का साथ</strong><br />वर्तमान हालात के बाद अब शिवसेना टूट की कगार पर नजर आ रही है। विधायकों की तरह ही शिवसेना के 19 में से करीब 8-9 सांसद भी उद्धव का साथ छोड़ सकते है। इनमें से ज्यादातर सांसद कोंकण, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र से है। इनमें से वाशिम की शिवसेना सांसद भावना गवली का नाम सबसे प्रमुख बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार ये सांसद सत्ता परिवर्तन का इंतजार कर रहे हैं और शिंदे के हाथ में शिवसेना की पूरी कमान आते ही ये उद्धव से अलग हो जाएंगे।</p>
<p><strong>शिंदे का नया गेम : पूर्व पार्षदों को साथ लाएंगे</strong><br />उधर शिंदे 400 पूर्व पार्षदों को अपने साथ लाकर उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ समय बाद ही वहां मुम्बई नगरपालिका के चुनाव होने वाले हैं।  </p>
<p><strong>इस राजनीतिक संकट के पीछे भाजपा का हाथ : पवार</strong> <br />राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट में भाजपा का हाथ है। उन्होंने सवाल किया कि शिव सेना के बागी विधायकों की गुवाहाटी में किसने व्यवस्था की। पवार ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि वर्तमान सरकार अल्पमत में है या नहीं इसका फैसला तो विधानसभा में ही होगा और सदन में बहुमत सिद्ध करने के समय बागी विधायक भी सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे। जब सभी विधायक वापस आएंगे, तभी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने कहा कि महा विकास अघाड़ी समस्या का निराकरण मिलकर करेगी।</p>
<p><strong>दल ने फैसला सराहा</strong><br />इस बीच शिंदे का एक बयान सामने आया है। वे गुवाहाटी में रुके बागी विधायकों से कह रहे हैं कि एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी, जो सुपर पावर है, ने ऐतिहासिक फैसले लेने के लिए उनकी सराहना की है। उस पार्टी ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, शिंदे ने खुलकर किसी पार्टी का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन इसे बीजेपी से जोड़कर देखा जा रहा है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 09:57:08 +0530</pubDate>
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                <title>शिंदे होंगे हाईकोर्ट के नए सीजे</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मानते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएस शिंदे को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-shinde-will-be-the-new-cj-of-the-high-court/article-12611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546519.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मानते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएस शिंदे को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। न्यायाधीश शिंदे राजस्थान के 39वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनका कार्यकाल 1 अगस्त तक रहेगा। ऐसे में केंद्र सरकार के नियुक्ति आदेश जारी से सेवानिवृत्ति तक उनका राजस्थान में कुल कार्यकाल करीब डेढ़ माह का रहेगा। जस्टिस शिंदे वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट में वरिष्ठता क्रम में तीसरे नंबर पर हैं। जस्टिस अकील कुरैशी की सेवानिवृत्ति के बाद से फिलहाल जस्टिस एमएम श्रीवास्तव एक्टिंग सीजे के तौर पर काम कर रहे हैं।</p>
<p>शिंदे ने औरंगाबाद के मराठवाड़ा विश्वविद्यालय(अब डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय कहा जाता है) से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1989 से बतौर अधिवक्ता बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। वहीं बाद में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने अतिरिक्त लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्त किया। सरकार  को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट नियुक्त किया। उन्हें प्रभारी गवर्नमेंट एडवोकेट नियुक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया। इसके बाद उन्हें 17 मार्च, 2008 को बॉम्बे हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया और बाद में स्थायी कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 11:24:38 +0530</pubDate>
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                <title>जस्टिस शिंदे होंगे राजस्थान हाईकोर्ट के नए सीजे</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश संभाजी शिवाजी शिंदे को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--justice-shinde-will-be-the-new-cj-of-rajasthan-high-court/article-9957"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jsutice-shinde.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के पांच हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार को अपनी सिफारिश भेजी है। कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश संभाजी शिवाजी शिंदे को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है। केन्द्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद जल्द ही राष्ट्रपति भवन से इनके नियुक्ति वारंट जारी किए जाएंगे। जस्टिस शिंदे वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट में वरिष्ठता क्रम में तीसरे नंबर पर हैं। जस्टिस अकील कुरैशी की सेवानिवृत्ति के बाद से फिलहाल जस्टिस एमएम श्रीवास्तव एक्टिंग सीजे के तौर पर काम कर रहे हैं।</p>
<p>दो अगस्त 1960 को जन्मे जस्टिस शिंदे ने औरंगाबाद के मराठवाडा विश्वविद्यालय जिसे अब डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय कहा जाता है, से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नवंबर 1989 से बतौर अधिवक्ता बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। वहीं बाद में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने अतिरिक्त लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्त किया। महाराष्ट्र सरकार ने 29 अक्टूबर 1997 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट नियुक्त किया गया। वहीं 16 मई 2002 को उन्हें प्रभारी गवर्नमेंट एडवोकेट नियुक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया गया। इसके बाद उन्हें 17 मार्च 2008 को बॉम्बे हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्ति किया गया और बाद में स्थाई जज नियुक्त किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 17:22:17 +0530</pubDate>
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