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                <title>police cyber crime - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>police cyber crime RSS Feed</description>
                
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                <title>सावधान- डिलीवरी एजेंट का एक फोन कॉल खाली कर सकता है आपका बैंक खाता : राजस्थान पुलिस ने जारी की USSD स्कैम एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने साइबर ठगी के एक बेहद खतरनाक और नए तरीके USSD आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम का खुलासा किया है। महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम के मार्गदर्शन में जारी इस एडवाइजरी में बताया गया है कि कैसे ठग डिलीवरी एजेंट बनकर आपकी कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए आपकी डिजिटल पहचान और जमापूंजी पर डाका डाल रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/be-careful-one-phone-call-from-delivery-agent-can-empty/article-138211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने साइबर ठगी के एक बेहद खतरनाक और नए तरीके USSD आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम का खुलासा किया है। महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम के मार्गदर्शन में जारी इस एडवाइजरी में बताया गया है कि कैसे ठग डिलीवरी एजेंट बनकर आपकी कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए आपकी डिजिटल पहचान और जमापूंजी पर डाका डाल रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या है USSD स्कैम और कैसे जाल बिछाते हैं अपराधी</strong><br />उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि इस नए ट्रेंड में अपराधी कूरियर या डिलीवरी सर्विस एजेंट बनकर नागरिकों से संपर्क करते हैं। वे पार्सल की डिलीवरी कन्फर्म करने या उसे रीशेड्यूल करने का बहाना बनाकर पीड़ित को झांसे में लेते हैं। इसके बाद पीड़ित को एसएमएस के जरिए एक कोड भेजा जाता है जो अक्सर '21', '61' या '67' से शुरू होता है और उसके पीछे ठग का मोबाइल नंबर होता है। अपराधी इस कोड को डायल करने का दबाव बनाते हैं, जिसे USSD (अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डेटा) कहा जाता है।</p>
<p><strong>कॉल फॉरवर्ड होते ही ठगों के पास पहुँच जाते हैं आपके बैंक ओटीपी</strong><br />जैसे ही पीड़ित अपने फोन से यह कोड डायल करता है, उसके मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सेवा अपने आप सक्रिय हो जाती है। इसके बाद पीड़ित के फोन पर आने वाले सभी महत्वपूर्ण कॉल, बैंक पेमेंट के ओटीपी वेरिफिकेशन कॉल, और यहाँ तक कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम के ऑथेंटिकेशन कोड सीधे ठग के फोन पर चले जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि अपराधी पीड़ित के बैंक खातों से अनधिकृत वित्तीय लेनदेन कर लेते हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी हैक कर लेते हैं।</p>
<p><strong>सुरक्षा के अचूक उपाय: ##002# करे डायल</strong><br />साइबर क्राइम शाखा ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर कोई भी कोड डायल न करें। यदि आपको संदेह है कि आपकी कॉल फॉरवर्ड हो रही है, तो तुरंत ##002# डायल करें, जिससे सभी कॉल फॉरवर्डिंग सेवाएं तुरंत कैंसिल हो जाएंगी। इसके अलावा, किसी भी कूरियर की जानकारी हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर नंबर से ही वेरिफाई करें और एसएमएस या व्हाट्सएप पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।</p>
<p><strong> धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहाँ करें रिपोर्ट</strong><br />डीआईजी शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बैंक द्वारा भेजे जाने वाले जागरूकता संदेशों को अनदेखा न करें। यदि किसी के साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर या राजस्थान पुलिस के व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9256001930 और 9257510100 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 14:11:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साइबर ठग अपना रहे धोखाधड़ी के नए-नए तौर तरीके, साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए जारी की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी के प्रति आमजन को सचेत किया है। हाल ही में अपराधी एक नया तरीका अपना रहे हैं। वे आम नागरिकों को कॉल कर स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं और उन्हें धमकाते हैं कि उनका मोबाइल नंबर या आधार नंबर दिल्ली में हाल ही में हुई कार ब्लास्ट जैसी गंभीर आपराधिक घटना से जुड़ा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cyber-thugs-are-adopting-new-methods-of-fraud-cyber-crime/article-132113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/cyber-security.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी के प्रति आमजन को सचेत किया है। हाल ही में अपराधी एक नया तरीका अपना रहे हैं। वे आम नागरिकों को कॉल कर स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं और उन्हें धमकाते हैं कि उनका मोबाइल नंबर या आधार नंबर दिल्ली में हाल ही में हुई कार ब्लास्ट जैसी गंभीर आपराधिक घटना से जुड़ा हुआ है। डीआईजी साइबर विकास शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधी पीड़ित को डराकर अपने सीनियर अधिकारी से बात कराने की बात कहते हैं और उन्हें मानसिक रूप से दबाव में ले आते हैं।</p>
<p>दबाव बनाने के बाद वे आमजन से उनकी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक-यूपीआई विवरण मांगते हैं या उन्हें वीडियो कॉल पर वेरिफिकेशन के बहाने धमकाकर धनराशि की मांग करते हैं। यह तरीका लोगों में डर पैदा करके उन्हें तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर करता है जिससे वे अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं। डीआईजी शर्मा ने बताया कि ऐसी कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन, डायल 112 अथवा साइबर हेल्प डेस्क पर संपर्क करें।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 11:24:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साइबर अपराधियों पर कार्रवाई : ऑनलाइन गैमिंग में दस करोड़ की ठगी करने वाले नौ गिरफ्तार, भारी मात्रा में बैंक पास बुक चैक बुक और हिसाब के रजिस्टर बरामद </title>
                                    <description><![CDATA[10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार। वारदात में इस्तेमाल 56 एटीएम कार्ड, 32 मोबाइल, फर्जी कंपनी की सील और अन्य दस्तावेज बरामद। आरोपियों पर राजस्थान समेत कई राज्यों में 30 से ज्यादा शिकायतें दर्ज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nine-arrested-for-cheating-rs-10-crore-in-online-gaming/article-129151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर दक्षिण के पत्रकार कॉलोनी और श्याम नगर थाना इलाके में पुलिस ने साइबर अपराधियों पर कार्रवाई करते हुए करीब 10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर कब्जे से वारदात में प्रयुक्त 56 एटीएम कार्ड, 32 मोबाइल और सिमकार्ड, 11 बैंक पासबुक, पांच पेन कार्ड, लैपटॉप, फर्जी कम्पनी की सील मोहर, दो हिसाब-किताब के रजिस्टर और आठ चैक बुक बरामद किए हैं। गैंग से मिले बैंक खातों में राजस्थान, झारखण्ड़, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु आदि राज्यों में साइबर पोर्टल पर करीब 30 से अधिक शिकायतें दर्ज है। एक साल में करीब 10 करोड़ की ठगी का खुलास हुआ है।</p>
<p><strong>बैंक खाते किराए पर लिए</strong><br />डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि पहली कार्रवाई में पत्रकार कॉलोनी थाना पुलिस ने रामस्वरूप उपाध्याय (30) गांव पांचू बीकानेर और कार्तिक जोशी उर्फ बिट्टू (21) गांव कालुवास डूंगरगढ़ बीकानेर को गिरफ्तार किया है। आरोपी ऑनलाइन सट्टा साइट पर गेम लगवाकर रैडी पैनल पर अज्ञात जनों से बैंक खाते किराए पर लेकर उनके नाम से मोबाइल सिम खरीदता है। जिनसे फ्रॉड की रकम को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करता है। आरोपियों से वारदात में प्रयुक्त उपकरण और सामग्री बरामद कर ली है। जिस पर अनुसंधान जारी है। डीसीपी ने कहा कि दूसरी कार्रवाई श्यामनगर थाना इलाके में की गई।</p>
<p>जिसमें आरोपी शेख मोलाली (30) नाडियापल्ली टूटोन वैयत सर आंध्र प्रदेश, रायपुरी कुमारी (26) कुमरपल्ली एससी कॉलोनी वैयतसर, आंध्रप्रदेश, कुडडुमला पवन कुमार रैडडी (26) माडूगू जमाला बेयतसर आंध्रप्रदेश, एसएम घोष लाजम (37) दस्तीगीरपेट प्रदूदूर वैयतसर दूटेन आंध्रप्रदेश, करण सिंह (19) चतरपुरा शाहपुरा भीलवाडा हाल गांधी पथ वैशाली नगर, अमन कुमार (32) गोल्यावास मानसरोवर और संदीप उर्फ सीनू नारनोलिया (21) उदयपुरवाटी गुढागौड़जी झुन्झुनंू हाल साकेत कॉलोनी किरण पथ को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे शेयर मार्केट के नाम पर ठगी को अंजाम देते हैं। गैंग का मुख्य सरगना एसएम घोष गैंग को आन्ध्रप्रदेश से डील करता है। करीब दो करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी करना कबूल किया है। इनसे वारदात में प्रयुक्त सामग्री को बरामद किया गया है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 11:10:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गलत यूपीआई से हो गया है भुगतान, तो न हों परेशान, वापस रकम पाने के लिए पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायत दर्ज करने के बाद अपने बैंक जाएं। वहां आपको एक खास फॉर्म भरना होगा, जिसमें आपको गलत लेनदेन से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-wrong-upi-has-not-been-paid-the-police-issued/article-120746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/88842roer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। यदि आपसे गलत यूपीआई से किसी को भुगतान हो गया है तो परेशान मत होइए। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने हेल्पलाइन नम्बर 18001201740 जारी किया है। उस पर अपनी शिकायत तुंरत दर्ज कराए, जिससे आपके रुपए वापस मिल जाएंगे। महानिरीक्षक साइबर क्राइम शरत कविराज के निर्देशन में साइबर पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी है। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि अगर गलती से आपने किसी गलत खाते में ऑनलाइन भुगतान कर दिया है तो सबसे पहले तुरंत हेल्पलाइन नंबर 18001201740 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। यह नंबर विशेष रूप से ऐसे मामलों के लिए ही जारी किया गया है।</p>
<p>शिकायत दर्ज करने के बाद अपने बैंक जाएं। वहां आपको एक खास फॉर्म भरना होगा, जिसमें आपको गलत लेनदेन से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। गलत पेमेंट होने पर आपके फोन पर जो मैसेज आता है, उसे डिलीट न करें। इस मैसेज का एक स्क्रीनशॉट लें और उसका प्रिंट आउट निकलवाकर बैंक में जमा करें।तीन दिन में शिकायत दर्ज कराना जरूरी एसपी शांतनु कुमार ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक दिशा <br />निर्देशों के अनुसार यदि गलती से गलत खाते में पैसे चले जाते हैं तो इसकी शिकायत भुगतान होने के तीन दिन के भीतर करनी अनिवार्य है। गलत यूपीआई पेमेंट के अलावा साइबर ठगी से बचने के लिए उन्होंने आमजन से अपील की है। बैंक खाता संख्या, कार्ड नंबर, सीवीवी, पिन, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग का कोई भी विवरण कभी भी किसी के साथ साझा न करें। </p>
<p>याद रखें, बैंक या कोई भी विश्वसनीय संस्था आपसे ऐसी जानकारी फोन पर नहीं मांगती। किसी भी तरह की परेशानी या संदेह होने पर अपने नजदीकी पुलिस थाने की साइबर हेल्पडेस्क से संपर्क करें। आप पुलिस मुख्यालय की हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 या 9257510100 पर भी कॉल कर सकते हैं। अगर आपके साथ कोई भी साइबर धोखाधड़ी होती है तो इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें, या फिर साइबर क्राइम रिपोटिंर्ग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। आप सीधे अपने निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में भी रिपोर्ट कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 11:22:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सावधान हो जाएं! लॉटरी के झांसे में न आएं, यह साइबर ठगों का नया पैंतरा : कोरियर से कूपन भेजकर लाखों ठग रहे अपराधी</title>
                                    <description><![CDATA[कूपन स्क्रैच करने पर उसमें 10 से 15 लाख रुपए और एक चार-पहिया गाड़ी लॉटरी में मिलने का आकर्षक स्टिकर लगा होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/be-careful-do-not-get-into-the-lottery-with-these/article-119165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/cyber-crim-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने लॉटरी निकलने के नाम पर हो रही धोखाधड़ी को लेकर आम जनता को आगाह किया है। एक नई एडवाइजरी जारी कर पुलिस ने साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपाय बताए हैं। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार ने बताया कि साइबर अपराधी कॉल कर बताते हैं आप किसी नामी-गिरामी कम्पनी की लॉटरी में चुने गए हैं। इसके बाद वे आपके पते पर भारतीय पोस्ट के जरिए एक लॉटरी का पत्र और स्क्रैच कूपन भेजते हैं। जब यह कोरियर मिल जाता है तो ठग दोबारा कॉल करते हैं और कूपन को स्क्रैच करने को कहते हैं।</p>
<p>कूपन स्क्रैच करने पर उसमें 10 से 15 लाख रुपए और एक चार-पहिया गाड़ी लॉटरी में मिलने का आकर्षक स्टिकर लगा होता है। इसके बाद अपराधी पीड़ित को लॉटरी पत्र में दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने को कहते हैं। जब पीड़ित इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करता है तो साइबर अपराधी उसे पूरी तरह से विश्वास में ले लेते हैं। इनाम की राशि दिलाने के बहाने वे विभिन्न टैक्सों, गाड़ी रास्ते में होने या पैसे वापस मिल जाने जैसे झूठे बहाने बनाते हुए पीड़ित से लगातार रुपए ऐंठते रहते हैं। उनका मकसद ज्यादा से ज्यादा पैसा ठगना होता है और वे बार-बार अधिक पैसे की मांग करते रहते हैं। </p>
<p><strong>साइबर धोखाधड़ी से खुद को कैसे बचाएं</strong><br />सबसे पहले यह तय करें कि आपने कोई लॉटरी टिकट खरीदा ही नहीं है तो आपकी लॉटरी कैसे निकल सकती है। लॉटरी के विजेताओं की घोषणा हमेशा सार्वजनिक रूप से और कम्पनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर की जाती है। यदि आपको ऐसी कोई सूचना मिलती है तो बिना देर किए संबंधित कम्पनी की वेबसाइट पर जाकर इसकी सत्यता की जांच करें। यदि धोखाधड़ी के शिकार होते हैं या आपको ऐसा कोई संदिग्ध कॉल-कोरियर मिलता है तो इसकी सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। आप साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं या अपने निकटतम पुलिस स्टेशन-साइबर पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 11:38:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>साइबर क्राइम की दुनिया समझने के लिए पुलिस को किया जाएगा मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[साइबर क्राइम किस संस्था के अधीन रखा जाए। इस पर गृह विभाग मंथन करेगा। इसके लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार की अध्यक्षता में बैठक की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-pplice-will-be-strengthened-to-understand-cyber-crime/article-10074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/companycyber-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। साइबर क्राइम किस संस्था के अधीन रखा जाए। इस पर गृह विभाग मंथन करेगा। इसके लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार की अध्यक्षता में बैठक की जाएगी। प्रदेश में साइबर क्राइम फिलहाल एसओजी के अधीन है। साइबर क्राइम के मामले में भी राजस्थान की पुलिस काफी पीछे है। इसे अभी साइबर क्राइम की दुनिया को समझने की जरूरत है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि राज्य की साइबर क्राइम ब्रांच को मजबूत बनाया जाए। इसी मकसद से मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश बजट में सेंटर फॉर साइबर सिक्यूरिटी के लिए 50 करोड़ की घोषणा की है। इसमें प्रत्येक जिले में अलग से साइबर थाना और हर थाने में साइबर डेस्क बनाई जाएगी। अभी स्टेट लेवल का साइबर क्राइम एसओजी के पास है, जबकि साइबर क्राइम का प्रशिक्षिण राजस्थान पुलिस अकादमी में दिया जाता है। इनके अलावा पुलिस विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भी साइबर क्राइम से संबंधित जांच की जाती है। सूत्रों के अनुसार गृह विभाग चाहता है कि साइबर क्राइम की दुनिया को समझने और उससे संबंधित मामलों को समझने के लिए एक ही विभाग का पर्यवेक्षण हो।</p>
<p><strong>दो महकमों में हो चुकी है गलतफहमी</strong><br />प्रदेश में महिलाओं और बच्चों को साइबर अपराध से बचाने के लिए साइबर क्राइम प्रीवेकंशन अगेंस्ट वूमन एंड चिल्ड्रेन शुरू करने को लेकर राजस्थान पुलिस अकादमी और पुलिस विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अफसरों के बीच गलतफहमी हो चुकी है। इन दोनों विभागों का यह विवाद गृह विभाग तक भी पहुंच गया। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय को पत्र लिख कर सीसीपीडब्लूसी को एफएसएल को सौंपने को लिखा था, किन्तु पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने इस संबंध में पुनर्विचार करने के लिए गृह विभाग को अनुरोध किया। पीएचक्यू की मंशा है कि यह आरपीए के अधीन हो।  साइबर क्राइम को लेकर शुक्रवार को बैठक बुलाई गई है। इस विचार किया जाएगा कि किस तरह साइबर क्राइम ब्रांच को मजबूत किया जाए।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 10:45:37 +0530</pubDate>
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