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                <title>archery - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स : तीरन्दाज अंशिका ने बताया अपनी जीत का फार्मूला, कहा- तनाव को हंसी में उड़ा दो, वर्तमान पर फोकस करो</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के दौरान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की अंशिका कुमारी ने रिकर्व तीरंदाजी में शानदार वापसी करते हुए स्वर्ण पदक जीता। दूसरे सेट में खराब प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने मुस्कुराते हुए खुद को संभाला और अगले सेट जीत लिए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती अंशिका का लक्ष्य अब एशियन गेम्स में भारतीय टीम में जगह बनाकर पदक जीतना है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/khelo-india-university-games-archer-anshika-told-her-winning-formula/article-134040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फाइनल के एक सेट में बेहद खराब शूटिंग, सामान्यत: कोई भी तीरंदाज इसका दबाव झेल नहीं पाता, लेकिन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की 23 वर्षीय अंशिका कुमारी इसके बाद भी मुस्कुराती रहीं।</p>
<p>यही मुस्कान उनके लिए सोने का तीर बन गई। जगतपुरा शूटिंग रेंज पर महिलाओं की रिकर्व तीरन्दाजी के फाइनल सृष्टि जायसवाल के खिलाफ अंशिका का दूसरा सेट बिगड़ गया। अंशिका ने शांत भाव में कोच से मशविरा किया, मुस्कुराते हुए खुद को पॉजिटिव रखा। नतीजा यह रहा कि अगले दो सेट उन्होंने आसान अंदाज में जीतकर खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।</p>
<p>साई मीडिया से बातचीत में अंशिका ने कहा- मैं हर हार के बाद हंस देती हूं, सोचती हूं, चलो ये मैच भी नहीं था मेरा, अब अगले पर ध्यान देते हैं। असल में बात यही है कि वर्तमान पर ध्यान रखो, एक-एक तीर को जीयो और तनाव को हंसी में उड़ा दो। आज यही किया और जीत मिली। अंशिका ने स्कूली स्तर पर तीरन्दाजी की शुरुआत की और नेशनल्स में केन्द्रीय विद्यालय की पहली गोल्ड मेडलिस्ट बनी। फिर एसएआईएल और एसएआई एकेडमी कोलकाता में अपने खेल को निखारा। मौजूदा साल अंशिका के लिए शानदार रहा। वे नेशनल टीम में चुनी गईं और तीनों वर्ल्ड कप में उतरीं। अंशिका ने कहा, हार ने मुझे तकनीकी तौर पर मजबूत बनाया। अंशिका ने कहा कि अब उनका लक्ष्य अगले साल होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल में जगह बनाना और फिर देश के लिए पदक जीतना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:57:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>आर्चरी के कॉम्पीटिशन मैनेजर सुरेन्द्र सिंह ने किया जगतपुरा शूटिंग रेंज का ग्राउंड निरीक्षण, तीरन्दाजी की प्रतियोगिताएं मुख्य मैदान पर कराने का दिया सुझाव</title>
                                    <description><![CDATA[केआईयूजी की गेम्स टेक्निकल कंडक्ट कमेटी की ओर से आर्चरी इवेंट के लिए नियुक्त कॉम्पीटिशन मैनेजर सुरेन्द्र सिंह ने जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/competition-manager-of-archery-surendra-singh-did-the-ground-inspection/article-127752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआईयूजी) की गेम्स टेक्निकल कंडक्ट कमेटी (जीटीसीसी) की ओर से आर्चरी इवेंट के लिए नियुक्त कॉम्पीटिशन मैनेजर सुरेन्द्र सिंह ने जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां तीरंदाजी प्रतियोगिता के आयोजन की संभावनाओं पर खेल परिषद के प्रशिक्षकों से चर्चा की। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि वे अपनी विस्तृत रिपोर्ट भारतीय खेल प्राधिकरण, जीटीसीसी और खेल परिषद को सौंपेंगे। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में शूटिंग रेंज पर प्रतियोगिता आयोजित करने से पहले बड़े स्तर पर काम किया जाना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड में हुए राष्ट्रीय खेलों की तरह आर्चरी प्रतियोगिताएं जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के मुख्य मैदान पर आयोजित कराना खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए अधिक उपयुक्त रहेगा। मुख्य मैदान पर उद्घाटन और समापन समारोह के अलावा कोई इवेंट भी प्रस्तावित नहीं है।</p>
<p><strong>खेल संघों की बैठक बुलाई :</strong></p>
<p>इस बीच राजस्थान खेल परिषद ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में शामिल सभी खेलों के अध्यक्ष और सचिव की 25 सितम्बर को एसएमएस स्टेडियम के अर्जुन हॉल में बैठक बुलाई है। सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक में परिषद के अध्यक्ष डा. नीरज के पवन खेल संघों के साथ आयोजन पर चर्चा करेंगे।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों को मिलेगा बेहतर माहौल :</strong></p>
<p>सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों में तीरन्दाजी के मुकाबले देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में कराए गए थे। उन्होंने कहा कि यहां भी मुख्य स्टेडियम में इवेंट कराने से खिलाड़ियों को बेहतर माहौल और अनुभव मिलेगा, वहीं दर्शकों के बैठने और देखने की व्यवस्था भी पहले से ही बेहतरीन है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर वे शीघ्र ही राजस्थान खेल परिषद अध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार पवन से मुलाकात कर चर्चा करेंगे।</p>
<p><strong>शूटिंग रेंज पर काफी सुधार की जरूरत :</strong></p>
<p>सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि रखरखाव के अभाव में शूटिंग रेंज की वर्तमान स्थित ज्यादा ठीक नहीं है। समुचित रखरखाव नहीं होने की वजह से रेंज परिसर, कमरों और ग्राउण्ड पर काफी गन्दगी जमा है और शौचालय टूटे और अनुपयोगी हालात में हैं। वहीं आर्चरी ग्राउण्ड को भी प्रतियोगिता से पहले समतल करने और घास लगाने की जरूरत होगी। इसके अलावा बिल्डिंग की मरम्मत और रंगरोगन भी कराना होगा, ताकि इवेंट के दौरान एरिना सुन्दर और आकर्षक लगे। साथ ही बिजली और पानी की सप्लाई भी दुरुस्त कराई जानी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 12:00:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वूमेन नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी : तेज गर्मी में 400 से ज्यादा महिला तीरंदाजों ने साधे निशाने, खुशबू, शिवानी और खुशी रैंकिंग राउण्ड में टॉप-3 में </title>
                                    <description><![CDATA[एनटीपीसी खेलो इंडिया वूमेन नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी के पहले दिन देशभर से आई चार सौ से ज्यादा महिला तीरन्दाजों ने निशाने साधे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/womens-national-ranking-archery-in-the-scorching-heat-more-than/article-111299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तेज गर्मी के बावजूद जगतपुरा स्थित तीरंदाजी रेंज पर आयोजित एनटीपीसी खेलो इंडिया वूमेन नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी के पहले दिन देशभर से आई चार सौ से ज्यादा महिला तीरन्दाजों ने निशाने साधे। गर्मी से बचाव के लिए खिलाड़ी स्कोरिंग के लिए जाते हुए छातों का सहारा लेती नजर आईं। प्रतियोगिता में सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर वर्गों की रिकर्व और कंपाउंड दोनों श्रेणियों में टॉप-16 रहीं महिला प्रतिभागियों ने पदक राउण्ड के लिए क्वालीफाई किया। रैंकिंग राउण्ड में राजस्थान की खुशबू, शिवानी और खुशी ने अपने- अपने वर्ग में टॉप-3 में रहते हुए पदक राउण्ड में जगह बनाई। </p>
<p>इससे पूर्व भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती एकता अग्रवाल ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान एथलेटिक्स एसोसिएशन के महासचिव देवनारायण गुर्जर ने की। राजस्थान तीरंदाजी संघ के महासचिव सुरेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि प्रतियोगिता को तकनीकी रूप से सफल बनाने हेतु भारतीय तीरंदाजी संघ द्वारा 10 अनुभवी तकनीकी अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल को प्रतियोगिता के दूसरे दिन मेडल मुकाबले आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 11:54:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>10 साल के दर्शिल नागर सीनियर तीरंदाजी में दिखाएंगे दम</title>
                                    <description><![CDATA[दर्शील नागर ने महज 7.5 साल की उम्र से ही तीर चलाना शुरू कर दिया था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/10-year-old-darshil-nagar-will-show-his-prowess-in-senior-archery/article-91825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहते हैं कि काबिलियत और प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और पूत के लक्षण पालने में ही दिख जाते हैं। इन्हीं कहावतों के उदाहरण के कोटा के दर्शील नागर जो हैं तो सिर्फ 10 साल के लेकिन खेलेंगे सीनियर प्रतियोगिता में। दर्शील इससे पहले भी राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर सीनियर वर्ग में खेल चुके हैं। जिस उम्र में बच्चे मां की गोद से नहीं उतरा करते हैं, उस उम्र में दर्शील तीरंदाजी में राज्य स्तर प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीत चुके हैं। जिसके बाद इस बार फिर से प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं।</p>
<p><strong>साढ़े सात साल की उम्र से चलाना शुरू किया तीर</strong><br />दर्शील नागर ने महज 7.5 साल की उम्र से ही तीर चलाना शुरू कर दिया था। जिसके बाद नियमित अभ्यास कर रहे हैं। दर्शील के पिता वीरेंद्र नागर ने बताया कि दर्शील घर पर अपनी बहन के साथ अकेला रहता था तो मोबाइल और टीवी देखने की आदत पड़ने लग गई थी। जिसके बाद हमने आदत को खत्म करने के लिए इसे अलग अगल खेलों में खेलने के लिए भेजा तो दर्शील ने सबसे ज्यादा रूची तीरंदाजी में दिखाई। जिसके बाद इसे छावनी स्थित श्री पंचमुखी तीरंदाजी अकेडमी में भर्ती करा दिया। जहां लगातार अभ्यास करने के बाद एक साल में ही दर्शील ने राज्य स्तरीय में पदक जीत लिया। दर्शील छोटी सी उम्र में ही आॅलंपिक जाने की इच्छा रखता है और उसके लिए मेहनत भी खूब करता है।</p>
<p><strong>सुबह तीरंदाजी फिर स्कूल  शाम को तीरंदाजी</strong><br />मात्र 10 के दर्शील नागर एक वयस्क खिलाड़ी की तरह अपना रूटीन फॉलो करते हैं। कोच बृजपाल सिंह ने बताया कि दर्शील सुबह 5 बजे ही उठ जाते हैं जिसके बाद वार्म अप और स्ट्रेचिंग कर 7.30 बजे स्कूल की ड्रेस में ही अकेडमी पहुंच जाते हैं। जहां लगभग दो घंटे का अभ्यास करने के बाद दर्शील स्कूल चला जाता है। वहीं स्कूल से दो बजे घर आने के बाद खाना खाकर थोड़ा आराम कर शाम को 4 बजे अकेडमी पहुंच जाता है। जहां 7 बजे तक फिर से अभ्यास करता है। दर्शील के पिता वीरेंद्र नागर ने बताया कि दर्शील तीरंदाजी के लिए इतना प्रतिबद्ध है कि वो ना टीवी देखता है और ना मोबाइल चलता है, साथ ही डाइट का भी खुद से ही ध्यान रखता है और एक समय केवल दलिया और रबड़ी लेता है।</p>
<p><strong>कोटा से ये खिलाड़ी भी लेंगे भाग</strong><br />तीरंदाजी कोच बृजपाल सिंह ने बताया कि राजस्थान आर्चरी एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीरंदाजी टूनार्मेंट में कोटा से इंडियन राउंड में देवरत सिंह जादौन, स्वतंत्र सिंह, मनीष खटीक, सूर्यांशु राजावत, विनय वर्मा, खुशी राठौर तथा रिकवर राउंड में समर सिंह, कार्तिक सुवालका, शिवम गुर्जर, मयंक परिहार एवं कंपाउंड राउंड में दर्शील नागर, अरविंद सैनी के साथ बालिका वर्ग में लहर कछावा, हिमांशी राजावत भाग लेंगे। वहीं लहर कछावा हाड़ौती क्षेत्र की पहली ऐसी प्लेयर हैं जो एक महीने पहले एशियन गेम्स का ट्रायल भी दे चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2024 16:06:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Asian Gamess 2023: अंकिता, सिमरनजीत और भजन की जोड़ी ने तीरंदाजी में जीता कांस्य पदक</title>
                                    <description><![CDATA[चीन में चल रहे 19वें एशियाई खेलों में शुक्रवार को अंकिता, सिमरनजीत और भजन की भारतीय जोड़ी ने वियतनाम को हराकर महिला रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धा में कांस्य पदक जीत लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/asian-games-2023-pair-of-ankita-simranjit-and-bhajan-won/article-58876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/archry1.png" alt=""></a><br /><p>हांगझोउ। चीन में चल रहे 19वें एशियाई खेलों में शुक्रवार को अंकिता, सिमरनजीत और भजन की भारतीय जोड़ी ने वियतनाम को हराकर महिला रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धा में कांस्य पदक जीत लिया है।</p>
<p>आज यहां हुए कांस्य पदक मुकाबले में भारत की पांचवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने वियतनाम की डो थी आन एनगुएट, एनगुएन थी थान नी और हाओंग फुओंग थाओंग की टीम को 6-2 (56-52, 55-56, 57-50, 51-48) से हरा कर कांस्य पदक जीता।</p>
<p>इससे पहले, भारतीय टीम को सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया से 6-2 से हार मिली थी। इसके बाद आज भारत को वियतनाम के साथ कांस्य पदक मुकाबला में जीत हासिल हुई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 14:33:13 +0530</pubDate>
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                <title>Asian Games 2023: ज्योति और ओजस ने तीरंदाजी में कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में जीता गोल्ड</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के ज्योति वेन्नम और ओजस देवताले ने तीरंदाजी के कंपाउंड मिश्रित स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/asian-games-2023-jyoti-and-ojas-won-gold-medal-in/article-58728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/archry.png" alt=""></a><br /><p>हांगझोउ। भारत के ज्योति वेन्नम और ओजस देवताले ने तीरंदाजी के कंपाउंड मिश्रित स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया है।</p>
<p>चीन में चल रहे 19वें एशियाई खेलों में आज ज्योति और ओजस की जोड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया के सो चायवान और जू जायेहून के हराकर स्वर्ण पदक जीता। मुकाबले में ज्योति वेन्नम और ओजस देवताले ने 159 का स्कोर किया। जबकि कोरियाई जोड़ी ने 158 का स्कोर किया। भारतीय जोड़ी के सामने कोरियाई जोड़ी टिक नहीं सकी और मुकाबला हार गई। इस पदक जीतने के साथ ही भारत ने एशियाई में एक बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है।</p>
<p>इससे पहले भारतीय तीरंदाज ज्योति और ओजस ने सेमीफाइनल में कजाखस्तान की आदेल झेशेनबिनोवा और आंद्रे त्युत्युन की जोड़ी को को 159-154 से हराते हुए स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रवेश किया था। भारतीय जोड़ी ने क्वार्टरफाइनल में मलेशिया की जोड़ी मोहम्मद जुवैदी बिन माजुकी और फातिन नूरफतेहाह मेट सालेह को मात दी थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Oct 2023 12:48:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छोटे-छोटे हाथों से तीरों से निशाना साधा है कोटा की बेटियों ने</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षण देने वाले बताते हैं कि जिस अंदाज और लगन के साथ ये लड़कियां तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हैं उसे देखकर लगता है अगर इनको सरकारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए तो तीरंदाजी के क्षेत्र में कोटा की ये बेटियां अन्तरराष्टÑीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-daughters-have-shot-arrows-with-small-hands/article-43052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/chhote-chhote-haatho-se-teero-se-nishana-saadha-hai-kota-ki-betiyo-nei...kota-news..17.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कुछ सालों पहले तक जो खेल कोटा की बेटियों के लिए लगभग अंजाना था उसी खेल में यहां की बेटियों ने महज कुछ साल में ही ना केवल राज्यीय बल्कि राष्टÑीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। बात हो रही है यहां देश के तीसरे नम्बर के सबसे महंगे खेल तीरंदाजी की। इस तीरंदाजी के क्षेत्र में आज से लगभग 5 साल पहले तक कोटा की कोई बेटी भी बेटी नहीं उतरी थी लेकिन इन चंद सालों में ही नन्हे-नन्हे हाथों से शहर की बेटियों ने जो तीर मारे है उसे देखकर इस खेल के बड़े-बड़े योद्धाओं ने अचरज किया है।  उल्लेखनीय है कि कुछ सालों पहले तक तीरंदाजी को लेकर हालात ये थे कि धनुष बाण ना मिलने की वजह से यहां कोई जिला स्तरीय प्रतियोगिता भी नहीं हो पा रही थी जिसके कारण इस खेल में अपना भविष्य सवारने की ठान बैठी यहां की बेटियों में निराशा घर करने लगी, उनकी ख्वाहिशें दम तोड़ने लगी थी। लेकिन इसके बाद एक17 साल के युवक ने साल 2022 में कोटा में तीरंदाजी की अकादमी स्थापति की और उसके बाद उसने खुद मेहनत कर यहां की तीरंदाजी करने वाली बेटियों के सपनों को परवाना चढ़ाया और आज परिणाम सबके सामने हैं। जिस किशोर ने ये अकादमी खोली है उसने खुद ने मात्र 9 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी। </p>
<p>फिलहाल यहां की बेटियों को सरकार की ओर से तीरंदाजी का अभ्यास करने वाली लड़कियों को सिर्फ मैदान के नाम वैकल्पिक तौर पर 80 फीट रोड पर जमीन का वो टुकड़ा उपलब्ध करवाया गया है जो भूखन्ड पहले कचरा पात्र हुआ करता था। यहां की बेटियों को प्रशिक्षण देने वाले बताते हैं कि तीरंदाजी के क्षेत्र में कोटा की छोटी-छोटी बच्चियां भी अपना भविष्य सवारने का प्रयास कर रही हैं और जिस अंदाज और लगन के साथ ये लड़कियां तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हैं उसे देखकर तो लगता है कि अगर इनको सरकारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए तो तीरंदाजी के क्षेत्र में कोटा की ये बेटियां अन्तरराष्टÑीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। प्रशिक्षक बताते हैं कि यहां की एक ही बेटी अब तक राष्टÑीय स्तर पर खेल पाई है। यश्वी मित्तल नाम की बेटी ने महाराष्टÑ में राष्टÑीय स्तर की आयोजित तीरंदाजी प्रतियोगिता के अन्डर-14 आयु वर्ग में कांस्य पदक प्राप्त किया है। इसके अलावा खुशी राठौड़, मोनिका, कावेरी, दिव्या नायक तथा स्रेहा वर्मा सहित कई ऐसी बेटियां हैं जिन्होंने इस खेल में अपनी धाक जमाई हैं। प्रशिक्षकों का कहना हैं कि ये खेल महंगा हैं, तीरंदाजी के अभ्यास के लिए काम आने वाले धनुष-बाण की कीमत ही एक लाख रूपये प्रारम्भ होती है। लेकिन इन बेटियों के परिजन इनको वो भी उपलब्ध करवा रहे हैं। बेटियों को इनके माता-पिता का पूरा सपोर्ट मिल रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यहां की बेटियों के हौंसले में कोई कमी नहीं है। शहर की लड़कियां खूब मेहनत कर रही है। इन बेटियों का सपना ओलम्पिक में खेलकर पदक लाने का हैं। सरकार की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है। भले ही इनको अभी कोई मदद नहीं मिल रही हो लेकिन एक दिन इन की मेहनत जरुर रंग लाएगी। <br /><strong>- बृजपाल सिंह सोलंकी, कोच</strong></p>
<p> मैं करीब एक साल से तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हंू। रोजाना करीब 7 से 8 घंटे तीरंदाजी की पै्रक्टिस करती हंू। अभ्यास का पढ़ाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। माता-मिता का पूरा सपोर्ट मिल रहा है। संसाधनों के लिए जितने पैसे चाहिए परिजन देते हैं। भारत की ओर से अन्तराष्टÑीय स्तर पर खेलना मेरा सपना हैं। <br /><strong>- खुशी राठौड़, तीरंदाज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Apr 2023 15:34:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>रैंकिंग राउंड में आकर्षण रहीं ओलंपियन दीपिका</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान तीरंदाजी एसोसिएशन के सचिव सुरेन्द्र सिंह के अनुसार रैंकिंग राउण्ड के आधार पर क्वालीफाई टॉप 16 तीरन्दाज गुरुवार को नॉकआउट व्यक्तिगत, मिश्रित युगल और टीम स्पर्धा में पदकों की होड़ में उतरेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/olympian-deepika-was-the-attraction-in-the-ranking-round/article-38014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-105.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महाराजा कालेज ग्राउण्ड पर बुधवार को शुरू हुई चौथी खेलो इंडिया विमेंस रैंकिंग तीरन्दाजी के पहले दिन ओलंपियन दीपिका कुमारी समेत देश की शीर्ष रिकर्व और कंपाउंड तीरन्दाजों ने रैंकिंग राउण्ड में हिस्सा लिया। शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला और खेल मंत्री अशोक चांदना ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। डॉ. कल्ला और चांदना ने तीर से निशाना साधा और देशभर से पहुंचे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। राजस्थान तीरंदाजी एसोसिएशन के सचिव सुरेन्द्र सिंह के अनुसार रैंकिंग राउण्ड के आधार पर क्वालीफाई टॉप 16 तीरन्दाज गुरुवार को नॉकआउट व्यक्तिगत, मिश्रित युगल और टीम स्पर्धा में पदकों की होड़ में उतरेंगे। </p>
<p><strong>खिलाड़ियों को एक्सपोजर</strong><br />इस अवसर पर खेल मंत्री चांदना ने कहा कि राज्य में बड़ी खेल प्रतियोगिताएं होने से खिलाड़ियों को एक्सपोजर मिलता है और वह अपनी प्रतिभा को ज्यादा बेहतर ढंग से निखार सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। राजस्थान पहला राज्य है जहां सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए आउट आॅफ टर्न नियुक्ति पॉलिसी लागू कर 600 से अधिक खिलाड़ियों को लाभान्वित किया गया है। </p>
<p><strong>इनका किया सम्मान</strong><br />इस अवसर पर भारतीय तीरंदाजी संघ के संयुक्त सचिव शिहान हुसैनी, उपाध्यक्ष पूर्णिमा मेहतो, ओलंपियन दीपिका कुमारी, राजस्थान के अर्जुन अवार्डी रजत चौहान, पैरा ओलंपियन श्यामसुन्दर स्वामी, प्रिया गुर्जर, स्वाति दूधवाल, द्रोणाचार्य अवार्डी जीवन ज्योत सिंह का सम्मान किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 10:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीरंदाजी टीम ने जीते दो गोल्ड</title>
                                    <description><![CDATA[ कंपाउंड वर्ग की बालिका टीम स्पर्धा में प्रिया गुर्जर, सोमांशी मेड़तवाल, माया विश्नोई, यशस्वी नाथावत की टीम ने स्वर्णिम सफलता हासिल की। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच गोल्ड मैडल के लिए मुकाबला 230  अंकों से बराबर रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/archery-team-won-two-gold/article-28907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s-11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय तीरंदाजी महासंघ के तत्वावधान में पणजी में चल रही 42वीं एनटीपीसी राष्ट्रिय जूनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता में राजस्थान की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कंपाउंड वर्ग में दो स्वर्ण पदक जीत लिए। राजस्थान तीरंदाजी संघ के महासचिव सुरेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि राजस्थान की प्रिया गुर्जर ने कंपाउंड वर्ग की बालिका रैंकिंग स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। वहीं कंपाउंड वर्ग की बालिका टीम स्पर्धा में प्रिया गुर्जर, सोमांशी मेड़तवाल, माया विश्नोई, यशस्वी नाथावत की टीम ने स्वर्णिम सफलता हासिल की। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच गोल्ड मैडल के लिए मुकाबला 230  अंकों से बराबर रहा। टाई ब्रेक में राजस्थान ने 29-27 से जीत के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। राजस्थान टीम ने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश को 232-220 से और सेमी फाइनल में महाराष्ट्र को 226-225 से पराजित किया था।  राजस्थान टीम की इस कामयाबी पर राजस्थान तीरन्दाजी संघ के अध्यक्ष केके जादम ने खिलाड़ियों और टीम कोच दुष्यंत मिश्रा व गजेंद्र शर्मा को बधाई दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/archery-team-won-two-gold/article-28907</link>
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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 11:07:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहीं मिल रहे धनुष-बाण, कैसे निशाना लगाएं बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[धनुष बाण न मिलने की वजह से जिला स्तरीय कोई भी प्रतियोगिता नहीं हो रही जिसकी वजह से खिलाड़ी निराश हो रहे हैं। कोटा की दर्जनों बेटियों की ख्वाहिशें हैं की वह तीरंदाजी में भाग लेकर अपने उज्जवल भविष्य पर निशाना लगाएं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/daughters-disappointed-for-not-getting-bow-and-arrow/article-16076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/nahi-mil-rahe-dhanush-baan-kota-news-25.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अगर खेल मैदानों में राम भरोसे खेलेगाा इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया। कोटा में खेल संसाधनों के अभाव में खेल प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही। स्थिति यह हैं कि धनुष बाण न मिलने की वजह से जिला स्तरीय कोई भी प्रतियोगिता नहीं हो रही जिसकी वजह से खिलाड़ी निराश हो रहे हैं। कोटा की दर्जनों बेटियों की ख्वाहिशें हैं की वह तीरंदाजी में भाग लेकर अपने उज्जवल भविष्य पर निशाना लगाएं।  तीरंदाजी को खेलों में सबसे महंगा खेल माना जाता हैं। एक धनुष-बाण की कीमत लाखों में होती हैं। <br /><br /><strong>दम तोड़ रही प्रतिभा</strong><br />कोटा में तीरंदाजी महिला खिलाड़ियों की टीम बिना कोई कोच के तैयार हो रही हैं। इन महिला खिलाड़ियों को कोई सुविधा नहीं मिल रही। अगर मिल रहा हैं तो लंबे समय से सिर्फ आश्वासन। इनके  लिए कोटा का न तो जिला प्रशासन काम कर रहा हैं और न ही कोई जनप्रतिनिधि। ऐसे में खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। <br /><br /><strong>कोटा में महिला खिलाड़ी</strong> <br />कोटा शहर में अनेक तीरंदाजी खेलने वाली महिला खिलाड़ी तैयार हो रही हैं। सीएसटी र्स्पोट्स फाउंडेशन द्वारा इन खिलाड़ीयों को प्रतिदिन निशुल्क ट्रेनिंग करवाई जाती हैं। जिसकी बदौलत अनेक महिला खिलाड़ी स्टेट व नेशनल स्तर पर पहंच पाई हैं। इन महिला खिलाड़ीयों में मोनिका कुमारी, कावेरी कुमारी, दिव्या नायक, खुशी राठौर, यशवीधीर, स्नेहा वर्मा, सहित अनेक खिलाड़ी अपने लक्ष्य पर निशाना सादने का प्रयास कर रहे हैं।<br /><br /><strong>महंगे धनुष-बाण कैसे भेदें लक्ष्य</strong><br />जिले के तीरंदाजी खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने व महाभारत के अर्जुन की भांति लक्ष्य को भेदने की कला से अवगत करवा रहे सीएसटी र्स्पोट्स फाउंडेशन के बृजपाल सिंह सोलंकी का कहना हैं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीर-धनुष की कीमत दो से ढ़ाई लाख रुपए होती हैं। तीरंदाजी के सामानों की कीमत काफी महंगी होने के कारण भी ज्यादातर खिलाड़ी इस गेम को नहीं खेल पाते। उन्होंने जनसहयोग से कुछ तीर खरीदें हैं, लेकिन वह कम हैं। <br /><br /><strong>लक्ष्य पर लगाएंगे निशाना</strong><br />हमारे हौसले कायम हैं। भले ही सरकार व प्रशासन हमारी कोई मदद ना करे, लेकिन हमारे खिलाड़ी  निशाने से चूकेगें नहीं। वह अपने लक्ष्य पर जरुर निशाना लगाएंगे। खिलाड़ीयों की मेंहनत एक दिन जरुर रंग लाएगी। और हम एक दिन ओलंपिक जीतेंगे। <strong>-बृजपाल सिंह सोलंकी, कोच</strong><br /><br /><strong>धनुष-बाण उपलब्ध करवाए जाएं</strong><br />अगर खिलाड़ियों के पास खेलने का सामान ही उपलब्ध नहीं होगा तो वो कैसे खेलेंगे। खेलों को सिर्फ कागजों में ही बढ़ावा मिल रहा हैं। राज्य सरकार व जिला प्रशासन से अपील हैं की वह महिला खिलाड़ियों सहित सभी को धनुष-बाण उपलब्ध करवाए जाएं। <strong>-खुशी राठौड़, खिलाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 13:18:57 +0530</pubDate>
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                <title> हाथों से फिसल रही तीरंदाजी, कैसे निशाना लगाएं खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा में तीरंदाजी को थोड़ा प्रोत्साहन मिलता तो आज अनेक तीरंदाजी के खिलाड़ी नेशनल लेवल पर खेल रहे होते। यहां तीरंदाजी को निखारने के अवसर हैं ही नहीं। शहर में तीरंदाजी का अभ्यास करवाने वाला एक कोच भी नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/archery-slipping-from-hands--how-to-become-a-player/article-15876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/a-6.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मैदान में होते हैं तो सिर्फ जीत पर नजर होती हैं। लेकिन प्रतिद्वंद्वी भी अपने हों तो जीत के बाद मन थोड़ा उदास होता हैं। कोटा में तीरंदाजी को थोड़ा प्रोत्साहन मिलता तो आज अनेक तीरंदाजी के खिलाड़ी नेशनल लेवल पर खेल रहे होते। यहां तीरंदाजी को निखारने के अवसर हैं ही नहीं। शहर में तीरंदाजी का अभ्यास करवाने वाला एक कोच भी नहीं हैं। यह कहना हैं 9 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू करने वाले कोटा के खिलाड़ी पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी का। पुष्पेंद्र कहते हैं की आज भी कोटा में तीरंदाजी को आज भी कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। अच्छे कोच व सुविधाओं की कमी हमेशा खिलती हैं। खेलों को बढ़ावा देने के लिए भले ही लाख दावे किए जाते हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती हैं।<br /><br /><strong>जनसहयोग से शुरू की अकादमी</strong><br />पुष्पेंद्र ने अकेले अपने दम पर तीरंदाजी की अकादमी शुरू कर दी हैं। इस खेल अकादमी में 6 माह में ही 20 से ज्यादा खिलाड़ी तैयार हो गए हैं। इसके साथ ही 7 इस अकादमी से 7 वर्ष का एक खिलाड़ी नेशलन टूर्नामेंट के लिए चयनित भी हो गया हैं। <br /><br /><strong>स्टेट व नेशनल लेवल पर खेलने वाले खिलाड़ी</strong> <br />गर्व प्रताप सिंह, समर सिंह, विनय मैरोटा, कृष्णा, मिकदाद रंगवाला, दिव्या, विनय, भविषा गुप्ता, सहित अनेक खिलाड़ी हैं जिन्होंने नेशनल व स्टेट लेवल पर कोटा को तीरंदाजी में पहचान दिलाई हैं और नाम रोशन किया हैं। कोटा में तीरंदाजी का कोई कोच नहीं होने कि वजह से पुष्पेंद्र व उसके पिता बृजपाल सिंह सोलंकी खुद मैदान में खिलाड़ीयों को अभ्यास करवाते हैं।<br /><br /><strong>तीस मेडल हासिल किए</strong><br />पुष्पेंद्र ने अबतक तीरंदाजी में 30 के करीब गोल्ड व सिल्वर मेडल हासिल किए हैं। पुष्पेंद्र बताते हैं की उनके प्रयास से सेंट्रल सोर्स टैलेंट फाउंडेशन के खिलाड़ी कोटा में ट्रेनिंग दे रहे हैं। ट्रेनिंग के लिए तीरों का इंतजाम भी जनसहयोग से किया गया हैं। 7 बच्चे इस अकादमी में निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं। Ñ<br /><br /><strong>क्षेत्र के जनप्रतिनिधि करें सहयोग</strong><br /> तीरंदाजी में कोटा के अनेक खिलाड़ी अपना भविष्य तलाश रहे हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के इनके सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। इसके साथ ही जिला खेल प्रशासन को भी इस खेल को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए। <br /><strong>- पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी, नेशनल खिलाड़ी</strong><br /><br /><strong>खेलों को दिया जा रहा हैं बढ़ावा</strong> <br /> तीरंदाजी के साथ-साथ अनेक खेलों के खिलाड़ी अपनी मेहनत से कोटा का नाम देश-विदेश में रोशन कर रहे हैं। खेलों को लगातार बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर जो भी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, वह खिलाड़ियों तक पहुंचाई जा रही हैं।<br /><strong>- अजीज पठान, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jul 2022 16:58:33 +0530</pubDate>
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                <title>03 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी पृथ्वीराज,   घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी करते नजर आएगी मानुषी छिल्लर </title>
                                    <description><![CDATA[अक्षय फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं मानुषी फिल्म में पृथ्वीराज की प्रेमिका राजकुमारी संयोगिता की भूमिका निभा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/prithviraj-to-be-released-in-cinemas-on-june-03--manushi-chillar-will-be-seen-doing-horse-riding--archery-and-sword-fighting/article-10127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/manushi-chhillar.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पूर्व मिस वल्र्ड मानुषी छिल्लर ने अपनी आने वाली पृथ्वीराज के लिये घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी सीखी है। मानुषी छिल्लर फिल्म पृथ्वीराज से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही है। यह फिल्म पृथ्वीराज चौहान के जीवन और उनके पराक्रम पर आधारित है। अक्षय फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं मानुषी फिल्म में पृथ्वीराज की प्रेमिका राजकुमारी संयोगिता की भूमिका निभा रही हैं।<br /><br />मानुषी छिल्लर ने बताया ,''पृथ्वीराज की तैयारियों के दौरान उनका लंबा और बेहद व्यस्त प्रिपरेशन शेड्यूल रहा। इस दौरान उन्होंने अपनी क्लासिकल डांसिंग स्किल्स को निखारने के साथ ही घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी भी सीखी है। उन्होंने कहा, मेरा प्रिपरेशन शेड्यूल लंबा और इंटेंस रहा। आदि सर और मेरे निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश जी चाहते थे कि अपना पहला शॉट भी देने से पहले मैं उसकी तैयारी करूं और जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो मैं इस बात की शुक्रगुजार हूं कि मैंने कड़ी मेहनत की। मैं एक प्रशिक्षित क्लासिकल डांसर हूं और इस फिल्म ने मुझे अपनी डांङ्क्षसग स्किल्स को निखारने में मदद की, क्योंकि फिल्म में मेरे ऊपर तीन गाने हैं।''<br /><br />मानुषी छिल्लर ने बताया, ''मुझे कोरियोग्राफी करना था, खासकर हद कर दे गाने में। यह एक खूबसूरत होली सॉन्ग है और इसके लिए मुझे परफेक्ट होने की जरूरत थी। और इस फैक्ट को दर्शकों को दिखाना भी था कि मैं अच्छा डांस कर सकती हूं। उम्मीद करती हूं कि मैं लोगों को यह दिखाने में कामयाब रही हूं कि मैं एक हार्ड-वर्किंग एक्टर हूं जो अपनी पहली फिल्म से परफेक्शन की तलाश कर रही है। बचपन में मैंने घुड़सवारी सीखी है। क्योंकि मेरे पिताजी मुझे और मेरे भाई-बहनों को घुड़सवारी कराने के लिए ले जाया करते थे। इसलिए मुझे इसके बेसिक्स पता थे, लेकिन मुझे कभी घोड़े को सरपट नहीं दौड़ाना पड़ा।फिल्म में मेरा घुड़सवारी का सीक्वेंस है, लेकिन मैं अक्षय सर के पीछे बैठी हूं। उस सीक्वेंस को करना दिलचस्प था। मैं आर्ट की स्टूडेंट हूं। मेरे लिए फिल्म के सेट पर हर दिन खास था, क्योंकि मैं बहुत कुछ सीख सकती थी और अगले दिन रिटर्न कर सकती थी।'' डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बनी फिल्म पृथ्वीराज 03 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 17:13:59 +0530</pubDate>
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