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                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
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                        <![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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                <title>सिंचाई के दौरान खेतों के रास्ते में भरा पानी, किसानों को हो रही परेशानी</title>
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                        <![CDATA[इस रास्ते पर गत वर्ष कराया गया कंक्रीट कार्य पहली ही बरसात में पूरी तरह खराब हो गया।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-on-the-road-leading-to-the-fields-during-irrigation-causes-problems-for-farmers/article-141904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)7.png" alt=""></a><br /><p>अरण्डखेडा। अरण्डखेडा पंचायत के घना तलाई से बंधा की ओर खेतों पर जाने वाले रास्ते में सिंचाई के दौरान खेतों का पानी भर जाने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रास्ता अवरुद्ध होने के कारण किसानों को कृषि कार्य के लिए खेतों तक पहुंचने में करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय किसानों ने बताया कि इसी रास्ते पर गत वर्ष पंचायत प्रशासन द्वारा मनरेगा योजना के तहत ग्रेवल सड़क पर नाममात्र का कंक्रीट कार्य कराया गया था, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हुआ। पहली ही बरसात में यह रास्ता पूरी तरह खराब हो गया और वर्तमान में खेतों का पानी भर जाने से रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।</p>
<p><strong>खेती-बाड़ी के कार्य हो रहे प्रभावित</strong><br />किसानों का कहना है कि पंचायत द्वारा किया गया कंक्रीट ग्रेवल कार्य गुणवत्ताहीन था, जिससे समस्या और अधिक बढ़ गई है। मार्ग बंद होने से खेती-बाड़ी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और किसानों को समय व धन दोनों की अतिरिक्त हानि उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की है, जिससे किसानों को खेतों तक आवागमन में सुविधा मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />उक्त रास्ते में पूर्व में कार्य कराया गया था, जिसका भुगतान अभी लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रास्ते का दुबारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। ताकि किसानों को राहत मिल सके।<br /><strong>- हिमांशु सिंह, ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 14:18:33 +0530</pubDate>
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                <title>परवन वृहद सिंचाई परियोजना : बिलेंडी गांव पूर्ण विस्थापित घोषित, 76.30 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[परवन वृहद सिंचाई परियोजना के अंतर्गत बारां जिले के बिलेंडी गांव को पूर्ण विस्थापित श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही परवन बांध से प्रभावित क्षेत्र में आने वाली भूमि के अवाप्ति (अधिग्रहण) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना के कारण बिलेंडी गांव की कुल 76.3074 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी, जिसे अधिग्रहित किया जाएगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/parvan-major-irrigation-project-bilendi-village-declared-completely-displaced-7630/article-136493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(1)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परवन वृहद सिंचाई परियोजना के अंतर्गत बारां जिले के बिलेंडी गांव को पूर्ण विस्थापित श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही परवन बांध से प्रभावित क्षेत्र में आने वाली भूमि के अवाप्ति (अधिग्रहण) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना के कारण बिलेंडी गांव की कुल 76.3074 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी, जिसे अधिग्रहित किया जाएगा। जल संसाधन के अनुसार अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में 23.7307 हेक्टेयर निजी भूमि तथा 49.1369 हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है। परियोजना के तहत बांध निर्माण और जल संग्रहण क्षेत्र के विस्तार के कारण गांव का बड़ा हिस्सा डूब क्षेत्र में आ रहा है, जिसके चलते इसे पूर्ण विस्थापन की श्रेणी में रखा गया है।</p>
<p>राज्य सरकार द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन को लेकर नियमानुसार मुआवजा, वैकल्पिक भूमि और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि विस्थापित परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास योजना लागू की जाएगी। परवन वृहद सिंचाई परियोजना को हाड़ौती क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है, जिससे सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा और किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। हालांकि, परियोजना से प्रभावित गांवों के पुनर्वास को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 13:28:20 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - नहर में बढ़ाया जलप्रवाह, होने लगी मॉनिटरिंग, टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने में जुटे अधिकारी</title>
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                        <![CDATA[अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news----water-flow-in-the-canal-has-increased--monitoring-has-begun--and-officials-are-working-to-deliver-water-to-the-tail-end/article-132895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी सीजन की फसलों में सिंचाई के लिए पानी की डिमांड होने लगी है। वहीं गेहंू की बुवाई भी गति पकड़ने लगी है। इस कारण खेतों में नहरी पानी की डिमांड होने लगी है। ऐसे में सीएडी प्रशासन ने कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह बढ़ा दिया है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी टेल क्षेत्र तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुट गए हैं, ताकि रबी फसलों विशेषकर सरसों, चने व गेहूं को समय पर सिंचाई की सुविधा मिल सके। पूर्व में दायीं नहर में 2550 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। मंगलवार को जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाकर 4050 क्यूसेक कर दी गई है। अधिकारियों की टीमें माइनरों और वितरिकाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, ताकि बीच रास्ते में कहीं भी रिसाव, अवरोध या अघोषित कटान की स्थिति न बने।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />नहरों की मरम्मत और साफ-सफाई नहीं होने के सम्बंध में 12 नवंबर को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद सीएडी अधिकारी के हरकत में आए और टेल क्षेत्र में नहरी पानी में जुट गए।</p>
<p><strong>जिले में गेहूं व सरसों की पैदावार ज्यादा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार गेहूं की बुवाई के लिए खेतों में नमी होना जरूरी है। वर्तमान में गेहूं की फसल बुवाई हो रही है। इसलिए गेहूं की फसल को निर्धारित मात्रा में पानी देना जरूरी है। राजस्थान में रबी की फसल में सबसे ज्यादा गेहूं और सरसों की पैदावार की जाती है। गेहूं के लगातार बढ़ रहे भावों से अब इसकी खेती मुनाफा किसानों को दे रही है। इसलिए हर साल गेहूं का रकबा बढ़ता जा रहा है। इस कारण अधिकांश किसान गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं। इसके अलावा सरसों और चना फसल के प्रति भी किसानों का रूझान बना हुआ है। इन फसलों के लिए पानी की दरकार बनी हुई है। </p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त वितरिकाओं की करवाई मरम्मत</strong><br />मौसम खुलने के बाद रबी फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग तेज हो गई है। इस समय गेहूं की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए सीएडी विभाग की ओर से दायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके बावजूद टेल क्षेत्र में स्थित कई खेतों में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा था। गत दिनों सीएडी के अधिकारियों ने वितरिकाओं में आ रहे अवरोधों को हटा दिया है। वहीं क्षतिग्रस्त हो रही दीवारों की भी मरम्मत करवा दी है।  इसके बाद नहर में जलप्रवाह की मात्रा को बढ़ा दिया है। अब सीएडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीमें जलप्रवाह में बाधक बन रहे अवरोधों को हटाने में जुट गई है। </p>
<p>गेहूं और चने की फसल को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। पिछले सप्ताह पानी धीमा था, अब प्रवाह बढ़ने से फसल बच जाएगी।<br /><strong>- सुनील नागर, किसान</strong></p>
<p>टेल क्षेत्र में अक्सर पानी देरी से पहुंचता है, लेकिन इस बार अधिकारी लगातार नहर पर नजर रख रहे हैं। उम्मीद है कि बी में पानी की कमी नहीं होगी।<br /><strong>- रेखालाल गुर्जर, किसान</strong></p>
<p>रबी सीजन में सिंचाई की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। हमने दायीं नहर का डिस्चार्ज बढ़ा दिया है और फील्ड टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। <br /><strong>- सागर कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सीएडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:48:45 +0530</pubDate>
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                <title>बिना सफाई कैसे पहुंचेगा टेल क्षेत्र तक पानी, हर साल मरम्मत व सफाई के नाम पर खानापूर्ति, दायीं नहर में 1050 क्यूसेक छोड़ा पानी</title>
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                        <![CDATA[लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-will-water-reach-the-tail-end-without-cleaning--every-year--only-a-superficial-repair-and-cleaning-is-done--and-only-1050-cusecs-of-water-is-released-into-the-right-canal/article-132162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11120.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। हाड़ौती के किसान खेती के काम में जुट गए हैं। इसके चलते सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। वहीं बायीं नहर में फिलहाल पानी नहीं छोड़ा गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>पाटन ब्रांच की जर्जर हो रही स्थिति</strong><br />बायीं नहर से जुड़े केशवरायपाटन के सिंचित क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि नहरें पक्की होने के बाद सुविधाएं मिलेगी, लेकिन नहरों की ब्रांचों, वितरिकाओं व माइनरों सही ढंग से नहीं हो पाई है। किसान रोशनलाल और राजेन्द्र का कहना है कि पूर्व में नहरों के सुदृढ़ीकरण के दौरान सीएडी विभाग ने अलग-अलग हिस्सों में काम करवाया गया। संवेदक नहरों के पक्का करने के नाम पर लीपापोती कर चले गए। पाटन ब्रांच में नहरों के नालों के पास कच्ची जगह छोड़ दी गई। इस ब्रांच में अण्दपुरा नाले के पास कच्चा छोड़ दिया, जो कार्य किया वह निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं किया। लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। </p>
<p><strong>खरपतवार रोक सकती है अमृत की राह</strong><br />अब तक टेल क्षेत्र में वितरिकाओं की साफ - सफाई का कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे जल प्रवाह शुरू करने के बाद टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। टेल के रामपुरा, जखाना, मंडित्या, छावनियां, बीचडी, हणुतीया आदि वितरिकाओं की हालत खराब है। सभी खरपतवार से भरी पड़ी है। हालांकि बरसात रुकने के बाद सीएडी विभाग ने समय रहते बूंदी ब्रांच सहित वितरिकाओं में मनरेगा के तहत श्रमिक लगाकर साफ-सफाई और जंगल कटिंग का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को समय पर टेल में पानी पहुंचने की उम्मीद दिखाई दी है, लेकिन अब मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है। सीएडी विभाग किसानों की मांग पर जल प्रवाह शुरू करता है तो टेल में पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती का नहरी तंत्र</strong><br />- 2.14 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की<br />- 2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की<br />- 29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई<br />- 6656 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 1500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 03 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित</p>
<p><strong>दायीं नहर में छोड़ा पानी, बायीं में अभी इंतजार</strong><br />रबी सीजन के तहत अब खेतों में गेहूं की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। इस कारण सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। अभी नहर में 1050 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। अभी मध्यप्रदेश से नहरी पानी की डिमांड नहीं आई है। इसलिए यह पानी हाड़ौती के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। मध्यप्रदेश से डिमांड आने के बाद दायीं नहर में जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाई जाएगी। वहीं अभी बायीं नहर में जलप्रवाह शुरू नहीं किया गया। इस समय बूंदी जिले में वितरिकाओं की मरम्मत और साफ-सफाई का कार्य चल रहा है। यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो टेल क्षेत्र के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। <br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>फिलहाल टेल में पानी की मांग नहीं है। नहर में जल प्रवाह शुरू करने से पूर्व वितरिकाओं और मुख्य केनाल में मनरेगा के श्रमिकों से साफ -सफाई और जंगल कटिंग कार्य करवाया जा रहा है। <br /><strong>- नाथूलाल, सहायक अभियंता, सीएडी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 14:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>बांधों को बजट का इंतजार, सिंचाई नहरों की मरम्मत रुकी</title>
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                        <![CDATA[अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने से किसानों के लिए समय पर सिंचाई मुश्किल हो रही है। लगभग 90 लाख रुपए की मंजूरी पर ही काम शुरू हो सकेगा। छापरवाड़ा बांध से 52 गांवों की सिंचाई प्रभावित है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में यमुना जल बोर्ड बैठक में राजस्थान की जल परियोजनाओं पर चर्चा होगी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dams-await-budget-repair-of-irrigation-canals-halted/article-131822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। किसानों के लिए इस बार सिंचाई व्यवस्था समय पर शुरू होना मुश्किल दिख रहा है। अतिवृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हुई नहरों की मरम्मत के लिए अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 90 लाख रुपए का बजट जारी होने पर ही मरम्मत कार्य शुरू हो सकेगा। फिलहाल नहरों की स्थिति खराब होने से यदि इन्हीं से पानी छोड़ा गया, तो बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी हो सकती है।</p>
<p>किसान हर साल नवंबर के अंत तक सिंचाई के लिए पानी की मांग करते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष अतिवृष्टि के चलते यह मांग दिसंबर तक पहुंच सकती है। अकेले छापरवाड़ा बांध से 52 गांवों की सिंचाई होती है, जिनकी उम्मीदें नहरों की मरम्मत पर टिकी हैं।</p>
<p>इधर अपर यमुना रिवर बोर्ड की बैठक नोएडा में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में होगी। बैठक में राजस्थान, हरियाणा सहित यमुना जल से जुड़े सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें हथिनी कुंड से हासियावास तक के अलाइंमेंट को अंतिम रूप देने और राजस्थान को ओखला हैड से पानी बढ़ाने की डीपीआर पर चर्चा होगी। राजस्थान से जुड़े अन्य जल परियोजनाओं पर भी विचार किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 16:22:47 +0530</pubDate>
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                <title>बूढ़ी नहरों की सूध ले तो बचे लाखों लीटर अमृत </title>
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                        <![CDATA[गोठड़ा मुख्य केनाल के टेल क्षेत्र का मामला 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/if-the-old-canals-are-taken-care-of--lakhs-of-liters-of-amrit-can-be-saved/article-93216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/6633-copy45.jpg" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। गोठड़ा बांध की मुख्य केनाल में कुछ समय बाद ही किसानों की आवश्यकतानुसार नहरी पानी का प्रवाह का समय नजदीक आ रहा है।  मुख्य केनाल के टेल क्षेत्र में केनाल में झांड झखांड़ ठसे हुए है। वही केनाल की मिट्टी की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चूकी है। पानी प्रवाह का समय नजदीक आता जा रहा है। संबंधित विभाग बूढ़ी नहरों का समय रहते ध्यान देवें, तो लाखो लीटर अमृत नदी व नालो में व्यर्थ बहने से बच जाएगां। संबंधित विभाग द्वारा बूढ़ी नहरों की अनदेखी की तो किसानों के खेतों तक समय पर नहरी पानी नही पहुंच पाएगा। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में खरीफ फसल अतिवृष्टि चपेट में आने के बाद अब किसानों को रबी फसल की बुवाई के लिए पलेवा की आवश्यकता होती जा रही है। पलेवा के लिए नहरी क्षेत्र के किसान नहरी पानी की आस लगाए बैठे हुए है। मगर इस समय गोठड़ा बांध की मुख्य केनाल पर टेल क्षेत्र की केनाल बांसी-बूंदी मार्ग के पास मिट्टी की दीवार का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। वही केनाल में कचरा फंसा हुआ है। समय रहते विभाग ने इन्हें जरूरत की जगह पर क्षतिग्रस्त नहर को दुरूस्त नही करवाया। नहर से कचरा नही हटाया गया तो किसानों को समय पर नहरी पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। वही लाखों लीटर अमृत नदी व नाले में व्यर्थ बह जाएगा। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पडेगा। समय रहते संबंधित विभाग दुरूस्त करवाएं तो किसानों को राहत मिले। मुख्य केनाल के टेल पर भी बांसी व मूण्डली दो माइनरें है। जो दोनों के हाल-बेहाल है। बारिश के समय आए बरसाती पानी से दीवारे क्षतिग्रस्त कच्ची माइनरों में झाख झखांड से भरी  हुई नजर आ रही है। ऐसे हाल देखकर इनसे पानी कैसे आगे बढेगा। इन्हें देखकर किसानों की धड़कनें बढती जा रही है। संबंधित विभाग जल्द समस्या का निराकरण करें।</p>
<p><strong>संबंधित विभाग में स्टॉफ नहीं</strong><br />विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी कि जल संसाधन विभाग के पास इस समय कर्मचारियों का टोटा है। जिससे संबंधित विभाग के क्षेत्र की समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं होने की भी समस्या बनी हुई नजर आ रही है। टेल क्षेत्र पर दो माइनर अधिकतर जगहों पर मिट्टी की दीवारे होने से उनमें कचरा फंसा हुआ है। इनको हटाने पर ही क्षेत्र की माइनरो में आसानी से नहरी पानी पहुंच सकेंगा। तब जाकर किसानों को भी राहत मिलेगी।<br /><strong>- क्षेत्रीय किसानों की जुबानी</strong></p>
<p>बांसी माइनर व मूण्डली माइनरों की संबंधित विभाग केनाल में पानी का प्रवाह होने से पहले नहरों की सुध लेवें, तो समय पर किसानों को नहरी पानी उपलब्ध हो पाएगा। समय से पहले बूढ़ी नहरों की मरम्मत करवाएं, तो क्षेत्रीय किसानों को भी राहत मिलें।<br /><strong>- गोपाल लाल शर्मा, बांसी माइनर निवासी बांसी</strong></p>
<p>विभाग समय पर नहरों के झाड़झखांड व बरसाती पानी के साथ बहकर आए। ओड़े के लग रहे ढेरो को हटाए तो समय पर पानी आते ही नालियों के सहारे खेतों तक पहुंचने में आसानी होगी व नहर से व्यर्थ के बहाव होने से बचाव भी होगा। <br /><strong>- धूलीलाल माली, बांसी माइनर निवासी बांसी</strong></p>
<p>जल संसाधन विभाग कभी बजट पास नही हुआ, कभी नरेगा पास नही होने की आड़ लेते हुए समय निकाल देते है। जो टेल के किसान पानी का इंतजार करते रहते है। मरम्मत के अभाव में पानी का प्रवाह कम गेज से कर दिया जाता है। किसानों की समस्या को समय रहते संज्ञान लेवें तो क्षेत्रीय किसानों को भी राहत मिले।<br /><strong>- बाबूलाल सैन, मूण्डली माइनर निवासी रामगंज</strong></p>
<p>संबंधित विभाग समय रहते क्षेत्रीय किसानों की समस्या को मोके पर पहुंचकर जायजा लेवें। तो नहरी पानी के दौरान व्यर्थ नीर नहीं बहेगा। जिससे किसानों के खेतों में क्षेत्रीय माइनरों द्वारा नहरी पानी आसानी से खेतों में पहुंचे।<br /><strong>- रामप्रकाश मीना, मुख्य केनाल गुजरियाखेड़ा निवासी</strong></p>
<p>कर्मचारियों की कमी चल रही है। नहरों की मरम्मत के लिए मनरेगा श्रमिको की सेक्शन नही मिल पा रही है। फिर भी जहां आवश्यकता होगी। वहां पर मशीन लगाकर दुरूस्त करवाया जाएगा व नहरों में उगे झाड झंखाड को हटाने के लिए मजदूरों की जरूरत होती है। मनरेगा से सेक्शन निकलवाने का प्रयास करेंगे। <br /><strong>- पीसी मीना, एईएन जल संसाधन विभाग नैनवां </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 15:23:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - ड्रिप से होगी सिंचाई, एनएचएआई ने बदली राष्ट्रीय राजमार्गों पर पौधारोपण की पॉलिसी </title>
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                        <![CDATA[अब डीपीआर में ही देनी होगी लगने वाले पौधों की संख्या, उनके स्थान और सिंचाई की जानकारी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---irrigation-will-be-done-through-drip--nhai-changed-the-policy-of-plantation-on-national-highways/article-90227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(9)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा अब हाई वे पर सड़क बनाने के दौरान पौधारोपण की पॉलिसी में परिवर्तन किया है। नई पॉलिसी के तहत अब पौधारोपण की व्यवस्था को डीपीआर के तहत शामिल करना होगा। साथ ही सड़क बनाने के दौरान कटने वाले पेड़ों की संख्या के अनुसार पहले पौधारोपण करना होगा। जिससे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान ना हो। इसके अलावा सड़कों पर पेड़ पौधों को पानी देने के लिए एक ड्रिप पद्द्ति से मजबूत सिंचाई व्यवस्था को सड़क के साथ विकसित करना होगा। उल्लेखनीय है कि नवज्योति ने इस संबंध में जून माह में ही समाचार प्रकाशित कर सरकार को सुझाव दिया था कि डिवाइडर और रोड साइड पर लगने वाले पौधों की सिंचाई ड्पि सिस्टम से की जाए। डिवाइडरों पर पौधे लगा तो दिए जाते हैं लेकिन सार संभाल नहीं होने तथा उचित सिंचाई व्यवस्था नहीं होने से यह पनप नहीं पाते हैं। ऐसे में यदि ड्पि सिस्टम से सींचे जाएं तो इनकी उम्र लम्बी हो सकती है। </p>
<p><strong>डीपीआर में शामिल हों पौधारोपण की लागत</strong><br />राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से जारी की गई नई पॉलिसी के तहत अब इंजीनियरों और संवोदक फर्म को हाईवे निर्माण की डीपीआर तैयार करते समय ही पौधारोपण की लागत भी दर्शानी होगी। जिससे सड़क की कुल लागत को अनुमानित किया जा सके। इसके अलावा डीपीआर में सड़क पर लगने वाले पौधों की संख्या और स्थान के बारे में भी जानकारी अपडेट करनी होगी। जिससे हाई वे की सड़क पर पौधारोपण को ट्रैक किया जा सके। वहीं डीपीआर में भूमि की उपलब्धता, पंक्तियों और पेड़ों की संख्या को दर्शाते हुए एक किलोमीटर-वार मानचित्र भी तैयार करना होगा।</p>
<p><strong>निर्माता को कम से कम पांच साल देखरेख की जिम्मेदारी</strong><br />नई पॉलिसी के तहत सड़क निर्माता को पौधारोपण के बाद उनकी देख रेख कम से कम पांच साल या उनके पूरी तरह से विकसित हो जाने तक करनी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर हरियाली को बढ़ाना है, क्योंकि कई बार सड़क का निर्माण पूरा हो जाने के बाद पौधारोपण तो हो जाता है लेकिन उनकी देखरेख में कमी के चलते सूखने लग जाते हैं। ऐसे में एनएचआई को दोबारा पौधारोपण करना पड़ता है जिसमें खर्चा भी आता है।</p>
<p><strong>सिंचाई के लिए ड्रिपिंग की हो व्यवस्था</strong><br />सड़कों पर पौधारोपण के बाद उनकी सिंचाई के लिए सस्ता और मजबूत तंत्र बनाना आवश्यक होगा। जिससे भविष्य में सिंचाई के लिए कोई प्रावधान न हो। वहीं प्राधिकरण की ओर से जारी नई पॉलिसी में कहा गया है कि अगर सड़क में ड्रिपिंग व्यवस्था को लगाने के लिए पर्याप्त स्थान हो तो निश्चित रूप से उसे लागू किया जाए। गौरतलब है कि नवज्योति ने डिवाइडर स्थित पौधों को ड्रिप सिंचाई पद्धति से पानी देने को लेकर पूर्व में भी खबर प्रकाशित की थी। साथ ही सड़क पर पौधारोपण पूरे निर्माण कार्य के पूरा हो जाने के बाद ही किया जाए। जिससे पौधारोपण को ज्यादा बेहतर तरीके से धरातल पर उतारा जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 13:24:37 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली उत्पादन से खेतों में हो रही सिंचाई </title>
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                        <![CDATA[ कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद दायीं व बायीं नहर में लगातार जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके लिए राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irrigation-in-fields-due-to-power-generation/article-36663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/bijli-utpadan-se-kheto-mei-ho-rahi-sinchaii..kota-news..6.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी फसलों में सिंचाई के लिए चंबल नदी की दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह जारी है। इस बार चंबल के बांध लबालब होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए मार्च माह तक पानी उपलब्ध कराया जाएगा। पिछले दिनों हुई तेज बारिश के कारण वर्तमान में फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग कम हो गई है। इस कारण दोनों नहरों में जलप्रवाह घटा दिया गया है। वर्तमान में दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद दायीं व बायीं नहर में लगातार जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके लिए राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। दायीं नहर से कोटा, बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के कई गांवों के खेतों में सिंचाई होती है, जबकि बायीं नहर से बूंदी जिले के गांवों को सिंचाई सुविधा मिलती है। दायीं नहर से कोटा जिला व बारां जिला सहित मध्यप्रदेश के सैंकड़ों गांवों के खेत सिंचित होते हैं। इस कारण नहर की जलप्रवाह क्षमता बायीं नहर से ज्यादा है।   </p>
<p><strong>दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में 600 क्यूसेक</strong><br />दायीं नहर की पूरी क्षमता 6300 और बायीं नहर की क्षमता 1500 क्यूसेक है। करीब एक पखवाडेÞे पहले फसलों में सिंचाई का कार्य तेज गति से चल रहा था। इस कारण एक पखवाड़े पहले दायीं नहर में 6225 और बायीं नहर में 1050 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। गत दिनों कोटा जिले सहित  विभिन्न क्षेत्रों में जोरदार बारिश हुई थी। इससे कई जगहों पर खेतों में जलभराव हो गया था। ऐसे में सिंचाई के लिए पानी की मांग में कमी आ गई है। इस कारण दोनों नहरों में जलप्रवाह घटा दिया गया है। वर्तमान में दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में केवल 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। </p>
<p><strong>बांधों का लेवल बरकरार</strong><br />गत वर्ष मानसून की सक्रियता के कारण लगातार बारिश का दौर चला था। इस कारण चंबल नदी के चारों बांध लबालब भरे हुए हैं। बांधों का लेवल बरकरार रखने के कारण राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर पन बिजलीघर से बिजली उत्पादन कर नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। राणाप्रताप सागर से 4400 क्यूसेक और जवाहरसागर बांध से 3700 क्यूसेक पानी बिजली उत्पादन कर छोड़ा जा रहा है। नहरों में जलप्रवाह करने की वजह से  दोनों बांधों से लगातार बिजली उत्पादन किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>एमपी के लिए 2200 क्यूसेक पानी</strong><br />इटावा क्षेत्र में स्थित पार्वती हेड के माध्यम से मध्यप्रदेश के किसानों के लिए पानी छोड़ा जाता है। पार्वती हेड से जुडेÞ इटावा, अयाना सहित विभिन्न क्षेत्रों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। दायीं नहर से मध्यप्रदेश के किसानों को भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। मौसम में बदलाव के बाद वहां से भी पानी की डिमांड कम हो गई है। इस कारण पार्वती हेड से मध्यप्रदेश के लिए 2200 क्यूसेक पानी छोडा जा रहा है।</p>
<p><strong>नजर आने लगी रंगत</strong><br />सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने के बाद फसलों में भी रंगत आने लगी है। ऐसे में कुछ दिनों से फसल बेहतर रूप से विकसित होने लगी है। कोटा जिले में सबसे ज्यादा बुवाई गेहूं की होती है। इसके बाद किसानों का रुझान सरसों की फसल को लेकर हैं। वर्तमान में जिले के कुछ क्षेत्रों में सरसों फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। गेहूं के लिए नहरी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। चंबल के बांधों का लेवल बरकरार रखा गया है। राणाप्रताप सागर व जवाहर सागर बांध से बिजली उत्पादन कर दोनों नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। फिलहाल नहरी पानी की मात्रा घटा दी गई है। <br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Feb 2023 15:38:39 +0530</pubDate>
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                <title>खेतों में पहुंचा चंबल का अमृत, खिलखिलाने लगी फसलें</title>
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                        <![CDATA[वर्तमान  में गेहूं की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता महसूस होने लगी है। किसानों की मांग को देखते हुए दोनों में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-nectar-of-chambal-reached-the-fields--the-crops-started-blooming/article-29965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/kheto-mei-pahucha-chambal-ka-amrit,-khilkhilane-lagi-faslei...kota-news-17.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं फसल की बुवाई का दौर शुरू होने के साथ ही सिंचाई के लिए नहरी पानी की मांग बढ़ने लगी है। कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की  मांग आने के बाद कोटा बैराज की दायीं व बायीं नहर में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। इधर राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है ताकि चंबल के बांधों का लेवल बरकरार रखा जा सका। कोटा बैराज की दायीं नहर से कोटा, बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के कई गांवों के खेतों में सिंचाई होती है, जबकि बायीं नहर से बूंदी जिले के गांवों को सिंचाई सुविधा मिलती है। इस बार मानसून की मेहरबानी से चंबल नदी के चारों बांध लबालब भरे हुए हैं। इस कारण इस साल रबी फसल के लिए किसानों को भरपूर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।  </p>
<p><strong>दायीं में 6300 व बायीं में 1500 क्यूसेक</strong><br />बैराज की दायीं नहर से कोटा जिला व बारां जिला सहित मध्यप्रदेश के सैंकड़ों गांवों के खेत सिंचित होते हैं। इस कारण नहर की जलप्रवाह क्षमता बायीं नहर से ज्यादा है। किसानों ने सरसों की बुवाई पहले ही कर दी थी। वर्तमान  में गेहूं की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता महसूस होने लगी है। किसानों की मांग को देखते हुए दोनों में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। दायीं नहर में 6300 और बायीं नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।   </p>
<p><strong>वितरिकाओं में भी दौड़ रहा पानी</strong><br />इटावा क्षेत्र में स्थित पार्वती हेड के माध्यम से मध्यप्रदेश के किसानों के लिए पानी छोड़ा जाता है। पार्वती हेड से जुडेÞ इटावा, अयाना सहित विभिन्न क्षेत्रों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब मध्यप्रदेश के किसानों ने पानी आवश्यकता जताई है। इस कारण दायीं नहर में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। वर्तमान में कोटा व बारां जिला की वितरिकाओं में भी पानी छोड़ दिया गया है। इस कारण अब सैंकड़ों गांवों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा है।</p>
<p><strong>बुवाई कार्य को मिली गति</strong><br />सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने के बाद फसलों में भी रंगत आने लगी है। मौसम अनुकूल होने से बुवाई कार्य तेज हो गया है। गेहूं व सरसों के लिए बढ़ती सर्दी फायदेमंद रहती है। ऐसे में कुछ दिनों से फसल बेहतर रूप से विकसित होने लगी है। कई किसान अभी बुवाई कार्य में भी जुटे हुए हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के अच्छे बंदोबस्त नहीं है पानी की कमी है वे किसान सरसों की पैदावार में रुझान दिखा रहे हैं। क्योंकि सरसों को पानी की जरूरत कम रहती है। जबकि गेहूं को पानी अधिक चाहिए। ऐसे में सिंचाई की दृष्टि से सरसों को तवज्जों अधिक दी जा रही है।</p>
<p><strong>गत दिनों हुई बारिश से फायदा</strong><br />हर साल गेहूं व सरसों की सिंचाई में किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन इस बार किसानों के सामने ऐसी समस्या नहीं है। लंबे दौर तक चली बारिश से सरसों व गेहूं की पैदावार अच्छी होगी। बांध भी लबालब भरे हुए हैं। ऐसे में सिंचाई की विशेष समस्या नहीं है। दीपावली पहले तक बारिश का दौर चल रहा था, लेकिन अब तापमान भी कम हो गया है और बारिश भी नहीं है। मौसम अनुकूल होने से बुवाई कार्य ने गति पकड़ ली है। </p>
<p><strong>पूरी क्षमता से छोड़ा जा रहा है पानी</strong><br /> रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद से दोनों नहरों में पूरी क्षमता से पानी छोड़ा जा रहा है। अब तो नहरों से जुड़ी वितरिकाओं में भी पानी छोड़ दिया गया है। इस बार पानी की कमी नहीं है।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>
<p><strong>बम्पर पैदावार की उम्मीद </strong><br /> जिले में रबी की फसलों की बुवाई का कार्य चल रहा है। नहरों व वितरिकाओं के माध्यम से खेतों में पानी पहुंंचने लगा है। जिले में गेहूं व सरसों की रकबा अधिक है। पानी की पर्याप्त उपलब्धता और मौसम अनुकूल होने से फसलों की बम्पर पैदावार की उम्मीद है। <br /><strong>-रामलाल, पर्यवेक्षक, कृषि विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 16:32:42 +0530</pubDate>
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                <title>सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का धरना</title>
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                        <![CDATA[प्रशासन की ओर से अभी तक कोई पहल नहीं की जा रही है, जिसके चलते किसानों में आक्रोस व्याप्त है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/farmers-protest-demanding-irrigation-water/article-21741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/41.jpg" alt=""></a><br /><p>अनूपगढ़। उपखंड क्षेत्र के किसान व ग्राम पंचायत 20 एलएम के किसान जालूवाली माईनर चक 5, 6,7, 8 जे.एम. के किसान अपनी सिंचाई पानी की मांग को लेकर गत दो सितम्बर से टेल के किसानों की भूख हड़ताल जारी है। अपने हक का सिंचाई पानी लेने के लिए किसान लगातार 2 सितम्बर से अपनी मांग को लेकर डटे हुए है, लेकिन आज तीसरा दिन होने जा रहा है परंन्तु समस्या जस की तस ही बनी है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई पहल नहीं की जा रही है, जिसके चलते किसानों में आक्रोस व्याप्त है। उनका कहना है कि हमारे पास सिंचाई विभाग से वार्ता के लिए अधिकारी आये थे, लेकिन सहमती नहीं बनी। उन्होंने मांग कि है कि जब तक हमारे हक का हमें पानी नहीं दिया जाता है तब तक हम यूं ही डटे बेठे रहेंगे। चाहे इस के लिए हमें हमारी ज्यान ही क्यों गवानी पड़े। आज अचानक धरने पर बेठे कई किसानों की तबियत भी बिगड़ गई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से आई टीम ने धरने पर बैठे किसानों को चेकप किया। आज तीसरे दिन धरने बेठने वाले किसान कुलवीर सिंह और सरपंच प्रतिनिधि गुरदीप सिंह संधू 2 सितम्बर से बेठे है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 15:07:21 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री का किसान हित में महत्वपूर्ण निर्णय: प्रदेश में सिंचाई ढांचा मजबूत करने के लिए किसानों को 894 करोड़ रूपये का अनुदान</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[लघु एवं सीमांत कृषकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--important-decision-of-chief-minister-in-the-interest-of-farmers--rs-894-crore-grant-to-farmers-to-strengthen-irrigation-infrastructure-in-the-state/article-10128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok-g1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में सिंचाई के ढांचे को मजबूत करने के लिए बजट 2022-23 में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। गहलोत ने इन घोषणाओं को धरातल पर उतारकर किसानों को मजबूती प्रदान करने वाले विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के किसानों को डिग्गी, फार्म पौंड निर्माण और सिंचाई पाइप लाइन के लिए 894 करोड़ रूपये का अनुदान मिलेगा।</p>
<p><br /><strong>लघु एवं सीमांत कृषकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान</strong><br />मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को मंजूरी देने से अब फार्म पौंड, डिग्गी निर्माण एवं सिंचाई पाइप लाइन योजनाओं में लघु एवं सीमांत कृषकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान भी मिलेगा। साथ ही योजनाओं में न्यूनतम 40 प्रतिशत लघु एवं सीमांत कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।</p>
<p><br /><strong>15 हजार किसान डिग्गी और 45 हजार किसान बनाएंगे फार्म पौंड</strong><br />आगामी 3 वर्षों में 15 हजार किसानों को डिग्गी निर्माण के लिए 450 करोड़ रूपये का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 5 हजार किसानों को निर्माण के लिए 150 करोड़ रूपये का अनुदान मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना से दिया जाएगा। साथ ही आगामी 3 वर्षों में 45 हजार किसानों को फार्म पौंड निर्माण के लिए 344.25 करोड़ रूपये का अनुदान मिलेगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 15 हजार किसानों को फार्म पौंड निर्माण के लिए लगभग 74 करोड़ रूपये मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना से उपलब्ध कराये जाएंगे।</p>
<p><br /><strong>सिंचाई पाइप लाइन के लिए 100 करोड़ रूपये का अनुदान</strong><br />प्रदेश में आगामी 3 वर्षों में 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन के लिए 100 करोड़ रूपये का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में 14 करोड़ रूपये अनुदान के रूप में दिये जाएंगे। <br /><br /><strong>कृषि यंत्रों की खरीद के लिए दो वर्ष में मिलेगा 108.80 करोड़ रूपए का अनुदान</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान कृषि तकनीक मिशन के अंतर्गत महंगे यंत्रों और उपकरणों की खरीद पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में 108.80 करोड़ रूपए अनुदान के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि, आदान लागत में कमी तथा कम समय में अधिक कार्य करने के साथ-साथ किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><br />प्रस्ताव के तहत किसानों को टैªक्टर, थ्रेशर, रोटोवेटर, रीपर, सीड ड्रिल आदि उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। प्रस्ताव में लाभान्वित किसानों में न्यूनतम 30 प्रतिशत लघु व सीमांत किसानों को शामिल किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में उपकरणों की उपलब्धता के लिए जीएसएस/एफपीओ के माध्यम से 600 कस्टम हायरिंग सेन्टर स्थापित किए जाएंगे। इसमें से जीएसएस के माध्यम से न्यूनतम 70 प्रतिशत कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित होंगे। प्रति केंद्र को 8 लाख रूपये राशि का अनुदान (अधिकतम) दिया जाएगा।</p>
<p><br />पौध रसायनों के समुचित उपयोग, निगरानी, कृषि संबंधी अन्य कार्यों व टिड्डी नियंत्रण में ड्रोन तकनीक के उपयोग हेतु कस्टम हायरिंग केन्द्रों व कृषक उत्पादन संगठन (एफपीओ) को 400 ड्रोन उपलब्ध कराने का प्रावधान भी प्रस्ताव में किया गया है। इन सभी कार्यों के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार द्वारा 108.80 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 100 करोड़ रूपये राशि मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना से वहन की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 17:22:31 +0530</pubDate>
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