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                <title>मैथी का पाला मिला भूसा किया जा रहा गौशाला में सप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला में सप्लाई होने वाले भूसे के मिलावटी होने व कम तोलने संबंधी गड़बड़ी पहले भी हो चुकीे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fenugreek-mixed-with-straw-is-being-supplied-in-the-cowshed/article-49367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/methi-ka-pala-mila-bhusa,kiya-ja-rha-gaushala-me-supply...kota-news-19-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में एक बार फिर से मिलावटी भूसा सप्लाई करने का मामला सामने आया है। जिसमें संवेदक द्वारा मैथी का पाला मिला भूसा सप्लाई किया गया। कर्मचारियों द्वारा विरोध करने पर उन्हें डरा-धमकाकर भूसा गोदाम में खाली करवाया गया। शिकायत पर गौशाला समिति अध्यक्ष ने रविवार को भूसे का सैम्पल लिया है। नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में भूसा सप्लाई का ठेका कोटा की एक फर्म को दिया हुआ है। फर्म के संवेदक द्वारा यह काम अन्य साथियों के माध्यम से किया जा रहा है। संवेदक द्वारा गौशाला में 14 से 16 जून तक तीन ट्रॉली करीब 150 से 175 क्विंटल भूसा सप्लाई किया गया। वह भूसा मिलावटी होना पाया गया। </p>
<p>सिंह ने बताया कि उन्होंने गौशाला में आने वाले भूसे की जांच के लिए एक कमेटी बनाई हुई है। वह संवेदक द्वारा भूसा सप्लाई करने के दौरान उसकी जांच के बाद ही गोदाम में खाली करवाती है। भूसे में मैथी का पाला मिला होने की जानकारी पर कमेटी के सदस्यों और गौशाला कर्मचारियों ने जब संवेदक के साथियों का विरोध किया। उन्हें भूसे की ट्रॉली खाली करने से मना किया तो उन्होंने कर्मचारियों को डराया और धमकाया। जबरन भूसा गोदाम में खाली करवा दिया। सिंह ने बताया कि इसकी जानकारी जब शनिवार को उन्हें दी गई तो उन्होंने गौशाला प्रभारी दिनेश शर्मा को इससे अवगत कराया। उसके बाद शनिवार को आई भूसे की ट्रॉली को वापस लौटा दिया। </p>
<p><strong>समिति सदस्य पहुंंचे  सैम्पल लेने</strong><br />समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में भूसे में गड़बड़ी की शिकायत की जानकारी मिलने पर उन्होंने कार्यवाहक आयुक्त राजेश डागा को इस बारे में बताया। उसके बाद वे समिति सदस्य कुलदीप गौतम व एश्वर्य श्रृंगी के साथ गौशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोदाम में डाले गए अलग-अलग ढेरों से भूसे के सैम्पल लिए। सिंह ने बताया कि उस भूसे में मैथी के भूसे की सुगंध आ रही थी। उन सैम्पलों को लेकर सोमवार को कार्यवाहक आयुक्त से मिलेंगे। सैम्पल की जांच प्रयोगशाला में करवाई जाएगी। </p>
<p><strong>दो हजार क्विंटल स्टॉक</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने बताया कि निविदा शर्त के अनुसार गौशाला के गोदाम में हर समय 2 हजार क्विंटल भूसे का स्टॉक रखना आवश्यक है। साथ ही रोजाना 70 क्विंटल भूसा सप्लाई किया जाएगा। लेकिन हालत यह है कि पहले तो भूसे का इतना स्टॉक रखा ही नहीं जा रहा था। वर्तमान में एक साथ कई गुना भूसा सप्लाई कर उसका भुगतान भी कर दिया गया। </p>
<p><strong>पहले भी मिल चुकी है गड़बड़ी</strong><br />गौशाला में सप्लाई होने वाले भूसे के मिलावटी होने व कम तोलने संबंधी गड़बड़ी पहले भी हो चुकीे है। इसकी जानकारी मिलने पर नर निगम कोखा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल ने स्वयं गौशाला पहुंचकर गड़बडी को पकड़ा था। उसके बाद संवेदक के खिलाफ पेनल्टी लगाने समेत कई आदेश दिए थे। लेकिन उसके अगले ही दिन गौशाला के गोदाम में रखे भूसे में अचानक आग लग गई थी। उसके बाद वह मामला वहीं दबकर रह गया।  इधर गौशाला में भूसा सप्लाई को लेकर आए दिन विवाद की स्थिति बनती रही है। कभी गोदाम में भूसा ही नहीं रहता है तो कभी भूसे में मैथी का भूसा मिला रहता है। इस संबंध में पूर्व में भाजपा के पार्षदों ने भी निगम अधिकािरयों को कई बार शिकायत की। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त ने उस समय एक आदेश जारी कर दिया। जिसमें लिखा कि बिना अधिकारी की अनुमति के कोई भी व्यक्ति गौशाला में नहीं जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष का फोन आया था। उन्होंने भूसे में गड़बड़ी होने की जानकारी दी है। सोमवार को इसकी जानकारी की जाएगी। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p><strong>कार्रवाई के साथ लगाएंगे पेनल्टी</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने फोन पर जानकारी दी है। सोमवार को इसकी जानकारी की जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही उस पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। पूर्व में पकड़ी गई गड़बड़ी में सिर्फ संवेदक बदल दिया गया था। गड़बड़ी करने वाले संवेदक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यदि उस समय कार्रवाई  हो जाती तो दोबारा कोई ऐसी हिम्मत नहीं करता। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 16:16:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>स्वास्थ्य से खिलवाड़: घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री जारी </title>
                                    <description><![CDATA[करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/playing-with-health-sale-of-substandard-and-adulterated-food-items-and-rotten-fruits-continues/article-11875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/62.jpg" alt=""></a><br /><p>करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। आम आदमी अब यहाँ पर घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थो की शिकायत करते हुए मिल रहा है। सबसे ज्यादा दूधियाओं की मनमानी चल रही है जो कि शुद्ध तो बेचना ही नहीं चाहते। पानी मिला एवं क्रीम निकला दूध यहाँ खूब बिक रहा है</p>
<p>गांवों से मोटर साईकिलों पर एवं अन्य साधनों से दूधियां दूध लाते है वह पहले उनकी क्रीम निकलवाते है इसके बाद लोगों को दूध देते है। दूधियां कभी आधा प्योर और आधा फिल्टर दूध (क्रीम निकला हुआ) मिलाकर दूध बेचते है तो कभी प्योर दूध में पानी मिलाकर बेचते है इस प्रकार जन स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड रहा है। देशी घी की तो बाजार में इतनी ब्रांडों के वाजार में है कि उनमें असली कौनसी और नकली कौनसी इसका भेद ही नहीं हो पा रहा है। देशी घी 200-250 तथा 300से 400 और पांच सौ रूपये तक का मिल रहा है यह समझ में नहीं आता कि यह अलग-अलग भाव क्यों है। करौली में देशी घी बेचने वाले जो कि बाहर अन्य प्रांत से देशी घी लाकर बेचते है</p>
<p>वह बगैर लेखा जोखा के बगैर बिल के ही काम कर रहे है। ऐसे में सरकार को राजस्व का चूना भी लगा रहे हैं। करौली में जब मिलावटी एवं घटिया खाद्य पदार्थो एवं सडे-गले फलों की बिक्री की बात लोगों द्वारा उठाई जाती है तो जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा महज खानापूर्ति शुरू की जाती है चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर बार केवल हिदायत देना और चेतावनी देकर ही अपना कर्तव्य पूरा मान लेते हेैं जबकि सैम्पलिंग भी होनी चाहिए वह भी वहाँ से जहाँ की थोक में वस्तुएं लोग बेचते है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं खाद्य निरीक्षक यह तो कहते है कि करौली जिले में मिलावटी खाद्य वस्तुओं, रंगदार मिठाई, नमकीन, सडे-गले फलों के उपभोक्ताओं को खाने के बाद बीमारियां बढ जाती है इन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की जाती है किंतु कितने सैम्पल हुए और उनमें पिछले समय के जो सैम्पल लिए और जो जांच में मिलावट होना पाया गया उन मिलावटियों या अन्य के खिलाफ क्या कार्यवाही हुई क्या पुलिस में मामला दर्ज कराया गया इन सब प्रश्नों को वह गोलमोल कर जाते है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 12:24:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश में 80 से 90% दूध मिलावटी, घातक बीमारियों का खतरा, हाई कोर्ट में रखी रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chandigarh--80-to-90--of-milk-adulterated-in-the-country--the-risk-of-fatal-diseases--revealed-in-the-report-placed-in-the-high-court/article-10299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/milk.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दाखिल जनहित याचिका में बताया गया कि देश में मिल रहे दूध व दूध से जुड़े 80 से 90 प्रतिशत उत्पाद मिलावटी हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने इसे रोकने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। इस जानकारी को रिकार्ड में रखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आगे भी इसी प्रकार जांच जारी रखने का आदेश दिया है। सर्विंग इन आगेर्नाइजेशन इन लीगल इनिशिएटिव संस्था ने एडवोकेट कीरत पाल सिंह के माध्यम से याचिका दायर कर बताया कि प्रकाशित एक आर्टिकल में बताया है कि भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर सही नहीं उतरे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>विज्ञानं एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है। हाई कोर्ट को बताया गया कि भारत दुग्ध उत्पाद के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा है। अगर आंकड़ों को देखें तो तो देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है। उत्पादन और खपत के बीच अंतर से साफ है कि मांग मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से पूरी की जा रही है।  केंद्र सरकार समय-समय पर मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच के निर्देश जारी करती है बावजूद इसके इन निदेर्शों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा। याची ने हाई कोर्ट से अपील की कि केंद्र सहित राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि वह कैसे मिलावटी दुग्ध उत्पादों की जांच कर सकते हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि नियमित जांच जारी है। हाईकोर्ट ने जांच को भविष्य में भी ऐसे ही जारी रखने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।<br /><br /><strong>नकली दूध बनाने में घातक पदार्थों का होता है इस्तेमाल</strong><br />हाई कोर्ट को बताया गया कि नकली दूध बनाने में घातक डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाईड्रोपेरॉक्साइड, वनस्पति तेल, फर्टिलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। यह सभी पदार्थ मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक हैं और कैंसर जैसे कई घातक रोगों का कारक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:38:59 +0530</pubDate>
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