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                <title>potholes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : बारिश से बिगड़ी सड़कों की केडीए ने ली सुध, गड्ढे भरने और पेचवर्क का काम तेज</title>
                                    <description><![CDATA[एरोड्रम से सीएडी और महाराणा प्रताप सर्किल रोड पर गिट्टी फैलने से हो रहे थे हादसे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--kda-takes-note-of-roads-damaged-by-rain--work-on-filling-potholes-and-patch-repairs-accelerates/article-163725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)87.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों की सड़कों पर पेचवर्क कर उन्हें सही करने का काम किया जा रहा है।शहर में इस बार अभी तक लगातार मूसलाधार बारिश तो नहीं हुई है। लेकिन गत दिनों जितनी सी भी हल्की बारिश हुई थी। उसी में शहर के अधिकतर क्षेत्रों में गली मौहल्लों की ही नहीं मुख्य मार्गों तक की सड़कें बदहाल हो गई थी। कई जगह तो बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए थे और कई जगह पर डामर उखडऩे से सड़कों पर गिट्टी फेल गई थी। जिससे आए दिन वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसे हो रहे थे।एरोड्राम चौराहे से सीएडी रोड हो या नदी पार क्षेत्र में महाराणा प्रताप सर्किल की रोड। कई जगह पर तो दो पहिया वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो रहा था। गत दिनों तो स्कूटी सवार एक महिला की गिट्टी पर वाहन का संतुलन बिगडऩे से गिरने पर उनकी मौत तक हो गई थी। इसे देखते हुए केडीए ने सड़कों के गड्ढ़ों को सही करने का काम शुरु कर दिया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि शहर के मुख्य मार्गों पर हो रहे गड्ढ़ों का मामला दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 12 अगस्त को पेज दो पर' ऐ भाई...जरा देखकर चलों शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर की अधिकतर बदहाल सड़कों की हालत को बयां किया था। साथ ही सीएडी रोड पर गिट्टी फेलने समेत कई जगह का मामला उठाया था।<br />समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारी हरकत में आए। </p>
<p>गत दिनों केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों के गड्ढ़ों को तुरंत सही किया जाए। जिससे आमजन को परेशानी नहीं हो और हादसे भी नहीं हो सके। इसके बाद केडीए अधिकारियों ने सड़कों के गड्ढ़े भरने व पेचवर्क का काम शुरु किया है। </p>
<p>केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि शहर में कई जगह पर मेन रोड पर बड़े गड्ढ़े हो गए थे। फिलहाल उन्हें स्मूथ करने का काम किया जा रहा है। जहां सीसी हो सकता है वहां सीसी किया जा रहा है और जहां डामर का पेचवर्क हो सकता है वहां उसे किया जा रहा है। अभी काम चल रहा है। कई जगह पर काम हो गया है और कई जगह पर चल रहा है। जहां अधिक समस्या है वहां जल्दी ही सड़कों को सही करवा दिया जाएगा। जिससे वाहनों का संतुलन नहीं बिगड़े और हादसे नहीं हों। जबकि बड़े स्तर पर सड़कों को सही करने का काम बरसात का सीजन समाप्त होने के बाद 15 सितम्बर से किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:17:01 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का... अब न कमानी टूटेगी और न ही बिगड़ेगा वाहनों का संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----no-more-broken-suspension-springs-or-loss-of-vehicle-balance/article-162841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। टिपटा स्थित गढ़ पैलेस के पास अब न तो वाहनों का संतुलन बिगड़ेगा और न ही किसी वाहन की कमानी टूटेगी। अब वाहन आसानी से निकल रहे हैं। यह संभव हुआ है नगर निगम की ओर से उन गड्ढ़ों को भरने से। किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुुलिया से टिपटा गढ़ पैलेस की तरफ जाते समय सड़क के मोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे थे। पिछले काफी समय से हो रहे इन गड्ढ़ों से रोजाना भारी भरकम वाहनों के साथ ही दो पहिया व ई रिक् शा जैसे वाहन भी निकल रहे हैं। जिससे गड्ढ़ों का साइज बढ़ता ही गया। हालत यह हो गई कि कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे। साथ ही गड्ढ़ों के कारण वाहनों की गति धीमी होने से वहां दिन के समय कई बार ट्रैफिक जाम तक की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाहन चालक परेशान हो रहे थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि लोगों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 9 अगस्त को पेज 8 पर' किसी की कमानी टूट रही तो किसी वाहन का बिगड़ रहा संतुलन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के साथ ही नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने इन गड्ढ़ों को भरने व सड़क को सही करने का निर्णय किया।</p>
<p>नगर निगम के अधिषाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इन गड्ढ़ों में रेडी मिक्स बिटुमिन कॉफ्रींट डाली गई है। एलिवेटेड पुलिया से लेकर बैराज के समानांतर पुल व शक्ति नगर के आस-पास तक के सभी गड्ढ़ों को इससे भरा गया है। करीब 35 कट्टे मैटेरियल का उपयोग किया गया है। इससे ये बरसात में नहीं उखड़ेंगा और लम्बे समय तक टिका रहेगा।</p>
<p><strong>नाला व इंटर लोकिंग होगी</strong><br />एक्सईएन कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर इनटरलोकिग की जाएगी। साथ ही किशोरपुरा दवराजे तक आरसीसी का नाला भी बनाया जाएगा। जिससे यहां पानी नहीं भरेगा और सड़क भी क्षतिग्रस्त नहीं होगी। इसके लिए टेंडर जारी कर बरसात के बाद काम शुरू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>किसी वाहन की कमानी टूट रही, तो किसी का बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में तब्दील हुई टिपटा की सड़क, हर कदम पर खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-suffering-broken-suspension-springs-and-loss-of-balance/article-162536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अभी तो ठीक से बरसात शुरु भी नहीं हुई है। उससे पहले ही सड़कों की हालत खराब होने लगी है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे ही खतरे से सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।यह मामला वैसे तो एक जगह का है लेकिन इसी तरह की स्थिति शहर में कई जगह पर देखी जा सकती है। टिपटा में गढ़ पैलेस के पास सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे उस सड़क से रोजाना गुजर रहे सैकड़ों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>हालत यह है कि एक तो यहां का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही 24 घंटे बनी हुई है। दिन के समय तो इस सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां कई बार जाम के हालात बने रहते हैं। जिससे वाहनों को रैंग-रैंग कर निकलना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क पर लम्बे समय से बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। ऐसे में किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुलिया से साई बाबा मंदिर की तरफ जाते समय गड्ढ़ों में वाहनों को दचके लग रहे हैं। साथ ही कई वाहनों को रोजाना नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि आए दिन ई रिक् शा हो या ऑटो किसी ने किसी वाहन की या तो कमानी टूट रही है या फिर वाहन का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। दिन में रोजाना कई बार इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।इतना ही नहीं इसके आगे बैराज के समानांतर पुल पर भी दोनों तरफ काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>तीन तरफ से आ रहे वाहन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के सामने से दशहरा मैदान की तरफ जाने का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां तीन तरफ से वाहन निकल रहे हैं। एक सकतपुरा व पाटनपोल की तरफ से दशहरा मैदान की तरफ जाने वाले वाहन, दूसरे दशहरा मैदान व एलिवेटेड पुलिया से आने वाले वाहन उस संकरे रास्ते से निकल रहे हैं। दिन के समय तो यहां से कचरे के डम्पर और स्कूली बच्चों के वाहन ऑटो व वैन तक निकलते हैं। जिससे वहां जाम के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>काम जरा सा, हादसों का इंतजार</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क का जरा सा हिस्सा खराब हो रहा है। लेकिन गड्ढ़े अधिक गहरे व बड़े हैं। जिससे अचानक आने वाले वाहन झटके से उन गड्ढ़ों में उछल रहे हैं। जिससे वाहनों को नुकसान व हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तो बड़ा हादसा होने के बाद ही चेेतता रहा है। जबकि छोटा सा काम बहुत कम समय में हो सकता है उसे नहीं कर रहे।</p>
<p>यह तो एक जगह का मामला है। इसी तरह से शहर में अधिकतर सड़कों की भी यही स्थिति है। जिनमें विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय के सामने की सड़क हो या मस्जिद रोड,नयापुरा की अंदरूनी सड़कें हो या छावनी की। सभी जगह सड़कों पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात आने पर ये गड्ढ़े और बड़े हो जाएंगे।</p>
<p><strong>24 घंटे ट्रैफिक से परेशानी</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है। दिन ही नहीं रात में भी डम्पर निकलते रहते हैं। जिससे इस सड़क को नुकसान होता है। पूर्व में कई बार इसे सुधारा भी जा चुका है। लेकिन वाहनों के दबाव के कारण यहां फिर से गड्ढ़े हो जाते हैं। लेकिन इन गड्ढ़ों को जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:08:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ : नहीं हटी बाधा, बरसात में दुर्घटना का  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[रास्ता बंद करने वाली बैरिकेडिंग व मिट्टी के ढेर नहीं हटाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-near-the-pond-reopened--but-obstructions-remain--risk-of-accidents-during-rains/article-162357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पास बदहाल हो चुकी सड़क को तो कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सही कर दिया गया। जिससे वहां से रास्ता तो चालू हो गया लेकिन अभी तक भी दोनों तरफ की बाधाएं नहीं हटी हैं। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बरसात में वाहनों के फिसलने से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। तालाब किनारे मंदिर के पास की सड़क का एक बड़ा हिस्सा पिछले काफी समय से खस्ताहाल हो रहा था। जिससे वाहन चालकों को उन गड्ढ़ों से हिचकोले खाते हुए निकलना पड़ रहा था। उससे भी वाहनों का संतुलन बिगड़कर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।आमजन की इस समस्या को देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सड़क की मरम्मत तो करवा दी गई। मरम्मत के दौरान जयपुर गोल्डन के सामने मल्टी स्टोरी पार्किंग से ही वाहनों को डायवर्ट कर वनवे रास्ते से निकाला गया था। जिससे गीता भवन से नयापुरा की तरफ और नयापुरा से गीता भवन की तरफ जाने का एक ही सड़क से रास्ता था। जिससे वाहनों के जाम की समस्या बनी हुई थी।</p>
<p><strong>एक तरफ बोर्ड तो दूसरी तरफ मिट्टी के ढेर</strong><br />वहीं सड़क मरम्मत के बाद भी संवेदक की ओर से सड़क के दोनों तरफ रास्ता बंद करने के लिए लगाई गई बेरीकेडिंग व लगाए मिट्टी के ढेर को नहीं हटाया गया। जिससे वाहन चालकों ने परेशान होकर खुद ही सड़क मरम्मत के बाद वहां से वाहनों को निकालना शुरु कर दिया। जबकि अभी भी सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को नहीं हटाया गया है। ऐसे में हालत यह है कि मल्टी स्टोरी पाकिंग के सामने तो कार्य प्रगति पर होने का बोर्ड लगा हुआ है। जहां साइड से थोड़ी सी जगह से वाहन निकल रहे हैं। वहीं आगे मंदिर के पास व उसके आगे दो जगह पर मिट्टी के ढेर से वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बरसात होने पर अधिक खतरा</strong><br />वाहन चालकों ने बताया कि जैसे-तैसे दो पहिया वाहन तो निकल रहे हैं। जबकि चार पहिया वाहनों को मिट्टी के ढेर से निकलने में परेशानी हो रही है। कई बार वाहन का पिछला हिस्सा तो कभी बोनट का हिस्सा मिट्टी के ढेर से अडऩे पर वाहनों को नुकसान हो रहा है। वहीं दो पहिया वाहनों का भी संतुलन बिगडऩे का खतरा बना हुआ है। बरसात के समय में यह खतरा अधिक बढ़ जाएगा। ऐसे में वाहनों के फिसलने पर लोगों के चोटिल होने तक का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को भी दिनभर वाहन तो निकले लेकिन लोग परेशान होते रहे।</p>
<p><strong>वनवे वाले रास्ते पर जाम</strong><br />वहीं जो वाहन इस रास्ते से नहीं निकले तो दूसरी तरफ वनवे वाली साइड पर लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ा। इस रास्ते से निकलने वाले वाहन चालक प्रशासन को कोसते रहे।</p>
<p><strong>मिट्टी का ढेर जल्दी हटवा देंगे</strong><br />सीसी रोड बनने के बाद उसे सैट होने में समय लगता है। इस कारण से रास्ता बंद रखना पड़ता है। लेकिन अब रास्ता चालू हो गया है तो मिट्टी के ढेर व बोर्ड को भी जल्दी ही हटवा देंगे।<br /><strong>-मुकेश कुमार चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:24:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खानपुर-बारां हाइवे : 1.46 करोड़ का बजट मंजूर फिर भी अधूरी सड़क, मार्च 2026 तक पूरा होना था काम</title>
                                    <description><![CDATA[कीचड़ और गड्ढों के कारण 15 गांवों का संपर्क कटा, ग्रामीणों में आक्रोश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/khanpur-baran-highway--%E2%82%B91-46-crore-budget-approved-yet-road-remains-incomplete--work-was-scheduled-for-completion-by-march-2026/article-161845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर बारां मेगा हाइवे पर पर सूमर और खानपुर के बीच से निकल रही, डोबडा व भगवानपुरा को जोड़ने वाला लगभग 7 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग पिछले कई महीनों से अत्यंत दयनीय और बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है, सड़क क्षतिग्रस्त होने पर बजट घोषणा 2025-26 के तहत नॉन पैचेबल सड़कों के निर्माण कार्य के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के दो हिस्से हैं, जिसमें पहला भाग मेगा हाइवे से डोबडा लगभग 3 किमी (स्वीकृत राशि 62.00 लाख) तथा दूसरा भाग डोबडा से भगवानपुरा लगभग 4 किमी (स्वीकृत राशि 84.05 लाख) शामिल हैं, जिनकी कुल स्वीकृत राशि लगभग 146 लाख रुपए है। विभागीय बोर्ड पर दर्ज विवरण के अनुसार इस सड़क निर्माण कार्य को अक्टूबर 2025 को शुरू किया जाना था और इसे मार्च 2026 तक पूरा किया जाना अनिवार्य था, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि निर्धारित समयावधि बीते लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी केवल सड़क को खोदकर और उस पर नाम मात्र की गिट्टी डालकर काम बीच में ही पूरी तरह ठप कर दिया गया है।</p>
<p>ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि सड़क को खोदकर महीनों से काम अधूरा छोड़ने के कारण वर्तमान मानसूनीबरसात के मौसम में इस पर जानलेवा बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनमें गंदा पानी भर गया है। चारों तरफ कीचड़ हो जाने जाने के कारण इस मार्ग पर गुजरने वाले दुपहिया वाहन चालकों का चलना तो दूर, संभलना भी मुश्किल हो गया है और आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं।</p>
<p>हालात इतने भयावह और बदतर हो चुके हैं कि इस रास्ते से स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आमजन का पैदल निकलना भी पूरी तरह दूभर हो गया है, जिससे क्षेत्र के करीब 10 से 15 गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त होकर ठप हो गया है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी दूभर हो गया है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज नागर, महेश नागर,  लेखराज नागर, ओमप्रकाश पोटर, मोहनलाल कुम्हार, बबलू मेहरा और बजरंग लाल गुर्जर सहित समस्त क्षेत्रवासियों ने तीखी नाराजगी जताई है और समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने की गुहार लगाई है।<br />यह एक ऐसा रोड है जिससे तीन गांव जुड़े हुए हैं और यह मुख्य मार्ग की पगडंडी बनी हुई है जिसके ऊपर से व्यक्ति आते जाते हैं कभी किस को रात में आना पड़ता है तो कभी दिन में और अचानक यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसको रात को भी इसी रोड से निकालना पड़ता है और बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-अमर लाल बैरवा, भगवानपुर</strong></p>
<p>निर्धारित समयावधि मार्च 2026 बीत चुकी है, लेकिन मौके पर सिर्फ गड्ढे और कीचड़ के अलावा कुछ नहीं है। इस रास्ते से स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का निकलना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो गया है।<br /><strong>- जय राम मीणा, ग्रामीण</strong></p>
<p>लापरवाही के खिलाफ क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। यदि समय रहते इस सड़क का डामरीकरण शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीणों को मजबूरन कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।<br /><strong>- मनोज नागर, ग्रामीण</strong></p>
<p>रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढे होने और उनमें गंदा पानी भरने से आए दिन दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। <br /><strong>- रामहेतार बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>इस मार्ग के बदहाल होने से करीब 10 से 15 गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है। बरसात के दिनों में हालात इतने भयावह हो जाते हैं कि लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं।<br /><strong>- ओमप्रकाश पोटर, ग्रामीण</strong></p>
<p>इस सड़क मार्ग का निर्माण कार्य तुरंत प्रभाव से शुरू करवाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके।<br /><strong>- गुमानी शंकर मीणा, ग्रामीण</strong></p>
<p>भगवानपुरा का सड़क निर्माण कार्य जो 2026 में पूरा होना था बारिश के मौसम के कारण फिलहाल बंद है। बारिश और डामर की शॉर्टज समाप्त होने के बाद, तथा बरसात का मौसम खत्म होते ही, कांट्रेक्टर को पाबंद करके इस काम को जल्द से जल्द दोबारा शुरू करवाया जाएगा।<br /><strong>- आरसी मीना, पीडब्लयूडी अधिशासी अभियंता खानपुर</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:07:09 +0530</pubDate>
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                <title>खस्ताहाल सड़क बनी हादसे का सबब, राहगीर परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का सही अनुमान नहीं लग पाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dilapidated-road-causes-accidents--commuters-face-hardship/article-161700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। राज्य सरकार के गड्डा मुक्त सड़क अभियान के दावों की पोल चौमहला कस्बे की मुख्य बाजार सड़क खोल रही है। झंडा चौक से डॉ. रमेश खटीक तक जाने वाला प्रमुख मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में पड़ा है। सड़क की एक ओर की पूरी परत उखड़ जाने से जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि दूसरी ओर सड़क ऊंची-नीची होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। </p>
<p>यह मार्ग कस्बे का सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र होने केकारण दिनभर भारी यातायात रहता है। बरसात के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। </p>
<p>स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की मरम्मतको लेकर कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि गड्डा मुक्त सड़क अभियान केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर हैं।</p>
<p><strong>बड़े हादसे की आशंका, शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गड्डों को भरकर सड़क दुरुस्त नहीं की गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी कि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। </p>
<p>सड़क दिखवाकर शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी।<br /><strong>- शंकर सिंह कनिष्ठ अभियंता सार्वजिनक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:09:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अधूरी एमडीआर-183 सड़क बरसात में बनी बड़ी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग की स्वीकृति के बाद भी निर्माण अधूरा, राहगीरों ने की शीघ्र कार्य की मांग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/incomplete-mdr-183-road-becomes-a-major-nuisance-during-the-monsoon/article-160122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)58.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। नैनवां से वाया बांसी होते हुए धनावा- बूंदी को जोड़ने वाली एमडीआर-183 सड़क पर दो स्थानों पर वर्षों से अधूरा पड़ा निर्माण बरसात के दिनों में राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। वन विभाग की आपत्ति के कारण रुका यह कार्य अब दोनों विभागों से स्वीकृति मिलने के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। इससे सड़क पर बने गहरे गड्डों में वर्षा का पानी भर जाने से वाहन चालकों और यात्रियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि लंबे समय से समस्या जस की तस बनी हुई है, जबकि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग, नैनवां ने धनावा से नैनवां तक लगभग 45 किलोमीटर लंबे मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (एमडीआर-183) का निर्माण कराया था। आबादी क्षेत्रों में सीसी सड़क तथा अन्य स्थानों पर डामरीकरण किया गया, लेकिन सांवतगढ़-फोकी पिपलिया-बांसी मार्ग पर करीब 2.9 किलोमीटर तथा मानपुरा डुंगरिया से नैनवां की ओर लगभग तीन किलोमीटर सड़क वन विभाग की आपत्ति के कारण अधूरी रह गई। वर्तमान में वन विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद भी निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ है। क्षेत्र के लगभग 60 गांवों के लोग इसी मार्ग से बूंदी जिला मुख्यालय, नैनवां और हिण्डोली के लिए आवागमन करते हैं। किसानों को भी कृषि उपज लेकर मंडियों तक पहुंचने में कठिनाई रही है।</p>
<p>बांसी निवासी नितेश कुमार शर्मा ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण वाहन लगातार हिचकोले खाते हैं और आए दिन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। बांसी निवासी नीरूशंकर शर्मा ने कहा कि बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी गहरे गड्डों के कारण भारी असुविधा होती है। बांसी निवासी अवधेश कुमार जैन ने बताया कि हल्की बारिश में भी सड़क फिसलनभरी हो जाती है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है। वहीं भण्डेड़ा निवासी डेयरी संचालक गणेश कुमार साहू ने कहा कि दूध परिवहन के दौरान भी वाहनों को नुकसान उठाना पड़ता है।</p>
<p>पूर्व राज्यमंत्री प्रभूलाल सैनी सहित जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से वन विभाग से संबंधित अधिकारियों से शीघ्र अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए पुनः आग्रह किया जाएगा, ताकि हजारों बाधा दूर हो चुकी है। अब संबंधित विभागीय अधिकारियों से शिघ्र अधुरे निर्माण कार्य को पूरा कराने के लिए पुन: आग्रह किया जाएगा, ताकि हजारों  राहगीरों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा (भाया), बांसी प्रशासक (सरपंच) एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 14:17:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क तो सुधरी नहीं, दीवार व व्यू कटर भी ढहे</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात का पानी भरने से गड्ढ़े लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-remains-unrepaired--wall-and--view-cutters--collapse/article-159538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से एक तरफ तो शहर में सभी बड़े बरसाती नालों को व्यू कटर से ढकने का काम किया जा रहा है। वहीं इंद्रा गांधी नगर में नाले की पुलिया पर बनाई दीवार व व्यू कटर कुछ समय में ही ढह गए।नगर निगम की ओर से शहर के सभी बड़े बरसाती नालों में ऊपर से डलने वाले कचरे को रोकने के लिए नालों पर व्यू कटर लगाए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत औद्योगिक क्षेत्र से की गई थी। सबसे पहले एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर के बीच इंद्रा गांधी नगर स्थित नाले की पुलिया पर चार दीवारी बनाई गई थी। उसके बाद पुलिया के दोनों तरफ फाइबर के व्यू कटर लगाए गए थे। ये व्यू कटर कुछ समय तक तो रहे। स्थानीय लोगों को भी अच्छा लगा। लेकिन कुछ समय पहले हवा के एक झौंके ने पुलिया की एक तरफ की दीवार और उस पर लगे व्यू कटर को ऐसा झटका दिया कि वह चंद सैकंड में ही धराशाही हो गए। उसके बाद दूसरी तरफ का व्यू कटर भी हटा दिया गया। जबकि दूसरी साइड की दीवार अभी अपनी जगह पर खड़ी है।</p>
<p><strong>सड़क की हालत बदहाल</strong><br />पुलिया की सड़क की हालत पहले भी बहुत खराब थी वह आज भी वैसे ही है। जबकि बरसात का पानी भरने से वहां गड्ढ़े लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। कुछ समय पहले हुई बरसात का पानी अभी भी उन गड्ढ़ों में भरा हुआ है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों व स्थानीय लोगों को अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सडणक के गड्ढ़े तो सुधरे नहीं। दीवार व व्यू कटर भी ऐसे लगाए तो अधिक दिन तक नहीं चल सके। जिससे करीब एक से डेढ़ लाख रुपए का नुकसान हुआ है।</p>
<p><strong>यहां भी लगाए व्यू कटर</strong><br />नगर निगम की ओर से डीसीएम चौराहा स्थित मेन रोड के नाले पर, कंसुआ और अब गुमानपुरा नहर के नाले पर व्यू कटर लगाए जा रहे हैं। वहीं सीएडी मेन रोड स्थित साजी देहड़ा नाले पर भी व्यू कटर लगाकर उसे ढका गया है।</p>
<p><strong>संवेदक को किया डीबार</strong><br />नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर समेत कई जगह के नालों पर व्यू कटर लगाए जा रहे हैं। लेकिन जिस दिन इस नाले की पुलिया की दीवार व व्यू कटर ढहे उस दिन हवा काफी तेज थी और दीवार को बने अधिक समय भी नहीं हुआ था। इस कारण से वह ढह गई। व्यू कटर फाइबर का हल्का होने से दीवार के साथ ही ही गिर गया था। ऐसे में इस काम को करने वाले संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे डीबार कर दिया गया है। साथ ही मामले की जांच की जा रही है।<br /><strong>-कुलदीप प्रेमी अधिशासी अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 14:53:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>गड्ढे और मवेशी = बरसात में खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में हिचकोले व मवेशियों  से दुर्घटना की संभावना
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/potholes-and-cattle---danger-during-the-rainy-season/article-159244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । बरसात का सीजन शुरु हो गया है। ऐसे में सड़कों पर हो रहे गड्ढ़े और मवेशियों का जमघट खतरा बने हुए हैं।मानसून ने तो दस्तक दे दी है। लेकिन अभी तक तेज बरसात नहीं हुई है। उससे पहले ही शहर की सड़कों पर बीच में बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। अभी तो ये गड्ढ़े नजर भी आ रहे हैं। लेकिन बरसात के समय में इनमें पानी भरने पर एक ओर जहां इनकी गहराई नजर नहीं आएगी। वहीं दूसरी तरफ बरसाती पानी भरने से ये गड्ढ़े और बड़ा रूप लेकर लोगों के लिए हादसों का खतरा बन जाएंगे। वहीं रात के समय अंधेरा होने पर तो ये नजर भी नहीं आएंगे। जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक हो जाएगी।</p>
<p>सीएडी से दादाबाड़ी के बीच नए बने एलबीएस मार्ग पर बीच सड़क काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसाती पानी भरने से इनका आकार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में ये और भी बड़े हो सकते हैं। इसी तरह से दादाबाड़ी छोटा चौराहे के पास मेन रोड पर बड़ा गड्ढ़ा है। जिस पर से दो पहिया ही नहीं चार पहिया वाहन तक हिचकलो खाते हुए निकल रहे हैं। इसी तरह सरोवर टॉकीज के सामने स्थित मंदिर के पीछे व तालाब के किनारे की सड़क का काद्दफी हिस्सा खस्ताहाल हो रहा है। जिससे वहां से चार पहिया वाहन तक निकलते समय असंतुलित हो रहे हैं। जिससे अभी हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि बरसात में यहां हालत अधिक खराब होने से लोगों के लिए जान जोखिम में डालने वाले साबित हो जाएंगे।<br />चम्बल की बड़ी पुलिया पर महाराणा प्रताप सर्किल के पास भी कई जगह पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। शहर में ऐसी कई और भी जगह हहैं जहां मेन रोड की हालत ही खराब हो रही है। जबकि गली मौहल्लों की सड़कों की हालत तो बदतर स्थिति में है।</p>
<p><strong>बरसात में बढ़ा मवेशियों का जमघट</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने की दिशा में किया गया प्रयास अभी तक साकार नहीं हो पाया है। हालत यह है कि अभी भी मुख्य मार्गों पर निराक्षित मवेशियों के जमघट लगे हुए देखे जा सकते हैं। किशोरपुरा थाने के सामने का क्षेत्र हो या दादाबाड़ी का। डीसीएम रोड पर नई धानमंडी मेन रोड का क्षेत्र हो या नयापुरा में एमबीएस रोड। हर जगह पर दिन हो या रात बीच राह में मवेशियों का जमघट लगा रहता है। ऐसे में बरसात के समय में ये हादसों का कारण बन सकते हैं। तेजी से आते वाहनों की चकाचौंथ रोशनी में बरसाती पानी के कारण ये मवेशी दूर से नजर नहीं आने पर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि कुछ समय से मवेशी कम नजर आ रहे थे। लेकिन बरसाती सीजन शुरु होने के साथ ही ये बीच राह सड़कों पर फिर से नजर आने लगे हैं।</p>
<p><strong>बरसात से पहले सही करवाएंगे गड्ढ़े</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर सड़कों के गड्ढ़ों को पेचवर्क के माध्यम से सही कराया गया है। अभी भी जहां गड्ढ़े अधिक खतरनाक होंगे उन्हें बरसात शुरु होने से पहले सही करवा दिया जाएगा।</p>
<p>वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़कों से मवेशियों को लगातार पकड़ा जा रहा है। बरसात में लोग इन्हें पशु पालक खुला छोड़ देते हैं। जिससे ये सड़कों पर अधिक नजर आते हैं। फिर भी जहां अधिक मवेशी होंगे और हादसों का खतरा रहेगा उन्हें भी पकड़ा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:48:15 +0530</pubDate>
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