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                <title>nri community - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मोहन भागवत का दावा: RSS की विचारधारा दुनिया को संघर्षों से निकाल सकती है, राष्ट्र और पूरी दुनिया का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा </title>
                                    <description><![CDATA[आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने लंदन में संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने हिंदू सभ्यता की विचारधारा को वैश्विक संघर्षों के समाधान का आधार बताया। भागवत ने 'जियो और जीने दो' तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' के संदेश के साथ प्रवासियों से अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठा रखने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mohan-bhagwat-claims-that-the-ideology-of-rss-can-free/article-164853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mohan-bhagwat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को लंदन में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिंदू सभ्यता की विचारधारा को वैश्विक संघर्षों के समाधान का आधार बताते हुए कहा कि दुनिया को मतभेदों के बजाय समानताओं पर ध्यान देना और 'जियो और जीने दो' की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भागवत ने कहा, "विविधता स्वाभाविक है। हमें विविधता के साथ रहना सीखना होगा। हमें अलगाव या संघर्ष पैदा नहीं करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि दुनिया बाहरी तौर पर भले ही बंटी हुई दिखे, लेकिन वास्तव में सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं और यही हिंदू विचार का मूल है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 'हिंदू' शब्द को केवल धार्मिक परंपराओं या जीवनशैली के आधार पर नहीं समझा जा सकता। अलग-अलग रास्ते एक ही सत्य तक पहुंच सकते हैं। "मैं सही हूं, आप भी सही हैं" की भावना के साथ विभिन्न विचारों और मार्गों का सम्मान करते हुए साथ रहना चाहिए। 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा पर उन्होंने कहा कि इसका संबंध किसी राजनीतिक व्यवस्था या शासन प्रणाली से नहीं, बल्कि सार्वभौमिक कल्याण से है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र युद्ध शुरू नहीं करता, बल्कि समृद्धि, मानवता और प्रकृति के साथ भाईचारे को बढ़ावा देता है। उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति, राष्ट्र और पूरी दुनिया का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा है।</p>
<p>विदेशों में रहने वाले हिंदुओं से उन्होंने कहा कि अपनी जन्मभूमि से मिले मूल्यों का सम्मान करते हुए कर्मभूमि के प्रति पूरी निष्ठा रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के लिए ब्रिटेन उनकी कर्मभूमि है और भारत की सेवा करने के लिए उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठा छोड़ने की जरूरत नहीं है। भागवत ने युवाओं को दुनिया को बेहतर बनाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने 'सेवा' को निस्वार्थ भाव से करने पर जोर देते हुए कहा कि सेवा किसी पहचान या सम्मान के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के निकट पहुंचने का अवसर है।</p>
<p>आरएसएस के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ को अगले 100 वर्षों तक अपने कार्य को जारी रखना है और हिंदू समाज के व्यापक संगठन का लक्ष्य जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की गतिविधियां खेल, शिक्षा, महिला कल्याण और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हैं। उन्होंने 'पंच परिवर्तन' का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव केवल सरकार की नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में परिवर्तन से आएगा। प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, जल संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक अनुशासन इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने कहा, "संघ यह नहीं करेगा, स्वयंसेवक करेंगे।" साथ ही उन्होंने संघ के बाहर काम कर रहे संगठनों और लोगों के साथ सहयोग की बात कही। भागवत ने कहा, "जो हमें जोड़ता है, उस पर ध्यान दें, न कि जो हमें बांटता है।" उन्होंने कहा कि ऐसा करने से समाज और समुदाय समृद्ध होंगे तथा दुनिया बेहतर जगह बनेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 10:33:52 +0530</pubDate>
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                <title>टोक्यो में प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन: मैं मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर बनाता हूं</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार शाम यहां प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जब अपने ऐतिहासिक संबोधन के लिए शिकागो जा रहे थे, तो उससे पहले वो जापान भी आए थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-narendra-modi-s-address-to-the-nri-community-in-tokyo--i-draw-a-line-on-stone--not-on-butter/article-10330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modi-new.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि आजादी के अमृतकाल में भारत की समृद्धि एवं संपन्नता की ऐसी इबारत लिखी जा रही है जिसे मिटाना असंभव होगा। हमने जो संकल्प लिए हैं, वे बड़े हैं। मुझे जो संस्कार मिला है और जिन लोगों ने मुझे गढ़ा है, मुझे मक्खन पर लकीर करने में मजा नहीं आता है, मैं पत्थर में लकीर करता हूं।  </p>
<p><br />जापान की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार शाम यहां प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जब अपने ऐतिहासिक संबोधन के लिए शिकागो जा रहे थे, तो उससे पहले वो जापान भी आए थे। जापान ने उनके मन-मस्तिष्क पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा था। जापान के लोगों की देशभक्ति, जापान के लोगों का आत्मविश्वास, स्वच्छता के लिए जापान के लोगों की जागरूकता, उन्होंने इसकी खुलकर प्रशंसा की थी। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भी जापान को प्राचीन एवं आधुनिक राष्ट्र बताया था और कमल दल के रूप में निरुपित किया था।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>जापान से हमारा रिश्ता आत्मीयता का</strong> </span><br />प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान स्वाभाविक साझीदार हैं। जापान से हमारा रिश्ता आत्मीयता का है, आध्यात्म का है, सहयोग का है, अपनेपन का है, सामर्थ्य का है, सम्मान का है, विश्व के लिए साझे संकल्प का है। जापान से हमारा रिश्ता बुद्ध का है, बोध का है, ज्ञान का है, ध्यान का है।  <br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>आज बुद्ध के मार्ग पर चलने की जरूरत</strong></span><br />उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को भगवान बुद्ध के विचारों पर, उनके बताए रास्ते पर चलने की बहुत जरूरत है। यही रास्ता है जो आज दुनिया की हर चुनौती, चाहे वो हिंसा हो, अराजकता हो, आतंकवाद हो, जलवायु परिवर्तन हो, इन सबसे मानवता को बचाने का यही मार्ग है। उन्होंने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसे भगवान बुद्ध का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिला।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>कोरोनाकाल में दुनिया को वैक्सीन दी</strong></span><br />उन्होंने कहा कि सदी के सबसे बड़े कोरोना के संकट में जब किसी को रास्ता नहीं सूझ रहा था तब अनिश्चितता के बीच भारत ने दुनिया को दवाएं दीं। जब वैक्सीन्स उपलब्ध हुईं तब भारत ने ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन्स अपने करोड़ों नागरिकों को भी लगाईं और दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी भेजीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 13:39:35 +0530</pubDate>
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