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                <title>पाकिस्तान के 4 अशांत इलाके : सेना के दमन और आर्थिक बदहाली के खिलाफ अवाम की उठी आवाजें, आजादी की मांग</title>
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                        <![CDATA[इन क्षेत्रों में जनता आर्थिक बदहाली, संसाधनों की लूट और मानवाधिकार हनन से परेशान है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/disturbed-regions-of-pakistan-demand-against/article-128937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से बुरी तरह जूझ रहा है। आईएमएफ के कर्ज पर चल रही सरकार जनता का भरोसा खोती जा रही है। अब देश के चार प्रमुख इलाके-पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान और सिंध-सरकार और सेना की नीतियों के खिलाफ लोग खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। इन क्षेत्रों में जनता आर्थिक बदहाली, संसाधनों की लूट और मानवाधिकार हनन से परेशान है।</p>
<p><strong>पीओके में जनविद्रोह</strong><br />पाक अधिकृत कश्मीर में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर आंदोलन हो रहे हैं। सितंबर में शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक 12 लोगों की मौत और 200 से अधिक घायल हो चुके हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं-बिजली दरों में कटौती, गेहूं पर सब्सिडी, स्थानीय राजस्व पर नियंत्रण और 12 रिजर्व सीटों की समाप्ति। सेना ने गोलीबारी, कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी से आंदोलन दबाने की कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए सच्चाई सामने आई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की किरकिरी हुई। समझौते के बावजूद स्थानीय लोग सरकार की नीयत पर भरोसा नहीं जता रहे हैं।</p>
<p><strong>बलूचिस्तान में आजादी की मांग</strong><br />संसाधनों से समृद्ध लेकिन विकास से वंचित बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी आंदोलन जारी है। बलोच नेशनल मूवमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में 785 लोगों को जबरन गायब किया गया और 121 की हत्या हुई। खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। स्थानीय जनता का कहना है कि गैस, कोयला और खनिज संपदा का शोषण किया गया, लेकिन उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार नहीं मिला। महिला कार्यकर्ता करीमा बलोच का पुराना बयान-हमारे बच्चों को उठाया जाता है, हमारे संसाधन छीने जाते हैं, और हमें ही आतंकवादी कहा जाता है-आज भी आंदोलन की आवाज बना हुआ है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:01:34 +0530</pubDate>
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                <title>आम आदमी की थाली से दूर हुई सब्जियां, रुलाने लगा प्याज</title>
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                        <![CDATA[दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vegetables-kept-away-from-common-man-s-plate--onion-started-crying/article-60874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/aam-admi-ki-thali-s-dur-hui-sabziya,-rulane-lga-pyaz...sultanpur,-kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर बाजार पर बदनसीबी की लकीर खींच दी है। जिसका प्रभाव आम आदमी की जिंदगी पर देखा जा रहा है। महंगाई के चलते रोजाना काम आने वाली सब्जियां आम लोगों की थाली से दूर होती जा रही हैं। कालाबाजारी के चलते दिनों-दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पिछले दिनों हुई बेमौसम की तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से सब्जियां गल गई हैं। आवक कम होने के  चलते सब्जियों के भाव भी आसमान को छू रहे हैं। जिससे ग्रामीणों का बजट गड़बड़ा गया है। प्रतिदिन काम में आने वाली हरी मिर्ची 80 रुपए प्रति किलो, धनिया 100 रुपए प्रति किलो तो अदरक डेढ़ सौ रुपए प्रति किलो एवं टमाटर व प्याज 50 रुपए प्रति किलो के ऊपर बिक रहा है। गोभी का भाव भी 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। हरी सब्जियां पालक व मैथी भी 100 रुपए प्रति किलो के ऊपर चल रही है। सब्जियों का भाव 60 से लेकर 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं। काला बाजारी के चलते आगामी दिनों में हर दाल 100 से 120 तक का आंकड़ा छूने की आशंका है। बाजार मूंग की दाल 120 रुपए प्रति किलो, चने की दाल 90 रुपए प्रति किलो, अरहर की दाल 130 रुपए प्रति किलो, उड़द की दाल 120 रुपए प्रति किलो से भी अधिक भाव में बिक रही है। जबकि कुछ दिनों पूर्व दालों के भाव कम थे। जब मध्यम वर्ग के लोग रसोई के बढ़ते दाम से परेशान हैं तो आम आदमी का तो इस बढ़ रही महंगाई में भगवान ही मालिक है। कुछ दिनों पूर्व भाव सामान्य थे लेकिन कालाबाजारी के चलते अचानक आसमान में पहुंच गई है। जिसने आम वर्ग की कमर तोड़कर रख दी है। बच्चों की फीस, मकान का किराया, दवाइयां, बिजली का बिल ऐसे खर्चे हैं जो किसी के भी रोकने से नहीं रुकते हैं। चाहे कितना भी गरीब आदमी हो लेकिन मजबूरी में उन्हें इनका तो भुगतान करना ही पड़ता है। </p>
<p><strong>आटे की कीमतों में भी हुआ इजाफा</strong><br />वर्तमान में प्रतिदिन काम में आने वाला आटा व गेहूं के भी भाव आसमान में पहुंच रहे हैं। जहां पूर्व में आटा 25 से 30 किलो मिल जाता था, इन दिनों 35 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है। रोजमर्रा के खाने में काम में आने वाले सामानों के भाव आसमान छू रहे हैं तो वही हरी सब्जियों के भाव भी दुगने हो चुके हैं। महंगाई से आम जनता का बहुत बुरा हाल है। कई लोग तो महंगाई के चलते बाजारों में खरीदारी तक करने नहीं आ रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />महंगाई ने घर के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले की कहावतें सिद्ध हो रही हंै कि गृहस्थी चलाना भी एक टेढ़ी खीर है, यह सच भी होता जा रहा है। महंगाई के कारण वाकई में गृहस्थी चलाना एक टेढ़ा काम हो गया है। लोगों को अब अपने बजट में कटौती करनी पड़ रही है।    <br /><strong>- रीना गौड़, ग्रहणी  </strong></p>
<p>रसोई में सब्जियों से किनारा कर चुकी हूं। एक कटोरी दाल में पांच कटोरी पानी डालकर गुजारा करना पड़ रहा है। बढ़ती हुई महंगाई को देख कर जैसे-तैसे गुजारा करना पड़ रहा है। <br /><strong>- लवीना, ग्रहणी  </strong></p>
<p>महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन और कष्टकारी होंगे। आलू, प्याज के भाव भी आसमान छू रहे हैं। खाद्य सामग्रियों के बढ़ते हुए दामों से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।<br /><strong>- गायत्री शर्मा, ग्रहणी</strong></p>
<p><strong>बारिश में गला बीज, दुबारा करनी पड़ी सब्जियों की बुवाई</strong><br />सब्जी की खेती करने वाले किसान जगदीश अजमेरा एवं बनवारी लाल सुमन का कहना है कि पूर्व में हरी सब्जी पालक एवं मैथी के बीज की बुवाई करते समय बारिश हो जाने के कारण बीज गल गए थे। जिसके चलते दोबारा सब्जियां लगानी पड़ीं। जिससे क्षेत्र की सब्जियां मंडी में देर से आने के कारण बाहर से आने वाली हरी सब्जियां महंगी पड़ रही हैं। साथ ही प्याज की फसल की आवक भी कम होने के कारण अचानक से प्याज के दामों में तेजी आ गई है।</p>
<p><strong>बाहर से मंगानी पड़ रहीं सब्जियां</strong><br />सब्जी बेचने वाले जीतू राठौर, कमल सुमन का कहना है कि बाहर से आने वाली सब्जियां महंगी आ रही हैं। जिसके चलते सब्जियों की रेट में अचानक तेजी आ गई है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 21:36:45 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा चुनाव की भेंट चढ़ी उच्च शिक्षा, कोर्स पूरा करवाना बना चुनौती</title>
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                        <![CDATA[विधानसभा चुनाव आगामी 25 नवम्बर को सम्पन्न होंगे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-becomes-victim-of-assembly-elections--completing-the-course-becomes-a-challenge/article-59373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kota2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान विधानसभा चुनाव 25 नवम्बर को हैं लेकिन चुनाव से पहले ही उच्च शिक्षा का समीकरण गड़बड़ा गया। कोटा जिले के 11 राजकीय महाविद्यालयों में करीब आधे से ज्यादा पुरूष शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है। जिससे कॉलेज का शैक्षणिक गणित डगमगा गया। इन दिनों सभी शिक्षक चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए कार्य को अंजाम देने में जुटे हैं। सुबह कॉलेज आने के बाद संबंधित बूथों पर दौड़ लगा रहे हैं। इससे उनके मूल कार्य सहित विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो गई। हालांकि, शिक्षा की कमान महिला शिक्षकों ने संभाली है। दो सेशन के स्टूडेंट्स को एक साथ बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। लेकिन एक सेशन में ही 150 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं, ऐसे में दो सेशन को मिलाकर 300 से अधिक स्टूडेंट्स होते हैं। जिन्हें एक ही शिक्षक को पढ़ाना पड़ रहा है। इस तरह न तो शिक्षक अपनी बात समझा पाता है और न ही स्टूडेंट्स अपने डाउट क्लिीयर कर पाते हैं। </p>
<p><strong>दो माह चुनाव ड्यूटी और तीसरे माह परीक्षा</strong><br />विधानसभा चुनाव आगामी 25 नवम्बर को सम्पन्न होंगे। ऐसे में राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक करीब दो माह तक चुनावी कार्यों में व्यस्त रहेंगे। वहीं, तीसरे महीने  यानी दिसम्बर में यूजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा प्रस्तावित है, ऐसे में विद्यार्थियों का कोर्स पूरा करवाना महाविद्यालय प्रशासन के लिए चुनौति बना हुआ है। जबकि, अभी तक सिलेबस भी पूरा बनकर तैयार नहीं किया गया। शहर के कुछ कॉलेजों में तो फैकल्टी पर्याप्त होने से महिला शिक्षक उनकी अनुपस्थिति में क्लास ले लेती हैं लेकिन शहर व ग्रामीण इलाकों में आधे से ज्यादा पद ही खाली चल रहे हैं। ऐसे में इक्की-दुक्की फैकल्टी जैसे-तैसे कॉलेज चला रही हैं, जिनमें से भी कुछेक की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई। ऐसे में यहां पढ़ाने वाला ही नहीं बचा। </p>
<p><strong>300 विद्यार्थियों को पढ़ा रहा एक शिक्षक</strong><br />शहर के बड़े राजकीय महाविद्यालयों में पुरूष शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगने से उनके सब्जेक्ट की क्लास भी महिला शिक्षक ले रहीं हैं। गवर्नमेंट साइंस, जेडीबी साइंस, जेडीबी कॉमर्स, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेजों में एक कक्षा में दो सेक्शन को एक साथ बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक सेशन में ही 150 से अधिक विद्यार्थी हैं, ऐसे में दोनों सेशन को मिलाकर 300 से ज्यादा विद्यार्थी होते हैं। जिन्हें एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों व शिक्षक का अनुपात बिगड़ जाता है। इस स्थिति में शिक्षक को विद्यार्थियों को ठीक से अपनी बात समझाने में काफी परेशानी होती है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा चुनाव ड्यूटी में गवर्नमेंट साइंस के शिक्षक</strong><br />जिले में सबसे ज्यादा शिक्षक गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के लगाए गए हैं। यहां कुल पुरूष शिक्षकों की संख्या 23 है। जिसमें से 19 की ड्यूटी लगी है। ऐसे में उनके लिए चुनाव संबंधित कार्य प्राथमिक हो गए। इन शिक्षकों को सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं, जो अपने अपने बूथों इलाकों में घूमकर संवेदनशील इलाके, कोई मतदाता भयवह है या नहीं, शांतिपूर्ण मतदान की व्यवस्था सहित अन्य कार्य करने होते हैं। इसके अलावा कभी ट्रैनिंग प्रोग्राम में शामिल होना पड़ता है। दिनभर की भागदौड़ के बाद उनके लिए वापस कॉलेज जाकर क्लास लेना संभव नहीं हो पाता। </p>
<p><strong>रामगंजमंडी में 5 विषयों की नहीं लगती कक्षा</strong><br />राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी के प्रो. संजय गुर्जर बताते हैं, महाविद्यालय में 7 विषय स्वीकृत हैं, जिनमें से 5 विषयों के अध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिसकी वजह से आर्ट्स में अंग्रेजी, हिन्दी ,इतिहास और कॉमर्स में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व अर्थशास्त्र की कक्षाएं नहीं लग पाती। जबकि, संस्कृत और ज्योग्राफी की क्लास लगती है लेकिन संस्कृत में बच्चे कम है। ऐसे में मुख्य क्लास ज्योग्राफी की ही संचालित होती है। हालांकि, महाविद्यालय में से अभी तक किसी भी चुनाव में ड्यूटी नहीं लगी है।</p>
<p><strong>किस कॉलेज में कितने शिक्षकों की लगी चुनाव ड्यूटी</strong><br /><strong>महाविद्यालय               पुरूष शिक्षक      चुनाव ड्यूटी </strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज     23                  19<br />राजकीय कला महाविद्यालय    25             05<br />जेडीबी साइंस कॉलेज    04                      03<br />जेडीबी आर्ट्स कॉलेज    10                      04<br />जेडीबी कॉमर्स कॉलेज    04                      03<br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय    08        06<br />गवर्नमेंट लॉ कॉलेज    02                        02<br />राजकीय कनवास कॉलेज    04                 03<br />गवर्नमेंट सांगोद कॉलेज    02                   02<br />राजकीय इटावा कॉलेज    01                    00<br />राजकीय रामगंजमंडी    02                      00</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />विधानसभा चुनाव भी जरूरी है। ड्यूटी से शैक्षणिक व्यवस्थाएं खास प्रभावित नहीं होती। दो सेशन को एक साथ बिठाकर बच्चों की कक्षाएं लगवाते हैं। प्राचार्य होने के नाते मैं खुद अकाउंटेंसी की कक्षाएं ले रही हूं। सिलेबस पूरा करवाया जा रहा है।<br /><strong>- डॉ. वंदना आहूजा, प्राचार्य, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>जुलॉजी, हिन्दी व कैमेस्ट्री के तीन शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगी है। उनके सब्जेक्ट के अन्य शिक्षक भी कॉलेज में कार्यरत हैं। जिस दिन वे चुनावी कार्य या ट्रैनिंग प्रोग्राम में होते हैं तो एक दो सेशन को एक साथ बिठाकर पढ़ा रहे हैं। शैक्षणिक कार्य व्यवस्थित तरीके से किए जा रहे हैं। छात्राओं की पढ़ाई बाधित होने नहीं देंगे। <br /><strong>- डॉ. फातिमा सुल्ताना, प्राचार्य, जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>महाविद्यालय में शैक्षणिक कार्य व्यवस्थित तरीके से ही जारी हैं। यहां र्प्याप्त शिक्षक हैं। कॉलेज आने वाले सभी संकाय के विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं। पढ़ाई बाधित होने जैसी कोई बात नहीं है। सेमेस्टर एग्जाम का पेटर्न समझाने से लेकर सिलेबस पूरा करवाने तक के सभी कार्य व्यवस्थापूर्ण पूरे करवाए जा रहे हैं।  <br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगने से कक्षाएं तो प्रभावित हो रही हैं। कैमेस्ट्री व गणित के शिक्षक की अनुपस्थिति में दो सेशन को एक साथ बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे शिक्षकों की बात अधिकतर विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाती। जिससे पढ़ाया गया टॉपिक समझ में नहीं आ पाता। <br /><strong>- राजेंद्र नागर, छात्र, प्रथम वर्ष</strong> </p>
<p>कॉलेज में 4 में से 3 शिक्षकों की इलेक्शन में ड्यूटी लगा दी गई। जबकि, यहां पहले से ही शिक्षकोें की कमी है। जिसकी वजह से ज्योग्राफी व राजनेतिक विज्ञान की कक्षाएं नहीं लगती। अब संस्कृत सहित तीन विषयों की कक्षा भी समय पर नहीं लग पाती। पढ़ाई का नुकसान हो रहा। <br /><strong>- गौरव कुमार, छात्र, कनवास कॉलेज </strong></p>]]>
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                <title>चौराहों पर जाम, परेशान आम अवाम, ट्रैफिककर्मी कर रहे आराम</title>
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                        <![CDATA[नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करवाए जा रहे विकास कार्यों के तहत सड़कों को चौड़ा करने के साथ ही अंडरपास व फ्लाई ओवर भी बनाए गए हैं। लेकिन जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ी है उस हिसाब से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था फिलहाल गड़बड़ाई हुई है। सबसे अधिक ट्रैफिक की अव्यवस्था चौराहों पर देखने को मिल रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/jam-at-intersections--trouble-common-people--traffic-workers-are-taking-rest/article-32940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/choraho-par-jaam,-pareshan-aam-awaam,-traffickarmi-kar-rahe-aaram...kota-news..21.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर को ट्रैफिक सिग्नल फ्री बनाने  की दिशा में प्रयास  किए जा रहे हैं । ऐसे में मुख्य चौराहों से ट्रैफिक पुलिस कर्मी हटा लिए गए हैं। लेकिन इनकी गैर मौजूदगी में लोग अस्त-व्यस्त तरीके से घुसते हैं । ऐसे में चौराहों पर कई बार जाम लग जाता है। लोग परेशान होते रहते हैं। लेकिन उनकी परेशानी से निजाद दिलाने वाला उस समय कोई नहीं मिल पाता। सवेरे दस से 11 बजे  और शाम छह से सात बजे तो शहर में ट्रैफिक के हालात खराब हो जाते हैं। कोढ़ में खाज रोंग साइडर्स और शार्ट कट से निकलने वाले कर देते हैं।  ऐसे में हादसों का भी खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए शहर वासियों का कहना है कि सभी चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस के जवान तैनात किए जाने चाहिए। शहर में विकास व विस्तार के साथ ही आबादी और वाहनों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। हालत यह है कि शहर की सड़कों पर दो पहिया वाहनों से अधिक चार पहिया वाहनों को दौड़ते हुए देखा जा सकता है। हालांकि नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करवाए जा रहे विकास कार्यों के तहत सड़कों को चौड़ा करने के साथ ही अंडरपास व फ्लाई ओवर भी बनाए गए हैं। लेकिन जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ी है उस हिसाब से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था फिलहाल गड़बड़ाई हुई है। सबसे अधिक ट्रैफिक की अव्यवस्था चौराहों पर देखने को मिल रही है।  चौराहों पर कोई भी वाहन कहीं से भी आ रहा है। सबसे अधिक वाहन शॉर्ट कट के प्रयास में रोंग साइड से निकल रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>यह है चौराहों की हालत</strong><br />शहर की झालावाड़ रोड को अनंतपुरा से स्टेशन तक ट्रैफिक लाइट सिग् नल फ्री बना दिया है। लेकिन उस कारण से कई नए चौराहे बन गए हैं। जिनमें सबसे अधिक ट्रैफिक की अव्यवस्था घोड़े वाले बाबा चौराहा, वल्लभ नगर चौराहा, ज्वाला तोप तिराहा, छावनी चौराहा, कोटड़ी चौराहा, नयापुरा स्थित विवेकानंद चौराहा, अग्रसेन चौराहा, अदालत चौराहा और कुन्हाड़ी स्थित महाराणा प्रताप सर्किल समेत अधिकतर चौराहों की यही हालत  है। जहां दिनभर ट्रैफिक के अस्त-व्यस्त रहने से हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है।  इसके बाद भी अधिकतर चौराहों पर या तो ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात ही नहीं हैं या फिर मौजूद होने के बाद भी उनकी उपस्थिति का लाभ ट्रैफिक  सुधार में नजर नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि वर्तमान में चौराहों पर जिस तरह की हालत ट्रैफिक की है उस हिसाब से वाहनों का सुरक्षित निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। </p>
<p>नयापुरा समेत अधिकतर चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था वर्तमान में बिगड़ी हुई है। वाहन रोंग साइड से व अस्त-व्यस्त तरीके से कहीं से भी आ जा रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। हर चौराहे पर एक-दो ट्रैफिक के जवान मौजूद रहने चाहिए। जिससे पहले की तरह चौराहों पर ट्रैफिक को कंट्रोल व व्यवस्थित कर सके। ट्रैफिक पुलिस के जवान के मौजूद रहने से वाहन चालक भी डर के कारण सही तरीके से चलेंगे। <br /><strong>- लालचंद टांक, नयापुरा </strong></p>
<p>जिस तरह से चौराहों की हालत है उस स्थिति में वहां से सुरक्षित निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी होने से वाहन चालक नियंत्रित रहते हैं। लेकिन ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल करने की जगह चालान बनाने में लगे हुए हैं। ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहों पर रहकर पूरा फोकस ट्रैफिक कंट्रोल पर ही करेंगे तो व्यवस्था में सुधार होगा। <br /><strong>- नरेश शर्मा, गुमानपुरा</strong></p>
<p>भले ही शहर ट्रैफिक सिग् नल फ्री बना दिया है। लेकिन चौराहों पर ट्रैफिक संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवान का  मौजूद रहना आवश्यक है। इससे वाहन चालकों में अनुशासन बना रहता है। साथ ही रोंग साइड से आने वालों और बीच में वाहन घुसाकर ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ने वालों को नियंत्रित करने में सुविधा रहती है। <br /><strong>- दिनेश रावल, श्रीपुरा </strong></p>
<p> नए कोटा समेत शहर के अधिकतर चौराहों से वर्तमान में ट्रैफिक पुलिस के जवान ही हटा लिए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के नहीं होने से चौराहों पर व्यवस्था चरमराई हुई है। जहां पुलिस कर्मी तैनात भी हैं तो वे छिपकर खड़े रहते हैं और बिना हैलमेट वालों को पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। जिससे बचने के प्रयास में वाहन चालक भागते हैं जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है।  ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहों पर रहेंगे तो ट्रैफिक में सुधार होगा। <br /><strong>- गिरधर नामा, विवेकानंद नगर </strong></p>
<p>शहर के अधिकतर प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात हैं। वल्लभ नगर व ज्वाला तोप चौराहे पर स्थायी रूप से पुलिस कर्मी तैनात नहीं हैं। वहां ट्रैफिक अधिक होने या आवश्यकता होने पर जवान तैनात किए जाते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने नफरी स्वीकृत से करीब आधी ही है। कोटा शहर के लिए 260 पुलिस कर्मियों की नफरी स्वीकृत है जिसमें से वर्तमान में मात्र 125 ही जवान हैं। नफरी कम होने से सभी चौराहों पर पुलिस कर्मी नहीं लग पाते। फिर भी जहां अधिक व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है और आवश्यकता है वहां पुलिस के जवान तैनात किए जाएंगे। <br /><strong>- कालूराम वर्मा, उप अधीक्षक यातायात पुलिस कोटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 16:16:34 +0530</pubDate>
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                <title>अग्निपथ योजना के कारण युवक ने की आत्महत्या</title>
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                        <![CDATA[चिड़ावा। शहर की स्टेशन रोड पर वार्ड नं. सात में एक युवक ने कमरे में पंखे पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मिली जानकारी के अनुसार झांझोत के सरकारी स्कूल में एलडीसी पद पर कार्यरत कोलसिया की नेहरा की ढाणी निवासी पूनम स्टेशन के पास मुकेश बराला के मकान में किराए पर रहती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/youth-commits-suicide-due-to-agneepath-scheme/article-12740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tttt.jpg" alt=""></a><br /><p>चिड़ावा। शहर की स्टेशन रोड पर वार्ड नं. सात में एक युवक ने कमरे में पंखे पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मिली जानकारी के अनुसार झांझोत के सरकारी स्कूल में एलडीसी पद पर कार्यरत कोलसिया की नेहरा की ढाणी निवासी पूनम स्टेशन के पास मुकेश बराला के मकान में किराए पर रहती है। उसका भाई अंकित एक दिन पूर्व ही ननिहाल भोड़की से उसके पास आया था। सुबह पूनम योग दिवस पर स्कूल चली गई। पीछे से युवक अंकित ने कमरे में पंखे पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।</p>
<p>सूचना पर पूनम घर पहुंची और बदहवास हो गई। आसपड़ोस के लोगों व महिलाओं ने उसे संभाला।वहीं सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को उतरवाकर मोर्चरी पहुंचाया।पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। इसके बाद अंकित के नाना मोहनलाल डूडी भोड़की और कोलसिया से ताऊ लेखराज पहुंचे। अंकित के ताऊ लेखराज में रिपोर्ट दी है कि उसका भतीजा पुलिस व सेना भर्ती की तैयारी में जुटा था। पहले तो पुलिस भर्ती परीक्षा रद्द हो गई। इसके बाद अब केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना की घोषणा कर दी। इसके बाद होने वाली सेना भर्ती रद्द कर दी गई। जिससे युवक अंकित दुखी था। मानसिक रूप से परेशान होकर युवक ने आत्महत्या की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>]]>
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                                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 12:43:19 +0530</pubDate>
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                <title>गुटखा थूकते समय बिगड़ा बस का संतुलन, खड़े ट्रेलर में घुसने से 4 की मौत</title>
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                        <![CDATA[कोटा जिले के सीमलिया क्षेत्र के नेशनल हाईवे 27 पर मंगलवार तड़के सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और पांच गंभीर घायल हो गए। यह हादसा बस चालक की लापरवाही की वजह से हुआ। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-balance-of-the-bus-was-disturbed-while-spitting-gutkha--4-died-after-entering-the-standing-trailer/article-10336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/simliya-nh-27-bus-accident.jpg" alt=""></a><br /><p>सिमलिया। कोटा जिले के सीमलिया क्षेत्र के नेशनल हाईवे 27 पर मंगलवार तड़के सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और पांच गंभीर घायल हो गए। यह हादसा बस चालक की लापरवाही की वजह से हुआ। ड्राइवर के गुटखा थूकने के दौरान तेज रफ्तार बस का संतुलन बिगड़ गया। जिससे बस सड़क किनारे खड़े बजरी से भरे  ट्रोले से जा टकराई। बस में 45 से अधिक लोग सवार थे। इस हादसे में चार मरने वालों में एक युवक की पहचान नहीं हो पाई है।<br /> <br />शताब्दी ट्रेवल्स की स्लीपर बस राजकोट गुजरात से कानपुर की ओर जा रही थी।  हादसा इतना जोरदार था कि बस के आगे का हिसा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। मंगलवार को अल सुबह 3 बजे यह सड़क हादसा हुआ। सूचना मिलते ही सिमलिया थाना पुलिस  मौके पर पहुंची। टोल एंबुलेंस की मदद से सभी मृतकों को बाहर निकाला गया और  घायलों को  प्राथमिक उपचार देकर अन्य वाहनों से गंतव्य पर रवाना कर दिया। तुरंत मृतकों और गम्भीर घायलों को कोटा चिकित्सालय ले जाया गयाा जहां 5 जनों की गम्भीर हालत बनी हुई है। <br /><br />जानकारी मुताबिक स्लीपर निजी बस में 45 से अधिक सवारी मौजूद थी। बस के ड्राइवर द्वारा गुटका थूकने की कोशिश की उसी दौरान बस का बैलेंस बिगड़ गया सड़क पर खड़े बजरी से भरे ट्रेलर को टक्कर मार दी। अचानक हुए हादसे से बस में कोहराम मच गया। खून से लथपथ लोग विलाप करने लगे। जहां कोटा बारा नेशनल हाईवे पर सिमलिया के पास जो हादसा हुआ घटनास्थल पर ग्रामीण एसपी व डिप्टी भी घटनास्थल पर पहुंचकर मौका मुआयना किया । मृतकों में दो इसी बस के ड्राइवर हैं जो बस में सो रहे थे इन्हें शिफ्ट में बस चलानी थी दोनों की नींद में मौत हो गई।<br /><br /><strong>इनकी हुई मौत</strong> <br />इस सड़क हादसे में वीरेंद्र पुत्र जन्दी लाल निवासी ग्राम बख्तर तहसील मऊरानीपुर जिला झांसी उत्तर प्रदेश,नारायण सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी ग्राम मोहना तहसील व जिला ग्वालियर मध्य प्रदेश, जितेंद्र सिंह पुत्र निहाल सिंह निवासी ग्राम पोस्ट पाली खुर्दए इटावा, बरथाना उत्तर प्रदेश और एक अज्ञात की मौत हो गई। <br /><br /><strong>ये हुए घायल</strong><br />दुर्घटन में सीताराम पुत्र छोटेलाल निवासी सरोटा पोस्ट कच्छ गांव थाना मूसानगर जिला कानपुर देहात यूपी,<br />विक्रम पुत्र उम्मेद सिंह  कुशवाह निवासी भटनावर थाना भटनावर जिला शिवपुरी यूपी,सोनू कुमार पुत्र गुलाब चंद शर्मा जाति शर्मा निवासी सहरसा पुलिस थाना सदर जिला पटना बिहार,श्रीराम रजक पुत्र स्वर्गीय बारी लाल जाति रजक निवासी सीतापुर पुलिस थाना पिछोर जिला शिवपुरी मध्य प्रदेशऔर देवेंद्र रजक पुत्र प्रकाश रजक निवासी भोडन,पुलिस थाना भीती एतहसील पिछोर जिला शिवपुरी मध्य प्रदेश गंभीर घायल हो गए। <br /><br /> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 15:52:05 +0530</pubDate>
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