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                <title>Ventilator - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ventilator RSS Feed</description>
                
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                <title>अस्पताल प्रशासन की लापरवाही हुई उजागर, वेंटिलेटर पर रेफर प्रसूता को 10 मिनट तक नहीं मिला ऑक्सीजन सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[8 माह की गर्भवती प्रसूता को वेंटिलेटर सपोर्ट पर SMS अस्पताल लाया गया, लेकिन इमरजेंसी गेट पर ऑक्सीजन सिलेंडर और वार्ड बॉय के इंतजार में करीब 10 मिनट तक जूझना पड़ा। रेजिडेंट डॉक्टर एम्बू बैग से सांसें चलाते रहे। घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया और अस्पतालों के बीच रेफरल सिस्टम व आपातकालीन समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hospital-administrations-negligence-exposed-pregnant-woman-referred-on-ventilator-did/article-156591"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sms.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल से गंभीर हालत में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रेफर होकर पहुंची आठ माह की गर्भवती प्रसूता को इमरजेंसी गेट पर करीब 10 मिनट तक ऑक्सीजन सिलेंडर और वार्ड बॉय का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान साथ आए रेजिडेंट डॉक्टर एम्बू बैग के सहारे मरीज की सांसें चलाते रहे। समय पर व्यवस्था नहीं मिलने से परिजनों ने इमरजेंसी के बाहर हंगामा कर दिया। मरीज के पति किशन के अनुसार, अत्यधिक रक्तस्राव और हाई ब्लड प्रेशर के कारण उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उसे तत्काल SMS अस्पताल रेफर किया गया। </p>
<p>आरोप है कि मरीज के पहुंचने के बावजूद आवश्यक इंतजाम समय पर नहीं हो सके। घटना ने अस्पतालों के बीच रेफरल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरजेंसी विभाग के सूत्रों का कहना है कि गंभीर मरीजों को कई बार बिना पूर्व सूचना के भेज दिया जाता है, जबकि इमरजेंसी पहले से भारी दबाव में रहती है। वहीं, जनाना अस्पताल में ICU और वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को SMS रेफर करने के निर्णय पर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर समन्वय से ऐसे गंभीर मरीजों को जोखिम भरे स्थानांतरण से बचाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>30 दिन मौत को चकमा देकर मुस्कुराई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[स्क्रब टायफस के साथ मल्टीपल बीमारियों के शिकंजे में फंसी थी जान
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-smiled-after-dodging-death-for-30-days/article-126443"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सकों को धरती पर यूं ही भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता। इसका जीवंत उदारहण कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिला।  दरअसल, बारां निवासी 25 वर्षीय विवाहिता स्क्रब टायफस से मरणासन स्थिति में पहुंच गई थी, जिसके बचने की उम्मीद भी न के बराबर थी। लेकिन, चिकित्सकों की मेहनत से जिंदगी और मौत के बीच 30 दिन चले संघर्ष में आखिरकार  सुनीता को नया जीवन मिल गया। </p>
<p><strong>बुखार से वेंटिलेटर तक पहुंची महिला</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन यूनिट-बी की एचओडी  डॉ. मीनाक्षी शारदा ने बताया कि बारां जिले के मांगरोल निवासी सुनीता को गत 30 जुलाई से ही तेज बुखार आ रहा था। परिजन स्थानीय स्तर पर ही इलाज करवा रहे थे। लेकिन बुखार नहीं टूटा, उल्टियां होने और सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। बीच-बीच में दौरे भी पड़ने लगे। गंभीर अवस्था में परिजन 5 अगस्त को उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। उसका ब्लड प्रेशर भी 50 चल रहा था, शुगर भी बहुत कम था।</p>
<p><strong>ब्लड इंफेक्शन के 20 हजार काउंट बढ़ गए</strong><br />महिला के ब्लड सेल्स इफेक्टेड हो गए थे। प्लेटरेट्स भी डाउन हो गए। लीवर, किडनी और लंग्स  भी डेमेज हो गए। प्रोटोकॉल के तहत महिला का इलाज शुरू किया। लेकिन, स्थिति गंभीर बनी रही। बचने की स्थिति न के बराबर थी। लेकिन, जान बचाने की उम्मीद से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन विभाग-बी के चिकित्सकों की टीम रात-दिन इलाज में जुटी रही। </p>
<p><strong>आॅक्सीजन लेवल घटा, फेफड़ों में निमोनिया बढ़ा</strong><br />उन्होंने बताया कि मरीज के शरीर का आॅक्सीजन लेवल घटकर 80% रह गया था। दोनों फेफड़ों में निमोनिया होने से सांस लेने में मुश्किल हो रही थी। इस पर तुरंत आईसीयू में वेंटिलेशन पर लिया और इमरजेंसी केयर शुरू किया। इसके बाद जांचें करवाई, जिसमें वह स्क्रब टायफस पॉजीटिव मिली। वायरस ने शरीर के अंगों को तेजी से प्रभावित किया।  वह कोमा जैसी अचेतावस्था में थी। </p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर मिली मौत पर जिंदगी को फतह</strong><br />लगातार 28 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज सुनीता को टी-पीस सपोर्ट पर लाया गया। फिर आॅक्सीजन हटाकर 48 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में रखा,जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि उसे सांस लेने में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं हुई तो फिर ट्रेकियोस्टॉमी बंद की गई। सुनीता पूरी तरह होश में थी और स्वस्थ थी। आखिरकार, 7 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर वह मुस्कुराती हुई परिजनों के साथ अपने घर लौट गई। उसे डिस्चार्ज किया गया। </p>
<p><strong>जान बचाने में इन चिकित्सकों की रही भूमिका  </strong><br />मरीज सुनीता की जान बचाने में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग-बी के चिकित्सकोें की टीम की अहम भूमिका रही। जिसमें मेडिसिन यूनिट बी-की एचओडी डॉ. मीनाक्षी शारदा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ चित्तौड़ा, डॉ. असिस्टेंट प्रोफेसर हेमंत विमलानी, रेजिÞडेंट टीम से डॉ. शेर सिंह, डॉ. धीरेज कृष्ण, डॉ. गोकुल बीजी, डॉ. शुभम कुमार, डॉ. आदिश जैन, डॉ. विकास गालव, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. मोनिका तिवारी शामिल रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 17:04:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लापरवाही: अस्पताल की व्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर, कैसे होगा उपचार !</title>
                                    <description><![CDATA[जल्द से जल्द अस्पताल की अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--hospital-s-arrangements-are-on-ventilator--how-will-treatment-be-done/article-124066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)51.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम ऐसा है कि मरीजों को अस्पताल में उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का समय सुबह 8 बजे से 2 तक का है, लेकिन जब मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते है तो अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिलते और कई घंटों तक कुर्सियां खाली पड़ी रहती है। वहीं दूसरी ओर यहां पर सिर्फ एक चिकित्सक के भरोसे पुरानी स्वास्थ्य केन्द्र है जिससे मरीजों की लम्बी कतारें लग जाती है। वहीं दवा वितरण, एक्स रे व जांच केन्द्र पर कोई उचित व्यवस्था नहीं है। अभी मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है ऐसे में चिकित्सा व्यवस्थाएं फेल दिखाई पड़ रही है। वहीं मरीजों को सही उपचार नहीं मिलने के कारण निजी अस्पताल की ओर रूख  करना पड़ रहा है। कई बार तो दवा वितरण केन्द्र पर भी दवा लेने के लिए मरीजों को कई घंटों लाइन में लगना पड़ता है। मरीज की पर्ची बनवाने से लेकर मरीज की जांच संबंधी सभी अस्पताल के कायों में लापरवाही दिखाई पड़ती है। मरीजों ने मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल की अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके। </p>
<p> यह तो रोज का ही काम है, मुझे अभी एक घंटा हो गया। लंबी कतार में खड़ा हुआ हूं, 1 बजे आया था, यहां पर केवल एक ही डॉक्टर है। <br /><strong>- संजय पारीक, ग्रामीण  </strong></p>
<p>मुझे 3 घंटे हो गए, मेरा अभी तक कतार में नंबर नहीं आया। डॉक्टर के कमरे खाली है मरीज परेशान वह बेहाल हो रहे हैं ।<br /><strong>- तुलसीराम, ग्रामीण </strong></p>
<p>मैं दवाई लेने के लिए भटक रहा हूं,दवाई वितरण केंद्र पर एक लड़का बैठा हुआ है जो की स्कूल की ड्रेस में है, दवाई देने वाला वहां पर नहीं है, इसलिए बहुत देर से परेशान हो रहा हूं, पहले ही डॉक्टर नहीं है और फिर दवाई लेने में देरी हो रही है। <br /><strong>- बलराम शर्मा, ग्रामीण  </strong></p>
<p>बच्चों को दिखाने आया था, लेकिन लंबी कतार देखकर पसीना आ गया। बच्चों को बिठाकर कतार में खड़ा हो गया। 1 घंटे तक भी मेरा नंबर नहीं आया, क्योंकि पूरे अस्पताल में एक ही डॉक्टर था, बाकी डॉक्टर के कमरों में कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी। <br /><strong>- बजरंग लाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>मैं कटवार से डॉक्टर को दिखाने यहां आया, ताकि मेरा अच्छा इलाज हो सके।  गांव में इतनी सुविधा नहीं है, यह सोचकर मैं खानपुर आया, लेकिन यहां पर तो केवल एक ही डॉक्टर मरीज को देख रहा है। लंबी कतार में खड़ा होकर परेशान हो गया।<br /><strong>- तोलाराम, ग्रामीण </strong></p>
<p> 2 घंटे पहले कमरा नंबर 5 में डॉक्टर बैठा हुआ था, जैसे ही मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो उसे कतार को देखकर कमरा नंबर 5 का डॉक्टर उसे देखकर गायब हो गया। <br /><strong>- महावीर सुमन, ग्रामीण </strong></p>
<p>आज तीन डॉक्टरों की ड्यूटी अस्पताल में लगी हुई थी। जिस कारण इस प्रकार की अव्यवस्था हुई जो भी समस्या है उसका जल्द से जल्द समाधान कर दिया जाएगा। <br /><strong>-  धीरेंद्र गोपाल मिश्रा, सीएचसी इंचार्ज खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 16:17:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुगारी अस्पताल वेटिंलेटर पर , कैसे होगा उपचार!  </title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में जिम्मेदार के अभाव में लाखों रुपए के भवन के जर्जर हालत बनने से यहां पर कर्मचारियों, रोगियों सहित तीमारदारों को भी खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/dugaari-hospital-on-ventilator--how-will-treatment-be-done/article-118594"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/75846.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र के दुगारी कस्बे में स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से यहां पर इस समय सभी कक्षों की छत टपक रही है। सभी कक्षों में छत का प्लास्तर उखड़ गया है। छत में सरिए तक गलने की कगार पर है। अस्पताल में आए रोगियों सहित तीमारदारों को भी टपकती छत में रहकर उपचार लेने की मजबूरी है। बुधवार को यहां आए रोगियों का धैर्य टूट गया है। उन्होंने अस्पताल के गेट पर आधे घंटे तक जमकर आक्रोश जताया है। क्षेत्रीय मरीजों ने बताया कि यहां अव्यवस्थाएं होने से बांसी, नैनवां, देई, जिला अस्पताल में पहुंचकर उचित इलाज के लिए भागादौड़ी करनी पड़ती है। जानकारी के अनुसार बांसी-नैनवां मुख्य मार्ग पर दुगारी अस्पताल के सभी कक्षों की छत से पानी टपकते हुए लगभग आठ रोज बीत गए है। इन कक्षों की छत से सरिए जगह-जगह से नजर आ रहे है। वह भी सरिया गलता हुआ नजर आ रहा है। यहां पर जिम्मेदार अधिकारी की अनदेखी के चलते अस्पताल के कक्षों में दरारें तक नजर आ रही है। इस केंद्र को ही उपचार की दरकार पर संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यहां पर उपचार के लिए आंगतुक रोगियों सहित तीमारदारों को टपकती छत में रहकर उपचार लेनी की मजबूरी बनी हुई है। यहां छत से भी खतरा बना हुआ है। एक भी कक्ष ऐसा नही है, जिसमें छत टपकती नहीं हो। अस्पताल में मिलने वाली दवा कक्ष, प्रसव भर्ती कक्ष, जांच कक्ष, परामर्श कक्ष सहित मुख्य गेट में प्रवेश करने पर गिलेयरी से ही छत का टपकना शुरू है, जो कक्षों की दीवारो में भी सीलन पहुंच चुकी है। यहां पर छत के हालात खराब हो रहे है, अस्पताल में जिम्मेदार के अभाव में लाखों रुपए के भवन के जर्जर हालत बनने से यहां पर कर्मचारियों, रोगियों सहित तीमारदारों को भी खतरा बना हुआ है। इतनी दयनीय स्थिति के बावजूद जिम्मेदार मौन धारण किए हुए हैं। यहां किसी बड़ी घटना घटित होने का इंतजार हो रहा है।</p>
<p><strong>जांच मशीन लंबे समय से बंद</strong><br />सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र पर बीमारी का समय पर मालूम करने के लिए सीबीसी मशीन उपलब्ध करवाते हैं, पर केंद्र पर जिम्मेदार की लापरवाही की वजह से प्राइवेट लैबो की मौज हो रही है। यहां मशीन लंबे समय से बंद है, पर अभी तक इसको सुधार नहीं करवाया है। अस्पताल में सीबीसी मशीन लंबे समय से ही बंद है। बुधवार को एक वृद्ध महिला लूंगी बाई बंजारा आंव का खेडा से अपनी विकलांग बच्ची को दिखाने आई थी। चिकित्सक को दिखाने पर खून, पेशाब की जांच लिखी। बुजुर्ग महिला से यहां जांच बंद होने की बात कही। जिसके बाद वृद्धा विकलांग बच्ची को कंधे पर बिठाकर प्राइवेट लैब पर पहुंची। जहाँ पर जांच करवाई गई है। यहां पर जांच मशीनें भी धूल खा रही है। मगर जिम्मेदार अधिकारी अनजान बनकर बैठे हुए। इनकी अनदेखी रोगी सहित तीमारदारों की परेशानी बढती जा रही है।  इस तरह की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंचे मुकुट बिहारी दाधीच, सुवालाल सैनी, गरिमा कहार, चौथमल कहार, रमेशचंद सैनी, मोहित दाधीच, शोएब, मीरा बाई, सरला कहार, शैलेंद्र कुमार गौत्तम आदि ने संबंधित विभाग के खिलाफ आधे घंटे तक नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। आक्रोशित लोगों का कहना है कि जल्द अव्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो दूसरा रास्ता अपनाया जाएगा। संबंधित विभाग की अनदेखी परिसर में उपचार के लिए आए ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है। कभी भी अनहोनी घटना दस्तक दे सकती है।  </p>
<p>दुगारी अस्पताल में बरसात में टपकते छत से बचने के लिए जगह नहीं है, यहां पूरी छत टपकती है। उपचार के लिए आते है, मगर यहां पर बरसात के बचाव के लिए जगह नहीं रहती है। संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल की समस्याएं को गंभीरता से लेकर देखें। केंद्र की छत की मरम्मत करवाएं तो रोगियों व तीमारदारों को जर्जर भवन की हालत से राहत मिलें।<br /><strong>- गरीमा कहार, ग्रामीण</strong></p>
<p>आंव का खेड़ा निवासी वृद्धा महिला का कहना है कि विकलांग बेटी को लेकर यहां उपचार के लिए आई हूँ, यहां आई तब से टपकती छत के नीचे रहना पडा है। चिकित्सक ने विकलांग बेटी की खून व पेशाब की जांच लिखी है, पर जांच मशीन बंद होने से बेटी को कंधे पर लेकर प्राइवेट लैब पर जाना पडा है। जांच मशीन का भी लाभ नही मिल रहा है। मजबूरन निजी लैबों के धक्के खाने पड़ रहे है।<br /><strong>- लूंगी बाई बंजारा, निवासी आंव का खेड़ा </strong></p>
<p>दुगारी पीएचसी पर लंबे समय से अव्यवस्थाओं का आलम है। संबंधित विभाग द्वारा अभी तक जांच मशीन सहित भवन की जर्जर हालत को लेकर गंभीरता नहीं बरतना इस लापरवाही को केंद्र पर उचित उपचार की मंशा लेकर आनेवाले भुगत रहे है। जिम्मेदार केंद्र की जल्द सुध लेकर राहत पहुंचाए।<br /><strong>- सुवालाल सैनी, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>मेरा गांव सोरण है, जो पांच किमी दूरी पर पड़ता है। आधुनिक युग में भी पैदल चलकर आई हूँ, यहां पर पहुंची तो अस्पताल में छिपने के लिए जगह नही है। क्या करें मजबूर है। यहां जब तक इलाज के लिए मौजूद है, तब तक टपकती छत में भीगना पड़ रहा है। <br /><strong>- मीरा बाई बैरवा, निवासी सोरण </strong></p>
<p>दुगारी केंद्र की छत टपक रही है। प्रसव कक्ष भी पूरी तरह से छत से पानी टपक रहा है। यहां पर आंगतुक प्रसव वाली महिलाओं को रहने में भारी परेशानी होती है। <br /><strong>- सरला देवी कहार, निवासी दुगारी </strong></p>
<p>दुगारी अस्पताल जिम्मेदार के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो रहा है। केंद्र पर पूरी छतें टपक रही है, कक्षों का प्लास्तर उखड़कर सरिए नजर आ रहे है। दीवारो में सिलन आ रही है। यहां पर आगंतुक रोगियों सहित तीमारदारों को यह छत देखकर घबराहट होती है। कही छत नही गिर जाए यहां की नि:शुल्क जांच मशीने लंबे समय से बंद है। समस्या का समाधान होना चाहिए। <br /><strong>- मुकुट बिहारी दाधीच, स्थानीय युवा</strong></p>
<p>दुगारी अस्पताल में चिकित्सक का लंबे समय से पदरिक्त चल रहा था। जो विभाग ने मुझे डेपोटेशन पर हफ्ते में तीन रोज यहां पर लगा रखा है। इस समस्या को लेकर पहले के चिकित्सक ने बताया नहीं है। यह मेरे को मालूम नहीं है, मैं यहां आया, तत्कालीन समय से सीबीसी मशीन बंद है। <br /><strong>- डॉ. लालचंद बागड़ी, चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दुगारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:04:06 +0530</pubDate>
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                <title>वेंटिलेटर पर चिकित्सा व्यवस्था, मरीज भगवान भरोसे</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में लगभग करीब दो दर्जन मरीज आते होंगे, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है, उन्हें झालावाड़ या कोटा निजी अस्पताल में जाकर के अपना उपचार कराना पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/medical-system-on-ventilator--patients-at-the-mercy-of-god/article-99391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer3.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर कस्बे के अस्पताल में करीब 2 वर्ष पूर्व सोनोग्राफी मशीन आ चुकी है, लेकिन इसका कुछ भी उपयोग नहीं हुआ है, यह मशीन एक ताले में बंद एक कमरे में पड़ी हुई है। इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है ना तो कोई सोनोग्राफी चिकित्सक आ रहा है और नहीं इससे संबंधित जानकारी व्यक्ति जो सोनोग्राफी ले सके 2 वर्ष से सोनोग्राफी का लाभ लोगों को मिल नहीं पा रहा है। सोनोग्राफी मशीन सुचारू रूप से चालू न होने के कारण महिलाओं को उपचार के लिए लगभग 32 किलोमीटर दूर झालावाड़ या 100 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ता है। खानपुर में चिकित्सालय के बाहर निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी मशीन धड़ल्ले से चल रही है। मरीजों को मजबूरन सोनोग्राफी बाहर निजी अस्पताल में करवानी पड़ती है। खानपुर तहसील का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद भी इसके अधीन आने वाली सीएचसी सोनोग्राफी मशीन को लगाए हुए करीब 2 वर्ष का समय हो गया है, लेकिन आम जनता को कुछ समय के लिए भी इसका लाभ नहीं मिल पाया। सोनोग्राफी मशीन के अभाव में निजी सोनोग्राफी सेंटर पर मरीजों का तांता लगा रहता है। अस्पताल में लगभग करीब दो दर्जन मरीज आते होंगे, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है, उन्हें झालावाड़ या कोटा निजी अस्पताल में जाकर के अपना उपचार कराना पड़ता है।  चिकित्सालय प्रशासन द्वारा इस मामले में कई बार अन्य उच्च अधिकारियों को सोनोग्राफी मशीन लगवाने के लिए अवगत करा दिया, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान आकर्षित नहीं हो रहा है। अक्सर सुनने में मिलता है कि सरकारी विभागों में काम देरी से होते हैं लेकिन कस्बे में स्थित क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल में चिकित्सा विभाग से विभाग की कार्यवाही पर यह बात सटीक बैठती नजर आ रही है । लाखों  की मशीन धूल खा रही है। खानपुर तहसील अपने आप में एक बहुत बड़ी तहसील है, जिसके अंतर्गत बहुत सारे छोटे गांव पड़ते हैं, जहां से दूर-दूर से गरीब व्यक्ति यहां पर आते हैं और सोनोग्राफी के अभाव में अपना इलाज नहीं करके बाहर जाकर अपना इलाज कराते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोरी में कमजोर होती जा रही है। वहीं खानपुर अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्थाएं चौपट है पर्ची बनवाने के लिए मरीजों की लम्बी लाइनें लगी रहती है। साफ सफाई व चिकित्सा व्यवस्थाएं सभी वेंटिलेटर पर है।  चिकित्सक कभी कक्ष में बैठते है तो कभी नहीं बैठते या फिर लेट लतीफ आते है, जिससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।  सीएचसी इंचार्ज से पूछा जाता है तो वह कहते हैं कि स्टाफ की कमी है, कभी कोई डॉक्टर कैंप में चला जाता है या कभी-कभी डॉक्टर कहीं लग जाता है तो अस्पताल में केवल कभी एक डॉक्टर ही बैठ पाता है जिससे मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। </p>
<p>खानपुर अस्पताल में मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी डॉक्टर के अभाव में बाहर के मरीज को वापस जाना पड़ता है यहां पर जो जनरेटर लगा हुआ है वह भी बंद पड़ा हुआ है उसका कोई उपयोग नहीं है। <br /><strong>- बंटी राठौर, ग्रामीण </strong></p>
<p>जब मरीज चोट लगने पर पट्टी कराने जाता है तो मरीज की पट्टी एक चतुर्थ कर्मचारी व्यक्ति जो प्रशिक्षित नहीं है वह करता है और कंपाउंडर मोबाइलों पर बातें करते रहते हैं, यहां तक की बोतल का चढ़ाना व उतरना जिस कार्य को भी चतुर्थ कर्मचारी कर रहे हैं जो उनके हक में नहीं आता है। खानपुर अस्पताल की व्यवस्था बड़ी दयनीय हो रही है। <br /><strong> - केशव लक्षकार समाजसेवी </strong></p>
<p>सोनोग्राफी मशीन तो आ चुकी है, लेकिन इसका संचालन सुचारु रूप सेंटर नहीं  होने के कारण मरीज को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सोनोग्राफी चिकित्सक लगाने की मांग की है। <br /><strong>- मुकेश सेन, ग्रामीण </strong></p>
<p> खानपुर क्षेत्र एक बहुत बड़ी तहसील होने के बावजूद यहां पर जो महिलाएं जिन्हें तुरंत सोनोग्राफी मशीन की आवश्यकता पड़ती है वह भी सोनोग्राफी नहीं करा पाती है और उसकी इलाज के लिए बहुत अधिक खर्च उठाना पड़ता है अत: जनप्रतिनिधियों से निवेदन है की सोनोग्राफी मशीन सुचारू रूप से चलाई जाए। <br /><strong>-सोनू पारीक, व्यापारी </strong></p>
<p> करीब 2 वर्ष पहले से सोनोग्राफी मशीन आ चुकी है लेकिन इसका अभी तक कोई उपयोग नहीं हुआ है यह पैकिंग होकर एक कमरे में बंद पड़ी हुई है। <br /><strong>-दिनेश सोनी, व्यापारी </strong></p>
<p>सोनोग्राफी मशीन लगा दी गई है लेकिन उसका सुचारू संचालन नहीं होने के कारण मरीज को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उन्होंने सोनोग्राफी चिकित्सक लगाने की मांग की है।<br /><strong>- राहुल कुमार, छात्र </strong></p>
<p>खानपुर चिकित्सालय में सोनोग्राफी चिकित्सक नहीं है। सोनोग्राफी करने के लिए जैसे ही चिकित्सक नियुक्त हो जाएगा, तो सोनोग्राफी मशीन जल्द ही चालू हो जाएगी।<br /><strong> -डॉ. धीरेंद्र गोपाल मिश्रा, सीएचसी इंचार्ज खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jan 2025 14:57:33 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में मेडिकल उपकरणों की खरीद में आपदा में अवसर जैसा आ रहा है नजर: सतीश पूनिया</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि प्रदेश में वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान दूसरी लहर के दौरान मेडिकल उपकरणों की खरीद में आपदा में अवसर जैसा कुछ नजर आ रहा है। पूनिया ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए यह बात कही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%86-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/poonia.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि प्रदेश में वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान दूसरी लहर के दौरान मेडिकल उपकरणों की खरीद में आपदा में अवसर जैसा कुछ नजर आ रहा है। पूनिया ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए यह बात कही। <br /> <br /> उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और वेंटिलेटर के अलावा रैपिड एंटीजन टेस्ट की अलग-अलग दरों पर खरीद संदेह पैदा कर रही है, वो भी उस समय जब लैब की टेस्टिंग क्षमता पर भार कम हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 14:18:26 +0530</pubDate>
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