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                <title> रिफाइनरी की तरह ईआरसीपी पर भी जनता की आवाज सुननी पड़ेगी, हम योजना बंद नहीं करेंगे: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को ईआरसीपी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने की फिर मांग उठाई। गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार को जैसे रिफाइनरी को लेकर काम शुरू करना पड़ा वैसे ही इआरसीपी पर भी जनता की आवाज सुननी पड़ेगी। हम यह योजना बंद नहीं करने वाले हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/public-voice-will-have-to-be-heard-on-ercp-like-refinery--we-will-not-stop-the-scheme-gehlot/article-13753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/cm1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को ईआरसीपी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने की फिर मांग उठाई। गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार को जैसे रिफाइनरी को लेकर काम शुरू करना पड़ा वैसे ही इआरसीपी पर भी जनता की आवाज सुननी पड़ेगी। हम यह योजना बंद नहीं करने वाले हैं।<br /><br />बिरला सभागार में ईआरसीपी परियोजना से जुड़े 13 जिलों के कांग्रेस जन प्रतिनिधियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते हैं कि पानी राज्य का विषय है तो केंद्र सरकार इसमें दखल देने वाली कौन होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2018 में दो बार इस परियोजना पर सकारात्मक रुख रखने की बात कह चुके हैं। अब मुख्य सचिव को पत्र लिखकर योजना को बंद करने की बातें कर रहे हैं। मैं ऐलान करता हूं कि यह योजना बंद नहीं होगी। केंद्र सरकार चाहे कितनी भी ईडी सीबीआई या इनकम टैक्स भेज ले। यह काम रुकने वाला नहीं है।</p>
<p>राजस्थान में आज तक किसी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया गया है। हमारी इसमें कोई राजनीति की लड़ाई नहीं है। यह 13 जिलों के प्यास की लड़ाई है। रिफाइनरी का पहले शिलान्यास हो गया था केंद्र सरकार ने दोबारा किया तो 40 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट 76 हजार करोड़ तक पहुंच गया। ईआरसीपी को भी राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया तो इसकी लागत 37 हजार करोड़ से जाने कहां तक पहुंच जाएगी। इस परियोजना की डीपीआर वसुंधरा राजे की सरकार में श्री राम वेदिरे ने बनाई थी,जो आज जल संसाधन मंत्रालय में सलाहकार है।<br /><br /><strong>जो काम नहीं करता, उसे निकम्मा कहते हैं:</strong><br />केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि मेरे निकम्मा कहने पर वह नाराज होकर बैठे हैं मैंने कुछ गलत नहीं कहा। जिस कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी खुद परियोजना को लेकर बोल रहे हो और उस कार्यक्रम में मंत्री या सांसद बैठे हुए भी वह बात नहीं सुन पा रहा हूं तो उसे क्या कहेंगे। मंत्री रामलाल जाट ने निकम्मा की परिभाषा और भी बेहतर बता दी कि जो काम नहीं करता उसे निकम्मा कहते हैं। भाजपा के नेता उदयपुर घटना में सात आठ दिन के बाद पहुंचकर राजनीति कर रहे हैं। मैं तो घटना के बाद अपने जोधपुर के सारे कार्यक्रम रद्द करके अगले दिन उदयपुर पहुंचा था। सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई मंत्रियों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। इस दौरान ईआरसीपी परियोजना भीख नहीं हमारा हक है, जैसे नारे भी लगे।<br /><br /><br /><strong>13 जिलों में चलेगा हस्ताक्षर अभियान:</strong><br />प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इन 13 जिलों में 40 फ़ीसदी आबादी रहती है। उस आबादी के पानी और सिंचाई के लिए केंद्र सरकार क्यों अड़ंगा लगाना चाहती है। कांग्रेस इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाएगी। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने इआरसीपी परियोजना पर बोलते हुए भाजपा नेताओं पर जमकर निशाना साधा। वही, इस मुद्दे पर कांग्रेस का आगामी प्लान भी बताया। डोटासरा ने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। सभी 13 जिलों में जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। सभी ब्लॉक स्तर पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया जाएगा जिसमें केंद्र सरकार से राष्ट्रीय परियोजना दर्जा दिलाने की मांग की जाएगी। इन जिलों में शामिल सभी विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस हस्ताक्षर अभियान चलाएगी और लोगों को इस मुद्दे से जोड़ेगी। मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, महेश जोशी और अन्य मंत्रियों ने भी राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग पर केंद्र सरकार को अपना वादा याद दिलाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 16:26:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चंबल का पानी नहीं आने तक चैन से नहीं बैठेंगे पूर्वी राजस्थान के किसान</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामनिवास मीना ने कहा है कि चंबल का पानी पूर्वी राजस्थान के लोगों के जीवन के लिए आवश्यक है। पानी के अभाव में भयावह हालात बनते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देकर 13 जिलों के निवासी लोगों को नया जीवन देने का कार्य करना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/farmers-of-east-rajasthan-will-not-rest-till-chambal-water-comes/article-12013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/oo3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोडाभीम</strong>। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामनिवास मीना ने कहा है कि चंबल का पानी पूर्वी राजस्थान के लोगों के जीवन के लिए आवश्यक है। पानी के अभाव में भयावह हालात बनते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देकर 13 जिलों के निवासी लोगों को नया जीवन देने का कार्य करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चंबल का पानी नहीं आने तक पूर्वी-उत्तरी क्षेत्र के लोग चैन से नहीं बैठेंगे। प्रदेशाध्यक्ष मीना रविवार को मासलपुर के सकरघटा के पास नीमरीकापुरा की ढाणी चतुर्भुज का पुरा में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना किसान संघर्ष समिति की ओर से आयोजित चतुर्थ किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष मीना ने कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने की केन्द्र सरकार से मांग करते हुए 13 जिलों में जनजागरण अभियान चलाया हुआ है।</p>
<p>इस अभियान की शुरूआत मंडरायल स्थित चंबल नदी पर जाकर महाआरती के साथ की गई थी। राजस्थान में पहली बार चंबल की पूजा अर्चना और महाआरती का आयोजन हुआ। उसके बाद प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया और चंबल की चिट्ठी तैयार कर प्रदेश के सभी 200 विधायक और 25 सांसदों को भेजी गई। इस चिट्ठी के माध्यम से पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के लिए चंबल की पानी की आवश्यकता बताते हुए ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने का आग्रह किया गया। उसके बाद टोडाभीम में महस्वा के कुठीला वाले हनुमान मंदिर, हिण्डौन में ढिंढोरा के खेल मैदान और नादौती में तालचिडा की मीना पट्टी के छत्री वाले हनुमान मंदिर किसान महापंचायत की गई और अब करौली के सकरघटा के चामुंडा मंदिर पर किसान महापंचायत हुई है।</p>
<p>इन महापंचायतों के माध्यम से आमजन को ईआरसीपी के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। महापंचायत में प्रदेश संयोजक अमर सिंह नीमरोठ ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना की स्वीकृति के लिए एक जुटता की आवश्यक बताया। संघर्ष समिति से जुड़े राजेश दांतकापुरा और समिति के प्रदेश प्रवक्ता गिरीश अलीपुरा ने ईआरसीपी को स्वीकृत होने पर वरदान बताया। हिण्डौन के सामाजिक कार्यकर्ता हुकम सिंह कश्यप ने कहा कि पानी के अभाव में पूर्वी राजस्थान के खेत बंजर होते जा रहे हैं। इसका समाधान चम्बल का पानी नहरों के माध्यम से लाकर ही किया जा सकता है। महापंचायत में हिण्डौन के युवा नेता कर्णसिंह राजौरा ने कहा कि युवाओं को भी इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने के लिए आगे आकर महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। महापंचायत में नादौती के तालचिड़ा चेनपुरा की मीना पट्टी के सैकड़ों किसान शामिल हुए। महापंचायत के दौरान सकरघटा क्षेत्र के किसानों ने पांचना का पानी सेशन नदी में लाने की मांग की। किसानों का कहना रहा कि मोठीयापुरा से चलकर जगर में जाने वाली इस नदी में पानी आने से 50 से ज्यादा गांवों को लाभ मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 15:49:34 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : अब सर्जिकल वार्ड में नहीं करने पड़ेंगे मरीज भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति के 26 मई के अंक में एमबीएस अस्पताल के मेडिकल वार्ड को सर्जरी की जरुरत शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और उन्होंने गुरुवार को वार्ड का निरीक्षण कर सारी व्यवस्थाए जांच कर उसमें बेड लगाने के आदेश जारी किए। उसके बाद वार्ड की सफाई कर उसमें 15 बेड लगाए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-patients-will-not-have-to-be-admitted-to-surgical-ward/article-10535"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/khaber-ka-asar--mbs-surgical-warsd-kota-news-27.5.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । एमबीएस अस्पताल में तीन माह से मरम्मत के लिए बंद पड़े 15 बेड का आज परीक्षण कर उन्हें मरीजों के भर्ती के लिए तैयार कर लिया जिससे अब मरीजों को सर्जिकल वार्ड में भर्ती नहीं करना पड़ेगा। एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना ने गुरुवार को इमरजेंसी मेडिकल वार्ड का निरीक्षण आॅक्सीजन लाइनों और अन्य उपकरणों की जांच कराने के बाद बंद किए 15 बेड फिर से लगाए जिससे अब एक साथ 30 मरीजों को इलाज मिल सकेंगा। उल्लेखनीय है कि दैनिक नवज्योति के 26 मई के अंक में एमबीएस अस्पताल के मेडिकल वार्ड को सर्जरी की जरुरत शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और उन्होंने गुरुवार को वार्ड का निरीक्षण कर सारी व्यवस्थाए जांच कर उसमें बेड लगाने के आदेश जारी किए। उसके बाद वार्ड की सफाई कर उसमें 15 बेड लगाए गए। <br /><br /><strong>एक माह से आॅक्सीजन लाइनों को शिफ्ट करने का चल रहा था काम</strong><br />एमबीएस अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक माह से आॅक्सीजन लाइन की सप्लाई और चेंबर तैयार कर मुख्य लाइन से जोड़ने का कार्य चल रहा था जिसके कारण इमरजेंसी मेडिकल वार्ड के 15 बेड की काम में लिए जा रहे थे। 15 बेड अधीक्षक को मरम्मत के लिए सौंप दिए गए थे। वार्ड प्रभारी हीरालाल ने बताया कि 30 बेड शुरू होने से अब मरीजों को सर्जिकल और अन्य वार्डो में शिफ्ट नहीं करना पड़ेगा। गंभीर मरीजों का एक ही वार्ड में इलाज हो सकेंगा जिससे नर्सिंग स्टाफ को उनकी देखभाल में परेशानी नहीं होगी। <br /><br />इमरजेंसी मेडिसन वार्ड का गुरुवार को परीक्षण कर उसमें 15 बंद किए बेड को फिर से शिफ्ट कराया है। सभी बेड पर आॅक्सीजन लाइन की सप्लाई, पल्स मॉनिटर, और अन्य उपकरण शिफ्ट करा दिए है। अब इन बेड पर मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा। शुरुआत में इन बेडों पर बिना आॅक्सीजन की जरुरत वाले मरीजों को शिफ्ट किया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 12:51:43 +0530</pubDate>
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