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                            <item>
                <title>दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0: पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करवाने पर दिल्ली सरकार देगी 50,000 रुपए, जानें योजना लागू होने किसे मिलेगा इसका लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक (रेट्रोफिटिंग) कराने पर ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और 10-15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप होने से बचाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/delhi-government-will-give-rs-50000-for-converting-an-old/article-138524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ev.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार नित नए कदम उठा रही है। अब एक और बड़ी तैयारी हो रही है। खबर है कि, नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत पुराने पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने यानी रेट्रोफिट कराने पर प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि पुराने वाहन मालिक अपने गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराते हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार की तरफ इंसेंटिव मिलेगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार पहली 1,000 पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। इसका मकसद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के साथ-साथ पुराने वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को भी बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त नियम</strong></p>
<p>दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। यह नियम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लागू हैं ताकि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। नियम तोड़ने पर चालान, वाहन को सीज करना और केवल अधिकृत स्क्रैपिंग या एनओसी के जरिए बाहर भेजने का विकल्प मिलता है।</p>
<p><strong>ईवी पॉलिसी 2.0 के अन्य प्रस्ताव</strong></p>
<p>ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2.0 में स्क्रैपिंग के बाद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद पर प्रोत्साहन देने का भी सुझाव है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट फंड को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा स्वैपिंग स्टेशनों पर ज्यादा सब्सिडी और ई-रिक्शा व ई-कार्ट के लिए सेफ्टी रेटिंग जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में एक पूर्व अधिकारी के हवाले से गया है कि,रेट्रोफिटिंग उन गाड़ियों के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिनका इस्तेमाल सीमित होता है। इसकी कन्वर्जन की सफलता वाहन के मॉडल, इलेक्ट्रिक किट की कम्पैटिबिलिटी और गियरबॉक्स कंपोनेंट्स इत्यादि पर निर्भर करती है। हालांकि यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि, सरकार की ये नई प्लॉनिंग कितनी कारगर साबित होगी, क्योंकि यदि इस नए नियम को लागू किया जाता है तो भी शुरूआत में केवल 1,000 वाहनों के लिए ही ये सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>क्या होता है रेट्रोफिटिंग</strong></p>
<p>रेट्रोफिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और इससे संबंधित कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं। जिससे कोई भी रेगुलर वाहन ईवी में कन्वर्ट हो जाती है। हालांकि ये प्रक्रिया महंगी है, लेकिन सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आम लोगों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। पहले भी इस योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन ज्यादा लागत के कारण लोगों की रुचि कम रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सब्सिडी से यह प्रक्रिया किफायती बनेगी और लोग अपनी गाड़ियों का दोबारा उपयोग कर सकेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि, यह योजना खासतौर पर प्रीमियम और लग्जरी कार मालिकों को आकर्षित कर सकती है। 50 लाख या उससे ज्यादा कीमत की गाड़ियों को स्क्रैप करने पर बहुत कम कीमत मिलती है, जिससे मालिक हिचकते हैं। रेट्रोफिटिंग के जरिए वे अपनी महंगी गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक कारों में कन्वर्ट करा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा के तीन बड़े औद्योगिक संस्थाओं को एनजीटी का नोटिस, कोर्ट ने उद्योगों को बनाया पक्षकार</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा प्रशासन, स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से एकमात्र एसटीपी प्लांट लगाया गया है, जो पूरी तरह से कार्य भी नहीं कर रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ngt-to-three-big-industrial-institutions-of-kota%C2%A0/article-94015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/notice.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल सेंट्रल जोनल बैंच भोपाल ने चंबल को प्रदूषित करने के मामले में कोटा के तीन बड़े औद्योगिक संस्थाओं को नोटिस थमाया है। पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते न्यायाधिपति शिवकुमार सिंह, न्यायिक सदस्य डॉ. ए. सेंथिल विशेषज्ञ सदस्य की बैंच ने नोटिस जारी कर तीनों औद्योगिक संस्थाओं से 9 जनवरी 2025 तक जवाब मांगा है। जाजू ने याचिका में बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेन्ट्रल जोनल बैंच, भोपाल में निर्णित हो चुकी याचिका संख्या 318/2014 बाबूलाल जाजू बनाम राजस्थान राज्य व अन्य में एनजीटी ने गंदे नालों को देश की एकमात्र घड़ियाल सेंचुरी चम्बल में जाने से रोकने के लिए नालों के गंदे पानी को एसटीपी प्लांट लगाकर साफ करके ही चम्बल में छोड़े जाने के निर्देश दिए थे। जिस पर कोटा प्रशासन, स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से एकमात्र एसटीपी प्लांट लगाया गया है, जो पूरी तरह से कार्य भी नहीं कर रहा है। </p>
<p><strong>करोड़ों खर्च, मात्र 15 % पानी का शोधन</strong><br />सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद वर्तमान में लगभग 15 प्रतिशत पानी का शोधन ही हो रहा है, शेष सीधे नदी में जा रहा है, जिससे बदबू आ रही है। 10 वर्ष पूर्व दायर याचिका में पारित आदेशों की पालना कोटा प्रशासन नहीं कर पाया है। जिसके चलते नदी में शहर के सैकड़ों छोटे बड़े सीवरेज के नाले चम्बल नदी में जा रहे हैं।  वहीं, कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा गर्म व प्रदूषित पानी चोरी छिपे सीधे चम्बल में छोड़ा जा रहा है। इस पर कोर्ट ने तीनों औद्योगिक संस्थाओं को प्रदूषण फैलने में आवश्यक पक्षकार मान विपक्षी पक्षकार कायम कर नोटिस जारी किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 15:47:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाकारा तंत्र से कचरे का घर बनता जा रहा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[देश के नीति निर्माता देश को कचरा घर बनाने से रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। नीति निर्माताओं की दूरदृष्टि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही इस समस्या के समाधान का कोई स्थायी नहीं ढूंढा जा सका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/india-is-becoming-a-home-of-garbage-due-to-inefficient/article-28894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-32.jpg" alt=""></a><br /><p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कर्नाटक पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को लेकर 2,900 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। इससे पहले भी एनजीटी ने कर्नाटक सरकार पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। एनजीटी ने तेलंगाना सरकार को 3800 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। दिल्ली सरकार को पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 900 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसी तरह राजस्थान पर भी पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है। यह जुर्माना मौजूदा अक्टूबर और सितंबर माह में लगाया गया है। इस भारी भरकम जुर्माने की वजह रही है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन नहीं कर सकना। ये चंद उदाहरण हैं जो देश की सीरत और सेहत को दर्शाते हैं। कचरे से होती दुर्दशा की यह हालत उस देश की है जिसे देवों की पवित्र भूमि कहा जाता रहा है।<br /><br />इससे पता चलता है कि देश के नीति निर्माता देश को कचरा घर बनाने से रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। नीति निर्माताओं की दूरदृष्टि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही इस समस्या के समाधान का कोई स्थायी नहीं ढूंढा जा सका है। यह समस्या अब देश में कैंसर की तरह फैलती जा रही है। इसकी कीमत देश की आम अवाम को अपनी सेहत और प्राकृतिक स्त्रोतों के प्रदूषित होने से चुकानी पड़ रही है। जिनकी भरपाई करना लगभग नामुमिकन हो गया है। निहित क्षुद्र स्वार्थों में उलझे नेताओं के लिए देश में फैलता कचरे का भंडार कोई प्रमुख समस्या नहीं रहा है। शहरीकरण और आर्थिक विकास के लिए औद्योगिकीकरण से निकलने वाले कूड़ा-कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। जिस देश की राजधानी ही कचरे के लिए कुख्यात हो चुकी है, ऐसे में दूसरे राज्यों में कचरे की समस्या की विकरालता का अंदाजा लगाया जा सकता है। देश का दिल कहे जाने वाले दिल्ली में कुतुब मीनार जितना ऊंचा करीब 73 मीटर ऊंचा कचरे का पहाड़ खड़ा हो चुका है। दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के पास गाजीपुर लैंडफिल साइट गैस चेम्बर में तब्दील हो गई है। संयुक्त राष्टÑ पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने दोहराया है कि खुले और अस्वच्छ लैंडफिल पीने के पानी के दूषित होने में योगदान करते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं और बीमारियों को फैला सकते हैं। मलबे का फैलाव पारिस्थितिक तंत्र को प्रदूषित करता है और इलेक्ट्रॉनिक कचरे या औद्योगिक कचरे से खतरनाक पदार्थ शहरी निवासियों और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर दबाव डालता है। एक अनुमान के मुताबिक, शहरी भारत में रोजाना 1,40,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है। विश्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, वर्तमान समय में प्रति व्यक्ति के हिसाब से हर दिन 450 ग्राम कूड़ा पैदा होता है, जिसके अगले 15-20 साल में बढ़कर हर दिन 800 ग्राम प्रति व्यक्ति होने का अनुमान है।देशभर की नगरपालिकाएं और नगर निगम मिलकर सिर्फ  चार करोड़ टन कूड़ा जमा कर पाते हैं। 2 करोड़ टन से भी ज्यादा कूड़ा ऐसे ही पड़ा रहता है, जिसका बड़ा हिस्सा बारिश के जरिए नालियों में चला जाता है। अगर हमारे पास 20 लाख (एक अनौपचारिक आंकड़ा) कचरा बीनने वालों या कबाड़ी वालों का कुशल कार्य बल नहीं होता तो हम अपने कचरे के नीचे डूब जाते। लेकिन दुर्भाग्य से हम उन्हें कोई दर्जा नहीं दे पाए हैं।<br /><br />कूड़े-कचरे के बढ़ते ढेरों के साथ-साथ नगरों एवं महानगरों में कूड़े-कचरे के सड़ने से निकली विषैली गैसों की समस्या भी फैलती जा रही है। कचरे के सड़ने से पैदा इन विषैली एवं बदबूदार गैसों को वैज्ञानिक लैंडफिल गैस्य कहते हैं। मुम्बई के मलाड में विपटा मांइड स्पेस में व्यावसायिक क्षेत्र में कई कम्पनियों के एक हजार से ज्यादा कम्प्यूटर तथा सैकड़ों सर्वर लैंडफिल गैसों से प्रभावित होते देखे गए हैं। नेशनल सॉलिड वेस्ट एसोसिएशन ऑफ  इण्डिया के रसायनविदों ने भी अध्ययन कर इसी बात की पुष्टि की है। मनुष्यों में भी इन गैसों के सम्पर्क में आने पर दमा, श्वसन, त्वचा व एलर्जी रोग बढ़े हैं। महिलाओं में मूत्राशय के कैंसर की सम्भावना भी बताई गई है। भूजल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने का एक कारण ये गैसें भी बताई गई हैं।<br /><br />देश के ज्यादातर शहरों में एकत्र कचरे का उचित निपटान आधुनिक एवं वैज्ञानिक विधियों से नहीं हो रहा है। शहर का मास्टर प्लान बनाते समय अक्सर डंपिंग ग्राउंड या लैंडफिल साइट बनाने पर ध्यान ही नहीं दिया जाता, फिर बिना किसी ठोस नजरिए के कोई भी जगह इनके लिए तय कर दी जाती है। देश के कई नगरों एवं महानगरों में कचरा मैदान पर आलीशान इमारतें एवं रहवासी क्षेत्र बन गए हैं। यह निश्चित है कि यदि एनजीटी के भारी-भरकम जुर्माने के बाद भी सरकारों की नींद नहीं खुली तो वे दिन दूर नहीं जब देश की आबादी के एक बड़े हिस्से और पर्यावरण को अपूर्णीय कीमत चुकानी पड़ेगी। पानी सिर से गुजरे इससे पहले देश को कचरे से निपटने के लिए कठोर राष्टÑीय नीति बनानी होगी। न्यायपालिका को भी इसमें अधिक सक्रियता दिखानी होगी। इसके उल्लंघन करने वाले निजी प्रबंधन और सरकारी तंत्र को जेल की हवा खिलानी होगी, तभी देश की सेहत से खिलवाड़ करने वाले बाज आएंगे।<br /><br />-योगेन्द्र योगी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 10:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर लगाया 900 करोड़ रुपए का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[एनजीटी ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा न कर पाने के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली नगर निगम दोनों ही जिम्मेदार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ngt-impose-fine-of-900-carore-at-delhi-government/article-26355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/q-2-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली के 3 लैंडफिल साइट्स से कूड़ा ना उठाने पर दिल्ली सरकार पर 900 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने 300 करोड़ रुपए प्रति साइट के अनुसार 900 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। एनजीटी ने कहा कि यह लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। इसके साथ ही पर्यावरण की रक्षा के लिए सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत की विफलता भी है। एनजीटी ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा न कर पाने के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली नगर निगम दोनों ही जिम्मेदार है।</p>
<p>एनजीटी ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि लैंडफिल साइट से कूड़ा के निस्तारण के लिए केवल निचले स्तर के अधिकारियों को ही लगाया गया। एनजीटी ने इस मामले में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को एक महीने में जुर्माना की राशि जमा करने का आदेश दिया। एनजीटी ने यह साफ किया कि तीनों लैंडफिल साइट्स में 280 टन मलबा लाया गया, जबकि सिर्फ 59 टन का ही निस्तारण किया गया है। ये एक गंभीर मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:57:26 +0530</pubDate>
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                <title>अब नया पेट्रोल पंप खोलना नहीं होगा आसान </title>
                                    <description><![CDATA[शहरी आबादी क्षेत्र से लगते भूखण्ड पर अब भविष्य में नया पेट्रोल पंप खोलना आसान नहीं होगा। नए पेट्रोल पंप के लिए अब 50 मीटर के दायरे में भूमि खाली होना जरूरी है, जिस पर भविष्य में भी कोई आवासीय, शैक्षणिक गतिविधियां प्रस्तावित नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-open-new-petrol-will-not-be-easy/article-10545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/465465454561.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरी आबादी क्षेत्र से लगते भूखण्ड पर अब भविष्य में नया पेट्रोल पंप खोलना आसान नहीं होगा। नए पेट्रोल पंप के लिए अब 50 मीटर के दायरे में भूमि खाली होना जरूरी है, जिस पर भविष्य में भी कोई आवासीय, शैक्षणिक गतिविधियां प्रस्तावित नहीं है। एनजीटी के आदेशों की पालना में अब राज्य सरकार ने भी नए प्रावधान लागू कर दिए हैं। टाउन प्लानिंग विभाग की ओर से जारी आदेशों में बताया गया है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार नए पेट्रोल पंप स्थापित किए जाने के लिए जलाशय के संरक्षण के न्यूनतम मानक निर्धारित किए गए है। इसी के तहत सभी निकायों को निर्देशित किया गया है कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप के प्रकरणों में मानकों की पालना करते हुए राज्य स्तरीय भू उपयोग परिवर्तन समिति के समक्ष पत्रावली भेजी जाए, ताकि प्रकरणों में निर्णय लिया जा सके।</p>
<p><strong>नए हैं ये प्रावधान</strong><br />नए पेट्रोल पंप के प्रस्तावित स्थल की 50 मीटर की परिधि में स्थित भूमि वर्तमान में रिक्त हो, स्थल किसी विद्यमान आवासीय योजना में आवासीय भूखण्ड के रूप में सृजित अथवा प्रस्तावित नहीं हो, 50 मीटर की परिधि में कोई शैक्षणिक संस्थान अथवा हॉस्पिटल नहीं हो तथा न्यूनतम 18 व 24 मीटर सड़क पर स्थित हो। यदि 50 मीटर की दूरी रखा जाना संभव नहीं हो, तो क्षेत्र की आवश्यकता एवं व्यापक जनहित को दृष्टिगत रखते हुए किसी प्रकरण विशेष में निर्धारित मापदण्डों में अनुमति दी जा सकेगी।</p>
<p>सभी नगरीय निकायों को नए पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए एनजीटी के तय मापदण्डों के अनुसार स्पष्ट अभिशंषा के साथ प्रस्ताव राज्य स्तरीय भू उपयोग परिवर्तन समिति के समक्ष प्रेषित करने के निर्देश दिए गए है।<br /><strong>- विजयवर्गीय, मुख्य नगर नियोजक</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 12:18:38 +0530</pubDate>
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