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                <title>hub - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>पीडब्ल्यूवाला ने जईई एडवांस 2026 में जयपुर के विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन का जश्न मनाया </title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूवाला ने जेईई एडवांस 2026 के नतीजों में शानदार सफलता का जश्न मनाया। जयपुर केंद्र के युगांक, शिवांशी और ऋषभ अग्रवाल ने शीर्ष स्थान हासिल किया। इस परीक्षा में कुल 56,880 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। सीईओ अलख पांडे ने छात्रों के कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pwwala-celebrates-excellent-performance-of-jaipur-students-in-jee-advanced/article-155792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पीडब्ल्यूवाला ने जेईई एडवांस 2026 में अपने विद्यार्थियों के शानदार प्रदर्शन का जश्न मनाया। जयपुर से पीडब्ल्यूवाला के उच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में युगांक पटेल, शिवांशी पटेल और ऋषभ अग्रवाल सहित कई अन्य छात्र शामिल रहे। परीक्षा आयोजित करने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा जारी ऑफिशियल प्रेस रिलीज़  के अनुसार, जईई एडवांस 2026 के पेपर 1 और पेपर 2 में कुल 1,79,694 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 56,880 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए।</p>
<p>अलख पांडे, शिक्षक, संस्थापक एवं CEO, पीडब्ल्यूवाला ने कहा, मैं उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देना चाहता हूँ जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर जईई एडवांस 2026 परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। जिन विद्यार्थियों को आज अपने मनचाहे परिणाम नहीं मिले हैं, उनसे मैं कहना चाहूँगा कि यह एक परीक्षा आपकी क्षमताओं या आपके भविष्य की सफलता को निर्धारित नहीं करती। सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती है, और यह उसका केवल एक पड़ाव है। इसलिए आत्मविश्वास बनाए रखें, निरंतर प्रयास करते रहें और आगे आने वाले अवसरों के लिए तैयार रहें।</p>
<p>पीडब्ल्यूवाला देशभर में ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, हाइब्रिड केंद्रों और ऑफलाइन कोचिंग संस्थानों के माध्यम से जेईई एवं नीट सहित विभिन्न कम्पेटिटिव एग्ज़ामिनेशन्स की तैयारी के साथ-साथ स्कूली शिक्षा के लिए भी शैक्षणिक सहायता प्रदान करता है। शहर में संचालित इसके ऑफलाइन विद्यापीठ केंद्र विद्यार्थियों को सुव्यवस्थित परीक्षा तैयारी, नियमित शैक्षणिक मूल्यांकन तथा डाउट रेज़ोल्यूशन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:12:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कोचिंग हब में आत्महत्याओं का अंतहीन दौर</title>
                                    <description><![CDATA[कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sucide-in-coaching-hub/article-11685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546546516.jpg" alt=""></a><br /><p>कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है। अकेले कोटा में ही कोचिंग के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या यही कोई दो से ढ़ाई लाख तक है। कोटा के कोचिंग हब में 4 जून को एक और होनहार छात्रा आयुषी ने जीवन लीला समाप्त कर ली। इस साल अब तक यह छठीं आत्महत्या है। इंजीनियर या डॉक्टर बनने आए बच्चों का बीच राह में मौत के आगोश में समा जाना हृदय विदारक होने के साथ ही साथ कहीं गहरे तक सोचने को मजबूर कर देता है। आखिर क्या कारण है कि उज्ज्वल भविष्य व गरिमामय प्रोफेसन से जुड़ने की तैयारी में नई पीढी के युवा राह पर उतरते ही इस कदर निराशा के दलदल में फंस जाते हैं कि बिना आगे-पीछे सोचे मौत को गले लगाने में क्षण भर भी नहीं हिचकते हैं। कोटा में कोचिंग कर रहे छात्रों में जिस तेजी से आत्महत्याओं का दौर चला है वह अपने आपमें गंभीर होने के साथ ही बच्चों के परिजनों, कोटावासियों या राजस्थान ही नहीं देश के मनोवैज्ञानिकों, राजनेताओं, प्रशासन, शिक्षाविदें को गहरी सोच में ड़ाल दिया है। कोरोना काल में कोचिंग गतिविधियां बंद होने से आत्महत्याओं का यह अंतहीन सिलसिला कुछ कम अवश्य हुआ पर कोंिचग संस्थानों के चालू होते ही आत्महत्याओं का जो सिलसिला शुरु हो गया है वह अपने आप में चिंतनीय हो जाता है।</p>
<p>पिछले दिनों कोटा में कोचिंग कर रही छात्रा कृति ने सरकार और अपने माता-पिता को मृत्युपूर्व अपने नोट में जो संदेश दिया है वह आंख खोलने के लिए काफी है। अपनी मां को लिखा है कि ‘आपने मेरे बचपन और बच्चा होने का फायदा उठाया और मुझे विज्ञान पसंद करने के लिए मजबूर करती रही। इस तरह की मजबूर करने वाली हरकत 11वीं पढ़ रहीं मेरी छोटी बहन के साथ मत करना, वो जो करना चाहती है, जो पढ़ना चाहती है वह उसे करने देना कुछ इसी तरह से सरकार को लिखा है कि अगर वे चाहते हैं कि कोई बच्चा नहीं मरे तो जितनी जल्दी हो सके इन कोचिंग संस्थानों को बंद करवा दें, यह कोचिंग खोखला बना देती है। कृति के इन संदेशों में कितनी सचाई और दर्द छिपा है यह अपने आप बयां कर रहा है। आखिर बच्चों का बचपन बढ़ों की इगों के आगे टिक नहीं पा रहा है और गला काट प्रतिस्पर्धा का कारण बनने के साथ ही बच्चों को मानसिक दबाव और कुंठा की राह धकेल रहा है, यह सच्चाई हैं।</p>
<p>कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है। कुकुरमुत्ते के छाते की तरह कोटा में कोचिंग व्यवसाय ने पांव पसारे हैं। अकेले कोटा में ही कोचिंग के लिए आने वाले छात्र-छात्राओें की तादाद यही कोई दो से ढ़ाई लाख तक है। एक मोटे अनुमान के अनुसार देश में कोचिंग का व्यवसाय कोई 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का माना जा रहा है। इसमें से अकेले कोटा में कोचिंग का कारोबार एक हजार करोड़ रुपए से अधिक है। साफ  है कोचिंग पूरी तरह से व्यवसाय का रुप ले चुकी है, ऐसे में मानवीय संबंध या गुरु-शिष्य के संबंध कोई मायने नहीं रखते। अपनत्व या आपसी संवेदना तो दूर-दूर की बात है। कोचिंग संस्थान पांच से छह घंटों तक कोचिंग कराते है। शेष समय हॉस्टल में अध्ययन में बीतता है। पहले से ही मानसिक दबाव में रह रहे बच्चे कोचिंग संस्थानों की नियमित परीक्षाआें के माध्यम से रेकिंग के दबाव में इस कदर रहते हैं कि संवेदनशील बच्चे तो इस दबाव को सहन ही नहीं कर पाते। कोचिंग संस्थानों के लिए तो यह निरा व्यवसाय बनकर रह गया है। उन्हें बच्चों के मनोविज्ञान को समझने की ना तो जरुरत महसूस होती है और ना ही इसकी परवाह। दूसरी तरफ  परिजन ऊंचे-ऊंचे ख्बाब देखते हुए बच्चों का इन कोचिंग संस्थानों में प्रवेश कराकर अपने दायित्व की इतिश्री कर लेते हैं। बीच सत्र में छोड़ने की स्थिति में फीस वापस नहीं करने की स्थिति में बच्चों पर दबाव बना रहता है। हॉस्टल या पेइंग गेस्ट के रुप में रहने वाले स्थान पर सेहतमंद खाने की व्यवथा होती है ना ही आपसी दुख दर्द को बांटने वाली बातें करने वाला कोई। रेकिंग के गिरते चढ़ते ग्राफ के चलते बच्चे अत्यधिक दबाव में आ जाते हैं। बच्चों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ जाता है और इसका परिणाम सामने हैं।</p>
<p>कोटा में चल रहे आत्महत्याओं के दौर से केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ही चिंतित है। सरकार और मनोविज्ञानियों ने अपने स्तर पर प्रयास भी शुरु किए पर वह अभी कारगर नहीं हो पा रहे हैं। कोरोना से पहले केन्द्र सरकार ने आत्म हत्या के कारणों का अध्ययन कराने के लिए कमेटी गठित की। तो जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ। बच्चों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए कोचिंग विद फन का कंसेप्ट लाया गया। जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के लिए गाइड लाइन जारी करने के साथ ही होप हेल्प लाईन को शुरु किया गया। जिला प्रशासन की दखल के बाद फन डे, योग, मेडिटेशन के माध्यम से पढ़ाई के तनाव को कम करने के प्रयास शुरु किए गए। परिजनों ने भी अपने बच्चों से निरंतर सम्पर्क बनाना शुरु किया। काउसलिंग व स्क्रीनिंग व्यवस्थाएं भी नियमित करने का प्रयास आरंभ हुआ। कोटा में कोचिंग छात्रों की आत्म हत्या के कारण कोई भी रहे हो पर यह बेहद चिंतनीय है। चिंतनीय यह भी है कि कोचिंग अब संस्थागत कारोबार का रुप ले चुकी है।</p>
<p><strong>- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 10:39:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत में वैश्विक ड्रोन हब बनने की है क्षमता : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में ड्रोन प्रौद्योगिकी को लेकर जो उत्साह और ऊर्जा दिखाई देती है। उससे स्पष्ट है कि भारत में वैश्विक ड्रोन हब बनने की पूरी क्षमता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-has-potential-to-become-a-global-drone-hub--says-modi/article-10549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546546546545.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में ड्रोन प्रौद्योगिकी को लेकर जो उत्साह और ऊर्जा दिखाई देती है। उससे स्पष्ट है कि भारत में वैश्विक ड्रोन हब बनने की पूरी क्षमता है। मोदी ने यहां भारत ड्रोन महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि देश में वैश्विक ड्रोन हब बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि ड्रोन टेक्नॉलॉजी को लेकर भारत में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वो अछ्वुत है। ये जो ऊर्जा नजर आ रही है। वह भारत में ड्रोन सर्विस और ड्रोन आधारित इंडस्ट्री की लंबी छलांग का प्रतिबिंब है। ये भारत में रोजगार सृजन  के एक उभरते हुए बड़े सेक्टर की संभावनाएं दिखाती है। देश में ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने की सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आठ वर्ष पहले यही वो समय था, जब भारत में हमने सुशासन के नए मंत्रों को लागू करने की शुरुआत की थी। न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के रास्ते पर चलते हुए, जीवन और व्यापार को सुगम बनाने को  हमने प्राथमिकता बनाया। पहले की सरकारों के समय टेक्नॉलॉजी को समस्या का हिस्सा समझा गया, उसको गरीब विरोधी साबित करने की कोशिशें हुई।</p>
<p>इस कारण 2014 से पहले गवर्नेंस में टेक्नॉलॉजी के उपयोग को लेकर उदासीनता का वातावरण रहा। इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब को हुआ, वंचित को हुआ, मिडिल क्लास को हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी की मदद से अब महिलाओं, किसानों और विद्यार्थियों को सीधे सरकार से मदद मिल रही है । प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन प्रौद्योगिकी के कारण इसमें क्रांति आई है। उन्होंने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी कैसे एक बड़ी क्रांति का आधार बन रही है। इसका एक उदाहरण पीएम स्वामित्व योजना भी है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 12:47:10 +0530</pubDate>
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