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                <title>rtu - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एनआईआरएफ रैंकिंग में आरटीयू को लाकर प्रदेश की पहली टेक्निकल यूनिवर्सिटी बनाएंगे : प्रो. चौधरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु का साक्षात्कार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/we-will-make-rtu-the-first-technical-university-in-the-state-to-be-included-in-the-nirf-ranking--prof--chaudhary/article-131979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान के मानकों को परखने वाली नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फे्रमवर्क में राजस्थान की कोई भी सरकारी यूनिवर्सिटीज शामिल नहीं है। जिससे सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों की शैक्षणिक  गुणवत्ता, अनुसंधान और प्लेसमेंट के दावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए। जबकि, इस रैंकिंग से विश्वविद्यालयों की साख देश-दुनिया में परखी जाती है। लेकिन, इस बार एनआईआरएफ रैंकिंग में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का नाम चमकाने की तैयारियां चल रही हैं।  आरटीयू के निवनियुक्त कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कार्यभार ग्रहण करते ही रैंकिंग को लेकर पूरी ताकत से जुट गए हैं। दैनिक नवज्योति को दिए साक्षात्कार में प्रो. चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार रैंकिंग में आरटीयू का नाम होगा। इसके लिए टास्क फोर्स भी गठित कर दी गई है, जिसने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>सवाल : </strong>वर्तमान में आरटीयू की कोई एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है, इस बार विश्वविद्यालय को रैंकिंग में शामिल करने की आपकी क्या रणनीति है?<br /><strong>जवाब- </strong> आरटीयू को इस रैंकिंग में लाना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। ताकि, देश की टॉप यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में राजस्थान से आरटीयू का नाम शुमार हो सके। इसके लिए हमने टास्क फोर्स का गठन भी कर दिया है, जो यह काम देखेगी। जामिया मिलिया इस्लामिया विवि देश की टॉप-3 रैंकिंग में है। जब मैंने जामिया के मुकाबले आरटीयू के शिक्षकों की काबिलियत देखी तो जरा भी फर्क नहीं आया।  यहां के शिक्षक इतने काबिल हैं कि आरटीयू को नेशनल  इंस्टीट्यूशनल की टॉप रैंकिंग में ला सकते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में पिछले 5 वर्षों से कंप्यूटर लैब बंद पड़ी है, छात्र बिना प्रैक्टिकल किए ही पास हो रहे हैं, इस पर विश्वविद्यालय क्या कदम उठा रहा है?<br /><strong>जवाब -</strong>  मैं, हर डिपार्टमेंट का निरीक्षण कर रहा हूं। मैकेनिकल व इलेक्ट्रीकल विभाग में जाकर व्यवस्थाएं देखी है। हर डिपार्टमेंट का जायजा लिया जा रहा है। हमने स्पेशलाइजेशन कमेटी गठित कर दी है, जो हर डिपार्टमेंट का फिजिकली दौरा करेगी। कहां क्या कमी है, किस चीज की आवश्यकता है, उसे पूरा किया जाएगा।  <br /><strong>सवाल :</strong> आरटीयू में शिक्षकों के प्रमोशन पिछले 10 वर्षों से लंबित हैं, इस दिशा में क्या कार्यवाही की जा रही है?<br /><strong>जवाब -</strong> यदि, शिक्षक दुखी होंगे तो कोई भी व्यवस्था कभी सही नहीं हो सकती। प्रमोशन उनका जायज हक है, जो मिलना ही चाहिए। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। कुछेक जगहों पर रुकावट आ रही है, जिसे दूर किया जा रहा है। इसके लिए एक टीम को काम पर लगा दिया है, जो शिक्षकों से जुड़ी जानकारी अपडेट की जा रही है। जैसे ही हमें सरकार से अनुमति मिलेगी तुरंत प्रमोशन कर दिए जाएंगे। <br />ई-स्पोर्ट्स और इनडोर गेम्स की सुविधाएं बहुत ही खराब स्थिति में हैं, इनमें सुधार के लिए क्या योजनाएं बनाई जा रही हैं?<br />सवाल : यह सही है कि स्पोर्ट्स की सुविधाओं में कमी है। जिसमें हम विस्तार करेंगे। पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है, क्योंकि स्पोर्ट्स भी उतना ही जरूरी है, जितना इंजीनियरिंग। हम विद्यार्थियों को नेशनल लेवल का इंफ्रास्ट्रेक्चर डवलप करकें देंगे। <br /><strong>सवाल :</strong> आप स्वयं पर्यटन विभाग से हैं, ऐसे में पर्यटन और तकनीकी शिक्षा के संयोजन से नया कोर्स करने की योजना है?<br /><strong>जवाब : </strong>बिलकुल, ऐसा करने का मेरा मन है। आज पूरी दुनिया का ट्यूरिज्म टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। जहां तक अकेडमिक इनपुट की बात है, हमने इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी है। हम पूरी दुनिया में एनालिसिस कर रहे हैं कि ट्यूरिज्म में इंजीनियरिंग को लेकर कहां क्या कोर्सेज हैं। इसके लिए मैंने एक टीम को काम पर लगा दिया है, जो पिछले 5 दिनों से इसी काम में लगी हुई है। <br /><strong>सवाल : </strong>आरटीयू और  इसके अधीन कॉलेजों में कई पदाधिकारी एवं डीन लंबे समय से एक ही पद पर जमे हैं, क्या निकट भविष्य में कोई प्रशासनिक फेरबदल होने की संभावना है?<br /><strong>जवाब : </strong> अभी इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है, यदि ऐसा है तो दिखवा लेंगे। <br /><strong>सवाल :</strong> विश्वविद्यालय में छात्रों के प्लेसमेंट प्रतिशत को बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?<br /><strong>जवाब :</strong> हमारा मकसद बच्चों को इतना काबिल बनाना है कि कम्पनियों को उनकी जरूरत रहें न की हमें। स्टूडेंट्स की स्किल इतनी डवलप करनी है कि कम्पनियों को अच्छा चलना है तो उन्हें आरटीयू के बच्चे लेने ही होंगे। <br /><strong>सवाल : </strong>चर्चा है, आरटीयू में जानबुझकर छात्रों को बैक दी जा रही है, ताकि विवि को फीस के रूप में राजस्व प्राप्त हो?<br /><strong>जवाब :</strong> ऐसा बिलकुल भी नहीं है। लेकिन, इस बात पर हमने चर्चा जरूर की है कि बच्चों के बैक क्यों आ रही है और हम क्या कर सकते हैं। यदि, कुछ कमियां होंगी तो उन्हें सुधारा जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:46:19 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीयू : अनुसंधान की दौड़ में छात्रों से पिछड़ी छात्राएं, आंकड़ों से हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान तकनीकी विवि के दीक्षांत समारोह में इस बार गोल्ड में भी आगे रहे छात्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu--girls-lagging-behind-boys-in-the-race-of-research/article-108821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rtu-anusandhan-ki-daud-mein-chhatron-se-pichhade-chhatraen..kota-news-27.03.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। तकनीकी शिक्षा में अनुसंधान की दौड़ में छात्राएं पिछड़ रही हैं, जबकि छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। वहीं, स्वर्ण पदक पाने वालों में भी इस बार बालिकाएं पीछे रह गई। यह खुलासा वर्ष 2024 से 2025 तक हुए दीक्षांत समारोह के आंकड़ों से हुआ है।  दरअसल, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सत्र 2022 से 2024 तक पीएचडी उपाधि पाने वालों में छात्रों की संख्या अधिक रही। जबकि, छात्राओं की संख्या 50% से भी कम रही।  शिक्षाविदें ने अनुसंधान के क्षेत्र में घटती बालिकाओं की संख्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसके कारणों को खोज समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p><strong>पिछले 3 सालोंं में 58 छात्र व 25 छात्राओं ने पीएचडी</strong><br />आरटीयू में वर्ष 2024 में हुए दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को सत्र 2022 व 23 की डिग्रियां वितरित की गई थी। जिसमें दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 47 विद्यार्थियों को पीएचडी डिग्री अवॉर्ड हुई थी। जिसमें छात्रों की संख्या 34 तथा छात्राएं मात्र 13 ही रहीं। वहीं, हाल ही में 25 मार्च को हुए दीक्षांत में कुल 36 विद्यार्थियों ने शोध उपाधि प्राप्त की। इसमें भी लड़कों की संख्या लड़कियों के मुकाबले 50% प्रतिशत ज्यादा रही। इस तरह पिछले तीन वर्षों में 58 बालकों ने महत्वपूर्ण विषयों पर शोध कार्य पूरा किया। वहीं, अनुसंधान के क्षेत्र में छात्राओं की भागीदारी मात्र 25 प्रतिशत रही। </p>
<p><strong>अनुसंधान से ही समाज में क्रांतिकारी बदलाव संभव</strong><br />किसी भी क्षेत्र की प्रगति शौध व अनुसंधान पर निर्भर करती है, जो मानव जीवन की तमाम चुनौतियों को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में छात्राओं की संख्या कम होना चिंताजनक है। हालांकि,  बालिकाओं ने भी तकनीकी शिक्षा में विभिन्न जटिल मुद्दों पर शोध कर बेहतर टेक्नोलॉजी विकसित कर मानव जीवन आसान बनाया। हालांकि, वर्ष 2021 से पहले शोध कार्यों में बालिकाओं की भागीदारी ज्यादा थी। </p>
<p><strong>इस बार गोल्ड मेडल में भी पिछड़ी</strong><br />गत वर्ष आरटीयू के दीक्षांत समारोह में बीटेक, एमटेक, बी आर्क, एमबीए सहित अन्य संकाय में स्वर्ण पदक हासिल करने में छात्राएं अव्वल रहीं थी लेकिन इस बार  मंगलवार को हुए समारोह में छात्राएं पिछड़ गई और छात्र आगे निकल गए। बता दें, इस बार विभिन्न संकायों में सर्वोच्चय अंक हासिल करने वाले सत्र 2024 के 20 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए गए। जिसमें 11 छात्र व 9 छात्राएं शामिल रहीं। इसी तरह सत्र 2022 में 24 प्रतिभाओं में से 13 छात्र व 11 छात्राओं को स्वर्ण पदक मिला था। वहीं, सत्र 2023 में कुल 10 स्टूडेंट्स में से 9 बालक व 11 बालिकाओं ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> ऐसा नहीं है, पिछले सालों के दीक्षांत समारोह का रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है, स्वर्ण पदक पाने वालों में कभी छात्र आगे रहे हैं तो कभी छात्राएं। इसका मतलब यह नहीं की उच्च शिक्षा में बालिकाओं की संख्या कम हो रही हो, बल्कि छात्राएं प्रतिस्पर्द्धा की दौड़ में लगातार आगे निकल रहीं हैं। यही वजह है, ओवरआॅल उच्च शिक्षा के ग्राफ में बालिकाओं का नामांकन दर बढ़ा है, जो महिला सशक्तिकरण का जीता जागता उदारहण है। देश के विकास में नारी शक्ति अपनी अहम भूमिका निभा रहीं हैं। <br /><strong>-प्रो. एसके सिंह, कुलपति राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 15:59:35 +0530</pubDate>
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                <title>अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व में गहरी छाप छोड़ रहा अपना आरटीयू, राज्यपाल ने होनहार शौधार्थियों को उपाधियों से किया सम्मानित </title>
                                    <description><![CDATA[आरटीयू के 14वें दीक्षांत समारोह में रिसचर्स को मिला सम्मान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-is-leaving-a-deep-mark-in-the-world-in-the-field-of-research/article-108711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय क्वालिटी एजुकेशन के दम पर देश-दुनिया में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना लौहा मनवा रहा है। यहां के विद्यार्थियों ने डेटा मॉडल्स, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, क्रिप्टोग्राफिक तकनीक से लेकर टेक्सटाइल कम्पोजिट्स सहित सॉफ्टवेयर डवलपमेंट के क्षेत्रों में अनुसंधान से नई टेक्नोलॉजी का विकास कर जीवन की चुनौतियों को आसान बना रहे हैं। उनकी रिसर्च, सुनहरा भविष्य की परिकल्पना साकार कर रही है। साथ ही लोगों के रोजमर्रा के काम आसान होंगे। वहीं, बिजनेस को ग्रोथ दिलाने से लेकर आमजन को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए कई अनुसंधान किए जा रहे हैं।  आरटीयू के 14वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने ऐसे होनहार शौधार्थियों को उपाधियों से सम्मानित किया है। पेश है खबर के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>मेटल को टेक्सटाइल कम्पोजिट्स से किया रिप्लेस</strong><br />भीलवाड़ा के एमएलवी टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अरविंद वशिष्ट ने टेक्सटाइल कम्पोजिट्स पर शोध किया। उन्होंने अपनी रिसर्च से मेटल (धातु) को टेक्सटाइल कम्पोजिट्स से रिप्लेस किया। इसके लिए उन्होंने चार तरह के कम्पोजिट्स ग्लास, ब्लास्ट, जूट, लीनन का उपयोग कर स्ट्रेक्चर कम्पोजिट तैयार किया। यह किसी भी मेटल का रिप्लेसमेंट है। इससे धातु का वजन आधा हो जाएगा और लाइफ भी बढ़ जाएगी।  डॉ. वशिष्ट ने बताया कि इसे यूं समझ सकते हैं, पवन चक्की में तीन ब्लेड लगी होती है, जिसका वजन करीब 2 हजार किलो होता है, प्रत्येक ब्लेड का वजन 600 किलो होता है, क्योंकि वह स्टील की बनी होती है। अब इसे टेक्सटाइल कंपोजिट से बनाया जा सकता है, ऐसे में  एक ब्लेड का वजन 600 से 300 किलो ही रह जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि वजन में हल्की होने से पवन चक्की तेज गति से चलेगी, जिससे बिजली का उत्पादन भी ज्यादा होगा और मजबूत होने से लाइफ भी बढ़ेगी। टेक्सटाइल कंपोजिट्स का उपयोग कंट्रक्शन, वाहन, स्पोर्ट्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में कर सकते हैं। </p>
<p><strong>फेक रिव्यू की पहचान कर धोखाधड़ी से बचाएगा बिग डेटा</strong><br />जोधपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर राजेंद्र पुरोहित ने कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी की है। उन्होंने अपनी रिसर्च में ऐसी तकनीक विकसित की है जो लोगों को इंटरनेट पर फेक रिव्यूज के झांसे में आने से बचाएगा। डॉ. पुरोहित ने बताया कि वर्तमान दौर में ऑनलाइन खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते इन वेबसाइड्स पर घटिया प्रोडेक्ट का भी अच्छा रिव्यू आने से लोग उस प्रोडेक्ट को खरीदकर अनजाने में धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। वहीं, दूसरा पहलु भी है, अच्छे प्रोडेक्ट की घटिया रिव्यू पढ़ने से उपभोक्ताओं के मन में उस प्रोडेक्ट के प्रति नाकारात्मकता बढ़ जाती है, जिससे संबंधित कम्पनी को लॉस होता है। ऐसे में बिग डेटा एनालिसिस के जरिए हम फेक रिव्यू को पहचान पाएंगे और साइबर क्राइम का शिकार होने से बच सकेंगे। </p>
<p><strong>सौलर से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई  </strong><br />निजी कम्पनी में सीनियर मैनेजर भारत दुबे ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में सौलर ऊर्जा में पीएचडी की। शोध का टॉपिक एनालिसिस आॅफ सौलर पीवी सिस्टम फॉर मैक्सिमम पॉवर एक्सट्रैक्शन एंड एफिसिएंट यूटिलाइजेशन रहा। दुबे ने बताया कि सौलर ऊर्जा का किस तरह ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जा सकता है, उसकी क्षमता में और अधिक सुधार कैसे किया जा सकता है, इस पर शौध किया।  उन्होंने बताया कि सौलर के जो मॉड्यूल्स होते हैं वो 25 डिग्री तापमान और 1000 वॉट पर मीटर आॅफ रेडियस के लिए बने होते हैं। जिनके टेम्प्रेचर लगभग टेस्ट लैब में ही होता है। ऐसे में उन मॉड्यूल्स को परीक्षण के बाद फिल्ड में ले जाते हैं तो स्थिति विपरित होती है, जो कि हमारी रेडियस 1000 मीटर से भी ऊपर या नीेचे भी हो सकता है और तापमान भी 40 से 50 डिग्री तक भी हो सकता है। ऐसे में सामने आया कि हमारे जो मॉड्यूल्स हैं वो निर्धारित तापमान पर काम नहीं करता है तो उसकी क्षमता घट जाती है। ऐसे में सौलर प्लांट के मॉड्यूल विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा काम करें और बिजली की उत्पादन क्षमता बढ़े, इसको लेकर रियल टाइम प्रयोग किए और विभिन्न मोडल्स बनाए। हमने डिफरेंट टेक्नोलॉजी के दो मॉड्यूल्स लिए और टेस्ट किए तो क्षमता में काफी अंतर पाया गया। इसके बाद इस उपकरण में कूलिंग सिस्टम लगाया। इसके लिए मॉडल्स में साइंटिफिक अरेंजमेंट कर मॉड्यूल्स में फैन लगाकर सौलर से बिजली उत्पादन की क्षमता का आंकलन किया। जिसका बेहतर रिजल्ट मिला। इसके बाद और सुधार के लिए वाटर सिस्टम का भी प्रयोग किया तो पाया कि मॉड्यूल्स की क्षमता और अधिक बढ़ गई। इन सब के लिए पहले तो मॉडल्स बनाए और फिर प्रयोग किए गए। दुबे ने अपना शोध डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. सीमा अग्रवाल व डीन अकेडमिक अफेयर डॉ. डीके पलवलिया के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। उनका रिसर्च वर्क नेशनल व इंटरनेशनल जर्नल में भी पब्लिश  हो चुका है। साथ ही एक बुक चेप्टर भी एक्सेप्ट हुआ है।</p>
<p><strong>क्रिप्टोग्राफिक तकनीक से मल्टीमडिया डेटा किया सुरक्षित</strong><br />हेमंत साहू ने आरटीयू से कम्प्यूटर साइंस एप्लीकेशन में पीएचडी की। उनका शौध अ नावेल एप्रोच फॉर एम्पलीमेंटेशन ऑफ सिक्योरिटी एंड प्राइवेसी फॉर मल्टीमीडिया थिंग्स पर आधारित था। हेमंत ने अपनी रिसर्च से मल्टीमीडिया डेटा की सुरक्षा, गोपनियता, लीक व चोरी होने से बचाने के लिए तकनीक इजाद की। जिसकी मदद से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने वाले फोटो, वीडियो, ऑडियो सहित अन्य डेटा को सुरक्षित कर दिया है। हेमंत बताते हैं, वर्तमान में मोबाइल मल्टीमीडिया का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डेटा लीक होना, गोपनियता  भंग, चोरी होने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में अपनी रिसर्च में एन्क्रिप्शन एंड डिक्रिप्शन तकनीक विकसित की है, जिससे जिससे भेजने वाला और प्राप्त करने वाले के बीच डेटा को तीसरा कोई न तो पढ़ पाएगा और न ही देख पाएगा। डाटा भेजते वक्त एन्क्रिप्शन मोड़ पर रहेगा, जिससे डाटा लॉक हो जाता है, प्राप्तकर्ता भी उस डेटा को पढ़ने के लिए सुरक्षा-की से ही लॉक खोल पाएगा। इस तरह से मल्टीमीडिया डेटा की गोपनियता बनी रहेगी और कोई चोरी या लीक नहीं कर पाएगा।  </p>
<p><strong>सौर ऊर्जा से बिजली बनाने की क्षमता 30 से 95% बढ़ेगी</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में अस्टिेंट प्रोफेसर सुनीता चाहर ने इाईब्रिड कॉम्बिनेशन ऑफ सौलर एंड विंड एनर्जी पर पीएचडी की। उन्होंने अपनी रिसर्च में ऐसा कंट्रोल सिस्टम डवलप किया है जो सौर ऊर्जा से बिजली बनाने की क्षमता को तीन गुना अधिक बड़ा देगा। डॉ. चाहर कहती हैं, सूर्य से अब तक सौलर धूप से 30% ही एनर्जी जनरेट करता है लेकिन इस रिसच में विकसित की गई तकनीक से बिजली का उत्पादन तीन गुना 95% तक बढ़ जाएगी। वहीं, दो या दो से अधिक सौलर पैनल को एक ही कंट्रोलर से कंट्रोल किया जा सकता है। जबकि, अभी तक हर एक सौलर के लिए एक कंट्रोलर लगाना पड़ता था, जो महंगा होता है। इस तकनीक से उपभोक्ता को आर्थिक भार से निजात मिलेगी। वहीं, सौलर पैनल की लाइफ भी बढ़ जाएगी। यदि, मौसम खराब हो जाए तो भी सौलर के बिजली उत्पादन करने की क्षमता पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि, इसको इसी तरीके से डिजाइन किया है कि यह अपनी क्षमता के अनुसार बिजली उत्पादन करता रहेगा। सुनीता को इस रिसर्च के लिए यंग रिसर्च अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस रिसर्च में प्रोफसर एसडी पुरोहित का विशेष सहयोग रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 16:01:00 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का -आरटीयू के वित्तीय सलाहकार को दिया निगम का अतिरिक्त चार्ज</title>
                                    <description><![CDATA[दशहरा मेला व अन्य टेंडर की पत्रावलियों का हो सकेगा निस्तारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---additional-charge-of-corporation-given-to-rtu-s-financial-advisor/article-97390"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  नगर निगम कोटा दक्षिण में आखिरकार 10 दिन बाद लेखा शाखा में अधिकारी लगा दिया। जिला कलक्टर ने आदेश जारी कर आरटीयू के वित्तीय सलाहकार धीरज कुमार सोनी को कोटा दक्षिण निगम में मुख्य लेखाधिकारी/लेखाधिकारी का अतिरिक्त चार्ज दिया है। सोनी ने बुधवार को निगम में कार्यभार ग्रहण भी कर लिया। नगर निगम कोटा दक्षिण के मुख्य लेखाधिकारी भंवरलाल अग्रवाल 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो गए थे। उनसे पहले 30 अक्टूबर को नगर निगम कोटा उत्तर के सहायक लेखाधिकारी संजय कुमार जैन भी सेवानिवृत्त हो गए थे। ऐसे में दोनों नगर निगमों का लेखा अनुभाग अधिकारी विहीन हो गया था। जिससे नगर निगम में दशहरा मेले के बकाया भुगतान और  निर्माण समेत अन्य टेंडरों की पत्रावलियां अटकी हुई थी। लेकिन अब कोटा दक्षिण में  अधिकारी नियुक्त होने से लेखा शाखा से संबंधित फाइलों का निस्तारण हो सकेगा। सूत्रों के अनुसार कोटा उत्तर निगम में भी एक  वरिष्ठ अधिकारी को लेखा शाखा में लगाने का आदेश तो जारी हो चुका है। लेकिन किसी कारण वश अभी तक उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को लगाने की योजना है। </p>
<p><strong>आयुक्त ने लिखा था पत्र</strong><br />दोनों नगर निगमों में लेखा शाखा में अधिकारी का पद रिक्त होने से निगम के टेंडर व मेले के भुगतान अटक गए थे। इस संबंध में नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने 6 दिसम्बर को जिला कलक्टर को पत्र लिखकर निगम में धीरज कुमार सोनी को मुख्य लेखाधिकारी / लेखाधिकारी का अतिरिक्त चार्ज देने का निवेदन किया था।  उनके पत्र व आवश्कता को देखते हुए जिला कलक्टर ने सोनी को अपने काम के साथ कोटा दक्षिण निगम में  मुुख्य लेखाधिकारी 8 लेखाधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार संभालने का आदेश जारी किया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने नगर निगम मेंलेखा अधिकारी का पद रिक्त होने का मामला  प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 30 नवम्बर के अंक में पेज 2 पर ‘दोनों नगर निगमों का लेखा अनुभाग हुआ अधिकारी विहीन’शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार में अधिकारी के नहीं होनेसे निगम में कामकाज प्रभावित होने की जानकारीदी गईथी। उसके बाद नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने जिला कलक्टर व आयुक्त से फोन पर बात की थी।वहीं कोटा उत्तर व दक्षिण आयुक्त ने भी जिला कलक्टर को पत्र लिखकर लेखा अनुभाग में अधिकारी लगाने का निवेदन किया था। जिसके बाद जिला कलक्टर ने यह आदेश जारी किया है।  </p>
<p><strong>शेष पत्रावलियां दो दिन में लेखा शाखा में भिजवाने के आदेश</strong><br />इधर नगर निगम की लेखा शाखा में अधिकारी की नियुक्ति होने के बाद कोटा दक्षिण आयुक्त अनुराग भार्गव ने आदेश जारी किया। जिसमें सभी अनुभागों को आदेशित किया गया कि दशहरा मेले के भुगतान से संबंधित सभी लम्बित पत्रावलियां दो दिन में 13 दिसम्बर तक लेखा शाखा में भिजवाने को कहा गया है। यदि उस समय तक फाइलें लेखा शाखा में नहीं पहुंची तो  संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। </p>
<p><strong>फाइलों का शीघ्र होगा निस्तारण</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष व मेलासमिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि लेखा शाखा में अधिकारी नहीं होने से मेले के भुगतान की फाइलें अटकी हुई थी। उन्होंने गत दिनों जिला कलक्टर से वार्ता कर अधिकारी लगाने का निवेदन किया था। अब वित्तीय सलाहकार धीरज सोनी को निगम में लेखा शाखा का अतिरिक्त चार्ज दिया है तो उससे मेले के भुगतान की फाइलों का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा। साथ ही अन्य टेंडर की फाइलों का अटका हुआ काम भीआगे बढ़ सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 13:35:06 +0530</pubDate>
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                <title>असमंजस के भंवर में फंसी आरटीयू की एमए-एमएससी </title>
                                    <description><![CDATA[पहले सितम्बर फिर अक्टूबर में एडमिशन शुरू करने के किए थे दावे, नवम्बर में भी आसार नहीं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-s-ma-msc-stuck-in-a-whirlpool-of-confusion/article-94407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy34.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए डिग्री प्रोग्राम असमंजस के भंवर में फंस गए हैं। सितम्बर में शुरू होने वाले कोर्सेज के नवम्बर में भी शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर के प्रथम सप्ताह में ही कोर्स शुरू करने के दावे किए गए थे। एमएससी व एमए में 30-30 सीटों पर एडमिशन दिए जाने थे। लेकिन, आरटीयू प्रशासन की लेटलतीफी के कारण हजारों विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।  क्योंकि, कॉलेजों में पीजी के एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सीटें सीमित होने के कारण अधिकतर विद्यार्थी स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में उनका आरटीयू में एमएससी व एमए करना सपना ही रह गया। विशेषज्ञों का मत है, यदि आरटीयू द्वारा नवम्बर के आखिरी सप्ताह तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू करता है तो संतोषजनक एडमिशन नहीं मिल पाएंगे, क्योंकि अनावश्यक देरी के चलते विद्यार्थी अन्य संस्थानों में एडमिशन ले चुके हैं। कोटा यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड कॉलेजों में पीजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं भी दिसम्बर से जनवरी के बीच निर्धारित है। </p>
<p><strong>पहले सितम्बर फिर अक्टूबर अब नवम्बर</strong><br />आरटीयू प्रशासन द्वारा एमएससी व एमए डिग्री कोर्सेज शुरू करने के लिए पहले सितम्बर के प्रथम सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। इसके बाद कोर्स संचालन की कमेटी की मिटिंग नहीं होने का हवाला देकर अक्टूबर से एडमिशन स्टार्ट करने की बात कही गई। लेकिन, दोनों माह बीतने के बाद अब नवम्बर में बोम से अप्रूवल मिलने पर कोर्स शुरू करने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>
<p><strong>फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी</strong><br />आरटीयू द्वारा वर्तमान शिक्षा सत्र 2024-25  में  फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी कराए जानी है। लेकिन, अब अब तक एडमिशन प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई। जबकि, सिलेबस तक बन गए। कोर्सेज के लिए कमेटी भी गणित हो चुकी है। इसके बावजूद आरटीयू प्रशासन द्वारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने में अनावशयक देरी की जा रही है। जिससे एमएससी शुरू होने पर भी संशय लग गया। </p>
<p><strong>अंगे्रजी, गणित व ह्यूमेनिटी में एमए</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अंग्रेजी, गणित व ह्यमेूनिटी में एमए डिग्री कोर्स शुरू होना है। एमए इंग्लिश के प्रति विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया था। क्योंकि, प्रत्येक संकाय में 30-30 सीटें निर्धारित हैं। वहीं, शहर में मात्र गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंगे्रजी में एमए करवाई जाती है। लेकिन वहां सीटे सीमित होने के कारण छात्र-छात्राओं का रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आरटीयू से उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं होने से मायूस हो गए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />जब आरटीयू में इंग्लिश में एमए की जानकारी मिली थी तो हम एडमिशन लेने के लिए उत्साहित थे और बेसब्री से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि कोटा शहर में मात्र गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा में ही इंग्लिश में एमए करवाई जाती है लेकिन सीटें कम होने से मेरिट हाई जाती है, जिसकी वजह से अधिकतर विद्यार्थियों को रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में आरटीयू  से उम्मीद थी। लेकिन यहां अब तक कोर्स ही शुरू नहीं हुआ। मजबूरी में स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन लेना पड़ेगा। <br /><strong>- जोगेंद्र कहार, याज्ञेंद्र कुमार, छात्र </strong></p>
<p>आरटीयू, टेक्नीकल यूनिवर्सिटी होने के नाते यहां इंफ्रास्ट्रेक्चर बेहतर है। ऐेसे में यहां से एमएससी करना चाहता था लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं किया। ऐसे में गवर्नमेंट कॉलेज में ही एडमिशन ले लिया। यदि, अक्टूबर तक भी प्रोसेज शुरू  हो जाता तो एडमिशन ले सकते थे। यह यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी है, कई विद्यार्थी एमएसी व एमए के विभिन्न संकाय में एडमिशन लेने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन देरी के कारण अन्यंत्र संस्थानों में एडमिशन लेना पड़ा।  नवम्बर से भी कोर्स शुरू हो जाए, यह भी तय नहीं है। इस सत्र से कोर्स शुरू होना मुश्किल लगता है। <br /><strong>- खुशीराम जादौन, हर्षित अग्रवाल, छात्र </strong></p>
<p>अभी इस संबंध में कोई अपडेट नहीं है। हालांकि कार्य तेजी से चल रहा है। <br /><strong>- प्रो. रंजन माहेश्वरी, चीफ प्रोक्टर आरटीयू</strong></p>
<p>एडमिशन प्रोसेज के रूल-रेगुलेशन आखिरी स्टेज पर है। आगामी कुछ दिनों में बोम की बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें अप्रूव्ल मिलते ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सिलेबस बन चुके हैं, तैयारी भी पूरी हो चुकी है। आरटीयू विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। <br /><strong>- प्रो. दिनेश बिरला, डीन फैकल्टी अफेयर आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Nov 2024 14:56:35 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीयू का इंटर कॉलेज स्पोर्ट्स टूर्नामेंट आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) की ओर से वर्ष 2023-24 का इंटर कॉलेज स्पोर्ट्स टूर्नामेंट पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rtus-inter-college-sports-tournament-organized/article-63191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/rtu.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) की ओर से वर्ष 2023-24 का इंटर कॉलेज स्पोर्ट्स टूर्नामेंट पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित किया गया। इसके तहत हैंडबॉल, फुटबॉल व चेस के मुकाबले हुए, जिनमें राजस्थान के विभिन्न कॉलेजों की 25 टीमें शामिल हुई। आज इनके फाइनल खेले गए। हैंडबॉल बॉयज का फाइनल पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग व जीआईटी के बीच हुआ, जिसमें पूर्णिमा कॉलेज टीम 17-6 से विजयी रही। हैंडबॉल गर्ल्स के फाइनल में भी पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पीआईईटी, जयपुर को 2-0 से हराकर चैंपियन बनी।</p>
<p>टूर्नामेंट के आयोजन सचिव अश्विनी लाटा ने बताया कि फुटबॉल बॉयज का फाइनल आरटीयू, कोटा व जेईसीआरसी के बीच खेला गया। पूरे समय तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में आरटीयू, कोटा 3-2 से विजयी रहा। चेस के फाइनल में एसकेआईटी ने जीआईटी को 3-2 से शिकस्त दी।</p>
<p>समापन पर पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंघी, आरटीयू कोटा के फिजिकल एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. राकेश दुबे, आरटीयू कोटा के स्पोर्ट्स इंचार्ज डॉ. एमएम अंसारी, टूर्नामेंट के आयोजन सचिव अश्विनी लाटा और मेजबान पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजिस्ट्रार डॉ. गौतम सिंह ने विजेता टीमों को ट्रॉफी प्रदान की। उल्लेखनीय है कि टूर्नामेंट के सभी मैच एआईयू के नियमों के अनुसार खेले गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Dec 2023 16:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीयू का दावा : हर साल 60 फीसदी प्लेसमेंट, स्टूडेंट बोले-सिर्फ 35 फीसदी </title>
                                    <description><![CDATA[सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का बहुत ही कम प्लेसमेंट हो पाता है, क्योंकि कैम्पस में इस क्षेत्र की कम्पनियां नहीं आती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-claims--60-percent-placement-every-year--students-say---only-35-percent/article-56832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rtu-ka-dawa...har-saal-60-fisadi-placement,-student-bole-sirf-35-fisadi...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की ओर से हर साल बीटेक में ओवरआॅल 60 फीसदी स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट के जरिए रोजगार उपलब्ध करवाने का दावा किया गया है, जबकि बीटेक व एमटेक स्टूडेंट्स ने आरटीयू की प्लेसमेंट रेट 35 से 40 फीसदी ही बताया है। दैनिक नवज्योति ने कैम्पस में  बीटेक थर्ड व फोर्थ ईयर और एमटेक के स्टूडेंट्स से बात की तो उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए दावों को खारिज कर दिया।  साथ ही प्लेसमेंट के दौरान होने वाली समस्याओं पर भी खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान छात्रहित को देखते हुए उनके नाम परिवर्तित कर दिए हैं। पेश हैं प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>ओवरओल प्लेसमेंट रेट 35 से 40 फीसदी</strong><br />बीटेक कम्प्यूटर साइंस फोर्थ ईयर के छात्र महावीर पटेल ने बताया कि 60 फीसदी कैम्पस प्लेसमेंट का दावा सच्चाई से परे है, यह रेट बहुत ज्यादा बताई गई है, जबकि वास्तविकता बीटेक की सभी 11 ब्रांचों को मिलाकर ओवरआॅल 35 से 40 फीसदी विद्यार्थियों को ही प्लेसमेंट से रोजगार मिलता है। अधिकतर विद्यार्थी आउट आॅफ प्लेसमेंट के जॉब पर लगते हैं। वहीं, सिविल इंजीनियरिंग के छात्र विश्वेंद्र खन्ना का कहना है, सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का बहुत ही कम प्लेसमेंट हो पाता है, क्योंकि कैम्पस में इस क्षेत्र की कम्पनियां नहीं आती। हालांकि, सीएस आईटी की कम्पनियां ही अधिक आती है। इसलिए छात्र इन इंजीनियरिंग की इन दोनों ब्रांचों को ही सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। </p>
<p><strong>अधिकतर स्टूडेंट्स क्राइट एरिया से ही बाहर</strong><br />बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के छात्र हेमंत, साहिल ने बताया कि विश्वविद्यालय में आने वाली कम्पनियां छठे व सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए आती हैं, लेकिन उनके क्राइट एरिया में फर्स्ट डिविजन वाले विद्यार्थियों को ही शामिल किया जाता है। साथ ही किसी भी विषय में बैक नहीं होने की कंडीशन रखी जाती है, ऐसे में किसी ब्रांच में 80 स्टूडेंट्स हैं तो उनमें से आधे तो रोजगार की दौड़ से वैसे ही बाहर हो जाते हैं। शेष बचे इंटरव्यू में निकाल दिए जाते हैं। असल में कम्पनियों को चुनिंदा ही एम्पलोई चाहिए होते हैं। वहीं, एयरोनोटिकल इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के मुकेश ने बताया कि पिछले साल 4 स्टूडेंट्स का ही चयन हुआ था, जबकि सातवें सेमेटर में करीब 30 से ज्यादा स्टूडेंट्स थे।  </p>
<p><strong>गत वर्ष रोजगार देकर मुकर गई कम्पनी</strong><br />एमटेक कम्प्यूटर साइंस के छात्र हरिहंत वैष्णव का कहना है, गत वर्ष प्लेसमेंट कैम्प में आईटी कम्पनी में बीटेक कम्प्यूटर साइंस व इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी के तीन विद्यार्थियों का चयन हुआ था। उन्हें आॅफर लेटर भी दिए गए थे लेकिन फाइनल एग्जाम देकर जब कम्पनी ज्वाइंन करने पहुंचे तो वहां आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए कम्पनी ने जॉब देने से साफ इंकार कर दिया। कई कम्पनियां विद्यार्थियों के साथ ऐसे विश्वासघात भी करती है। </p>
<p><strong>इंजीनियरों से कम्पनी करवाती है मार्केटिंग </strong><br />बीटेक इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी के पासआउट स्टूडेंटस योगेश ने बताया कि राजस्थान  टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में प्लेसमेंट कैम्प में प्लैनेट स्पार्क जैसी सेल्स एंड मार्केटिंग कम्पनियां भी आती हैं, जो इंजीनियरों से आॅन लाइन कोर्स बेचने का काम करवाती है। रोजगार की तलाश में छात्र ऐसी कम्पनियों को ज्वाइंन कर तो लेता है लेकिन दो-तीन माह में उसे नौकरी छोड़नी पड़ती है। गत वर्ष भी दो बच्चों को नौकरी छोड़नी पड़ी थी। टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में सेल्स कम्पनियों का क्या काम है। विवि 60 फीसदी प्लेसमेंट का दावा कर रहा है तो कॉलेज की वेबसाइड पर विद्यार्थी का नाम और किस कम्पनी में प्लेसमेंट मिला यह जानकारी अपलोड कर पारदर्शिता बरते। सच्चाई सामने आ जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 19:25:23 +0530</pubDate>
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                <title>डिग्री से पहले ही हाथ में नौकरी दे रहा आरटीयू</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों की शिक्षा को रोजगारपरख एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में आरटीयू लगातार नवाचार कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-is-giving-job-even-before-degree/article-56662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/degree-s-phle-hath-me-nokri-de-rha-rtu...kota-news-09-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंजीनियरिंग की दुनिया में नवाचार से गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पहचान बना चुका आरटीयू अब रोजगार के क्षेत्र में भी अपना प्रभुत्व स्थापित करने में जुटा है। पढ़ाई पूरी होने से पहले ही भावी इंजीनियरों के हाथ में रोजगार थमा रहा है। दरअसल, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय   हर साल 30 से 35 फीसदी बीटेक स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट कैम्प के जरिए  मल्टीनेशनल कम्पनियों में नौकरी दिला रहा है।  जबकि, आरटीयू द्वारा सालाना 60 फीसदी प्लेसमेंट देने का दावा किया जा रहा है। </p>
<p><strong>8 साल में 1862 स्टूडेंट्स को मिली नौकरी</strong><br />आरटीयू में वर्ष 2016 से 2023 तक कई प्लेसमेंट कैम्प लगाए गए। इसमें बीटेक इंजीनियरिंग की सभी 11 ब्रांचों से कुल 2 हजार 908  पात्र विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमें से 1862 स्टूडेंटस का मल्टीनेशनल कम्पनियों में चयन हुआ और मौके पर ही जॉब आॅफर लेटर दिए गए। डिग्री पूरी होने से पहले ही भावी इंजीनियरों को लाखों के पैकेज पर नौकरी मिली।  </p>
<p><strong>सबसे ज्यादा कम्प्यूटर साइंस के विद्यार्थी का हुआ चयन </strong><br />गत 8 वर्षों में आयोजित हुए प्लेसमेंट कैम्पों में सबसे ज्यादा बीटेक कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का चयन हुआ। वर्ष 2016 से 2023 तक कुल नामांकित विद्यार्थियों में से 168 विद्यार्थियों को रोजगार मिला। यदि, वर्षवार आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2022 में सर्वाधिक 78 स्टूडेंट्स को मल्टीनेशनल कम्पनियों में नौकरी मिली।  </p>
<p><strong>पेट्रोकैमिकल व पेट्रोलियम पिछड़ा</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में संचालित बीटेक पेट्रोकैमिकल व पेट्रोलियम इंजीनियरिंग ब्रांच का प्लेसमेंट रिकॉर्ड सबसे कम है। आरटीयू से मिले आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोकैमिकल इंजीनियरिंग में 8 वर्षों  में 40 बच्चों का ही प्लेसमेंट हुआ है। वहीं, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के 48 विद्यार्थियों को रोजगार मिला। हालांकि, इन क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। क्योंकि, यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्टूडेंटस वाकिफ नहीं हो रहे। वहीं, दोनों ब्रांच में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट वर्ष 2023 में  11-11 विद्यार्थियों को अच्छे पैकेज पर नौकरी मिली है। विशेषज्ञ बताते हैं, छात्र ब्रांच को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसकी वजह से अपेक्षाकृत कमजोर कॉलेज का चुनाव कर बैठते हैं। जिससे बेरोजगारी की समस्या पैदा होती है। </p>
<p><strong>6 से 45 लाख तक का मिला पैकेज</strong><br />छात्रों की शिक्षा को रोजगारपरख एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में आरटीयू लगातार नवाचार कर रहा है। गत वर्ष यूनिवर्सिटी कैम्पस में 150 से ज्यादा कम्पनियों को आमंत्रित कर प्लेसमेंट कैम्प लगाए गए। जिसमें 250 से ज्यादा स्टूडेंटस को जॉब के अवसर मिले। इनमें न्यूनतम 6 लाख से अधिकतम 44 लाख तक के पैकेज पर विद्यार्थियों को नौकरी मिली। वहीं, गत वर्ष 37 विद्यार्थियों की जलदाय विभाग में जेईएन के पद पर सरकारी नौकरी लगी है।  </p>
<p><strong>इन ब्रांचों में रोजगार अपार फिर भी बेरूखी</strong><br />आरटीयू से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं, प्रोडक्शन एंड इनडस्ट्रियल, पेट्रोकैमिकल व पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पिछले साल जयपुर की मयूर कॉटर्स कम्पनी आई थी। उन्हें 8 प्रोडक्शनल इंजीनियर चाहिए थे लेकिन यहां बच्चे भी ऐसे नहीं मिले, जिनके डाटा कम्पनी को भेज सके। आखिरकार 4 बच्चों का इंटरव्यू करवाया, जिसमें 2 स्टूडेंटस का सलेक्शन हुआ। इधर, एशिया की एचएलएस कम्पनी आरटीयू आई थी और पेट्रोलियम ब्रांच के विद्यार्थियों को शुरूआती 7.50 लाख का पैकेज आॅफर किया था। इन क्षेत्रों में रोजगार होते हुए भी विद्यार्थी भेड़चाल में फंसे हैं। जबकि, देश-विदेश की मल्टीनेशनल कम्पनियों को इन ब्रांचों के इंजीनियरों की जरूरत रहती है। </p>
<p><strong>यूं समझें 60 फीसदी का गणित</strong><br />आरटीयू में प्लेसमेंट के लिए आने वाली हर कम्पनी का अपना-अपना  क्राइट एरिया होता है। मान लीजिए एक ब्रांच में 100 स्टूडेंट हैं। कंपनी के क्राइटेरिया में 60 ही स्टूडेंट आ रहे हैं, तो 60 विद्यार्थी ही प्लेसमेन्ट के लिए एपीयर होंगे। 60 में से यदि 36 का सलेक्शन हो जाता है तो आरटीयू इसे करीब 60 प्रतिशत प्लेसमेंट मानता है। वास्तविकता में देखा जाए तो यह प्लेसमेंट 36 फीसदी ही होता है। </p>
<p><strong>कुलपति एसके सिंह ने दिए सवालों के जवाब </strong><br /><strong>सवाल : </strong> 1 हजार 46 बच्चों का प्लेसमेंट क्यों नहीं हो सका, क्या कारण मानते हैं?<br /><strong>जवाब : </strong>सभी विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत रोजगार दिलाना सभी के समक्ष कड़ी चुनौती है। रोजगार के परिदृश्य में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। नियोक्ता कंपनियों के भी कठोर चयन मापदंड है। रोजगार को लेकर विद्यार्थी की अपेक्षाएं, मनोवांछित वेतन, पसंदीदा कार्यक्षेत्र, कार्य की दशा, विद्यार्थी एवं रोजगार प्रदाता में आपसी समन्वय का आभाव और म्यूचुअल अंडरस्टेंडिंग जैसे कई कारक है, जो रोजागार और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। <br /><strong><br />सवाल : </strong>वंचित विद्यार्थियों को किस तरह से रोजगार से जोड़ेंगे?<br /><strong>जवाब : </strong>वंचित रहने वाले विद्यार्थियों को फिर से रोजगार में नियोजित करने के लिए भविष्य में और अधिक रोजगार मेलों का आयोजन व प्लेसमेंट कंपनियों से निरंतर संपर्क स्थापित कर रहे हैं। ताकि, उन्हें रोजगार में नियोजित कर मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। आरटीयू अपने हितधारक विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए संकल्पित है। <br /><strong><br />सवाल :</strong> पेट्रोकैमिकल व पेट्रोलियम ब्रांच में विद्यार्थियों का रूझान सबसे कम क्यों हैं?<br /><strong>जवाब : </strong>तकनीकी शिक्षा के बदलते परिदृश्य के साथ विद्यार्थी ब्रांच चयन के अन्य विकल्पों को तलाशने लगे हैं। इंजीनियरिंग की परंपरागत ब्रांचों लेकर विद्यार्थियों का झुकाव ज्यादा रहता है। वहीं, जागरूकता का आभाव, ब्रांच चयन के साथ ही भविष्य में रोजगार की स्थानीय संभावनाओं को तलाशना,रोजगार के सीमित और असीमित अवसर सहित कई कारण हैं जो ब्रांचों में प्रवेश की स्थिति को प्रभावित करते हैं। हालांकि पेट्रोकैमिकल व पेट्रोलियम इंजीनियरिंग ब्रांच में छात्रों का रूझान है। <br /><strong><br />सवाल : </strong> प्लेसमेंट नहीं होने वाले स्टूडेंट्स को रोजगार दिलाने की कोई कार्ययोजना है?<br /><strong>जवाब : </strong>हर विद्यार्थी विश्वविद्यालय परिवार का अभिन्न अंग है। रोजगार से वंचित रहे विद्यार्थियों को पुन: मुख्यधारा में लाने के लिए विवि का प्लेसमेंट विभाग विस्तृत कार्ययोजना पर कार्य कर रहा है। इसके तहत हम विभिन्न प्लेसमेंट कंपनियों, रोजगार प्रदाताओं से संपर्क स्थापित कर उनके नियोजन के समुचित प्रयास कर रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 15:08:57 +0530</pubDate>
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                <title>क्वालिटी इंडेक्ट वेल्यू रैंकिंग में एसकेआईटी अव्वल  </title>
                                    <description><![CDATA[ दूसरे स्थान पर पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तीसरे पर पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और जेईसीआरसी ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/skit-tops-in-quality-index-value-ranking/article-47182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/a.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) ने प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों की साल 2022-23 की रैंकिंग जारी की है। आरटीयू के क्वालिटी इंडेक्ट वेल्यू (क्यूआईवी) में गत वर्ष रहने वाले सभी निजी कॉलेजों की रैंकिंग यथावत है। <br /><br />रैंकिंग लिस्ट में जयपुर स्थित एसकेआईटी ने लगातार छठे साल पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं दूसरे स्थान पर पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तीसरे पर पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और जेईसीआरसी ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। टॉप 10 कॉलेजों की सूची में सभी कॉलेज जयपुर के हैं। वर्तमान में प्रदेश में आरटीयू के करीब 57 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रदेश में लगातार छठे साल इंजीनियरिंग कॉलेजों की रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त करना बेहद सुखद अनुभव है। ये एसकेआईटी की पूरी टीम की मेहनत और स्टूडेंट्स की लगन का नतीजा है। <br />- जयपाल मील, निदेशक, एसकेआईटी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 11:59:56 +0530</pubDate>
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                <title>ढाई साल से ताले में बंद 2 करोड़ की कैंटीन, भटक रहे विद्यार्थी</title>
                                    <description><![CDATA[ विद्यार्थी यूनिवर्सिटी परिसर में बनी गुमठी व बाहर की थड़ियों पर ही लंच व नाश्ता करने को मजबूर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/2-crore-canteen-locked-for-two-and-a-half-years--students-wandering/article-46881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/dhayi-saal-se-taale-me-band-2-crore-ki-canteen,-bhatak-rhe-vidyarthi...kota-news-27-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय स्टूडेंटस को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिलकुल इसके उलट है। इन दिनों शहर का तापमान 40 से 45 डिग्री चल रहा है, भीषण गर्मी और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं के बीच थड़ियों पर अल्पहार करने को मजबूर हैं। जबकि, आरटीयू में 2 करोड़ की लागत से बना कैफेटेरिया ढाई साल से धूल खा रहा है। इसका उद्घाटन भी हो चुका है, इसके बावजूद इसे शुरू नहीं किया गया। विश्वविद्यालय की कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आता है। एक तरफ करोड़ों की अत्याधुनिक कैंटिन सालों से ताले में बंद है। वहीं, दूसरी तरफ स्टूडेंटस व स्टाफ भीषण गर्मी में कैम्पस में बनी गुमटीनुमा कैंटिन या बाहर थड़ियों पर चाय नाश्ते के साथ गर्म हवाओं के थपेड़े खा रहे हैं। </p>
<p><strong>राज्यपाल ने किया था वर्चुअल उद्घाटन</strong><br />आरटीयू में कोरोनाकाल से पूर्व 2 करोड़ की लागत से कैफेटेरिया का निर्माण कार्य शुरू हुआ किया गया था, जो वर्ष 2020 में यह बनकर तैयार हुआ। इसके एक साल बाद वर्ष 2021 में राज्यपाल द्वारा वर्चुअली अत्याधुनिक कैंटिन का उदघाटन किया था। इसके बाद से ही करोड़ों का कैफेटेरिया धूल खा रहा है। विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्टाफ को चाय-नाशते के लिए झुलसा देने वाली गर्मी में इधर-उधर सड़कों पर भटकना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>प्रतिमाह किराया 1 लाख </strong><br />विश्वविद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीयू के नवनिर्मित कैफेटेरिया का 1 लाख रुपए प्रतिमाह किराया निर्धारित किया गया है। सालाना 12 लाख रुपए किराया व्यवहारिक नहीं होने से कोई भी व्यक्ति कैफेटेरिया का संचालन को तैयार नहीं हुआ। इसके अलावा जीएसटी व बिजली बिल अलग से देय होने के कारण किसी भी संवेदक ने टैंडर प्रक्रिया में भाग लिया। ऐसे में हाईटेक कैंटिन ढाई साल से धूल खा रही है। </p>
<p><strong>कैसे तय हुआ कैफेटेरिया का किराया</strong><br />सूत्रों ने बताया कि सरकारी इमारत को जब किराए पर दिया जाना होता है तो सरकारी एजेंसी से उस बिल्डिंग का वैल्यूवेशन कराया जाता है और उसी के आधार पर किराया तय होता है। आरटीयू में भी यही फॉर्मूला अपनाया गया। पीडब्ल्यूडी द्वारा कैफेटेरिया का स्टीमेट निकलवाया गया। अधिकारियों ने बिल्डप एरिया के हिसाब से कैफेटेरिया का एक लाख रुपए प्रतिमाह किराया निर्धारित किया, जो कि विश्वविद्यालय के लिहाज से अव्यवहारिक है। किसी भी व्यक्ति के लिए 12 लाख रुपए सालाना किराया वहन करना व्यवहारिक नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विश्वविद्यालय को नो प्रोफिट नो लॉस की तर्ज पर टैंडर प्रक्रिया अपनाकर विद्यार्थियों के हित में सुविधाएं उपलब्ध करवाना चाहिए, विवि की जिम्मेदारी है। </p>
<p><strong>अब आगे क्या</strong><br />विशेषज्ञ बताते हैं, नियमानुसार तीन बार टैंडर निकालने के बाद भी कोई रेस्पोंस नहीं आता है तो किराया दर घटाने के लिए मामला फाइनेंस कमेटी के समक्ष रखा जाता है। लेकिन, इसके लिए ठोस कारण बताना होता है। कैफेटेरिया का किराया बाजार दर से अधिक है। ऐसे में आरटीयू में यह किराया उचित नहीं है। फाइनेंस कमेटी के पास ही किराया दर घटाने की पावर होती है, क्योंकि इस कमेटी में विवि और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कमेटी के समक्ष मामले से जुड़े सभी पहलु पर चर्चा कर कोई निर्णय लिया जा सकता है। </p>
<p><strong>तीन बार निकाले टैंडर, नहीं आए एक भी आवेदन</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 से अब तक आरटीयू प्रशासन द्वारा कैफेटेरिया संचालन के लिए तीन बार टैंडर निकाले जा चुके हैं। इसके बावजूद कोई भी संवेदक कैंटिन चलाने को तैयार नहीं हुआ। हुआ यूं, जब-जब टैंडर निकाले तब आरटीयू द्वारा संवेदकों को 1 लाख रुपए प्रतिमाह किराया दर से अधिक बोली लगाने को कहा गया। सालाना 12 लाख किराया सुनकर किसी ने भी रुची नहीं दिखाई। सूत्र बताते हैं कि सालाना किराया के अलावा  जीएसटी और बिजली बिल अलग से व्यय करना होगा। आरटीयू की बदइंतजामी के चलते विद्यार्थियों को एयरकंडीशनर कैफेटेरिया की सुविधा होने के बावजूद लाभ नहीं मिल रहा। </p>
<p><strong>लू के थपेड़ों के बीच लंच करने की मजबूरी</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर बीटेक फाइनल इयर के विद्यार्थियों ने बताया कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद नवनिर्मित कैफेटेरिया को चालू नहीं किया जा रहा। जबकि, उद्घाटन तक हो चुका है। ऐसे में यूनिवर्सिटी परिसर में बनी गुमठी व बाहर की थड़ियों पर ही लंच व नाश्ता करना पड़ता है। इन दुकानों पर न तो गर्मी से बचाव के लिए कोई इंतजाम है और न ही पंखें ठीक से चलते हैं। मजबूरन भीषण गर्मी में झुलसा देने वाली गर्म हवाओं के थपेड़े खाने को मजबूर हो रहे हैं। कैफेटेरिया शुरू करवाने के लिए अधिकारियों से मांग भी की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। </p>
<p><strong>फीस लेने में ही दिखाते हैं फुर्ती</strong><br />एमबीए स्टूडे्ंट ने बताया कि कोई छात्र फीस भरने में एक दिन लेट हो जाए तो पैनल्टी लगा दी जाती है। जितनी फुर्ती फीस लेने में दिखाते हैं उतनी फुर्ती सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी दिखानी चाहिए। वहीं, बीटेक फाइनल इयर की छात्रा ने कहा, हमें तीन साल हो गए इसके बावजूद कैफेटेरिया का लाभ नहीं मिला। इसके अलावा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुविधाओं का भी अभाव है।</p>
<p><strong>एक-दूसरे पर ढोल रहे जिम्मेदारी</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में कंट्रेक्शन से संबंधित काम सम्पदा प्रभारी के अधीन होते हैं। कैफेटेरिया संचालित क्यों नहीं हो पा रही, इससे संबंधित सवालों के जवाब भी वहीं देंगे। मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं। <br /><strong>-प्रो. एसके सिंह, वाइस चांसलर, आरटीयू</strong></p>
<p>किसी भी तरह के सवालों के जवाब विश्वविद्यालय के वीसी देंगे। मैं कोई भी जवाब नहीं दूंगा। <br /><strong>- साकेत माथूर, सम्पदा प्रभारी, आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 May 2023 15:00:12 +0530</pubDate>
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                <title>एयर क्राफ्ट की दुनिया में धूम मचाएगा कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय-कोटा की एयरोनॉटिल ब्रांच को एनबीए से मान्यता मिल चुकी है। अब एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री की अहमियत इंटरनेशनल लेवल की होगी। जो विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय मुकाम हासिल करने में मददगार होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-will-make-a-splash-in-the-world-of-aircraft/article-41405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/aircraft-ki-duniya-mei-dhoom-machayega-kota...kota-news..1.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कल्पनाओं को हकीकत में बदलने कुव्वत शिक्षा नगरी की रगों में बसी है। उच्च शिक्षा में धाक जमाने के बाद अब एयर क्राफ्ट की दुनिया में भी कोटा धूम मचाएगा। यहां से उत्तीर्ण ऐरोनोटिकल इंजीनियर देश-विदेश में हवाई जहाज बनाने से लेकर मिसाइलों का मेकेनिज्म भी डवलप कर सकेंगे।  वहीं, कोटा में प्रस्तावित ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट के निर्माण के बाद हवाई सेवा शुरू हो जाएगी। ऐसे में आरटीयू के एयरोनॉटिकल स्टूडेंट्स को बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। दरअसल, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय-कोटा की एयरोनॉटिल ब्रांच को एनबीए से मान्यता मिल चुकी है। अब एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री की अहमियत इंटरनेशनल लेवल की होगी। जो विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय मुकाम हासिल करने में मददगार होगी। वहीं, रोजगार के बेहतर अवसर मिलने के साथ सुनहरे भविष्य का सपना भी साकार हो सकेगा। हालांकि, आरटीयू के पासआउट छात्र वर्तमान में देश-विदेश में एयरलाइंस कम्पनियों में कार्यरत हैं। </p>
<p><strong>क्या है एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग </strong><br />इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एयरोनॉटिकल सबसे चुनौतिपूर्ण व रोमांचक फिल्ड माना जाता है। इसमें हवाई जहाजों की डिजाइनिंग, निर्माण, परीक्षण, डिजाइन, स्पेस रिसर्च, डिफेन्स टेक्नोलॉजी, कमर्शियल व मिलिट्री एयर क्राफ्ट के पुर्जे, मशीनरी, अंतरिक्ष यान, मिसाइलों का डेवलपमेंट किया जाता है। इस क्षेत्र में कुशल  इंजीनियरों की काफी डिमांड है। यह फील्ड उन लोगों के लिए सबसे पसंदीदा आॅप्शन में से एक है जो इंजीनियरिंग में बड़े मौके की उम्मीद में रहते हैं।</p>
<p><strong>क्वालिटी एजुकेशन का मुद्दा उठाता रहा है नवज्योति</strong><br />उच्च शिक्षा जगत में क्वालिटी एजुकेशन का गिरता स्तर पर दैनिक नवज्योति ने चिंता जताते हुए शिक्षा की गुणवत्ता बरकरार रखने को लगातार अभियान चलाया था।  वहीं  सरकार, शिक्षा आयुक्तालय, शिक्षा मंत्री व शिक्षाविद्वों का ध्यान आकर्षित किया था। स्टूडेंट्स को सिर्फ डिग्री ही नहीं रोजगार के लायक भी बनाएं। इसी दिशा में आरटीयू ने अपनी तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस किया। इसी का नतीजा है कि एयरोनॉटिकल को एनबीए से मान्यता मिली है। </p>
<p><strong>एनबीए मतलब क्वालिटी </strong><br />उच्च शिक्षण संस्थान में संचालित कोर्सेज की क्वालिटी मेंटेन रखने के लिए नेशनल बोर्ड आॅफ एक्रीडेशन (एनबीए) की मान्यता जरूरी होती है। मान्यता प्राप्त करने के लिए संबंधित संस्थान को बोर्ड के 10 क्वालिटी मापदंडों पर खरा उतरना पड़ता है। मान्यता इस बात का सूचक है कि वैश्विक स्तर कॉलेज व यूनिवर्सिटी की शिक्षा गुणत्तापूर्ण है। </p>
<p><strong>मिसाइल डिजाइन कर रहे आरटीयू स्टूडेंट्स</strong><br />प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी ने बताया कि आरटीयू राजस्थान का पहला ऐसा कॉलेज है जहां एयरोनोटिकल ब्रांच संचालित होने के साथ एनबीएस से मान्यता मिली है। वर्ष 2011 में यह ब्रांच शुरू की गई थी। वर्तमान में एयरलाइंस का तेजी से विस्तार हो रहा है। 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग एयर लाइन से सफर करते हैं। ट्रैवलिंग जितनी ज्यादा बढ़ेगी, उतने ही एयरोनॉटिकल इंजीनियर की डिमांड बढ़ेगी। आरटीयू के कई पासआउट स्टूडेंट्स देश-विदेशों में एयरलाइंस, रक्षा अनुसंधान, डीआरडीओ सहित प्राइवेट सेक्टर में अच्छे पैकेज पर जॉब कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कनाड़ा और पेरिस के अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में मिसाइल डिजाइन कर रहे हैं। </p>
<p><strong>एनबीए से क्या होगा फायदा </strong><br />डीन फैकल्टी अफेयर प्रो एके द्विवेदी ने बताया कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को वर्ष जुलाई 2023 से जून 2026 तक 3 साल के लिए एनबीए मान्यता मिली है। मान्यता मिलने से जहां एक ओर आरटीयू की ख्याती वैश्विक स्तर पर शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित होगी। वहीं, विद्यार्थियों की डिग्री की क्वालिटी बढ़ जाएगी। देश-विदेश की नामी कम्पनियां अच्छे पैकेज पर जॉब आॅफर करती है। यदि, किसी कम्पनी में जॉब के लिए 50 जनों ने एप्लाई किया लेकिन पहली प्राथमिका एनबीए मान्यता प्राप्त संस्थान के स्टूडेंट्स को ही मिलेगी। क्योंकि, कम्पनियों का माइंड सेट होता है। एनबीए पूरे विश्व में क्वालिटी एजुकेशन का सूचक है। </p>
<p><strong>पासआउट विद्यार्थियों का क्या होगा </strong><br />ऐरोनोटिकल के कोआॅर्डिनेटर प्रो. एस.एस. गोदारा के अनुसार, मान्यता मिलने से पहले पासआउट विद्यार्थी जब नामी कम्पनियों में एप्लाई करते थे तो , कुछ कम्पनियां महत्वपूर्ण पदों पर रिक्यूमेंट नहीं करती थी। हालांकि, डिग्री में कहीं भी मान्यता का जिक्र नहीं होता है। केवल, विवि का नाम एनबीए की सूची में शामिल होता है। इंटरव्यू के दौरान कम्पनियां इसी सूची को देखती है कि विद्यार्थी ने इंजीनियरिंग किस विवि या कॉलेज से किया है। मान्यता मिलने का फायदा नए विद्यार्थियों के साथ पास आउट  स्टूडेंट्स को भी होगा। जब, वे इंटरव्यू के लिए एप्लाई करेंगे एनबीए की सूची में शामिल होने से प्राथमिकता से उन्हें जॉब मिल सकेगी। </p>
<p><strong>कोटा में एयरपोर्ट शुरू होने पर मिलेगा रोजगार</strong><br />शहर के शंभूपुरा में ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट बनना प्रस्तावित है। एयरपोर्ट बनने के बाद कोटा से हवाई सेवा शुरू हो जाएगी। ऐसे में विभानों का मेंटिनेंस, डिजाइन, मशीनरी सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए एयरोनॉटिकल इंजीनियरों की डिमांड बढ़ेगी और आरटीयू के स्टूडेंट्स को बेहतर पैकेज पर जॉब के अवसर प्राप्त होंगे। वर्तमान में विश्वविद्यालय के कई छात्र एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया में कार्यरत हैं। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में डिमांड अधिक  </strong><br />एयरोनॉटिकल डिपार्टमेंट के हैड प्रो.आनन्द चतुर्वेदी ने बताया कि एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण ब्रांच है। इसमें विद्यार्थियों को एयरक्राफ्ट के मैकेनिज्म के बारे में पढ़ाया जाता है। एयरोनॉटिकल इंजीनियर एयरक्राफ्ट का निर्माण करने से लेकर मिसाइल बनाने तक का काम करते हैं। ऐसे इंजीनियर्स को डिफेंस सर्विस एवं विमान इंडस्ट्री अच्छे पैकेज पर हायर करती है।  उन्होंने बताया कि एयरलाइंस, रक्षा अनुसंधान और अंतरिक्ष विज्ञान सहित कई क्षेत्रों में एयरोनॉटिकल इंजीनियर की डिमांड अधिक है।  </p>
<p><strong>फिजिक्स केमेस्ट्री और मैथ्स पर पकड़ जरूरी</strong><br />एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने के लिए छात्रों का फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स पर अच्छी पकड़ होना जरूरी है। इसके अलावा मैनुअल, नार्मल कलर विजन, फिजिकल फिटनेस, टेक्नीकल और मेकेनिकल एप्टीट्यूड, स्पेसक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट उपकरण के लिए जुनून होना चाहिए।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्टूडेंट्स </strong><br />एयरोनॉटिकल ब्रांच के पास आउट स्टूडेंट रोहित पांडे का कहना है, एनबीए की मान्यता मिलना छात्र के कॅरियर में मील का पत्थर है। निश्चित रूप से जॉब के अवसर बढ़ेंगे। देश-विदेश में आरटीयू के छात्रों की वैल्यू बढ़ जाएगी। पांडे वर्तमान में लखनऊ में मल्टीनेशनल कम्पनी में कार्यरत हैं।  नई दिल्ली में फ्लाइट सेफ्टी इंजीनियर प्रशांत कुमार जांगिड ने बताया कि यूनिवर्सिटी को मान्यता मिलने से नियमित छात्रों के साथ हमारे जैसे पासआउट विद्यार्थियों के लिए भी एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे। अब महत्वपूर्ण पदों पर स्टूडेंट्स की पहुंच आसान हो जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरटीयू के एयरोनॉटिकल ब्रांच को विश्वस्तर पर पहचान मिली है। एनबीए की मान्यता, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को अंतरराष्टÑीय स्तर पर प्रदर्शित करती है। स्टूडेंट्स को देश ही नहीं विदेशों में भी रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही उनकी स्किल, नॉलेज और रिसर्च मजबूत होगी। स्टूडेंट्स के लिए तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अवसर की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से कई संस्थाओं के साथ एमओयू किया गया है। कम्पनी के नियोक्ता एनबीए की मान्यता को अधिक महत्व देते हैं। ऐसे में आरटीयू के छात्र हर क्षेत्र में उच्च मुकाम हासिल कर सकेंगे। <br /><strong>-डॉ. एसके सिंह, कुलपति आरटीयू </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Apr 2023 15:38:24 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीयू के प्रोफेसर सहित तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश </title>
                                    <description><![CDATA[आरोपियों के मोबाइल तथा उत्तर पुस्तिकाओं में हस्ताक्षर के नमूनों को लेकर एफएसएल जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/challan-presented-in-the-court-against-the-three-accused-including-rtu-professor/article-37773"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/whatsapp-image-2023-02-20-at-13.48.10.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। परीक्षा में पास करने की एवज में छात्राओं से अस्मत मांगने के मामले में सोमवार को एसआईटी ने आरटीयू के  प्रोफेसर गिरीश  परमार, छात्र अर्पित अग्रवाल और छात्रा ईशा यादव के खिलाफ न्यायालय में कड़ी सुरक्षा के बीच चालान पेश किया । एसआईटी अनुसंधान अधिकारी एवं डिप्टी एसपी अमर सिंह राठौड़ ने बताया कि अनुसंधान के दौरान आरोपियों के खिलाफ 37 गवाहों तथा करीब 300 से 400 दस्तावेज सहित 4 200 पेज का का खाका तैयार किया गया ।अनुसंधान के दौरान करीब 80 अश्लील वीडियो , 30 आडियो स्क्रिप्ट तैयार कर न्यायालय में पेश की गई । इसके साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं में की गई हेराफेरी के संबंध में भी जप्त किए गए दस्तावेजों को चालान के साथ पेश किया गया । आरोपियों के मोबाइल तथा उत्तर पुस्तिकाओं में हस्ताक्षर के नमूनों को लेकर एफएसएल जांच के लिए भेज दिया गया है । जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा । उन्होंने बताया कि आरोपियों के बीच आपस में की गई वार्ता की वॉइस सैंपलिंग के लिए न्यायालय में पेश किया गया था लेकिन आरोपियों ने वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 14:23:39 +0530</pubDate>
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