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                <title>Climate Change - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Climate Change RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ह्यूमिड हीटवेव सेहत के लिए बेहद खतरनाक, कुछ ही घंटों में हो सकता है हीटस्ट्रोक : अध्यन्न</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिकों ने केरल के तटीय क्षेत्रों में ह्यूमिड हीटवेव (उमस भरी लू) को लेकर अलर्ट जारी किया है। अध्ययन के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश रुकने पर गर्मी और नमी का जानलेवा मेल हीटस्ट्रोक का कारण बन सकता है। पसीना न सूखने से शरीर ठंडा नहीं हो पाता, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/humid-heatwave-is-very-dangerous-for-health-heatstroke-can-occur/article-150985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/heatwave.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वैज्ञानिकों ने एक जरूरी चेतावनी जारी की है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, मानसून के दौरान जब बारिश रुकती है, तो उस समय पड़ने वाली उमस भरी गर्मी (ह्यूमिड हीटवेव) सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। ब्रिटेन की 'यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग' के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में की गयी एक रिसर्च में बताया गया है कि तटीय क्षेत्रों में अब केवल बढ़ता तापमान ही बड़ी बात नहीं है, बल्कि गर्मी और नमी का जो मेल बन रहा है, वह शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।</p>
<p>आम तौर पर चलने वाली लू के मुकाबले यह उमस वाली गर्मी इसलिए ज्यादा घातक है क्योंकि हवा में नमी अधिक होने की वजह से शरीर का पसीना नहीं सूख पाता। जब पसीना नहीं सूखता, तो शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। ऐसे में तापमान बहुत ज्यादा न होने पर भी इंसान को कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक हो सकता है या दिल पर दबाव बढ़ सकता है। अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. अक्षय देवरस ने बताया कि केरल के तटीय जिले अंदरूनी इलाकों के मुकाबले इस खतरे की चपेट में ज्यादा हैं। खासकर जब मानसून के दौरान बारिश का दौर थमता है, तब यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।</p>
<p>इस खतरे को मापने के लिए वैज्ञानिकों ने 'वेट-बल्ब' तापमान का इस्तेमाल किया है। यह एक ऐसा पैमाना है जो बताता है कि गर्मी और नमी का स्तर कब इतना बढ़ गया है कि पसीना निकलना भी बेकार हो जाए और इंसान की जान जोखिम में पड़ जाए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऐसी उमस वाली गर्मी का पता करीब एक महीना पहले ही लगाया जा सकता है। अगर प्रशासन को इसकी जानकारी समय पर मिल जाए, तो वह बचाव के इंतजाम कर सकता है।</p>
<p>इस समय का उपयोग अस्पतालों में तैयारी करने, आम लोगों के लिए 'कूलिंग सेंटर' बनाने, स्कूलों के समय में बदलाव करने और बिजली की सप्लाई बेहतर करने के लिए किया जा सकता है। यह पूरी रिपोर्ट 1940 से 2023 तक के यानी पिछले 84 सालों के मौसम और बारिश के आंकड़ों को परखने के बाद तैयार की गई है। वैज्ञानिकों ने मानसून के आने और रुकने के सैकड़ों चरणों का बारीकी से विश्लेषण किया है। इस खास शोध में 'यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स', 'यूके मेट ऑफिस' और भारत के 'उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान' ने भी हाथ बटाया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में लोग लू के बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस उमस भरी गर्मी को गंभीरता से नहीं लेते। जबकि यह कहीं ज्यादा जानलेवा हो सकती है। इसलिए इसके प्रति लोगों को जागरूक करना और सही सरकारी नीतियां बनाना बहुत जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान : इस साल सामान्य से कम रहेगी बारिश, अल नीनो बदल सकता है हालात</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम (एलपीए का 92%) रहने की संभावना है। अल नीनो के प्रभाव और उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी के चलते बारिश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विभाग मई के अंत में क्षेत्रवार वर्षा का सटीक अपडेट जारी करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/meteorological-department-estimates-that-rainfall-will-be-less-than-normal/article-150326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rain.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया है जिसके अनुसार इस साल देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि मौसम विभाग के मुताबिक, 2026 में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्ष 1971-2020 के आधार पर एलपीए 87 सेमी है। इस आधार पर कुल वर्षा 90-95 प्रतिशत के बीच, यानी ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में रहने का अनुमान है।</p>
<p>मौसम विभाग ने बताया कि इस बार कमजोर ला नीना जैसे हालात धीरे-धीरे समाप्त होकर तटस्थ स्थिति में बदल रहे हैं। हालांकि, अल नीनो मानसून के दौरान विकसित होने की संभावना भी जताई गई है, जो वर्षा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन मानसून के अंत तक इसके पॉजिटिव होने के संकेत हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में वर्षा पर असर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>उत्तरी गोलार्ध में कम रहेगा बर्फ का विस्तार </strong></p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का विस्तार सामान्य से थोड़ा कम रहा। आमतौर पर यह कारक मानसून वर्षा के साथ उलटा संबंध रखता है, यानी कम बर्फ का मतलब मानसून पर नकारात्मक असर हो सकता है।</p>
<p><strong>दो चरणों में जारी किया जाता है पूर्वानुमान</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मानसून पूर्वानुमान दो चरणों में जारी किया जाता है। अप्रैल में पहला चरण और मई के अंत में अपडेटेड पूर्वानुमान जारी किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रवार वर्षा का अधिक विस्तृत आकलन होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 11:59:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देर रात तक रुक-रुक कर बारिश : तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट, आज भी जयपुर सहित कई जगहों पर जारी रह सकता है बारिश का दौर</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी विक्षोभ के चलते जयपुर, नागौर और टोंक सहित कई जिलों में तेज अंधड़ के साथ बारिश और ओले गिरे। फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है और तापमान में 7 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के सक्रिय होने से इस साल मानसून कमजोर रह सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/intermittent-rain-till-late-night-drop-in-temperature-up-to/article-149484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairpu-rain.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण जयपुर सहित कई जिलों में मंगलवार सुबह से ही मौसम में बदलाव हुआ। जयपुर में सुबह बादल छाए और फिर बारिश हुई। दोपहर में एक बार फिर धूप खिली फिर शाम को बारिश का दौर शुरू हुआ जो रुक-रुक कर देर रात तक बूंदाबांदी के रूप में चलता रहा। नागौर में तेज अंधड़ के साथ बारिश हुई और चने के आकार के ओले भी गिरे। यहां तेज तूफान के कारण कई पेड़ और बिजली पोल गिर गए। फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा। टोंक और श्रीगंगानगर में भी तेज बारिश के साथ ओले गिरे। जैसलमेर, अजमेर, जोधपुर, सीकर, बांसवाड़ा सहित कई जिलों में बारिश हुई। सीकर-झुंझुनूं में भी तेज अंधड़ के साथ ओले और उदयपुर-प्रतापगढ़ में अंधड़ के साथ बारिश हुई। अलवर में तेज देर शाम तेज बारिश हुई। बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश फलोदी में 42 एमएम दर्ज की गई। </p>
<p><strong>आज भी रहेगा पश्चिमी विक्षोभ का असर </strong></p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा। जिसके भरतपुर, जयपुर संभाग के उत्तरी भागों में हल्की बारिश की संभावना है। वहीं 9 अप्रेल से तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी होने की संभावना है। बारिश के कारण तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट आई है। इस बीच अधिकांश जिलों में तापमान 30 डिग्री या उसके आसपास ही दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>इस बार मानसून के कमजोर रहने के आसार</strong></p>
<p>मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बीते करीब 20 दिन में एक्टिव हुए 6 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम गर्म नहीं हो सका है। इसका असर आने वाले मानसून सीजन पर पड़ने की आशंका है। एक्सपर्ट के अनुसार मानसून को कई फैक्टर प्रभावित करते हैं। यदि गर्मी तेज पड़ती है और समुद्र का तापमान सामान्य से नीचे रहता है तो मानसून अच्छा रहता है। हालांकि इस बार स्थिति विपरीत हो सकती है। बार-बार बारिश से धरती का तापमान सामान्य से नीचे है। वहीं समुद्र का तापमान फिलहाल सामान्य है लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। जुलाई-अगस्त के बीच अल-नीनो के सक्रिय होने की संभावना 60 से 80 फीसदी के बीच है। इसका प्रभाव कम बारिश के तौर पर सामने आ सकता है। क्योंकि जुलाई में ही मानसून में सबसे ज्यादा बरसात होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 09:21:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार करेगी वन क्षेत्र और जानवरों की सुरक्षा मजबूत: पांच रेस्क्यू वाहनों और 460 मोटरसाइकिलों को दिखाई हरी झंडी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में वन मंत्री संजय शर्मा ने 'फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स' थीम पर वन्यजीवों के लिए 5 रेस्क्यू वाहन और 460 मोटरसाइकिलें रवाना कीं। शाहपुरा में अटल वन का उद्घाटन और ₹30 करोड़ की लागत से 20 प्रे-बेस आॅगमेंटेशन सेंटर की शुरुआत हुई। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राजीविका के साथ एमओयू और डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डिजीवन' भी लॉन्च किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-strengthen-the-protection-of-forest-areas-and-animals/article-147425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sanjay-saharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में शनिवार को फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स थीम पर आरआईसी के सभागार में हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री की ओर से कई महत्वपूर्ण पहल की गई। कार्यक्रम में वन्यजीवों के लिए पांच रेस्क्यू वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई। वन क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 460 मोटरसाइकिलों को भी रवाना किया गया। इस अवसर पर जयपुर के शाहपुरा तहसील में विकसित अटल वन का उद्घाटन भी किया। लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस वन में इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉकिंग ट्रेल, वॉच टावर, सोलर फेसिंग तथा जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अनेक नवाचार शामिल हैं। कार्यक्रम में एक पेड़ मां के नाम अभियान पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ। वनमित्रों को पेट्रोलिंग किट भी वितरित की गई। </p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन को लेकर समझौता</strong></p>
<p>जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवा संवर्धन परियोजना के अंतर्गत राजीविका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। वन प्रबंधन में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए डिजीवन डिजिटल प्लेटफॉर्म के नए मॉड्यूल को भी लाइव किया गया, जिससे वन्यजीव आवास निगरानी एवं कार्बन क्रेडिट प्रबंधन में सहायता मिलेगी। राजस्थान राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी हुआ। </p>
<p>20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन </p>
<p>वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 30 करोड़ की लागत से कोटा, बारां, पाली, सिरोही, चुरू, मुकुंदरा तथा अजमेर के प्रोटेक्टेड क्षेत्र में 20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। साथ ही 6 वन चौकियों, 2 बैरकों एवं 1 क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय तथा 7 नई नर्सरियों का भी लोकार्पण की गया। कार्यक्रम में विधायक गोपाल शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आनन्द कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय सहित संबंधित विभाग के अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:35:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण का किया आह्वान, देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और यह हमारे ग्रह के भविष्य को तय करता है। भारत की 18% आबादी के पास केवल 4% मीठा पानी है, इसलिए जल जीवन मिशन और वर्षा जल संचयन जैसे सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-called-for-water-conservation-on-world-water-day/article-147413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का आग्रह किया और जीवन को बनाए रखने और ग्रह के भविष्य को आकार देने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में, प्रधानमंत्री ने ज़िम्मेदार उपयोग और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल हमारा जीवन है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। उन्होंने देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने और उसका ज़िम्मेदारी से उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस अवसर पर सतत जल प्रबंधन की दिशा में कार्य कर रहे लोगों एवं समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज का दिन उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है जो सतत प्रथाओं में संलग्न हैं, जागरूकता को बढ़ावा देते हैं और संरक्षण की संस्कृति को पोषित करते हैं।”</p>
<p>विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक जल संकट और मीठे जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष विश्व की सरकारें, संगठन और समुदाय इस दिन का उपयोग जल संबंधी चुनौतियों, जैसे कि जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।</p>
<p>भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन इसके पास विश्व के मीठे पानी के संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है और इसके कई क्षेत्रों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन जैसी सरकारी पहलों और बारिश जल संचयन और कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने वाले अभियानों ने इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है लेकिन विशेषज्ञ जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल देते हैं।</p>
<p>जलवायु विषमता के तीव्र होने और पानी की मांग बढ़ने के साथ, संरक्षण की आवश्यकता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है और नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों से इस आवश्यक संसाधन की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आसमान में छाए बादल: कुछ स्थानों पर हुई बारिश से तापमान में गिरावट, वातावरण में ठंडक महसूस की गई</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी विक्षोभ के असर से जयपुर समेत प्रदेशभर में शनिवार को मौसम सुहावना रहा। बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हुई हल्की बारिश से तापमान में 4°C तक की गिरावट दर्ज की गई। ठंडी हवाओं ने वातावरण में ठंडक घोल दी है, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है। आगामी 24 घंटों में और वर्षा की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-the-effect-of-western-disturbance-clouds-appeared-in/article-147381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/frdq8zbpetwndrv9r3hypp-1920-80.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। शनिवार को सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे, जिससे वातावरण में ठंडक महसूस की गई। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादलों की आवाजाही बनी हुई है।</p>
<p>कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया है। जयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में भी बादलों की घिरावट के साथ हल्की बूंदाबांदी देखी गई। बारिश के चलते अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी दर्ज की गई है। वहीं, ठंडी हवाओं के चलने से सुबह और शाम के समय हल्की ठंड का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भी कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना जताई है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से फसलों को फायदा हो सकता है, लेकिन लगातार बारिश होने पर कुछ नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। फिलहाल, मौसम के इस बदले मिजाज से आमजन को गर्मी से राहत मिली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी ने अभी से किया बेहाल: बाड़मेर-जैसलमेर में पारा 40 डिग्री के करीब पहुंचा, अब लू का अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में एंटी साइक्लोन सिस्टम के कारण गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है। बाड़मेर में पारा 39.8 डिग्री तक पहुँच गया है, जो सामान्य से 9 डिग्री अधिक है। मौसम विभाग ने पश्चिमी राजस्थान में लू (Heatwave) की चेतावनी जारी की है। हालांकि, 11-12 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ से हल्की बारिश और तापमान में गिरावट की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-heat-has-already-made-you-miserable-the-mercury-reached/article-145670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/heat-wave.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में गर्मी का सितम मार्च के पहले हफ्ते से ही शुरू हो गया है। इस समय ऐसी गर्मी पड़ रही जो कि अमूमन अप्रेल के मध्य में पड़ती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अरब सागर में बने एंटी साइक्लोन सिस्टम जो कि लंबे समय से एक्टिव है, उसके कारण राजस्थान समेत गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में समय से पहले गर्मी की शुरुआत हुई है। इस बीच पश्चिमी राजस्थान में पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच गया है। </p>
<p>शनिवार को बाड़मेर में सबसे ज्यादा 39.8 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। वहीं जैसलमेर में 39.3 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। ऐसे में यहां झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है और अब मौसम विभाग ने इन इलाकों में हीटवेव यानी लू का अलर्ट भी जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ेगा जो कि आमजन के लिए चिंता का कारण बन सकता है। इधर जयपुर सहित अधिकांश जिलों मे पारा 36 डिग्री के पार दर्ज किया गया। जयपुर में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। वहीं पिलानी, चित्तौड़, जोधपुर, फलौदी, बीकानेर, श्रीगंगानगर और पाली में 38 डिग्री के पार तापमान दर्ज किया गया। जो की सामान्य से 4 से 9 डिग्री ज्यादा है।</p>
<p><strong>अब चलेगी लू</strong></p>
<p>मौसम विभाग केन्द्र जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों तापमान और बढ़ेगा वहीं दक्षिण-पश्चिम भागों में 10-11 मार्च को हीटवेव की संभावना है। वहीं राज्य के शेष अधिकांश भागों में आगामी तीन-चार दिन अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री ऊपर रहने की प्रबल संभावना है। वहीं 11-12 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ भागों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से कहीं कहीं बारिश हो सकती है और तापमान में हल्की गिरावट होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 15:15:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में पारा 40 डिग्री के नजदीक: अभी और बढ़ेगा तापमान, जानें क्यों बढ़ी अचानक इतनी गर्मी ?</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में अरब सागर में बने एंटी-साइक्लोन के कारण भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। बाड़मेर में तापमान 39 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जबकि जयपुर और अजमेर में भी पारा चढ़ा है। मौसम विभाग ने 8-10 मार्च के दौरान पश्चिमी जिलों में भीषण लू और तापमान में 2-3 डिग्री की और बढ़ोतरी का अलर्ट जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-temperature-reached-near-40-degrees-in-the-state-and/article-145352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/temp.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। पारा 40 डिग्री के पास पहुंच गया है और आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। अरब सागर में एंटी साइक्लोन बनने से राजस्थान में गर्मी तेज हो गई। पश्चिम से तेज गर्म हवा चलने से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में झुलसाने वाली गर्मी शुरू हो गई। बुधवार को बाड़मेर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के नजदीक आ गया। इधर जयपुर, अजमेर, चूरू, उदयपुर में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज हुआ। वहीं, रात में इसके उलट ठंडक अच्छी है। कई शहरों का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हो रहा है। जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले दो से तीन दिनों में राज्य में तापमान में और बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। जिससे पश्चिमी जिलों में गर्म हवा चलने का अलर्ट है</p>
<p><strong>क्यों बढ़ी अचानक इतनी गर्मी?</strong></p>
<p>मौसम विशेषज्ञों ने बताया- राजस्थान में गर्मी बढ़ने के पीछे बड़ा कारण गुजरात-पाकिस्तान से लगते अरब सागर में एंटी साइक्लोन का बनना है। इस सिस्टम में हवाएं घड़ी की दिशा में घुमती हुई आसमान से धरती की तरफ तेजी से नीचे आती है।</p>
<p>इससे हाइ-प्रेशर क्रिएट होता है। इस सिस्टम के बनने से आसमान बिल्कुल साफ रहता है। अरब सागर में एंटी साइक्लोन का बनने से हवा भी घूमकर पाकिस्तान से होते हुए राजस्थान की तरफ सीधी प्रवेश कर रही है। जिसके कारण राजस्थान के साथ गुजरात और महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश में तापमान बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या?</strong></p>
<p>वर्तमान में गुजरात व आसपास के लगने वाले अरब सागर क्षेत्र के ऊपर एक प्रति चक्रवाती (Anticyclonic circulation) तंत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने और तापमान में और 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ोतरी होने की संभावना है।  राज्य में आगामी एक सप्ताह के दौरान अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री ऊपर जारी रहने तथा दक्षिण-पश्चिमी भागों में 8-10 मार्च के दौरान कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज होने की प्रबल संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-temperature-reached-near-40-degrees-in-the-state-and/article-145352</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 17:52:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायसीना डायलॉग 2026: पीएम मोदी आज शाम करेंगे उद्घाटन, 110 देशों के प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा, सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज नई दिल्ली में 11वें रायसीना डायलॉग का शुभारंभ करेंगे। फिनलैंड के राष्ट्रपति मुख्य अतिथि होंगे। "संस्कार: दृढ़ता, समायोजन और प्रगति" विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 110 देशों के प्रतिनिधि भू-राजनीति, जलवायु और व्यापार जैसे वैश्विक संकटों पर मंथन करेंगे। यह भारत का प्रमुख रणनीतिक मंच है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-will-inaugurate-raisina-dialogue-this-evening-representatives-from/article-145344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार शाम भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र के मुद्दों पर आधारित प्रतिष्ठित 11वें रायसीना डायलॉग का यहां उद्घाटन करेंगे। फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्ज़ेंडर स्टब तीन दिवसीय संवाद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और मुख्य भाषण देंगे।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया कि संवाद सम्मेलन में 110 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, सांसद, सैन्य कमांडर, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पत्रकार, रणनीतिक मामलों के विद्वान, प्रमुख थिंक टैंकों के विशेषज्ञ और युवा शामिल होंगे।</p>
<p>रायसीना डायलॉग भारत का प्रमुख सम्मेलन है, जो भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर केंद्रित है और इसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाती है। 11वें रायसीना डायलॉग में 2026 संस्करण का विषय "संस्कार – दृढ़ता, समायोजन और प्रगति" है।</p>
<p>तीन दिनों के दौरान विश्व के नीति-निर्माता और विचारक प्रमुख विषयगत स्तंभों के अंतर्गत विभिन्न प्रारूपों में चर्चा करेंगे। इनमें विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीयता और परिधि साझा संसाधनों : नए समूह, नए संरक्षक, नए रास्ते अंतिम घड़ी: जलवायु, संघर्ष और देरी की कीमत टैरिफ के दौर में व्यापार: पुनर्प्राप्ति, लचीलापन और पुनर्निर्माण शामिल हैं।</p>
<p>लगभग 110 देशों के 2700 प्रतिभागी इस संवाद में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे, और इसकी कार्यवाही को दुनिया भर में विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों लोग देखेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:14:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिली के जंगलों में आग लगने से अब तक 18 लोगों की मौत, हजारों बेघर, इमरजेंसी घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[चिली के बायोबियो और नुब्ले क्षेत्रों में भड़की भीषण आग से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक ने चेतावनी दी है कि मृतक संख्या और बढ़ सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/18-people-dead-so-far-due-to-fire-in-chiles/article-140072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/chili-forest-fire.png" alt=""></a><br /><p>सैंटियागो। चिली के राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक ने रविवार को कहा कि देश के दक्षिण-मध्य क्षेत्र में लगी भीषण आग से मरने वालों की संख्या 18 हो गई है और इसमें और वृद्धि होने की आशंका है। सैंटियागो से लगभग 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बायोबियो क्षेत्र के कॉन्सेप्सियन में पत्रकारों से बात करते हुए बोरिक ने कहा, आज हमारे पास 18 मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन दुर्भाग्य से हमें यकीन है कि यह आंकड़ा बढ़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार अकेले बायोबियो में लगभग 300 घर नष्ट हो गए हैं और चेतावनी दी कि अंतिम संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। अधिकारियों ने शनिवार शाम से पेन्को, नासिमिएंटो और लाजा नगरपालिकाओं में कफ्र्यू लगा दिया, जबकि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक लिरकेन में कफ्र्यू पहले ही शुरू हो गया था और आग से लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र प्रभावित होने के बाद अनिश्चित काल के लिए जारी है।</p>
<p>राष्ट्रीय वानिकी निगम के अनुसार, चिली में वर्तमान में 14 सक्रिय वन आग की घटनाओं के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जिससे देशभर में 24,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जल चुका है। सबसे भीषण आग कॉन्सेप्सियन में लगी है, जिससे 10,600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित हुआ है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बोरिक ने नुब्ले और बायोबियो क्षेत्रों में आपदा की स्थिति घोषित कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 13:05:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सांसों पर 'आफत काल: दिल्ली में कोहरे-ठंड के बीच वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी के साथ ग्रैप-4 लागू</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में वायु गुणवत्ता 439 तक गिरने से 'गंभीर' संकट पैदा हो गया है, जिसके चलते प्रशासन ने ग्रैप-4 लागू किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/breathing-crisis-air-quality-in-severe-category-amid-fog-and/article-139961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/jahrili-hawa_polution.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी वायु प्रदूषण ने लोगों को जीना दुश्वार कर दिया है। यह पर  रविवार को सुबह सात बजे तक वायु गुणवत्ता (एक्यूआई) औसतन 439 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली में आज सुबह सात बजे तक एक्यूआई औसतन 439 रहा। यहां पर शनिवार देर रात से ही स्थिति खराब हो गयी थी। यहां शनिवार को रात करीब 10 बजे एक्यूआई 432 था और रविवार सुबह तक यह और खराब हो गया। राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति से रूप से ऊंचा बना रहा। आनंद विहार में एक्यूआई 489, पंजाबी बाग में 476 और वजीरपुर में 478 दर्ज किया गया। </p>
<p>वहीं, अशोक विहार में यह (463), बवाना (467), चांदनी चौक (464), द्वारका सेक्टर- 8 (469), आरके पुरम (467), आईटीओ (448) और नरेला (412) दर्ज किया गया, जो  वायु प्रदूषण की 'गंभीर' स्थिति को दर्शाता है। गौरतलब है कि, 401 और 500 के बीच एक्यूआई को 'गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है, जिससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारियों वाले लोगों के लिए यह बेहद खतरानाक होता है।</p>
<p>मौसम ने राष्ट्रीय स्थिति को और खराब कर दिया है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी ) ने रविवार की सुबह दिल्ली में कई जगहों पर हल्का कोहरा और कुछ जगहों पर घना कोहरा छाने की सूचना दी, जिससे दृश्यता कम हो गयी। यहां पर आज आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है और न्यूनतम तापमान चार से छह डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है जो सामान्य से कम है। वहीं, अधिकतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने के आसार हैं जो मौसम के औसत से ज्यादा है। </p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में सोमवार को सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है, जिसमें न्यूनतम तापमान थोड़ा बढ़कर 6-8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो सामान्य स्तर के करीब होगा। अधिकतम तापमान स्थिर रहने की उम्मीद है। वहीं, सुबह हवा शांत रहेगी और दिन में धीरे-धीरे हवा तेज होगी। </p>
<p>मौसम विभाग ने कहा है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों (जिसमें दिल्ली और आसपास के इलाके शामिल हैं) में घना कोहरा छाने का अनुमान है, जिससे सुबह और रात के समय दृश्यता  कम हो सकती है और यातायात प्रभावित हो सकता है। अधिकारियों ने निवासियों से गंभीर प्रदूषण और सर्दियों के कोहरे के बीच, खासकर सुबह के समय, बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और खतरनाक हवा के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी है। </p>
<p>दिल्ली में रविवार को न्यूनतम तापमान पांच से सात डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस कम है। हवा की गुणवत्ता बिगडऩे के जवाब में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के तहत स्टेज के उपायों को फिर से लागू किया है। </p>
<p>आयोग के आदेश में कहा गया है, हवा की गुणवत्ता के मौजूदा रुझान और संबंधित कारकों को ध्यान में रखते हुए और क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकने के प्रयास में ग्रैप पर सीएक्यूएम की उप-समिति सर्वसम्मति से मौजूदा ग्रैप श्रेणी-गंभीर वायु गुणवत्ता (दिल्ली 450) के तहत परिकल्पित सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से पूरे एनसीआर में एक सक्रिय उपाय के रूप में लागू करने का फैसला करती है। यह मौजूदा ग्रैप की श्रेणी के तहत एनसीआर में पहले से लागू कार्यों के अतिरिक्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 12:07:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस निकोबार परियोजना: कांग्रेस का गंभीर आरोप, पारिस्थितिकी की अनदेखी कर सरकार चला रही है विकास परियोजना </title>
                                    <description><![CDATA[जयराम रमेश ने अरावली और निकोबार में पर्यावरण अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि 72,000 करोड़ की मेगा-प्रोजेक्ट पारिस्थितिकी और आदिवासियों के लिए विनाशकारी है। उन्होंने इसे "विश्वासघात" करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-nicobar-project-is-a-serious-allegation-of-congress-that/article-138138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/great-nicobar-project.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने अरावली में सरकारी नीतियों के कारण प्रदूषण संकट पर सवाल उठाने के साथ कहा है कि निकोबार में भी सरकार पारिस्थितिकी की परवाह किये बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाएं चला रही है जो विकास के नाम पर पारिस्थितिकी तंत्र को ध्वस्त करने वाली हैं।</p>
<p>कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने कुछ माह पहले 'ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट' को अनावश्यक बताते हुए कहा था कि इस परियोजना पर सरकार 72,000 करोड़ रुपये खर्च कर गलत कर रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना द्वीप के मूल आदिवासी समुदायों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा राहुल गांधी ने भी इस परियोजना को पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक बताया था। </p>
<p>शुक्रवार को पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने फिर यह मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में सरकार ने विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की आक्रामक परियोजनाओं को जिस लालच और नासमझी के चलते जल्दबाजी से मंजूरी दी है, वह पूरे इलाके के लिए एक खतरनाक और दीर्घकालिक त्रासदी साबित होने वाली है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ न सिर्फ वहां की नाजुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय नुकसान पहुँचाएंगी, बल्कि आदिवासी समुदायों के अस्तित्व को भी योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलेंगी। यह पूरा इलाका पहले से ही जलवायु आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जहां प्राकृतिक संतुलन से जरा-सी भी छेड़छाड़ विनाशकारी परिणाम ला सकती है। इसके बावजूद सरकार ने चेतावनियों, वैज्ञानिक आकलनों और स्थानीय वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए चंद कॉरपोरेट के मुनाफ़े के लालच में इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि पंकज सेखसरिया द्वारा संकलित 'ग्रेट निकोबार: कहानी विश्वासघात की' कई शोधपरक, तथ्यात्मक और प्रासंगिक लेखों के माध्यम से इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका, नीतिगत लापरवाहियों और आदिवासी अधिकारों के साथ किए जा रहे समझौतों की समीचीन पड़ताल करती है। यह संकलन इस बात का जीता-जागता दस्तावेजी साक्ष्य है कि कैसे विकास के नाम पर एक पूरे क्षेत्र और उसके लोगों के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया है। रमेश ने इसके साथ ही इस पुस्तक का लिंक भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 15:49:38 +0530</pubDate>
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