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                <title>health emergency - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>health emergency RSS Feed</description>
                
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                <title>मुफ्त भोजन खाने के बाद इंडोनेशिया में हड़कंप: 3 दिनों में करीब 2,000 छात्र-शिक्षक फूड पॉइजनिंग से बीमार, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के मुफ्त स्कूली भोजन कार्यक्रम के तहत दूषित खाना खाने से लगभग 2,000 छात्र और शिक्षक बीमार पड़ गए। तीन दिनों में सामने आए फूड पॉइजनिंग के मामलों ने इस बहुअरबी डॉलर योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/panic-in-indonesia-after-eating-free-food-about-2000-students-teachers/article-164685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/indo.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया में पिछले तीन दिनों के भीतर सरकार के मुफ्त स्कूली भोजन कार्यक्रम से जुड़े फूड पॉइजनिंग के कई मामले सामने आये हैं, जिनमें करीब 2,000 छात्र और शिक्षक बीमार पड़ गये हैं। ताजा मामला मध्य जावा के रेमबांग स्थित एक उच्च विद्यालय का है, जहां दूषित खाना खाने से 777 लोगों की तबीयत बिगड़ गयी। इसकी जानकारी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने दी है। यह भोजन अरबों डॉलर की योजना के तहत दिया जाता है, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की प्रमुख नीतियों में से एक है। इस योजना का उद्देश्य इंडोनेशिया के स्कूली बच्चों के पोषण में सुधार करना है।</p>
<p>बड़े पैमाने पर फूड पॉइजनिंग की संदिग्ध वजह बनने के साथ-साथ यह कार्यक्रम भ्रष्टाचार के आरोपों और इसकी लागत को लेकर भी आलोचनाओं से घिरा हुआ है। लासेम के इस उच्च विद्यालय में बुधवार को दोपहर के भोजन के समय 'मकान बर्गीज़ी ग्रैटिस' (एमबीजी) कार्यक्रम के तहत दिया गया खाना खाने के बाद कुल 752 छात्रों और 25 शिक्षकों को फूड पॉइजनिंग के लक्षण महसूस हुए। प्रधानाध्यापिका जुहारतुतिक ने बताया, "उन्हें दस्त (डायरिया) की शिकायत हो गयी और वे बारी-बारी से शौचालय का इस्तेमाल करने लगे। विद्यालय में कुल 40 शौचालय हैं, इसलिए वे सभी के लिए पर्याप्त नहीं पड़ रहे थे।"</p>
<p>इसके बाद विद्यालय ने लगभग 1,200 छात्रों और 95 कर्मचारियों को घर भेज दिया, जबकि कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया। जुहारतुतिक ने कहा कि सरकार इलाज का सारा खर्च उठायेगी और स्थानीय खाद्य वितरक ने विद्यालय आकर 'जिम्मेदारी ली है'। एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि यह संदिग्ध प्रकोप मंगलवार को पूर्वी जावा के सिदोरजो स्थित एक इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल में एमबीजी का भोजन खाने के बाद 730 लोगों के बीमार पड़ने के बाद सामने आया।</p>
<p>रेनी नाम की एक महिला ने बताया कि खाना खाने के बाद उनके बच्चे को चक्कर आने और उल्टी महसूस होने के साथ पेट की समस्या शुरू हो गयी। प्रभावित लोगों में से कुछ को अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ी, जबकि कुछ छात्र इतने कमजोर थे कि उन्हें ह्वीलचेयर पर ले जाना पड़ा। इस हफ्ते मुफ्त स्कूली भोजन से जुड़े फूड पॉइजनिंग के संदिग्ध मामलों से सैकड़ों अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिनमें दक्षिण सुलावेसी के ताना तोराजा में कई विद्यालयों के सैकड़ों लोग शामिल हैं।</p>
<p>अनुचित भंडारण या ठीक से न पकाये गये भोजन को अक्सर फूड पॉइजनिंग के मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसमें शरीर दूषित भोजन को खारिज कर देता है। माता-पिता और शिक्षकों ने संवाददाताओं को बताया कि मुर्गियों का मांस चिपचिपा था, साथ ही खाना अधपका लग रहा था और उससे मछली जैसी बदबू आ रही थी। स्थानीय अधिकारी इन संदिग्ध मामलों के कारणों की जांच कर रहे हैं, और संभावित मिलावट की जांच के लिए भोजन के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गये हैं। लासेम में खाद्य वितरण इकाई के प्रमुख अहमद शोलेह शरीफुद्दीन ने माफी मांगी और 'छात्रों व शिक्षकों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली'।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 15:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक प्रयासों की आवश्यकता, स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) की आपात समिति ने कहा है कि मौजूदा मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक  प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tackling-monkeypox-outbreak-requires-immediate-efforts--not-a-state-of-health-emergency/article-13051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/monkey-p.jpg12.jpg" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) की आपात समिति ने कहा है कि मौजूदा मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक  प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं है।<br /><br />डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी बयान के मुताबिक  हालांकि कुछ सदस्यों ने अलग-अलग विचार व्यक्त किये हैं। आईएचआर आपातकालीन समिति की बैठक में  कुछ सदस्यों ने व्यापक आबादी में मंकीपॉक्स वायरस के और फैलने के खतरे की चेतावनी दी थी। समिति ने सर्वसम्मति से घटना की आपातकालीन प्रकृति को स्वीकार किया और प्रकोप के  प्रसार को नियंत्रित करने के लिए गहन प्रतिक्रिया प्रयासों की आवश्यकता जतायी । समिति ने यह भी सलाह दी कि कुछ हफ्तों के बाद घटना की बारीकी से निगरानी और समीक्षा की जानी चाहिए।डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के अनुसार विश्व के 48 देशों में अब तक 3,200 से अधिक मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं वहीं इसके संक्रमण से एक पीड़ति की मौत भी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 12:40:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>WHO का बड़ा फैसला: यूक्रेन में स्वास्थ्य आपातकाल लागू करने को लेकर प्रस्ताव को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य सभा के 75वें सत्र में यूक्रेन में स्वास्थ्य आपातकाल लागू करने को लेकर एक प्रस्ताव को भारी मतों के साथ मंजूरी दी गई, जबकि इसी संबंध में रूस, बेलारूस और सीरिया के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। यूक्रेन द्वारा प्रस्तावित दस्तावेज के सह-लेखक सहित कई यूरोपीय संघ के देशों के साथ-साथ जॉर्जिया और मोल्दोवा भी थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/decision-of-who--approval-of-a-proposal-to-impose-health-emergency-in-ukraine/article-10565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/who1.jpg" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य सभा के 75वें सत्र में यूक्रेन में स्वास्थ्य आपातकाल लागू करने को लेकर एक प्रस्ताव को भारी मतों के साथ मंजूरी दी गई, जबकि इसी संबंध में रूस, बेलारूस और सीरिया के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई। यूक्रेन द्वारा प्रस्तावित दस्तावेज के सह-लेखक सहित कई यूरोपीय संघ के देशों के साथ-साथ जॉर्जिया और मोल्दोवा भी थे।<br /><br />रिपोर्ट के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) में शामिल 88 सदस्य देशों ने गुरुवार को यूक्रेन के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 12 इसके विपक्ष में रहे और 53 देश ऐसे भी थे जिन्होंने मतदान प्रक्रिया में भाग ही नहीं लिया। इसी के साथ रूस के प्रस्ताव के पक्ष में 15 और विपक्ष में 66 वोट मिले।<br /><br />यूक्रेन ने अपने प्रस्ताव में कहा है, देश में जारी रूसी सैन्य विशेष अभियान के मद्देनजर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं भी मुश्किल से मिल पा रही हैं। इसमें रूस से तत्काल रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हमला न करने की भी अपील की गई।डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों की कल हुई बैठक में रूसी कृत्य की ङ्क्षनदा का प्रस्ताव पेश किया गया। प्रस्ताव में उसकी रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि रूसी सेना ने यूक्रेन में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े 235 स्थानों पर हमले किए। उनमें से ज्यादातर बर्बाद हो गए हैं। इस प्रस्ताव के जवाब में रूस ने भी एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें यूक्रेन की स्थिति के लिए खुद की कोई भूमिका नहीं होने की बात कही गई है। <br /><br />बैठक में पोलैंड के स्वास्थ्य मंत्री एडम नीडजिल्स्की ने कहा यूक्रेन में जिस तरह से सैन्य हमले में जनस्वास्थ्य सुविधाओं को ध्वस्त किया गया है उस पर संगठन चुप होकर नहीं बैठ सकता। उसे इस पर कड़ा कदम उठाकर दुनिया को संदेश देना होगा। उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य सभा के 75वें सत्र का आयोजन स्विटजरलैंड के जेनेवा में 22 से 28 मई तक आयोजित किया जा रहा है। दुनिया में कोरोना महामारी के प्रकोप के दस्तक देने के बाद से यह पहली बार आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 14:31:58 +0530</pubDate>
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