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                <title>costly - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भैय्या जीरे या सौंफ की बजाय तो बादाम या किशमिश खा लेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[मार्च एवं अप्रैल की बारिश के चलते गर्मी से भले ही लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन अब रसोई का पूरा बजट बिगड़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/brother--instead-of-cumin-or-fennel--he-will-eat-almonds-or-raisins/article-52981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश के चलते सिर्फ टमाटर या नींबू ही नहीं बल्कि मसालों पर भी महंगाई का रंग चढ़ने लगा है। फिर चाहे चाय का मसाला (सौंठ, लोंग, इलायची या डोडा) हो गया फिर सब्जी का तड़का (जीरा, सौंफ)। सभी महंगाई के चलते रसोई से दूर हो रहे हैं। गरीब या आम ही नहीं अपितु सामान्य वर्ग की भी पहुंच से बाहर हैं। लोग भाव सुनकर ही कहने लगे हैं भैय्या जीरे या सौंफ की बजाय तो बादाम या किशमिश ही खा लेंगे, जिनसे कम से कम दिमाग को बढ़ेगा। मार्च एवं अप्रैल की बारिश के चलते गर्मी से भले ही लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन अब रसोई का पूरा बजट बिगड़ गया है।</p>
<p><strong>मसाले हो गए ड्रायफू्रट से महंगे</strong><br />शहर के मसाला एवं ड्रायफ्रूट व्यापारी रवि व ताराचंद के अनुसार भावों की बात करें तो सबसे ज्यादा 620 रुपए किलो बादाम बिक रहा है, लेकिन जीरा, लोंग, काली मिर्च, इलायची के भाव इससे भी ज्यादा हैं। मार्च अप्रैल में अब जुलाई में भावों में दुगुना अंतर हो गया है। चाय एवं सब्जी के मसालों के भाव इस समय ड्रायफ्रूट से भी महंगे हो गए हैं। मसाले व्यापारियों का कहना है कि अभी की स्थिति को देखकर लग रहा है कि इस वर्ष भावों में कमी के आसार कम ही हैं। क्योंकि जिस तरह तीन-चार महीने में इनके भाव दुगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में आधे भाव कम होना आसान नहीं है।</p>
<p><strong>बारिश से हो गया उत्पादन कम</strong><br />प्रगतिशील किसान लक्ष्मीनारायण के अनुसार फसल पकने के समय मार्च-अप्रैल में हुई बारिश के चलते एक तो उत्पादन प्रभावित हुआ, साथ ही निर्यात भी बढ़ गया है। दूसरी ओर कुछ किसानों ने भी भाव को देखकर उत्पादन बेचने की बजाय घर में ही स्टॉक कर लिया है। जिसके कारण एक साथ ही इतने भाव बढ़ गए हैं। आगामी दिनों में भाव कम होने के आसार कम ही हैं। कुछ वस्तुओं का आयात भी कम हो गया है। जिसके कारण भाव लगातार बढ़ रहे हैं। अब नई फसल आने तक भाव गिरने की उम्मीद कम ही है।</p>
<p><strong>मसाला भाव</strong><br />सौंठ    250 380<br />जीरा    280 680<br />सौंफ    220 320<br />डोडा    800 1100<br />लोंग    800 1000<br />साबूदाने    60 75<br />कालीमिर्च    600 700<br />धनिया    90 110<br />अजवायन    200 280<br />ड्रायफ्रूट भाव<br />बादाम    600<br />किशमिश    180<br />मखाने    520<br />अखरोट    550</p>
<p><strong>भाव प्रति किलो रुपए में</strong><br /><strong>280 से 680 पर पहुंचा जीरा</strong><br />एक साल पहले जीरा 280 रुपए किलो बिक रहा था, लेकिन अब 680 पर पहुंच गया है। इसी प्रकार सौंफ 220 से बढकर 320 रुपए पर पहुंच गई है। यह तो थोक के भाव हैं। खुदरा में तो जीरा 700 रुपए किलो तक बिक रहा है। ऐसे में लोगों का बजट ही गड़बड़ा गया है। किराना व्यापारियों ने बताया कि जीरा के दाम में तेजी के कारण इसकी ग्राहकी भी काफी कम हो गई है।  जो ग्राहक दुकान पर आ रहे हैं वह भी काफी मात्रा में जीरा खरीद कर ले जा रहे हैं। कुछ माह से जीरे की बिक्री कम हो गई है।</p>
<p><strong>विदेशों में भी जीरे की मांग बढ़ी</strong><br />देश के साथ ही विदेश में भी जीरे की मांग बढ़ने के कारण इसके भाव में लगातार इजाफा होता जा रहा है। विदेशी मांग के चलते जीरे का स्टॉक कम पड़ गया है। इसलिए मांग के हिसाब से आपूर्ति नहीं होने से जीरे की कीमत दिनों दिन नई ऊंचाई की ओर जा रही है। हाल के दिनों में राजस्थान और गुजरात और भारी बारिश हुई थी। इस कारण जीरे की नई फसल प्रभावित हुई है। मंडियों में आवक घटने के कारण इसके दाम में उछाल देखा जा रहा है।</p>
<p>सब्जी में जीरे का छौंक लगाए तो काफी समय हो गया है। इसके दाम अब तो काफी बढ़ गए हैं। ऐसे में कई माह से जीरा खरीदा ही नहीं हैं। पिछले वर्ष पूरे साल के हिसाब से जीरा खरीदा था। उस समय दाम कम थे, लेकिन अब दाम बढ़ने से जीरा नहीं खरीदा है। <br /><strong>- उर्मिला सारस्वत गृहिणी</strong></p>
<p>जीरा, लोंग, काली मिर्च, इलायची के भाव काफी बढ़ गए हैं। मार्च अप्रैल में अब जुलाई में भावों में दुगुना अंतर हो गया है। चाय एवं सब्जी के मसालों के भाव इस समय ड्रायफ्रूट से भी महंगे हो गए हैं। इस वर्ष भावों में कमी के आसार कम ही हैं। क्योंकि जिस तरह तीन-चार महीने में इनके भाव दुगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में आधे भाव कम होना आसान नहीं है।<br /><strong>- पवन अग्रवाल, मसाला व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2023 16:50:10 +0530</pubDate>
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                <title>रावण के पुतले बनवाने पर सोने से महंगी पड़ेगी घड़ाई  </title>
                                    <description><![CDATA[सोने से महंगी पड़ेगी गढ़ाई। यह कहावत कोटा के दशहरा मेले में बनने वाले रावण के पुतलों पर सही साबित हो रही है। पुतले बनाने पर जहां मात्र 5.25  लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं उन पुतलों को खड़ा करने पर ही  8.70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/making-an-effigy-of-ravana-will-costly-to-be-built/article-21257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/ravan-k-putle..kota-news-1.9.2022-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । सोने से महंगी पड़ेगी गढ़ाई। यह कहावत कोटा के दशहरा मेले में बनने वाले रावण के पुतलों पर सही साबित हो रही है। पुतले बनाने पर जहां मात्र 5.25 लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं उन पुतलों को खड़ा करने पर ही 8.70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण की ओर से राष्ट्रीय दशहरा मेले का संयुक्त आयोजन किया जाएगा। दशहरा मेला तो 26 सितम्बर को दुर्गा पूजा के साथ शुरू हो जाएगा। जबकि रावण दहन दशहरे के दिन 5 अक्टूबर को होगा। दशहरे के लिए नगर निगम की ओर से हर साल रावण, कुम्भकरण व मेघनाद के पुतले बनवाए जाते हैं। कोरोना काल के दो साल में पुतलों की लम्बाई कम रखी गई थी। लेकिन इस बार दो साल बाद आयोजित हो रहे मेले में एक बार फिर से पुतलों की लम्बाई 72 से 75 फीट तक रखी जाएगी। नगर निगम द्वारा रावण, कुम्भकरण व मेघनाद के पुतले बनाने का टेंडर जारीे किया गया था। निगम ने इसके लिए 7.12 लाख की राशि निर्धारित की थी। पुतले बनाने के लिए दिल्ली व फतहपुर सीकरी के कारीगरों ने टेंडर में भाग लिया। निगम द्वारा खोली गई वित्तीय बिड में दिल्ली कीे फर्म मैसर्स अनीश की दर कम होने से नगर निगम ने उन्हें कार्यादेश जारी किया है। निगम अधिकारियों के अनुसार फतहपुर सीकरी की फर्म ने 6.50 लाख रुपए और दिल्ली की फर्म ने 5.50 लाख रुपए की दर दी थी। दिल्ली की फर्म की दर कम होने और नेगोशिएशन के बाद 5.25 लाख रुपए की राशि तय होने पर दिल्ली की फर्म को कार्यादेश जारी किया गया है। अब शीघ्र ही पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि दिल्ली के कारीगरों द्वारा दशहरा मेले में दूसरी बार रावण के पुतले बनाए जाएंगे। इससे पहले कोटा में 100 फीट से अधिक का पुतला भी दिल्ली की फर्म ने ही बनाया था। हालांकि उस समय जलने के दौरान ही पुतला ढहने से विवाद हो गया था। पुतले खड़े करने पर होंगे 8.70 लाख खर्च इधर रावण, मेघनाद व कुम्भकरण के पुतलों को खड़ा करने पर ही 8.70 लाख रुपए खर्च होंगे। निगम की ओर से तीनों पुतलों को खड़ा करने के लिए पेड़ा बनाने का टेंडर 4.40 लाख रुपए का जारी किया गया था। जिसे मैसर्स ए टू जेड फर्म द्वारा 4 लाख 44 हजार 900 रुपए में किया जाएगा। वहीं तीनों पुतलों को खड़ा करने के लिए लोहे की सीढ़ियां बनाने का टेंडर 5.10 लाख रुपए का जारी किया था। जिसे 14.89 फीसदी कम दर पर दिया गया है। इस तरह से ये दोनों काम 8.70 लाख रुपए में होंगे। जबकि पुतले बनाने का काम 5.25 लाख रुपए में होगा। नगर निगम कोटा दक्षिण के मेला प्रभारी ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि रावण के पुतले बनाने के लिए दो फर्मो ने टेंडर डाला था। लेकिन दिल्ली की फर्म की दर कम होने से उसे कार्यादेश जारी किया है। अब एक-दो दिन में पुतले बनाने का काम शुरू हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Sep 2022 14:57:37 +0530</pubDate>
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                <title>कागज और स्याही पर जीएसटी से शिक्षा हुई महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[ स्कूलों में नये सत्र शुरू होने के साथ ही कॉपी किताबें खरीदना शुरू हो गया है। नये सत्र शुरू होने के साथ अभिभावकों की जेब पर जीएसटी का बोझ बढ़ने लगा है।  जीएसटी लगने की वजह से कॉपी- किताब व स्टेशनरी के मूल्यों में हुई वृद्धि ने बच्चों की पढ़ाई को मुश्किल बना दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gst-on-paper-and-ink-made-education-costly/article-10585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/kagaz-syahi-gst.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोरोना महामारी के चलते दो साल के लंबे अंतराल के बाद अभी सभी स्कूल पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे है। स्कूलों में नये सत्र शुरू होने के साथ ही कॉपी किताबें खरीदना शुरू हो गया है। नये सत्र शुरू होने के साथ अभिभावकों की जेब पर जीएसटी का बोझ बढ़ने लगा है।  शिक्षा पर जीएसटी का बोझ पैरेंट्स को अब  पूरी तरह समझ में आने लगा है।  जीएसटी लगने की वजह से कॉपी- किताब व स्टेशनरी के मूल्यों में हुई वृद्धि ने बच्चों की पढ़ाई को मुश्किल बना दिया है।  पैरेंट्स अपने बच्चों की कॉपी व किताब खरीदने के लिए 6 हजार से 12 हजार रुपए तक खर्च कर रहे हैं। जो किताब पहले 100 रुपए में आती थी वह अब बढ़कर 180 रुपए पहुंच गई है। अभिभावकों का कहना है कि पहले कोरोना के चलते आर्थिक तंगी से गुजर रहे उस पर  इस बार कागज पर बड़ी जीएसटी का बोझ किताब कॉपियों और स्टेशनरी  पर दिखाई दे रहा है। <br /><br />वैसे तो किताबें जीएसटी से मुक्त हैं, लेकिन प्रिंटिंग में प्रयोग होने वाली इंक व कागज पर भारी-भरकम जीएसटी लगने से किताबों पर भी महंगाई की मार पड़ रही है. इस वर्ष कागज पर 12 प्रतिशत व इंक पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। जिसके कारण इस बार किताबें महंगी होने से अभिभावकों की कमर टूट रही है।  बीते लगभग दो वर्षों के बाद स्कूल वापस शुरू हो रहा है।  नया सत्र शुरू होते ही अभिभावक बच्चों के लिए कॉपी, किताब व स्टेशनरी खरीदने में जुट गए हैं, लेकिन बीते सत्रों की अपेक्षा इस बार स्टेशनरी सामानों की कीमतें लगभग 40 से 50 प्रतिशत अधिक मूल्य पर मिल रही है, जिससे अभिभावक मायूस नजर आ रहे हैं। <br /><br /><strong>कागज और रद्दी के बढ़े दाम</strong><br />स्टेशनरी विक्रेता जितेंद्र शर्मा ने बताया कि कागज के दामों में हुई वृद्धि से शिक्षा से जुड़ी हर चीज के भाव आसमान छू रहे हैं।  कॉपी-किताबों के दामों में काफी वृद्धि हुई है।  ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों के दाम बढ़ाने की बजाए कॉपियों के पेज कम कर दिए हैं, जबकि कुछ कंपनियों ने लंबाई व चौड़ाई कम कर दी। <br /><br /><strong>128 पेज की कॉपी हुई 120 पेज की</strong><br />अभिभावक हेमराज ने बताया कि पहले 128 पेज की कॉपी आती थी उसे120 पेज की कर दी गई है।  वहीं कुछ कंपनियों ने पेज कम करने के साथ ही मूल्य भी बढ़ा दिए हैं।  पहले 64 पेज की जो कॉपी दस रुपए में आती थी, वह अब 48 पेज की होने के साथ ही 15 रुपए की हो गई है।  कॉपी- किताब और स्टेशनरी विक्रेता सौरभ ने बताया कि इसकी मुख्य वजह जीएसटी और  कागज की कीमतों में हुई वृद्धि है। जुलाई माह तक नया स्टॉक आने पर कीमतें और भी बढ़ने की संभावना है।<br /><br /><strong>कॉपी किताब की कीमतें</strong><br />कक्षा         कीमत (रुपए में)<br />प्री प्राइमरी    2500 से 4000<br />पहली से पांचवी     4500 से 5000 <br />छठवीं से आठवीं    6000 से 8000<br />नौवीं से दसवीं    7500 से 9000<br />11 से 12वीं    8500 से 12000<br /><br /><strong>हर साल सिलेबस बदलना बंद करें</strong><br />प्राइवेट स्कूल हर साल अपनी किताबों के सिलेबस में कुछ न कुछ  बदलाव कर देते हैं। जिससे पुरानी किताबें अच्छी हालत में होने के बाद भी नए विद्यार्थियों के उपयोग में नहीं आ पाती है जिससे हर वर्ष छात्र छात्राओं को नई किताबें खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है इसके लिए शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों के हर साल सिलेबस बदलना बंद कराना चाहिए। <br />-रवि सिंह, अभिभावक शिक्षा विभाग को लेना चाहिए संज्ञान<br /><br /><strong>शिक्षा विभाग को लेना चाहिए संज्ञान</strong><br />कई स्कूलों द्वारा किताबें व कॉपियां स्कूलों से ही लेने के  लिए दबाव डाला जाता है। उनके द्वारा निर्धारित की गई दुकान पर ही बुक मिलती है। उनका मूल्य भी निर्धारित लागत से काफी अधिक होता है।  ऐसी मॉनोपोली बंद होनी चाहिए । शिक्षा विभाग व प्रशासन को स्कूलों की इस मनमानी पर रोक लगानी चाहिए जिससे पैरेट्स का शोषण ना हो।<br /><strong>-सीमा शर्मा, अभिभावक</strong><br /><br /><strong>प्री- प्राइमरी बच्चों पर ढेर सारी किताबों का लाद रहे बोझ</strong><br />प्री-प्राइमरी और छोटे बच्चों की कक्षाओं में स्कूलों द्वारा कई ऐसे सिलेबस निर्धारित कर दिया गया है, जिनका बच्चों को कोई खास लाभ नहीं होता है। यह किताबें काफी महंगी भी होती है। ऐसी किताबों को सिलेबस से हटाना चाहिए। <br /><strong>-सोनू कंवर, अभिभावक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 16:05:49 +0530</pubDate>
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