<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/achieved/tag-22541" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>achieved - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/22541/rss</link>
                <description>achieved RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संघर्ष और चुनौतियों से लड़ बेटियों ने लिखी तकदीर, 90% से अधिक अंक हासिल कर पाया मुकाम</title>
                                    <description><![CDATA[ मजदूर, किसान और ऑटो चालक की बेटियों ने 12वीं बोर्ड में रचा कीर्तिमान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/battling-struggles-and-challenges--these-daughters-forged-their-own-destinies/article-148837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सपने वही सच होते हैं, जिनके पीछे संघर्ष की कहानी होती है। यह कहावत उन हौनहार बेटियों ने सच कर दिखाई, जिन्होंने गरीबी, अभाव, आर्थिक तंगी और विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और जिद और जूनून के दम पर संघर्ष करते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर खुद को साबित किया। किसी के पिता मजदूर, किसान हैं तो कोई आॅटो चालक की बेटी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाकर मिसाल पेश की। संघर्षों की कहानी में कुछ प्रतिभाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने अपनी जिद और जुनून से नामुकिन को भी नुमकिन कर दिखाया। पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>जंगल में बसा गांव:माता-पिता और भाई दूसरों के खेतों पर मजदूरी करते ,बेटी ने पाया मुकाम</strong><br />जंगल में बसे जिस गांव में मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से नहीं आता, वहां से भी प्रतिभा निकलकर सामने आई है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बसे घाटोली गांव में सरकारी स्कूल की रीना कुमारी ने 12वीं आर्ट्स फर्स्ट डिविजन से पास कर खुद को साबित किया। रीना बतातीं हैं, माता-पिता और भाई दूसरों के खेतों पर मजदूरी करते हैं, जो सुबह जल्दी घर से निकल जाते हैं। स्कूल जाने से पहले घर का सारा काम करती हूं। शाम को भी काम निपटाकर पढ़ाई करती हूं। घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं है। छोटा भाई पढ़ रहा है। परिवार में 8 सदस्य हैं और दो कमरे हैं। एक में दादा-दादी और दूसरे में हम भाई-बहन व माता पिता सहित 6 सदस्य रहते हैं। शोर-शराबा होता है, कोई अन्य विकल्प नहीं होने से ऐसी परिस्थितियों में ही पढ़ाई की और 62.2 % हासिल की। आगे टीचर बनना चाहती हूं।</p>
<p><strong>पैदल चल अगले दिन कोटा आने का बचाता किराया</strong><br />महात्मा गांधी राजकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल सुल्तानपुर के छात्र लक्ष्य गोस्वामी ने परिवार की विपरित परिस्थितियों के बावजूद 12वीं साइंस में 96% अंक हासिल कर कस्बे को टॉप किया। पिता जितेंद्र गोस्वामी 10 हजार रुपए महीने में प्राइवेट जॉब करते हैं, जिससे घर का गुजारा होता है। घर की स्थिति बेटा समझता है। वह रोडवेज बस से रोजाना 40 किमी का सफर कर कोटा कोचिंग को जाता है लेकिन शहर में कोचिंग तक जाने के लिए डेढ़ से दो किमी पैदल चलता है ताकि अगले दिन वापस कोटा आने के लिए बस का किराया बचा सके। आर्थिक परेशानियों के बावजूद लक्ष्य पर टॉप करने पर फोकस रखा और वह कर दिखाया। लक्ष्य का कहना है कि वह आगे इंजीनियर बनना चाहता है।</p>
<p><strong>टीचर नहीं, कोचिंग के पैसे नहीं, लेकिन जज्बा 100 फीसदी</strong><br />दीगोद निवासी जयश्री एक किमी पैदल स्कूल जाती और लौटकर घर का काम करती। शाम को भी मां का हाथ बंटाती। 12 लोगों का संयुक्त परिवार में शोर-शराबे के बीच पढ़ाई करती लेकिन व्यवधान से मन विचलित होता इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 12वीं कला में 94.80% अंक हासिल किर खुद को साबित किया। जयश्री बताती हैं, संयुक्त परिवार होने से शोर अधिक रहता है। शाम को 3 घंटे छत पर जाकर पढ़ती हूं। स्कूल में पिछले कई साल से इंग्लिश के टीचर नहीं हैं, ऐसे में लेसन व ग्रामर समझने में काफी परेशानी होती है। पिता किसान हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं होने से कोचिंग की सोच भी नहीं सकती। खुद के स्तर पर ही पढ़ाई की। पिता अनिल नागर ने बताया कि बेटी आगे सिविल सर्विसेज में जाना चाहती है।</p>
<p><strong>घर-दुकान बिकी, बीमार पड़ी फिर भी हासिल किए ऑटो चालक की बेटी ने 96.60%</strong><br />रायपुरा निवासी सरकारी स्कूल की छात्रा लक्षिता खरेड़िया की कहानी संघर्ष और चुनौतियों से भरी रही। आर्थिक तंगी के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी और 12वीं कला में 96.60 % अंक हासिल कर ऑटो चालक पिता का नाम रोशन किया। लक्षिता कहती हैं, हमारा छावनी रामचंद्रपुरा में मकान व दुकान थी, जो कठिन परिस्थितियों के कारण बिक गए। पिता भी बेरोजगार हो गए। रायपुरा में रहने लगे। रोजगार की तलाश में पिता ऑटो चलाने लगे, इसी से गुजर-बसर होता है। परिवार की माली हालत समझती हूं, कई दिक्कतों से हर दिन दो-चार हुई लेकिन शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा। पिता रामनिवास ने बताया कि कई बार स्टेशनरी खरीदने तक के पैसे नहीं थे। पेपरों के दौरान बेटी बीमार हो गई थी। फिर भी उसने हार नहीं मानी और बोर्ड में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p><strong>मां का ऑपरेशन हुआ तो खुद संभाली घर की जिम्मेदारी, रात दो बजे तक पढ़ाई कर पाया मुकाम</strong><br />जोमेटो राइडर शंभूदयाल की बेटी निर्जला मेहरा ने मुश्किल हालातों में भी 94.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तीन विषयों में 99 अंक अर्जित किए। निर्जला ने बताया कि परीक्षा से पहले मां के गले का ऑपरेशन हुआ। उस समय हालत ऐसी नहीं थी कि मां घर का कोई काम कर सकें। ऐसे में खुद ने ही घर की जिम्मेदारी संभाली। मां की सार-संभाल के साथ-साथ छोटे भाई-बहनों की देखभाल की। घर के काम और परीक्षा की तैयारी सब एक साथ की। पिता शंभूदयाल ने बताया कि परिस्थितियां बेहद कठिन थी। उसके सामने सबसे बड़ी दिक्कत एक छोटे भाई की भी थी जो कि मानसिक रूप से कमजोर है।ज्यादातर समय तो मां की सेवा और छोटे भाई की देखभाल में निकलता। इसके बाद देर रात दो बजे तक वह पढ़ाई करती थी। निर्जला ने कोई कोचिंग या ट्यूशन नहीं ली। उसका आईएएस बनना सपना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/battling-struggles-and-challenges--these-daughters-forged-their-own-destinies/article-148837</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/battling-struggles-and-challenges--these-daughters-forged-their-own-destinies/article-148837</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:22:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/1200-x-60-px%29-%28youtube-thumbnail%29-%286%291.png"                         length="1090072"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हथियारों की होड़ से हासिल नहीं की जा सकती शांति : फिर दुनिया पर मंडराने लगी है परमाणु हथियारों की छाया, गुटेरेस ने कहा- रिकॉर्ड स्तर पर है सैन्य खर्च  </title>
                                    <description><![CDATA[इस मौके पर बयान में गुटेरेस ने कहा कि एक बार फिर दुनिया पर परमाणु हथियारों की काली छाया मंडराने लगी है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के केंद्र में आ गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/peace-can-not-be-achieved-by-arms-race-the-world-has/article-123117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer7.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जापान के नागासाकी में परमाणु हमले की चपेट में आकर मरने वाले लोगों और मौजूदा भू-राजनैतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुये कहा कि हथियारों की होड़ से शांति और सुरक्षा हासिल नहीं की जा सकती। गुटेरेस ने कहा कि वह 80 साल पहले नागासाकी पर हुये परमाणु हमले में मारे गये हजारों लोगों को के शोक में शामिल हैं, जिन्होंने उस दिन अपने प्रियजनों को खो दिया था। उन्होंने उस हमले में बच्चे लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। </p>
<p>इस मौके पर बयान में गुटेरेस ने कहा कि एक बार फिर दुनिया पर परमाणु हथियारों की काली छाया मंडराने लगी है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के केंद्र में आ गया है। सैन्य खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गये हैं, जबकि शांति और सतत विकास पर निवेश घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हथियारों की होड़ से शांति और सुरक्षा हासिल नहीं की जा सकती। हमें निरस्त्रीकरण के परीक्षित उपायों जैसे संवाद, कूटनीति, विश्वास बहाली, पारदर्शिता और हथियारों पर नियंत्रण तथा उनमें कमी के प्रति एक बार फिर प्रतिबद्धता दिखानी होगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि वैश्विक निरस्त्रीकरण को मजबूत करने के लिए राष्ट्रों को बातों की बजाय काम करने की जरूरत है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/peace-can-not-be-achieved-by-arms-race-the-world-has/article-123117</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/peace-can-not-be-achieved-by-arms-race-the-world-has/article-123117</guid>
                <pubDate>Sat, 09 Aug 2025 15:15:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-08/oer7.png"                         length="316348"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - लहरा दो, लहरा दो सरजमीं का परचम लहरा दो...</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day---wave-it--wave-it--wave-the-flag-of-the-land/article-106816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/lahara-do,-lahara-do-sarajamen-ka-paracham-lahara-do...kota-news-8.03.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, उनका सम्मान किया जाता है वहां देवता निवास करते हैं। मुस्कुराकर, दर्द भूलकर,रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी, हर पग को रोशन करने वाली वो शक्ति हैं नारी ! नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है, वह जीवनदायिनी है, प्रेम की मूर्ति और रिश्ते संवारने वाली शक्ति है। नारी समाज का मूल आधार है, नारी है तो समाज है नारी समाज का आईना है, क्योंकि वह समाज में कई तरह की भूमिकाएं निभाती है। आज नारी ने शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय, और सामाजिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इन्होंने यह भी बता दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम हैं। किसी भी प्रोफेशन को ले लीजिए महिलाएं अब पुरुषों से कंधा मिलाकर चल रही हैं। यह अब अपवाद नहीं रह गया है। बीते जमाने की बात हो गई है कि महिलाएं सिर्फ घर की चाहरदीवारी में ही रहेंगी। आज की महिलाएं जागृत हैं और अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।</p>
<p>हमारा परिवार इस विचारधारा को मानने वाला था कि लड़कियों की समय पर शादी उनकी शिक्षा से ज्यादा जरूरी है। मेरी बड़ी बहिन की शादी 18 साल की होते ही कर दी गई। मेरे आगे पढ़ने की इच्छा को जानकर मेरी दादी ने मेरे घर वालों  को मुझे उचित माहौल देने का मार्ग प्रशस्त किया। समस्या यह थी कि  परिवार में सभी बड़े लोग निजी क्षेत्र में कार्यरत थे।  ऐसे में परिवारजनों के समुचित सहयोग के बावजूद उचित मार्गदर्शन के अभाव में कई दिक्कतें आई।  प्रतियोगिता पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाले सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पढ़कर प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया। कोचिंग नहीं करने की वजह से तैयारी के दौरान कई चुनौतियां आई लेकिन  कड़ी मेहनत का परिणाम मिला कि  मेरा चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो गया।  महिलाओं को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए  उन महिलाओं को देखने की जरूरत है जो विभिन्न क्षेत्रों में सफल हुई है। महिलाओं को अपने लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए योजना निर्माण करना चाहिए।  नए कौशल सीखने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रयासरत रहना होगा। महिलाओं को अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहना होगा। एक महिला  को दूसरी महिला का समर्थन करने और एक-दूसरे को आगे बढ़ने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।<br /><strong>-ममता तिवारी, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोटा</strong></p>
<p>आपकी जो आज की परिस्थिति है उसको अगर बदलने का जज्बा है वो इच्छाश्क्ति अगर आप में है तो हालातों को बदल सकते है। मेरा ग्रामीण परिवेश था। मुझे एक ही इच्छा थी कि मुझे अपने पैरों पर खड़े होना है। मैं कभी नहीं चाहुंगी कि मैं किसी पर निर्भर रहुं अपने फैसले लेने में या अपनी लाइफ के छोटे-छोटे फैसले लेने में या कहीं आने जाने में। इसी ने मुझे प्रेरित किया। आजकल लाइफ में डिस्ट्रेक्शन बहुत ज्यादा है सबसे पहले अपने उद्देश्य पर केंद्रित रहे, डिस्ट्रेक्शन को अपने ऊपर बहुत हावी नहीं होने दें। आज आप जिस परिस्थिति में हैं और उसे बदलना चाहते है तो निश्चित रूप से आपको कुछ अलग करना होगा।<br /><strong>- गीता चौधरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण</strong></p>
<p>जब कोई महिला घर से बाहर निकल कर कुछ करती है तो बहुत अड़चनें आती है। पुरूष तो करें ही पर हर महिला को महिला का भी सपोर्ट जरूरी है। महिला अगर ठान ले कि मुझे इस मुकाम तक पहुंचना है चाहे कितना भी संघर्ष करना पड़े, कोई कुछ भी कहें मुझे आगे बढ़ना है यह लक्ष्य लेकर चलें तो वह वहां तक पहुचेंगी। अपनी व अपने अंदर की सुनें तो अवश्य मंजिल को छूएंगी। मैं जब 9वीं कक्षा में पढ़ती थी तभी विवाह हो गया था। ससुराल से भी पढ़ने जाती थी। पति, सास व ससुर ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मेरी इच्छा शुरू से टीचर बनने की थी। स्कूल में बच्चों को पढ़ाया भी, समाज सेवा भी करती थी। सब जगह मंजू मैडम के नाम से जानी जाती थी जब कहीं महिला की सीट आती और किसको खड़ा करें यह बात आई तो उस समय मुझसे कहा गया एक  बार तो मैंने सोचा यह सब नहीं पर सबने कहां कि आप सब कुछ कर सकती है इस तरह राजनीति में आ गई। यहां भी सास, ससुर, पति के सपोर्ट से आई। मैं चाहती हूं कि मेरे पीछे की महिलाएं भी आगे बढ़े। महिला अपने आस-पास, अपने क्षेत्र, अपने ग्रुप में जो महिलाएं हैं उन्हें सपोर्ट करके आगे बढ़ाए। माता-पिता अपनी बेटियों को संपूर्ण शिक्षा दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर ही उनका विवाह करें।<br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर कोटा उत्तर</strong></p>
<p>व्यक्ति के पूरे जीवन के लिए अर्थात जन्म से लेकर अंत तक के लिए कानूनी प्रावधान हैं।  कानून में हर तरह की स्थिति का प्रावधान हैं। महिला को सशक्त होने, स्वाभिमान से जीवन जीने, हर वो काम करने की आजादी है जो वह करना चाहती है। लेकिन यह जरूरी है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना चाहिए। महिलाओं को यह पता होना  चाहिए कि वर्क प्लेस, घर ससुराल,या अन्य स्थान  पर किसी भी तरह की घटना होती है वह क्या करे, कैसे बचे, किससे सहायता लें आदि। इसके साथ महिला को कभी अपने आप को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं समझना चहिए।  आज हर महिला को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए, ताकि वह कठिन समय का सामना आसानी से कर पाए। मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहती हूं कि कभी भी अपने अधिकार व कानून का मिस्यूज नहीं करें। <br /><strong>- डॉ. अमृता दुहन पुलिस अधीक्षक कोटा शहर</strong></p>
<p>शिक्षा वह है जो हर व्यक्ति में आत्मविश्वास भी लाती है और उसका व्यक्तित्व भी निखारती है। हर लड़की को चाहिए कि वह अपनी शिक्षा पर पूरा ध्यान दें। अपनी रूचि के अनुरूप अपना करियर चुनें। हर परिस्थिति में अपने पैरों पर खड़ी हो। हर परिस्थिति में सही-गलत को सोच विचार कर निर्णय करें। क्षेत्र पूरे आत्मविश्वास, पूरी लगन व मेहनत से काम करें तो महिलाएं अपने को ऊंचाई तक ले जा सकती है। हमारा विभाग गरीब, दुखी व वंचित वर्ग के लिए काम करता है। मेरा सौभाग्य था कि ईश्वर ने मुझे इस काम के लिए चुना ताकि मैं लोगों की कुछ मदद कर सकूं। सरकार की योजनाओं से जोड़कर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी भी तरह मदद कर सकूं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इस फील्ड में जाउंगी । सोशलॉजी में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। उसके बाद जब इस फील्ड में आई तो धीरे-धीरे समाज को जाना और समझा तो लगा कि सहीं दिशा थी। मैं सेतुष्ट हुं इस विभाग में काम करके। शादी के तीन साल बाद जॉब ज्वाइन किया तो पति व सभी लोगों का मोटीवेशन व सपोर्ट मिला।<br /><strong>- सविता कृष्णैया, संयुक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग</strong></p>
<p>आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। लेकिन आज भी बालिका शिक्षा में हम काफी पिछड़े हुए है। आज भी ग्रामीण परिवेश में बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए भेजने में संकोच करते हैं। मैं अपनी बात करूं तो मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आई हूं। हमारे समय में लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए नहीं भेजते थे। लेकिन इस बारे में लकी हूं मेरे पिता ने मुझे पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। दादाजी मेडिकल लाइन में नहीं भेजना चाहते थे लेकिन पिता के सहयोग से आज मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं। बालिकाओं को किसी भी फील्ड में जाना है तो इसके लिए  अपना लक्ष्य तय करना चाहिए। जब तक अपना लक्ष्य हासिल नहीं हो तब तक प्रयास करते रहना चाहिए। मैं कोटा आई तो पहली स्त्री रोग विभाग में महिला सर्जन थी पुरुष प्रधान समाज में इसको लेकर काफी भ्रांतियां भी फैलाई एक महिला सर्जन रूप में कई नकारात्मक चीजें आई उनका डटकर मुकाबला किया।  मुझे काम करना था तो मैंने हर चुनौती का स्वीकार कर इस फील्ड में आगे बढ़ती चली गई। स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सफर की शुरुआत हुई उसके बाद विभागाध्यक्ष, बूंदी मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य फिर ब्लड बैंक प्रभारी बनी । वर्तमान में जेकेलोन अधीक्षक पद पर हूं। सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि लगन से किया गया हर कार्य संभव हो जाता है।<br /><strong> - निर्मला शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>
<p> एक कोर टेक्निकल ब्रांच से इंजीनियरिंग करने के लिए वर्कशॉप मैनेजर बनने तक के सफर में हर कदम पर पुरुषों के साथ मिलकर काम शुरू किया। शुरू में एडजस्ट करने के लिए मुझे कुछ दिक्कतें भी आई पर जब मन में सोच लिया कि कुछ अलग करना है तो डर की जगह नहीं रहती। मेरे अनुसार महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता सबसे ज्यादा जरूरी है। हर लड़की को अपनी पसंद की किसी भी फील्ड में बिना डरे आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना चाहिए।<br /><strong>- सुचिता गुप्ता, मुख्य आगार प्रबंधक यातायात, कोटा</strong></p>
<p>महिला दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी साथी महिलाओं को बधाई देना चाहती हूॅ। परन्तु ये जोश ये जुनून सिर्फ आज तक सीमित न रहे। हर दिन महिला सशक्तिकरण सही अर्थों में तभी होगा । जब महिलाऐं न  सिर्फ अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगी बल्कि अपने जीवन के सभी निर्णय लेने का अधिकार होगा। वे अपने पिता, भाई, पति और पुत्र पर निर्भर नहीं होगी। वे पैसा कमाने के साथ पैसा का व्यय, नियोजन व निवेश का निर्णय भी स्वयं लें। पिछले 4 सालों से राजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से जुड़ी हुई हंू। इस अनुभव ने मेरी सोच बदली है- मैं आम ग्रामीण महिला की शक्ति का अनुभव करती हंू। महिलाएं हर दिन अपने आप को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। नई विधाएं सीख रही, साक्षर हो रही हैं। यहीं चाहती हंू। कि ये सभी महिलाएं निरंतर इस मार्ग पर आगे बढ़ती रहें।<br /><strong>-नेहा चतुर्वेदी, जिला परियोजना प्रबंधक राजीविका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day---wave-it--wave-it--wave-the-flag-of-the-land/article-106816</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day---wave-it--wave-it--wave-the-flag-of-the-land/article-106816</guid>
                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 14:56:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/lahara-do%2C-lahara-do-sarajamen-ka-paracham-lahara-do...kota-news-8.03.2025.jpg"                         length="736938"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC के फाइनल रिजल्ट में गुदड़ी के लालों ने रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[गंगापुर सिटी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/itihas.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गंगापुर सिटी।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। इन अभ्यर्थियों ने रोजाना 7-8 घंटे और परीक्षा के दिनों में 15-16 घंटे तक पढ़ाई की और सफलता हासिल की। इनकी सफलता पर दैनिक नवज्योति ने इनसे बातचीत की</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>वंदना मीणा को मिली 331वीं रैंक</strong> </span>: एक छोटे से गांव टोकसी की बेटी ने यूपीएससी एक्जाम के्रक कर साबित कर दिया कि प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती हैं। कल तक गांव की एक साधारण सी लड़की आज गांव के युवाओं की हीरो हो गई है। बात कर रहे हैं वंदना मीणा की जिसने आईएएस एक्जाम में 331वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर दिया। पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रही वंदना ने अपना ग्रेजुएशन 2018 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र जैन कॉलेज से किया। उन्होंने मैथ्स में आॅनर्स के साथ ग्रेजुएट किया। वंदना के पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में हैं और मां संपति देवी गृहिणी हैं। वंदना के अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उसने परीक्षा के दिनों में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई की। साल के बाकी दिनों में करीब 10 घंटे रोजाना पढ़ाई करना उसका रूटीन रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिद्धार्थ बोले</strong></span>- मैं कर्मयोगी हूं, भारतीय लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 के जारी हुए परिणामों में सिद्धार्थ बरवाल ने एसटी वर्ग में 18वीं रैंक हासिल की है। सिद्धार्थ के पिता बीएल मीणा अभी एक पखवाड़े पहले तक गंगापुर में मंडी सचिव थे, उनका हाल ही में जयपुर स्थानांतरण हुआ है। वहीं माता नीलम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। सिद्धार्थ का कहना है कि मैं कर्मयोगी हूं। कर्म पर विश्वास करता हूं। 2021 में आईआईटी कानपुर पास आउट होने के बाद आईपीएस में सफलता हासिल करने का लक्ष्य बनाया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंशुल नागर को भी मिली सफलता</strong></span> : बामनवास के गांव कोयला के निवासी अंशुल नागर का भी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चयन हुआ है। अंशुल के पिता डॉ. बीएल नागर फिलहाल निवाई में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं। अंशुल ने अपनी स्कूली शिक्षा एम्मानुएल मिशन स्कूल से की जबकि उच्च माध्यमिक परीक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर तीन जयपुर से प्राप्त की।<br />तनुश्री को पहले प्रयास में मिली सफलता:बामनवास का एक छोटा सा गांव है नाहरसिंह पुरा। इसी गांव की एक बेटी तनुश्री मीणा ने सफलता की नई इबारत लिख दी। तनुश्री का पहले ही प्रयास में आईएएस में चयन हो गया है। तनुश्री के पिता पुरुषोत्तम मीणा बीएसएनएल में अधिशासी अभियंता हैं और मां नारंगी देवी गृहिणी हैं। तनुश्री की पूरी शिक्षा जयपुर में ही हुई और उसने पहले ही प्रयास में आईएएस क्रेक किया।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>रोज 7-8 घंटे की पढ़ाई से मिली सफलता:</strong></span> सिविल सेवा परीक्षा में गगन सिंह मीणा का चयन आईएएस में हुआ है। गगन के पिता चरण सिंह मीणा किसान है और मां बच्ची देवी गृहिणी है। गगन के एक भाई है जो रेलवे में ईसीआरसी विभाग में कार्यरत है। गगन प्रतिदिन 7-8 घंटे नियमित पढ़ाई करते और उनका सपना आईएएस बनना था। हाल ही जारी की गई मेरिट में गगन को 592वीं मैरिट मिली है।<br />अभिषेक को मिली 670 वीं रैंक: इसी तरह इसी गांव मीणा बड़ौदा के अभिषेक मीणा का चयन यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में हुआ है। अभिषेक के पिता देशराज मीणा जलदाय विभाग में एसई है जबकि मांग सुशीला देवी गृहिणी है। अभिषेक बताते है कि उन्होंने जयपुर से बी-टेक कर दिगी से आईएस की तैयारी शुरू की और आईएएस बनना उनका सपना था। आईएएस की सूची में अभिषेक को 670वीं रैंक मिली है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 12:45:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/itihas.jpg"                         length="42581"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        