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                <title>meditation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>meditation RSS Feed</description>
                
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                <title>लाइफ़लॉंग लर्निंग विभाग की पहल: हृदय आधारित ध्यान और सकारात्मक आदतों से विद्यार्थी गढ़ेंगे अपना भविष्य </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विश्वविद्यालय में 'द आर्ट ऑफ लिविंग लाइफ डीपली' कार्यशाला का आगाज हुआ। डॉ. अमित शर्मा ने टीम वर्क और मानसिक शांति पर जोर दिया, जबकि डॉ. तनु रुंगटा ने हृदय आधारित ध्यान का प्रशिक्षण दिया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन और एकाग्रता के व्यावहारिक गुर सिखाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/initiative-of-lifelong-learning-department-students-will-shape-their-future/article-152937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के लाइफ़लॉंग लर्निंग विभाग द्वारा द आर्ट ऑफ लिविंग लाइफ डीपली विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ बुधवार, 6 मई 2026 को किया गया। कार्यशाला के प्रथम दिन विद्यार्थियों को मानसिक शांति, एकाग्रता और टीम वर्क के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। विभाग के निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने विभाग के विजन पर प्रकाश डालते हुए सत्र की शुरुआत की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, सफलता के लिए ईमानदारी और एकजुट होकर कार्य करना अनिवार्य है। डॉ. शर्मा ने दैनिक जीवन की अच्छी आदतों के महत्व पर जोर दिया और बताया कि कैसे छोटे-छोटे अनुशासन जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।</p>
<p>कार्यशाला की समन्वयक डॉ. चित्रा चौधरी ने तीन दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें तनावमुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। हृदय आधारित ध्यान का प्रशिक्षण प्रथम दिवस के मुख्य सत्र में आमंत्रित वक्ता डॉ. तनु रुंगटा ने हृदय आधारित ध्यान पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ध्यान के लाभों को साझा करते हुए इसके नियमित अभ्यास की विधि समझाई। डॉ. रुंगटा ने विद्यार्थियों को ध्यान का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया, जिससे प्रतिभागियों ने स्वयं मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:28:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>योग, ध्यान और संकल्प : राजस्थान विश्वविद्यालय में गूंजा नशामुक्त और विकसित भारत का संदेश, मानसिक शांति और 'ह्यूमन लाइब्रेरी' से करियर की राह सीखेंगे एनएसएस के स्वयंसेवक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग की एनएसएस इकाई ने सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन। हृदय आधारित ध्यान और नशामुक्ति पर ध्यान केंद्रित। डॉ. अमित शर्मा ने नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने की महत्ता। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/yoga-meditation-and-resolution-message-of-drug-free-and-developed-india/article-146673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के रसायनशास्त्र विभाग की एनएसएस इकाई के राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस के अंतर्गत विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अमित शर्मा ने शिविर की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि, एनएसएस का यह सात दिवसीय विशेष शिविर केवल एक गतिविधि मात्र नहीं है, बल्कि यह स्वयंसेवकों के भीतर नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की एक कार्यशाला है। उन्होंने बताया कि शिविर का तृतीय दिवस हृदय आधारित ध्यान एवम् नशामुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समर्पित किया गया, ताकि युवा शक्ति अपनी ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में कर सके।</p>
<p>विभागाध्यक्षा प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का समन्वय ही किसी विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का आधार है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में हृदय आधारित ध्यान न केवल तनाव को कम करने में सहायक है, बल्कि यह एकाग्रता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय का रसायनशास्त्र विभाग निरंतर ऐसे नवाचारों का समर्थन करता है जो विद्यार्थियों को समाज के प्रति संवेदनशील और व्यक्तिगत रूप से सुदृढ़ बनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 17:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>90 की उम्र में दलाई लामा मिला पहला ग्रैमी अवार्ड, जानें आखिर क्यों मिला इनको ये अवार्ड ?</title>
                                    <description><![CDATA[दलाई लामा ने ऑडियोबुक “Meditations” के लिए ग्रैमी अवॉर्ड जीता। उन्होंने इसे शांति, करुणा और वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता बताया, व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देर रात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवाड्र्स में 'बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग श्रेणी में विजेता चुना गया। इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट'मेडिटेशंस : द रिफलेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा के लिए मिला है। उनके अलावा इस श्रेणी में मशहूर कॉमेडियन और लेखक ट्रेवर नोआ ( इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन) और कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एडं मी) जैसे नाम शामिल थे।</p>
<p>पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक संत दलाई लामा ने अपनी चिर-परिचित सादगी और विनम्रता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मैं इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता को समझना आज दुनिया के आठ अरब लोगों की भलाई के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>दलाई लामा की कृति मेडिटेशंस महज एक किताब का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और शांति की एक यात्रा है। इसमें उनके गहरे आध्यात्मिक चिंतन और प्रवचनों का संग्रह है। इसमें उनके द्वारा 'निर्देशित ध्यान और करुणा के दर्शन को आवाज दी गई है। इस ऑडियो नैरेशन का उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति प्रदान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:15:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कन्याकुमारी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साधना से निकले नए संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[हमें Speed, Scale, Scope और Standards, चारों दिशाओं में तेजी से काम करना होगा। हमें मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ क्वालिटी पर जोर देना होगा, हमें zero defect- zero effect के मंत्र को आत्मसात करना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/new-resolutions-emerged-from-the-meditation-of-prime-minister-narendra/article-80272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>मेरे प्यारे देशवासियों,<br />लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का एक पड़ाव 1 जून को पूरा हो रहा है। तीन दिन तक कन्याकुमारी में आध्यात्मिक यात्रा के बाद, मैं अभी दिल्ली जाने के लिए हवाई जहाज में आकर बैठा ही हूं...काशी और अनेक सीटों पर मतदान चल ही रहा है। कितने सारे अनुभव हैं, कितनी सारी अनुभूतियां हैं...मैं एक असीम ऊर्जा का प्रवाह स्वयं में महसूस कर रहा हूं। </p>
<p>वाकई, 24 के इस चुनाव में, कितने ही सुखद संयोग बने हैं। अमृतकाल के इस प्रथम लोकसभा चुनाव में मैंने प्रचार अभियान 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की प्रेरणास्थली मेरठ से शुरू किया। माँ भारती की परिक्रमा करते हुए इस चुनाव की मेरी आखिरी सभा पंजाब के होशियारपुर में हुई। संत रविदास जी की तपोभूमि, हमारे गुरुओं की भूमि पंजाब में आखिरी सभा होने का सौभाग्य भी बहुत विशेष है। इसके बाद मुझे कन्याकुमारी में भारत माता के चरणों में बैठने का अवसर मिला। उन शुरुआती पलों में चुनाव का कोलाहल मन-मस्तिष्क में गूंज रहा था। रैलियों में, रोड शो में देखे हुए अनगिनत चेहरे मेरी आंखों के सामने आ रहे थे। माताओं-बहनों-बेटियों के असीम प्रेम का वो  वार, उनका आशीर्वाद...उनकी आंखों में मेरे लिए वो विश्वास, वो दुलार...मैं सब कुछ आत्मसात कर रहा था। मेरी आंखें नम हो रही थीं...मैं शून्यता में जा रहा था, साधना में प्रवेश कर रहा था। </p>
<p>कुछ ही क्षणों में राजनीतिक वाद विवाद, वार-पलटवार...आरोपों के स्वर और शब्द, वह सब अपने आप शून्य में समाते चले गए। मेरे मन में विरक्ति का भाव और तीव्र हो गया...मेरा मन बाह्य जगत से पूरी तरह अलिप्त हो गया। <br />इतने बड़े दायित्वों के बीच ऐसी साधना कठिन होती है, लेकिन कन्याकुमारी की भूमि और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने इसे सहज बना दिया। मैं सांसद के तौर पर अपना चुनाव भी अपनी काशी के मतदाताओं के चरणों में छोड़कर यहाँ आया था। </p>
<p>मैं ईश्वर का भी आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे जन्म से ये संस्कार दिये। मैं ये भी सोच रहा था कि स्वामी विवेकानंद जी ने उस स्थान पर साधना के समय क्या अनुभव किया होगा! मेरी साधना का कुछ हिस्सा इसी तरह के विचार प्रवाह में बहा।</p>
<p>इस विरक्ति के बीच, शांति और नीरवता के बीच, मेरे मन में निरंतर भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए, भारत के लक्ष्यों के लिए निरंतर विचार उमड़ रहे थे। कन्याकुमारी के उगते हुए सूर्य ने मेरे विचारों को नई ऊंचाई दी, सागर की विशालता ने मेरे विचारों को विस्तार दिया और क्षितिज के विस्तार ने ब्रह्मांड की गहराई में समाई एकात्मकता, oneness का निरंतर ऐहसास कराया। ऐसा लग रहा था जैसे दशकों पहले हिमालय की गोद में किए गए चिंतन और अनुभव पुनर्जीवित हो रहे हों। </p>
<p>साथियों,<br />कन्याकुमारी का ये स्थान हमेशा से मेरे मन के अत्यंत करीब रहा है। कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण एकनाथ रानडे ने करवाया था। एकनाथ के साथ मुझे काफी भ्रमण करने का मौका मिला था। इस स्मारक के निर्माण के दौरान कन्याकुमारी में कुछ समय रहना, वहां आना-जाना, स्वाभाविक रूप से होता था। </p>
<p>कश्मीर से कन्याकुमारी... ये हर देशवासी के अन्तर्मन में रची-बसी हमारी साझी पहचान हैं। ये वो शक्तिपीठ है जहां मां शक्ति ने कन्या कुमारी के रूप में अवतार लिया था। इस दक्षिणी छोर पर माँ शक्ति ने उन भगवान शिव के लिए तपस्या और प्रतीक्षा की जो भारत के सबसे उत्तरी छोर के हिमालय पर विराज रहे थे।</p>
<p>कन्याकुमारी संगमों के संगम की धरती है। हमारे देश की पवित्र नदियां अलग-अलग समुद्रों में जाकर मिलती हैं और यहां उन समुद्रों का संगम होता है। और यहाँ एक और महान संगम दिखता है- भारत का वैचारिक संगम!<br />यहां विवेकानंद शिला स्मारक के साथ ही संत तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा, गांधी मंडपम और कामराज मणि मंडपम हैं। महान नायकों के विचारों की ये धाराएँ यहाँ राष्ट्र चिंतन का संगम बनाती हैं। इससे राष्ट्र निर्माण की महान प्रेरणाओं का उदय होता है। जो लोग भारत के राष्ट्र होने और देश की एकता पर संदेह करते हैं, उन्हें कन्याकुमारी की ये धरती एकता का अमिट संदेश देती है। कन्याकुमारी में संत तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा, समंदर से मां भारती के विस्तार को देखती हुई प्रतीत होती है। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य के रत्नों से जड़ित एक मुकुट के जैसी है। इसमें जीवन के हर पक्ष का वर्णन है, जो हमें स्वयं और राष्ट्र के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता है। ऐसी महान विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी मेरा परम सौभाग्य रहा। <br />साथियों,<br />स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था-  Every Nation Has a Message To deliver, a mission to fulfil, a destiny to reach. </p>
<p>भारत हजारों वर्षों से इसी भाव के साथ सार्थक उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ता आया है। भारत हजारों वर्षों से विचारों के अनुसंधान का केंद्र रहा है। हमने जो अर्जित किया उसे कभी अपनी व्यक्तिगत पूंजी मानकर आर्थिक या भौतिक मापदण्डों पर नहीं तौला। इसीलिए, ‘इदं न मम’ यह भारत के चरित्र का सहज एवं स्वाभाविक हिस्सा हो गया है।<br />भारत के कल्याण से विश्व का कल्याण, भारत की प्रगति से विश्व की प्रगति, इसका एक बड़ा उदाहरण हमारी आजÞादी का आंदोलन भी है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उस समय दुनिया के कई देश गुलामी में थे। भारत की स्वतन्त्रता से उन देशों को भी प्रेरणा और बल मिला, उन्होंने आजादी प्राप्त की। अभी कोरोना के कठिन कालखंड का उदाहरण भी हमारे सामने है। जब गरीब और विकासशील देशों को लेकर आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, लेकिन, भारत के सफल प्रयासों से तमाम देशों को हौसला भी मिला और सहयोग भी मिला। आज भारत का गवर्नेंस मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण बना है। सिर्फ 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना अभूतपूर्व है। गरीब के सशक्तिकरण से लेकर लास्ट माइल डिलीवरी तक, समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता देने के हमारे प्रयासों ने विश्व को प्रेरित किया है। भारत का डिजिटल इंडिया अभियान आज पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण है कि हम कैसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल गरीबों को सशक्त करने में, पारदर्शिता लाने में, उनके अधिकार दिलाने में कर सकते हैं। भारत में सस्ता डेटा आज सूचना और सेवाओं तक गरीब की पहुँच सुनिश्चित करके सामाजिक समानता का माध्यम बन रहा है। पूरा विश्व technology के इस democratization को एक शोध दृष्टि से देख रहा है और बड़ी वैश्विक संस्थाएं कई देशों को हमारे मॉडल से सीखने की सलाह दे रही हैं। <br />आज भारत की प्रगति और भारत का उत्थान केवल भारत के लिए बड़ा अवसर नहीं है। ये पूरे विश्व में हमारे सभी सहयात्री देशों के लिए भी एक ऐतिहासिक अवसर है। जी-20 की सफलता के बाद से विश्व भारत की इस भूमिका को और अधिक मुखर होकर स्वीकार कर रहा है। आज भारत को ग्लोबल साउथ की एक सशक्त और महत्वपूर्ण आवाजÞ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। भारत की ही पहल पर अफ्रीकन यूनियन जी-20 ग्रुप का हिस्सा बना। ये सभी अफ्र्रीकन देशों के भविष्य का एक अहम मोड़ साबित हुआ है।</p>
<p>साथियों,<br />नए भारत का ये स्वरूप हमें गर्व और गौरव से भर देता है, लेकिन, साथ ही ये 140 करोड़ देशवासियों को उनके कर्तव्यों का अहसास भी करवाता है। अब एक भी पल गँवाए बिना हमें बड़े दायित्वों और बड़े लक्ष्यों की दिशा में कदम उठाने होंगे। हमें नए स्वप्न देखने हैं। अपने सपनों को अपना जीवन बनाना है, और उन सपनों को जीना शुरू करना है। </p>
<p>हमें भारत के विकास को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा, और इसके लिए ये जरूरी है कि हम भारत के अंतर्भूत सामर्थ्य को समझें। हमें भारत की शक्तियों को स्वीकार भी करना होगा, उन्हें पुष्ट भी करना होगा और विश्व हित में उनका सम्पूर्ण उपयोग भी करना होगा। आज की वैश्विक परिस्थितियों में युवा राष्ट्र के रूप में भारत का सामर्थ्य हमारे लिए एक ऐसा सुखद संयोग और सुअवसर है जहां से हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना है।</p>
<p>21वीं सदी की दुनिया आज भारत की ओर बहुत आशाओं से देख रही है। और वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए हमें कई बदलाव भी करने होंगे। हमें reform को लेकर हमारी पारंपरिक सोच को भी बदलना होगा। भारत reform को केवल आर्थिक बदलावों तक सीमित नहीं रखना है। हमें जीवन में हर क्षेत्र में reform की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारे reform 2047 के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप भी होने चाहिए।</p>
<p>हमें ये भी समझना होगा कि किसी भी देश के लिए reform कभी एकाकी प्रक्रिया नहीं हो सकती। इसीलिए, मैंने देश के लिए reform, perform और transform का विज़न सामने रखा। reform का दायित्व नेतृत्व का होता है। उसके आधार पर हमारी ब्यूरोक्रेसी perform करती है और फिर जब जनता जनार्दन इससे जुड़ जाती है, तो transformation होते हुए देखते हैं। </p>
<p>भारत को विकसित भारत बनाने के लिए हमें श्रेष्ठता को मूल भाव बनाना होगा। हमें Speed, Scale, Scope और Standards, चारों दिशाओं में तेजी से काम करना होगा। हमें मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ क्वालिटी पर जोर देना होगा, हमें zero defect- zero effect के मंत्र को आत्मसात करना होगा।</p>
<p>साथियों,<br />हमें हर पल इस बात पर गर्व होना चाहिए कि ईश्वर ने हमें भारत भूमि में जन्म दिया है। ईश्वर ने हमें भारत की सेवा और इसकी शिखर यात्रा में हमारी भूमिका निभाने के लिए चुना है।<br />हमें प्राचीन मूल्यों को आधुनिक स्वरूप में अपनाते हुये अपनी विरासत को आधुनिक ढंग से पुनर्परिभाषित करना होगा।</p>
<p>हमें एक राष्ट्र के रूप में पुरानी पड़ चुकी सोच और मान्यताओं का परिमार्जन भी करना होगा। हमें हमारे समाज को पेशेवर निराशावादियों के दबाव से, Professional Pessimists के दबाव से बाहर निकालना है। हमें याद रखना है, नकारात्मकता से मुक्ति, सफलता की सिद्धि तक पहुंचने के लिए पहली जड़ी-बूटी है। सकारात्मकता की गोद में ही सफलता पलती है।</p>
<p>भारत की अनंत और अमर शक्ति के प्रति मेरी आस्था, श्रद्धा और विश्वास भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। मैंने पिछले 10 वर्षों में भारत के इस सामर्थ्य को और  ज्यादा बढ़ते देखा है और  ज्यादा अनुभव किया है। जिस तरह हमने 20वीं सदी के चौथे-पांचवें दशक को अपनी आज़ादी के लिए प्रयोग किया, उसी तरह 21वीं सदी के इन 25 वर्षों में हमें विकसित भारत की नींव रखनी है। स्वतंत्रता संग्राम के समय देशवासियों के सामने बलिदान का समय था। आज बलिदान का नहीं निरंतर योगदान का समय है।</p>
<p>स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कहा था कि हमें अगले 50 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करने होंगे। उनके इस आह्वान के ठीक 50 वर्ष बाद, 1947 में भारत आज़ाद हो गया।</p>
<p>आज हमारे पास वैसा ही स्वर्णिम अवसर है। हम अगले 25 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करें। हमारे ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों और आने वाली शताब्दियों के लिए नए भारत की सुदृढ़ नींव बनकर अमर रहेंगे। मैं देश की ऊर्जा को देखकर ये कह सकता हूँ कि लक्ष्य अब दूर नहीं है। आइए, तेज कदमों से चलें...मिलकर चलें, भारत को विकसित बनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 11:05:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बाड़ाबंदी में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर, लेकिन पहले योग-ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के विधायको ने मंगलवार को बाड़ाबंदी की पहले दिन सुबह एक साथ योग और ध्यान से अपने दिन की शुरुआत की। भाजपा ने विधायकों की बाड़ा बंदी को प्रशिक्षण शिविर नाम दिया है । इस शिविर में 10 जून को राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशियों का मतदान होने तक कुल 3 दिन में 13 शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिसकी शुरुआत सोमवार कि शाम को हो चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bjps-training-camp-in-barabandi-but-first-yoga-meditation/article-11526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bjp2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के विधायको ने मंगलवार को बाड़ाबंदी की पहले दिन सुबह एक साथ योग और ध्यान से अपने दिन की शुरुआत की। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंदर राठोड़ सहित सभी नेताओं ने योग में हिस्सा लिया। बाडा बंदी के पहले दिन मंगलवार को विधायकों के लिए 3 सत्र आयोजित किये जाएगे। जिनमें विधायकों को पार्टी की रीति-नीति, मोदी सरकार की 8 साल में हुए कामों और प्रदेश सरकार की विफलता वो को लेकर संवाद होगा और प्रदेश भर की सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी । वहीं देर शाम राज्यसभा चुनाव की वोटिंग की प्रैक्टिस की जाएगी।</p>
<p><span style="color:#ff6600;"><strong>बड़ा बंदी में शुरू हुआ भाजपाइयों का सत्र</strong></span><br />भाजपा ने विधायकों की बाड़ा बंदी को प्रशिक्षण शिविर नाम दिया है । इस शिविर में 10 जून को राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशियों का मतदान होने तक कुल 3 दिन में 13 शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिसकी शुरुआत सोमवार कि शाम को हो चुकी है। मंगलवार को कुल 3 सत्र आयोजित होने हैं। भाजपा की ओर से आयोजित "विधायक अभ्यास वर्ग" के आज के प्रथम सत्र में विधायक पुष्पेंद्र सिंह की अध्यक्षता में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं हमारी विकास यात्रा’ विषय पर गुलाब चंद कटारिया ने संबोधित किया। बाड़ा बंदी के दौरान लगातार तीन दिन तक शाम को विधायकों को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की प्रक्रिया की प्रैक्टिस कराई जाएगी। जिसे मतदान प्रशिक्षण नाम दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 12:59:32 +0530</pubDate>
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                <title>आप भी हैं चेहरे पर ज्यादा पसीना आने से परेशान ? तो जाने क्या करें उपाय.....</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों में पसीना आने की समस्या आम है,पसीना सबको आता है ,लेकिन बहुत ज्यादा पसीना आना एक समस्या भी हो सकता है,वहीं कई लोगों के चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आता है,जिसकी वजह से बहुत से लोग परेशान रहते हैं,चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आने से स्किन पर बुरा असर भी पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/are-you-also-troubled-by-excessive-sweating-on-your-face/article-10953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ww.jpg" alt=""></a><br /><p>गर्मियों में पसीना आने की समस्या आम है,पसीना सबको आता है ,लेकिन बहुत ज्यादा पसीना आना एक समस्या भी हो सकता है,वहीं कई लोगों के चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आता है,जिसकी वजह से बहुत से लोग परेशान रहते हैं,चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आने से स्किन पर बुरा असर भी पड़ता है, हालांकि पसीना आना एक तरह का नेचुरल प्रोसेस है,पसीने के जरिए शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, लेकिन चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आने से पिंपल्स और चेहरे पर दानें जैसी समस्या होने लगती है,ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है ,आप चेहरे पर ज्यादा पसीना आने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>पसीना क्यों आता है</strong></span><br />वैसे तो पसीना आना सामान्य बात है लेकिन चेहरे पर पसीना आना गंभीर समस्या हो सकती है,चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना क्रोनियोफेशियल हाइपरहाइड्रोसिस  के कारण आता है,ये समस्या कई कारणों से हो सकती है,जैसे की मौसम में बदलाव, स्ट्रेस कुछ दवाओं का अधिक सेवन करना, स्मोकिंग करना, पसीने की ग्रंथियों का ज्यादा एक्टिव होना और कुछ बीमारियों के कारण भी आपको बहुत पसीना आता है, मोटापा, इन्फेक्शन, लो बल्ड शुगर, थायरॉयड ।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>बचने के उपाय</strong></span><br />चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आने पर आपको बहुत ज्यादा गर्म जगहों पर जाने से बचना चाहिए। चेहरे पर टमाटर के रस का इस्तेमाल करें,इसका इस्तेमाल करने से आपके चेहरे पर मौजूद छिद्र बंद हो जाएंगे और आपको पसीना कम आएगा।कुछ लोगों में मानसिक समस्याओं के कारण भी होती है,इससे बचने के लिए आपको रोजाना योग या मेडिटेशन जरूर करना चाहिए।<br />आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए,ऐसा करने से आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 13:39:44 +0530</pubDate>
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