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                <title>bad condition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आईपीएल से पहले दस करोड़ खर्च कर बनाया वीआईपी साउथ स्टेंड, एक ही बरसात ने बिगाड़ दी सूरत</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस स्टेडियम के वीआईपी साउथ स्टेंड को आईपीएल मैचों से पहले नए सिरे से तैयार किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vip-south-stand-made-surat-by-spending-ten-crores-before/article-122365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस स्टेडियम के वीआईपी साउथ स्टेंड को आईपीएल मैचों से पहले नए सिरे से तैयार किया गया। राजस्थान रॉयल्स ने इस पर करीब दस करोड़ रुपए खर्च किए। लेकिन सीजन की पहली ही बरसात ने इस स्टेंड की सूरत बिगाड़ दी। अब राजस्थान खेल परिषद के नोटिस के बाद साउथ स्टेंड पर रिपेयरिंग का काम शुरू किया गया है। इस नए निर्माण और साज-सज्जा पर दस करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन स्टेंड मानसूनी बारिश को नहीं झेल सका।</p>
<p><strong>अपने भवन पर भी नजर डाले खेल परिषद :</strong></p>
<p>खेल परिषद ने राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना को नोटिस जारी कर खामियों को दुरुस्त करने को कहा है। खेल परिषद के अधिकारियों के दफ्तर की बालकनी से भी पानी टपक रहा है और इंडोर स्टेडियम के एक छोर की बालकनी की हालत भी खराब है। नॉर्थ-ईस्ट स्टेंड के पीछे बना एक कमरा वर्षों से बल्लियों के सहारे टिका है।</p>
<p><strong>बरसात से भारी नुकसान :</strong></p>
<p>बरसात का पानी फर्स्ट फ्लोर पर बने लांग रूम और ग्राउण्ड फ्लोर पर बने हॉल तक पहुंच गया और दोनों ही जगह फॉल्स-सीलिंग गिर गई। पूरे साउथ स्टेंड में लगी लाइटें और बिजली के तार हवा में झूल रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे स्टेंड की लाइट काट दी गई है। फर्श पर भरे पानी से वुडन फ्लोरिंग को भी नुकसान पहुंचा है। ग्राउण्ड फ्लोर पर बने खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में भी पानी घुस गया। भारी सीलन से ड्रेसिंग रूम की दीवारों का वुडन वर्क फूल गया है।</p>
<p><strong>7 से होगी लीजेन-जी लीग :</strong></p>
<p>अब चिंता यह है कि 7 अगस्त से यहां लीजेन-जी टी-10 लीग है। इसके लिए आयोजकों ने स्टेडियम के ग्राउण्ड के साथ साउथ और नॉर्थ पवेलियन को भी बुक किया है। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद की अध्यक्षता वाली इस लीग में हर्शल गिब्स, रॉस टेलर, तिलकरत्ने दिलशान, यूसुफ पठान, एरोन फिंच और अन्य दिग्गज हिस्सा लेंगे। अधिकांश खिलाड़ी 5 अगस्त को जयपुर पहुंच रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 11:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एजेंसी ने जारी की चेतावनी : अपनी सबसे खराब स्थिति में गाजा में अकाल, फैल रही है भुखमरी </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एक खाद्य सुरक्षा एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि गाजा में इस समय अकाल अपनी सबसे खराब स्थिति में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/united-nations-related-agency-issued-warning/article-122110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws-(5).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एक खाद्य सुरक्षा एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि गाजा में इस समय अकाल अपनी सबसे खराब स्थिति में है। इंटीग्रेटिड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (आईपीसी) एजेंसी ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि यहां संघर्ष तीव्र होने और बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन के कारण भोजन, दूसरी जरुरी चीजों और सेवाओं में भारी गिरावट आई है। इस वजह से यहां भुखमरी, कुपोषण और दूसरी बीमारियां फैल रही हैं।</p>
<p>आईपीसी ने कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य तेजी से खराब होती मानवीय स्थिति पर तत्काल ध्यान आकर्षित करना है। इसमें कहा गया है कि 20 हजार से ज्यादा बच्चों को अत्यधिक कुपोषण के इलाज के लिए भर्ती कराया गया। इनमें से 3,000 से ज्यादा गंभीर रूप से कुपोषित हैं। एजेंसी ने अपने अलर्ट में कहा कि शत्रुतापूर्ण कार्रवाई खत्म हो और लोगों के जीवन पर आसन्न खतरों को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए।</p>
<p>उधर इजरायल पर नाकाबंदी तोड़ने, गाजा में सहायता पहुँचाने और युद्ध समाप्त करने का अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दबाव बढ़ रहा है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि गाजा में वास्तविक भुखमरी है। यह बयान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पहले के उन बयानों के विपरीत है, जिन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि वहाँ कोई भुखमरी नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 15:54:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरे में बचपन, घट रहा नामांकन जर्जर सरकारी स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा व सुल्तानपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बुरे हाल ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-in-danger--enrollment-decreasing-in-dilapidated-government-schools/article-120918"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंधेर नगरी, चौपट राजा..., कहावत की यह पंक्तियां इन दिनों कोटा जिले के राजकीय विद्यालयों व शिक्षाधिकारियों पर सटीक बैठती है। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर कल्पना तक नहीं की जा सकती। हालात यह है, सरकार एक तरफ नामांकन बढ़ाने पर जोर दे रही है वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की लापरवाही से नामांकन बढ़ने के बजाए लगातार घट रहा है। विभागीय अधिकारियों के क्वालिटी एजुकेशन के दावों की ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में धज्जियां उड़ रही हैं। इटावा व सुल्तानपुर ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय एक-एक कमरों में चल रहे हैं। जबकि, अन्य कमरें जर्जर हो चुके हैं। जिन्हें ताला लगाकर बंद कर दिया गया है। </p>
<p><strong>डिंडोरा व रणमल दोनों ही स्कूलों में घटा नामांकन: </strong>सुल्तानपुर व इटावा ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रणमल व राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डिंडोरा दोनों में ही गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष नामांकन घट गया है। रणमल स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक कुल 18 विद्यार्थियों का नामांकन था, जो इस वर्ष घटकर 11 ही रह गया। यहां कक्षा-3 में एक भी विद्यार्थी नहीं है। नामांकन जीरो है। वहीं, पहली कक्षा में अब तक मात्र-1 ही विद्यार्थी का दाखिला हुआ है। इसी तरह इटावा ब्लॉक के डिंडोरा स्कूल में पिछले साल कुल 28 छात्र-छात्राओं का नामांकन था, जो अब तक घटकर 24 ही रह गए।</p>
<p><strong>ब्लॉक इटावा : स्कूल डिंडोरा के हालत</strong><br /><strong>एक कमरे में लगती 5 कक्षाएं</strong><br />स्कूल शिक्षक से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय में वर्तमान में कुल 4 कक्ष हैं, जिनमें से 2 पूरी तरह से जर्जर हैं, जिनमें विद्यार्थियों को नहीं बिठाया जाता।। एक प्रधानाध्यापक कक्ष है, जिसकी छत से प्लास्टर  गिरता रहता है, छतें टपकती है। ऐसे में एक ही कक्ष है, जिसमें कक्षा 1 से 5वीं तक की क्लासें लगती है। यह कक्ष भी गत मई-जून माह में स्थानीय भामाशाह बच्छाराजी मीणा ने 3 लाख रुपए की लागत से बनवाया है। </p>
<p><strong>जहां मिड-डे मिल बनता, उसी में बच्चे पढ़ते</strong><br />गत दो माह पहले भामाशाह द्वारा बनवाया गया एक ही कक्ष बच्चों को बिठाने लायक है। इसी में एक साथ पांच कक्षा चलती है और इसी में बच्चों के लिए मिड-डे मिल का भोजन बनता है। क्योंकि, बारिश के दिनों में पोषाहार को गिला होने से बचाने के लिए इसी भवन में खाद्यय सामग्री रखी जाती है। यहां पढ़ाने के लिए  दो ही शिक्षक ही, जिसमें से एक के पास बीएलओ का चार्ज भी है। </p>
<p><strong>ब्लॉक सुल्तानपुर : स्कूल बंबूलिया रणमल के हालत</strong><br /><strong>1 से 5वीं तक 11 ही विद्यार्थी, 7 की कटी टीसी</strong><br />इस स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक वर्तमान में 11 ही विद्यार्थियों का नामांकन है। जबकि, गत वर्ष 18 बच्चे थे। ऐसे में 7 बच्चों की टीसी कट चुकी है। हालांकि, अभी प्रवेशोत्सव चल रहा है। विद्यालय में 1 ही कक्षा में 5वीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। सुविधाओं का अभाव होने के कारण अभिभावक भी सरकारी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने में रुचि नहीं रखते और प्राइवेट विद्यालयों में दाखिला करवा रहे हैं। </p>
<p><strong>3 में से 2 कमरे जर्जर, दीवारें भी क्षतिग्रस्त</strong><br />बम्बूलिया रणमल विद्यालय में एकमात्र शिक्षक रामकल्याण मीणा ने बताया कि स्कूल में कुल 3 कक्ष  है। इसमें 2 जर्जर हो चुके हैं। एक ही कक्ष है, जिसमें  एक से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित करवाते हैं।   बच्चों का नामांकन भी कम है। पढ़ाने के अलावा बीएलओ का भी चार्ज है। विभाग द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाएं भी खुद ही तैयार करनी पड़ती है और गांव में मतदाताओं की संख्या, नाम जोड़ने से लेकर हटाने तक के सभी कार्य स्वयं करने पड़ते हैं। स्कूल के संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी भेजी हुई है। </p>
<p><strong>छत की पट्टियां टूटी, लोहे के पाइप से रोकी </strong><br />उन्होंने बताया कि जिस कमरे में मिड-डे मिल बनता है, उसकी छत की पट्टियां टूटी हुई है। दरारें चल रही हैं, जिसे लोहे के पाइप को बेल्डिंग करवाकर रोक रखी है। इसी में पोषाहार भी रखा जाता है। दूसरा कमरा नहीं होने से मजबूरी में इसी कमरे में रखना पड़ता है। वहीं, बारिश के दौरान हादसे की आशंका लगी रहती  है। स्कूल में उच्चाधिकारियों से एक और शिक्षक लगाने की मांग की थी लेकिन अब तक नहीं लगाया गया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />विद्यालय जर्जर अवस्था में है। बरसों से इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई। शिक्षाधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन समाधान नहीं हुआ। इन दिनों भारी बारिश का दौर चल रहा है, ऐसे में अनहोनी की आशंका लगी रहती है। ऐसे में बच्चों को निजी स्कूल में भेजते हैं।<br /><strong>- केदार लाल, अभिभावक डिंडोरा गांव </strong></p>
<p>शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को गांव में आकर स्कूल के हालात देखना चाहिए। यहां कक्षा-कक्ष जर्जर हैं, दीवारे ढह गई, छतों की पट्टियां टूट रही है। एक ही कक्षा में एक से पांचवी तक की कक्षाएं चलाई जाती है। जिस दिन बारिश नहीं होती उस दिन खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगती हैं। <br /><strong>- बजरंग कुमार, अभिभावक बम्बूलिया गांव </strong></p>
<p>शिक्षा मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्कूलों के हालत   बदतर हो रहे हैं। मैंने स्कूल बचाओ अभियान के तहत इन स्कूलों की स्थति से शिक्षा विभाग व प्रशासन को अवगत कराया, इसके बावजूद सुधारात्मक कार्य नहीं हुआ। जिम्मेदारों की अनदेखी से बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी रहती है। प्रशासन को विद्यार्थियों के हित में  ठोक कदम उठाकर जर्जर भवनों का जीर्णोंद्धार करवाना चाहिए। ताकि, विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिल सके।<br /><strong>- शिव प्रकाश नागर, जिलाध्यक्ष, बेरोजगार महासंघ कोटा</strong></p>
<p>समग्र शिक्षा विभाग के इंजीनियर्स से विद्यालयों का सर्वे करवाया है। जिसमें कई स्कूल जर्जर मिले हैं। जो भवन विद्यार्थियों के लिहाज से असुरक्षित हैं, उन्हें डिसमेंटल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, कई विद्यालय भवन  ऐसे हैं, जिनमें मरम्मत की आवश्यकता है, वहां रिपेयरिंग करवाई जाएगी।  साथ ही नए भवन निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं व भामाशाहों से सहयोग का आग्रह किया है। विभागीय उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना की जा रही है। <br /><strong>- रूप सिंह मीणा, जिला शिक्षाधिकारी प्रारंभिक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jul 2025 18:22:55 +0530</pubDate>
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                <title>बाल उद्यान में बच्चों के झूले तो हैं लेकिन झूलने लायक एक भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[7 साल पहले पार्क पर किए थे लाखों रुपए खर्च।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-swings-for-children-in-bal-udyan-but-none-of-them-are-fit-for-swinging/article-103240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर में भगवान महावीर के नाम पर बाल उद्यान तो बनाया हुआ है। उस उद्यान में बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं लेकिन इसकी हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि वहां एक भी झूला झूलने लायक नहीं है। सभी टूटे होने से बच्चों के चोट लगने का खतरा बना हुआ है। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 35 में जयपुर गोल्डन बहुमंजिला पार्किंग के सामने मुख्य मार्ग पर तालाब किनारे है भगवान महावीर बाल उद्यान। तालाब के किनारे और मैन रोड पर होने से यहां से गुजरने वाले अधिकतर लोग इस उद्यान को देखकर अनायास रूक जाते है। अपने छोटे बच्चों को पार्क में लेकर जाते हैं। जिससे वे कुछ देर बच्चों को पार्क में घुमा सकें और उन्हें छोटे-छोटे झूलों का आनंद दिला सके। लेकिन अधिकतर लोग वहां अंदर जाकर पार्क की हालत देखकर ही  बच्चों को बिना झूला झुलाए ही वापस लौट रहे हैं। इसका कारण पार्क के सभी झूलों का टूटा होना है। </p>
<p><strong>2018 में हुआ था पार्क का लोकार्पण</strong><br />पार्क  के विकास कार्यों का लोकार्पण अप्रैल 2018 में कोटा उत्तर के तत्कालीन विधायक प्रहलाद गुंजल व न्यास के अध्यक्ष राम कुमार मेहता व महापौर महेश विजय ने किया था। उसके बाद से यह पार्क कुछ समय तक तो सही रहा। लेकिन वर्तमान में बदहाली का शिकार हो रहा है।</p>
<p><strong>न्यास अधिकारी नहीं देते ध्यान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर वार्ड 35 के स्थानीय पार्षद सुनील शर्मा का कहना है कि यह पार्क उनके वार्ड  में है लेकिन पार्क केडीए(न्यास) के अधीन आता है। इस पार्क के टूटे झूले सही करवाने के लिए अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया लेकिन वे कोई ध्यान ही नहीं देते। इस पार्क के टूटे झूले सही करवाने के प्रयास किए जाएंगे। इधर कोटा विकास प्राधिकरण के एक्सइएन सुमित चित्तौडा का कहना है कि झूलों व उसकी मरम्मत का आंकलन कराया जा रहा है। उसके बाद उन्हें सही कराया जाएगा।</p>
<p><strong>एक भी झूला नहीं है सही</strong><br />पार्क में मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही बच्चों की फिसल पट्टी वाला झूला है। दो पट्टी हैं लेकिन दोनों नीचे से टूटी हुई है। जिससे बच्चा यदि फिसलता हुआ नीचे आता है तो उस टूटे हिस्से के पास आने पर उसके चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में परिजन अपने बच्चों को इस झूले में नहीं झुलाकर दूसरे झूले की तरफ जाते हैं। पास ही लोहे के पाइप पर जंजीर से लटके हुए दो पट्टे वाले झूले हुआ करते थे। लेकिन वे दोनों ही झूले गायब हैं। वहां सिर्फ लोहे के पाइप ही नजर आ रहे है। इसके बाद परिजन आगे बढ़कर तालाब की तरफ नीचे बने हिस्से में जाते हैं। वहां जाकर भी देखते  हैं कि फिसल पट्टी वाला झूला बीच से ही टूटा हुआ है। साथ ही छोटे बच्चों के लिए खिलौने वाले झूले लगे हुए थे। वे भी अब वहां नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में परिजन पार्क में आते हैं और बिना रूके वहां से चंद मिनटों में ही वापस लौट रहे है। ऐसा मंगलवार को कई लोगों के साथ हुआ। </p>
<p><strong>नल टूटा हुआ और कैंटीन बंद</strong><br />पार्क में पीने के पानी के लिए हालांकि वाटर कूलर लगा हुआ है। लेकिन वहां नल है जो टूटा हुआ है। जिससे पौधों को पानी देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। पौधों व क्या रियों में पानी नहीं देने से अधिकतर पौधे सूखे हुए हैं। पार्क में चारों तरफ कचरा फेला हुआ है। इतना ही नहीं पार्क के अंदर अबसे अंत में कैंटीन के रूप में 3 दुकानें बनी हुई है। जिन पर टीन शेड भी लगा है। लेकिन हालत यह है कि यह बंद है। जिससे यहां आने वाले खाद्य पदार्थों का आनंद नहीं ले पा रहे है। </p>
<p><strong>टॉयलेट बदहाल</strong><br />पार्क में कैंटीन के पास ही टॉयलेट तो बना हुआ है। लेकिन वह  पूरी तरह से बदहाल हो रहा है। उसे देखने से ऐसा लगा रहा है मानों बरसों से इसका उपयोग ही नहीं हुआ। साथ ही इसकी सफाई तक नहीं की गई। जिससेस लोग इसका उपयोग कर सके।  हालांकि इस पार्क में चौकीदार तैनात है। उसके बाद भी पार्क दुर्दशा का शिकार है। </p>
<p><strong>पार्क में झूले ही होते हैं आकर्षण</strong><br />पार्क में घूमने आए लोगों का कहना है कि हर पार्क में बच्चों के लिए झूले ही आकर्षण का केन्द्र होते हैं। भीमगंजमंडी निवासी नरेश मीणा ने बताया कि वे परिवार समेत दादाबाड़ी जा रहे थे। रास्ते में यह पार्क नजर आया तो बच्चा झूले के लिए जिद करने लगा। सोचा कुछ देर इसे झूला झला देते हैं। लेकिन अंदर आकर देखा तो एक भी झूला सही नहीं है। सभी टूटे होने से बच्चे के चोट लगने का खतरा होने से वापस जाना पड़ रहा है। रामपुरा निवासी अनिल सक्सेना ने बताया कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह सबसे नजदीक का पार्क है। भगवान महावीर के नाम पर यह पार्क बनाया गया है। लेकिन यह पार्क अनदेखी का शिकार होने से बदहाल हो रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2025 15:29:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांसी-देई मुख्य सड़क खस्ताहाल, आवाजाही में हो रही मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्र के बांसी से देई मुख्य मार्ग की डामरीकृत लगभग 13 किमी सड़क पर बहुत-सी जगहों पर डामर उखड़ा हुआ है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-bansi-dei-main-road-is-in-a-bad-condition--movement-is-difficult/article-96902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी से देई मुख्य मार्ग की डामरीकृत लगभग 13 किमी सड़क पर बहुत-सी जगहों पर डामर उखड़ा हुआ है। इस राह पर उखडी सड़क की गिट्टी यहां से गुजरते समय दोपहिया वाहन चालक इसमें फिसलकर चोटिल हो रहे है। इस समस्या का सामना करते हुए अढ़ाई माह बीत गया है। मगर पीडब्ल्यूडी विभाग इसकी सुध नहीं ले रहा है। यह क्षतिग्रस्त सड़क जल्द दुरूस्त हो तो राहगीरों को भी राहत मिले। संबंधित विभाग जर्जर राह की सुध लेवे तो जनता को भी परेशानी नहीं हो। जानकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग की बांसी-देई मुख्य मार्ग पर बांसी से डोड़ी मोढ़ तक काफी जगह पर सड़क उखड़कर राह पर सड़क की गिट्टी बिखरी हुई है। जो यहां से गुजरते समय पैदल राहगीर सहित दोपहिया वाहन चालक काफी परेशान हो रहे है। इस तरह की जगहों पर से वाहनों की आवाजाही के समय यहां से गुजरते पैदल राहगीर वाहनों से उछलती गिट्टी से भी चोटिल हो रहे है, तो दोपहिया वाहन चालक भी इस तरह की जगहों पर अपना संतुलन बिगड़ जाता है। इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाए घटित हो रही है। बांसी-देई मुख्य सड़क के खस्ताहाल होने से जनता के लिए आफत बनी हुई है। संबंधित विभाग की अनदेखी लोगों पर भारी पड़ रही है। संबंधित विभाग अनदेखी कर रहा है। जो इस राह से राहगीर परेशान है। इसी मार्ग पर बांसी से देई के बीच भी कुछ जगहों पर भी डामर उखड़ता हुआ नजर आ रहा है। </p>
<p><strong>देई मंडी व अन्य कार्यों के लिए आते है क्षेत्रवासी</strong><br />क्षेत्रीय ग्रामीण अंचलों से देई मंडी में अपनी उपज को बेचने सहित अन्य निजी कार्यो के लिए जनता आवाजाही करती है। पर क्षतिग्रस्त जगहों पर जर्जर हाल में सड़क व गड्ढों की भरमार लोगों के लिए आफत बनी हुई है। यह व्यावसायिक सहित अन्य दृष्टिकोण से आवागमन का मुख्य मार्ग है। पर संबंधित विभाग समय रहते क्षतिग्रस्त जगहों पर इसके मरम्मत कार्य के लिए कदम नहीं उठा रहा है। जिसका खामियाजा क्षेत्रीय किसानों सहित राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।  </p>
<p><strong>क्षेत्रीय लोगों की जुबानी समस्या</strong><br />इस राह पर संबंधित विभाग को बारिश से पहले भी इस समस्या से अवगत करवाया गया था। मगर अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। इसका समाधान नहीं होने से यहाँ से गुजरते समय राहगीर परेशान है। संबंधित विभाग जल्द सुध लेवें तो क्षेत्रवासियों को भी आवाजाही के दौरान राहत मिले। <br /><strong>- हीरालाल भील, निवासी कल्याणपुरा</strong></p>
<p>समय पर संबन्धित विभाग क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करवाता तो यहां से गुजरते समय राहगीर आए दिन दुर्घटना का शिकार नही होते। <br /><strong>- सत्यनारायण साहू, निवासी भण्डेड़ा</strong></p>
<p>बांसी में भैरव बाबा पास के नाले की पुलिया से होकर हजारों लोगों का आवागमन होता है।<br />पुलिया का ऊपरी स्तह पूरी तरह से डामर उखड़कर गिट्टी बिखर रही है। जिससे राहगीर परेशान होते आ रहे है। मगर संबंधित विभाग इसे दुरूस्त नही करवा रहा है। जो लोगों के लिए आफत बनी हुई है। जल्द मरम्मत हो तो आवाजाही में भी राहत मिलें। <br /><strong>- अमन जैन, निवासी बांसी</strong></p>
<p>इस नाले की पुलिया से अस्पताल आवाजाही वाले व हररोज स्कूल आने-जाने वाले स्कूली बच्चें आवागमन करते है। मुख्य मार्ग होने से अन्य राहगीरों की आवाजाही रहती है। संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से देखे व जल्द मरम्मत करवाए। <br /><strong>- नीरूशंकर शर्मा, निवासी बांसी</strong></p>
<p>बांसी-देई मुख्य मार्ग पर क्षतिग्रस्त जगह पर आवाजाही के दौरान परेशानी झेलनी पड़ती है। आए दिन राहगीर क्षतिग्रस्त गड्ढों की वजह से चोटिल हो रहे है। संबंधित विभाग क्षतिग्रस्त राह को दुरुस्त करवाएं तो राहत मिलें।<br /><strong>- कान्हा लाल गुर्जर, निवासी मरां</strong></p>
<p>इस मार्ग की समस्या गंभीर है। आमजन व स्कूली बच्चों को आवागमन में काफी समस्या हो रही है। राहगीर गड्ढों की वजह से दुर्घटनाओ का भी शिकार हो रहे है। संबंधित विभाग से जगह-जगह हो रहे गढ्ढों की जल्द मरम्मत को लेकर प्रयास करूंगा। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा, सरपंच ग्राम पंचायत बांसी</strong></p>
<p>इस पहले गारंटी में यह सड़क थी। अब इसकी गारंटी अवधि समाप्त हो गई हैं। विभागीय स्तर पर ही मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा। <br /><strong>- रेवतीरमन शर्मा, जेईएन पीडब्ल्यूडी नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 17:52:45 +0530</pubDate>
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                <title>उद्यान के झूलों में झूल रहा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[गार्डन घूमने आ रहे परिवारों को हो रही निराशा 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/swinging-in-the-garden-swings-is-dangerous/article-96660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम द्वारा एक तरफ तो विकास व निर्माण कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है। वहीं दूसरी तरफ शहर के प्रमुख गार्डनों की ही दुर्दशा हो रही है। गांधी उद्यान व हाड़ौती  उद्यान जैसे दो प्रमुख गार्डनों के अधिकतर झूले टूटे हुए है। जिससे वहां घूमने आने वाले परिवारों को निराश होना पड़ रहा है।  नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में चम्बल गार्डन के पास स्थित हैं गांधी उद्यान व हाड़ौती उद्यान। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर बनाए गए इस गांधी उद्यान में उद्यान समिति का कार्यालय बना हुआ है। समिति के अध्यक्ष यहां बैठते है। उस गांधी उद्यान में निगम की नर्सरी बनी हुई है। नए कोटा क्षेत्र  में होने से यहां बड़ी संख्या में लोग सैर के लिए आते है। उस उद्यान की हालत यह है यहां के झूले तक टूटे हुए हैं।  परिवारों के साथ आने वाले अधिकतर बच्चे गार्डन में झूला झृूलने हीआते है। लेकिन वहां जाकर उन्हें निराश ही होना पड़ रहा है। इसका कारण उद्यान में अधिकतर झूले टूटे हुए है। फिसल पट्टी हो या रिपसनी। सभी कोई ऊपर से तो कोई नीचे से। कोई बीच से टूटे हुए हैं। जिससे छोटे बच्चे उन पर झूल ही नहीं पा रहे।यदि  किसी बच्चे को जिद करने पर परिजन झूलने भी देते हैं तो उनके चोट लगने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>दो उद्यानों को जोड़ता है गांधी उद्यान</strong><br />गांधी उद्यान दो उद्यानों को जोड़ने का काम करता है। चम्बल गार्डन और हाड़ौती उद्यान के बीच में स्थित है गांधी उद्यान। चम्बल गार्डन में सैर करने वाले अधिकतर लोग वहां से गांधी उद्यान जाते है। वहां लोहे का पुल चढ़कर हाड़ौती उद्यान तक घूमकर आते है। ऐसे में गांधी उद्यान में झूले टूटे होने के बाद लोग हाड़ौती उद्यान में बच्चों को झूले झुलाने के लिए लेकर जाते हैं। लेकिन वहां भी यही स्थिति है। </p>
<p><strong>हाड़ौती उद्यान की हालत तो और भी बदतर</strong><br />कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में केवल गांधी उद्यान के ही झूले टूटे हुए नहीं है। उसके पास ही उससे भी बड़ा हाड़ौती उद्यान है। उस उद्यान में झूले तो बहुत सारे लगे हुए हैं। लेकिन उनमें से शायद ही कोई झूला ऐसा हो जिस पर बच्चे झूल सकते हो। यहां भी अधिकतर झूले अपनी दशा पर आंसु बहा रहे हैं।  यहां तो गांधी उद्यान से भी बदतर हालत है। यहां भी अधिकतर झूले टूटे हुए है। छोटे से लेकर बड़ा झूला तक सभी टूटे हुए हैं। यहां तक कि बच्चों के मनोरंजन के लिए बनाए गए हाथी का पिछला हिस्सा तक लोगों ने तोड़ दिया है। </p>
<p><strong>जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />गार्डन घूमने आ रहे लोगों का कहना है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं देने के कारण गार्डनों की दुर्दशा हो रही है।  शास्त्री नगर दादाबाड़ी निवासी महेश सुमन ने बताया कि वह बच्चों को  घुमाने केलिए गार्डन लाए थे। यहां आकर देखा तो ’यादातर झुले टूटे हुए हैं। गार्डन में प्रवेश का टिकट भी निगम द्वारा वसूल किया जा रहा है। गार्डन में सिर्फ घास पर घूमने ही नहीं आते।बच्चों को तो झृले झूलने होते है। लेकिन गार्डन में एक भी झूला झृलने लायक नहीं है। जब प्रमुख गार्डनों के झूलों की हालत यह है तो फिर वार्डों के पार्को कीहालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।  किशोरपुरा निवासी मोहम्मद शाहिद ने बताया कि गांधी उद्यान व हाड़ौती उद्यान जैसे प्रमुख गार्डनों के झूले ही टूटे हुए हैं। जबकि इस क्षेत्र में लोकसभा अध्यक्ष व कोटा दक्षिण के विधायक, महापौर सभी आते हैं। उसके बाद भी अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चम्बल गार्डन,भीतरिया कुंड व हाड़ौती उद्यान में बड़े स्तर पर काम करवाए जाएंगे।इसके लिए पहले डिजाइन तैयार करवाई जा रही है। उसके बाद उसका एस्टीमेट तैयार होगा। डीपीआर बनाई जाएगी । उसके बाद इन तीनों गार्डनों की दशा सुधारीजाएगी।लेकिन उससे पहले दोनों  गार्डन गांधीउद्यान व हाड़ौती उद्यान के  झूलों को सही करवाने का कार्य करवा दिया जाएगा।  <br /><strong>- ए.क्यृू कुरैशी, एक्सईएन नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Dec 2024 15:36:06 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क खस्ताहाल, आवाजाही हुई मुश्किल  </title>
                                    <description><![CDATA[आसपास के मकानों सहित आवाजाही वाले लोगों को यह कीचड़ भरी डगर दर्द देती है। पर जिम्मेदार इस लिंक डगर को लेकर अनदेखी कर रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/road-in-bad-condition--movement-difficult/article-91167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र की मरां ग्राम पंचायत के अधीन एक गांव से भण्डेड़ा लिंक रोड का हाल बेहाल हो रहा है। इस मार्ग पर सीसी सड़क नही होने से और बरसाती पानी की निकासी नही होने से बरसाती पानी सहित व्यर्थ का पानी यही पर जमा रहने से भारी कीचड़ बना रहता है। आसपास के मकानों सहित आवाजाही वाले लोगों को यह कीचड़ भरी डगर दर्द देती है। पर जिम्मेदार इस लिंक डगर को लेकर अनदेखी कर रहे है। मजबूरन उच्च शिक्षार्थ भण्डेड़ा आने वाले स्कूली बच्चों के लिए भी यह राह आफत बनी हुई है। रामगंज गांव में इस रुट वाले मोहल्ले में कीचड़ से लोग परेशान है। संबंधित जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते है।  जानकारी के अनुसार मरां ग्राम पंचायत के अधीन रामगंज गांव से भण्डेड़ा लिंकिंग मार्ग की तरफ के मोहल्ले में सीसी सड़क नही होने से बरसाती समय बरसाती पानी व अन्य समय पर पास के मकानों का व्यर्थ का पानी भी इसी जगह पर जमा रहता है। यही से होकर भण्डेड़ा मार्ग निकलता है, जिसको भी यहां से होकर गुजरना होता है। वही इस तरफ के खेतों व कुए पर निवासरत भी लिंक मार्ग से हर रोज इस कीचड़ से होकर आवाजाही करते है। बरसाती समय तो इस रूट पर स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है। </p>
<p><strong>दो ग्राम पंचायतों के गांवों के लिए कनेक्टिविटी</strong><br />सादेड़ा ग्राम पंचायत के अधीन भण्डेड़ा गांव व मरां ग्राम पंचायत के अधीन रामगंज गांव के लिए यह लिंक मार्ग लगभग दो किमी है। जो यह ग्रेवल सड़क हल्की-सी बूंदाबांदी में ही कीचड़ से खराब हो जाती है। जो दो दर्जन से अधिक स्कूली बच्चों के लिए शिक्षा की डगर में पढ़ाई से पहले कीचड़ से गुजरना चुनौती बन जाता है। यह लिंक मार्ग बदहाल है, जिसको उपचार की दरकार है। </p>
<p><strong>क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं</strong><br />इक्कीसवीं सदी में भी गांवों के लिए कनेक्टिविटी वाले इस लिंक मार्ग को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं है। जो दो गांवों का यह लिंक रोड काफी दशकों से दंश झेल रहा है। यह रुट उपेक्षा का शिकार होने से लोगों को अतिरिक्त फेरा सहित समय खर्च करवा रहा है। पर क्षेत्रीय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अनदेखी कर रहे है। लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p><strong>स्थानीय ग्रामीणों की जुबानी </strong><br />इस किचड़ के पास ही मेरा मकान है, इस बदबू से परेशान हो जाते है। लंबे समय से हो रहे कीचड़ में पनपते मच्छरों से परिवार को बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। ग्राम पंचायत से इस समस्या को कई बार अवगत करवाया जा चूका है। पर समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। <br /><strong>- राधेश्याम गुर्जर, निवासी रामगंज </strong></p>
<p>गांव से लगभग तीस स्कूली बच्चों का इसी रुट से होकर आना जाना पड़ता है। हमारा मकान भी इसी रास्ते पर है, पर यहां पर हर समय ही गहरा कीचड़ रहता है। इस वजह से गांव में कम ही आवाजाही करते है। कुएं पर रहने की मजबूरी बनी हुई है। इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत को बहुत बार अवगत करवा चूके है। पर सीसी सड़क नही बनाए तो कम से कम वैकल्पिक राह के लिए झीकरा तक नही डाला जा रहा है। इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया जाएगा, अब तो सड़क पर उतरने को मजबूर होना पडेगा। <br /><strong>- हजारी लाल गुर्जर, निवासी रामगंज </strong></p>
<p>घर से खेत पर जाए या फिर आए तो यही से होकर गुजरना पड़ता है। घर से पशुओं के गोबर को भी हररोज रोड़ी में डालना आनाजाना पडता है। हर रोज दो बार इस समस्या को विभाग वाले सुनते ही नहीं है, जो अब तो पैरों में अंगुलियों के पास जख्म होने से दर्द तक होता है। पर इस समस्या पर ध्यान नही दे रहे है।<br /><strong>- प्रेमबाई गुर्जर, निवासी रामगंज</strong></p>
<p>इस लिंक रोड पर ग्राम पंचायत द्वारा नाहीं तो सीसी सड़क बनाते है। न इस पानी के निकासी करवाते है, जो अब तो यहां पर गहरा गढ्ढा हो चूका है। मोहल्ले का पानी व बरसात का पानी यही पर जमा होता है। जो यहाँ पर काफी तादाद में कीचड़ हो गया है। बदबू आती है, पर क्या करें। यही से आनाजाना पडता है। स्कूल आवाजाही वाले बच्चों को भी इसी जगह से होकर गुजरना पड़ता है। विभाग इस समस्या का समाधान करने में भी हिचके हुए है। <br /><strong>-चकोली बाई गुर्जर, निवासी रामगंज</strong></p>
<p> जिस जगह पर कीचड़ है, वहां पर पानी नही निकलने देते है। जो यहां पर पानी लंबे समय से पानी जमा रहने से सड़क बैठ गई। फिर भी आवागमन की समस्या व आसपास के मकानों के नजदीक की गन्दगी को देखते हुए झीकरा डलवाने का प्रयास चल रहा है। अभी बारिश से हर जगह पर गिला है। जेसीबी व झीकरे की ट्रॉलियां आवाजाही के दौरान जमीन में धंसने का भय हो रहा है। चार-पांच रोज में झीकरा डलवा दिया जाएगा समस्या है। यह गत वर्ष भी झीकरा डाला गया था, पर पानी निकासी नही होने से यह समस्या हो जाती है। <br /><strong>- बीना बाई मीणा, सरपंच ग्राम पंचायत मरां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 16:59:45 +0530</pubDate>
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                <title>सुखाड़िया गार्डन दुर्दशा का शिकार, पशु कर रहे हैं विचरण</title>
                                    <description><![CDATA[रात्रि के समय पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है जिससे गार्डन दुर्दशा का शिकार हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/sukhadia-garden-is-in-a-bad-condition--animals-are-roaming-around/article-89872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>लाखेरी। शहर में आम जन के लिए बनाया गया मुख्य सुखाडिया गार्डन पर वर्तमान में दुर्दशा का शिकार हो रहा है। रेलिंग के अभाव में पशुओं का गार्डन में जमावड़ा लगा रहता है। गार्डन के पास में ही 100 वर्ष के अधिक समय पूर्व एसीसी सीमेंट उद्योग अंग्रेजों के समय जेड आकर का राजस्थान का पहला बनाया गया जीग जेग डेम पर चादर चलने के कारण शहर व क्षेत्र के लोग प्रतिदिन अपने परिवार के साथ लोग बड़ी संख्या में यहां पर पहुंच रहे है। वहां पर बना सुखाडिया गार्डन पर भी लोग अपने परिवार के साथ पहुंचते हैं लेकिन सुखाड़िया गार्डन की हालत खराब होने के चलते परिवार के साथ पहुंचे लोगों को परेशानियों से गुजरना पड़ता है । समस्या को जन प्रतिनिधि और सम्बंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी समाधान नहीं होने से लोगों में रोष देखा जा सकता है। वार्ड पार्षद राजू सैनी ने बताया कि गार्डन पर वर्तमान में कर्मचारी नहीं लगाने के चलते वहां पर लगी लोहे की रेलिंग असामाजिक तत्वों ने तोड़ दी गई है और रात्रि के समय पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है जिससे गार्डन दुर्दशा का शिकार हो रहा है। गार्डन पर पालिका द्वारा नगर वासियों के लिए शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए कैरी बैग मशीनें लाखों रुपए की लागत से खरीदी गई थी। यह मशीन है कहीं जगह पर लगाई गई थी लेकिन मशीनें  अपना कार्य नहीं करने से उनका उपयोग नहीं हो सका। यह कैरी बैग मशीनें कबाड में गार्डन पर पड़ी हुई है।  पालिका द्वारा सरकार के लाखों रुपए के बजट का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />असामाजिक तत्वों द्वारा गार्डन की लगी लोहे की जालियों को तोड़ा गया है और गार्डन पर पड़े सामानों की जांच करवाई जाएगी। <br /><strong>- ईओ मोती शंकर नागर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Sep 2024 17:09:07 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही: गांव का मुख्य रास्ता एक साल से बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[चीता का झौंपडिया का मामला, जिम्मेदार बेपरवाह।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/negligence--main-road-of-village-in-bad-condition-since-one-year/article-88874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/31.png" alt=""></a><br /><p>देई। क्षेत्र के चीता की झौंपडियां गांव मे एक वर्ष से मुख्य रास्ता खस्ताहाल है। लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह है।  मुख्य मार्ग पर कीचड़ पसरा होने से स्कूल जाने वाले बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए कीचड युक्त भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। गिरने के कारण कही बार बच्चे स्कूल तक नही जाते है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को अवगत करवाया है लेकिन वर्षभर बाद भी समस्या का हल नही होने से हालात ज्यो के त्यो बने हुए है। जिससे अब ग्रामीणों का जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। गांव में बीमार होने पर अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस गांव में नही जाने से परिजनों को मरीज को उठाकर लाना पड़ता है। आम रास्ते होने से बरसात के बाद तो हालात ज्यादा बिगडने से गांव में जाना मुश्किल भरा हो गया है। इसलिए लोगों ने नैनवां प्रधान को ज्ञापन सौंपकर समस्या समाधान की मांग उठाई है। इस बारे में गांव के शारिरीक शिक्षक घनश्याम मीणा का कहना है कि आम रास्ते पर हो रहे कीचड़ से बडेÞ लोगों को निकलना मुश्किल भरा है। ऐसे में स्कूली बच्चों को निकलने में पसीने छूट जाते है कही बार बच्चे पढने जाने में आनाकानी करते है। इसलिए प्रशासन से समस्या समाधान की मांग है। </p>
<p><strong>गांव वालों की पीड़ा </strong><br />रास्ते के पानी की निकासी नही होने से कीचड़ पानी में होकर बच्चों ग्रामीणों बीमार व्यक्तियों को निकलना पड़ता है जिससे उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है अगर शीघ्र समस्या का समाधान नही हुआ तो मजबूरन ग्रामीणों को सड़क पर उतरना पड़ेगा। <br /><strong>- गोविन्द मीणा, ग्रामीण </strong></p>
<p>एक वर्ष से ग्रामीण बच्चों को परेशानी का सामना करते हुए लेकिन जिम्मेदारों द्वारा अभी तक समाधान नही किया जाना प्रशासन की कमी को इंगित करता है। बच्चों को पढ़ने जाने वाले रास्ते पर किसी तरह की कोई समस्या नही होनी चाहिए। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। <br /><strong>- कैलाशचंद मीणा, शरीरिक शिक्षक </strong></p>
<p>गांवों को कीचड मुक्त बनवाकर गांवों की दशा सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए जबकि गांवों में अभी भी कीचड़ में जीवन यापन करना ग्रामीणों को शहरों की अग्रसर करता है। सरकार को चाहिए गांवों की दशा सुधारे। गांव से कई लोग शहर  जा चुके है।<br /><strong>- सीताराम मीणा, शारीरिक शिक्षक  </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ग्राम विकास अधिकारी से मौका स्थिति का जायजा लेकर समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जायेगा। <br /><strong>- पदम नागर, नैनवां पंचायत समिति प्रधान </strong></p>
<p>बारिश का मौसम होने से अभी रोड बनाना मुश्किल है। इसलिए अभी झींकरा डलवाकर रास्ते को सुगम बनाया जायेगा।<br /><strong>- बजरंगलाल ,भजनेरी ग्राम पंचायत, विकास अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2024 16:34:05 +0530</pubDate>
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                <title>सिर्फ कागजों में हो रहा विकास, नहीं बनी पक्की सड़क</title>
                                    <description><![CDATA[ कई बार सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/development-is-happening-only-on-paper--no-paved-road-has-been-built/article-87305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(6)9.png" alt=""></a><br /><p>झालरापाटन। झालरापाटन पंचायत समिति के अंतर्गत ग्राम पंचायत खानपुरिया के गांव गोवर्धन निवास में जाने का रास्ता खस्ताहाल है। गांव तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्तो से होकर जाना पड़ता है। सिक्स लेन हाइवे से गांव की दूरी महज 1.5 किमी है, लेकिन ग्रामीण सड़क को तरस गए। बरसात के दिनों में कीचड़ हो जाने से निकलना मुश्किल हो जाता है। गोरधन निवास नयागांव के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार सरपंच से लेकर जिला कलेक्टर तक से सड़क बनाने की मांग की, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण प्रमोद, श्यामलाल, रामकिशन, सुमित्रा, मेहताब बाई, जापू बाई, पवन ने बताया कि वे 2 दिन पूर्व प्रभारी मंत्री के दौरे के दौरान उनसे मांग करने गए थे, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें दूर ही रोक दिया। ग्रामीणों ने बताया कि सिक्स लेन हाइवे निर्माण के दौरान 2 करोड़ की मुआवजा राशि भी मिली थी, जिसे सरपंच द्वारा जनहित में खर्च करना था, लेकिन सड़क निर्माण में कोई राशी नहीं लगाई गई। गांव की जियोटैग्गिंग भी 1 किमी दूर सड़क मुख्य सड़क के किनारे बताती है जिस कारण प्रशासन भी सड़क की स्थिति ट्रेक नहीं कर पाता।</p>
<p><strong>सरपंच प्रतिनिधि के चल रहे सड़क के ठेके</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले रास्ते पर सड़क बनाने के लिए कई बार सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यहां तक कि सरपंच या उनके प्रतिनिधि गांव में आते ही नहीं। उनके महाराष्ट्र में रहकर ठेकेदारी करने की भी बात सामने आई है।</p>
<p><strong>बरसात में हो जाता है कीचड़</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़क पर कीचड़ हो जाता है, हालांकि गांव के अंदर चेकर लगाए गए थे लेकिन वो भी जलदाय विभाग की पाइपलाइन डालने के चलते खोदकर ऐसे ही खस्ताहाल छोड़ दी गई। ऐसे में अगर किसी बीमार व्यक्ति को गांव से शहर के अस्पताल ले जाना हो तो परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>ग्रामीण सड़क को तरस गए है कच्ची सड़क से आने जाने में परेशानी आती है। <br /><strong>- रत्तीराम, ग्रामीण </strong></p>
<p>बारिश के दिनों में कच्ची सड़क पर कीचड़ हो जाता है कई बार ग्रामीण फिसलकर चोटिल हो जाते है। <br /><strong>- रामदयाल, ग्रामीण  </strong></p>
<p>ग्रामीणों ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान कर पक्की सड़क बनाने की मांग की है।<br /><strong>- बृजराज, ग्रामीण </strong></p>
<p> गोरधन निवास में सड़क बनाने को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है, निर्देश आने पर कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- कांतिबाई वैष्णव, सरपंच खानपुरिया</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 17:20:48 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा-रावतभाटा मार्ग बदहाली का शिकार, आए दिन होते हैं हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन पहले भी ट्रेलर फंसने से 7 घंटे तक जाम में फंसे रहे यात्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-rawatbhata-road-is-in-bad-condition--accidents-happen-every-day/article-83741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/16.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। कोटा रावतभाटा मुख्य मार्ग बदहाली का शिकार है। साल इस मार्ग पर कोलीपुरा घाटे में वन अभयारण क्षेत्र है। इस इस मार्ग पर संकरे मोड , दुर्घटना सांकेतिक चिन्ह नहीं होना, एक तरफ गहरी खाई और सड़क किनारे उगी झाड़ियों बरसात में मिट्टी के कटाव के कारण पूर्व में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। जिम्मेदार सार्वजनिक निर्माण विभाग इस मार्ग पर ध्यान नही दिया जा रहा है। जिसकी वजह से इस मार्ग पर आवाजाही करने वाले रावतभाटा और कोटा के रहने वाले लोग खामियाजा भुगत रहे है। गौरतलब है कि बुधवार को भी ट्रेलर के सड़क से नीचे उतर जाने और तिरछा खड़ा होने से सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। शाम 5 बजे से लगा जाम रात्रि 12:30 बजे खुला। करीब 7 घंटे तक यात्री जाम में फंसे रहे। जाम के दरमियान कोटा अस्पताल से रास्ते  में ला रहे   मृत व्यक्ति के शव को  करीब 160 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगा सिंगोली होते हुए लाना पड़ा। शव वाहन को भी अधिक भुगतान किया गया।  रावतभाटा शहर में दुर्घटना जनित व्यक्ति को इलाज के लिए कोटा जाना पड़े तो इस मार्ग के सिवाय कोई वैकल्पिक दूसरा मार्ग भी नहीं है। 1 वर्ष पूर्व भी एक ट्रेलर  हनुमान मंदिर की दीवार तोड़़ते हुए नीचे गहरी खाई में गिर गया था। कई संयंत्रों की आधारशिला है रावतभाटा शहरयूं तो रावतभाटा देश का एक मात्र परमाणु संयंत्र है। लेकिन रावतभाटा में इसकी सीमाओं के आसपास समीप प्रमुख सड़कें वन विभाग क्षेत्र में आती है जिन पर ना तो निर्माण पूरे हुए हैं ना ही समुचित व्यवस्था है । भारत के एकमात्र परमाणु संयंत्रों का केंद्र बिंदु रावतभाटा तीनों तरफ से सड़क मार्ग के लिए आज भी केवल सड़कें ठीक होने का ही इंतजार कर रहा है। आपातकाल की स्थिति में तीनों प्रमुख मार्गों को अपने दुर्दशा बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी मार्ग किसी न किसी कारण से आज भी अधूरे और खस्ताहाल में है।</p>
<p><strong>जाम में फंसे यात्रियों की पीड़ा</strong><br />अपनी पीड़ा को बताते हुए यात्री चेतन सिंह सांखला ने बताया कि कोटा से निकलने पर जाम का पता ही नहीं चला ना तो रास्ते में नेटवर्क , नहीं कोई वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करीब 4 घंटे तक जाम में फंसा रहा। रोडवेज ड्राइवर जयराम ने बताया कि शाम 7  बजे कोटा से रोडवेज लेकर निकला लेकिन जाम के कारण रात्रि 1 बजे के करीब रावतभाटा पहुंचा सभी यात्री परेशान रहे। </p>
<p><strong>शव को लाने के दरमियान हुई तकलीफ</strong><br />पीड़ित संजय सोनी ने बताया कि मेरे परिचित की मृत्यु हो जाने पर कोटा से उनके शव को लाने के दरमियान हमें 160 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगा सिंगोली होते हुए लाना पड़ा करीब 6 घंटे का समय भी खराब हुआ और वाहन चालक को अधिक राशि भी देनी पड़ी।</p>
<p><strong>इलाज के लिए भी जाना पड़ता है कोटा</strong><br />रावतभाटा कोटा मार्ग केवल सड़क मार्ग ही नहीं है अपितु रावतभाटा और कोटा की जीवनदायनी सड़क भी है। यदि किसी कारणवश सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया तो बीमार  और दुर्घटना जनित व्यक्ति को इलाज भी मिल पाना संभव नहीं है। वैसे ही रावतभाटा के उप जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का दंश शहर झेल ही रहा है। ऊपर से जर्जर अवस्था में तीनों प्रमुख मार्गों की हालत किसी से छिपी नहीं है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong> <br />कोटा से लेकर रावतभाटा सीमा में कोलीपुरा घाट क्षेत्र पर  वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से वार्ता कर  प्रस्ताव बना सरकार को भेजा जाएगा जिससे डबल लेन सड़क चौड़ाइकरण का कार्य पूर्ण हो पाए।<br /><strong>- नमो नारायण राय, कार्यकारी अधिकारी, सार्वजनिक निर्माण विभाग कोटा   </strong></p>
<p>रावतभाटा सीमा केवल 11 किलोमीटर तक लगती है कोलीपुरा घाट क्षेत्र कोटा रेंज में आता है। हमारे 11 किलोमीटर क्षेत्र में कहीं भी कोई सड़क जाम जैसी स्थिति नहीं बनती। <br /><strong>- उदय भान, कार्यकारी अधिकारी, सार्वजनिक निर्माण विभाग बेगंू </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 17:55:25 +0530</pubDate>
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                <title>यहां दिया तले अंधेरा...</title>
                                    <description><![CDATA[सड़के सही करने पर किसी भी विभाग के अधिकारी का ध्यान नहीं है, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-darkness-under-here/article-71776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/yha-diya-tale-andhera...kota-news-04-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिया तले अंधेरा... यह कहावत है जो उन सरकारी विभागों पर सही साबित हो रही है जो शहर में सड़कें बनाने का काम करते हैं। उन सरकारी विभागों के कार्यालय जाने वाली सड़कें ही बदहाल हो रही हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों और हाइवे तक की सड़क बनाने का काम करता है। लेकिन हालत यह है कि राज भवन रोड नयापुरा स्थित पी डब्ल्यूडी कार्यालय की तरफ जाने वाली सड़क ही बदहाल हो रही है। अदालत चौराहे से कार्यालय तक की सड़क पर कई जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। डामर उखड़ा हुआ है। जिससे वहां जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इसी रोड पर और कार्यालय के सामने ही पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री व कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल का आवास भी है। एसबीआई बैंक है जहां रोजाना बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशन के लिए और महिलाएं व अन्य लोग आते हैं। जिनके सड़क के बदहाल होने से गिरने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण एसपी कार्यालय, अदालत और कई अन्य सरकारी कार्यालयों के अलावा लाडपुरा विधायक का आवास तक जाने की भी यही सड़क है। उसके बाद भी  न तो सार्वजनिक निर्माण विभाग और न ही नगर निगम व नगर विकास न्यास द्वारा सड़क को सही कराया जा रहा है। </p>
<p><strong>दो विभागों के बीच की जर्जर सड़क</strong><br />इसी तरह शहर के मुख्य मार्गों से लेकर वार्डों तक में डामर व सीसी रोड बनाने वाले नगर विकास न्यास कार्यालय जाने की सड़क ही जजर हो रही है। सीएडी रोड पर न्यास कार्यालय है। कार्यालय में वर्तमान में प्रवेश व निकास के अलग-अलग गेट हैं। मेन गेट से प्रवेश करने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों और आमजन को वापस बाहर पीछे वाले गेट से निकलना पड़ रहा है। लेकिन हालत यह है कि पिछले गेट से निकलने के बाद मेन रोड पर आने वाली जो सड़क है उसका पूरा डामर उखड़ा हुआ है। जगह-जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। हालत यह है कि इस रोड से निकलने वाले दो पहिया वाहन आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। </p>
<p><strong>कुछ समय पहले ही बनाई थी सड़क</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से इस रोड को कुछ समय पहले ही बनाया था। लेकिन उस सड़क की हालत काफी अधिक खराब हो रही है। पहले इस सड़क से न्यास कार्यालय जाने वाले लोग बहुत कम उपयोग करते थे। लेकिन जब से कार्यालय से निकास के लिए पिछले गेट से व्यवस्था की गई है। उसके बाद से इस सड़क पर वाहनों का आवागमन अधिक हुआ है। </p>
<p><strong>हाउसिंग बोर्ड कार्यालय भी इसी रोड पर</strong><br />सीएडी मेन रोड से हाउसिंग बोर्ड के उप आवासन आयुक्त कार्यालय तक जाने के लिए भी यही सड़क है। हाउसिंग बोर्ड का यह संभागीय कार्यालय है। लेकिन इस सड़क को सही करने पर किसी भी विभाग के अधिकारी का ध्यान नहीं है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>बरसात में होगी अधिक परेशानी</strong><br />सरकारी कार्यालयों तक जाने की बदहाल सड़कों से बरसात के समय में अधिक परेशानी होगी। लोगों ने बताया कि बरसात से पहले यदि इन सड़कों को सही नहीं किया तो कीचड़ से होकर निकलना पड़ेगा। उस समय  पानी भरा होने से गड्ढ़े नजर नहीं आने से हादसे होने का भी खतरा अधिक बढ़ जाएगा।  दादाबाड़ी निवासी निर्मल सेन ने बताया कि न्यास कार्यालय से बाहर निकलने के बाद मेन रोड तक दो पहिया वाहन से आना किसी खतरे से कम नहीं है। सड़क की गिट्टी उखड़ी होने से स्कूटर के स्लिप होने से आए दिन लोगों के गिरने की घटनाएं हो रही है। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया जा रहा।  इधर नगर विकास न्यास अभियंताओं का कहना है कि राज भवन रोड व सीएडी रोड की सड़कों को कुछ समय पहले ही सही करवाया था। लेकिन बरसात होने से डामर उखड़ गया है। बरसात से पहले इन सड़कों को फिर से सही करवा दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 18:33:30 +0530</pubDate>
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