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                <title>स्टूडेंट वीएमओयू में बिना परेशानी शिक्षा ग्रहण करें उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों की शिकायतों पर अब शीघ्र निर्णय हो पाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students-should-receive-education-in-vmou-without-any-hassles--they-should-not-face-any-problem/article-85734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वीएमओयू से शिक्षा ग्रहण करने वाले किसी भी स्टूडेंट को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो। वह भयमुक्त होकर अपनी शिक्षा ग्रहण करें। यूनिवर्सिटी के  कामकाज में पारदर्शिता के साथ ऐसी व्यवस्था रहेगी कि किसी स्टूडेंट को परेशान होकर भटकना नहीं पड़े। यह कहना है वर्धमान खुला  विश्वविद्यालय के नव नियुक्त लोकपाल पवन एन चन्द्रा का। पवन एन चन्द्रा कोटा के गुमानपुरा इलाके के ही निवासी हैं। चन्द्रा इससे पूर्व डिस्ट्रीक एन्ड सेशन जज रह चुके हैं। चन्द्रा 1982 से 2001 तक ज्यूडिशियल सर्विस में रहे हैं। वह धौलपुर, प्रतापगढ़ और सीकर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश रह चुके हैं। इसके साथ बाडमेर सवाई माधोपुर में चीफ डिस्ट्रीक जज रह चुके हैं। 2016 से 2021 कर चन्द्रा बारां के उपभोक्ता मंच अध्यक्ष भी रहे। </p>
<p><strong>- नवज्योति- वीएमओयू ने आपको लोकपाल नियुक्त किया इसके लिए बधाई,क्या काम रहेगा।</strong><br /><strong>चन्द्रा- </strong>अब छात्रों की शिकायतों पर ना केवल शीघ्र निर्णय हो पाएगा अपितु उनके हित में आ रही अड़चनें भी दूर हो पाएंगी।  छात्र समुदाय की शिकायतों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों में लोकपाल नियुक्त कर दिए हैं। कुलपति ने इनका अनुमोदन कर दिया है। लोकपाल नियुक्ति से तीन वर्ष तक अथवा 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक के लिए यह नियुक्ति की गई है। <br /><strong>- नवज्योति-काम की क्या प्राथमिकता रहेगी। </strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong>किसी बी स्टूडेंट को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो। उसको परेशानी है तो वह कॉलेज  स्तर की कमेटी में जाएं। वहां से भी परेशानी का निस्तारण नहीं हो तो यूनिवर्सिटी में ग्रीवेंसेज कमेटी में जाए। यदि वहां भी उसे न्याय नहीं मिलता तो वह लोकपाल के पास आ सकता है। लोकपाल का निर्णय ही अंतिम होगा। कोशिश करेंगे कि बच्चे अच्छे माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकें।<br /><strong>- नवज्योति- वीएमओयू से ज्यादातर स्टूडेंट को सूचनाएं सही समय पर नहीं मिलने की रहती हैं। कब एक्जाम होने हैं? इसका पता तक नहीं चलता। </strong><br /><strong>कोविड के समय तो हालात ही खराबथे।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा- </strong>मैं इस बारे में बात करूंगा। आज इन्टरनेट का जमाना है। सभी चीजें आॅनलाइन करवा दूंगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी। ऐसी व्यवस्था करवा देंगे। इसके साथ सभी परीक्षा समय पर हों। उनके रिजल्ट भी समय पर निकलें। इस पर भी हम ध्यान रखेंगे।<br /><strong>- नवज्योति- आप की नियुक्ति की सूचना भी अब तक आॅन लाइन नजर नहीं आती। जब कि यह सूचना आॅन लाइन होनी चाहिए।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार लोकपाल की सूचना आॅन लाइन होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी को अपनी वेब साइट पर इसे डालना होता है। शायद इसे डाल भी दिया है। फिर भी ऐसा है तो मैं पता करूंगा। यूनिवर्सिटी ने मुझसे इसे आॅन लाइन करने को कहा था। <br /><strong>- नवज्योति- राज्य में स्थित दूरस्थ शिक्षा केन्द्रों पर कब कक्षाएं लगेंगी, कब फार्म भरे जाएंगे। क्या अमेन्डमेन्ट हो रहा है कुछ पता नहीं चलता।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> मैं जो भी शिकायत आएगी उस मामले को देखूंगा। वीसी और रजिस्ट्रार से भी बात कर समस्याओं को सॉल्व करेंगे।<br /><strong>- नवज्योति- फिलहाल आप कहां निवास कर रहे हैं।अपने बारे में बताएं</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> बाडमेर सवाईमाधोपुर में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, लक्षमणगढ़, छबड़ा, बूंदी में एडिशनल डिस्ट्रीक एन्ड सेशन जज, अजमेर में बार्ड आॅफ रेवेन्यू मैम्बर, लेबर कोर्ट व ट्रिब्यिूनल कोर्ट जज, लोकायुक्त सचिवालय जयपुर, प्रतापगढ़,सीकर में ्िडस्ट्रीक एंड सेशन जज रहा हूं। फिलहाल वीएमओयू का लोकपाल हूं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jul 2024 16:38:47 +0530</pubDate>
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                <title>VMOU में जुलाई 2024 सत्र् हेतु प्रवेश प्रक्रिया की पहल, शिक्षा से वंचित सभी वर्ग हेतु घर बैठे उच्च शिक्षा प्राप्त करने का स्वर्णीम अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर क्षेत्रीय केन्द्र के निदेशक डॉ. अकबर अली ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न स्नातक, स्नात्कोतर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कार्यक्रमों में प्रवेश जारी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/initiation-of-admission-process-for-july-2024-session-in-vmou/article-84423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vmou-se-gopaniya-patrawaliya-chori-hone-ka-khatra.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( नेक ) से ए  ग्रेड प्राप्त वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा द्वारा जुलाई 2024 सत्र में प्रवेश प्रारम्भ कर दिए गए है। प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई रखी गई है।</p>
<p>जयपुर क्षेत्रीय केन्द्र के निदेशक डॉ. अकबर अली ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न स्नातक, स्नात्कोतर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कार्यक्रमों में प्रवेश जारी है। साथ ही एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त एमबीए दो वर्षीय पाठ्यक्रम में बिना प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मेरिट के आधार पर सीधे प्रवेश दिया जा रहा है। जिसका लाभ विभिन्न बैंकों/कम्पनियों/निगम एवं राज्य/केन्द्र सरकार के कार्मिकों सहित निजी व्यवसायी , विद्यार्थियों एवं महिलाओं को प्राप्त होगा। एम.बी.ए. की प्रवेश योग्यता 50 प्रतिशत अंको के साथ किसी भी विषय में  स्नातक अथवा स्नातकोत्तर उर्तीण रखी गई है। किन्तु 3 वर्षीय  प्रबन्धकीय/पर्येवेक्षीय/व्यावसायिक अनुभव प्राप्त अभ्यार्थियों के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत की बाध्यता नहीं है।</p>
<p>विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कैलाश सोढ़ानी ने बताया कि राजस्थान सरकार की दूरस्थ बालिका शिक्षा योजना के अन्र्तगत सभी छात्राओं/महिलाओं को विश्वविद्यालय के किसी भी पाठ्यक्रम को उर्तीण करने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत शुल्क वापसी का प्रावधान है, तथा एससी/ एसटी वर्ग को समाज कल्याण विभाग की योजना में शुल्क वापसी की सुविधा (छात्रवृति के माध्यम से ) द्वारा निःशुल्क शिक्षा का लाभ भी दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 18:32:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Pre-D.El.Ed. 2024: 92% परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[पांच डमी परीक्षार्थी पकड़े, कुलपति और स्कूल शिक्षा के शासन सचिव ने कंट्रोल रूम से की निगरानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pre-deled-2024-92-candidates-took-the-exam/article-83287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(4).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा द्वारा आयोजित प्री-डीएलएड परीक्षा राज्य के 1917 केन्द्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हुई। परीक्षा में कुल 6 लाख 45 हजार 254 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से पांच लाख 95 हजार 47 परीक्षार्थी उपस्थित (92.19 फीसदी) रहे और केवल 50 हजार 407 परीक्षार्थी अनुपस्थित (7.81 फीसदी) रहे। कुलपति प्रोफेसर कैलाश सोडाणी और स्कूल शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने कंट्रोल रूम से सतत निगरानी की तथा परीक्षा केन्द्रों का जायजा भी लिया। कुलपति प्रोफेसर सोडाणी ने बताया कि जालौर में एक और बाड़मेर में चार डमी परीक्षार्थी पकड़े गए जिनके खिलाफ  प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जयपुर में सबसे ज्यादा 56 हजार 519 परीक्षार्थी पंजीकृत थे जिनमें से 50 हजार 475 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। जोधपुर में 43 हजार 693 परीक्षार्थी पंजीकृत थे जिनमें से 39 हजार 469 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। कोटा में कुल 19 हजार 600 परीथार्थियों में से 18 हजार 333 परीक्षार्थी केन्द्रों पर परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा में पर्सनलाइज्ड ओएमआर शीट का उपयोग किया गया जिसमें किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 13:07:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Pre-D.El.Ed Exam 2024 के आवेदन शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[आवेदन शुल्क यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बकिंग अथवा ई-मित्र के माध्यम से कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/applications-for-pre-deled-exam-2024-started/article-77691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vmou-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्री डीएलएड परीक्षा 2024 में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। इस बार वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय इस परीक्षा का आयोजन पूरे राज्य में कर रहा है। वीएमओयू के कुलपति प्रोफेसर कैलाश सोढ़ाणी ने बताया कि पूरी तैयारी के साथ प्री डीएलएड परीक्षा में आवेदन करने तथा प्रवेश परीक्षा कराने की तिथियां घोषित की जा रही हैं। परीक्षा समन्वयक डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन फॉर्म भरने की शुरूआत 11 मई से हो गई हैं। 31 मई तक आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि रखी गई है और 30 जून को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। </p>
<p><strong>यह होगी कवायद</strong><br />अभ्यर्थी अंतिम तारीख की अफरा तफरी से बचने के लिए समय रहते ही अपना आवेदन ऑनलाइन सबमिट करा दें, क्योंकि आवेदन प्रक्रिया के लिए बहुत कम समय बचा है। आवेदक का कक्षा 12वीं उतीर्ण होना अथवा वर्ष 2024 में कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित होना आवश्यक है। सह-समन्वयक संदीप हुड्डा ने बताया कि अभ्यर्थी पर 11 मई से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क प्री डी. एल. एड. प्रवेश परीक्षा सामान्य अथवा संस्कृत के लिए 450 रुपए है। प्री डी. एल. एड. प्रवेश परीक्षा सामान्य तथा संस्कृत दोनों में आवेदन करने के लिए 500 रुपए हैं। आवेदन शुल्क यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बकिंग अथवा ई-मित्र के माध्यम से कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 12:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>6 माह हो गए बेकार, डिग्री से वंचित रह गए हजारों विद्यार्थी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के चक्कर काट मायूस लौट रहे और वीएमओयू की कार्यशैली को कोसते हुए नजर आ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-months-have-passed--thousands-of-students-have-been-deprived-of-their-degree/article-64215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/6-maah-ho-gye-bekar,-degree-s-vanchit-reh-gye-hzaro-vidhyarthi...kota-news-15-12-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। जहां एक ओर प्रदेशभर के विद्यार्थियों का आक्रोश झेल रहा वहीं, 6 माह बाद भी यूजीसी से डिग्री कोर्सेज करवाने की मान्यता नहीं मिल सकी। नतीजन, हजारों विद्यार्थी डिग्री से वंचित रह गए। जुलाई सेशन की प्रवेश प्रक्रिया पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लगाई रोक पर भी फैसला नहीं हो सका। प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के चक्कर काट मायूस लौट रहे और वीएमओयू की कार्यशैली को कोसते हुए नजर आ रहे हैं। </p>
<p><strong>यूजीसी ने इसलिए लगाई प्रवेश प्रक्रिया पर रोक</strong><br />विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोटा ओपन यूनिवर्सिटी पर समय पर नेक ग्रेड से संबंधित दस्तावेज जमा नहीं करवाने का हवाला देते हुए आॅक्टूबर माह में जुलाई सेशन के डिग्री कोर्सज में एडमिशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी। वहीं, वीएमओयू यूजीसी की लापरवाही की वजह से नेक दस्तावेज जमा नहीं करवा पाने  का आरोप लगा रहा है। दोनों के झगड़े के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी एडमिशन से वंचित रह गए। जबकि, प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर थी।  </p>
<p><strong>अधर में लटका विद्यार्थियों का भविष्य </strong><br />यूजीसी के निर्णय के विरुद्ध वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय हाईकोर्ट की शरण में पहुंचा लेकिन अब तक मामले में कोई फैसला नहीं हुआ। वहीं, जुलाई सेशन भी लगभग समाप्त हो गया। जबकि, प्रदेशभर से बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिदिन डिग्री कोर्सेज में एडमिशन को लेकर यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे हैं। जिन्हें संतोषजनक जवाब तक नहीं मिल रहा। हालांकि, उन्हें नए साल में जनवरी सेशन से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन दिया जा रहा है। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी की लापरवाही से साल खराब हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय पर दस्तावेज जमा नहीं करवाए, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। </p>
<p><strong>6 माह बाद भी वीएमओयू को नहीं मिली मान्यता</strong><br />सवाईमोधोपुर से आए दुर्गेश सिंह, हिमांशी व आशू गुप्ता ने बताया कि यूजीसी ने आॅक्टूबर माह में जुलाई सेशन की प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय कोर्ट चला गया। न यूजीसी से मान्यता मिली और न ही कोर्ट का कोई फैसला हो सका। नतीजन, जुलाई से दिसम्बर तक 6 माह बीत गए लेकिन स्नातक व स्नातकोत्तर डिग्री कोर्सेज करवाने की मान्यता नहीं मिली। इधर, चुरू-झुंझूनु से आए छात्र प्रतिवर्धन, विनीत व शिवम पुरोहित का कहना है, ज्योग्राफी से पीजी करना था, अब तक यूनिवर्सिटी के तीन चक्कर काट चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। यूनिवर्सिटी सारा दोष यूजीसी व नैक संस्था पर मढ़ रही है तो यूजीसी वीएमओयू की गलती बता रहा है। दोनों के झगड़े के बीच नुकसान विद्यार्थी का हो रहा।  </p>
<p><strong>जनवरी सेशन में एडमिशन शुरू होने की आस  </strong><br />वीएमओयू अधिकारियों का कहना है कि नए साल में जनवरी सेशन में डिग्री कोर्सेज करवाने की मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं, जिसके मिलने की उम्मीद है।  ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करवा दी जाएगी। हालांकि, यूनिवर्सिटी से ही जुड़े कर्मचारियों का कहना है, मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में मान्यता मिलने पर संशय बना हुआ है। एडमिशन नहीं होने से यूनिवर्सिटी को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि, सर्टिफिकेट कोर्स में दाखिला दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>हर साल 45 हजार से ज्यादा विद्यार्थी लेते हैं एडमिशन</strong><br />वीएमओयू से मिली जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी के प्रदेशभर में 7 क्षेत्रीय कार्यालय है, जिसमें अजमेर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर तथा भरतपुर शामिल हैं। हर साल यूजी व पीजी डिग्री कोर्सेज में राज्यभर से करीब 45 से 50 हजार विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। वहीं, ओवरआॅल सवा लाख विद्यार्थी नामांकित रहते हैं। लेकिन, इस बार प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगने से नौकरी के साथ डिग्री पूरी करने वालों के सपने चकनाचूर हो गए। </p>
<p><strong>डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स में 10 हजार एडमिशन</strong><br />वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा में डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्सज में जुलाई सेशन में प्रदेशभर से 9 हजार 963 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है। राज्य में 7 रिजनल सेंटर है, जिसमें कोटा से 1509, अजमेर से 679, बीकानेर से 1525, जयपुर से 2267, जोधपुर से 2270, उदयपुर में 1043 और भरतपुर सेंटर से 670 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />कोटा ओपन यूनिवर्सिटी में एक साल में दो बार एडमिशन प्रक्रिया शुरू होती है। जनवरी व जुलाई माह में पूरे प्रदेश से सैंकड़ों विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रम में दाखिला लेते हैं। मास्टर डिग्री में दाखिला देने के लिए विवि को यूजीसी से पिछले पांच साल के लिए मान्यता मिली हुई थी, जो जुलाई 2023 को खत्म हो गई। इसी बीच यूजीसी ने देश के समस्त विश्वविद्यालयों को नेशनल असेसमेंट एण्ड एक्रीडिएशन काउंसिल (नैक) ग्रेड लेने की अनिवार्यता लागू कर दी। ऐसे में वीएमओयू ने 12 मई को सम्पूर्ण प्रक्रिया कर नैक टीम को विजिट के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद अगस्त में टीम वीएमओयू आई और तीन दिन फिजिकल विजिट कर लौट गई लेकिन कुछ कारणों से ग्रेड नहीं दी। इसके बाद फिर से सितम्बर माह में नैक टीम ने विजिट की और 27 सितम्बर को ए गे्रड दी लेकिन 30 अगस्त तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नैक की ए ग्रेड वाला सर्टिफिकेट यूजीसी को नहीं दिए जाने के कारण  डिग्री कोर्सेज में एडमिशन पर रोक लगा दी।  </p>
<p>मामला कोर्ट में चल रहा है। हालांकि, जनवरी सेशन 2024 से एडमिशन प्रक्रिया शुरू करेंगे। यूजीसी हमें परमिशन देने जा रही है, ऐसे संकेत मिल रहे हैं। <br /><strong>- प्रो. कैलाश सोढाणी, कुलपति, वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Dec 2023 16:51:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लापरवाही वीएमओयू की, सजा हम भुगत रहे</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार जुलाई सेशन में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को वीएमओयू की लापरवाही से एडमिशन नहीं मिल पाया, ऐसे में उनका पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vmou-s-negligence--we-are-facing-the-punishment/article-60868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/laparwahi-vmou-ki,-saza-hm-bhugat-rhe...kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की जुलाई सेशन की प्रवेश प्रक्रिया पर यूजीसी द्वारा रोक लगाई जाने से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। प्रदेश के करीब 50 हजार से अधिक विद्यार्थी एडमिशन से वंचित रह गए। दूर-दराज के जिलों से प्रतिदिन सैकड़ों विद्यार्थी कोटा वीएमओयू में पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें डिग्री कोर्सेज में एडमिशन नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोटा ओपन यूनिवर्सिटी की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थियों ने नवज्योति से अपनी पीढ़ा साझा की।  </p>
<p><strong>गलती यूनिवर्सिटी की, भुगत रहे हम</strong><br />गढ़ेपान निवासी छात्र हितेश कुमार ने बताया कि वे एमए ज्योग्राफी करना चाहते हैं, जुलाई सेशन में एडमिशन लेने के लिए यूनिवर्सिटी आए थे। तब क्षेत्रिय कार्यालय में बैठे कर्मचारियों ने बताया कि अभी एडमिशन नहीं हो रहे। एक-दो महीने बाद आने की बात कही थी। अब आने पर बताया जा रहा है कि यूजीसी ने प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कारण पता करने पर नेक संबंधित दस्तावेज समय पर जमा नहीं करवाया जाना बताया गया। गलती यूनिवर्सिटी की है और सजा हम जैसे विद्यार्थी भुगत रहे हैं। </p>
<p><strong>ऐसे तो साल बर्बाद हो जाएगा </strong><br />बारां जिले से आए कैलाश नामा व योगेश कहार ने कहा, एमएसडब्ल्यू में पीजी करने के लिए जुलाई सेशन में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटी आया था।,तब प्रवेश प्रक्रिया बंद होने का हवाला दिया गया। ऐसे में दो महीने बाद इसी उम्मीद से आया कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई होगी, लेकिन यूजीसी द्वारा रोक लगाने का मामला सामने आया। ऐेसे में अब दो ही विकल्प बचते हैं, पहला-महंगी फीस देकर प्राइवेट कॉलेज से डिग्री करें। दूसरा-अगले साल फिर एडमिशन लेने का प्रयास करें। यूनिवर्सिटी सारा दोष यूजीसी व नैक संस्था पर मढ़ रहा है तो यूजीसी वीएमओयू की गलती बता रहा है। दोनों के बीच मतभेद में सैंकड़ों विद्यार्थी पिस रहे हैं। </p>
<p><strong>कोर्ट का निर्णय के बाद स्पष्ट होगी स्थिति</strong><br />इधर, झालरापाटन से आए मुकेश मालव, सुमित नंदवाना का कहना है, इतिहास से एमए करना था लेकिन यहां तो यूजीसी ने ही प्रवेश प्रक्रिया रोक दी। गलती विश्वविद्यालय करें और सजा हम भुगते, यह कहां का इंसाफ है। सौ से ज्यादा किमी की दूरी से यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां आकर पता चला कि मामला तो कोर्ट में गया। जुलाई सेशन के एडमिशन नवम्बर में शुरू होंगे या जनवरी में। स्थिति कोर्ट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी, तब तक विद्यार्थियों को इंतजार ही करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>दोनों के मतभेद में विद्यार्थी पिस रहा</strong><br />सवाईमाधोपुर निवासी पुनित कुमार, जगदीश सुमन, नरेंद्र खंगावत का कहना है, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से यूजीसी को ऐसा निर्णय लेना पड़ा। प्राइवेट कॉलेज व यूनिवर्सिटी महंगी फीस वसूलते हैं। इसलिए राज्य के दूर-दराज के जिलों से विद्यार्थी यहां एडमिशन को आते हैं। यहां भी दाखिला न  मिले तो छात्र कहां जाए। विवि प्रशासन को समय पर मामले का निस्तारण करवाना चाहिए। </p>
<p><strong>हर साल 44 से 50 हजार विद्यार्थी लेते हैं एडमिशन</strong><br />वीएमओयू से मिली जानकारी के अनुसार कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के प्रदेशभर में 7 क्षेत्रीय कार्यालय है, जिसमें अजमेर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर तथा भरतपुर शामिल हैं। हर साल मास्टर डिग्री कोर्सेज में प्रदेश्भर से करीब 44 से 50 हजार विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। लेकिन इस बार जुलाई सेशन में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को वीएमओयू की लापरवाही से एडमिशन नहीं मिल पाया। ऐसे में उनका पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर है।</p>
<p><strong>डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स में 10 हजार एडमिशन</strong><br />वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा में डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्सज में जुलाई सेशन में प्रदेशभर से 9 हजार 963 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है। राज्य में 7 रिजनल सेंटर है, जिसमें कोटा से 1509, अजमेर से 679, बीकानेर से 1525, ने दाखिला लिया है। </p>
<p>कोर्ट का निर्णय हमारे पक्ष में आया तो उसी दिन से एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर देंगे। साल खराब होने जैसी कोई बात नहीं है। विद्यार्थियों के सामने विकल्प खुले हैं, वे चाहे तो किसी भी संस्था में प्रवेश ले सकते हैं। <br /><strong>- प्रो. कैलाश सोढाणी, कुलपति, वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 18:19:08 +0530</pubDate>
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                <title>वीएमओयू की लापरवाही : 50 हजार विद्यार्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[मास्टर डिग्री में दाखिला नहीं मिलने से करीब 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का साल बर्बाद हो जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vmou-s-negligence--the-sword-hangs-on-the-future-of-50-thousand-students/article-60686"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(9)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शनि की साढ़े साती किसी पर लग जाए तो उसके बुलंद सितारे भी गर्दिश में चले जाते हैं, इन दिनों वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के साथ भी यही हो रहा है। वीएमओयू ने भले ही नेक में ए ग्रेड हासिल कर ली हो लेकिन यूजीसी ने विश्वविद्यालय की जुलाई सेशन की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। जिससे करीब 50  हजार से अधिक विद्यार्थी एडमिशन से वंचित रह गए। मामले को लेकर विवि प्रशासन यूजीसी के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में गया है। जहां 30 अक्टूबर को संभवत: सुनवाई होगी।  दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोटा ओपन यूनिवर्सिटी पर समय पर नेक से संबंधित दस्तावेज जमा नहीं करवाने का हवाला देते हुए जुलाई सेशन में डिग्री कोर्सज में एडमिशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। वहीं, वीएमओयू इसे यूजीसी की लापरवाही की वजह से नेक दस्तावेज जमा नहीं करवा पाने  का आरोप लगा रहा है। बहरहाल, दोनों के झगड़े के कारण हजारों विद्यार्थी एडमिशन से वंचित हो गए। जबकि, प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर थी, जो खत्म हो गई। बताया जा रहा है कि यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो की कुछ समय पहले हुई 20वीं बैठक में इस प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />कोटा ओपन यूनिवर्सिटी में एक साल में दो बार एडमिशन प्रक्रिया शुरू होती है। जनवरी व जुलाई माह में पूरे प्रदेश से सैंकड़ों विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रम में दाखिला लेते हैं। मास्टर डिग्री में दाखिला देने के लिए विवि को यूजीसी से पिछले पांच साल के लिए मान्यता मिली हुई थी, जो जुलाई 2023 को खत्म हो गई। इसी बीच यूजीसी ने देश के समस्त विश्वविद्यालयों को नेशनल असेसमेंट एण्ड एक्रीडिएशन काउंसिल (नैक) की ग्रेड लेने की अनिवार्यता लागू कर दी। ऐसे में वीएमओयू ने 12 मई को सम्पूर्ण प्रक्रिया कर नैक टीम को विजिट के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद अगस्त में टीम वीएमओयू आई और तीन दिन फिजिकल विजिट कर लौट गई लेकिन कुछ कारणोें की वजह से ग्रेड नहीं दी। इसके बाद फिर से सितम्बर माह में नैक टीम ने विजिट की और 27 सितम्बर को ए गे्रड दी लेकिन 30 अगस्त तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नैक की ए ग्रेड वाला सर्टिफिकेट यूजीसी को नहीं दिए जाने के कारण मास्टर डिग्री कोर्सेज में एडमिशन पर रोक लगा दी।  </p>
<p><strong>दांव पर सैंकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य </strong><br />यूजीसी ने जुलाई सेशन के पीजी कोर्सेज में दाखिले पर रोक लगा दी है। हालांकि डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्सेज में प्रदेशभर से 9 हजार 963 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इसमें कोटा रिजनल सेंटर की बात करें तो 1509 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। लेकिन, मास्टर डिग्री में दाखिला नहीं मिलने से करीब 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का साल बर्बाद हो जाएगा। हालांकि, छात्रों के हित को देखते हुए वीएमओयू प्रशासन यूजीसी के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में गया है। 30 अक्टूबर को कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगा। </p>
<p>यूजीसी की डेढ़ लाइन को लेकर नैक का  इश्यू था जिसकी वजह से यह प्रोब्लम हुई है।<br /><strong>- के.के.गोयल रजिस्ट्रॉर वीएमओयू </strong></p>
<p>गत 12 मई को सम्पूर्ण दस्तावेज व 6 लाख रुपए फीस जमा करवाने के बाद नैक टीम को विजिट के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद 7,8 व 9 अगस्त को टीम ने वीएमओयू में विजिट की लेकिन ग्रेड नहीं दी। कारण पता करने पर उनके निरीक्षण में कुछ खामियां रह गई थी। नैक टीम ने अपनी गलती मानते हुए दोबारा फिर से यूनिवर्सिटी की 20, 21 व 22 सितम्बर को फिर से विजिट की और 27 सितम्बर को ए ग्रेड मिली। नैक टीम ने लापरवाही करते हुए विश्वविद्यालय को ग्रेड देने में साढ़े 4 माह लगा दिए। जिसकी वजह से विवि यूजीसी को समय पर ए ग्रेड का सर्टिफिकेट नहीं दे पाया।इसी कारण हमने न्यायालय की शरण ली है। <br /><strong>- प्रो. कैलाश सोढाणी, कुलपति, कोटा ओपन विश्वविद्यालय, कोटाु</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2023 11:30:53 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश के लाखों स्टूडेंट्स को रोजगार नहीं दिला पा रहा वीएमओयू</title>
                                    <description><![CDATA[यूजीसी की गाइड लाइन में स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी चाहे नियमित हो या ओपन, प्लेसमेंट व यूथ डवलपमेंट सेल गठित करना जरूरी है, ताकि छात्रों को शिक्षा के साथ रोजगार से जोड़ा जा सके। वीएमओयू में सेल तो बनी है लेकिन कागजों में चल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vmou-is-not-able-to-provide-employment-to-lakhs-of-students-of-the-state/article-36125"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/pradesh-k-laakho-students-ko-rozgaar-nahi-dila-paa-raha-vmou..kota-news..31.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विश्वविद्यालय की स्थापना विद्यार्थियों के सर्वार्गिंण विकास के उददेशय से की जाती है। स्कूल के बाद उच्च शिक्षण संस्थान ही वह स्थान है, जहां कॅरियर की दिशा तय होती है। यहां कदम रखने वाले छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन देने के साथ रोजगार के लिए तैयार करना भी विश्वविद्यालय का किरदार है। इसीलिए, विश्वविद्यालयों में यूथ डवलपमेंट व प्लेसमेंट सेल गठित की जाती है। लेकिन, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय यूजीसी के नियमों का खुला उल्लंघन कर रहा है। यहां प्लेसमेंट सेल तो बनी है लेकिन आज तक कैम्पस में कभी जॉब मेला नहीं लगाया गया और न ही रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए गए। जबकि, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी अपने छात्रों के लिए प्लेसमेंट कैम्प लगाती है। 2016 में 100 विद्यार्थियों को रोजगार भी दिलाया था। इतना ही नहीं, गत वर्ष प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन भी करवाया चुकी है। दूरस्त शिक्षा के क्षेत्र में जब इग्नू प्रतिष्ठित कम्पनियों को विद्यार्थियों के बीच ला सकती है तो फिर वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय क्यों नहीं कर सकता। </p>
<p><strong>सवाल: इग्नू दे रहा रोजगार तो वीएमओयू क्यों नहीं </strong><br />यूजीसी की गाइड लाइन में स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी चाहे नियमित हो या ओपन, प्लेसमेंट व यूथ डवलपमेंट सेल गठित करना जरूरी है, ताकि छात्रों को शिक्षा के साथ रोजगार से जोड़ा जा सके। वीएमओयू में सेल तो बनी है लेकिन कागजों में चल रही है। जबकि, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी अपने कैम्पस में रोजगार मेला लगाती है। मई 2016 में यूनिवर्सिटी ने अपने दिल्ली स्थित मैदान गढ़ी कैम्पस में प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया था। जिससे में 100 विद्यार्थियों को मल्टीनेशनल कम्पनियों में रोजगार मिला था। इतना ही नहीं, कैंपस प्लेसमेंट में दिल्ली के अलावा करनाल, अलीगढ़, चंडीगढ़, देहरादून और जयपुर के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था। जब इग्नू कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर प्लेसमेंट कैम्प आयोजित करवा सकती है तो वीएमओयू क्यों नहीं करवा सकता। हालांकि, इस सवाल का जवाब वीएमओयू के कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे सके। </p>
<p><strong>इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप हो कोर्सेज का संचालन</strong><br />एक तरफ जहां युवा आगे बढ़ने के सपने देख रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अकेडमिक में दी जा रही शिक्षा और इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के बीच भारी अंतर के कारण उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सही दिशा में उठाया गया एक कदम युवाओं के जीवन में कई परिवर्तन ला सकता है । इसी को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय को डंडस्ट्री की मांग के अनुरूप एकेडिमक मॉडल बनाकर कोर्सेज का संचालन करना चाहिए। यह प्रयास इंडस्ट्री की आवश्यकताओं व अकेडमिक शिक्षा के बीच अंतर कम कर सकता है। यूजीसी का प्रावधान है कि विश्वविद्यालय अपने क्षेत्रों में संचालित इंडस्ट्रीज से समनव्य स्थापित कर विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़े लेकिन वीएमओयू ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किए। </p>
<p><strong>रिसर्च आधारित एनवायरमेंट हो विकसित </strong><br />इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप छात्रों को तैयार करने के लिए पढ़ाई के समय ही उन्हें इंडस्ट्री की आवश्यकताओं से अवगत कराना बेहद आवश्यक है। जिसके लिए विश्वविद्यालय को अपने क्षेत्रों में संचालित विभिन्न कम्पनियों से समन्व्य स्थापित करने चाहिए। साथ ही क्वालिटी एजुकेशन पर फोकस कर बच्चों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है। स्थानीय, राष्ट्रीय व वैश्विक मुद्दों के लिए यूनिवर्सिटी को रिसर्च आधारित एनवायरमेंट निर्मित करना चाहिए। </p>
<p><strong>वीसी की बातों में गतिरोध</strong> <br />वीएमओयू के कुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय दुरस्थ शिक्षा मोड पर संचालित है। यहां प्लेसमेंट सेल रेगुलर यूनिवर्सिटी के मुकाबल ज्यादा इफेक्टिव नहीं हो सकती। क्योंकि, यहां दूर दराज के विद्यार्थियों को एक जगह एकत्रित करना मुश्किल है। जबकि, हाल ही में वीएमओयू में रुक्टा राष्टÑीय का सेमिनार आयोजित करवाया गया था। जिसमें प्रदेशभर से प्रोफेसरों को बुलाया गया था। जब यह सेमिनार हो सकता है तो फिर प्लेसमेंट शिविर क्यों नहीं हो सकता। विवि चाहे तो प्रदेश के सभी जिलों में स्थित रिजनल सेंटर पर ही रोजगार मेला लगा सकता है। इग्नू की तरह आॅनलाइन विद्यार्थियों  को मेले की सूचना दी जा सकती है। </p>
<p><strong>सवाल इग्नू करवा रहा प्लेसमेंट कैम्प तो वीएमओयू में क्यों नहीं</strong><br /><strong> यूथ डवलपमेंट सेल का नहीं अता-पता</strong><br />शिक्षाविद्धों का कहना है कि यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार विश्वविद्यालय व कॉलेजों में प्लेसमेंट सेल के अलावा यूथ डवलपमेंट सेल भी होनी चाहिए। लेकिन, वीएमओयू में इस सेल का कोई अता पता नहीं है। यूथ डवलपमेंट सेल का काम विद्यार्थियों का कौशल विकास करना है। नौकरी के लिए रिज्यूम तैयार करना, साक्षात्कार देने का तरीका, ड्रैस कोर्ड की समझ विकसित करना, सवालों का जवाब देने की कला सहित जॉब इंटरव्यू  के लिए तैयार करना होता है। पर्सनलटी डवलपमेंट प्रोग्राम चलाने होते हैं।   इसके लिए दक्ष प्रशिक्षक को आमंत्रित कर सेमिनार, वेबीनार व शिविर के आयोजन किए जाते हैं। लेकिन, विवि द्वारा इस दिशा में कोई काम नहीं करवाया जाता।</p>
<p><strong>वीएओयू में संचालित हो रहे 67 कोर्स </strong><br /><strong>36 साल से नहीं लगा प्लेसमेंट कैम्प</strong><br />वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की स्थापना 23 जुलाई 1987 में हुई थी। तब से लेकर अब तक एक बार भी प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन नहीं करवाया गया। जबकि, इस दरमियान लाखों बच्चे पास आउट हो चुके हैं। हालात यह है, यहां से प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां लेकर भी युवा बेरोजगार है। वे नौकरी के लिए भटक रहे हैं। उनकी न तो कॅरियर काउंसलिंग करवाई जाती है और न ही प्लेसमेंट का आयोजन करवाया जाता है। विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक कई वीसी बदल गए लेकिन किसी ने भी व्यवस्थाओं में सुधार की जहमत नहीं उठाई। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यूजीसी गाइड लाइन के मुताबिक कॉलेज हो या विश्वविद्यालय, प्लेसमेंट सेल सभी जगह गठित की जाती है। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थानीय कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर उन्हें कैम्पस में स्टूडेंट्स के बीच आमंत्रित करना चाहिए। ताकि, कम्पनियों की एम्लोई से क्या अपेक्षाएं रहती हैं, इससे रुबरू हो सके। साथ ही कैम्पस में पर्सनलटी डवलपमेंट के प्रोग्राम आयोजित किए जाने चाहिए। जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास मजबूत होगा तो वह स्वयं के स्तर पर रोजगार के लिए एप्रोच कर सकेगा।<br /><strong>- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय</strong></p>
<p>विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टिकल ट्रैनिंग भी दी जानी चाहिए। इंडस्ट्रीज की मांग के अनुरूप अपने व्यवसायी शिक्षा में बदलाव किए जाना चाहिए। कम्यूनिकेशन स्कील, पर्सनलटी डवलपमेंट पर विशेष किया जाए और विभिन्न कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर कैम्पस में प्लेसमेंट कैम्प लगाए जाएं। साथ ही इंडस्ट्री लेक्चर के लिए सेमिनार, वेबीनार का आयोजन कर बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। यदि, स्टाफ की कमी है तो विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी नियुक्त कर स्टूडेंट्स के कौशल विकास पर फोकस किया जाना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. अनुज विलियम, सहायक आचार्य, विद्या सम्बल, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज  </strong></p>
<p>किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान में बच्चों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्लेसमेंट सेल होना अनिवार्य है। यूजीसी की स्पष्ट गाइड लाइन है कि कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में प्लेसमेंट सेल होना और उसे सक्रिय रखना अनिवार्य है। वहीं, नेक की मान्यता के लिए भी संस्थान में प्लेसमेंट सेल के अलग से नम्बर काउंट होते हैं। वहीं, कितने बच्चों को प्लेसमेंट के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराए, इसका भी रिकॉर्ड रखा जाता है। <br /><strong>- डॉ. संजय भार्गव, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हर कॉलेज व यूनिवर्सिटी में प्लेसमेंट सेल अनिवार्य है। छात्रों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने में इस सेल की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जॉब इंटरव्यू, बात करने का तरीका, रिज्यूम तैयार करना, बॉडी लेंग्वेज, ड्रेस कोर्ड व इंटरव्यू के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जाता है। जिससे स्टूडेंट्स में आत्मविश्वास का लेवल बढ़ता है। <br /><strong>-डॉ. सुमन शर्मा, प्लेसमेंट सेल संयोजक, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाएं सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। प्लेसमेंट कैम्प यहां इतने इफेक्टीव नहीं हो सकते जितने रेगुलर यूनिवर्सिटी में होते हैं। आॅनलाइन मोड पर विद्यार्थियों को वैकेंसी की सूचना दी जाएगी। यह व्यवस्था प्रत्येक रिजनल सेंटर से की जाएगी। विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। व्यवस्थाओं में और भी बदलाव होंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कौशल विकास की ट्रैनिंग दी जाएगी। <br /><strong>-डॉ. कैलाश सोडानी, कुलपति वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>इग्नू हर साल अपने स्टूडेंट्स को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रत्येक रिजनल सेंटर पर प्लेसमेंट कैम्प आयोजित करवाती है। देशभर में इग्नू के करीब 65 रिजल्न सेंटर हैं और 200 से ज्यादा कोर्सेज चला रहे हैं। स्टडी सेंटर के माध्यम से रिजनल सेंटर विद्यार्थियों से सम्पर्क में रहते हैं। जैसे ही कोई नौकरी, अपेंडशिप या ट्रैनिंग का अवसर मिलता है तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म, कॉन्टेक्ट ग्रुप, आॅनलाइन ग्रुप व प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से विद्यार्थियोंको सूचना दे दी जाती है। यदि इच्छाशक्ति हो  तो दुरस्त  शिक्षा में भी प्लेसमेंट कैम्प सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है। <br /><strong>- राजकुमार गर्ग, को-आॅर्डिनेटर स्टडी सेंटर इग्नू कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Jan 2023 15:05:44 +0530</pubDate>
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                <title>न समय पर परीक्षा करवा पाया और न ही पेपर की हिफाजत कर सका वीएमओयू</title>
                                    <description><![CDATA[वीएमओयू के प्रदेशभर में 115 परीक्षा केंद्र हैं। जहां जून 2022 सेशन के विभिन्न विषयों के पेपर चल रहे हैं, जिनमें करीब 1 लाख विद्यार्थी परीक्षाएं दे रहे हैं। वहीं, जोधपुर रीजनल की बात करें तो यहां 65 केंद्रों परीक्षाएं जारी हैं। जिनमें से 7 से 8 हजार विद्यार्थी हिन्दी साहित्य का पेपर दे रहे हैं। इनमें से कुछ सेंटर से पेपर लीक होने की जानकारी सामने आ रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vmou-could-neither-get-the-exam-done-on-time-nor-could-protect-the-paper/article-34219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/vardhaman_mahaveer-uni.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। वीएमओयू न तो परीक्षाएं समय पर करवा पा रहा और न ही पेपर की हिफाजत कर पाया। जोधपुर में मंगलवार को बीए सेकंड ईयर के हिन्दी साहित्य का पेपर परीक्षा से 7.30 घंटे पहले ही आउट हो चुका था। सुबह 8 बजे जहां पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था, वहीं दोपहर 3.30 से शाम 5 बजे तक विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर हजारों विद्यार्थी उसी पेपर को हल कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि पेपर लीक होने के साढ़े सात घंटे बाद भी वीएमओयू को इसकी भनक तक नहीं लगी। 12 घंटे बीतने के बाद मामले की सूचना कुलपति तक पहुंची तो विश्वविद्यालय में हड़कम्प मच गया। हालांकि देर शाम तक परीक्षा नियंत्रक मामले की पुष्टि नहीं होने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। वहीं, घटना के अगले दिन बुधवार को कुलपति कैलाश सोडाणी ने कमेटी गठित कर मामले की जांच के लिए जोधपुर भेजी। </p>
<p><strong>प्रदेश के 115 केंद्रों पर हो रही परीक्षाएं </strong><br />वीएमओयू के प्रदेशभर में 115 परीक्षा केंद्र हैं। जहां जून 2022 सेशन के विभिन्न विषयों के पेपर चल रहे हैं, जिनमें करीब 1 लाख विद्यार्थी परीक्षाएं दे रहे हैं। वहीं, जोधपुर रीजनल की बात करें तो यहां 65 केंद्रों परीक्षाएं जारी हैं। जिनमें से 7 से 8 हजार विद्यार्थी हिन्दी साहित्य का पेपर दे रहे हैं। इनमें से कुछ सेंटर से पेपर लीक होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, विवि प्रशासन द्वारा मामले की जांच पूरी होने से पहले पेपर आउट होने की पुष्टि नहीं की जा रही है। </p>
<p><strong>जोधपुर रवाना हुई जांच टीम</strong><br />बीए द्वितीय वर्ष हिन्दी साहित्य का पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार सुबह ही प्रोफेसरों की तीन सदसीय टीम को घटना की सत्यता व मामले की जांच के लिए कोटा से जोधपुर रवाना कर दिया है। यह टीम दो दिन जोधपुर के सभी परीक्षा केंद्रों पर जांच करेगी और 10 दिन में सम्पूर्ण मामले की रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी। यदि जांच में पेपर लीक होने की पुष्टि होती है तो संबंधित परीक्षा केंद्र व व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। </p>
<p><strong>6 माह देरी से चल रहा शैक्षणिक सत्र</strong><br />वीएमओयू का शैक्षणिक सत्र निर्धारित समय से 6 महीने पीछे चल रहा है। हिन्दी साहित्य, बीएड, राजनेतिक विज्ञान व भुगोल सहित अन्य संकाय के द्वितीय वर्ष के पेपर जून 2022  में होने थे, जो जनवरी 2023 में हो रहे हैं। शैक्षणिक सत्र लेट होने का असर इनके परिणाम पर पड़ेगा। कई विद्यार्थी ऐसे हैं जो समय पर परीक्षा नहीं होने के कारण भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। </p>
<p><strong> शिक्षक भर्ती परीक्षा से रह गए वंचित </strong><br />करौली निवासी बीएड द्वितीय वर्ष के परीक्षार्थी धर्म सिंह मीणा व दीपक ने बताया कि वर्धमान खुला विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण बीएड द्वितीय वर्ष के करीब 500 विद्यार्थी   शिक्षक भर्ती परीक्षा से वंचित रहे गए। उन्होंने बताया कि हमारे बीएड द्वितीय वर्ष के पेपर जून-2022 में होने थे जो 3 जनवरी 2023 में सम्पन्न हुए। वीएमओयू की लचर व्यवस्था के कारण अक्टूबर में प्रथम ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा से वंचित रहे गए। इसके अलावा नवम्बर में संस्कृत विभाग की सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें भी हम शामिल नहीं हो सके। </p>
<p><strong>डेढ़ साल बाद जुड़े असाइनमेंट के नम्बर</strong><br />बूंदी निवासी बीएड परीक्षार्थी समुद्र सिंह व दौसा के पवन ने बताया कि विवि की लेटलतीफी का खामियाजा वर्ष 2021-22 सत्र के बीएड विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। प्रथम वर्ष की परीक्षा जून 2021 में होनी थी जो 7 माह बाद दिसम्बर में हुई। जुलाई 2022 में असाइनमेंट के नम्बर जोड़े गए। </p>
<p><strong>जोधपुर से कोटा के लगाने पड़े थे 4 चक्कर </strong><br />जोधपुर निवासी उम्मेद सिंह व अरविंद कुमार का कहना है, विश्वविद्यालय के जोधपुर रिजनल सेंटर से बीएससी की थी। प्रथम वर्ष में फिजिक्स-केमेस्टी में बैक आई थी। डिफाल्टर फॉर्म भरा और परीक्षा देकर पास हो गया था। इसी दौरान तीन साल की डिग्री भी पूरी हो गई थी लेकिन प्रथम वर्ष के नंबर अंकतालिका में नहीं जोड़े गए थे। जिससे रिजल्ट अधूरा रहा। शिकायत लेकर जोधपुर सेंटर पर गए तो उन्होंने कोटा भेज दिया। जोधपुर से कोटा के 4 चक्कर काटने के बाद काम पूरा हो सका। </p>
<p><strong>एक साल का कोर्स 3 साल बाद हुआ पूरा</strong> <br />भीलवाड़ा निवासी हिम्मत सिंह व अरविंद कुमार बताते हैं, एक साल का लाइब्रेरी डिप्लोमा कोर्स को पूरा करने में तीन साल से अधिक समय लग गया। वर्ष 2019 में लाइब्रेरी डिप्लोमा में एडमिशन लिया था। 2 साल कोविड के चलते न तो एग्जाम हुए और न ही प्रेक्टिकल करवाए गए। ऐसे में 1 का कोर्स 3 साल बाद पूरा हो सका। भीलवाड़ा से कोटा आने-जाने में काफी परेशानी हुई। </p>
<p><strong>पेपर आउट हुआ या नहीं, अभी कन्फर्म नहीं</strong> <br />जोधपुर में बीए द्वितीय वर्ष हिन्दी साहित्य का पेपर आउट हुआ या नहीं अभी यह कन्फर्म नहीं है। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई है, जिसे जांच के लिए बुधवार सुबह ही कोटा से जोधपुर भेजी गई है। इसके अलावा जोधपुर और कोटा के प्रोफेसरों की एक और टीम बनाई है, जो संबंधित परीक्षा केंद्रों पर रहकर जांच करेगी। यह कमेटी तीन दिन तक वहीं रहकर पेपर लीक हुआ या नहीं, यदि हुआ तो किस सेंटर से हुआ, कौन जिम्मेदार है सहित कई बिंदुओं पर मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय कर पाएंगे। हालांकि, कोविड के कारण शैक्षणिक सत्र डिले हुआ था, जिसे पटरी पर लाने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। मेरे ज्वाइन करने कुछ दिन बाद ही 1.5 लाख बच्चों का परीक्षा परिणाम जारी किया था। दिसम्बर 2022 सत्र के पेपर एक माह 30 जनवरी 2023 को करवा रहे हैं। व्यवस्थाएं बनाने में थोड़ा वक्त लगता है, पर नया शैक्षणिक सत्र समय पर ही चलाना प्राथमिकता है।<br /><strong>- कैलाश सोडानी, कुलपति वीएमओयू </strong></p>
<p><strong>रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई</strong><br />प्रदेश में 115 सेंटरों पर परीक्षाएं चल रही हैं। जोधपुर में पेपर लीक की सूचना की सत्यता जांचने के लिए कुलपति के निर्देश पर कमेटी गठित की गई है। वैसे, जब यह सूचना मिली तो हमने जोधपुर के सभी सेंटर्स पर फोन कर पता किया था लेकिन सूचना की प्रमाणिता साबित हो, ऐसे कोई इनपुट नहीं मिले। हालांकि टीम मामले की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय किया जाएगा। <br /><strong>-बी अरुण कुमार, परीक्षा नियंत्रक, वीएमओयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jan 2023 15:00:04 +0530</pubDate>
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                <title>वीएमओयू में प्रदेशभर से आए सैंकड़ों छात्रों ने किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[वीएमओयू में बीते एक साल से अराजकता का माहौल व्याप्त है। जिससे आजिज आकर बीते छह महीने में सोमवार को चौथी बार छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करना पड़ा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hundreds-of-students-from-across-the-state-demonstrated-in-vmou/article-23630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/vmou-mai-pradeshbhar-se-saikaro-chatro-nei-kiya-pradarshan...kota-news-20.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ प्रदेशभर से आए सैंकड़ों छात्रों ने सोमवार को यूनिवर्सिटी कैम्पस में प्रदर्शन कर विरोध जताया। छात्रों ने विवि प्रशासन पर आरोप लगाया कि न तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं और न ही परीक्षा परिणाम जारी किए जा रहे हैं। जिन विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं उनके असाइनमेंट तक के नम्बर नहीं जुड़ पा रहे। जिसके चलते हजारों छात्र सरकारी भर्तियों में शामिल होने से वंचित हो गए हैं। परीक्षाओं और उनके परिणाम घोषित किए जाने को लेकर वीएमओयू में बीते एक साल से अराजकता का माहौल व्याप्त है। जिससे आजिज आकर बीते छह महीने में सोमवार को चौथी बार छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करना पड़ा। </p>
<p><strong>छात्रों का आरोप</strong><br />प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि ना तो परीक्षाएं समय पर हो रही है और न ही परिणाम जारी किए जा रहे हैं। विवि में साल में दो बार जून और दिसम्बर में परीक्षाएं होती है। लेकिन, कोविड के कारण जून 2021 की परीक्षाएं भी छह महीने देरी से शुरू हुई। जिससे हर कोर्स की अवधि 6 से 8 माह बढ़ गई और छात्र अन्य विवि के छात्रों से पिछड़ते चले गए। वहीं, वीएमओयू के छात्रों पर प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। छात्रों ने कहा कि आगामी सभी भर्तियों को देखते हुए दिसम्बर 2021 के सत्र और जून 2022 सत्र की परीक्षा समय पर आयोजित कर इनके परिणाम समय पर निकाले जाए, क्योंकि चयन बोर्ड का नियम है कि परीक्षा तिथि से पूर्व अभ्यर्थी की डिग्री पूरी होनी चाहिए। गृहकार्य जमा करवाने के बाद उनके अंक नहीं जोड़े जा रहे हैं इससे रिजल्ट अधूरा रह गया है। </p>
<p><strong>गलतियों की भरमार</strong><br />छात्रों के मुताबिक संत्राक परीक्षा के जो परिणाम जारी किए जा रहे हैं, उनमें हजारों छात्रों की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गलतियां हैं। ऐसे में गलतियां सुधारकर परिणाम फिर से जारी किए जाने चाहिए। आंतरिक मुल्यांकन समय पर जमा करवाने के बावजूद विवि उसे जमा नहीं होना बता रहा है। कई परीक्षाओं के परिणाम में शून्य अंक दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Sep 2022 15:32:17 +0530</pubDate>
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                <title>वीएमओयू: भ्रष्टाचार की कुंडली खोलने में जुटी जांच टीम</title>
                                    <description><![CDATA[भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरएल गोदारा के खिलाफ कई संगीन आरोप हैं। जिसकी जांच के लिए राज्यपाल  के आदेश पर गठित दो सदस्यीय जांच कमेटी ने जांच शुरू कर दी है और आरोपों से संबंधित एक-एक दस्तावेजों को खंगाल रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vmou---investigation-team-engaged-in-opening-the-horoscope-of-corruption/article-15156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/vmou--bhrashtachar-ki-kundali-kholne-mei-juti-jaanch-team.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरएल गोदारा के खिलाफ कई संगीन आरोप हैं। जिसकी जांच के लिए राज्यपाल  के आदेश पर गठित दो सदस्यीय जांच कमेटी ने जांच शुरू कर दी है और आरोपों से संबंधित एक-एक दस्तावेजों को खंगाल रही है। लेकिन, गोदारा द्वारा जांच में सहयोग न करना भ्रष्टाचार में संलिप्ता दर्शा रहा है। वे 6 दिनों से जांच समिति के सामने अपने बयान दर्ज करवाने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं। उन्होंने इस संबंध में समिति से 15 दिन का समय मांगा है। गौरतलब है कि राजभवन ने 1 जुलाई 2022 को आदेश जारी कर गोदारा के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों की पड़ताल के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जिसमें कोटा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो नीलिमा सिंह व उत्तराखंड एससीईआरटी के पूर्व अपर निदेशक डॉ संतोष कुमार शील शामिल हैं। शील 10 जुलाई से कोटा में रहकर मामले की बारिकी से जांच कर रहे हैं।  हालांकि उन्होंने जांच से संबंधित जानकारी गोपनीय होने का हवाला देते हुए देने से मना कर दिया। कमेटी को सभी मामलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर कुलाधिपति को सौंपनी है। <br /><br /><strong>प्रो. गोदारा जांच समिति के सामने नहीं हुए पेश</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच समिति ने मामले को लेकर प्रो. गोदारा को अपना पक्ष रखने के लिए कोटा विश्वविद्यालय में स्थित भवन में बुलाया था लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। हालांकि, उन्होंने इस मामले में बयान दर्ज करवाने के लिए 15 दिन का समय मांगा है। वहीं,  30 लाख छात्रों का डेटा चोरी के मामले में घिरे एलुमिनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण त्यागी भी कमेटी के सामने उपस्थित नहीं हुए। जबकि,  14 जुलाई को प्रो. गोदारा को दिए पत्र से साफ होता है कि वे उसी दिन  वीएमओयू में मौजूद थे।  <br /><br /><strong>कुलपति गोदारा पर ये हैं संगीन आरोप</strong><br />सूत्रों के अनुसार राजभवन को भेजी गई शिकायतों में विद्यार्थियों का असाइनमेंट का मामलाए परीक्षाएं न कराने का प्रकरण, फर्म द्वारा मशीन से असाइनमेंट चेक कराना व शिक्षकों को दरकिनार करनाए डेटा बेचने का मामला, मोहम्मद अब्दुल कलाम फाउंडेशन के सीखो कमाओ योजना के 2 करोड़28 लाख रुपए खुर्द-बुर्द करने, प्रायोगिक परीक्षाएं समय से न करवाना, शिक्षकों की पत्रावली बाहरी लोगों से पढ़वाना और जबरन शिकायत बनाकर शिक्षकों को नोटिस देना, क्षेत्रीय निदेशकों के निर्देशन में हो रही पीएचडी को जबरिया रोकना व बिना शिकायत एक छात्रा की पीएचडी प्रक्रिया को बाधित करना जैसे कई गंभीर मामले शामिल हैं।<br /><br /><strong>कुलाधिपति ने यूं कसा शिकंजा</strong><br />कुलपति गोदारा द्वारा लगातार राज्यपाल के आदेशों की अवहेलना किए जाने पर कुलाधिपति ने गत 1जुलाई को आदेश जारी कर तीसरी जांच कमेटी बनाकर प्रो गोदारा पर शिकंजा कसा। कार्यकाल के अंतिम तीन महीनों में राजभवन की रोक के बावजूद गोदारा नीतिगत फैसले कर रहे थे और राजभवन से उन्हें तीन बार चेतावनी भी भेजी थी। जिसका उन पर कोई असर नहीं हुआ। इसी के चलते राजभवन द्वारा गत एक जुलाई को पत्र संख्या एफ (3) आरबी\2021\3340 के माध्यम से गोदारा को लिखा था कि उनके विरूद्ध कई प्रकरणों में शिकायतें प्राप्त हुई हैं, इसके अलावा पीएचडी स्टूडेंट नेहा मिश्रा का प्रकरण भी शामिल है। इन मामलों की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्ष कोटा यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो नीलिमा सिंह व  उत्तराखंड एससीईआरटी के पूर्व अपर निदेशक डॉ. संतोष कुमार शील सदस्य होंगे।  <br /><br /><strong>एसीबी भी कर रही मामले की जांच</strong><br />गौरतलब है कि प्रो. गोदारा के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच के लिए राजभवन ने पहली कमेटी प्रो. गहलोत के नेतृत्व में गत वर्ष अक्टूबर में बनाई थी। जिसकी जांच में प्रो गोदारा को दोषी पाया गया था और उसके बाद सभी मामलों की छानबीन के लिए राजभवन ने मामला एसीबी को देने के लिए सरकार के पास भेज दिया था। दूसरी ओर राज्य सरकार ने भी प्रो. देवस्वरूप की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी लेकिन उनके मना करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव जैन को प्रो. देवस्वरूप की जगह कमान सौंपी गई लेकिन यह कमेटी अब तक कोई रिपोर्ट नहीं दे पाई है और मामला दबा हुआ है। वहीं एसीबी ने भी मामले में परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।<br /><br /><strong>गोपनीय जानकारी है, नहीं बता सकते</strong><br />कुलपति गोदारा के खिलाफ आए विभिन्न प्रकरणों की जांच चल रही है, जो अभी पूरी नहीं हुई है। यह जांच गोपनीय है, जिसकी जानकारी हम किसी को भी नहीं दे सकते। <br /><strong> -डॉ. संतोष कुमार शील, जांच समिति सदस्य</strong><br /><br />वीएमओयू मामले की एसीबी जांच कर रही है। इस संबंध में जानकारी सोमवार तक दे पाएंगे।<br /><strong>- विजय स्वर्णकार, एएसपी कोटा एसीबी</strong><br /><br /><strong>कोटा विवि कुलपति ने नहीं उठाया फोन</strong> <br />इस संबंध में जानकारी लेने के लिए कोटा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निलिमा सिंह को दो से तीन बार फोन किया था लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उन्हें वाट्स ऐप पर मैसेज किया, जिसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 17:44:07 +0530</pubDate>
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                <title>वीएमओयू के कुलपति के खिलाफ एसीबी में मुकदमा दर्ज </title>
                                    <description><![CDATA[ वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय में लगातार हो रही अनियमितताएं व घोटाले को लेकर  विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आर.एल गोदारा के खिलाफ  एसीबी स्पेशल यूनिट ने मुकदमा दर्ज किया है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-filed-in-acb-against-vice-chancellor-of-vmou/article-13104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vmou-k-vc-k-khilaf-case-filed.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय में लगातार हो रही अनियमितताएं व घोटाले को लेकर  विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आर.एल गोदारा के खिलाफ  एसीबी स्पेशल यूनिट ने मुकदमा दर्ज किया है।  एसीबी स्पेशल यूनिट के पुलिस उप-अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि  राज्यपाल के समक्ष फरियादी राहुल सिंह ने वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय के वीसी प्रो. आरएल गोदारा के खिलाफ  शिकायत दी थी। जिसमें बताया था कि गोदारा ने किस तरह से मूल्यांकन के मामले तथा मोहम्मद अब्दुल कलाम फाउडेंशन से मिले पैसे को खुर्द-बुर्द किया।  इस मामले में राज्यपाल  के निर्देश पर   तीन सदस्यीय  कमेटी बनाई  थी। राज्यपाल के सचिव सुबीर कुमार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक राजस्थान  पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्व विद्यालय के  पूर्व कुलपति डॉ. एके गहलोत को इस उच्च स्तरीय समिति का समन्वयक बनाया गया था। इसके साथ ही भारतीय धरोहर निदेशक प्रो. कृपाशंकर तिवारी तथा एमएनआईटी जयपुर के प्रो. एमएम शर्मा को सदस्य बनाया गया। राज्यपाल ने प्रो. एलएल गोदारा पर लगे आरोपों तथा अनियमितताओं की जांच एक महीने में पूरी कर रिपोर्ट राजभवन को सौंपने का आदेश दिया था। <br /><br />राजभवन को वीएमओयू में प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिल रही थी। इन शिकायतों में विश्वविद्यालय में हुए निर्माण कार्यों में अनियमितताएं करने के साथ ही कोटा निवासी राहुल सिंह की शिकायतें प्रमुख हैं। राजभवन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जेजे कॉलोनी निवासी  राहुल सिंह ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाए थे कि सीखो कमाओ योजना के 2 करोड़ 28 लाख रुपए की प्रोफेसर बी.अरुण और प्रोफेसर आर एल गोदारा ने अनियमितताएं की हेै। । इसके साथ ही बिना टेंडर के एक फर्म को असाइनमेंट स्कैन करने का ठेका दे दिया। <br /><br />इस आशय की एक चिठी वित्त नियंत्रक ने सरकार को भी लिखी थीै। बिना टेंडर और स्टेच्युटरी बॉडी के अप्रूवल के बिना चहेते फर्म को कुलपति गोदारा द्वारा असाइनमेंट आॅनलाइन करने का ठेका देना और गवर्नर आफिस को सूचित किए बिना और बिना किसी को चार्ज दिए कुलपति गोदारा का महीनों विश्वविद्यालय की गाड़ी लेकर घूमते रहना के साथ साथ बोम में यूनिवर्सिटी एक्ट का उलंघन कर प्रोफेसर का पद खाली रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए है।  मौलाना आजाद फाउंडेशन ने अल्पसंख्यकों  के रोजगार परक प्रशिक्षण के लिए  दिए गए फंड को खुर्द बुर्द करने का आरोप लगाया गया है। <br /><br />साल 2021 के जुलाई महीने में वीएमओयू के वित्त नियंत्रक राकेश भारतीय को विश्वविद्यालय के सनदी लेखाकार (सीए) ने ईमेल और 26 एएस  (वार्षिक समेकित टैक्स स्टेटमेंट) के जरिए जानकारी दी कि केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के मौलाना आजाद शिक्षा प्रतिष्ठान  से 02 करोड़, 28 लाख, 91 हजार 05 सौ रुपए की राशि मिली थी। जिस पर आयकर विभाग ने 04 लाख, 57 हजार, 08 सौ 30 रुपए की आयकर कटौती की है। रिपोर्ट के आधार पर मामला एसीबी डीजीपी के समक्ष कार्रवाई करने के लिए भेज दिया था। मामले में डीजीपी बीएल सोनी ने कोटा एसीबी स्पेशल यूनिट के समक्ष मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मामले में प्रथम रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 16:09:08 +0530</pubDate>
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