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                <title>Environmental Protection - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Environmental Protection RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>युद्धविराम की विफलता के लिए ईरान नहीं होगा दोषी, इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका : उमर अब्दुल्ला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका से इजरायल को नियंत्रित करने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहे। उन्होंने ट्रंप की भाषा की आलोचना की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने महिला आरक्षण और लुप्त होते जल निकायों पर चिंता जताते हुए सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/iran-will-not-be-blamed-for-the-failure-of-the/article-149775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/umer-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि युद्धविराम की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को इजरायल पर लगाम लगानी चाहिये। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर होते हमले पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आचरण की भी आलोचना की और उनके बयानों में "असंगति तथा अनुचित भाषा" का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि ईरान ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की थी और युद्ध उस पर "थोपा" गया था। उन्होंने युद्धविराम के बाद अमेरिका के जीत के दावों पर भी सवाल उठाये।</p>
<p>सीएम उमर अब्दुल्ला ने वाशिंगटन से "इजरायल को नियंत्रित करने" का आह्वान किया और लेबनान में जारी हमलों तथा नागरिक हताहतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युद्धविराम विफल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी ईरान पर नहीं बल्कि इजरायल पर डाली जानी चाहिये। उमर अब्दुल्ला ने भारत की विदेश नीति पर कांग्रेस की आलोचना के संबंध में कहा कि वह इसे विफलता या सफलता का नाम नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान "वह करने में सफल रहा जो दूसरे नहीं कर सके।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों ने शायद उसके राजनयिक दायरे को सीमित कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा न होता, तो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बेहतर संबंधों के कारण नई दिल्ली अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने इसमें योगदान दिया है, तो "इसकी सराहना की जानी चाहिए और हमें आगे बढ़ना चाहिए।" सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद पहले ही इस मुद्दे पर कानून पारित कर चुकी है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अब क्या बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उन्होंने पूछा, "अब क्या बदल गया है?" उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ही लाई और उसी के नेतृत्व में इसे पारित किया गया था, न कि यह किसी पिछली सरकार से विरासत में मिला था।</p>
<p>उमर अब्दुल्ला ने महिला आरक्षण के प्रति समर्थन दोहराया लेकिन कहा कि "कुछ तो सही नहीं है।" उन्होंने भारत सरकार, विशेष रूप से भाजपा से इस पर "सच्चाई सामने रखने" का आग्रह किया कि मौजूदा कानून होने के बावजूद नये विधेयक पर विचार क्यों किया जा रहा है। श्री उमर ने जम्मू-कश्मीर में जल निकायों के सिकुड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में - श्रीनगर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में - झीलें और जल निकाय या तो काफी सिकुड़ गये हैं या पूरी तरह लुप्त हो गये हैं। उमर अब्दुल्ला ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुये कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग आने वाली पीढ़ियों को एक खराब पर्यावरण सौंपना चाहते हैं। दैनिक आदतों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नागरिकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने का आग्रह किया और पूछा कि व्यक्ति प्लास्टिक पर निर्भर रहने के बजाय अपना थैला खुद क्यों नहीं ले जा सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:46:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने की मछुआरा समुदाय की सराहना: बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर जनभागीदारी की ताकत से बना विश्व रिकॉर्ड, जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' बताते हुए उनके आर्थिक योगदान को सराहा। उन्होंने वाराणसी में 2.51 लाख पौधे रोपने के विश्व रिकॉर्ड और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की प्रशंसा की। पीएम ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया और छत्तीसगढ़ व त्रिपुरा के सफल मॉडलों का उदाहरण साझा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-praised-the-fishermen-community-said-that-it-is/article-148334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मछुआरा समुदाय की सराहना करते हुए कहा है कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में कहा कि मछुआरे सुबह होने से पहले समुद्र में उतरकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बंदरगाहों के विकास, बीमा योजनाओं और तकनीकी सहायता के जरिए मछुआरों का जीवन आसान बनाया जा रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले मछुआरों के लिए मौसम की जानकारी बेहद अहम होती है, इसलिए तकनीक के माध्यम से उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन प्रयासों से देश का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से समृद्ध हो रहा है और इसमें नवाचार भी बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं, जिससे मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू कर कुछ ही वर्षों में सफल व्यवसाय में बदल दिया। उनकी सफलता आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।</p>
<p>पीएम मोदी ने लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जिन्होंने मत्स्य प्रसंस्करण इकाई (फिश प्रोसेसिंग यूनिट) के साथ कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर अपने कारोबार को नई ऊंचाई दी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती छोड़कर फिश फार्मिंग अपनाई और अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में ऐसे प्रयास प्रेरणादायक हैं और फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों का योगदान भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम और नवाचार देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जनभागीदारी से एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की सराहना करते हुये बदलाव के लिये समाज की भागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन जाते हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए एक विशेष अभियान का जिक्र किया, जहां मात्र एक घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस उपलब्धि के साथ एक नया गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें हजारों लोगों ने एक साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भाग लेने वालों में छात्र, जवान , स्वयंसेवी संगठन और विभिन्न संस्थाओं ने अपना योगदान दिया। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया, जो जनभागीदारी की एक प्रेरक मिसाल है। पीएम मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट कर सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संचय को आवश्यक बताते हुए कहा है कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और जल संकट से बचने के लिए देशवासियों को जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की आवश्यकता है। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132वीं कड़ी में कहा कि पिछले 11 वर्षों में 'जल संचय अभियान' ने लोगों को काफी जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश भर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचय ढांचे बनाए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, तो कहीं वर्षा जल को सहेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। 'अमृत सरोवर' अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इनकी साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। मैं इस बारे में आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।"</p>
<p>उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव, जो लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, कभी गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। गर्मियों में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बाद में ग्रामीणों ने वर्षा जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। आज इस गाँव के लगभग हर घर में वर्षा जल संचयन के उपाय किए गए हैं और यह गाँव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा, "इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाए, जिससे वर्षा का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोखता गड्ढे बनाए और जल संरक्षण को जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का भूजल स्तर बढ़ा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ भी काफी कम हो गई हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:09:03 +0530</pubDate>
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                <title>अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस समारोह : पर्यावरण संरक्षण के लिए कई अहम पहलें हुईं साकार, वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था और अधिक सशक्त</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न। इस अवसर पर वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और पहलें जमीन पर उतारी। कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा और वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार की गरिमामयी उपस्थिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-forest-day-celebration-many-important-initiatives-for-environmental-protection/article-147330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और पहलें जमीन पर उतारी गईं। कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा और वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री संजय शर्मा ने 460 वन सुरक्षा मोटरसाइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।</p>
<p>साथ ही ‘डिजीवन’ (digivan) डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी लाइव किया गया, जो वन प्रबंधन को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। CRESEP परियोजना के अंतर्गत महिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वन मित्रों को पेट्रोलिंग किट वितरित की गईं और आपातकालीन वन्यजीव रेस्क्यू वाहन को भी फ्लैग ऑफ किया गया। इसके साथ ही SEIAA वेबसाइट का लोकार्पण, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पुस्तक का विमोचन तथा उत्कृष्ट वन कर्मियों का सम्मान भी किया गया। यह कार्यक्रम राज्य में हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:30:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खेजड़ी मुद्दे पर सचिन पायलट का तीखा हमला, बोलें जनता में आक्रोश, कटाई रोकने के प्रभावी कदम उठाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बीकानेर खेजड़ी आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने राज्य सरकार से पेड़ कटाई रोकने और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sachin-pilots-sharp-attack-on-khejri-issue-public-anger-government/article-141779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/sachin-pilot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बीकानेर में खेजड़ी पेड़ों को लेकर चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से पेड़ कटाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।</p>
<p>पायलट ने कहा है कि राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों में लंबे समय से जनता में आक्रोश व्याप्त है। एक ओर जहाँ विकास के नाम पर नए प्रोजेक्ट्स आवश्यक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई संबंधित कंपनियों द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही है। स्थानीय लोगों द्वारा पिछले कई महीनों से लगातार इसकी शिकायत प्रशासन से की जा रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अब यह मामला गंभीर रूप ले चुका है। </p>
<p>पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के विरोध में ग्रामीणों और स्थानीय लोगों द्वारा प्रदर्शन और आंदोलन किए जा रहे है, ताकि इन जीवनदायी पेड़ों को बचाया जा सकें। स्थानीय लोगों की मांग पूरी तरह जायज़ है। यह पेड़ न केवल मरुस्थलीकरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है बल्कि, भूमिगत जल स्तर को भी संतुलित रखने में सहायक होते है और पशुओं के लिए चारे का मुख्य स्त्रोत होते हैं। सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>अरावली के एक भी पत्थर को नुकसान नहीं होने देगी मोदी–भजनलाल सरकार :  रामलाल</title>
                                    <description><![CDATA[अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने कड़ा जवाब दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि मोदी और भजनलाल सरकार में अरावली को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और अवैध खनन पर सख्ती जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/modi-bhajanlal-government-will-not-allow-even-a-single-stone-of/article-136946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/bjp-arvalli-hills.png" alt=""></a><br /><p>भाजपा अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा फैलाए जा रहे कथित भ्रम और आरोपों पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा और कैलाश वर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार में अरावली के एक भी पत्थर को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।</p>
<p>भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत रही है कि वह तुष्टीकरण की राजनीति के तहत जनता में झूठ और भ्रम फैलाती है। उन्होंने कहा कि पहले सीएए, फिर एसआईआर और अब अरावली खनन के मुद्दे पर कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है—अरावली संरक्षित क्षेत्र को विधिवत परिभाषित किया जाएगा और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। जब तक स्पष्ट परिभाषा के आधार पर कोई योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार का नया खनन पट्टा जारी नहीं किया जाएगा।</p>
<p>रामलाल शर्मा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में जब अरावली की परिभाषा तय की गई, उस समय सबसे अधिक खनन पट्टे कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए थे और 100 मीटर नियम भी उसी दौरान बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कल्पनाओं के आधार पर भाजपा सरकार पर अवैध खनन के आरोप लगा रही है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने बीते दो वर्षों में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान 20,526 प्रकरण दर्ज किए गए, 211.26 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, 2,228 एफआईआर दर्ज हुईं, 1,175 लोगों की गिरफ्तारी की गई और 19,744 वाहन व मशीनरी जब्त की गई। विशेष रूप से अरावली क्षेत्र में 10,966 प्रकरण दर्ज कर 136.78 करोड़ रुपये की वसूली की गई, 1,002 एफआईआर दर्ज हुईं, 10,616 वाहन जब्त किए गए और 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>प्रेसवार्ता में भाजपा प्रवक्ता कैलाश वर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अरावली हिल्स की परिभाषा तक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अरावली को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद कांग्रेस नेता जानबूझकर जनता में भ्रम फैला रहे हैं।</p>
<p>कैलाश वर्मा ने कांग्रेस पर योजनाओं के नाम बदलने को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस ने योजनाओं को परिवार विशेष के नाम से जोड़ा, जबकि भाजपा ने आस्था और संस्कृति से जुड़े नाम दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की भजनलाल सरकार प्रकृति संरक्षण की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है और अरावली पूरी तरह सुरक्षित है।</p>
<p>भाजपा नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की राजनीति और उसके हथकंडों को पहचान चुकी है और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर पूरा भरोसा जताती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:07:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अरावली विवाद: पर्यावरण एक्टिविस्ट हितेंद्र गांधी ने सीजेआई और राष्ट्रपति को लिखा पत्र, उठाए गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[वकील और पर्यावरण एक्टिविस्ट हितेंद्र गांधी ने भारत के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से अरावली के बारे में अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब सिर्फ़ वही ज़मीनें जो स्थानीय ज़मीन से 100 मीटर या उससे ज़्यादा ऊंची हैं, उन्हें ही "अरावली" माना जाएगा - जिससे विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/aravalli-dispute-environmental-activist-hitendra-gandhi-writes-letter-to-cji/article-136841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/aravalli-hiss-dispute.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर देशभर में बहस तेज हो गई है। वकील और पर्यावरण एक्टिविस्ट हितेंद्र गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। यह पत्र भारत के राष्ट्रपति को भी भेजा गया है। गांधी ने चेतावनी दी है कि ऊंचाई पर आधारित अरावली की संकीर्ण परिभाषा उत्तर-पश्चिम भारत में पर्यावरण संरक्षण को गंभीर रूप से कमजोर कर सकती है।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब केवल वही भूमि “अरावली” मानी जाएगी, जो अपने आसपास की स्थानीय जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची हो। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों और पर्यावरणविदों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस परिभाषा से अरावली रेंज के करीब 90 प्रतिशत हिस्से को कानूनी संरक्षण से बाहर किया जा सकता है।</p>
<p>पर्यावरणविदों ने आशंका जताई है कि इससे खनन गतिविधियों, रियल एस्टेट परियोजनाओं और अवैध कब्जों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे क्षेत्र में अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति होगी। अरावली को मरुस्थलीकरण रोकने, भूजल रिचार्ज बढ़ाने और प्रदूषण से राहत दिलाने वाली प्राकृतिक ढाल माना जाता है। यदि इसकी सुरक्षा कमजोर हुई, तो पानी की कमी, जैव विविधता के नुकसान और बढ़ते प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।</p>
<p>अपने पत्र में हितेंद्र गांधी ने 20 नवंबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अरावली प्रणाली को एक पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण प्राकृतिक ढाल के रूप में पहचानने की दिशा में “महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम” बताया। हालांकि, उन्होंने आदेश में अपनाई गई ऑपरेशनल परिभाषा पर गहरी चिंता जताई। गांधी का कहना है कि केवल 100 मीटर या उससे अधिक की स्थानीय ऊंचाई को मानदंड बनाना वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अपर्याप्त है।</p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि अरावली परिदृश्य के कई ऐसे हिस्से हैं जो ऊंचाई की इस संख्यात्मक सीमा को पूरा नहीं करते, लेकिन फिर भी पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों को बाहर करने से पूरी अरावली प्रणाली की कार्यक्षमता और संरक्षण उद्देश्य को नुकसान पहुंच सकता है। गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह व्यापक पारिस्थितिक मानकों के आधार पर अरावली की परिभाषा पर पुनर्विचार करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 17:59:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अरावली मानदंड पर भाजपा का पलटवार: राजनीति नहीं, तथ्य देखें गहलोत, 100 मीटर का नियम कांग्रेस काल का, ‘90% खत्म’ का दावा गलत : राठौड़</title>
                                    <description><![CDATA[अरावली पर्वतमाला को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर भाजपा ने तथ्यात्मक जवाब दिया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि 100 मीटर ऊंचाई का मानदंड नया नहीं है और यह कांग्रेस सरकार के समय तय हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश वैज्ञानिक आधार पर हैं और सरकार अरावली संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/see-facts-not-politics-on-aravalli-gehlot-100-meter-rule/article-136701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajendra-singh-rathore-on-aravli-hils.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अरावली पर्वतमाला को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर भाजपा ने स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अरावली से जुड़ा 100 मीटर ऊंचाई का मानदंड न तो नया है और न ही वर्तमान सरकार का फैसला, बल्कि यह कांग्रेस शासनकाल में ही तय किया गया था और वर्षों तक उसी के आधार पर काम हुआ।</p>
<p>राठौड़ ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 20 नवंबर 2025 को अरावली संरक्षण और खनन को लेकर जो आदेश दिया है, वह पूरी तरह वैज्ञानिक तथ्यों और पूर्व न्यायिक निर्णयों पर आधारित है। इससे पहले 8 अप्रैल 2005 को 100 मीटर से अधिक ऊंचाई को ‘हिल’ मानने का मानदंड तय हुआ था। साथ ही, 19 अगस्त 2003 को जिलेवार नक्शे तैयार करने के निर्देश भी अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते जारी किए गए थे।</p>
<p>उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के उस बयान को भ्रामक बताया, जिसमें कहा गया था कि “90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी।” राठौड़ के अनुसार, अरावली क्षेत्र का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और आरक्षित वनों में शामिल है, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूरे अरावली क्षेत्र में केवल लगभग 2.56 प्रतिशत हिस्सा ही कड़े नियमों के तहत खनन के दायरे में आता है।</p>
<p>राठौड़ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार विस्तृत वैज्ञानिक मैपिंग और सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तैयार होने तक कोई नया खनन पट्टा जारी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख बिल्कुल साफ है—अरावली की सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और कानून का पालन सर्वोपरि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:23:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवाचार : कचरे से बनाए स्कूली बैग, चप्पलें और मेट, 2 साल में 4 हजार से ज्यादा बच्चों को बांटे</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनसोल और फ्यूल ड्रीम फाउंडेशन के साथ शिक्षिका बीना की प्रेरक पहल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/innovation--school-bags--slippers--and-mats-made-from-waste--distributed-to-over-4-000-children-in-2-years/article-134271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्लास्टिक, रबर और पुराने कपड़ों के ढेर को अक्सर हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन कोटा में उसी कचरे ने हजारों बच्चों की जिंदगी बदल दी। वेस्ट सामग्री को अपसाइकिल कर बनाए गए बैग, मेट और चप्पलें जब सरकारी स्कूलों के बच्चों तक पहुंची तो न सिर्फ उनकी मूल जरूरतें पूरी हुईं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के साथ शिक्षा को संबल देने भी संदेश दिया है।</p>
<p><strong>2 साल में 4 हजार से ज्यादा बच्चों की जरूरतें की पूरी</strong><br />कोटा में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए अनोखी पहल पिछले दो वर्षों से लगातार प्रभाव दिखा रही है। ग्रीनसोल फाउंडेशन, फ्यूल ड्रीम फाउंडेशन और कोटा की शिक्षिका बीना केदावत ने मिलकर प्लास्टिक, रबर और टेक्सटाइल वेस्ट को अपसाइकिल कर स्कूली बच्चों के लिए उपयोगी सामान तैयार किए। इस नवाचार से कचरे में फैंकी जाने वाली साम्रगी को रिसाइकिल कर फाउंडेशन व शिक्षिका ने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए स्कूली बैग, बैठने के लिए मेट और चप्पलें तैयार की। अब तक 4 हजार 333 जरूरतमंद विद्यार्थियों को यह विशेष किट वितरित किए हैं। इस अनूठी पहल की शुरूआत कबीर पारख आश्रम में संत प्रभाकर साहेब की प्रेरणा से हुई। उन्होंने फाउंडेशन टीम और शिक्षिका बीना के प्रयासों की खुले दिल से सराहना की।</p>
<p><strong>बच्चों को नंगे पैर स्कूल जाते देख पसीजा दिल</strong><br />शिक्षिका बीना ने बताया कि इस अभियान की शुरूआत एक संवेदनशील पल से हुई। कई बच्चों को नंगे पैर और बिना बैग के स्कूल जाते देखा तो दिल पसीज गया। एक तरफ बच्चे संसाधनों के अभाव से ग्रस्त थे तो दूसरी ओर शहर में बढ़ते प्लास्टिक और टेक्सटाइल कचरे से पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। ऐमें में कचरे को उपयुक्त सामग्री में तब्दील करने का ख्याल मन में आया। जब उन्होंने दोनों समस्याओं को जोड़ा तो समाधान वेस्ट को अपसाइकिल कर बच्चों की जरूरतों का सामान तैयार करने के रूप में मिला।</p>
<p><strong>फाउंडेशन ने कचरे से बनाई क्वालिटी प्रोडक्ट</strong><br />उन्होंने बताया कि ख्याल को साकार करने के लिए ग्रीनसोल फाउंडेशन से सम्पर्क किया। विशेषज्ञों को इस समस्या के बारे में बताया तो पता चला कि फाउंडेशन इस दिशा में काम कर रही है। इस तरह मंजिल आसान होती गई। ग्रीनसोल फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने पुराने जूतों, रबर, कपड़ों तथा प्लास्टिक वेस्ट को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले बैग, मेट और चप्पलें तैयार की। फाउंडेशन की उन्नत तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण ने इन उत्पादों को टिकाऊ और उपयोगी बनाया। जिसे शहर के हजारों बच्चों तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>खुशी से चहक उठे बच्चों के चेहरे</strong><br />बीना कहती हैं, ग्रीनसोल फाउंडेशन के बिना यह काम संभव नहीं था। उनकी तकनीक और समर्पण ने इस अभियान को मजबूत आधार मिला। यह पहल न सिर्फ बच्चों की मूलभूत जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि उन्हें साफ-सुथरे, टिकाऊ व सुरक्षित सामान का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रही है। साथ ही समाज को यह संदेश दे रही है कि वेस्ट से भी जरूरत की चीजें बनाकर संसाधन की पूर्ति की जा सकती है। कोटा जिले के सरकारी स्कूलों में जब बच्चों को स्कूली बैग, मेट व चप्पलें वितरित की गई तो उनके चेहरे खुशी से चमक उठे।</p>
<p><strong>वर्षवार स्कूलों में किट वितरण का आंकड़ा</strong><br /><strong>वर्ष 2024-25 : कुल किट बांटे-2203</strong><br />लाडपुरा ब्लॉक में — 1431 किट<br />कोटा सिटी ब्लॉक — 354 किट<br />सुल्तानपुर — 173 किट<br />सांगोद — 245 किट</p>
<p><strong>वर्ष 2025-26 — कुल किट बांटे 2,130</strong><br />सांगोद ब्लॉक के स्कूलों में — 578 किट<br />लाडपुरा ब्लॉक में — 977 किट<br />खैराबाद ब्लॉक में — 214 किट<br />कोटा शहर ब्लॉक में — 229 किट<br />इटावा ब्लॉक में — 132 किट<br />नोट- एक किट में तीन वस्तु होती है, जिसमें बैग, मेट व चरणपादुका शामिल है।</p>
<p><strong>इन जिलों में हो रहा विशेष किट का वितरण</strong><br />फाउंडेशन की ओर से कोटा, जयपुर, झालावाड़, बालोतरा, ब्यावर, उदयपुर, अजमेर, हनुमानगढ़ जिले के स्कूलों में यह विशेष किट जरूरतमंद विद्यार्थियों को वितरित किए जा रहे हैं। शिक्षिका केदावत कहतीं हैं, बढ़ते टेक्स्टाइल वेस्टेज और शूज वेस्टेज को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में चिंता व्यक्त कर चुके हैं। हमारा लक्ष्य कोटा में जल्द ही एक संग्रहण केंद्र स्थापित करना है। इस सम्बन्ध में प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वंचित बच्चों को इस पहल का लाभ मिल सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Dec 2025 16:20:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गाजेबाजे के साथ निकली वृक्षों की बिंदोरी, वृक्ष कथा कीर्तन के माध्यम से बताया जीवन में पेड़ पौधों का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य वक्ता पर्यावरण संरक्षण गतिविधि जयपुर प्रांत प्रमुख अशोक शर्मा ने भजन कीर्तन के साथ पौधों का महत्व बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bindori-of-trees-came-out-with-musical-instruments-told-the/article-86293"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानसून में पौधरोपण के लिए प्रेरित करने के लिए सरकार, समाज और स्वयसेवी सेवी संस्थाओं की ओर से अपने स्तर पर अनेक आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संरक्षण और अमृता प्रकृति संरक्षण अभियान के अंतर्गत मंगलवार को मुरलीपुरा के एक स्कूल में वृक्ष कथा का आयोजन किया गया।</p>
<p>मुख्य वक्ता पर्यावरण संरक्षण गतिविधि जयपुर प्रांत प्रमुख अशोक शर्मा ने भजन कीर्तन के साथ पौधों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने पेड़, पौधों का जीवन में अत्यधिक महत्व समझा और उसे धर्म से जोड़ दिया।आस्थावान लोगों ने पेड़ पौधों की सेवा को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। हर देवी, देवताओं, ग्रह, नक्षत्र का किसी न किसी वृक्ष से सम्बन्ध है। संबंधित देवी देवता, ग्रह, नक्षत्र का पौधा लगाने से उससे जुड़े देवी देवता की पूजा स्वत ही हो जाती है।</p>
<p><strong>वृक्षों की संगीतमय आरती<br /></strong>इस मौके पर वृक्ष की महाआरती की गई।  इसके बाद वृक्षों का पूजन कर गाजे बाजे के साथ वर्षों की बिंदोरी (शोभायात्रा) निकाली गई। लोगों ने हाथ में पौधे लेकर विभिन्न मार्गो से होते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बिंदोरी में शामिल  बच्चे तपती धरती करे पुकार वृक्ष लगाओ बार बार..., वृक्ष लगाओ धरती बचाओ...जैसे नारे लगाते हुए चल रहे थे। बैंडबाजे की धुन पर लोग नाचते हुए चल रहे थे। लोगों ने  वृक्षों पर वारफेरी की। जगह-जगह बिंदोरी पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे आयोजन में राह चलते लोग भी स्व प्रेरणा से शामिल हुए। विभिन्न मार्गो से होती हुई बिंदोरी संस्कृति चिल्ड्रेन अकेदमी पहुंची। यहां वृक्षों की संगीतमय आरती की गई। इस मौके पर उपस्थित लोगों को  पौधों, कपड़े के बैग, पक्षी घर का वितरण किया गया।</p>
<p>मुख्य अतिथि राज्य मानव अधिकार आयोग के सदस्य अशोक कुमार  गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्षों तक की पराधीनता के कारण हम अपनी संस्कृति को भूल गए। हम सदियों से वृक्ष की पूजा करते रहे है। वृक्ष निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है। वह पूरे जीवन काल में परोपकार करता है। </p>
<p><strong>ये रहे उपस्थित<br /></strong> सैन्य अधिकारी हरिओम सिंह, आयुष कुमार शर्मा, एडिशनल एसपी हेमंत जाखड़ सहित अन्य गणमान्य थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jul 2024 19:10:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीनसिटी मिशन शुरू, शहर को हरा-भरा करने के संकल्प के साथ आह्वान समिति ने वितरित किए पौधे </title>
                                    <description><![CDATA[पौधारोपण के बाद सभी सदस्यों ने उनकी देखभाल करने की शपथ ली और कहा कि वे भविष्य में भी समय-समय पर पौधारोपण करते रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/greencity-mission-started-for-environmental-protection-with-the-resolve-to/article-84270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(14)5.png" alt=""></a><br /><p> जयपुर। संत श्री दुलाराम कुलरिया की प्रेरणा से गौसेवा-मानव सेवा के लिए कार्यरत आह्वान जनकल्याण एवं सेवा समिति (रजि.) ने हरित जयपुर के लिए ग्रीनसिटी मिशन 09 जुलाई को शुरू किया। समिति सदस्यों ने विभिन्न प्रकार के छायादार फलदार पौधे जैसे सीताफल, कनेर, जामुन, आंवला, अमरूद, शीशम आदि पौधे लगाकर मिशन का आगाज किया। इसके बाद एक हजार से अधिक पौधे वितरित हुए।</p>
<p>ऑल इंडिया ब्रााह्मण फैडरेशन के राष्ट्रीय सचिव एवं समिति संरक्षक रमेश ओझा ने कहा कि पेड़-पौधे बिना मनुष्य का जीवन पेड़-पौधे के बिना संभव नहीं है। आज जो पौधारोपण और पौधा वितरण किया है, वह हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए वरदान साबित होंगे क्योंकि ये पेड़ पौधे बड़े होकर सदियों तक सभी को जीवन के रूप में ऑक्सीजन देते रहेंगे। <br />उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे हर माह में एक पौधा जरूर लगाएं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की बढ़ती महत्वकांक्षी सोच के चलते शहरों में ग्रीन फील्ड तेजी से घटा है और बढ़ते कंक्रीट निर्माण और अन्य उपकरणों के उपयोग के कारण तेजी से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या विकराल हुई है। हालत इतने विकट हो चले हैं कि इस बार ग्रीष्म ऋतु में सीमावर्ती क्षेत्रों एवं रेगिस्तानी इलाकों में तापमान 50 डिग्री तक पहुँच गया। विभिन्न स्थानों से एसी कंप्रेशर फटने और आग लगने की घटनाएं देखने को मिली है। ऐसे में अब आवश्यक हो चला है कि मानव अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागृत हो। समिति से जुड़े लोगों और आमजन की सहभागिता से ग्रीनसिटी मिशन का प्रथम चरण जयपुर में 9 जुलाई से चलाया गया है। संसाधन बढ़ने की स्थिति में राजस्थान ही नहीं वरन देश के सभी प्रमुख शहरों में मिशन बढ़ाया जाएगा। लोगों ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखा हम सबकी जिम्मेदारी है, इसलिए हम सभी को पौधारोपण करना चाहिए।</p>
<p>पौधारोपण के बाद सभी सदस्यों ने उनकी देखभाल करने की शपथ ली और कहा कि वे भविष्य में भी समय-समय पर पौधारोपण करते रहेंगे। कार्यक्रम में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई लोगों ने अपने एवं अपने परिजनों के  नाम से पौधारोपण किया और उनकी देखभाल करने का प्रण लिया। पूर्व ओएसडी-सीएम एवं साहित्यकार फारुक आफरीदी,  वरिष्ठ चिकित्सक अजय शर्मा, वसीम रजा गट्टे वाला, समाजसेवी बृजेंद्र चौधरी, फिरोज, सरयू शर्मा, गौसेवी, अमित मिश्रा, नितिन चावला, मधुर जांगिड़ एवं सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित वॉलियंटर्स और आमजन ने कार्यक्रम में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 13:33:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में बीएसएनएल जयपुर की पहल  </title>
                                    <description><![CDATA[बीएसएनएल एवं विनर स्पिच एनर्जी प्रा. लि. गुड़गांव के मध्य एक अनुबंध किया गया जिसके तहत जयपुर क्षेत्र बीएसएनएल के 7 दूरभाष केन्द्रों की छत पर कुल 250 Kw के सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bsnl-jaipurs-initiative-towards-environmental-protection-%C2%A0/article-84198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीएसएनएल एवं विनर स्पिच एनर्जी प्रा. लि. गुड़गांव के मध्य एक अनुबंध किया गया जिसके तहत जयपुर क्षेत्र बीएसएनएल के 7 दूरभाष केन्द्रों की छत पर कुल 250 Kw के सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इस करार के अनुसार बीएसएनएल अपने दूरभाष केंन्द्रों की छत फर्म को उपलब्ध करवाएगा और फर्म 25 साल के लिए बीएसएनएल को विद्धुत आपूर्ति करेगी। पूरे राजस्थान मे इस तरह के प्लांट 39 दूरभाष केन्द्रों की छत्त पर कुल 1500 KW के संयंत्र लगाए जाएंगेI</p>
<p>इस अवसर पर प्रधान महाप्रबंधक दूरसंचार जिला जयपुर राजेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में बीएसएनएल का यह अभूतपूर्व कदम है, पर्यावरण की रक्षा हेतु बीएसएनएल पूर्व में भी जयपुर मे 300 Kw के  सोलर पावर प्लांट लगवा चुका है। वर्तमान में बीएसएनएल अपने 4G बीटीएस टावर पर भी अधिकतर जगहों पर सोलर पावर का इस्तेमाल कर रहा है।</p>
<p>इस अवसर पर निधि माथुर, महाप्रबंधक (मुख्यालय), प्रभात कुमार, मुख्य अभियंता (विद्धुत) एवं फर्म के प्रबंध निदेशक नीरज चावलाजी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jul 2024 16:21:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण में अनूठी देन-बीज बम आंदोलन!</title>
                                    <description><![CDATA[ एक प्रकार से देखा जाए तो यह एक वैज्ञानिक अभियान है। कितनी अच्छी बात है कि मिट्टी व गोबर की गेंद में विभिन्न प्रजातियों के बीजों को रखकर वनों तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में आसानी से पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/unique-donation-in-environmental-protection---beej-bum-movement/article-52439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी11.png" alt=""></a><br /><p>भारत में जून और जुलाई बारिश के महीने होते हैं और बारिश के सीजन में पेड़-पौधों तथा विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के पनपने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है और शायद यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और देश के विभिन्न स्थानों पर जून और जुलाई के महीनों में वृक्षारोपण अभियान कार्यक्रमों को अंजाम दिया जाता है, क्योंकि बारिश के सीजन में लगे पेड़-पौधों को प्राकृतिक रूप से पनपने का अवसर मिल जाता है। <br /><br />पर्यावरण की दृष्टि से जून और जुलाई बहुत ही अच्छे महीने माने जाते हैं। आज के समय में पर्यावरण की रक्षा के संदर्भ में अनेकानेक अभियान चलाए जाते हैं, हजारों लाखों पेड़-पौधे भी लगाए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर पेड़-पौधे पानी के अभाव, सार-संभाल के चलते मर जाते हैं। लेकिन प्रकृति ने मानव को पेड़-पौधों की रक्षा के लिए जून और जुलाई के महीने दिए हैं, जब देश में लगभग हरेक स्थान पर बारिश होती है। इसलिए इन महीनों में वृक्षारोपण अभियान चलाकर हम पर्यावरण की रक्षा विशेष रूप से कर सकते हैं। हमें यह चाहिए कि हम इन दो महीनों में विशेष रूप से वृक्षारोपण करें। प्रकृति का संरक्षण करें। पेड़-पौधों को हम अक्सर रोपित तो कर देते हैं, लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद हम उनमें खाद-पानी देना, उनकी सार-संभाल करना अक्सर भूल जाते हैं। पेड़-पौधों को छोटे बच्चे की तरह पालना पड़ता है,तभी वे आगे जाकर बड़े पेड़ का रूप धारण करते हैं। <br /><br />बारिश के सीजन में आजकल बीज बम अभियान एक अनोखा अभियान है। देश के पहाड़ी क्षेत्रों में बीज बम अभियान अक्सर चलाया जाता है, जो पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में एक अनूठा प्रयोग भी कहा जा सकता है। पिछले वर्ष पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में वहां के मुख्यमंत्री द्वारा बीज बम सप्ताह चलाया गया। जानकारी देना चाहूंगा कि अभियान के नाम में बम शब्द होने से यह किसी युद्ध या सेना से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के संरक्षण के लिए वर्ष 2017 में शुरू हुआ एक ऐसा अनूठा अभियान है, जो कि प्रदेश में बढ़ते वन्य जीव और मानव संघर्ष को समाप्त करने के लिए शुरू किया गया अभियान है। जानकारी देना चाहूंगा कि बीज बम का अभियान द्वारिका सेमवाल ने वर्ष 2017 में शुरू किया था। <br /><br />उत्तरकाशी के द्वारिका सेमवाल बीज बम अभियान में पिछले कुछ वर्षों से जुटे हुए हैं। वास्तव में यह पारिस्थितकी तंत्र की पुनर्बहाली और मानव वन्यजीव संघर्ष से कम करने के लिए शुरू किया गया अभियान है। यहां यह भी बताता चलूं कि जापान और मिस्र जैसे देशों में यह तकनीकी सीड बाल के नाम से सदियों पहले से परंपरागत रूप से चलती आ रही है। बीज बम अभियान से वन्य जीवों को जंगलों में ही भोजन उपलब्ध हो सकता है, क्योंकि मानवीय दखल से जंगली जानवरों के समक्ष भोजन की समस्या भी कहीं न कहीं पैदा हुई ही है। <br /><br />अब हमें यहां यह जानने की जरूरत है कि आखिर बीज बम अभियान है क्या? तो जानकारी देना चाहूंगा कि हम जो भी फल, सब्जी आदि खाते हैं, उनके बीज हमें सुरक्षित रखने चाहिए और जैसे ही बरसात का सीजन आए तो मिट्टी, गोबर व पानी को मिलाकर हम बीज बम बना सकते हैं। सात-आठ दिन सुखाने के बाद हम उन्हें कहीं भी जंगल या बंजर भूमि में डाल सकते हैं। इससे जंगली जानवरों को भोजन मिल सकता है। जंगल में कहीं भी अनुकूल स्थान पर इन बीज बमों को छोड़ने से पेड़-पौधे उगते हैं और वनों में बढ़ोतरी होती है। वास्तव में सच तो यह है कि बीज बम के जरिए हम वहां वनस्पतियों को उन स्थानों पर भी उगा सकते हैं, जहां कोई मानव नहीं जा सकता है अथवा मानव की जहां पहुंच संभव नहीं होती। यह खेल-खेल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल कहीं जा सकती है। बीज बम अभियान की खासियत यह है कि इसमें खर्चा भी बहुत कम है और इसमें बच्चे भी विशेष रुचि दिखा सकते हैं। <br /><br />एक प्रकार से देखा जाए तो यह एक वैज्ञानिक अभियान है। कितनी अच्छी बात है कि मिट्टी व गोबर की गेंद में विभिन्न प्रजातियों के बीजों को रखकर वनों तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में आसानी से पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है। हम यह बात कह सकते हैं कि बीज बम अभियान का वास्तविक मकसद जंगलों में पैदा होने वाली विभिन्न सब्जियों, फलों को प्रकृति के सान्निध्य में उगाया जाए और इससे जंगली जानवरों को जंगलों में ही भोजन मिल सके। इसका सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि जब जंगली जानवरों को जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिलने लगेगा तो वे मानव बस्तियों की ओर कूच नहीं करेंगे। यह वास्तव में बहुत ही काबिले तारिफ है कि हिमालय पर्यापरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) की ओर से शुरू किए गए अभियान को अब उत्तराखंड सरकार ने गंभीरता से लिया है। प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष इस बीज बम अभियान को साप्ताहिक तौर पर मनाने के लिए सभी जिलों को निर्देश दिए। वास्तव में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह अनूठा प्रयास सीमांत क्षेत्र उत्तरकाशी से शुरू होकर अब धीरे-धीरे एक वृहद रूप लेता नजर आ रहा है।    <br /><br />-सुनील कुमार महला<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>
<p><br />यहां तक कि सरकार की और से प्रदेश की रजत जयंती पर इस अभियान को वृहद स्तर पर मनाने की घोषणा  की गई। वास्तव में आज आबादी बढ़ रही है और आबादी बढ़ने के साथ ही मानव गतिविधियों के कारण कंक्रीट के जंगलों में भी अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। आबादी बढ़ने के कारण वन क्षेत्र में कमी आई है। वनों में आज आदमी जगह बनाता चला जा रहा है और इससे जंगली जानवरों, पशु-पक्षियों के समक्ष रहवास का खतरा भी पैदा हुआ है। सच तो यह है कि बढ़ती आबादी के साथ पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक वन क्षेत्र में कमी होने के कारण वन्य जीव और मानव का संघर्ष जन्म लेने लगा है। यहां उल्लेखनीय है कि उत्तरकाशी जनपद के थांडी-कमद से वर्ष 2017 में बीज बम अभियान सप्ताह का शुभारंभ किया गया, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों को जोड़ा गया। आज विभिन्न सामाजिक संस्थाएं, स्कूल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं, एनजीओ समेत हजारों लाखों लोग बीज बम अभियान से जुड़े हैं और वर्तमान में भी इस अभियान से लोगों का जुड़ना निरंतर जारी है। </p>
<p><br />आज उत्तराखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में यह अभियान चलाया जाता है और इससे पर्यावरण संरक्षण को तो बल मिला ही हैए और मानव बस्तियों में जंगली जानवरों का उत्पात भी कम देखने को मिला है। दूसरे शब्दों में यह बात कही जा सकती है कि इससे लोगों को जंगली जानवरों के उत्पात से काफी राहत मिली है। आज बीज बम अभियान को न केवल उत्तराखंड रा’य में बल्कि देश के अनेक रा’यों में लगातार प्रशंसा मिल रही है और बीज बम अभियान अपनी उपयोगिता को लगातार सिद्ध कर रहा है। अंत में यही कहूंगा कि दुनिया को पर्यावरण संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन और मैती आंदोलन जैसे विचार और सफल प्रयोग देने वाले उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मानव.वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए बीज बम आंदोलन आज लगातार संपूर्ण देश में जÞोर पकड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/unique-donation-in-environmental-protection---beej-bum-movement/article-52439</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2023 13:25:34 +0530</pubDate>
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