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                <title>toppers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>toppers RSS Feed</description>
                
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                <title>100% अंकों की गूंज :पीडब्ल्यूवाला छात्रों की सीबीएसई 10वीं बोर्ड 2026 में रिकॉर्ड सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[फिजिक्सवाला (PW) के छात्रों ने सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। वैभव अरोड़ा, अमोलिक पंडिता और आयुष्मान महापात्रा ने 100% अंक पाकर देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। जयपुर विद्यापीठ में आयोजित समारोह में मेधावियों को सम्मानित किया गया। अलख पांडेय ने इस सफलता को कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/echo-of-100-marks-record-success-of-physics-students-in/article-150775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/untitled-1.pdf.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू) के लिए आज का दिन गर्व और उत्सव का रहा, जब इसके कई विद्यार्थियों ने सीबीएसई कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उच्च अंक प्राप्त किए। इनमें कुछ विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत (100%) अंक हासिल कर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में पंजाब के फाजिल्का से वैभव अरोड़ा, गुजरात के अहमदाबाद से अमोलिक पंडिता और ओडिशा के भुवनेश्वर से आयुष्मान महापात्रा शामिल हैं, जिन्होंने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, पीडब्ल्यू विद्यापीठ, जो फिज़िक्सवाला के तकनीक-सक्षम ऑफलाइन केंद्र हैं, ने  जयपुर में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में शहर के उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।  अपने अनुभव साझा करते हुए वैभव अरोड़ा ने कहा, “नियमित तैयारी, सतत अभ्यास और स्कूल व पीडब्ल्यू शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मुझे पूर्ण अंक प्राप्त करने में मदद की।”</p>
<p>अमोलिक पंडिता ने बताया, “नियमित रिविजन और मॉक टेस्ट हल करना मेरे लिए 100% अंक लाने में बहुत सहायक रहा।” आयुष्मान महापात्रा ने कहा, “अनुशासन बनाए रखते हुए एक सुव्यवस्थित अध्ययन योजना का पालन करना मेरी सफलता की कुंजी रहा।” परिणामों पर अपने विचार साझा करते हुए अलख पांडेय, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू) ने कहा, “हम परीक्षा में शामिल हुए सभी विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना करते हैं। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को बधाई, जिन्होंने पूर्ण अंक हासिल किए। ये परिणाम निरंतर प्रयास और सही शैक्षणिक सहयोग प्रणाली को दर्शाते हैं।”</p>
<p>इस वर्ष सीबीएसई कक्षा 10वीं परीक्षा में 25 लाख से अधिक विद्यार्थी सम्मिलित हुए। इन विद्यार्थियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि सुनियोजित ऑनलाइन एवं मिश्रित शिक्षण पद्धति शैक्षणिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:30:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंसुओं से लिखी सफलता की इबारत : झाड़ू-पौंछा लगाने वाली और मजदूर की बेटियों ने बोर्ड में रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[गरीबी, दर्द , अभावों से लड़कर और जिम्मेदारियों के बीच बेटियां बनीं बोर्ड टॉपर ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-saga-of-success-written-in-tears--daughters-of-domestic-workers-and-laborers-make-history-in-board-exams/article-147974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)71.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा । किसी के हाथ में किताबों से पहले झाड़ू थी, कोई मां के बिना घर संभालते हुए पढ़ी तो किसी ने पिता की मौत के बाद टूटते परिवार को संभाला। मजदूर और किसान की बेटियां अभावों से लड़ती रही। लेकिन, हालातों के आगे हार नहीं मानी। संघर्ष, चुनौतियों और अभावों से जूझते हुए इन बेटियों ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर खुद को साबित किया। उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता के लिए महंगे स्कूल, कोचिंग और सुविधाएं जरूरी नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">बिन मां की बेटी कृष्णा ने मैकेनिक पिता का नाम किया रोशन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कृष्णा ने संघर्ष और चूनौतियों से लड़ खुद को साबित किया। बिन मां की बेटी कृष्णा ने 10वीं बोर्ड में 90 प्रतिशत अंकों के साथ सभी विषयों में डिक्टेशन हासिल की है। पिता वेल्डिंग का काम करते हैं। परिवार की माली हालत और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा का दामन थामे रखा। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय अंबेडकर नगर कुन्हाड़ी की छात्रा के पिता विपिन कुमार बताते हैं, कृष्णा तीन भाई बहन है। स्कूल से आने के बाद घर का काम और बुजुर्ग दादी की सार-संभाल करती है। दिन में थोड़ा समय पढ़ाई के लिए मिलता तो शाम को फिर से घर के काम में लग जाती। रात को 4 घंटे पढ़ती और साथ में छोटे भाई को भी पढ़ाती। परीक्षा के दौरान बीमार हो गई फिर भी कृष्णा ने हार नहीं मानी और परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">पिता की मृत्यु से टूटी फिर संभली अब बोर्ड में किया नाम रोशन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कुन्हाड़ी निवासी सरकारी स्कूल की छात्रा रंजिता का जीवन चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा। वर्ष 2024 में पिता का अचानक देहांत होने से वह टूट गई। मां हॉस्टल में झाडू-पौंछा कर परिवार का पेट पालती है। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी रंजिता ने हार नहीं मानी और नियमित 4 घंटे पढ़ाई कर परीक्षा में 81 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए। साथ ही सभी 6 विषयों में विशेष योग्यता हासिल कर गार्गी पुरस्कार में चयनित हुई। प्रिंसिपल अर्पणा शर्मा कहती हैं, अभावों से जूझते हुए भी रंजिता ने मुकाम हासिल किया है। अब वह साइंस लेकर मेडिकल फिल्ड में जाना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मजदूर की बेटी ने किया स्कूल टॉप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">राजकीय बालिका उच्च माध्मिक विद्यालय कुन्हाड़ी की छात्रा सोनाक्षी ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया। उनके पिता विशू प्रताप मजदूरी करते हैं और मां इसी स्कूल में पोषाहार बनाती है। मां ममता मेघवाल बताती हैं, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। किराए से कमरा लेकर रहते हैं। एक ही कमरे में परिवार के 6 सदस्य रहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद सोनाक्षी ने सफलता की इबारत लिखी। बेटी आगे इंजीनियर बनना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">इलेक्ट्रीशियन की बेटी ने रचा इतिहास</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सुल्तानपुर की छात्रा दिव्या नागर ने बोर्ड परीक्षा में 96.83 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे ब्लॉक में टॉपर रही है। दिव्या के पिता सुरेश इलेक्ट्रीक की दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के बाद बेटी घर के काम में मां का हाथ बटाती है। रात को 4 घंटे नियमित पढ़ाई करती है और छोटे बहन-भाई को भी पढ़ाती है। बुजुर्ग दादी की अक्सर तबीयत खराब रहती है, जिससे घर का माहौल भी अशांत हो जाता है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दिव्या ने खुद को साबित करके दिखाया। बेटी सरकारी टीचर बनना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">काश्तगार की बेटी ने बढ़ाया पिता का मान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सुल्तानपुर के सरकारी स्कूल की छात्रा फिजा खानम ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 92.67 प्रतिशत अंक प्राप्त कर परिवार का मान बढ़ाया। फिजा के पिता दिलभर खान काश्तगार हैं, जो दूसरों की जमीन जोतकर आजिविका चलाते हैं। उन्होंने बताया कि घर से स्कूल की दूरी एक किमी है। बेटी रोजाना पैदल स्कूल जाती है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी। 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती और घर का काम भी संभालती। बेटी ने 600 में 556 अंक प्राप्त किए हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सफलता कोई इत्तेफाक नहीं,  'माइक्रो प्लानिंग' का नतीजा</title>
                                    <description><![CDATA[टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/success-is-not-an-accident--but-the-result-of--micro-planning/article-142456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। हर साल जब बोर्ड परीक्षाओं या कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के रिजल्ट आते हैं, तो कुछ चेहरे चमकते हुए सितारों की तरह उभरते हैं। हम उन्हें 'टॉपर्स' कहते हैं।आज दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट 'टॉपर्स का मास्टरप्लान' में हम पर्दा उठाएंगे उन अनकहे राज से, जिन्हें अपनाकर साधारण छात्र भी असाधारण बन जाते हैं। हम जानेंगे उनके टाइम मैनेजमेंट का गणित और उनके नोट्स बनाने का वो अनोखा तरीका, जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।" टॉप करना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सटीक प्लानिंग का नतीजा है।</p>
<p><strong>- ये रहती है टॉपर्स की योजना</strong><br />अनुशासन का खेल: टॉपर्स कभी भी 'कल' पर काम नहीं टालते। उनके लिए टाइम टेबल सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी लाइफलाइन होती है।<br />स्मार्ट वर्क बनाम हार्डवर्क: वे 18 घंटे नहीं पढ़ते, बल्कि उन 6 घंटों पर ध्यान देते हैं जहाँ उनका दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।<br />रिवीजन की ताकत: एक बार पढ़ना काफी नहीं है। टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।<br />सवालों से दोस्ती: वे केवल जवाब नहीं रटते, बल्कि 'क्यों' और 'कैसे' के पीछे भागते हैं।<br />डिजिटल डिटॉक्स: पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी उनकी एकाग्रता का सबसे बड़ा हथियार है।</p>
<p><strong>- राकेश केवट: "दुकान की जिम्मेदारी के साथ हिंदी में हासिल किए 96% अंक</strong><br />राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी राकेश केवट की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण राकेश आधा दिन दुकान पर काम करते थे और शेष समय पढ़ाई को देते थे। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने बिना किसी कोचिंग के हिंदी में 96% और भूगोल में 89% अंक प्राप्त किए। समय के अभाव के कारण मैं कोचिंग नहीं कर सका। मैंने स्कूल में होने वाले हर टेस्ट को गंभीरता से दिया। जो भी समझ नहीं आता था, उसे शिक्षकों से पूछकर हल करता था।</p>
<p><strong>- दुर्गेश मेहरा: "बीमारी भी नहीं रोक सकी कदम, भूगोल में पाए 94 अंक</strong><br />राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी दुर्गेश मेहरा ने पूरे साल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना किया। यहाँ तक कि परीक्षा के ठीक पहले उनकी तबीयत अत्यधिक खराब हो गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गेश ने बताया, "स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद मैंने अधिक से अधिक क्लास अटेंड कीं और नियमित टेस्ट दिए। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि मैंने भूगोल विषय में 94 अंक प्राप्त किए।"</p>
<p><strong>- छवि मित्तल: सटीक उत्तर और समय प्रबंधन पर दें ध्यान</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)छात्रा छवि मित्तल ने बताया कि मैंने कक्षा 12 वीं में 94 प्रतिशत प्राप्त कर सफलता अर्जित की। सफलता का मुख्य आधार नियमितता रही। छवि ने कहा, मैं प्रतिदिन करीब 10 घंटे तक पढ़ाई करती थी और अवकाश के दिनों में रिवीजन करती थी। स्कूल में होने वाले टेस्ट और परीक्षाओं को मैंने कभी नहीं छोड़ा, क्योंकि इससे मुझे स्वयं के मूल्यांकन में मदद मिली। परीक्षार्थियों को सलाह देते हुए छवि कहती हैं परीक्षा देते समय हमेशा ध्यान रखें कि प्रश्न में जो पूछा गया है, केवल उसका ही सटीक उत्तर लिखें और समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखें।</p>
<p><strong>- काजल गुर्जर: रविवार को विशेष विषयों पर फोकस और परीक्षा हॉल में एकाग्रता"</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)में 12वीं बोर्ड में 95% से अधिक अंक प्राप्त करने वाली काजल गुर्जर ने विज्ञान वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। काजल ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया, स्कूल के बाद घर पर हर विषय को दो-दो घंटे देना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने बताया, "शिक्षकों द्वारा बताए गए महत्वपूर्ण प्रश्नों को मैंरिवाइज करती थी। परीक्षा देने के दौरान विद्यार्थियों को अपना फोकस पेपर पर ही रखना चाहिए।</p>
<p><strong>घर पर आकर दोबारा समझे स्कूल में पढ़े हुए को</strong><br />राज.उमावि. दीगोद की छात्रा -अनुष्का नागर ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान जो पढ़ाया जाता था। वहां घर पर आकर दोबारा पढ़ाई करते थे। उसमें से कुछ समझ में नहीं आता था तो उसको टीचर से पूछते थे। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। 12 वीं मे मेरे 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिशत से सफलता आर्जित की।</p>
<p><strong>सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी </strong><br />ज्योतिका नागर, राज.उमावि. दीगोद की छात्रा ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी और जो भी स्कूल में पढ़ाया जाता था। उसको अच्छे से समझने की कोशिश करते थे। इसी के साथ स्कूल में आयोजित होेने वाले टेस्ट भी दिए। इसी के साथ घर पर खाली समय में हर विषय का रिवीजन करती थी।</p>
<p><strong>- शिक्षकों का समर्पण: रिक्त पदों के बावजूद बेहतर परिणाम</strong><br />स्कूल में व्याख्याताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापकों द्वारा पूर्ण प्रयास किया जाता है कि बोर्ड परीक्षा का परिणाम श्रेष्ठ रहे। उन्होंने कहा, विगत तीन सत्रों से 12वीं बोर्ड का परिणाम उत्कृष्ट रहा है। भूगोल विषय के अध्यापन के दौरान कोशिश रही कि क्लासरूम में ही बच्चों को विषय के बारे में समझाया।समय-समय पर छात्रों की शंकाओं का समाधान किया। और उनकी 'प्रोग्रेस रिपोर्ट' से अभिभावकों को अवगत कराया । <br /><strong>-शिव कुमार धामेजा,वरिष्ठ अध्यापक राज.माध्य.वि. सकतपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>राजकीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप : टॉपर्स की जुबानी, सफलता की कहानी, परीक्षाओं के दबाव को जीत में बदलें</title>
                                    <description><![CDATA[टाइम मैनेजमेंट, राइटिंग स्किल्स और मानसिक शांति से कठिन विषय भी आसान बन जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-the-mouths-of-toppers--the-story-of-success--turn-exam-pressure-into-victory/article-142261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आते ही छात्रों के दिलों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। सिलेबस का बोझ, अच्छे अंकों का दबाव और भविष्य की चिंता-इन सबके बीच हर छात्र के मन में एक ही सवाल है, "आखिर टॉपर बनने का सीक्रेट क्या है?" इसी ऊहापोह को दूर करने के लिए हमने बात की पिछले वर्ष के टॉपर से बातचती जिन्होंने अपनी रणनीतियों और अनुशासन के दम पर परीक्षा में करीब उच्चतम अंक हासिल कर मिसाल कायम की थी। आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए टॉपर ने बताया कि बोर्ड परीक्षा कोई डर नहीं, बल्कि अपनी काबिलियत साबित करने का एक बेहतरीन मंच है। इस विशेष बातचीत में उन्होंने न केवल अपनी 'सक्सेस स्ट्रेटजी' साझा की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे आखिरी समय में टाइम मैनेजमेंट, राइटिंग स्किल्स और मानसिक शांति के तालमेल से मुश्किल विषयों को भी आसान बनाया जा सकता है।</p>
<p><strong> नोट्स का रिवीजन और पुराने प्रश्न पत्र हैं जरूरी</strong><br />कक्षा 10वीं में 90% अंक हासिल करने वाले सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने रोजाना करीब 10 घंटे तक नियमित पढ़ाई की। उन्होंने कहा, "मैंने सबसे पहले सिलेबस को बारीकी से समझा और एक समय-सारिणी (ळ्रेी३ुंह्णी) बनाई। शिक्षकों द्वारा बनवाए गए नोट्स का नियमित रिवीजन किया। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और सैंपल पेपर हल करने से मुझे परीक्षा पैटर्न और समय प्रबंधन समझने में बहुत मदद मिली। उचित नींद और सकारात्मक सोच ने मुझे तनाव से मुक्त रखा।"</p>
<p><strong>  स्मार्ट सोच और निरंतरता से मिली सफलता</strong><br />कक्षा 10वीं में 94% अंक और विज्ञान विषय में 98 अंक हासिल करने वाली श्यामा मीणा का कहना है कि सफलता कड़ी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट सोच से मिलती है। श्यामा ने बताया, "मैंने शुरूआत से ही रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की और हर सप्ताह व महीने में रिवीजन पर जोर दिया। क्लास टेस्ट कभी मिस नहीं किए और शंका होने पर शिक्षकों से बार-बार सवाल पूछे। मेरा मानना है कि उत्तर लिखते समय समय का ध्यान रखना और आत्मविश्वास बनाए रखना बहुत जरूरी है।"</p>
<p><strong>  बेसिक्स को मजबूत करें और रटने के बजाय समझें </strong><br />91% अंक प्राप्त करने वाली माईशा ने विज्ञान के सिद्धांतों को तार्किक रूप से समझने पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, "बोर्ड परीक्षा केवल एक शैक्षणिक चरण नहीं, बल्कि आत्म-विकास की यात्रा है। मैंने अपने बेसिक्स को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। नियमित अभ्यास और आत्म-मूल्यांकन (रीकॉल) से मुझे गलतियों को सुधारने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिली।"</p>
<p><strong> एक्टिव रिकॉल तकनीक और संघर्ष से जीत</strong><br />रोशनी सैनी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। कक्षा 10वीं के दौरान दादी की तबीयत खराब होने के कारण वे सुबह 4 बजे उठकर खाना बनाती थीं और फिर स्कूल जाती थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद गणित जैसे विषय में 97 अंक प्राप्त किए। रोशनी ने बताया, "मैंने नोट्स को केवल पढ़ने के बजाय 'एक्टिव रिकॉल' (दिमाग पर जोर देकर याद करना) तकनीक का उपयोग किया। गणित मेरा कमजोर विषय था, लेकिन शिक्षकों की सलाह मानकर हर प्रश्न का तीन-तीन बार अभ्यास किया, जिससे मेरा डर खत्म हो गया।"</p>
<p><strong>  प्लानिंग और क्लास टेस्ट से निखरी प्रतिभा</strong><br />95.67% अंक हासिल करने वाली भाविका शंभवानी ने अपनी सफलता का श्रेय प्लानिंग को दिया। उन्होंने कहा, "मैं स्कूल के हर टेस्ट को गंभीरता से देती थी और परिणाम जानने के लिए उत्सुक रहती थी। कम अंक आने पर मैं शिक्षकों से सही उत्तर पूछती और घर पर दोबारा तैयारी करती थी। अच्छे अंकों के लिए गुरुजनों की सलाह मानना और प्लानिंग के साथ नियमित पढ़ाई करना ही सबसे कारगर तरीका है।"</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />एनसीईआरटी की किताबों को फोलो करते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए नोट्स बनाते है। पढ़ाने से पहले प्रत्येक चैप्टर की तैयारी की जाती है। साथ ही समय-समय पर रिवाईज करवाते है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में अधिक से अधिक कोर्स करवाने की कोशिश की जाती है। स्कूल में प्री बोर्ड पैटर्न पर टैस्ट लिया जाता है। अभिभावकों को विद्यार्थियों की प्रोगे्रस रिपोर्ट दिखाई जाती है।<br /><strong>-शिल्पा शर्मा, वरिष्ठ साइंस अध्यापिका,महात्मा गांधी राज. विद्या. मल्टीपरपज गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>एग्जाम के दौरान विद्यार्थी मोबाइल से दूरी बनाएं रखे</strong><br />परीक्षा देने से पहले विद्यालय में बच्चों को अच्छी तरह से तैयारी करवाई जाती है। साथ ही कमजोर बच्चों पर अधिक ध्यान देकर उनको पढ़ाया जाता है। समय-समय पर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन किया जाता है। एग्जाम देते समय विद्यार्थी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखे। व मोबाइल से दूरी बनाकर रखे।<br /><strong>-आशुतोष मथुरिया,प्रिंसिपल, महात्मा गांधी राज. विद्या. मल्टीपरपज गुमानपुरा</strong></p>
<p>शिक्षा के क्षेत्र में जब विद्यार्थी जब आगे बढ़ाता है तो वहां विद्यालय और परिवार को गौरंवित करता है। इस प्रकार से एक राजकीय विद्यालय के शैक्षिक वातावरण में टीचर अच्छा रिजल्ट दे रहे। और अब राजकीय विद्यालय रिजल्ट के साथ क्वालिटी पर ध्यान दे रहा हैं।<br /><strong>-रामचरण मीणा,डीईओ, माध्यमिक कोटा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:31:33 +0530</pubDate>
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                <title>इंडिया लेवल पर थर्ड रैंक वाले स्टूडेंट को अपना बताने का तीन कोचिंग संस्थान कर रहे दावा</title>
                                    <description><![CDATA[एक अनार तीन कोचिंग संस्थान बीमार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-coaching-institutes-are-claiming-the-student-who-got-third-rank-at-india-level-as-their-own/article-116946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक अनार सौ बीमार, यह कहावत राज्य के बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट के मामलों में सही साबित हो रही है। जेईई एडवांस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में टॉपर्स की सूची में स्थान बनाने वाले स्टूडेंट्स को अपनी कोचिंग का स्टूडेंट बताने की कोचिंग संस्थानों में मानो होड़ लग जाती है। साम, दाम दण्ड भेद किसी भी तरह की युक्ति  से कोचिंग संस्थान टॉपर स्टूडेंट को अपनी कोचिंग का स्टूडेंट बताने की कोशिश करते हैं। जिससे भविष्य में कोचिंग की फीस की फसल को वह और ज्यादा काट सकें। ऐसा ही मामला एक बार फिर सामने आया है। दरअसल  हाल ही जारी जेईई एडवांस-2025 के  रिजल्ट में आल इंडिया थर्ड रैंक पाने वाले छात्र मजीद मुजाहिद हुसैन को तीन तीन कोचिंग संस्थान  फिजिक्सवाला, श्री चैतन्य अकेडमी व नारायणा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट अपना स्टूडेंट होने का दावा कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन कोचिंग संस्थानों ने बड़े-बड़े विज्ञापन देकर, होर्डिंग लगाकर इस स्टूडेंट को अपने कोचिंग संस्थान का होने का बताया है।  इन इंस्टीट्यूट ने यह दावा कहीं भी नहीं किया कि अमुख स्टूडेंट क्लॉस रूम स्टूडेंट है, आॅन लाइन स्टूडेंट है या केवल टेस्ट सिरीज खरीदने वाला स्टूडेंट है। यह सवाल उठता है कि एक ही स्टूडेंट तीन-तीन कोचिंग संस्थानों में एक साथ कैसे पढ़ सकता है? एक स्टूडेंट की उपलब्धि को तीन तीन कोचिंग संस्थान अपनी उपलब्धि कैसे बता सकते हैं। कोचिंग संस्थान सरेआम अन्य छात्रों और उनके परिजनों को भ्रमित कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>बढ़ती आत्महत्या का कारण भी यही</strong><br />जब स्टूडेंट अच्छी रैंक पाता है तो कोचिंग संस्थान उसे अपना स्टूडेंट बताने को बड़े बड़े दावे करता है। लेकिन उस स्टूडेंट के साथ किसी तरह की अनहोनी होने पर तुरन्त कोचिंग संस्थान उससे दूर दूर तक नाता नहीं रखते। उसे अपने संस्थान से जुड़े होने से इनकार कर देते हैं। दरअसल कई कोचिंग संस्थान स्टूडेंट से फीस की फसल काटने को ऐसा करते हैं। इस बहाने से कोचिंग संस्थान उन्हें सफलता का सपना दिखाते हैं। ऐसे संस्थान भ्रामक पब्लिसिटी का सहारा लेकर स्टूडेंट और अभिभावक को अपने जाल में फंसाते हैं। इसी जाल में स्टूडेंट और अभिभावक फंस जाते हैं।  जब बच्चा अपने सपने पूरे होते नहीं देखता है तो वह निराश हो जाता है और कई बार आत्महत्या जैसा गलत कदम उठा लेता है। </p>
<p>भ्रामक पब्लिसिटी को लेकर गाइड लाइन में स्पष्ट कहा गया है कि भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पहली बार अपराध करने पर 25 हजार रुपए, दूसरी बार अपराध करने पर एक लाख रुपए जुर्माना और तीसरी बार अपराध करने पर कोचिंग संस्थान का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।</p>
<p><strong>उच्चतर शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों की अवहेलना</strong><br />भारत सरकार के उच्चतर शिक्षा विभाग शिक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2024 में कोचिंग केन्द्रों के लिए गाइड लाइन जारी की थी। इस गाइड लाइन में स्पष्ट लिखा है कि कोचिंग संस्थान वहां पढ़ने वाले छात्र की ओर से प्राप्त परिणाम के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे से संबंधित भ्रामक विज्ञापन को प्रकाशित नहीं करेगा। या प्रकाशित करने का कारण नहीं बनेगा। इसके बावजूद कोचिंग संस्थान बेखौफ अपने दावे कर रहे हैं और स्टूडेंट व अभिभावकों में भ्रम पैदा कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>हुसैन को अपना बताने वाले तीनों संस्थान क्या कहते हैं</strong><br />हम तो एक साल से आए हैं। मुजाहिद हुसैन के मामले की मुझे जानकारी नहीं है। दरअसल स्टूडेंट टेस्ट सिरीज, या ऑन लाइन प्रोग्राम ले लेते हैं। ऐसे स्टूडेंट को कोचिंग अपना स्टूडेंट बता देते हैं। ऐसा होता आ रहा है। ज्यादा मुझे जानकारी नहीं है। <br /><strong>-करणवीर सिंह ब्रांच मैनेजर श्री चैतन्य अकेडमी जयपुर</strong></p>
<p>सामान्यतया बच्चे मल्टीपल इंस्टीट्यूट से कोर्स सिरीज वगैरह ले लेते हैं। कुछ टेस्ट सिरीज लेते हैं कुछ क्लास ज्वॉइन करते हैं। हमारे यहां यह स्टूडेंट स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम में था। अन्य इंस्टीट्यूट की मुझे जानकारी नहीं है।<br /><strong>-अभिषेक सिंह मीडिया कोर्डिनेटर नारायणा इंस्टीट्यूट जयपुर</strong></p>
<p>फिजिक्सवाला की कोरपोरेट क्म्यूनिकेशन इंचार्ज अलफिया ने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि स्थानीय ब्रांच हैड ने बताया कि मुजाहिद हुसैन ने दो वर्ष तक ऑन लाइन प्रोग्राम के तहत हमारे यहां से पढ़ाई की है। <br /><strong>-दिनेश जैन ब्रांच हैड फिजिक्सवाला कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 14:51:19 +0530</pubDate>
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                <title> विज्ञान संकाय में नागौर और सीकर संयुक्त रूप से टॉपर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए परीक्षा परिणाम में विज्ञान वर्ग में नागौर और सीकर जिले प्रदेशभर में टॉप पर रहे, जबकि वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिला अव्वल रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/nagaur-and-sikar-joint-toppers-in-science-faculty/article-11018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bb.jpg" alt=""></a><br /><p> अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए परीक्षा परिणाम में विज्ञान वर्ग में नागौर और सीकर जिले प्रदेशभर में टॉप पर रहे, जबकि वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिला अव्वल रहा। विज्ञान में नागौर और सीकर ने 98.30 प्रतिशत और वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिले ने शत प्रतिशत परिणाम देकर लोहा मनवाया है। </p>
<p>विज्ञान वर्ग में दूसरा स्थान झुन्झुनूं ने 97.54 प्रतिशत के साथ प्राप्त किया। वहीं 97.31 अंक हासिल कर जालोर को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वाणिज्य वर्ग में दूसरे स्थान पर डूंगरपुर 99.32 फीसदी एवं तीसरे स्थान पर झुन्झुनूं जिले ने 99.27 प्रतिशत के साथ प्राप्त किया। विज्ञान संकाय में सबसे नीचे के पायदान 30वें स्थान पर सिरोही 92.10 प्रतिशत एवं वाणिज्य में सबसे कम अंक बांसवाड़ा जिले को 94.30 प्रतिशत के साथ 33वां स्थान मिला। </p>
<p><strong>ये रहा जिलेवार परिणाम</strong></p>
<p>विज्ञान वर्ग में चौथे स्थान पर राजसमंद, पांचवें पर अलवर, छठे पर दौसा, सातवें पर जोधपुर, आठवें पर बारां, नवें पर भीलवाड़ा, दसवें स्थान पर जैसलमेर एवं ग्याहरवें पर कोटा और बीकानेर संयुक्त रूप से रहे। बारहवें स्थान पर करौली, तेहरवें पर बांसवाड़ा और डूंगरपुर संयुक्त रूप से एवं 14वें पर धौलपुर, पन्द्रहवें पर जयपुर, सोलहवें पर सवाई माधोपुर, सत्रहवें पर श्रीगंगानगर, बाड़मेर अठारहवें, हनुमानगढ़ उन्नीसवें, चुरू बीसवें, टोंक इक्कीसवें, झालावाड़ बाइसवें, भरतुपर तीइसवें, अजमेर चौबीसवें, बूंदी पच्चीसवें, उदयपुर छब्बीसवें, चित्तौड़गढ़ सत्ताइसवें, पाली अठाइसवें, और प्रतापगढ़ उनतीसवें एवं सिरोही तीसवें स्थान पर रहे। </p>
<p>वाणिज्य वर्ग में चौथे स्थान पर प्रतापगढ़, पांचवें पर दौसा, बाड़मेर छठे पर, सातवें पर हनुमानगढ़, आठवें पर अलवर, नवें पर नागौर, दसवें पर पाली, ग्यारहवें पर श्रीगंगानगर, बारहवें पर भीलवाड़ा, तेहरवें पर करौली, जयपुर चौदहवें, बीकानेर पन्द्रहवें, अजमेर सोलहवें, कोटा सत्रहवें, राजसमन्द अठाहरवें, सीकर उन्नीसवें, बीसवें पर धौलपुर, इक्कीसवें पर जालोर, जोधपुर बाइसवें, चित्तौड़गढ़, तेइसवें, झालावाड़ चौबीसवें, उदयपुर पच्चीसवें, सवाई माधोपुर छब्बीसवें, भरतपुर सताइसवें, बारां अठाइसवें, चुरु उन्नतीसवें और सिरोही ने तीसवां स्थान प्राप्त किया। जबकि टोंक 31वें, जैसलमेर 32वें और बांसवाड़ा 33वें स्थान पर रहे।  </p>
<p><strong>अर्से बाद शिक्षा मंत्री के बगैर ही निकाला परिणाम</strong></p>
<p>शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने लम्बे अर्से बाद बुधवार को इस वर्ष के पहले दो परीक्षा परिणाम जारी किए, जिसमें शिक्षामंत्री के बगैर ही परिणाम घोषित किया गया। गत वर्षों से चली आ रही परिपाटी के तहत शिक्षा बोर्ड का पहला सालाना परीक्षा परिणाम शिक्षामंत्री द्वारा ही जारी किया जाता है। यह प्रदेश की सत्तारुढ़ कांग्रेस सरकार और पूर्ववर्ती भाजपा व उससे पूर्व की सरकारों में भी परिपाटी रही है। लेकिन यह लम्बे अर्से के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि मौजूदा शिक्षामंत्री बी.डी.कल्ला को बुलाए बगैर ही परिणाम जारी हुआ। कल्ला का इस सरकार में शिक्षामंत्री रहते हुए यह पहला अवसर था, जब बोर्ड का परीक्षा परिणाम जारी हुए हैं। ऐसे में भी उनके बगैर परिणाम जारी होना दिनभर बोर्ड एवं राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। जबकि इनसे पूर्व शिक्षामंत्री रहे गोविन्द सिंह डोटासरा एवं भाजपा राज में शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी परिणाम जारी करते रहे। यह भी संयोग ही रहा कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार फुल टाइम प्रशासक के रूप में नियुक्त आईएएस अधिकारी ने परिणाम जारी किया। इससे पूर्व भी प्रशासक रहे, लेकिन उनके पास बोर्ड प्रशासक का स्वतंत्र जिम्मा नहीं रहा।  </p>
<p><strong>विज्ञान में 9 और वाणिज्य में 6 विषयों में मिले 100 प्रतिशत अंक</strong></p>
<p>परीक्षा परिणाम में विज्ञान संकाय में 9 एवं वाणिज्य में 6 विषयों में पूरे में से पूरे अंक अर्जित किए हैं। जबकि अन्य विषयों में भी 99 एवं 98 अंक भी लाए हैं। परीक्षार्थियों ने विज्ञान में हिन्दी और अंग्रेजी अनिवार्य के साथ ही गणित, एग्रीकल्चर केमेस्ट्री, एग्रीकल्चर बायोलॉजी, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, एग्रीकल्चर में सौ में से सौ अंक प्राप्त किए। आईटी एण्ड आईटीईएस में 99 एवं आॅटोमोबाइल, रिटेल एवं इलेक्ट्रिकल एण्ड इलेक्ट्रोन में 98 अंक भी प्राप्त किए। इसी तरह वाणिज्य वर्ग में भी हिन्दी अनिवार्य के साथ कम्प्यूटर साइंस, इकॉनोमिक्स, गणित, अकाउण्टेंसी, बिजनस स्टेडीज में पूरे में से पूरे अंक एवं अंग्रेजी अनिवार्य, इन्फो.प्रेक्टिस में 99 अंक मिले हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 13:00:27 +0530</pubDate>
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