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                <title>confrontation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस वोट मांगने से पहले 20 लाख इंदिराम्मा आवासों का निर्माण करके दिखाए, श्वेत पत्र की मांग : केटीआर</title>
                                    <description><![CDATA[बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को चुनौती देते हुए 20 लाख इंदिराम्मा आवास बनाने की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस पर गरीबों के घर ढहाने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी छह चुनावी गारंटियों की विफलता से जनता का ध्यान भटका रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-should-show-construction-of-20-lakh-indiramma-houses-before/article-155303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kt-ramarao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने गुरुवार को आवास निर्माण के वादों को लेकर तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर तीखा हमला बोला और कांग्रेस सरकार को चुनौती दी कि वे लोगों से वोट मांगने से पहले 20 लाख इंदिराम्मा आवासों का निर्माण करके दिखाएं। पोंगुलेटी के उस पुराने बयान का जिक्र करते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस 20 लाख घर देने के बाद ही वोट मांगेगी, रामाराव ने सवाल किया कि क्या मंत्री में अपने वादे पर कायम रहने का साहस है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को नाटकीय बयान देने और बाद में अपनी जवाबदेही से भागने की आदत हो गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को 'खोखली घोषणाएं' करने के बजाय अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए हर वादे को लागू करके अपनी ईमानदारी साबित करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस सरकार ने अपनी डबल-बेडरुम आवास योजना के माध्यम से गरीबों को सम्मानजनक आवास प्रदान किए और लाखों परिवारों के लिए घर के स्वामित्व के सपने को हकीकत में बदला। पिछली बीआरएस सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए रामाराव ने कहा कि अकेले हैदराबाद में लगभग एक लाख डबल-बेडरुम घरों का निर्माण किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस द्वारा बनाया गया प्रत्येक घर प्रस्तावित इंदिराम्मा घरों की तुलना में गुणवत्ता और आकार में कहीं बेहतर था।<br />बीआरएस नेता ने कहा, "हमारी पार्टी ने गरीबों के लिए सम्मान और आत्म-सम्मान के साथ घरों का निर्माण किया। हमने खराब स्तर के माचिस की डिब्बी जैसे घरों का निर्माण नहीं किया।"</p>
<p>कांग्रेस सरकार को खुली चुनौती देते हुए रामाराव ने कहा कि अगर उसमें सचमुच प्रशासनिक क्षमता है, तो वह पिछली सरकार की आलोचना करने के बजाय हैदराबाद में उससे भी बेहतर आवास परियोजनाओं का निर्माण करके दिखाए। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर शासन के नाम पर घरों को ढहाने का भी आरोप लगाया, जबकि वह गरीबों के लिए नए घरों का निर्माण करने में पूरी तरह विफल रही है। बीआरएस नेता ने मांग की कि सरकार पिछले ढाई वर्षों के दौरान हैदराबाद में बनाए गए और ढहाए गए घरों की संख्या का विवरण देते हुए एक श्वेत पत्र जारी करे।</p>
<p>एक तीखे राजनीतिक हमले में रामाराव ने श्री रेड्डी के पुराने बयानों पर उनका मजाक उड़ाया और कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार, जमीन से जुड़े ब्लैकमेल, राजस्व प्रणाली के दुरुपयोग और जबरन वसूली की राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना के लोगों से किए गए 'छह गारंटियों' और अन्य चुनावी वादों को पूरा करने में अपनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। रामाराव ने स्पष्ट किया कि बीआरएस कांग्रेस सरकार से सवाल पूछना जारी रखेगी और उसके '420 चुनावी वादों की धोखाधड़ी' का पर्दाफाश करेगी। उन्होंने कहा, "तेलंगाना के लोगों से किए गए वादों के साथ हुए धोखे पर हम सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे। ध्यान भटकाने वाली कोई भी राजनीति जनता की आवाज को दबा नहीं सकती।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नए टकराव की ओर बढ़ रही है दुनिया </title>
                                    <description><![CDATA[इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-world-moving-towards-a-new-confrontation/article-17860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/untitled-1-copy21.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ रही है। यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसके केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है। ऐसा अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर कैपेसिटी में अकेले ताइवान की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। दूसरी ओर अमेरिका और चीन सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट है। इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है। महामारी से पहले साल 2019 में टोटल ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड की वैल्यू 1.7 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। चीन सेमीकंडक्टर के डिजाइन व मैन्यूफैक्चरिंग में काफी पीछे है, लेकिन चिप वाली डिवाइसेज के प्रोडक्शन में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। अमेरिका सेमीकंडक्टर बेस्ड डिवाइसेज का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इन्हें बनाने वाली 33 फीसदी कंपनियों का हेडक्वार्टर अमेरिका में ही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की पांच सबसे बड़ी फॉन्ड्रीज में से 2 ताइवान में स्थित है।</p>
<p><strong>ताइवान का अमेरिका और चीन के साथ ट्रेड</strong><br />पिछले कुछ सालों के दौरान अमेरिका और चीन दोनों के साथ ताइवान का व्यापार बढ़ा है। 2021 में ताइवान ने अमेरिका को 65.7 बिलियन डॉलर और चीन को 125.9 बिलियन डॉलर के सामानों का निर्यात किया था। अमेरिका के मामले में ग्रोथ की रफ्तार अधिक थी। अमेरिका को ताइवान का निर्यात 29.9 फीसदी बढ़ा था, जबकि चीन के मामले में ग्रोथ की दर 22.9 फीसदी रही थी। सेमीकंडक्टर से केमिकल्स तक के लिए ताइवान पर निर्भर भारत और चीन के बीच बड़े स्तर पर बाइलैटरल ट्रेड होता है। चीन भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट एंड इम्पोर्ट पार्टनर्स में से एक है। भारत सेमीकंडक्टर से लेकर मशीनरी तक के लिए ताइवान पर निर्भर है। ताइवान से व्यापार बाधित होने पर भारत के स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक और ऑटो सेक्टर के ऊपर तबाह होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ताइवान से भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, प्लास्टिक, मशीन टूल्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स खरीदता है। वहीं भारत मिनरल फ्यूल, तिलहन, और लोहा उत्पाद ताइवान को बेचता है।</p>
<p><strong>5476 करोड़ का प्र्रतिमाह आयात करता है भारत</strong><br />भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मई महीने में भारत ने ताइवान से 54.76 अरब रुपए के सामान खरीदे। इससे पहले अप्रैल 2022 में ताइवान से भारत का आयात 44.67 अरब रुपए रहा था। साल 1991 से 2022 के दौरान ताइवान से भारत का औसत आयात 11.04 अरब रुपए रहा है। इस साल मई महीने में भारत का ताइवान से आयात अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर रहा है। अभी जून और जुलाई के आंकड़े सामने नहीं आए हैं। अप्रैल 1991 में ताइवान से भारत का आयात महज 0.27 अरब रुपए रहा था। यह अब तक के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे कम है।</p>
<p><strong>भारत में काम कर रहीं यह कंपनियां</strong><br />भारत में पिछले कुछ समय में ताइवानी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है। विस्ट्रॉन कार्प, फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, पेगाट्रॉन कॉर्प, क्वांटा कम्यूपटर इंक जैसी कई ताइवानी कंपनियों ने पिछले कुछ साल के दौरान भारत में प्लांट लगाए हैं। पहले ये कंपनियां मुख्य तौर पर चीन में प्लांट लगाकर प्रोडक्ट बना रही थीं और उन्हें ग्लोबल मार्केट में सप्लाई कर रही थीं। चीन के साथ ताइवान के संबंधों में आई खटास और चीन में बढ़ती निगरानी के बाद इन कंपनियों ने भारत का रुख किया। आज के समय में तो फॉक्सकॉन यहीं से मेड इन इंडिया आईफोन बना रही है। हालांकि अभी भी भारत में ताइवान की कंपनियों का निवेश काफी कम है। ग्लोबल मार्केट में अभी ताइवान की करीब 11 हजार कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें से महज 116 ताइवानी कंपनियों ने ही भारत में पैसे लगाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Aug 2022 13:08:09 +0530</pubDate>
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                <title> अमेरिका और रूस में सीधे टकराव की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ रूस ने बुधवार को यूक्रेन को उन्नत राकेट सिस्टम और युद्ध सामग्री की आपूर्ति करने के अमेरिकी फैसले की तीखी आलोचना की है। रूस के इस रुख से दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव की आशंका गहरा गई है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव का कहना है कि यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता ने स्थितियों को और खराब कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/-fear---direct---confrontation---between---america---russia/article-11079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/himars.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मास्को।</strong> रूस ने बुधवार को यूक्रेन को उन्नत राकेट सिस्टम और युद्ध सामग्री की आपूर्ति करने के अमेरिकी फैसले की तीखी आलोचना की है। रूस के इस रुख से दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव की आशंका गहरा गई है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव का कहना है कि यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता ने स्थितियों को और खराब कर दिया है।</p>
<p><strong>लंबी दूरी तक मार कर सकता है हिमार्स</strong></p>
<p>दरअसल अमेरिका का कहना है कि वह यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार हाई मोबिलिटी आर्टिलरी राकेट सिस्टम देने जा रहा है। हिमार्स एक मल्टीपल राकेट लान्चर है जो लंबी दूरी के लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगा सकता है। अमेरिका ने कहा कि वह इस प्रणाली को 700 मिलियन डालर के सैन्य सहायता पैकेज में शामिल करेगा।</p>
<p><strong>यूक्रेन के आश्वासन पर अमेरिका ने किया भरोसा</strong></p>
<p>सनद रहे अमेरिका इस हथियार को यूक्रेन को देने से इनकार कर चुका था लेकिन यूक्रेन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से यह भरोसा दिए जाने पर कि इसका इस्तेमाल रूस में घुसकर लक्ष्यों को तबाह करने में नहीं किया जाएगा। अमेरिका इस प्रणाली  को यूक्रेन को देने के लिए राजी हो गया है।</p>
<p><strong>डोनबास इलाके के एक बड़े हिस्से पर रूस का कब्जा</strong></p>
<p>वहीं दूसरी ओर अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य तथा उत्तरी यूरोपीय देशों का समूह मानता है कि पुतिन का हमला रूस के विस्तार की केवल शुरूआत है। रूस यूक्रेन की जमीन का इस्तेमाल करके पश्चिमी देशों पर हमला करना चाहता है।   वह भी तब जब यूक्रेन ने डोनबास इलाके के एक बड़े हिस्से को रूस के हाथों गंवा दिया है।</p>
<p><strong>यूक्रेनी बीज बैंक पर खतरा</strong></p>
<p>रूस के हमले में यूक्रेन के खारकीव स्थित बीज बैंक को खतरा पैदा हो गया है। बीज बैंक के भूमिगत तहखाने की तिजोरियों में लगभग दो हजार फसलों के लिए जेनेटिक कोड को सुरक्षित रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा स्थापित गैर लाभकारी संगठन क्राप ट्रस्ट ने यह जानकारी दी है। ट्रस्ट का दफ्तर भी खारकीव शहर में ही है और रूसी बमबारी से उसके लिए भी खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>रूस का सेवेरोदोनेत्स्क शहर के अधिकांश हिस्सों पर कब्जा</strong></p>
<p>लुहांस्क क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख सेरही हेयडे ने बुधवार को कहा है कि रूसी सैनिक ने पूर्वी शहर सेवेरोदोनेत्स्क में हमला कर अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें शहर का केन्द्र भी शामिल है। हेयडे ने कहा कि रूस ने मंगलवार को सेवेरोदोनेत्स्क के उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी जिलों में आक्रमण किए और रूसी सैनिक शहर के अधिकांश हिस्सों पर कब्जा कर लिया तथा बुनियादी ढांचे और औद्योगिक सुविधाओं को नष्ट कर रहे है। सीएनएन ने हेयडे के हवाले से कहा कि कल स्थानीय समयानुसार शाम छह बजकर 55 मिनट पर रूस ने हवाई हमले में सेवेरोदोनेत्स्क में केमिकल प्लांट में नाइट्रिक एसिड के टैंक को निशाना बनाया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कल न्यूज़मैक्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि प्रतिदिन हमारे 60 से 100 सैनिक जान से हाथ धो रहे हैं।तथा पूर्व के हिस्से में हालात काफी खराब हैं। हम प्रतिदिन 60 से 100 सैनिकों को खो रहे है और हमले में कम से कम 500 जवान घायल हो रहे हैं। <br /><br /><strong><span style="color:#ff0000;background-color:#ffcc00;">यूक्रेन को करारा झटका</span></strong><br /><strong>रूस के खिलाफ जंग में नाटो में आई दरार</strong><br />कीव। दोनबास में रूस के भीषण हमलों के बीच यूक्रेन को भारी हथियार मुहैया कराने के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के मोर्चे में दरार आ गई है। अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी यूक्रेन को लगातार ज्यादा शक्तिशाली हथियार मुहैया कराने के मुद्दे पर बंट गए हैं। फ्रांस और जर्मनी के नेतृत्व में पहला गुट यूक्रेन को लगातार हथियार देने का विरोध कर रहा है। इस गुट को डर है कि इससे संघर्ष लंबा खींचेगा और आर्थिक घाटा बढ़ता चला जाएगा। वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक असहमति का केंद्र रूस की ओर से लंबे समय तक पैदा होने वाले खतरे और क्या वास्तव में यूक्रेन जंग के मैदान में जीत हासिल कर पाएगा? इसको लेकर है। यही वजह है कि फ्रांस और जर्मनी के नेतृत्व वाला गुट यूक्रेन को आक्रामक और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार मुहैया कराने से परहेज कर रहा है। यूक्रेन को रूस के हाथों गंवा चुके इलाकों पर फिर से कब्जा करने के लिए इन हथियारों की सख्त जरूरत है। <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 15:25:15 +0530</pubDate>
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