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                <title>घरों से निकलने वाले कचरे पर लगेगा शुल्क</title>
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                        <![CDATA[ शहर में साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। गली मोहल्ले, वार्ड, मेन रोड से लेकर नालियों तक की सफाई नगर निगम करवाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fees-will-be-levied-on-the-garbage-coming-out-of-houses/article-88085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy14.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की ओर से अभी तक नि:शुल्क दी जा रही घर-घर कचरा संग्रहण सुविधा शीघ्र ही बंद होने वाली है। अब निगम इस सुविधा के बदले हर घर से शुल्क वसूल करेगा। यह शुल्क मकान की साइज के हिसाब से लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम कोटा उत्तर से सर्वे भी शुरू कर दिया है। शहर में साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। गली मोहल्ले, वार्ड, मेन रोड से लेकर नालियों तक की सफाई नगर निगम करवाता है। साथ ही पिछले कई सालों से नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रहण सुविधा शुरू की हुई है। जिसके तहत निगम के टिपर आते हैं और हर घर से कचरा एकत्र कर ले जाते हैं। जिसेस वे ट्रांसफर स्टेशन पर डालते हैं। वहां से निगम द्वारा पविहन कर उस कचरे को नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाता है। अभी तक निगम द्वारा घरों से कचरा एकत्र करने का कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। लेकिन अब लोगों को इसके लिए शुल्क देना होगा।  दो से तीन  टिपर हर वार्ड में लगे हैं कोटा में वर्तमान  में कोटा उत्तर व दक्षिण दो नगर निगम हैं। जिनमें वार्डों की संख्या 150 है। कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड है। इनमें से हर वार्ड में दो से तीन टिपर लगे हुए हैं। एक निगम में संवेदक के माध्यम से तो दूसरे निगम में गैराज के माध्यम से टिपरों का संचालन कर घर-घर व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्र किया जा रहा है। पहले सुबह-शाम दोनों समय टिपर आते थे। लेकिन वर्तमान में एक ही समय सुबह के समय टिपर आ रहे हैं। निगम से प्राप्तब जानकारी के अनुसार शहर से रोजाना 450 से 500 टन कचरा निकल रहा है। जिसे ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>दो सेक्टर के 21 हजार घरों का हुआ सर्वे</strong><br />घर-घर कचरा संग्रहण के लिए लोगों से शुल्क वसूली की नगर निगम ने तैयारी शुरु कर दी है। कोटा उत्तर निगम ने निजी फर्म के माध्यम से घरों व प्रतिष्ठानों का सर्वे करवाना शुरु कर दिया है। अभी तक कोटा उत्तर के 7 सेक्टर के 70 वार्डों में से दो सेक्टर 2 व 7 का सर्वे हो चुका है। स्टेशन क्षेत्र के 9 और डीसीएम क्षेत्र के 12 वार्डों में सर्वे का काम लगभग पूरा होने वाला है। अब तक स्टेशन क्षेत्र में 6 हजार और डीसीएम क्षेत्र के 15 हजार घरों व दुकानों का सर्वे हो चुका है। </p>
<p><strong>यह जानकारी जुटाई जा रही</strong><br />सर्वे के माध्यम से लोगों से उनके मकान की साइज की जानकारी ली जा रही है। मकान मालिक का नाम और पता व आधार कार्ड की कॉपी ली जा रही है। साथ ही रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर की जानकारी ली जा रही है। जिस पर मैसेज किया जा सकेगा।  </p>
<p><strong>20 रुपए से 150 रुपए प्रतिमाह तक शुल्क</strong><br />नगर निगम कीओर से मकान की साइज के हिसाब से कचरा डालने का शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क 20 रुपए से 150 रुपए महीना होगा।  नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार 50 वर्ग मीटर तक के मकान से 20 रुपए महीना,50 वर्ग मीटर से अधिक व 300 वर्ग मीटर तक के मकान से 80 रुपए महीना, 300 वर्ग मीटर से अधिक के मकान से 150 रुपए महीना शुल्क वसूला जाएगा। </p>
<p><strong>व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से लेंगे 250 से 5 हजार तक</strong><br />मकानों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, हॉस्टल, रेस्टोरेंट तक से 250 से 5 हजार रुपए महीना तक शुल्क वसूला जाएगा। जानकारी के अनुसार  दुकान, ढाबा, मिठाई की दुकान व कॉफी हाउस से 250 रुपए महीना,गेस्ट हाउस से 750 रुपए,सरकारी हॉस्टलों से 500 रुपए,प्राइवेट हॉस्टलों से 1 हजार रुपए महीना,रेस्टोरेंट से 750 रुपए, होटल रेस्टोरेंट से 1 हजार रुपए महीना,होटल रेस्टोरेंट(3 स्टार तक) 1500 रुपए,होटल रेस्टोरेंट(3 स्टार से अधिक) 3 हजार रुपए,सरकारी कार्यालय, बैंक, बीमा,निजी के अलावा कोचिंग क्लासेस व शैक्षणिक संस्थानों से 700 रुपए,निजी शैक्षणिक संस्थान से 1 हजार रुपए, व निजी कोचिंग संस्थान से 5 हजार रुपए महीना तक शुल्क वसूल किया जाएगा। </p>
<p><strong>कोचिंग से लेकर शादी हॉल तक से  होगी वसूली</strong><br />इसी तरह से निजी कोचिंग क्लासेस से 1 हजार रुपए,क्लीनिक 1 हजार रुपए,डिस्पेंसरी, लेबेरेटरीज 50 बैड तक 2 हजार रुपए,क् लीनिक डिस्पेंसरी ुलेबोरेटरीज 50 बैड से अधिक 4 हजार रुपए,, लघु व कुटीर उद्योग वर्कशॉप(केवल गैर खतरनाक और 10 किलो प्रतिदिन अपशिष्ट वालों से 750 रुपए,गोदाम, कोल्ड स्टोरेज से 1500 रुपए,शादी हॉल, उत्सव हॉल व मेला 3 हजार वर्ग मीटर तक से 2 हजार रुपए,शादी व उत्सव हॉल 3 हजार वर्ग मीटर से अधिक वालों से 5 हजार रुपए तक शुल्क वसूल किया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर को साफ रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। केवल नगर निगम के भरोसे शहर को साफ रखना संभव नहीं है। सफाई के मामले में तुलना तो इंदौर से की जाती है लेकिन वहां की तरह के न तो लोग हैं और न ही व्यवस्थाएंÞ। नगर निगम को व्यवस्थाएं करने में संसाधन जुटाने के लिए खर्चा करना पड़ता है। सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता कम की जा रही है। शहर में कचरा लोग ही फेला रहे हैं। शहर को गंदा कर रहे हैं। ऐसे में यदि सुविधा चाहिए तो उसके बदले में शुललक तो देना ही होगा। यह नगर निगम अपनी तरफ से नहीं ले रहा पूर्व में ही सरकार ने तय किया हुआ है। मकान व प्रतिष्ठान की साइज व व्यवस्था के हिसाब से कचरे का शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने सर्वे शुरु कर दिया है। अब तक दो सेक्टरों के 21 वार्डों और करीब करीब 21 हजार घरों का सर्वे हो चुका है। सर्वे का काम शहर के सभी 7 सेक्टर व 70 वार्डों में  किया जाना है। यह काम अगले दो माह में पूरा होने की संभावना है। इसी दौरान निगम की ओर से सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। दीपावली के बाद सुविधाएं पूरी होने पर शुल्क वसूल किया जा सकता है। <br /><strong>-तनुज शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Aug 2024 17:36:17 +0530</pubDate>
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                <title>एक ही समय सुनाई दे रहा गाड़ी वाला आया कचरा निकाल...</title>
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                        <![CDATA[घर-घर कचरा संग्रहण योजना चल तो रही है लेकिन वह एक ही समय काम कर रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/at-the-same-time--it-is-heard-that-the-driver-of-the-car-came-to-take-out-the-garbage/article-49661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(8)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गाड़ी वाला आया कचरा निकाल....। यह गूंज हर व्यक्ति के कानों में पिछले कई सालों से सुनाई दे रही है। पहले यह सुबह-शाम दोनों समय सुनाई देती थी। लेकिन कुछ समय से यह एक ही समय सुबह सुनाई दे रही है। जिससे शाम के समय कई लोग सड़कों पर ही कचरा डाल रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रहण अभियान शुरू किया था। इसके तहत पहले जहां लोग घरों से निकलने वाले कचरे को सड़क पर या नजदीकी कचरा पॉइंट पर डालते थे। उसके स्थान पर लोगों की इस आदत को बदलने के लिए उनके घरों से ही कचरा एकत्र किया जाने लगा। इसके लिए नगर निगम ने टिपर चलाए। ये टिपर निगम के सभी वार्डों में सुबह-शाम जाते थे और हर घर से कचरा एकत्र करते थे। टिपर के आने का लोगों को पता चल सके इसके लिए उसमें एक गाना बजाया गया। टिपर चालक वार्ड में जाते ही उस गाने को बजा देता है। जिससे लोग घरों से बाहर निकलकर डस्टबीन का कचरा उसमें डाल देते हैं। जिससे सड़क पर गंदगी नहीं फेले। इस मकसद से शुरू की गई घर-घर कचरा संग्रहण योजना चल तो रही है लेकिन वह एक ही समय काम कर रही है। जिससे शाम के समय टिपर वार्डो में नहीं जाने पर कई लोग सड़क पर ही कचरा डाल रहे हैं। </p>
<p><strong>यह है समय</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार  घर-घर कचरा संग्रहण के तहत टिपर सुबह 7 से 10 और शाम को 3 से 5 के बीच में वार्डों में कचरा एकत्र करने जाते हैं। नियमानुसार टिपरों के लिए दोनों समय निर्धारित किया हुआ है। लेकिन वर्तमान में नगर निगम कोटा उत्तर हो या दक्षिण अधिकतर जगह पर सिर्फ एक ही समय सुबह टिपर वार्डों में कचरा एकत्र कर रहे हैं। </p>
<p><strong>दक्षिण में दो और उत्तर में हर वार्ड में तीन टिपर</strong><br />कोटा में एक नगर निगम के समय कुल 65 वार्ड थे। परिसीमन के बाद दो नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण बनने पर वार्डों की संख्या ढाई गुना 150 हो गई। जिनमें से कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए।  नगर निगम द्वारा  घर-घर कचरा संग्रहण के लिए संचालित किए जा रहे टिपरों में भी भेदभाव हो रहा है। कोटा उत्तर के सभी 70 वार्डों में तीन-तीन टिपर संचालित हो रहे हैं। वहीं कोटा दक्षिण के सभी 80 वार्ड में मात्र दो-दो टिपर संचालित हो रहे हैं। जबकि कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण में कई वार्ड बड़े हैं।  नगर निगम ने कई जगह पर टिपर संचालन का ठेका दिया हुआ है। जबकि कई जगह पर निगम अपने स्तर पर टिपरों का संचालन कर रहा है। पहले निगम ने टिपर भी ठेके पर लिए हुए थे। जबकि वर्तमान में अधिकतर टिपर निगम ने खरीदे हैं। पहले जहां टिपर खुले हुए व छोटे थे। वहीं नए टिपर बड़े और ढके हुए हैं। </p>
<p><strong>गीला-सूखा कचरा एक साथ</strong><br />नए टिपरों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डालने की सुविधा है। लेकिन इतने साल बाद भी अभी तक दोनों तरह का कचरा टिपरों में एक साथ ही डाला जा रहा है। इसके लिए घरों में भी दो डस्टबीन नहीं रखे जा रहे हैं।  </p>
<p><strong>एक समय में सभी नहीं डाल पाते कचरा</strong><br />कंसुआ निवासी सोनू सेन का कहना है कि टिपर पहले दोनों समय आते थे। अभी काफी सय से सिर्फ सुबह के समय ही आ रहे हैं। जिससे कई लोग शाम के समय निकलने वाले  कचरे को सड़क पर डाल रहे हैं। सुबह जिस समय टिपर आते हैं उस समय सभी घरों के लोग कचरा नहीं’ डाल पाते। कुछ लोग शाम को डालते हैं। थेगड़ा निवासी अरुण सिंह का कहना है कि टिपरों को दोनों समय वार्ड में आना चाहिए। शाम को नहीं आने से कुछ लोग सड़क पर कचरा डाल रहे हैं। यदि टिपर शाम को भी आएंगे तो थोड़ा कचरा भी सड़क पर नहीं डलेगा। बसंत विहार निवासी निहारिका गौतम का कहना है कि सुबह जिस समय टिपर आया है उस समय घर पर काम अधिक रहता है। जिससे कचरा नहीं डाल पाते। शाम को टिपर नहीं आता तो कचरा इकट्ठा होने पर पास के कचरा पॉइंट पर डालना मजबूरी हो जाती है। अगले दिन तक कचरा रखने पर दुर्गंध आने लगती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्डों में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए टिपरों को दोनों समय ही जाने का नियम है। <br />अधिकतर वार्डों में दोनों समय जा भी रहे हैं। कई वार्ड बड़े होने से हो सकता है समय अधिक लगने से एक ही बार में कचरा एकत्र हो रहा हो। इसकी जानकारी करवाई जाएगी। वैसे नए टेंडर में हर वार्ड में तीन-तीन टिपर संचालन की योजना है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>कोटा उत्तर निगम क्षेत्र के हर वार्ड में दोनों समय टिपर जा रहे हैं। किसी वार्ड में समय अधिक लगने पर एक ही समय जा सकते हैं। उन वार्डों से शिकायत आने पर टिपर भेजे जाते हैं। बुधवार को भाजपा पार्षद नंद किशोर मेवाड़ा की शिकायत पर कि एक ही समय टिपर आ रहा है तो दूसरे टिपर को भजा गया था। जिस वार्ड में शाम को नहीं जा रहे होंगे। वहां की जानकारी कर भिजवाए जाएंगे। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>नियम तो सुबह-शाम दोनों समय ही टिपरों को वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने का है। लेकिन अधिकतर घरों में सुबह के समय ही सफाई होती है। कचरा भी उसी समय में निकलता है। इस कारण से कई वार्डो में हो सकता है टिपर एक ही समय जा रहे होंगे। जिन वार्डो में शाम को टिपर नहीं जा रहे हैं तो वहां के लोगों को जागरूक होकर अगले दिन  ही कचरा टिपर में डालना चाहिए। न कि सड़क पर कचरा डालना चाहिए। इंदौर शहर  से बराबरी करने है तो लोगों को भी जागरुक होना पड़ेगा। <br /><strong>- पवन मीणा, अध्यक्ष, सफाई समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 14:38:11 +0530</pubDate>
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                <title>निगम की जमीन पर निजी टिपरों का अतिक्रमण</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम की सरकारी जमीन पर निगम संवेदक के पुराने टिपर पिछले कई सालों से खड़े हुए हैं। लेकिन निगम अधिकारियों को उसकी परवाह तक नहीं है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/encroachment-of-private-tippers-on-corporation-land/article-11212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tipper.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की सरकारी जमीन पर निगम संवेदक के पुराने टिपर पिछले कई सालों से खड़े हुए हैं। लेकिन निगम अधिकारियों को उसकी परवाह तक नहीं है।  सीएडी रोड स्थित अम्बेडकर भवन के पीछे खाली जगह पर पिछले कई सालों से पुराने टिपर खड़े हुए हैं। वे भी एक दो नहीं करीब दो दर्जन टिपर  है। वे टिपर न तो काम में आ रहे हैं और न ही नगर निगम के हैं। वे जिस स्थिति में खड़े हुए थे उसी में अभी भी खड़े हुए हैं। <br /><br />जानकारी करने पर पता चला कि वे टिपर निजी संवेदक के हैं। लोकेश कुमार नाम के व्यक्ति का पूर्व में घर-घर कचरा संग्रहण में निगम में ठेका  था। लेकिन नगर निगम द्वारा स्वयं के टिपर क्रय करने के बाद संवेदक का ठेका खत्म हो गया। ठेके के समय भी वे टिपर यहीं खड़े हो रहे थे और ठेका खत्म होने के बाद भी वे टिपर वहीं खडें हुए हैं। सरकारी जमीन पर निजी वाहनों  के जरिय अतिक्रमण किया हुआ है। लेकिन नगर निगम के अधिकारी उन्हें न तो हटवा सके और न ही जगह को खाली करवा सके। उन टिपरों को देखकर वहां एक के बाद एक कई लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। <br /><br /><strong>दो साल पहले हुआ ठेका खत्म</strong><br />लोकेश कुमार ने बताया कि  नगर निगम द्वारा वर्ष 2018 में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की गई थी। उस समय उन्होंने 50 टिपर क्रय किए थे। जिन्हें ठेके पर निगम में लगाया था। लेकिन वर्ष 2020 में निगम ने स्वय के टिपर क्रय कर लिए। उसके बाद उनका ठेका समाप्त हो गया। उन्होंने 50 में से 26 टिपर तो बेच दिए। जबकि 24 टिपर हैं जो अभी भी अम्बेडकर भवन के पीछे ही ख़ड़े हुए हैं।  लोकेश ने बताया कि उनके पास जगह नहीं है और निगम अधिकािरयों ने कोई आपत्ती नहीं की इस कारण से उनके टिपर वहीं खड़े हुए हैं। <br /><br />अम्बेडकर भवन की जमीन पर निजी टिपर खड़े होने की जानकारी नहीं है। उसका पता करवाकर उन्हें हटवाया जाएगा। <br /><strong>-राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 15:46:05 +0530</pubDate>
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