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                <title>Dainik Navajyoti - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विकसित भारत की कल्पना शिक्षा में एआई एजेंट के बिना अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा  व्यवस्था में संपूर्ण बदलाव ला सकता है एआई एजेंट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-vision-of-a-developed-india-remains-incomplete-without-ai-agents-in-education/article-163577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(7)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति की मासिक परिचर्चा की श्रंखला के तहत शुक्रवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में टॉक शो का आयोजन किया गया। इस टॉक का विषय (केन एआई एजेन्ट ट्रांसफोर्म एजुकेशन सिस्टम) क्या एआई एजेन्ट शिक्षा व्यवस्था में बदलाव ला सकता है विषय रखा गया था। परिचर्चा में राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कोटा यूनिवर्सिटी,शिक्षा विभाग के अधिकारी, एआई ट्रेनर,ई-लाइब्रेरी अध्यक्ष,टीचर, स्टूडेंट के साथ ही पैरेन्टस ने भी हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा तब परिवर्तनकारी बनती है जब वह पूरे व्यक्तित्व का विकास करती है। सस्टेनेबल लर्निंग,जो जीवनभर काम आए। , जो सतत विकास दे। एआई एजेन्ट तकनीक, पहली बार, हमें इस अवधारणा को बड़े पैमाने पर लागू करने की अनुमति देती है। एआई हर बच्चे को एक व्यक्तिगत ट्यूटर प्रदान कर सकता है जो उनकी मातृभाषा बोलता है, उनकी सीखने की गति के अनुसार ढलता है और व्यक्तिगत तरीकों से विचारों को प्रस्तुत करता है। यह समझ में कमी को पहचान सकता है और सभी भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लोकतंत्रीकरण कर सकता है। लेकिन यह भी याद रखना होगा कि एआई मशीनी है। उसकी सीमाएं हैं जिसे हमें पहचानना जरूरी है। प्रस्तुत है परिचर्चा के अंश:-</p>
<p><strong>सस्टेनेबल लर्निंग में एआई एजेंट की मुख्य भूमिका</strong><br />सस्टेनेबल लर्निंग में एआई एजेंट की मुख्य भूमिका है। एआई एजेन्ट विद्यार्थियों की सीखने की गति, रुचि और कमजोर विषयों का विश्लेषण करके उनके लिए व्यक्तिगत अध्ययन योजना बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी विद्यार्थी को कठिनाई होती है, तो एआई उसे सरल भाषा में समझा सकता है, अतिरिक्त अभ्यास दे सकता है और उसकी गलतियों के आधार पर दोबारा पढ़ा सकता है। आज बड़े कोचिंग एआई एजेन्ट के माध्यम से ही काम कर रहे हैं। शिक्षकों के लिए भी एआई एजेंट उपयोगी हो सकते हैं। वे प्रश्नपत्र तैयार करने, उत्तरों का प्रारंभिक मूल्यांकन करने, विद्यार्थियों की प्रगति का विश्लेषण करने और शिक्षण सामग्री तैयार करने में सहायता कर सकते हैं। इससे शिक्षकों का प्रशासनिक काम कम होगा और वे विद्यार्थियों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। <br /><strong>-प्रो. रीना दाधीच, एचओडी कम्प्यूटर साइंस डिपा. कोटा विश्वविद्यालय </strong></p>
<p><strong>प्राइमरी के बाद हो एआई एजेन्ट का उपयोग</strong><br />एआई एजेन्ट का उपयोग जिस तेजी से हो रहा है उससे शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं है। एआई एजेंट जानकारी व डेटा का खजाना है। इसका उपयोग किया ही जाना चाहिए। समय के साथ चलना जरूरी है। लेकिन मेरा मानना है कि  इसका उपयोग बच्चों को प्राइमरी के बाद ही कराना चाहिए। इसके अच्छे बुरे दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक पहलू को अपनाया जाए तो इससे लाभ होगा। जबकि इसका दुरूपयोग करने पर बच्चों में निराशा बढ़ रही है। एआई व एआई एजेंट अच्छे हैं लेकिन इनका उपयोग सीमित दायरे में ही होना चाहिए। <br /><strong>-संदीप अग्रवाल डायरेक्टर स्प्रिंगडेल्स ग्रुप आॅफ स्कूल्स </strong></p>
<p><strong>शिक्षा की व्यवस्था में बदलाव आएगा</strong><br />नेचुरल इंटेलीजेंसी को कोई सानी नहीं। जीवन के लिए यह सबसे जरूरी है।  शिक्षा की व्यवस्था में बदलाव आएगा। तकनीक का समावश शिक्षा में जरूरी है।  एआई एजेन्ट शिक्षा में बदलाव का बड़ा सहायक हो सकता है। लेकिन नेचुरल इंटेलिजेंसी भी जरूरी है। वह तभी आ सकती है जब बच्चे का थोट प्रोसेस ,लर्निंग प्रोसेस सही होगा। एआई एजेन्ट हर बच्चे को अलग सहायक दे सकता है लेकिन उसमें तर्क की क्षमता,धैर्य,और साहस कैसे देगा। आज बच्चे धैर्य नहीं रखते। सब कुछ फटाफट चाहिए। एआई एजेन्ट बच्चों को एक सांचे में सिखा सकता है। लेकिन हर एक की कैपेबिलिटी ,एडाप्शन पॉवर अलग होती है। लेकिन इस पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहा जा सकता। नेचुरल इंटेलीजेंसी का कोई सानी नहीं है।  <br /><strong>-डॉ. पूनम जायसवाल आचार्य जेडीबी कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>एआई एजेन्ट तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रहा </strong><br />आज के डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)एजेन्ट तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में एआई ाएजेंट एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं।  एजेंट ऐसे बुद्धिमान सिस्टम हैं जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से सीखने में सहायता कर सकते हैं। एआई एजेन्ट शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं वकालत, डॉक्टर, इंजीनियर सभी पैशे में काम कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में इवेल्यूशन करते हुए एआई एजेन्ट हर किसी की क्षमता के अनुरूप उसे सही निर्णय लेने में मदद करता है। एआई एजेन्ट ऐसा प्रोग्राम होता है जिसमें उस पैशे का सब कुछ समाहित होता है।  इसका उपयोग यूनिवर्सिटीज में ही नहीं प्रत्येक स्तर पर सहायक हो सकता है।  एआई एजेन्ट के  उपयोग को नकारा नहीं जा सकता। आज के बच्चे जैन बीटा हैं। वे एआई एजेंट के उपयोग से जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जबकि शिक्षा व्यवस्था अभी भी पुराने ढर्रे पर अटकी हुई है। एआई एजेंट को स्वीकार करते हुए शिक्षा पद्यति में बदलाव करना होगा। <br /><strong>-मनीष चतुर्वेदी प्रो.राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा </strong></p>
<p><strong>एआई एजेंट</strong><br />-व्यक्तिगत शिक्षा <br />- विद्यार्थी किसी भी समय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।<br />-तेज प्रतिक्रिया,  नियमित कार्यों में मदद कर सकते हैं।<br />- सीखने को अधिक रोचक बना सकता है।<br />-बेहतर पहुँच,विद्यार्थियों की मदद कर सकता है।<br />- भाषा सीखने में सहायता,अभ्यास करने में मदद कर सकते हैं।<br />- विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर, मजबूत क्षेत्रों की पहचान कर सकता है।</p>
<p><strong>टेक्नोलॉजी के साथ चलना ही होगा</strong><br />आज के समय में अब कंटेंट और प्रॉब्लम सॉल्विंग का तो इशू ही नहीं है। एआई एजेन्ट के द्वारा विद्यार्थियों को समस्या का समाधान तुरंत मिलता है। जिसके चलते विद्यार्थी और टीचर के माध्यम संवाद लगातार खत्म हो रहा हैं। जितने भी टूल्स आ रहे हैं, टेक्निकल्स आ रहे हैं। अगर आपको आगे जीना है तो आज के समय में टेक्नोलॉजी के साथ चलना होगा। कोई जरूरी नहीं कि जो स्किल आपने परसों सीखी थी वो आज काम आएगी, वो बिल्कुल पॉसिबल नहीं है। आप सोचिए अगर स्कूल का टीचर ना भी पढ़ा पाए, तो घर के पेरेंट्स इतने क्वालिफाइड हों या आप उतने अच्छे यूजर हों कि वो उसको पढ़ा पाएं।  लेकिन मानिए  जब कोई मरीज किसी हॉस्पिटल में जाता है वहां पर डॉक्टर उसको बोल देता है कि तुम जल्दी ठीक हो जाओंगे तो मरीज सच में खुश हो जाता है। ये काम एआई एजेंट नहीं कर सकता हैं।<br /><strong>-डॉ़ दीपक कुमार श्रीवास्तव, संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष , राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय कोटा </strong></p>
<p><strong>कॉन्सेप्ट बदलाव के लिए जरूरी</strong><br />एआई एजेंट कॉन्सेप्ट समय के साथ बदलाव के लिए जरूरी है। शिक्षा विभाग इस पर लगातार काम कर रहा यह बहुत अच्छा है। सरकार भी इसके उपयोग पर जोर दे रही है। युवा पीढ़ी इसके लिए तैयार है और उपयोग भी कर रही है। हालांकि सरकारी स्कूलों में कई शिक्षक काफी पुराने हैं। वे अनुभवी तो हैं लेकिन इस बदलाव के लिए अभी न तो शिक्षक तैयार हैं और न ही स्कूल। कुछ समय जरूर लगेगा । शिक्षकों को प्रशिक्षण के माध्यम से तैयार किया जा रहा है। एआई शिक्षकों का सशक्त साथी बन सकता हैै। इसके उपयोग से शिक्षा जगत में कई परिवर्तन हो रहे हैं। एआई एजेंट के उपयोग से हर चीज तक पहुंच आसान हो गई है।<br /><strong> -आशा मंडावत संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग </strong></p>
<p><strong>टीचर का कोई रिप्लेसमेंट नहीं </strong><br />स्टूडेंट को मानवीय संवेदना से परिपूर्ण बनाना है तो टीचर का कोई रिप्लेसमेंट नहीं है। में छात्रा होने के नाते यहीं कहना चाहूंगी की एआई एजेन्ट  केवल आइडिया दे सकता है।  फिर भी हमे टीचर की जरूरत पड़ती हैं। एआई विद्यार्थियों के दिमाग को कमजोर भी कर रहा हैं। साथ ही उनकी रचनात्मकता को भी खत्म कर रहा हैं। कई बार एआई गलत आंसर भी देता है जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता हैं, जो सोचने समझने की क्षमता इंसान में होती है वह एआई एजेन्ट में नहीं होती हैं।<br /><strong> -चित्रांशी कंवर गौड़, छात्रा , राजकीय महाविघालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>एआई एजेन्ट गाइड नहीं कर सकता </strong><br />एआई का पढ़ाई में उपयोग करने से सिलेबस तो आसानी से समझा जा सकता हैं। पर साथ ही कई बार इसमें जल्दी के कारण सही ढ़ग से प्रश्न नहीं पूछ पाते है । वहां विद्यार्थियों को गलत उतर भी मिलता है। यह यूं भी कह सकते हैं कि प्रोम्प्ट सही तरीके से नहीं दिया तो जवाब भी वैसा ही मिल सकता है।  इसका उपयोग उतना ही करना चाहिए जितना जरूरी हो। टीचर हमें गाइड करते हैं पर एआई एजेन्ट गाइड नहीं कर सकता हैं। एआई का उपयोग से लाभ के साथ-साथ हानि भी हैं। इस का भी ध्यान रखना चाहिए।<br /><strong> - खुशी, (जेन जी छात्रा), प्लेयर महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी</strong></p>
<p><strong>क्लास लर्निंग तो जरूरी ही है</strong><br />एआई हमें सीखा सकता हैं पर वहां टीचर की तरह हमसे संवाद नहीं कर सकता हैं। जो फीड है वही वह एआई एजेन्ट कहता है। एआई हमारे द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब दे सकता हैं पर उन प्रश्नों को भी सही तरीके से पूछा गया है,वरना कई बार एआई गलत आंसर भी देता है। इस का भी ध्यान हमें रखना होगा। जिस प्रकार से टीचर विद्याथियों को समझाता है वह एआई में देखने को नहीं मिलता हैं। क्लास लर्निंग तो जरूरी ही है। <br /><strong>-अक्षी पंचोली, छात्रा</strong></p>
<p><strong>कठिन चीजों को सरल बना रहा है</strong><br />एआई एजेंट का शिक्षा के क्षेत्र में अधिक उपयोग हो रहा है। युवा पीढ़ी इसका अधिक उपयोग कर रही है। इसके माध्यम से हर चीज तैयार मिल रही है। फिर रचनात्मकता का क्या।  कठिन चीजों को सरल बना रहा है। सूचनाओं का खजाना है एआई एजेन्ट। लेकिन इसका उपयोग सीमित होना चाहिए। एआई एजेन्ट मानवीय मूल्य नहीं दे सकता है। एआई का अधिक उपयोग होने से मानवता समाप्त हो रही है। कोई भी घटना होने पर लोग वीडियो बनाने लगते हैं लेकिन मदद को हाथ नहीं बढ़ाते। ऐसा भी नहीं होना चाहिए।  <br /><strong>-शोभा घाटिया, अध्यापिका राउप्रावि.वक्फ नगर </strong></p>
<p><strong>शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं </strong><br /> शिक्षा के क्षेत्र में इसका उपयोग कर शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उनहें छात्रों का उत्साह बनाए रखने और तार्किक क्षमता विकसित करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। जिससे शिक्षकों की स्किल बढ़ सके। उन्हें स्वयं को जानकारी होगी तो वे बच्चों को शिक्षित कर सकेंगे। एआई एजेंट व्यक्ति के सोचने का दायरा बढ़ा रहा है। हालांकि एआई एजेन्ट मशीन है। इसकी अपनी सीमाएं हैं। इसमें जिस तरह का कमांड देंगे यह उसी तरह की सूचना व जानकारी उपलब्ध करवाएगा। <br /><strong>-मिनी गुप्ता सीनियर प्रोग्राम लीडर पीरामल फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>एआई एजेंट शिक्षा जगत में नई क्रांति ला सकता</strong><br />एआई एजेंट शिक्षा जगत में नई क्रांति ला सकता है। बात इसके उपयोग और मानसिकता की है। हमें सूचनाएं व जानकारी तो मिल रही है। लर्निंग प्रोसेस को यह ईजी करता है।  लेकिन लोगों की सोचने की शक्ति कमजोर हो रही है। बच्चों को एआई एजेंट का कितना और कहां उपयोग करना चाहिए। बच्चों की इस क्षमता को पहचानने में शिक्षकों की भूमिका अहम भूमिका  है। एआई एजेंट के सही उपयोग के बारे में बताने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की है।<br /><strong> -वैशाली भार्गव, सॉफ्ट स्किल्स ट्रैनर, रोटरी क्लब कोटा </strong></p>
<p><strong>एआई एजेन्ट समय की जरूरत </strong><br />परिवर्तन प्रकृति का नियम है। एआई एजेन्ट का उपयोग आज की आवश्यकता है। इसके माध्यम से हर समस्या का समाधान मिल रहा है। इसका रचनात्मक उपयोग करना व्यक्ति पर निर्भर करता है। इसके उपयोग से लोगों का काम तो आसान हो रहा है लेकिन इसके उपयोग में दिमाग का इस्तेमाल करना होगा। एआई ज्ञान का खजाना है और नई सोच को विकसित कर रहा है। नई सोच ला रहा है। आने वाली पीढीÞ के लिए यह जरूरी है। यह पीढ़ी हमसे बुहत आगे है। लेकिन इसकी लिमिट पर भी फोकस की जरूरत है। <br /><strong>-नरेन्द्र जैन, एओडी कम्प्यूटर डिपा. गवर्नमेंट पालीटेक्निक कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>ज्ञान का खजाना है एआई एजेंट</strong><br />एआई एजेंट ज्ञान का खजाना है। इसका उपयोग कर बच्चे तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। हालत यह है कि युवाओं व बच्चों को इसकी लत लग चुकी है। एआई एजेंट का उपयोग करने से बच्चों को ज्ञान व जानकारी तो मिल रही है लेकिन यह व्यवहारिक ज्ञान नहीं देता। इसका अधिक उपयोग करने वाले बच्चों के नेचुरल ज्ञान पर फर्क पड़ रहा है। बच्चों की सोचने की क्षमता खत्म होती जा रही है। ऐसे में एआई एजेंट का उपयोग तो हो लेकिन सीमित तरीके से।<br /><strong> -दीप्ति राजावत, पैरेन्ट्स एवं प्रेसिडंट रोटरी क्लब पदमिनी</strong></p>
<p><strong>  शिक्षा व्यवस्था  बदल देगा</strong><br />हां एआई एजेन्ट शिक्षा की व्यवस्था को बदल सकता है। बदलाव की जरूरत भी है। लेकिन  जितनी जरूरत  है उतना ही करना चाहिए । इस पर ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं। जो एवेलेबल नहीं है उसके लिए एजेन्ट का सहारा लेना चाहिए।   एआई एजेन्ट एक गुरू  की तरह गाइड़ नहीं कर सकता हैं। देखा जाएं तो एआई की वजह से बच्चों का काँफिडेंस लेवल भी कमजोर हो रहा हैं। जब तक बच्चा टीचर से संवाद नहीं करता , तब तक बच्चे को समझने में कुछ नहीं आता हैं।<br /><strong> -आरती गुर्जर, विद्यार्थी कोटा विवि</strong></p>
<p><strong> शिक्षण व्यवस्था की  शक्ति </strong><br />तेजी से बदलते समय में जहां तकनीक का उपयोग तेजी से हो रहा है  ऐसे में एआई एजेंट शिक्षण व्यवस्था की मुख्य शक्ति बन सकता है। परिपूर्ण शिक्षा के लिए एआई एजेन्ट बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि  यह शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकता लेकिन शिक्षक की शक्ति जरूर है। एआई एजेंट का उपयोग कर कई तरह से प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं। इसका उपयोग जानकारी जुटाने में व सही उपयोग में लिया जा सकता है। <br /><strong> -दिनेश कुमार कसेरा, व्याख्याता राउमावि पीपल्दाकला कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:02:51 +0530</pubDate>
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                <title>जब-जब कागज पर लिखा मैंने मां का नाम, कलम अदब से बोल उठी हो गए चारों धाम </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने मदर्स डे को खास बनाने के लिए विशेष टॉक शो आयोजित किया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/whenever-i-penned-my-mother-s-name-upon-paper--my-pen-spoke-with-reverence--%22all-four-holy-pilgrimages-have-been-fulfilled/article-153373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लफ़्ज कम पड़ जाते हैं माँ की शान में,<br />वो खामोशी से पूरी किताब लिख देती है।<br />रविवार 10 मई को दुनिया भर में मदर्स डे मनाया जाएगा। यह दिन उस अनमोल रिश्ते को समर्पित है, जिसके बिना जीवन की कल्पना अधूरी है—मां। मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन की पहली गुरु, संस्कारों की आधारशिला और संघर्षों में सबसे मजबूत सहारा होती है।  दैनिक नवज्योति की ओर से इस दिन को स्पेशल बनाने के लिए मदर्स डे स्पेशल  टॉक शो का आयोजन किया गया। । नई पीढ़ी की माताएं और बदलती पालन पौषण शैली, आधुनिक मां बच्चों की परवरिश पहले से अलग तरीके से कैसे कर रही है विषयक   इस टॉक शो में  गृहिणी से लेकर डाक्टर, इंजीनियर,एन्ट्रप्रैन्योर, बुक राइटर, शिक्षक,वकील, बिजनसवुमन, एस्ट्रोलोजर, अधिकारी, कर्मचारी अर्थात  हर फील्ड से जुडी  मदर्स को आमंत्रित किया गया। इस टॉक शो में महिलाओं ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जिसे वह स्वयं महसूस कर रही हैं। तकनीक के इस युग में घर गृहस्थी  व नौकरी और व्यवसाय के साथ ही अपने बच्चों को शिक्षा व संस्कार देने का काम एक मां किस तरह से कर रही है। सबके साथ संतुलन बनाते हुए हाईटेक पेरेंटिंग के बारे में मदर्स ने बताया कि वे किस तरह से अपने बच्चों की परवरिश कर रही हैं। जिसमें वे बच्चों के साथ भी समय बिता पा रही हैं और अपना काम भी कर रही हैं। प्रस्तुत हैं टॉक शो के कुछ अंश ।</p>
<p><strong>कंट्रोलिंग नहीं कनेक्टिव पेरेंटिंग हो</strong><br />बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी वैसे तो माता पिता दोनों की होती है। लेकिन बच्चे का सबसे अधिक जुड़ाव मां से होता है। बच्चों पर निगाह रखना व उनसे सम्पर्क बनाए रखना जरूरी है।  कंट्रोलिंग से अधिक उनसे कनेक्टिव पेरेंटिंग की जाए तो बच्चा सही ढंग से ग्रोथ कर पाता है।  जितना अधिक समय दिया जाएगा बच्चों को उतना ही अधिक समझा जा सकेगा और बच्चे भी अपनी मां को उतने ही बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। पिता से अधिक समय मां बच्चों के साथ रहती है। इस कारण से मां की जिम्मेदारी बच्चों के प्रति बढ़ जाती है। पिता भी किसी न किसी रूप में बच्चों के साथ अपना उतना ही जुड़ाव रखेंगे तो बच्चा पारिवारिक रूप से भी स्ट्रांग होगा। <br /><strong>-कीर्ति भाटी,गृिहणी (इंजी)</strong></p>
<p><strong>मां को देखकर ही सीखते हैं बच्चे</strong><br />बच्चों का वैसे तो अधिकतर समय अपनी मां के साथ ही बीतता है। इस काण वे उन्हें देखकर ही सीखते हैं। मां जिस तरह का व्यवहार घर परिवार व बच्चों के साथ करती है। बच्चे भी वैसा ही व्यवहार  करते हैं। कामकाजी महिलाएं घर के साथ काम में व्यस्त रहती हैं तो बच्चे उनके काम को भी समझने लगते हैं। बच्चे पहले से अधिक एडवांस हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को अंडर एस्टीमेट नहीं किया जा सकता। उन्हें भावनात्मक सहयोग बनाए रखना जरूरी है। <br /><strong>-ऋचा गौतम, सहायक अभियंता व स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम कोटा </strong></p>
<p><strong>काम के साथ बच्चे भी महत्वपूर्ण </strong><br />घर पर रहकर तो महिलाएं बच्चों की देखभाल करती ही हैं। लेकिन कामकाजी महिलाओं को अपना काम करने के साथ ही बच्चों की भी देखभाल करनी होती है। एक मां के लिए काम के साथ उनके बच्चे भी महत्वपूर्ण हैं। बच्चों को यदि मां समय नहीं देगी तो वे उनसे दूर हो सकते हैं। ऐसे में मां के लिए बच्चों से जुड़ाव विशेष रूप से इमोशनल जुड़ाव अधिक होगा तो बच्चे का विकास सही ढंग से हो सकेगा। <br /><strong>-मीनाक्षी गुप्ता,ब्यूटीशियन </strong></p>
<p><strong>बच्चों को शुरूआत से ही समझना होगा</strong><br />बच्चों को शुरूआत से ही समझना और समझाना होगा। कॉलेज व विवि में आने के बाद उन्हें समझाना उतना आसान नहीं है। मां का बच्चे से जुड़ाव होगा तो वह उनकी हर बात मां से शेयर कर सकेंगे। वरना हालत यह है कि बच्चे मांता पिता से अधिक शिक्षकों से अपनी बात शेयर करते हैं। बच्चा मां के बाद अपनी टीचर से अधिक सीखता है। ऐसे में आवश्यकता है कि बच्चों को माता पिता अधिक समय दें। उनकी बात को सुने और समझे। उनसे भावनात्मक जुड़ाव रखें। मां जिस तरह का व्यवहार बच्चों से करती हैं बच्चा वही सीखता है।  <br /><strong>-प्रो. अनुकृति शर्मा,कोटा यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p><strong>बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें</strong><br />बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें, में घर पर तो बच्चों को संभालती हूं। साथ ही मे शहर स्थित नारी निकेतन की अधीक्षक होने के नाते वहां पर  आने वाले बच्चों को भी संभालती हूं। साथ ही घर के काम भी करती हूं। कई बार घर पर आने के बाद बच्चे बोलते है कि मम्मी आप तो हमारे तरफ ध्यान नहीं देती हूं। वहां पर आॅफिस के बच्चों से ज्यादा प्यार करती हूं।  कई बार मेरा बड़ा बेटा किताबे पढ़ता है तो मेरा मानना है कि छोटा भी उसको देखकर पढ़ाने लगाता हैं। वहीं बच्चों के साथ इमोशनल टच होना चाहिए।  बच्चों के साथ क्वालिटी समय बिताये और उनको समझे। <br /><strong>-अंशुल मेहंदी रत्ता, अधीक्षक नारी निकेतन कोटा</strong></p>
<p><strong>मां ही बच्चे की पहली गुरु</strong><br />एक बच्चे के लिए उसकी मां ही पहली गुरु होती है। बच्चा सबसे पहले मां के सम्पर्क में आता है।  बच्चे को भावनात्मक रूप से बचपन से ही समझना होगा। माता पिता जितना अधिक समय बच्चों के साथ बिताएंगे बच्चों का उनसे उतना ही अधिक गहरा जुड़ाव होगा। बच्चों को अंडर एस्टीमेट नहीं करना चाहिए कि वे कुछ नहीं समझते हैं।ौ आज के बच्चे सब कुछ समझते हैं। बस जरूरत बच्चों को समझने की है। उनसे किसी ने किसी रूप में जुड़ाव बना रहना चाहिए।  <br /><strong>-डॉ. स्मृति भटनागर,साफ्ट स्किल ट्रेनर </strong></p>
<p><strong>बच्चों की मित्रवत बनकर रहे मां</strong><br />मां वो शक्स है जिसमें बच्चे का पूरा संसार बसता है। ऐसे में आवश्यक है कि माता पिता विशेष रूप से मां को अपने बच्चों की मित्रवत बनकर रहना होगा। साथ ही एक सीमित दायरा भी रखना होगा। बच्चों की बात को सुनना और समझना तो है ही उनसे जुड़ाव भी रखना है। पहले की तुलना में वर्तमान में एकल परिवारों में मां अपने बच्चों को अधिक समय दे पाती है। बच्चों का अपने माता पिता से जितना अधिक सम्पर्क रहेगा बच्चे उतना ही तनाव मुक्त रहेंगे। इसका कारण वे अपनी हर बात उनसे शेयर कर सकेंगे। <br /><strong>-डॉ. सारिका अंकित सारस्वत, सेबी स्मार्ट ट्रेनर एन्ड ट्रेडर</strong></p>
<p><strong>मां ने ही सिखाया मां का महत्व</strong><br />जीवन में आज जो कुछ भी पाया है वह सब मां की वजह से है। मां ने ही जिस तरह के संस्कार व शिक्षा दी उसी का परिणाम है कि शादी के बाद जब मां बनी तो उसका महत्व समझ आया।  बच्चे भगवान को तो साक्षात रूप में नहीं देख पाते लेकिन उनके लिए मां ही भगवान के रूप में सामने रहती है। बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए मां का उसके पास होना बहुत जरूरी है।   <br /><strong>-बरखा जोशी, अंतरराष्ट्रीय कथक नत्यांगना </strong></p>
<p><strong>बच्चों को हैल्दी वातावरण की जरूरत</strong><br />हर बच्चा एक जैसा नहीं हो सकता। बच्चों की एक दूसरे से तुलना भी नहीं करनी चाहिए। बच्चों की भावनाओं को समझते हुए वे जो करना चाहते हैं उन्हें करने देना चाहिए। बच्चों को हतोत्साहित नहीं प्रोत्साहित करना होगा। बच्चों को हैल्दी वातावरण देने की जरूरत है।  बच्चा घर में बात करेगा तो उसे अपनी बात कहने के लिए बाहर नहीं जाना होगा। बच्चा अपने माता पिता को देखकर  सीखता है। विशेष रूप से मां का अपने बच्चे व परिवार में व्यवहार अच्छा होगा।        <br /><strong>  - डॉ. सोमा शर्मा ,एमडी रेडियोलॉजिस्ट</strong></p>
<p><strong>बच्चे को मां से बेहतर कोई नहीं समझता</strong><br /> बच्चे को मां से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। बच्चा मां की इच्छा से ही संसार में आता है। इसलिए बच्चा मां की जिम्मेदारी अधिक होता है।  मां जैसी केयर करती है बच्चा वैसा ही बनता है।  मां का उससे अटेचमेंट होना काफी महत्व रखता है। बच्चे को वही सब सिखाना है जो उसके भविष्य में काम आएगा। बच्चे को कभी भथी निराश नहीं होने देना है। पिता से ज्यादा समय मां बच्चे के साथ रहती है। ऐसे में मां ही बच्चे को बेहतर पेरेंटिंग दे सकती है। <br /><strong>- संजना खंडेलवाल ,आईटी प्रेफेशनल  व आॅथर</strong></p>
<p><strong>पढ़ाई  के साथ-साथ सोशल एक्टिविटि में भी शामिल करें</strong><br />मैं पिछले कई सालों से कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट का संचालन करती हूं।  आप जो कर रहे हैं वैसा ही बच्चा करेगा। यदि आप रील देख रहे हैं तो वह रील देखना शुरू कर देगा। आज यह कहना कि एआई के वक्त में बच्चे का स्क्रीन टाइम कैसे कम करें तो मैं कहूंगी कि आप उसके सामने अच्छे गजटस देखिए उसका फायदा बच्चे को भी मिलेगा।  हम बच्चें को पढ़ाई  के साथ-साथ सोशल एक्टिविटि में भी शामिल करें। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा फैमिली से अटैच करें।  <br /><strong>- विभा शर्मा ,डायरेक्टर सीएसटी इंस्टीट्यूट कोटा</strong></p>
<p><strong>हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग नहीं,मन से जुड़ें </strong><br />में पेशे से सीए हूं। सौभाग्यशाली मानती हूं कि बेटे की वजह से में दुबारा मदर बनी यानी की दादी बनी हूं।  आजकल की तकनीक को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।  वहीं माता पिता को भी स्मार्ट बना चाहिए। शुरूआत से ही बच्चे को  सोशल लाइफ में शामिल करे। मेरा मानना है कि अपनी जॉब मत छोड़ो अपना कंट्रोल  बच्चे पर रखों। चाहे मेरा कितना ही बड़ा क्लाइंट कॉल करे यदि उस समय पर बच्चों का कॉल आ जाता है तो मैं तो बच्चों को कॉल पहले  अटैेंट करती हूं। <br /><strong>- निमीषा मेघवानी ,चार्टड एकाउन्टेन्ट</strong></p>
<p><strong>जॉब को छोड़ा, बच्चों की परवरिश पर ध्यान</strong><br />मेरे दो बेटियां है जिनकी परवरिश में कर रही हूं।  हमारे दिन की शुरूआत सुबह पूजा से होती हैं। मेरा मानना है कि भगवान की स्तुति करने से हर समस्या का समाधान मिल जाता हैं।  मैंने एमबीए किया उसके बाद प्राइवेट नौकरी की। उसके बाद शादी हो गई जिसके चलते जॉब को छोड़ा  और बच्चों की परवरिश पर ध्यान दिया। उसके बाद फिर दुबारा मैंने सरकारी नौकरी की तैयारी जिसके बाद मेरा सलेक्शन हुआ आज भी मैं अपनी बेटियों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताती हूं।   <br /><strong>- प्रगति शर्मा ,असिस्टेंट एकाउंट आॅफिसर</strong></p>
<p><strong>नकारात्मक गपशप से बचें</strong><br />मेडिकल फील्ड़ से हूं।   गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण चिंता और डर होना सामान्य है। गर्भधारण के दौरान जब बेबी आये तो मेंटल फिजिकल को विस्तार से समझाये, गर्भधारण के दौरान मन में डर, चिंता और चिड़चिड़ापन आना सामान्य है, लेकिन इसे स्थायी न होने दें। जैसे हम शरीर के लिए 'डाइट' चुनते हैं, वैसे ही दिमाग के लिए भी 'डाइट' चुनें। डरावनी फिल्में, हिंसक खबरें या नकारात्मक गपशप से बचें। इसकी जगह ऐसी चीजें पढ़ें या देखें जो प्रेरणादायक और शांत हों। <br /><strong>- डॉ. लेखा सोनी </strong></p>
<p><strong>जॉब के साथ बच्चों को समय देना जरूरी</strong><br />मैंने  बेटों की परवरिश करने के लिए जॉब छोड़ी, मैं तो यहीं कहना चाहूंगी कि हर पेरेंटस अपने बच्चों को सपोर्ट करते हैं और जॉब के साथ-साथ बच्चों को भी टाइम देना चाहिए। उनसे घर में बातचीत करनी चाहिए उनकी जरूरत को समझाना चाहिए।  पेरेंटस को बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए। बच्चों के साथ फे्रंडली व्यवहार करना चाहिए। बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुडे  रहने की जरूरत है।  <br /><strong>-श्वेता , ज्योतिषाचार्य</strong></p>
<p><strong>मां का बच्चे से कनेक्ट होना आवश्यक</strong><br />एक मां को अपने बच्चे को समझने के लिए  उससे कनेक्ट होना आवश्यक है।  बच्चों की भावना को समझना और उनकी बात को सुनने से बच्चे का अपनी मां से जुड़ाव स्वत: ही हो जाएगा।  इसलिए जरूरी है कि बच्चों को घर परिवार में हैल्दी माहौल दिया जाए। बच्चों को माता पिता समय नहीं दे पाते हैं इस कारण से वे अपनी बात नहीं कह पाते और तनाव में रहने लगते हैं। मां बच्चों  को अच्छी तरह से समझ सकती है। इसलिए वह उसकी पहली गुरु होती है।  <br /><strong>-डॉ. गगनदीप कौर ,कॉ फाउंडर यूएस अकेडमी</strong></p>
<p><strong>केमिकल फ्री डाइट और अन्य चीजें जरूरी</strong><br />बच्चों के इमोशनल सपोर्ट के साथ केमिकल फ्री डाइट और अन्य चीजें जरूरी हैं।  मैं खुद ही बेटी के लिए केमिकल फ्री खाना बनाती हूं। क्योकि आज के समय में बाजार में विभिन्न प्रकार की केमिकल युक्त क्रीम सहित अन्य चीजें आ रही हैं। जिसके चलते वहां शरीर के लिए नुकसानदायक हैं।  इसी के चलते मैंने खुद का ही कई ब्रांड बना लिए।  हम सभी परिवार के लोग    समय निकालकर एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। <br /><strong>-डॉ. मयंका शर्मा, एन्ट्रप्रेन्योर बच्चों के प्रोडक्ट बनाती हैं </strong></p>
<p><strong>वर्किंग और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस जरूरी</strong><br />पेशे से वकील  हूं। पर वर्किंग और प्रोफेशनल लाइफ को बैलेंस करके अपने बच्चे को पूरा समय देती हूं।  में सुबह से स्कूल में बच्चे को ड्रॉप करने जाती हूं। उसके बाद उसको लेने जाती हूं। इसी के साथ बच्चा कहीं भी ट्यूशन नहीं जाता हैं। में खुद ही पढ़ाती हूं। इसके बाद बच्चे के साथ क्रिकेट खेलती हूं।  किसी भी वक्त बच्चा हमसे कुछ भी प्रश्न करता है तो उसे हम प्यार से समझते हैं। बच्चा जानता है कि मम्मी और पापा हमेशा मेरे से प्यार से ही बात करते हैं चाहे कैसे भी स्थिति हो। चाहे मेरे में लाख कमियां पर में प्रतिदिन उनमें सुधार करती हूं, और परफ्ेक्ट मदर बनाने की कोशिश करती हूं।  <br /><strong>-ऐश्वर्या सुवालका ,वकील </strong></p>
<p><strong>बच्चे जैसे देखते हैं वैसा ही सीखते हैं</strong><br />बच्चे जैसे देखते है वैसा ही सीखते हैं। घर में बाई आती है रूटीन के काम करके चली जाती हैं। जिस दिन बाई नहीं आती है उस दिन पूरे काम में खुद ही करती हूं। जिसको बच्चे देखते हैं। इसी के जरिया में बच्चों को ये दिखाना चाहती हूं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता हैं। वहीं में सीएस यानी की कंपनी सेके्रटरी से संबंधित वर्क करती हंू। मेरा मानना है कि बच्चों को हर प्रकार के काम सिखाएें। <br /><strong>-देविका लखोटिया ,सीएस</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:43:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय कवि सम्मेलन दैनिक नवज्योति की गौरवशाली परंपरा का था हिस्सा : ऑडिटोरियम के बाहर मौसम जितना सर्द था, अंदर उतनी ही जोश की गर्मी थी </title>
                                    <description><![CDATA[गणतंत्र दिवस की संध्या पर बीएम बिड़ला सभागार में दैनिक नवज्योति की ओर से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशराग आयोजित किया। कार्यक्रम में देश के ख्यातनाम कवियों ने अपनी रचनाओं से मंच को जीवंत बना दिया और श्रोताओं के दिलों में राष्ट्रप्रेम की लहर। कवि सम्मेलन के दौरान ऑडिटोरियम के बाहर मौसम जितना सर्द था, अंदर उतनी ही जोश की गर्मी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-national-kavi-sammelan-was-a-part-of-the-glorious/article-141009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/8956-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गणतंत्र दिवस की संध्या पर बीएम बिड़ला सभागार में दैनिक नवज्योति की ओर से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशराग आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के ख्यातनाम कवियों ने अपनी रचनाओं से मंच को जीवंत बना दिया और श्रोताओं के दिलों में राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ा दी। कवि सम्मेलन के दौरान ऑडिटोरियम के बाहर मौसम जितना सर्द था, अंदर उतनी ही जोश की गर्मी थी। सभागार में दर्शक खचाखच भरे थे और देशभक्ति, हास्य तथा सामाजिक व्यंग्य से सजी कविताओं पर तालियों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही। यह सम्मेलन प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक नवज्योति की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है, जो हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर साहित्य और राष्ट्रभक्ति का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है। इस बार मंच पर संजय झाला, राकेश बेदी, डॉ. पॉपुलर मेरठी, विनीत चौहान, शबीना अदीब, गोविंद राठी, हरीश हिंदुस्तानी तथा अपूर्व बिक्रम शाह जैसे कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्जवलन के साथ हुई और समारोह शाम छह बजे से देर रात तक चला।</p>
<p>सम्मेलन की शुरुआत सबसे पहले अपूर्व बिक्रम शाह ने की। वे वीर रस के सशक्त कवि हैं और उनकी कविताएं राष्ट्रप्रेम की ओजस्वी अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने सबसे पहले मंच संभाला और (तारीख गवाही देती) तथा (हम ही राणा हम ही बिस्मिल) जैसी कविताएं सुनाकर पूरे सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उनकी गंभीर एवं ओजपूर्ण आवाज ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों की याद को ताजा कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में ही इतना उत्साह देखकर बाकी कवियों के लिए भी माहौल गर्म हो गया। युवा श्रोता विशेष रूप से उनकी प्रस्तुति से प्रभावित हुए और तालियों की गड़गड़ाहट लंबे समय तक गूंजती रही। इसके बाद मंच पर आए हरीश हिंदुस्तानी। हास्य रस के इस उस्ताद ने अपनी लोकप्रिय कविता (फूल फूल जोड़ो गजरे की लड़ी बन जाती है) सुनाकर माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया। मारवाड़ी लहजे में प्रस्तुत उनकी कविता ने राजस्थानी दर्शकों का दिल जीत लिया। हल्के-फुल्के व्यंग्य से सजी उनकी रचना ने रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाइयों को भी उजागर किया। दर्शकों ने उनकी हर पंक्ति पर ठहाके लगाए और तालियां बजाईं।</p>
<p>गोविंद राठी ने हास्य के माध्यम से समाज की वर्तमान हालात पर करारा व्यंग्य किया। उनकी कविता हर युग में सियासत होती है, पहले द्रौपदी की इज्जत सभा में लुटती थी, अब इज्जत लुटने के बाद सभाएं होती हैं, जैसी पंक्तियों ने आज की राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा तंज कसा। भ्रष्टाचार और नेताओं की दोहरी नीतियों पर उनकी कविताएं हंसते-हंसाते सोचने पर भी मजबूर कर गईं। इनकी प्रस्तुति इतनी जीवंत थी कि श्रोता लोटपोट हो गए। विनीत चौहान की बारी आई तो सभागार फिर देशभक्ति में डूब गया। उन्होंने (ऑपरेशन सिंदूर)और (सैनिक की चिट्ठी) सुना कर श्रोताओं में जोश भर दिया। ऑपरेशन सिंदूर में पहलगाम आतंकी घटना के बाद भारतीय सेना की कार्रवाई का ओजस्वी चित्रण था, सांप जब तक आस्तीनों के ना मारे जाएंगे और सैनिक की चिट्ठी में सीमा पर तैनात जवान की मां को लिखी भावुक चिट्ठी ने कई आंखें नम कर दीं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह प्रस्तुति अत्यंत प्रासंगिक लगी।डॉ. पॉपुलर मेरठी ने जब मंच संभाला तो हास्य का नया दौर शुरू हुआ। उनकी कविता टिकट मुझे भी दिला दो असेम्बली का, ने चुनावी महत्वाकांक्षा और राजनीतिक खेल पर जबरदस्त व्यंग्य किया।</p>
<p>उनकी पंक्तियों पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। पॉपुलर की अनोखी शैली में खुद को एक महत्वाकांक्षी नेता के रूप में प्रस्तुत करना दर्शकों को खूब भाया। शबीना अदीब ने अपनी कोमल आवाज में राष्ट्रप्रेम और भावुकता का संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने ये तिरंगा सबका दिल और जान बनकर रहे, अपना गम इस तरह कम कर लीजिए तथा अपनी डाली से बिछड़कर अलग हो गए ने गहरा संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिनेता राकेश बेदी ने एक कवि के रूप में हास्य का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। बहरों में लग रहा है बाजार मेरे भाई, ऑनलाइन की मोहब्बत और कोई बात नहीं जैसी कविताओं से उन्होंने डिजिटल युग के प्रेम और एक तरफा प्यार से हल्के फुल्के अंदाज में वाहवाही लूटी।  उनकी अभिनय पूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब हंसाया।कवि संजय झाला ने पूरे कार्यक्रम की सूत्रधार की भूमिका निभाई और अपनी हास्य रचनाओं से मंच को संतुलित रखा। इससे पहले मंच का संचालन ज्योति जोशी ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।</p>
<p><strong>इन लोगों ने किया कवियों का सम्मान</strong><br />राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशराग में प्रस्तुतियां देने वाले कवियों का दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी, संपादकीय सलाहकार त्रिभुवन, स्थानीय संपादक सुबोध पारीक, चीफ रिपोर्टर एल.एल. शर्मा, वरिष्ठ उपसंपादक सुशील शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश योगी, रोहित सोनी, अरुण कुमार गुप्ता, फतह सिंह, साबिर खान, कविता भाटिया और हेमंत शर्मा आदि ने माला, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 10:40:32 +0530</pubDate>
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                <title>हंसी के तीर, व्यंग्य की धार के साथ 'कॉन्स्टिट्यूशन' क्लब में सजा व्यंग्य विहास का रंगा-रंग महोत्सव, न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छावा भी कार्यक्रम में उपस्थित </title>
                                    <description><![CDATA[शब्दों की ऐसी आतिशबाजी हुई, जिसमें ठहाकों के बीच समाज का आईना भी चमकता नजर आया। विधानसभा के समीप स्थित कॉ्स्टिटट्यूशन क्लब में पहली बार आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य उत्सव व्यंग्य विहास ने जयपुर को गद्य व्यंग्य का नया मंच दे दिया। माहौल कुछ ऐसा था जैसे कवि सम्मेलन हो, बस फर्क इतना कि यहां तुकों की जगह तीखे गद्य और तालियों की जगह ठहाकों की गूंज थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/colorful-satire-festival-organized-at-the-constitution-club-with-the/article-137257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर में गुरुवार को शब्दों की ऐसी आतिशबाजी हुई, जिसमें ठहाकों के बीच समाज का आईना भी चमकता नजर आया। विधानसभा के समीप स्थित कॉ्स्टिटट्यूशन क्लब में पहली बार आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य उत्सव व्यंग्य विहास ने जयपुर को गद्य व्यंग्य का नया मंच दे दिया। माहौल कुछ ऐसा था जैसे कवि सम्मेलन हो, बस फर्क इतना कि यहां तुकों की जगह तीखे गद्य और तालियों की जगह ठहाकों की गूंज थी। राजस्थान साहित्य अकादमी, दैनिक नवज्योति और हास्य लोक के सहयोग से हुए इस अनूठे आयोजन का उद्देश्य हिंदी गद्य की वाचिक परंपरा को सहेजना और समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य की धार को और पैना करना रहा। देश के छह नामचीन व्यंग्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से सत्ता, समाज, व्यवस्था और आम आदमी की पीड़ा को व्यंग्य में लपेटकर पेश किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। पूर्व न्यायाधीश मनीष भंडारी, पिलकेन्द्र अरोड़ा, प्रभात गोस्वामी, अशोक राही और अजय अनुरागी का स्वागत दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी, पूर्व संपादक महेश शर्मा, पीके मस्त, राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी और संजय झाला ने किया। कार्यक्रम में न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छावा भी उपस्थित थे।</p>
<p>मंच पर जैसे ही शब्दों का सिलसिला शुरू हुआ, हर व्यंग्य पंक्ति पर तालियों और ठहाकों का शोर गूंज उठा। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध हास्य कवि अरुण जैमिनी ने अपनी चिर-परिचित चुटीली शैली में किया, जबकि सह-संचालन अरुण जोशी ने संभाला। आयोजन संयोजक और लोकप्रिय हास्य-व्यंग्यकार संजय झाला ने बताया कि व्यंग्य विहास उस गंभीर और वैचारिक व्यंग्य परंपरा को मंच देने का प्रयास है, जो हंसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। इस अवसर पर वैद्य भगवान सहाय झाला की स्मृति में प्रथम व्यंग्य-विहास सम्मान लखनऊ के वरिष्ठ व्यंग्यकार सूर्यकुमार पाण्डेय को प्रदान किया गया। वेद-शास्त्रों के मर्मज्ञ, बहुभाषाविद् और संवेदनशील समाजसेवी वैद्य भगवान सहाय झाला की स्मृति में आयोजित यह सम्मान समारोह व्यंग्य साहित्य के माध्यम से वैचारिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 11:50:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>90 केक काटकर मनाया दैनिक नवज्योति का 90वां स्थापना दिवस : प्रधान सम्पादक चौधरी ने कहा- नवज्योति की अलग पहचान, सहयोगियों का जताया आभार</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति परिवार ने 90वां स्थापना दिवस समारोह केसरगंज कार्यालय में उत्साह के साथ 90 केक काटकर मनाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/dainik-navjyotis-90th-foundation-day-editor-in-chief-chaudhary-said-navjyotis-separate/article-128603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। दैनिक नवज्योति परिवार ने 90वां स्थापना दिवस समारोह केसरगंज कार्यालय में उत्साह के साथ 90 केक काटकर मनाया। प्रधान सम्पादक दीनबंधु चौधरी व डायरेक्टर प्रतिभा चौधरी ने केक काटकर, नवज्योति परिवार के सभी सदस्यों का मुंह मीठा कराकर शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर कार्यालय में आकर्षक सजावट की गई। समारोह में सभी विभागों के प्रभारियों व उनके सहयोगियों ने मिलकर केक काटे। चौधरी ने नवज्योति परिवार के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए हर कदम पर नवज्योति का सहयोग करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।</p>
<p>प्रधान सम्पादक ने कहा कि दैनिक नवज्योति की अलग पहचान है। यह सभी पारिवारिक सदस्यों की मेहनत, सजगता और संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि अखबार आज भी लोगों की पहली पसंद और विश्वसनीयता बनाए हुए है। उन्होंने निर्भीक और निष्पक्ष रूप से कर्तव्य का निर्वहन का आह्वान किया। विज्ञापन विभाग के जीएम रमाकांत नैथानी, सम्पादकीय विभाग के राजेन्द्र शर्मा, संजय माथुर सहित सभी कार्मिकों एवं राशि एन्टरटेनमेंट के कोसिनोक जैन ने नवज्योति के प्रधान सम्पादक दीनबंधु चौधरी का साफा पहनाकर व माल्यार्पण कर एवं डायरेक्टर प्रतिभा चौधरी का बुके भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।  </p>
<p><strong>सभी ने काटे केक :</strong></p>
<p>स्थापना दिवस के अवसर पर नवज्योति परिवार के सभी सदस्यों ने केक काटकर खुद को संस्थान का अहम हिस्सा होने का अहसास किया। समारोह में सम्पादकीय विभाग, विज्ञापन, सर्क्यूलेशन, लेखा विभाग सहित अन्य सभी विभागों में सेवारत सभी सहयोगी सदस्यों  ने केक काटा। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 11:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति की खबर का असर : प्लास्टिक मुक्त करने की कार्य योजना तैयार, जिला स्तर पर बनेंगी टास्क फोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के समस्त पर्यटक स्थलों पर वाटर एटीएम की व्यवस्था की जाएगी ताकि पर्यटकों को प्लास्टिक वाटर बॉटल पर निर्भरता कम हो। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-impact-of-the-news-of-daily-navjyoti-will-be/article-122263"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(6).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में 'प्लास्टिक वेस्ट: राजस्थान के शहरों के हालात देश के मेट्रो सिटी से भी खराब' शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार की ओर से जयपुर सहित प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त करने की कार्य योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत नियमों की पालना एवं मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर कलक्टर की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।</p>
<p><strong>सर्वेक्षण में 176 डंप साइटों की पहचान</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) के निदेशक जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर के अनुसार लिगेसी वेस्ट के उपचार के माध्यम से राज्यभर में किए गए व्यापक सर्वेक्षण में 176 डंप साइटों की पहचान की गई, जिसमें लिगेसी वेस्ट है, जिनका कुल मात्रा 88 लाख घन मीटर है। इसमें से अब तक 76 लाख घन मीटर वेस्ट का उपचार किया जा चुका है। उपचार के दौरान 403392 मीट्रिक टन अपशिष्ट आरडीएफ के रूप में उत्पन्न हुआ, जिसे बाद में सीमेंट संयंत्रों में ले जाया जाता है।</p>
<p><strong>जनजागरण और विशेष अभियान</strong><br />प्लास्टिक मुक्त के लिए  कार्यशाला आयोजित कर जनजागरण एवं विशेष अभियान की तैयारी होगी। अभियान में प्लास्टिक उत्पादों का पर्यावरण और प्रसंस्करण में होने वाली समस्याओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही घर-घर से कचरा पृथक्करण के लिए स्वयं सहायता समूह का सहयोग लिया जाएगा।</p>
<p><strong>पर्यटन स्थलों पर वाटर एटीएम की व्यवस्था</strong><br />जयपुर के समस्त पर्यटक स्थलों पर वाटर एटीएम की व्यवस्था की जाएगी ताकि पर्यटकों को प्लास्टिक वाटर बॉटल पर निर्भरता कम हो। इसी के साथ उचित दरों पर बैग की उपलब्धता के लिए थैला बैंक की स्थापना की तैयारी है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 12:22:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिड़ला सभागार में दैनिक नवज्योति का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आज, हास्य और व्यंग्य की कविताओं से लोट-पोट होंगे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की राजधानी जयपुर के बाशिंदे रविवार को वीर रस की कविताओं से सरोबार होने के साथ ही हास्य और व्यंग्य की कविताओं से लोट-पोट होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dainik-navjyotis-national-kavi-sammelan-will-be-organized-in-bm/article-102093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की राजधानी जयपुर के बाशिंदे रविवार को वीर रस की कविताओं से सरोबार होने के साथ ही हास्य और व्यंग्य की कविताओं से लोट-पोट होंगे। इतना ही नहीं वे कॉमेडी से भरपूर कविताओं से गुदगुदाएंगे और देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत होंगे। यह मौका दैनिक नवज्योति की ओर से आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशराग में मिलेगा। इस कवि सम्मेलन में महाभारत सीरियल के श्रीकृष्ण अपनी श्रीमद् भगवद् गीता मोटिवेशन स्पीच भी देंगे। दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी ने बताया कि यह कवि सम्मेलन 26 जनवरी को शाम छह बजे स्टेच्यू सर्किल स्थित बीएम बिड़ला सभागार में शुरू होगा। इसमें हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए दैनिक नवज्योति की ओर से स्थापित अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान 2025 महाभारत टीवी धारावाहिक में श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता, मोटिवेशनल स्पीकर और पूर्व सांसद डॉ. नितीश भारद्वाज को प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>नवज्योति काव्य कलश सम्मान से कोटा निवासी वरिष्ठ कवि कुंवर जावेद को प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में जाने माने वीर रस के कवि जगदीश सोलंकी (कोटा), गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मजेदार तरीके से सवाल उठाने वाले सुरेश अवस्थी (कानपुर), गीतकार कुंवर जावेद (कोटा), अपने अनोखे अंदाज में प्रहार करने वाले व्यंग्य के साथ हास्य समाहित कर विसंगतियों पर प्रहार करने वाले संजय झाला (जयपुर), लाफ्टर चैलेंज विजेता सुरेश अलबेला (कोटा) और मारवाड़ी में श्रोताओं को लोटपोट करने वाले सुनील व्यास (कांकरोली) अपनी प्रस्तुतियां देकर गुलाबीनगर की जनता को गुदगुदाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dainik-navjyotis-national-kavi-sammelan-will-be-organized-in-bm/article-102093</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 10:11:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशराग 26 जनवरी को होगा आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति की ओर से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देश राग आयोजित किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dainik-navjyotis-national-poets-conference-deshrag-will-be-organized-on/article-100893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/navjyoti.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दैनिक नवज्योति की ओर से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देश राग आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी ने बताया कि रविवार, 26 जनवरी की शाम छह बजे से जयपुर के स्टेच्यू सर्किल स्थित बी.एम. बिड़ला सभागार में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए दैनिक नवज्योति की ओर से स्थापित अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान-2025 और नवज्योति काव्य कलश सम्मान-2025 से प्रख्यात दो कवियों को भी सम्मानित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dainik-navjyotis-national-poets-conference-deshrag-will-be-organized-on/article-100893</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 12:21:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्य, सेवा, साहस और सिद्धान्त पर चलने की परिभाषा है नवज्योति :  नरेन्द्र चौधरी </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति कोटा संस्करण की स्थापना के 43 वर्ष पूर्ण ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/navajyoti-is-the-definition-of-truth--service--courage-and-principles---narendra-chaudhary/article-90663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सत्य, सेवा, साहस, और सिद्दान्त पर अडिग रह कर अपार पाठक वृन्द के परिवारों का अभिन्न हिस्सा बन चुके दैनिक नवज्योति अखबार के कोटा संस्करण ने आज 43 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस शुभ मंगल बेला में हम समग्र पाठकों के लिए ह्रदय के अंतरतल से मंगल कामनाएं प्रेषित करते हैं। 43 बरस की इस अनवरत यात्रा में स्नेहिल पाठकों की अपार समर्थन शक्ति  और संबल हमारे साथ खड़ा रहा। इस यात्रा में हमारे सहभागी बने रहे सभी एजेन्ट, संवाददाता बंधु और विज्ञापनदाताओं का भी हम शुक्रिया अदा करते हैं। ऐसे मजबूत सहयोगियों की बदौलत ही दैनिक नवज्योति निष्पक्ष, निर्भीक, निरलिप्त होकर विश्वास के साथ उन्नयन की डगर पर लगातार अग्रसर होता जा रहा है। मैं इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि सोशल मीडिया की उपस्थिति, अखबारों की खबर बेचने की प्रवृति और गला काट स्पर्धा के इस माहौल में भी नवज्योति ने कभी भी एक तरफा, सनसनीखेज और मसालेदार पत्रकारिता को नहीं अपनाया। जो सही था, जैसे था, उसे  बिना लाग लपेट निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाया। शिक्षा नगरी में हुए विकास कार्यों के सकारात्मक पक्ष और उसकी जरूरत के साथ विशेषता को लेकर  वर्ष भर नवज्योति ने सैकड़ों स्टोरीज प्रकाशित की। हमने हमेशा सकारात्मक कार्य को तवज्जो दी। यही कारण रहा कि इस वर्ष 150 से अधिक खबरों का प्रशासन पर तुरन्त असर पड़ा और उन्हें  कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ा। वर्ष 2024 में  केन्द्र और राज्य दोनों के ही चुनाव हुए। 9 अक्टूबर 2023 को आचार संहिता लागू होने के साथ ही चुनावी माहौल बनने लगा । इसके साथ ही आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।  लेकिन दैनिक नवज्योति ने सत्य,साहस,और अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए समाज हित की खबरों का ही प्रकाशन किया। मैं इस अवसर पर बताना चाहता हूं कि यह सभी कार्य मेरे पिता, दैनिक नवज्योति के प्रधान संपादक आदरणीय दीन बंधु चौधरी जी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन के कारण ही फलीभूत हो सके। हमने हर विधानसभा क्षेत्र की तीन-तीन बार ग्राउन्ड रिपोर्ट प्रकाशित कर शिक्षा, स्वास्थ्य,रोजगार, विकास कार्य सहित क्षेत्र के लोगों की वास्तविक स्थिति, आर्थिक,सामाजिक, राजनीतिक  हालात पेश कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अपनी भूमिका को तो बखूबी निभाया ही साथ ही महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी देने जैसे गंभीर मुद्दे को भी चुनाव के माध्यम से राजनीतिकों के व्यक्तिगत  एजेंडे में  पहुंचाने की कोशिश की। लोकसभा चुनाव आते-आते कोटा का राजनीतिक परिदृश्य एकदम बदल गया। लेकिन हमने  पाठक के प्रति समर्पण और निष्पक्षता के अपने सिद्दान्त को अपनाए रखा। हमने बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन क्यों नहीं मिल पा रही श्रंखला चला कर गंभीरता के साथ स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों  के वास्तविक  हालात  पाठकों के सामने रखे। सकारात्मक सोच के साथ ऐसी खबरों का प्रकाशन किया जिससे विश्वविद्यालय केवल कागज की डिग्री देने तक सीमित नहीं रहे अपितु छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहभागी बन सकें। शहर और गांव में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर भी हमने ना केवल पौधरोपण पर काम किया अपितु इनका रियलिटी चैक भी करवाया। इससे लोगों ने ना केवल पौधे लगाए अपितु उनकी सार संभाल की जिम्मेदारी भी ली। इसके साथ बेजुबानों की सांसों में घुल रहा जहर, राम तेरी चंबल मैली, पेट्रोल सोलर,बोट से हो चंबल में सफारी, इंसेन्टिव बेस हो जंगल का काम ,इलेक्ट्रिक बसों की दरकार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चले सोलर, जैसी खबरों की श्रंखला से पर्यावरण रक्षा की जरूरत पर लोगों को सोचने को मजबूर किया। हमने दुनिया डिजीटल पर और हम कागज पर श्रंखला के माध्यम से डिजीटलाइजेशन व शहर को ई बसों की जरूरत जैसे मुद्दे पर भी अभियान रूप में काम किया। ई बसों को लेकर हम पिछले कई वर्ष से लगातार काम कर रहे हैं। यही कारण रहा कि कोटा को 100 ई -बस मिलने की संंभावना बनी है। महिला सशक्तीकरण को लेकर हम साल दर साल अभियान रूप में काम कर रहे हैं। हमने सामाजिक सरोकार के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए ना केवल खबरों पर काम किया अपितु लोगों के बीच जाकर काम करने का भी सार्थक प्रयास  शुरू किया। इसी  क्रम के तहत नवज्योति कार्यालय में प्रति माह एक परिचर्चा का आयोजन शुरू किया गया है। परिचर्चा में  विषय से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं और एक निष्कर्ष समाज के सामने रखते हैं। विश्वविद्यालयों में एडमिशन, रिजल्ट, फीस वसूली, समय पर एक्जाम नहीं होने, परिणाम जारी नहीं करने जैसी ढेरों समस्याएं बनी रहती हैं। इनके लिए यूजीसी ने लोकपाल की व्यवस्था की है। विश्वविद्यालय इस बात को प्रचारित करने का ज्यादा पक्षधर नहीं रहता। लेकिन नवज्योति ने कोटा के सभी छह विश्वविद्यालयों के नव-नियुक्त लोकपाल के साक्षात्कार प्रकाशित किए ताकि लोगों को जानकारी मिल सके।  साथ ही लोगों को यह भी बताया कि लोकपाल के पास किस प्रकार से शिकायत की जा सकती है और कैसे समाधान पाया जा सकता है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि कोचिंग नगरी के नाम से ख्यात कोटा शहर की छवि पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के लगातार आत्महत्या करने से दागदार होने लगी। कुछ संस्थानों ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर कोचिंग स्टूडेंट को पैसा कमाने की फैक्ट्री मान लिया। ऐसे समय में देश भर में केवल नवज्योति ही  पहला अखबार बना जिसने इन संस्थानों के छदम ढिंढोरे को जनता की अदालत के सामने लाने की ताकत दिखाई।  </p>
<p> मेरे दादाजी कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी जी ने स्वतंत्रता आन्दोलन के दौर में 88 साल पहले जो ज्योति जलाई थी आप सभी के सहयोग से आज भी वह  निर्विघ्न, निरन्तर,समाज को नवज्योति से प्रकाशमान कर रही है। दैनिक नवज्योति समाचार पत्र की बुनियाद 2 अक्टूबर,1936 में अजमेर के केसरगंज में एक सप्ताहिक अखबार के रूप में रखी थी। आज वही नवज्योति वटवृक्ष के रूप  में समाचार जगत की बगिया में अपनी खुशबू बिखेर रहा है। स्वतंत्रता आन्दोलन में  एक मिशन के रूप में शुरू हुआ समाचार पत्र विभिन्न दौर देखता हुआ धीरे-धीरे प्रोफेशनल में बदला। देश के आजाद होते ही अजमेर संस्करण को दैनिक समाचार पत्र के रूप में लाया गया। वर्ष 1960 में इसका राजधानी जयपुर से संस्करण शुरू हुआ। कोटा में 1981 में और 21वीं सदी के शुरुआत में वर्ष 2004 में जोधपुर और 2013 में उदयपुर संस्करण शुरू हुए। मुद्रण की नवीनतम आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए समाचारों और विचारों की नई विषय वस्तु के चयन और तेवर में समयानुकूल बदलाव लाकर हर रोज नई भोर की ज्योति में दैनिक नवज्योति घर-घर सच को पहुंचा रहा है।<br />अचल रही, अटल रही,अखंड ज्योति जलती रही, प्रकाश पथ पर प्रति सहर, नवज्योति बिखरती रही।<br />पुन: सभी का आभार और सादर अभिनन्दन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 16:11:40 +0530</pubDate>
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                <title>पक्षियों के लिए लगाए 108 परिंडे</title>
                                    <description><![CDATA[ इस अभियान में जयपुर की विभिन्न संस्थाएं अभियान में जुड़ रही हैं। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति हर साल गर्मियों में पक्षियों के लिए परिंडे अभियान चलाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/108-birds-set-up-for-birds/article-75116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। दैनिक नवज्योति के 10 अप्रैल से 10 मई तक चल रहे ‘सूखा है नल, आओ परिंडे में रखें जल’ अभियान के तहत दैनिक नवज्योति और रोटरी क्लब जयपुर साउथ के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को रामबाग पैलेस के पास पाणिग्रह परिसर में पक्षियों के लिए 108 परिंडे लगाए गए। ये अभियान जयपुर शहर में 10 मई तक चलेगा, जिसमें हजारों की संख्या में परिंडे लगाएं जाएंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी, रोटरी क्लब जयपुर साउथ की अध्यक्ष डॉ. निर्मला सेवानी, पूर्व प्रांतपाल रत्नेश कश्यप, क्लब सचिव ऋतु खत्री सहित क्लब के अन्य सदस्य मौजूद थे। दैनिक नवज्योति के इस अभियान में जयपुर की विभिन्न संस्थाएं अभियान में जुड़ रही हैं। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति हर साल गर्मियों में पक्षियों के लिए परिंडे अभियान चलाता है। इसमें जयपुर की विभिन्न संस्थाएं अभियान से जुड़ती हैं। इस अभियान के तहत पक्षियों के लिए परिंडे के साथ दाना-पानी की व्यवस्था की जाती है। अभियान का रेडियो पार्टनर रेडियो सिटी 91.1 है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Apr 2024 09:37:48 +0530</pubDate>
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                <title>प्राउड ऑफ राजस्थान ने दैनिक नवज्योति को किया सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[पुरस्कार देते हुए बताया गया कि दैनिक नवज्योति आजादी से भी पहले 1936 से लगातार प्रकाशित हो रहा है, जो देशवासियों के लिए गौरव का विषय है। मीडिया कैटेगिरी में दैनिक नवज्योति को यह सम्मान प्राउड ऑफ राजस्थान नाम से दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/proud-of-rajasthan-honored-dainik-navajyoti/article-69768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/harsh-ji-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>नवज्योति, जयपुर। प्रवासी भारतीयों के लिए काम करने वाली प्रमुख संस्था मारवाड़ी इंटरनेशनल फेडरेशन ने उल्लेखनीय पत्रकारिता के लिए प्राउड ऑफ राजस्थान के तहत शनिवार को दैनिक नवज्योति का सम्मान किया। यह सम्मान दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी को अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल ने प्रदान किया। <br /><br />पुरस्कार देते हुए बताया गया कि दैनिक नवज्योति आजादी से भी पहले 1936 से लगातार प्रकाशित हो रहा है, जो देशवासियों के लिए गौरव का विषय है। मीडिया कै टेगिरी में दैनिक नवज्योति को यह सम्मान प्राउड ऑफ राजस्थान नाम से दिया गया है। फाउंडर जनरल सेक्रेटरी  सीए विजय गर्ग ने बताया कि मारवाड़ी इंटरनेशनल फेडरेशन सामाजिक और व्यापारिक नेटवर्किंग का संगठन है, जो केंद्र सरकार द्वारा रजिस्टर्ड है। विश्व के 27 देशों के साथ देश के विभिन्न राज्यों और प्रदेश के सभी जिलों से तीन हजार से ज्यादा लोग संगठन से जुड़े हुए हैं। यह संस्था प्रवासी राजस्थानियों को एक मंच पर एकत्रित करके सामाजिक और व्यापारिक क्षेत्रों में प्लेटफार्म प्रदान करती है। इस मौके पर सीनियर टैक्स कंसल्टेंट ओपी गुप्ता, अग्रवाल शिक्षा समिति के सचिव कमल नानूवाला, अनुकंपा बिल्डर्स के गोपाल गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष राजस्थान टैक्स कंसल्टेंट एसोसिएशन सतीश गुप्ता, बिजनेस कोच सुशील जालान, महेश देवड़ा,गौरीशंकर धामाणी, रजनीश चौधरी, सतनारायण खंडेलवाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Feb 2024 10:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की 117वीं जयंती पर हुआ पुष्पांजलि कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवक एवं दैनिक नवज्योति के संस्थापक संपादक कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी की 117वीं जयंती पर सोमवार को दैनिक नवज्योति के जयपुर स्थित कार्यालय पर पुष्पांजलि कार्याक्रम आयोजित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/floral-tribute-program-held-on-the-117th-birth-anniversary-of/article-64454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/durga-prasad-chaudhary1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवक एवं दैनिक नवज्योति के संस्थापक संपादक कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी की 117वीं जयंती पर सोमवार को दैनिक नवज्योति के जयपुर स्थित कार्यालय पर पुष्पांजलि कार्याक्रम आयोजित किया गया। जयपुर में जोबनेर बाग रेलवे स्टेशन रोड स्थित कार्यालय में दोपहर 12:00 बजे कार्यक्रम हुआ। विभिन्न जिलों में स्थित ब्यूरो कार्यालय में भी समारोह आयोजित कर कप्तान साहब के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की गई। प्रदेश के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी एवं निर्भीक पत्रकारों में शुमार कप्तान साहब का जन्म 18 दिसम्बर 1906 को सीकर जिले के नीमकाथाना कस्बे में हुआ था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Dec 2023 13:21:34 +0530</pubDate>
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