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                <title>Farmers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : वेयरहाउस में गाड़ियां समय पर खाली करने के दिए निर्देश, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलक्टर ने की एमएसपी पर गेहूं खरीद व्यवस्थाओं की समीक्षा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---directives-issued-to-ensure-timely-unloading-of-vehicles-at-warehouses/article-149858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर पीयूष समारिया गुरुवार शाम को भामाशाह कृषि उपजमंडी पहुंचे और समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की व्यवस्थाओं के संबंध में वहां समीक्षा बैठक ली। समारिया ने एफसीआई अधिकारियों से मंडियों में हुई गेहूं की खरीद तथा वेयरहाउस पर गाड़ियां खाली करने की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा। उन्होंने वर्तमान में संचालित विभिन्न एजेंसियों के कुल खरीद केन्द्रों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि गुरुवार को कितने पंजीकृत किसान अपने गेहूं की तुलाई के लिए आए। जिला कलक्टर ने मंडियों से गेहूं का उठाव समय पर करने, पंजीकृत किसानों के गेहूं की तुलाई की गति बढ़ाने और एफसीआई के वेयरहाउस में गाड़ियां समय पर खाली करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एफसीआई के वेयरहाउस के बाहर गाड़ियों की कतारें नहीं लगें यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने एफसीआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी वेयरहाउस के बाहर गाड़ियां अधिक हों तो उन्हें दूसरे वेयरहाउस की तरफ डायवर्ट कर वहां खाली करने की व्यवस्था करें।</p>
<p><strong>रसद विभाग करे गाड़ियां खाली करने की मॉनिटरिंग</strong><br />जिला कलक्टर ने मंडियों में गेहूं तुलाई की गति बढ़ाने, मंडियों एवं क्रय केन्द्रों पर आए गेहूं का समय पर उठाव करने और किसानों को बायोमेट्रिक सत्यापन के संबंध में आ रही समस्याओं का समाधान करने के भी निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने भामाशाहमंडी प्रशासक एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर राजस्व वीरेंद्र सिंह यादव एवं जिला रसद अधिकारी कार्तिकेय मीणा को मंडियों एवं क्रय केन्द्रों पर गेहूं खरीद की व्यवस्था एवं वेयरहाउस में गाड़ियां खाली करने की व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने तथा वेयरहाउस का मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। बैठक में एफसीआई अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को भामाशाह कृषि उपज मंडी में 90 हजार कट्टों की तुलाई हुई। जिला कलक्टर ने इस गति को बरकरार रखने और सभी क्रय केन्द्रों पर अधिक से अधिक तुलाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एफसीआई, राजफैड, तिलम संघ सहित अन्य क्रय एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />कोटा संभाग में गेहूं की खरीद शुरू होने के बाद वेयरहाउस के बाहर ट्रकों की कतारें लगने के सम्बंध में 9 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि कोटा संभाग में समर्थन मूल्य (एसएसपी) पर गेहूं खरीद ने जोर पकड़ लिया है। खरीदे गए गेहूं को ट्रकों के जरिए विभिन्न वेयरहाउस और गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन गोदामों में सीमित संसाधन और अनलोडिंग की धीमी प्रक्रिया के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। गोदामों में माल खाली करने की प्रक्रिया में देरी के चलते ट्रक चालकों को 3 से 4 दिन तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। डीसीएम रोड स्थित गोदाम के बाहर ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई है। ट्रक चालकों का कहना है कि उन्हें समय पर माल खाली नहीं होने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले को जिला कलक्टर ने गम्भीरता से लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:09:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : गेहूं खरीद के नियमों में मिली महत्वपूर्ण छूट, प्रभावित किसानों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष बिरला व ऊर्जा मंत्री की पहल पर केंद्र का निर्णय।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--significant-relaxation-granted-in-wheat-procurement-norms/article-149856"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और प्रतिकूल मौसम से प्रभावित गेहूं की फसल को लेकर कोटा-बूंदी सहित पूरे प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने राजस्थान में रबी सीजन के लिए गेहूं खरीद के मानकों में शिथिलता के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के परिणामस्वरूप लिया गया है। जारी आदेश के अनुसार गेहूं की गुणवत्ता में आई गिरावट को ध्यान में रखते हुए चमक में कमी की सीमा 50 प्रतिशत तक तथा सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 15 प्रतिशत तक कर दी गई है। वहीं क्षतिग्रस्त और आंशिक क्षतिग्रस्त दानों की कुल सीमा 6 प्रतिशत निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि यह राहत ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विशेष प्रयासों और अधिकारियों के साथ उनकी हालिया उच्च स्तरीय बैठकों के परिणामस्वरूप संभव हो पाई है।</p>
<p><strong>खाद्य मंत्रालय ने जारी किए आदेश</strong><br />ऊर्जा मंत्री नागर ने बताया कि प्रदेश में शुरूआती गर्मी की लहर और असमय बारिश के कारण प्रभावित हुई गेहूं की फसल को देखते हुए केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए खरीद नियमों (यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन) में महत्वपूर्ण ढील देने का निर्णय लिया है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और स्पीकर ओम बिरला ने बीते दिनों अधिकारियों के साथ बैठक कर फसल की स्थिति पर चिंता जताई थी। स्पीकर बिरला ने स्वयं खाद्य सचिव से चर्चा कर किसानों के हित में मानदंडों को शिथिल करने के निर्देश दिए थे। उनकी इस पहल से अब प्रदेश के लाखों किसानों का वह गेहूं भी सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदा जा सकेगा, जो मौसम की मार के कारण गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा था।</p>
<p><strong>रियायती मानदंडों के गेहूं का अलग रखेंगे हिसाब</strong><br />केंद्र द्वारा जारी शर्तों के तहत, इस रियायती मानदंडों के आधार पर खरीदे गए गेहूं का अलग से हिसाब रखा जाएगा और इसका उपयोग प्राथमिकता के आधार पर राज्य के भीतर ही किया जाएगा। भंडारण के दौरान गुणवत्ता बनाए रखने और इस छूट से होने वाले किसी भी वित्तीय प्रभाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। इस आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में किसानों से सुगम तरीके से गेहूं की खरीद सुनिश्चित हो सकेगी। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि "प्राकृतिक आपदा और मौसम की मार झेल रहे राजस्थान के अन्नदाता के लिए यह एक अत्यंत संवेदनशील और राहतकारी निर्णय है। मुख्यमंत्री और हमारी सरकार सदैव किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है।"</p>
<p><strong>नवज्योति बनी अन्नदाता की आवाज</strong><br />बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की फसल प्रभावित होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें अन्नदाता की पीड़ा को उजागर करते हुए बताया था कि जिले में गेहूं खरीद का सीजन इस बार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट बनता जा रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिसके चलते सरकारी खरीद केंद्रों पर 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं को लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इसके अलावा एफसीआई के टीम के कोटा दौरे के बाद जल्द ही गेहूं की गुणवत्ता में छूट मिलने को लेकर भी समाचार प्रकाशित किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:56:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कृषि नीतियों के कारण किसान, व्यापारी और मजदूर परेशान : सैलजा ने सरकार पर लगाया छोटे व्यापारी और आढ़ती के कमजोर होने का आरोप, कहा- किसानों पर बढ़ाया जा रहा नियमों का बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ में पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा ने घरौंडा अनाज मंडी का दौरा कर किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि छोटे व्यापारी कमजोर हो रहे हैं और किसानों पर बोझ बढ़ रहा है। पोर्टल व्यवस्था में सुधार, देरी से खरीद और बढ़ती ईंधन कीमतों पर भी चिंता जताई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/farmers-traders-and-laborers-are-troubled-due-to-agricultural-policies/article-149122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चंडीगढ़। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा में करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी का दौरा कर व्यापारियों एवं किसानों की समस्यायें सुनी और सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना की। उन्होंने फसल खरीद व्यवस्था का जायजा लेते हुए किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से छोटे व्यापारी और आढ़ती कमजोर हो रहे हैं, जबकि किसानों पर अनावश्यक नियमों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है, ऐसे में सरकारी नीतियां उसकी परेशानियां और बढ़ा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मंडी में पोर्टल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पोर्टल का शुरू होना अच्छी पहल है, लेकिन उसका सुचारु संचालन अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि फसल तैयार होने के बाद भी किसानों को खरीद के लिए इंतजार करना पड़ता है और बारिश या ओलावृष्टि से फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। लंबी कतारों और देरी से बिक्री के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। सैलजा ने एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई और सरकार से आम जनता को राहत देने की मांग की। उन्होंने जनहित में स्पष्ट और प्रभावी नीतियां बनाने की जरूरत पर जोर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गांव का नाम बदला तो एमएसपी पोर्टल पर अटका पंजीयन, किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[खेड़ारसूलपुर से खेड़ारामपुर होने के बाद आ रही तकनीकी दिक्कत, समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित किसान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-village-renaming-stalls-registration-on-msp-portal--farmers-distressed/article-148550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>खेड़ारामपुर। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण में तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव का नाम बदलने के बाद रिकॉर्ड और पोर्टल में अंतर होने से सैकड़ों किसान परेशान हैं। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य गेहूं खरीद केंद्र पर फसल बेचने के लिए एमएसपी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण गांव के नाम में बदलाव बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा कुछ समय पहले ग्राम खेड़ारसूलपुर का नाम बदलकर खेड़ारामपुर कर दिया गया। इसके बाद भू-राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी और गिरदावरी में नया नाम दर्ज हो गया है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र और एमएसपी पोर्टल पर अभी भी पुराने नाम खेड़ारसूलपुर से ही डाटा संचालित हो रहा है। किसान विष्णु अजमेरा और चंदन गहलोत ने बताया कि इस समस्या को लेकर राजफैड सहित संबंधित विभागों और अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>किसानों ने जिला कलेक्टर से लगाई गुहार</strong><br />किसानों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि एमएसपी पोर्टल और खरीद केंद्रों पर गांव के नाम में सुधार कर जल्द से जल्द ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कराया जाए, ताकि किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकें।</p>
<p>जब वे पंजीकरण के लिए एमएसपी पोर्टल पर गिरदावरी अपलोड करते हैं, तो गांव के नाम में अंतर के कारण दस्तावेज अपलोड नहीं हो पाते और तकनीकी त्रुटि सामने आ जाती है। इससे खेड़ारामपुर के सैकड़ों किसान पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं और समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित हो रहे हैं।<br /><strong>- सुरेश गुर्जर, किसान, खेड़ारामपुर</strong></p>
<p>एमएसपी पोर्टल पर गांव का नाम बदलने से आ रही पंजीकरण की समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और शीघ्र समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- विष्णु शर्मा, राजफैड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:28:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा ने हिमाचल सरकार के बजट को बताया 'बैक गियर बजट': आवंटन में 4,000 करोड़ रुपये की कटौती का लगाया आरोप, जन-विरोधी बजट का जताया कड़ा विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुक्खू के 2026-27 बजट को दिशाहीन करार दिया है। उन्होंने ₹4,000 करोड़ की कटौती और 1500 रुपये महिला सम्मान राशि जैसे चुनावी वादे पूरे न करने पर सरकार को घेरा। भाजपा का आरोप है कि बजट में युवाओं और किसानों के लिए केवल खोखले आंकड़े हैं, जो विकास को पीछे धकेल देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-called-himachal-governments-budget-a-back-gear-accused-it/article-147416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/himachal-pradesh-budget-2026.png" alt=""></a><br /><p>शिमला। हिमाचल प्रदेश में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से पेश किए गये वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट "बैक गियर बजट" करार दिया है और कहा है कि राज्य के विकास को पीछे धकेल देगा। शिमला में मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि इस बजट में दूरदर्शिता की कमी है और यह लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में बजट आवंटन में लगभग 4,000 करोड़ रुपये की कटौती की है, जिसका विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>बिंदल ने कहा कि राज्य में बजट आवंटन में इतनी बड़ी कटौती शायद ही कभी देखने को मिली है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों की गति धीमी पड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में जिन कई योजनाओं को प्रमुखता से दिखाया गया है, वे असल में राज्य द्वारा शुरू किए गए नये कार्यक्रमों के बजाय, मत्स्य पालन, कृषि, बागवानी और पशुपालन से संबंधित केंद्र प्रायोजित योजनाओं का ही नया रूप हैं।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राज्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए बार-बार केंद्र सरकार को दोषी ठहराने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, केंद्र प्रायोजित योजनाओं से राज्य को काफी फायदा होने के बावजूद, बजट दस्तावेज़ की शुरुआत श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना से होती है। कांग्रेस पार्टी की 2022 के चुनावों की गारंटियों को निशाना बनाते हुए श्री बिंदल ने उन्हें "जनता के विश्वास के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में एक लाख सरकारी नौकरियाँ देने और पाँच लाख रोज़गार के अवसर पैदा करने जैसे वादे पूरे नहीं किए गये हैं। उन्होंने बताया कि 28 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा अभी तक लागू नहीं किया गया है।</p>
<p>बिंदल ने आगे आरोप लगाया कि 100 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीदने की प्रतिबद्धता को घटाकर 60 रुपये कर दिया गया है, जिसे उन्होंने किसानों और डेयरी उत्पादकों के लिए गुमराह करने वाला कदम बताया। अन्य मोर्चों पर सरकार की आलोचना करते हुए, उन्होंने दावा किया कि बजट में कानून-व्यवस्था, बढ़ती माफिया गतिविधियों, अस्पतालों में दवाओं की कमी और बंद पड़े संस्थानों को फिर से खोलने से संबंधित चिंताओं का ठीक से समाधान नहीं किया गया है। बजट को खोखले आँकड़ों का पुलिंदा बताते हुए, श्री बिंदल ने कहा कि इसमें युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए स्पष्ट दिशा और सार्थक राहत का अभाव है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस जन-विरोधी बजट का कड़ा विरोध करेगी और हर मंच पर इस मुद्दे को उठाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-called-himachal-governments-budget-a-back-gear-accused-it/article-147416</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 14:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को  परेशानियां आ रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>अरसे से अटका था मामला</strong></p>
<p>मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong></p>
<p>एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।</p>
<p>भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।</p>
<p><strong>-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।</p>
<p><strong>-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - किसानों को मिला अब बोनस का तोहफा, 16 मार्च से शुरू होगी गेहूं की एमएसपी पर खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[ किसानों को गेहूं बेचने के लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---farmers-now-receive-a-bonus--wheat-procurement-at-msp-will-begin-from-the-16th/article-146172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए इस वर्ष एमएसपी के साथ अतिरिक्त बोनस देने की भी घोषणा की है। सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा किसानों को 150 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। इस प्रकार पंजीकृत किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान उनके जनाधार से जुड़े बैंक खातों में किया जाएगा। हाड़ौती के किसान काफी समय बोनस की घोषणा होने का इंतजार कर रहे थे। इस कारण अधिकांश किसान विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराने से कतरा रहे थे। अब बोनस की घोषणा होने से ऑनलाइन पंजीकरण के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>गेहूं खरीद की तारीख बदली</strong><br />राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने रबी विपणन सीजन 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के अनुसार अब एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद 16 मार्च 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक की जाएगी। पहले यह खरीद 10 मार्च से शुरू करने का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसमें संशोधन किया गया है। विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि रबी विपणन सीजन 2026-27 में किसानों से एमएसपी पर गेहूं खरीद का कार्य राज्यभर में निर्धारित खरीद एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा। संशोधित निदेर्शों के अनुसार किसानों को गेहूं बेचने के लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और उसी के आधार पर खरीद केंद्रों पर उनकी उपज की खरीद की जाएगी।</p>
<p><strong>खरीद केंद्रों की तैयारियां शुरू</strong><br />विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में खरीद केंद्रों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, तौल व्यवस्था और परिवहन की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बोनस की घोषणा से किसानों को गेहूं बेचने में प्रोत्साहन मिलेगा और सरकारी खरीद केंद्रों पर आवक बढ़ने की संभावना है। वहीं खरीद की तारीख आगे बढ़ने से किसानों को फसल की कटाई और मंडियों में लाने के लिए भी अतिरिक्त समय मिल सकेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />दैनिक नवज्योति में किसानों की इस पीड़ा को लेकर 9 फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था, जिसमें बताया था कि सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक बोनस की घोषणा नहीं होने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण जिले में पंजीयन अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है और किसान फिलहाल इंतजार की रणनीति अपनाए हुए हैं। हर साल इस समय तक बड़ी संख्या में किसान पंजीयन करा लेते थे, लेकिन इस बार आंकड़े अपेक्षा से काफी कम हैं।</p>
<p>सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा किसानों को 150 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। पंजीकृत किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान उनके जनाधार से जुड़े बैंक खातों में किया जाएगा।<br /><strong>- पूनम प्रसाद सागर, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---farmers-now-receive-a-bonus--wheat-procurement-at-msp-will-begin-from-the-16th/article-146172</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:00:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - राहत: अब 7 किसानों का समूह भी होगा लाभांवित,नियम बदलने से आवेदनों की बढ़ेगी संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[छोटे किसान भी समूह बनाकर फसल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---relief--now-even-groups-of-7-farmers-will-benefit--the-number-of-applications-will-increase-due-to-the-change-in-rules/article-143898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  राज्य सरकार ने अब किसानों को बड़ी राहत देते हुए सामुदायिक तारबंदी योजना में अहम बदलाव किया है। अब तक इस योजना का लाभ लेने के लिए 10 किसानों का समूह अनिवार्य था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब केवल 7 किसानों का समूह बनाकर भी योजना का लाभ उठाया जा सकेगा। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने प्रदेश में 20 हजार किलोमीटर तारबंदी कराने का लक्ष्य रखा है। इस पर 228 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। योजना का उद्देश्य नीलगाय व अन्य आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा करना है, ताकि किसानों को बार-बार होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।</p>
<p><strong>पहले समूह बनाना था मुश्किल</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 किसानों का समूह बनाना कई गांवों में चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। छोटे जोत वाले किसानों की संख्या अधिक होने और खेतों की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग होने के कारण समूह तैयार नहीं हो पा रहे थे। अब 7 किसानों की अनिवार्यता से अधिक किसान योजना में शामिल हो सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव से फसलों की सुरक्षा बेहतर होगी और किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है। विभाग का मानना है कि अब योजना में बदलाव करने से आवेदन की संख्या में तेजी आ सकती है।</p>
<p><strong>फसलों को मिलेगा संरक्षण</strong><br />क्षेत्र में इन दिनों गेहूं, चना, सरसों, जौ, लहसुन, धनिया सहित कई फसलें खेतों में खड़ी हैं। आवारा पशुओं से होने वाला नुकसान किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। तारबंदी से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उत्पादन में स्थिरता आएगी। योजना में बदलाव के बाद किसानों में उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि समूह की संख्या कम होने से अब योजना का लाभ लेना आसान होगा। छोटे किसान भी अब अपने स्तर पर समूह बनाकर फसल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। सरकार की इस पहल को ग्रामीण अंचल में खेती की मजबूती और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />खेतों में तारबंदी के नियम को लेकर दैनिक नवज्योति में 17 फरवरी के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों को आवारा पशुओं और नीलगायों से बचाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही तारबंदी अनुदान योजना जिले के किसानों के लिए राहत से ज्यादा परेशानी बनती जा रही है। योजना का उद्देश्य सामूहिक तारबंदी के जरिए फसलों को सुरक्षा देना है, लेकिन अनुदान पाने के लिए कम से कम दस किसानों का समूह बनाना अनिवार्य होने से अधिकांश किसान लाभ से वंचित हैं। तारबंदी योजना में दस किसानों का समूह बनाकर सामूहिक आवेदन करना अनिवार्य है। व्यवहारिक रूप से यह प्रक्रिया आसान नहीं है।</p>
<p>राज्य सरकार ने सामुदायिक तारबंदी योजना में अहम बदलाव किया है। अब तक इस योजना का लाभ लेने के लिए 10 किसानों का समूह अनिवार्य था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब केवल 7 किसानों का समूह बनाकर भी योजना का लाभ उठाया जा सकेगा।<br /><strong>- आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:25:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर कांग्रेस हमलावर : पायलट ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- यह डील देश के किसान और व्यापारी वर्ग के भी समझ से बाहर </title>
                                    <description><![CDATA[सचिन पायलट ने पीसीसी में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव में हुआ समझौता बताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों और व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुंचेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-bomber-pilot-targets-us-india-trade-deal/article-143271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(25).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर कांग्रेस लगातार भाजपा के खिलाफ आवाज उठा रही है। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने पीसीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए इस डील को लेकर सवाल उठाए। पायलट ने कहा कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील में बहुत सारे सवाल खड़े हो गए हैं। देश के किसान और व्यापारी वर्ग के भी यह डील समझ से बाहर है। राहुल गांधी भी इसी सिलसिले में लगातार आवाज उठा रहे हैं। आज से पहले भारत पर अमेरिका पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाता था, फिर 50 प्रतिशत और अब 18 प्रतिशत कर दिया। डील की शर्त किसी को मालूम नहीं है।</p>
<p>केवल सोशल मीडिया पर डील की जानकारी दी गई। ट्रेड यूनियन भी इस डील के खतरों को लेकर अलग-अलग आशंका जता रही हैं। भारत जैसे ताकतवर देश को अमेरिका कैसे कह सकता है कि वह किससे तेल खरीदे और किससे नहीं। यह डील अमेरिका के दबाव में हुई है, जिसमें देश के किसान, व्यापारी और यंहा के बाजार का नुकसान झलक रहा है। डील में कौनसा सामान किस डील के तहत लेन देन होगा, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बारे में पूछने पर मंत्री एक दूसरे पर जबाव टालते रहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 18:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए बनें हर तरह की सस्ती मशीनें : चलाने में हो आसान, शिवराज ने कहा- इससे समय और श्रम की होगी बचत</title>
                                    <description><![CDATA[चौहान ने कहा कि देश की खेती में मशीनीकरण तेज हो रहा है और इसकी मिसाल यह है कि इस साल ट्रैक्टर इतने बिके कि दुनिया चकित रह गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/all-types-of-cheap-machines-should-be-made-for-farmers/article-143295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/6622-copy37.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के पास नयी से नयी मशीनें होनी चाहिये, लेकिन उनकी लागत कम हो और वे चलाने में आसान तथा अधिक प्रभावी भी हों। वह यहां केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई), भोपाल के 51वें स्थापना दिवस समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यहां कपास की तुड़ाई के लिए बनी एक खास मशीन भी किसानों को समर्पित की, जहां कपास की तुड़ाई हाथ से करनी पड़ती हैं, वहां यह मशीन समय और श्रम की बचत कर देगी। इससे किसान की लागत भी कम हो जायेगी। चौहान ने कहा कि यह मशीन जल्द ही किसानों के लिए उपलब्ध होगी। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चौहान ने कहा कि देश की खेती में मशीनीकरण तेज हो रहा है और इसकी मिसाल यह है कि इस साल ट्रैक्टर इतने बिके कि दुनिया चकित रह गई। देश ट्रैक्टर की बिक्री में दुनिया में नंबर एक हो गया है, लेकिन किसान के पास केवल ट्रैक्टर ही नहीं, दूसरी मशीनें भी हों। उन्होंने कहा कि किसान और स्वयं सहायता समूहों की बहनों, के पास छोटी-छोटी मशीनें होनी चाहिए। ये मशीनें केवल केवल बोने की ही नहीं, प्रोसेसिंग करने की भी<span>  </span>होनी चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि 2.5 लाख रुपये की एक दाल की मशीन बनी है, जिसमें प्रति घंटे 20 किलो दाल बनाई जा सकती है। यह मशीन किसान, किसान का ग्रुप या सेल्फ हेल्प ग्रुप खरीद भी सकते हैं। खरीदने में भी कई तरह की सरकारी योजनाएं हैं। इसके अलावा दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में 50 प्रतिशत सब्सिडी भी मिलेगी। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 18:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्ता पक्ष ने बताया विकसित भारत का बजट, विपक्ष ने लगाया आम लोगों की अनदेखी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में बजट 2026-27 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इसे विकसित भारत की दिशा में अहम बताया, जबकि विपक्ष ने आम जनता, बुजुर्गों और राज्यों की अनदेखी का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-ruling-party-said-the-budget-of-developed-india-the/article-142958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/bjp’s-pradeep-bhandari-slams-rahul-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे विकसित भारत का बजट बताया जबकि विपक्ष ने इसमें आम लोगों की अनदेखी का आरोप लगाया। </p>
<p>महाराष्ट्र से शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि बजट में बुजुर्गों की अनदेखी की गयी है। अनुमान है कि 2050 में करीब 30 करोड़ देशवासी 60 साल से अधिक उम्र के होंगे। रेल किराये में उन्हें दी जाने वाली रियायत कोराना के समय में समाप्त की गयी थी जिसे अब तक बहाल नहीं किया गया है। उन्होंने इलाज पर होने वाले खर्च पर आयकर में छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की।</p>
<p>राजस्थान से भाजपा के मदन राठौर ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के समय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 98 अरब डॉलर था जो अब बढ़कर 165 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा मोबाइल निर्माता बना है। परमाणु उर्जा क्षमता 4,780 मेगावाट से बढ़कर 8880 मेगावाट हो गयी। मौजूदा सरकार ने नये एम्स, आईआईटी और एयरपोर्ट बनाये। राजमार्ग निर्माण 12 किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर 28 किमी प्रतिदिन पर पहुंच गया। सरकार ने विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाये। </p>
<p>कर्नाटक से कांग्रेस के जी.सी. चंद्रशेखर ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते से मेक इंडिया को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि अच्छे दिन और अमृतकाल का असर यह हुआ कि साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के खाते में 295 करोड़ रुपये थे जो अब बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये हो गया है, एक कारोबारी जिसका नेटवर्थ 44,000 करोड़ रुपये था अब 12-13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, लेकिन किसानों की आय अब तक दोगुनी नहीं हुई। </p>
<p>बजट को कॉरपोरेट के हित में बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि साल 2014 से पहले भी दुनिया में भारत का सम्मान था, भारत 2014 से पहले भी निर्यात करता था और भारत का आई टी सेक्टर 2014 से पहले भी एक वैश्विक पावरहाउस था। बिहार से भाजपा के शंभू शरण पटेल ने कहा कि यह बजट साल 2047 तक भारत को विकासशील देश से विकसित देश बनाने वाला है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और कुछ ही साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। मखाना बोर्ड के लिए 3,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिससे बिहार से किसान-मजदूर लाभांवित होंगे। राज्य में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। पांच नये एक्सप्रेस-वे और सात वंदे भारत एक्सप्रेस देने का काम हुआ है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 50 साल में एक एम्स दिया था। वाजपेयी जी की सरकार ने सात एम्स दिये और मोदी सरकार ने उसे बढ़ाकर 22 कर दिया। गुजरात से भाजपा के मयंक कुमार नायक ने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए यह बजट पेश किया गया है। पिछले 11 साल में गांवों में पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा पहुंचाने के लिए सरकार ने योजना बनायी। इस बजट में यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत गांवों के लोगों को रोजगार मिले।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 11 साल में गुजरात के लिए बजट आवंटन 30 गुना हुआ है। गुजरात से ही भाजपा के केसरी देवसिंह झाला ने बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं तब भारत अपना परचम लहरा रहा है। जब पूरी दुनिया में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दो-तीन प्रतिशत के बीच है, चीन भी चार-पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, भारत सात प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है। </p>
<p>केरल से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संदोष कुमार पी. ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें आम लोगों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में केरल के लिए कुछ नहीं किया गया है। यदि केंद्र सरकार को केरल के 100 रुपये की आमदनी होती है तो बजट में कम से कम 50 रुपये वापस दिये जाने चाहिये, लेकिन सिर्फ 25 रुपये केरल को वापस मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिये।</p>
<p>उत्तर प्रदेश से भाजपा सदस्य अमर पाल मौर्य ने 2026-27 के बजट को अंत्योदय का बजट और गरीब कल्याण का बजट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को जब राष्ट्रपति संबोधित कर रही थीं तो विपक्षी दलों ने उस समय इसलिए विरोध किया क्योंकि वह एक गरीब परिवार की आदिवासी महिला हैं। </p>
<p>उत्तर प्रदेश से भाजपा की सीमा द्विवेदी ने बजट को 2047 के विकसित भारत की नींव बताते हुए कहा कि महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना से गांवों के बुनकरों और हस्तशिल्पियों को काफी लाभ होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भी एक आयुर्वेदिक संस्थान बनाने की मांग की। त्रिपुरा से भाजपा के राजीब भट्टाचार्जी ने कहा कि पिछले 11 साल में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत पर पहुंच गया। </p>
<p>सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने का काम किया है। शिक्षा बजट में 14 प्रतिशत और स्वास्थ्य बजट में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। पूर्वोत्तर में रेल संपर्क बढ़ाने के लिए 11,486 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मध्य प्रदेश से भाजपा के बंसीलाल गुर्जर ने कहा कि यह बजट गरीब, युवा, किसान, महिलाओं को सशक्त बनाने का बजट है। किसान मोदी सरकार के एजेंडे में पहले स्थान पर है। पिछले 11 साल में जो योजनाएं सरकार लायी है उनके माध्यम से किसान सशक्त हो रहा है। इस दौरान कृषि के लिए बजट आठ गुना किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:42:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में विपक्ष का संसद भवन में विरोध प्रदर्शन, किसानों के हितों को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में कांग्रेस व इंडिया गठबंधन नेताओं ने अमेरिका संग व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन किया। किसानों के भारत बंद का समर्थन करते हुए समझौते को किसान-विरोधी बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opposition-protests-in-parliament-house-against-india-us-trade-agreement-accused/article-142891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने गुरुवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार के बाहर अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि इसमें किसानों के हितों को नजरअंदाज किया गया है।</p>
<p>गठबंधन के नेताओं ने हाथों में बैनर तथा तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) के नेता एन के प्रेमचंद्रन तथा अन्य नेताओं ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की और कहा कि यह समझौता किसान हितों के खिलाफ है।</p>
<p>संसद भवन में प्रदर्शन कर रहे सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रावधानों के खिलाफ किसानों के भारत बंद के आह्वान के साथ भी एकजुटता व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 14:26:01 +0530</pubDate>
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