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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 51: सफाई व्यवस्था और पार्कों की नहीं हो रही देखरेख, नालियों में गंदगी; टूटे झूले और जाम चैंबर से परेशान वार्डवासी</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय लोगों को उम्मीद जल्द ही  असुविधाओं से निजात मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-51---residents-are-troubled-by-the-lack-of-sanitation-and-park-maintenance--filth-in-drains--broken-swings--and-clogged-chambers/article-128040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वार्ड में अब तक कई विकास कार्य हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय रहवासी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। वार्ड की सड़कों पर लगी रोड़ लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिससे रात में अंधेरा और असुरक्षा का माहौल बना रहता है। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोग हर रोज परेशान हैं। वहीं, बने हुए पार्कों की उचित देखरेख न होने से उनकी स्थिति बिगड़ती जा रही है। वहीं वर्षों से जाम हो रहे चेम्बर समय पर साफ नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।  वार्डवासी का कहना है की कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो पा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम ने समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। वार्डवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी आवाज जल्द ही सुनी जाएगी और क्षेत्र को गंदगी और असुविधाओं से निजात मिलेगी।</p>
<p><strong>चैंबर हो रहे जाम</strong><br />अंबेडकर कॉलोनी में बने चैंबरों की स्थिति सही नही है। वार्डवासियों का कहना है कि इन चैंबरों की बनावट ही सही तरीके से नहीं की गई। परिणामस्वरूप बरसात के समय ये चैंबर जाम हो जाते हैं और उनका गंदा पानी सड़क पर फैलकर पूरे क्षेत्र को दुर्गंधयुक्त बना देता है। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />सम्पूर्ण थर्मल कॉलोनी, कुन्हाडी थाना, संत तुकाराम सामुदायिक भवन, अम्बेडकर कॉलोनी, हनुमानगढी का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>नालियों की समय पर सफाई नहीं होती, जिसके कारण उनमें गंदगी जमा रहती है। गंदा पानी भरने से मच्छर व अन्य कीड़ पनपते हैं और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है जब गंदा पानी घरों के पास तक भर जाता है।<br /><strong>- राजेश वैष्णव, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड के अंदर मौजूद पार्कों की स्थिति भी नाराजगी का कारण बनी हुई है। पार्कों में लगाए गए झूले लंबे समय से टूटे पड़े हैं और उनकी मरम्मत नहीं की गई है। यही नहीं, पार्कों में बड़ी-बड़ी जंगली घास फैली हुई है जिससे बच्चों के खेलने की जगह पूरी तरह असुरक्षित हो गई है। <br /><strong>- कमलेश, वार्डवासी</strong></p>
<p>आवारा कुत्तों की समस्या भी लगातार बढ़ रही है।रात के समय कुत्तों का भय इतना ज्यादा होता है कि लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। कई बार कुत्तों के झुंड हमला भी कर देते हैं। <br /><strong>- महावीर शर्मा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेरे द्वारा वार्ड में कई विकास कार्य करवाए गए है। सफाई व्यवस्था भी काफी सही है। लेकिन वार्ड में जो समस्याएं है इन सभी समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नगर निगम केवल कागजों में सफाई और विकास कार्यों का दावा करता है, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। सरकार बदलतें ही अधिकारियों का रवैया भी बदल गया र्है। जिसका खामियाजा वार्डवासीयों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- अनिल सुवालका, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 14:30:30 +0530</pubDate>
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                <title>दशहरा मेले में इस बार नहीं लगेगा महंगाई का तड़का, खाद्य पदार्थ और झूलों की नहीं बढ़ेगी रेट</title>
                                    <description><![CDATA[मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है गत वर्ष के समान ही दुकानों का किराया लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-dussehra-fair-will-not-be-affected-by-inflation-this-time--food-prices-and-swings-will-not-increase/article-127868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक ओर जहां महंगाई लगातार बढ़ रही है। वहीं उसका असर इस बार दशहरे मेले में नहीं दिखाई देगा। दशहरा मेले में महंगाई का तड़का नहीं लगेगा। विशेष रूप से खाद्य पदार्थ और झूलों पर। दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो दो दिन पहले नवरात्र के दिन से हो गया है लेकिन अभी तक भी मेले में पूरी दुकानें नहीं लग पाई है। बाहर से आने वाले दुकानदार अभी तक बहुत कम संख्या में आए। हालांकि स्थानीय व्यापारी व दुकानदारों द्वारा अपने हिसाब से दुकानें तैयार की जा रही है। जिससे खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले ही लग पाए हैं।  दशहरा मैदान के फेज एक में झूला मार्केट से लेकर मैदान में अन्य निर्धारित स्थानों पर हर साल लगने वाले परम्परागत झूले लग रहे है। वहीं नसीराबाद का कचौड़ा, पकौड़ी व सोफ्टी और फास्ड फूड की दुकानें लगना शुरु हो गई है।  दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेले में खाद्य पदार्थ व झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। खाद्य पदार्थ के दुकानदार सुनील वैष्णव ने बताया कि नसीराबाद का कचौड़ा व गोभी के पकौड़े, गुलाब जामुन व अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत इस बार भी वही है जो गत वर्ष थी।  सोफ्टी के  दुकानदार प्रमोद लोधा का कहना है कि मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है। गत वर्ष के समान ही इस बार भी दुकानों का किराया लिया गया है। इस कारण से सोफ्टी की दरों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिससे 30 से 50 रुपए के बीच ही सोफ्टी की रेट है। हालांकि कई दुकानदार 20 रुपए में भी बेचते हैं।  वहीं झूला संचालक जाकिर हुसैन ने बताया कि मेले में जहां परम्परागत रूप से जो झूले आते हैं उनकी संख्या पहले से भी अधिक हो गई है। करीब 60 से ज्यादा झूले लगेंगे। ऐसे में इस बार भी झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। जितनी रेट गत वर्ष थी उतनी ही रखी गई है। 30-40 रुपए से लेकर 80 रुपए तक ही रेट है। </p>
<p><strong>नए झृूलों की रेट अधिक है</strong><br />वहीं मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि मेला समिति की ओर से इस बार मेले में आवंटित दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसका मकसद मेले में आने वाले व्यापारियों के साथ ही आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़ाना है। इस बार भी झूला संचालकों से पुरानी दर पर ही झूले संचालित करने को कहा गया है।  उन्होंने बताया कि इस बार मेले में कई नए व आकर्षक झूले भी लगेंगे जो पहली बार आएंगे। ये झूले बड़े होने से इनकी रेट सामान्य झूलों से कुछ अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 14:51:59 +0530</pubDate>
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                <title>बाल उद्यान में बच्चों के झूले तो हैं लेकिन झूलने लायक एक भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[7 साल पहले पार्क पर किए थे लाखों रुपए खर्च।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-swings-for-children-in-bal-udyan-but-none-of-them-are-fit-for-swinging/article-103240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर में भगवान महावीर के नाम पर बाल उद्यान तो बनाया हुआ है। उस उद्यान में बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं लेकिन इसकी हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि वहां एक भी झूला झूलने लायक नहीं है। सभी टूटे होने से बच्चों के चोट लगने का खतरा बना हुआ है। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 35 में जयपुर गोल्डन बहुमंजिला पार्किंग के सामने मुख्य मार्ग पर तालाब किनारे है भगवान महावीर बाल उद्यान। तालाब के किनारे और मैन रोड पर होने से यहां से गुजरने वाले अधिकतर लोग इस उद्यान को देखकर अनायास रूक जाते है। अपने छोटे बच्चों को पार्क में लेकर जाते हैं। जिससे वे कुछ देर बच्चों को पार्क में घुमा सकें और उन्हें छोटे-छोटे झूलों का आनंद दिला सके। लेकिन अधिकतर लोग वहां अंदर जाकर पार्क की हालत देखकर ही  बच्चों को बिना झूला झुलाए ही वापस लौट रहे हैं। इसका कारण पार्क के सभी झूलों का टूटा होना है। </p>
<p><strong>2018 में हुआ था पार्क का लोकार्पण</strong><br />पार्क  के विकास कार्यों का लोकार्पण अप्रैल 2018 में कोटा उत्तर के तत्कालीन विधायक प्रहलाद गुंजल व न्यास के अध्यक्ष राम कुमार मेहता व महापौर महेश विजय ने किया था। उसके बाद से यह पार्क कुछ समय तक तो सही रहा। लेकिन वर्तमान में बदहाली का शिकार हो रहा है।</p>
<p><strong>न्यास अधिकारी नहीं देते ध्यान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर वार्ड 35 के स्थानीय पार्षद सुनील शर्मा का कहना है कि यह पार्क उनके वार्ड  में है लेकिन पार्क केडीए(न्यास) के अधीन आता है। इस पार्क के टूटे झूले सही करवाने के लिए अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया लेकिन वे कोई ध्यान ही नहीं देते। इस पार्क के टूटे झूले सही करवाने के प्रयास किए जाएंगे। इधर कोटा विकास प्राधिकरण के एक्सइएन सुमित चित्तौडा का कहना है कि झूलों व उसकी मरम्मत का आंकलन कराया जा रहा है। उसके बाद उन्हें सही कराया जाएगा।</p>
<p><strong>एक भी झूला नहीं है सही</strong><br />पार्क में मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही बच्चों की फिसल पट्टी वाला झूला है। दो पट्टी हैं लेकिन दोनों नीचे से टूटी हुई है। जिससे बच्चा यदि फिसलता हुआ नीचे आता है तो उस टूटे हिस्से के पास आने पर उसके चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में परिजन अपने बच्चों को इस झूले में नहीं झुलाकर दूसरे झूले की तरफ जाते हैं। पास ही लोहे के पाइप पर जंजीर से लटके हुए दो पट्टे वाले झूले हुआ करते थे। लेकिन वे दोनों ही झूले गायब हैं। वहां सिर्फ लोहे के पाइप ही नजर आ रहे है। इसके बाद परिजन आगे बढ़कर तालाब की तरफ नीचे बने हिस्से में जाते हैं। वहां जाकर भी देखते  हैं कि फिसल पट्टी वाला झूला बीच से ही टूटा हुआ है। साथ ही छोटे बच्चों के लिए खिलौने वाले झूले लगे हुए थे। वे भी अब वहां नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में परिजन पार्क में आते हैं और बिना रूके वहां से चंद मिनटों में ही वापस लौट रहे है। ऐसा मंगलवार को कई लोगों के साथ हुआ। </p>
<p><strong>नल टूटा हुआ और कैंटीन बंद</strong><br />पार्क में पीने के पानी के लिए हालांकि वाटर कूलर लगा हुआ है। लेकिन वहां नल है जो टूटा हुआ है। जिससे पौधों को पानी देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। पौधों व क्या रियों में पानी नहीं देने से अधिकतर पौधे सूखे हुए हैं। पार्क में चारों तरफ कचरा फेला हुआ है। इतना ही नहीं पार्क के अंदर अबसे अंत में कैंटीन के रूप में 3 दुकानें बनी हुई है। जिन पर टीन शेड भी लगा है। लेकिन हालत यह है कि यह बंद है। जिससे यहां आने वाले खाद्य पदार्थों का आनंद नहीं ले पा रहे है। </p>
<p><strong>टॉयलेट बदहाल</strong><br />पार्क में कैंटीन के पास ही टॉयलेट तो बना हुआ है। लेकिन वह  पूरी तरह से बदहाल हो रहा है। उसे देखने से ऐसा लगा रहा है मानों बरसों से इसका उपयोग ही नहीं हुआ। साथ ही इसकी सफाई तक नहीं की गई। जिससेस लोग इसका उपयोग कर सके।  हालांकि इस पार्क में चौकीदार तैनात है। उसके बाद भी पार्क दुर्दशा का शिकार है। </p>
<p><strong>पार्क में झूले ही होते हैं आकर्षण</strong><br />पार्क में घूमने आए लोगों का कहना है कि हर पार्क में बच्चों के लिए झूले ही आकर्षण का केन्द्र होते हैं। भीमगंजमंडी निवासी नरेश मीणा ने बताया कि वे परिवार समेत दादाबाड़ी जा रहे थे। रास्ते में यह पार्क नजर आया तो बच्चा झूले के लिए जिद करने लगा। सोचा कुछ देर इसे झूला झला देते हैं। लेकिन अंदर आकर देखा तो एक भी झूला सही नहीं है। सभी टूटे होने से बच्चे के चोट लगने का खतरा होने से वापस जाना पड़ रहा है। रामपुरा निवासी अनिल सक्सेना ने बताया कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह सबसे नजदीक का पार्क है। भगवान महावीर के नाम पर यह पार्क बनाया गया है। लेकिन यह पार्क अनदेखी का शिकार होने से बदहाल हो रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2025 15:29:19 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्दशा की भेंट चढ़ा बच्चों का मनोरंजन</title>
                                    <description><![CDATA[गार्डन में लगे झूलों में से अधिकतर तो टूटे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-s-entertainment-fell-victim-to-plight/article-54246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/durdasha.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल गार्डन में लोग परिवार समेत घूमने तो जा रहे हैं लेकिन बच्चे झूलों का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। गार्डन में लगे कई झूले तो टूटे हुए हैं जबकि कई झूले बंद पड़े हुह हैं। नगर निगम की ओर से संचालित चम्बल गार्डन  शहर का सबसे प्रसिद्ध गार्डन है। यहां बरसों से लोग घूमने आते हैं। नदी किनारे होने से यह शहर वासियों की ही नहीं बाहर से आने वालों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र है। लेकिन पिछले काफी समय से निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते गार्डन की दुर्दशा हो रही है। गार्डन घूमने गए लोगों का कहना है कि परिवार समेत घूमने जाने पर बच्चे वहां झूला झूलने की जिद करते हैं। गार्डन में लगे झूलों में से अधिकतर तो टूटे हुए हैं। जिन पर बच्चों को झूलने से चोट लगने का खतरा बना हुआ है। वहीं जो झूले सही हैं वे बंद पड़े हुए हैं।  लोगों का कहना है कि गार्डन में पहले नगर निगम की ओर से निजी फर्म को झृलों का टेंडर दिया था। जिसमें निर्धारित टिकट लेकर बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे। लेकिन पिछले काफी समय से ये झूले बंद हैं। जिससे गार्डन में आने वाले बच्चे उन झूलों का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। विज्ञान नगर निवासी अमजद खान ने बताया कि वे अपने बच्चों को घुमाने चम्बल गार्डन लेकर गए थे। लेकिन वहां कई झूले तो टूटे हुए मिले। जबकि कई झूले बंद थे। जिससे बच्चों को बिना झूलों का आनंद लिए ही लौटना पड़ा। </p>
<p><strong>ट्रेन के घूम रहे चक्के</strong><br />लोगों ने बताया कि चम्बल गार्डन में बच्चों के मनोरंजन के लिए एक मात्र टॉय ट्रेन है। यह अभी चल रही है। लेकिन यहां भी 40 रुपए बड़ों का और 20 रुपए बच्चों का टिकट दने के बाद भी जरा सा ही चक्कर घुमाया। जिसमें बच्चों को ही मजा नहीं आया। लोगों का कहना है कि नयापुरा स्थित सीबी गार्डन में भी कई झूले टूटे हुए हैं। लेकिन नाना देवी से सीबी गार्डन तक चलने वाली जॉय ट्रेन में घूमने का आनंद आता है। यह ट्रेन दो गार्डन का चक्कर काटती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चम्बल गार्डन में झूलों का टेंडर दस साल के लिए जुलाई 2014 में किया गया था। प्रकाश ए’यूमेंट फर्म इसका सचालन कर रही है। वैसे तो यह जुलाई 2024 तक है। लेकिन इसके संचालन तिथि को लेकर कुछ असमंजस बना हुआ है। उसकी जांच की जा रही है। जांच होने तक झूलो को फिलहाल बंद किया हुआ है। मामले का शीघ्र ही निस्तारण कर झूलों को या तो शुरू कर दिया जाएगा। या फिर दोबारा से टेंडर कर झूले चालू किए जाएंगे। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2023 16:27:03 +0530</pubDate>
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                <title>टूटे झूलों पर झूलता बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[नए कोटा में कहीं अगर सबसे ज्यादा पार्क हैं तो वह विज्ञान नगर इलाके में हैं। जितनी तेजी से यहां पार्कों का निर्माण हुआ उतनी तेजी से दुर्दशा का शिकार भी हुए। हालात यह है, कहीं, झूले पूरी तरह से टूट गए तो कहीं आधे-अधूरे टूटे हुए हैं। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-swinging-on-broken-swings/article-11618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vigyan-nagar-park-durdasha.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नए कोटा में कहीं अगर सबसे ज्यादा पार्क हैं तो वह विज्ञान नगर इलाके में हैं। जितनी तेजी से यहां पार्कों का निर्माण हुआ उतनी तेजी से दुर्दशा का शिकार भी हुए। हालात यह है, कहीं, झूले पूरी तरह से टूट गए तो कहीं आधे-अधूरे टूटे हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा रिपसनी झूले बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। लोहे की चददर वाली रिपसनी जगह-जगह से कटी हुई है। झूलने के दौरान बच्चे जख्मी हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने कई बार पार्षदों से लेकर नगर निगम के अफसरों तक चक्कर काटे लेकिन झूलों को दुरूस्त करवाने में किसी ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजन, बच्चे टूटे झूलों पर झूलने को मजबूर हैं। <br /><br /><strong>10 साल से टूटे हैं झूले</strong><br />माहात्मा गांधी पार्क विकास समिति के सचिव हरीश सोनी ने बताया कि छत्रपुरा तालाब से गांधीगृह तक तीन पार्कों की देखरेख समिति करती है। इन पार्कों में करीब 10 साल से झूले टूटे हैं। वहीं लोहे की रिपसनी कई जगहों से कटी पड़ी है। झूलने के दौरान बच्चे जख्मी हो जाते हैं। पार्षद से संबंधित अधिकारियों से शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ।<br /><br /><strong> टूटे झूलों की मरम्मत और दीवारों पर लगेगी रेलिंग</strong><br /> वार्ड 57 के पार्षद कपिल शर्मा ने बताया कि नगर निगम से वार्ड में जरूरी कार्यों के लिए 1 करोड़ का बजट मिला है। इससे पार्कों की दीवारों पर लोहे की रेंलिग लगवाई जाएगी। साथ ही टूटे झूलों की मरम्मत करवाने के साथ बंद पड़ी बोरिंग व खुले में पड़े बिजली के तारों को सही करवाएंगे। इसके अलावा पार्कों का जीर्णोंद्धार भी करवाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 14:29:59 +0530</pubDate>
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