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                <title>animal husbandry - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान विधानसभा: मांडलगढ़ पशु चिकित्सालय को लेकर राज्य सरकार का पलटवार, जोराराम कुमावत ने कहा-नियमानुसार रिक्त पदों को भरने की होगी कार्यवाही</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को विधायक गोपाल लाल शर्मा ने मांडलगढ़ के पशु चिकित्सालयों में डॉक्टरों और कंपाउंडरों के रिक्त पदों पर सवाल उठाए। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने 'माल का खेड़ा' चिकित्सालय को क्रमोन्नत (Upgrade) करने का आश्वासन दिया और कहा कि नियमानुसार रिक्त पदों को भरने की आगामी कार्यवाही की जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-upgrade-mandalgarh-veterinary-hospital-as-per-rules/article-145328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jogaram-kumawat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पशु चिकित्सालय के क्रमोन्नयन का सवाल उठा। विधायक गोपाल लाल शर्मा ने यह सवाल उठाया। सदन में गोपाल लाल ने पूछा कि आपने जितने अस्पताल खोले है, कहीं डॉक्टर नहीं कहीं कंपाउंडर नहीं, कब स्टाफ लगाया जाएगा। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने जवाब देते हुए कहा कि माल का खेड़ा पशु चिकित्सालय को क्रमोन्नत करने की कोशिश की जाएगी। नियमानुसार सरकार आगामी कार्यवाही करेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:58:39 +0530</pubDate>
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                <title>पेड़ों की नहीं चढ़ेगी बलि, गोकाष्ठ मशीन बनेगी सहारा</title>
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                        <![CDATA[बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-will-not-be-sacrificed--cow-wood-machine-will-be-the-support/article-114042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले के गौ-पालकों के लिए अच्छी खबर है। अब पेड़ों की लकड़ी की बजाय गोबर की लकड़ी जलाने के काम आएगी। इसके लिए सरकार गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराएगी। इस पूरी योजना में प्रदेश की सौ गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इनमें कोटा जिले की गोशालाओं को भी शामिल किया गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। जिन गोशालाओं में गोवंश 1000 से अधिक है, उनको बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<p><strong>हजारों पेड़ कटने से बचेंगे</strong><br />सरकार की इस योजना का उदे्श्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का है। अभी लकड़ी के लिए रोजाना पेडों को काटा जा रहा है। पेड़ों को बचाने के लिए सरकार ने गोबर से बनी लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय किया है। चयन उपरान्त लाभार्थी पात्र गोशाला द्वारा अपने हिस्से की कुल लागत की बीस प्रतिशत राशि संबंधित जिला संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग को जमा करवाई जाएगी। तत्पश्चात लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ मशीन चयनित फर्म की ओर से निर्धारित दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।  अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी मोक्षधाम में काम आएगी। अंतिम संस्कार के लिए ये गोबर से बनी लकड़ी बेची जाएगी। इससे गोशालाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी। </p>
<p><strong>गोशालाओं की आय में होगी बढ़ोतरी</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार गोवंश के गोबर से मशीन के माध्यम से गोकाष्ठ बनाई जाती है। गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन से दो किलोग्राम गोबर से एक किलोग्राम गोकाष्ठ (गोबर के लठ्ठे ) तैयार होते हैं। जिसका उपयोग ईंधन के रूप किया जा सकता है। लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की होगी, जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे। गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। इस दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा। गोकाष्ठ को मोक्ष धाम अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन आदि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, उसका बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>योजना में यह है नियम</strong><br />- कोई भी लाभार्थी गोशाला इस योजना के तहत प्राप्त गोकाष्ठ मशीन को 10 साल से पहले बेचान नहीं कर सकेंगी ना ही इन्हें किसी अन्य को सुपुर्द कर सकेंगी।<br />- लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की आय होगी जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे ।<br />- गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। उक्त दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा।<br />- गोकाष्ठ को मोक्ष धाम / अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन इत्यादि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, का बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p>लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग होने से रोजाना पेड़ों की कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण संतुलन को काफी क्षति पहुंच रही है। ऐसे में गोशालाओं में गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराने की सरकार की यह पहल अच्छी है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>-डॉ. राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा की थी। इनमें कोटा जिले की गोशालाएं भी शामिल हैं। पर्यारण संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की गई है।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 17:52:59 +0530</pubDate>
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                <title>पशुपालन ने थामा एआई का दामन, मैसेज करते ही उपचार के लिए पहुंचेंगे पशु चिकित्सक</title>
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                        <![CDATA[पशुपालकों को बेहतर सुविधा देने के लिए पशुपालन विभाग ने अब एआई का दामन थामा है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/animal-husbandry-has-embraced-ai/article-112875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशुपालकों को बेहतर सुविधा देने के लिए पशुपालन विभाग ने अब एआई का दामन थामा है। इसके जरिए मवेशियों को घर पर ही उपचार मिलेगा। महज एक मैसेज कर पशुपालक पशु चिकित्सक को घर पर बुलवाकर बीमार पशुओं का उपचार करवा सकेंगे। साथ ही आवश्यकता पर चिकित्सक से परामर्श भी मिल सकेगा। विभाग की ओर से इस सुविधा को मोबाइल वेटनरी यूनिट से जोड़ा गया है। यानी की पशुपालकों को 1962 के द्वारा ही यह सुविधा दी जाएगी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो मोबाइल वैटेरीनरी यूनिट्स से संबंधित यह चैटबॉट एक नवाचार है। पशुपालन विभाग ने 1962-एमवीयू राजस्थान (चैटबॉट नंबर 9063475027) का हाल ही में लोकार्पण कर सेवा की शुरुआत की।</p>
<p><strong>रोबोटिक्स व नैनो तकनीक का भी बढ़ा उपयोग</strong><br />पशु चिकित्सकों के अनुसार आज एआई आधारित इमेजिंग, आनुवंशिक परीक्षण, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बीमारी की शुरूआती अवस्था में ही पहचान और उपचार संभव हो पा रहा है। एआई का उपयोग पशु प्रजनन नीति सुधार, स्वास्थ्य निगरानी और डेटा एनालिटिक्स में हो रहा है। वहीं नैनोटेक्नोलॉजी के जरिए दवाएं सीधे प्रभावित कोशिकाओं तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे सटीक और लक्षित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। सर्जरी के क्षेत्र में भी रोबोटिक तकनीक के उपयोग से पशुओं की सर्जिकल प्रक्रियाएं और अधिक सुरक्षित व कुशल बन रही हैं। अब इन सुविधाओं का विस्तार करने की प्रकिया चल रही है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों से बीमारी के बारे में मिलेगी सलाह</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार एआई आधारित नवाचारों द्वारा पारदर्शिता लाने के लिए व्हाट्स एप आधारित चैटबॉट सेवा शुरू की गई है। इसमें पशुपालक टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से अपने पशुओं की समस्या के उपचार के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। चैटबॉट शुरू होने से पशुपालक दोहरा लाभ ले सकते हैं। व्हाट्स एप पर मैसेज करने के बाद कॉल सेंटर से कॉल आएगा। इसमें पशुपालक से पूछा जाएगा कि वो परामर्श लेना चाहता है या उपचार के लिए वैन बुलवाना चाहता है। यदि पशुपालक परामर्श चाहता है तो उसे चिकित्सक से परामर्श दिलाया जाएगा। अन्यथा मोबाइल वेटनरी वैन भेजी जाएगी। इसे भविष्य में और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा जिससे विभाग की समस्त सेवाओं को एक ही छतरी के नीचे लाया जा सके।</p>
<p><strong>कारगर साबित हो रही एआई तकनीक</strong><br />आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग होने लगा है और यह कारगर भी साबित हो रही है। इस कारण अब पशुपालन विभाग ने भी पशुओं के उपचार में इस तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय किया है। आज निदान, उपचार और रोगों की शुरूआती पहचान में एआई आधारित इमेजिंग, आनुवंशिक परीक्षण और दूरस्थ निगरानी तकनीकें कारगर साबित हो रही हैं। इयूनोथेरेपी, जीन एडिटिंग और स्टेम सेल थेरेपी जैसी उन्नत विधाएं अब कैंसर जैसे जटिल रोगों के इलाज में भी आशा की किरण बन रही हैं। वहीं, नैनोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स से दवा वितरण और सर्जरी में नई दक्षता आई है। इन नवाचारों का लक्ष्य पशु स्वास्थ्य और कल्याण को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाना है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- जिले में कुल पशु-6.40 लाख<br />- जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां-180 <br />- प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय-16 <br />- पशु चिकित्सालय- 36 <br />- पशु चिकित्सा उप केंद्र- 124 </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अभी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन नहीं होने से बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी होती है। अब विभाग द्वारा नई सुविधा करने से काफी राहत मिलेगी। खासकर जिला मुख्यालय से दूर स्थित गांवों के लिए यह सुविधा कारगर हो सकती है।<br /><strong>-ओमशंकर खटाणा, पशुपालक</strong></p>
<p>पशुपालन विभाग ने व्हाट्स एप आधारित चैटबॉट सेवा शुरू की गई है। इसमें पशुपालक टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से अपने पशुओं की समस्या के उपचार के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। चैटबॉट शुरू होने से पशुपालकों को दोहरा लाभ मिलेगा। <br /><strong>- डॉ. गिरीश सालफळे, उप निदेशक, पशुपालन विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 15:19:38 +0530</pubDate>
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                <title>विभिन्न बीमारियों से तड़प रहे मवेशी, पंचायत समिति प्रधान को दिया ज्ञापन</title>
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                        <![CDATA[छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन पशुओं के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/cattle-are-suffering-from-various-diseases--cattle-keepers-are-helpless/article-108292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/copy-of-news-(11).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन पशुओं के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय तो है लेकिन यह अत्याधुनिक सुविधाओं से वंचित है। पशुपालकों को किसी भी गंभीर स्थिति में अपने पशुओं को जिला मुख्यालय (बारां) या फिर कोटा ले जाना पड़ता है, जो कि 70 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित है। इस समस्या को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय (पॉलिक्लिनिक) में क्रमोन्नत करने की मांग उठाई है।</p>
<p><strong>बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय... क्यों जरूरी?</strong><br />पशु चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। एक बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय  में निम्न सुविधाएं होती हैं। जैसे एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सुविधा, आपातकालीन सर्जरी और आॅपरेशन थियेटर,  पशुओं के लिए आईसीयू सुविधा, डेयरी उद्योग से जुड़े परीक्षण केंद्र, नियमित टीकाकरण और उपचार सेवाएं आदि है। <br /> <br /><strong>पंचायत समिति प्रधान को दिया ज्ञापन</strong><br />छीपाबड़ौद पंचायत समिति के प्रधान नरेश कुमार मीणा भी इस मांग को लेकर आगे आए और जयपुर पहुंचकर विधायक प्रताप सिंह सिंघवी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रामबिलास मीणा, टीकमचंद, दिलीप मीणा और ललित मालव भी उनके साथ मौजूद रहे।  पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की मांग रखी गई, ताकि पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और उन्हें अपने पशुओं को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में न ले जाना पड़े।<br />   <br /><strong>कब होगी मांग पूरी?</strong><br />छीपाबड़ौद और आसपास के गांवों के सैकड़ों पशुपालकों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है। क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को राहत देने के लिए इस चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करना अत्यंत आवश्यक है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस गंभीर समस्या का समाधान करता है। क्या सरकार पशुपालकों की आवाज सुनेगी, या फिर यह मांग भी अन्य सरकारी फाइलों की तरह धूल खाती रह जाएगी? जब तक इस मांग को पूरा नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र के पशुपालक चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p><strong>इलाज के अभाव में दम तोड़ते मवेशी</strong><br />छीपाबड़ौद के आसपास के गांवों में हजारों की संख्या में दुधारू पशु, बैल, भेड़-बकरियां आदि हैं। लेकिन जब ये पशु बीमार पड़ते हैं, तो उनका इलाज समय पर नहीं हो पाता। कई मामलों में पशुपालकों को इलाज के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है, लेकिन फिर भी सुविधाओं के अभाव में उनके पशु असमय दम तोड़ देते हैं।</p>
<p>छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन करने वाले हजारों किसानों की आजीविका पशुओं पर निर्भर है, लेकिन यहां पशु चिकित्सा सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। कई बार बीमार या घायल गायों और अन्य पशुओं को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती है।  सरकार को जल्द से जल्द इस मांग पर ध्यान देना चाहिए ताकि बेसहारा और जरूरतमंद पशुओं को उचित इलाज मिल सके और गो सेवा का कार्य और प्रभावी रूप से किया जा सके।"<br /><strong>- हेमराज नामदेव, सदस्य, राधव  माधव निराक्षित गौसेवा समिति।</strong></p>
<p>पशुपालकों को अपने बीमार या घायल पशुओं के इलाज के लिए 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जो आर्थिक और समय दोनों दृष्टि से मुश्किल भरा है। हमारी मांग है कि छीपाबड़ौद के प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय (पॉलिक्लिनिक) में क्रमोन्नत किया जाए। हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेगी और जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाएगी।<br /><strong>- नरेश कुमार मीणा,  प्रधान, पंचायत समिति छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p>छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन करने वाले हजारों परिवारों के लिए मवेशी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार का हिस्सा होते हैं। लेकिन जब ये पशु बीमार या घायल हो जाते हैं, तो यहां उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उनका इलाज नहीं हो पाता। कई बार पशुपालकों को मजबूरी में अपने मवेशियों को दूर जिला मुख्यालय तक ले जाना पड़ता है। जिससे समय और पैसे दोनों की बबार्दी होती है। <br /><strong>- सचिन नामदेव, समाजसेवी। </strong></p>
<p>छीपाबड़ौद में पशुपालकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपलब्ध संसाधन और चिकित्सा सुविधाएं उनकी जरूरतों को पूरा करने में अपर्याप्त हैं। बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की स्थापना होती है, तो न सिर्फ पशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। हम लंबे समय से इस मांग को लेकर प्रयासरत हैं और उम्मीद है कि जल्द ही यह मांग पूरी होगी। <br /><strong>- डॉ. रामप्रसाद नागर, चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सालय छीपाबड़ौद। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 15:47:31 +0530</pubDate>
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                <title>बीमार पशुओं की हेल्प करने में हांफ रही मोबाइल वैन</title>
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                        <![CDATA[एक ही दिन में सभी पशुओं को नहीं मिल पाता उपचार।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mobile-vans-are-struggling-to-help-sick-animals/article-104031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशुपालन विभाग की ओर से जिले में छह मोबाइल वेटरनरी वैन संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन नंबर 1962 पर प्राप्त कॉल अनुसार पशुपालक के द्वार पहुंचकर वैन के माध्यम से बीमार पशुओं उपचार किया जा रहा है। जिले में हेल्पलाइन पर बीमार पशुओं के उपचार के लिए कॉल अधिक आ रहे हैं। जबकि वैन की संख्या सीमित होने के कारण एक दिन में सभी पशुओं को उपचार नहीं मिल पा रहा है। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर पर पर फोन कॉल करने की अवधि को बढ़ा दिया है। इस नंबर पर सुबह सात बजे ही बीमार पशुओं के सम्बंध में सूचना मिल रही है। इस कारण प्रत्येक ब्लॉक से एक ही दिन में लगभग 10 से 12 कॉल आ रही है, जबकि उपचार 5 से 7 पशुओं का ही हो पा रहा है। शेष पशुओं का अगले दिन उपचार करना पड़ता है। </p>
<p>उपचार के लिए एक मोबाइल वैन नाकाफी : रामगंजमंडी क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि क्षेत्र में पशुओं के उपचार के लिए सरकार ने मोबाइल वैन की सुविधा तो शुरू कर दी है, लेकिन पशु संस्थाओं पर चिकित्सक लगाना भूल गई। इसके परिणामस्वरूप मोबाइल वैन पर अतिरिक्त भार पड़ गया। इस कारण पशु मोबाइल वैन भी समय पर पशुओं का उपचार नहीं कर पा रही है। उपखण्ड क्षेत्र में मात्र एक मोबाइल वैन है जो एक दिन में पांच या छह स्थानों पर जाकर पशुओं का उपचार करती है। हालात यह है कि प्रतिदिन मोबाइल वैन के लिए दस से ज्यादा कॉल आती हैं। जिनका समाधान उसी दिन नहीं हो पा रहा है।  ऐसे में रामगंजमंडी ब्लॉक के लिए अतिरिक्त पशु मोबाइल उपचार वैन सरकार को देनी चाहिए। इसलिए भी आ रही दिक्कत : जानकारी के अनुसार उपखंड क्षेत्र छोटे बड़े 38 पशु संस्थान हैं, जहां पशुओं का उपचार किया जाता है। विडंबना यह है कि 38 में से मात्र 11 संस्थानों पर ही डॉक्टर व कपाउंडर हैं, बाकी संस्थानों पर डॉक्टर कपाउंडर के पद खाली है। यहां लगे डॉक्टर कपाउंडरों का तबादला होने से पशुओं का इलाज नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पशुपालकों द्वारा 1962 पर फोन करके मोबाइल वैन को बुलाकर पशुओं का उपचार करवाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- जिले में कुल पशु-6.40 लाख<br />- जिले में संचालित मोबाइल वैन-6<br />- पशु चिकित्सा इकाइयां-180 <br />- प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय-16 <br />- पशु चिकित्सालय- 36 <br />- पशु चिकित्सा उप केंद्र- 124</p>
<p>हेल्पलाइन नंबर 1962 पर बीमार पशु के सम्बंध में दिन में सूचना दी थी।  शाम तक भी मोबाइल वैन की टीम उपचार करने के लिए नहीं आई। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।<br /><strong>- भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>प्रतिदिन दस से अधिक मामले आते हैं जिनमें से पांच से सात मामले तक ही वैन पहुंच रही है। बाकी अगले दिन करते हैं।<br /><strong>- डॉ. दीपक, मोबाइल वैन प्रभारी</strong></p>
<p>छह मोबाइल वैन संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन नंबर जयपुर से संचालित होती है। कॉल करने पर टिकट जनरेट होता है। इसके बाद मोबाइल वैन घर जाकर बीमार पशु का उपचार करती है। अभी बीमार पशुओं के सम्बंध में ज्यादा कॉल नहीं आ रही है।<br /><strong>- डॉ. हेमंत जैन, पशु चिकित्सक</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 18:01:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पक्षियों को मिलेगी तत्काल चिकित्सा सहायता पशुपालन विभाग ने बनाई मोबाइल यूनिट</title>
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                        <![CDATA[0141-2373237 और 94142 28901 पर कर सकते हैं संपर्क]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/birds-will-get-immediate-medical-aid-animal-husbandry-department-created/article-100655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मकर संक्रांति पर मांझे से घायल होने वाले पक्षियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशुपालन विभाग ने मोबाइल यूनिट बनाई है। इसके साथ ही जयपुर के पशु चिकित्सा संस्थानों के कार्मिक के अवकाश भी रद्द कर दिए है। पशुपालन, गोपालन और डेयरी के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा है कि मकर संक्रांति के दिन पॉलीक्लिनिक जयपुर सहित 16 अधीनस्थ पशु चिकित्सा संस्थाओं के किसी भी अधिकारी कर्मचारी को किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं होगा और मंगलवार को पतंगबाजी से घायल पक्षियों के उपचार के लिए सुबह 6 बजे से शाम के 8 बजे तक खुली रहेंगी। 20 जनवरी तक जयपुर शहर के सभी पशु चिकित्सा संस्थानों का समय सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक कर दिया गया है। सूचना प्राप्त होते ही यूनिट निर्धारित स्थान पर पहुंचेगी। पांच बत्ती स्थित पशु चिकित्सा पॉलिक्लीनिक में कंट्रोल रूम के लैडलाइन नंबर 0141-2373237 पर तथा डॉ. जितेंद्र राजोरिया से 9414228901 पर संपर्क किया जा सकता है। </p>
<p>डॉ. शर्मा ने बताया कि पशु चिकित्सालय हीरापुरा में डॉ. अमित गोयल 9024754721, गांधीनगर में डॉ. अनिल कुमार शांडिल्य 9414849055, दुर्गापुरा में डॉ. नीरज शुक्ला 9414028244, नाहरी का नाका में डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत 9829005334, सिरसी में डॉ. विक्रमसिंह 9414467759, हरमाड़ा में डॉ. एनके वर्मा 9660324545, पुरानी बस्ती में डॉ. पुष्पेन्द्र कालोरिया 9414726733, आदर्श नगर में डॉ प्रवीण कुमार सोनी 9829412052, आमेर में डॉ. सुनील जैन 8302437820 एवं जगतपुरा में डॉ. मोेहनलाल मीणा 7742439975 से संपर्क किया जा सकता है। मानसरोवर में डॉ. निरूपा सिरवी 9414324891, जयपुर उत्तर में डॉ. जितेंद्र कुमार 8290015392, झोटवाड़ा में डॉ. रामकृष्ण बोहरा 9414454282, सांगानेर में डॉ. कौशल मंडावरा 9413805281 तथा पशु विकित्सालय जयपुर में डॉ. राकेश कुमार चौधरी 9414276460 से संपर्क किया जा सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 11:17:02 +0530</pubDate>
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                <title>अब गोशालाओं की होगी ग्रेडिंग, हर माह बनेगा रिपोर्ट कार्ड</title>
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                        <![CDATA[गोपालन निदेशालय ने शुरू की नई व्यवस्था।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-there-will-be-grading-of-cow-shelters--report-card-will-be-made-every-month/article-99598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/121212.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गोवंशों को बेहतर सुविधा प्रदान करने वाली गोशालाओं को अब सम्मानित किया जाएगा। नए साल में गोपालन निदेशालय की ओर से गोशालाओं की गे्रडिंग व रैंकिंग की नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत गोपालन निदेशालय की ओर से अनुदानित गोशालाओं में गोवंश को बेहतर सुविधा प्रदान करने लिए मुख्य निष्पादन संकेतकों के आधार पर मासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर रैंकिंग व ग्रेडिंग की व्यवस्था की जाएगी। इस सम्बंध में  निदेशालय द्वारा कोटा सहित प्रदेश के सभी जिलों में पशुपालन विभाग को पत्र जारी किया गया है। अब पशुपालन विभाग की ओर से इस सम्बंध में जिले में संचालित अनुदानित गोशाला प्रबंधन समितियों से आवेदन करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस तरह से होगी रैंकिंग: पशुपालन विभाग के अनुसार गोशालाओं में गोवंश के लिए आधारभूत संरचना, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता प्रबंधन एवं पंचगव्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, दुधारू गोवंश की सुव्यवस्था, गोशाला आवास में पेयजल, बिजली सुविधा आदि को सर्वोत्तम व समुचित प्रोत्साहित करने एवं गोशाला में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए 100 मुख्य संकेतकों के साथ चैक लिस्ट के आधार पर मासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर गोशालाओं की रैंकिंग व ग्रेडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थित गोशालाओं के लिए यह व्यवस्था शुरू होगी।</p>
<p><strong>यह रहेगी प्रक्रिया </strong><br />जानकारी के अनुसार रैंकिंग के लिए निर्धारित संकेतकों की सूचना गोशाला प्रबंधक से गूगल शीट के माध्यम से ली जाएगी। गूगल फॉर्म सबंधित क्यूआर कोड को स्कैन करके या लिंक को ओपन करके प्राप्त कर सकते हैं। विगत माह की उपरोक्त सूचना व अगले माह की 1 तारीख से लेकर 5 तारीख तक भेजनी होगी। समस्त गोशालाओं के मुख्य संकेतकों के आधार पर प्राप्तांकों के समग्र योग के आधार पर रैंक निर्धारित की जाएगी। साथ ही प्रत्येक गोशाला का मासिक रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया जाएगा। गोशालाओं के मुख्य संकेतकों के समग्र प्राप्तांकों के योग के आधार पर मूल्यांकन ग्रेडिंग व्यवस्था से ग्रेड निर्धारित की जाएगी।</p>
<p><strong>उत्कृष्ट गोशालाएं 26 जनवरी को होंगी सम्मानित </strong><br />सभी गोशालाओं की मार्कशीट सभी उच्च अधिकारियों यथा संभाग स्तरीय अतिरिक्त निदेशक, जिला स्तरीय संयुक्त निदेशक को भी प्रेषित की जाएगी। सभी उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थ गोशालाओं के निरीक्षण के दौरान सुनिश्चित करेंगे कि गोशाला की ओर से भरी गई रिपोर्ट सही है तथा उसमें सुधार के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इसके बाद जिले की उत्कृष्ट गोशालाओं का चयन कर उन्हें 26 जनवरी को सम्मानित भी किया जाएगा। निदेशालय का मानना है कि इस व्यवस्था को लागू करने से गोशालाओं में सुविधा विकास एवं अपेक्षित गतिविधियों के क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। विभाग स्तर पर आयोजित की जाने वाले समीक्षा बैठकों में भी गोशालाओं के कार्य मूल्यांकन में सहायता मिलेगी। </p>
<p>गोपालन निदेशालय की यह पहल सराहनीय हैं। गोशालाओं में गोवंशों के बेहतर रखरखाव के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। ऐसे में अब सम्मान मिलने से गोशाला संचालकों का मनोबल बढेÞगा।<br /><strong>-दिग्विजय, गोशाला संचालक</strong></p>
<p>गोवंशों को बेहतर सुविधा प्रदान करने वाली गोशालाओं को अब सम्मानित किया जाएगा। नए साल में गोपालन निदेशालय की ओर से गोशालाओं की गे्रडिंग व रैंकिंग की नई व्यवस्था शुरू की गई है। <br /><strong>-अनिल कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jan 2025 15:29:59 +0530</pubDate>
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                <title>डेयरी क्षेत्र में नवीन तकनीक को सम्मिलित करते हुए उच्च गुणवत्ता पर जोर : जोराराम</title>
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                        <![CDATA[ जयपुर डेयरी ने छाछ के दो नए फ्लेवर पुदीना छाछ और तड़का छाछ, आइसक्रीम के तीन नए फ्लेवर वनीला शुगर फ्री, अमेरिकन नट्स और स्ट्रोबेरी की लान्चिंग की गई। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/emphasis-on-high-quality-by-incorporating-new-technology-in-dairy/article-83359"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(11).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में नवीन तकनीक को सम्मिलित करते हुए उच्च गुणवत्ता एवं महिला सशक्तीकरण के साथ ही राज्य के अन्य दुग्ध उत्पादक संघों के विकास पर जोर दिया।</p>
<p>जयपुर सरस डेयरी द्वारा छह प्रोडक्ट की लॉन्चिंग पर कुमावत ने जयपुर डेयरी चलाई जा रही चल प्रयोगशाला द्वारा दूध की गुणवत्ता बनाए रखने  को महत्वपूर्ण बताते हुए अतिरिक्त चल प्रयोगशाला संचालित करने के निर्देश प्रदान किए। उन्होंने जयपुर डेयरी द्वारा उरमूल, बीकानेर के गाय के दूध थार अमृत को लॉन्च करते हुए उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को गाय का शुद्ध और पौष्टिक दूध उपलब्ध कराना पुण्य का काम है। इस अवसर पर गृह एवं गोपालन राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि राज्य की अन्य डेयरियों को जयपुर डेयरी की कार्य प्रणाली से सीख लेनी चाहिए। कार्य प्रणाली का गहन अध्ययन के लिए एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अन्य डेयरियों द्वारा सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। पशुपालन एवं गोपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीताराम भाले ने कहा कि राजस्थान में डेयरी विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। राजस्थान को-आॅपरेटिव डेयरी फैडरेशन की एमडी सुषमा अरोड़ा ने कहा कि आने वाले दिनों में ऊंटनी के दूध से बने बिस्कुट और कैमल मिल्क पाउडर की लॉचिंग की  जाएगी। जयपुर डेयरी के अध्यक्ष ओम पूनियां ने मांग की कि गुजरात की अमूल डेयरी के जैसे जयपुर डेयरी को पूर्ण स्वायत्ता दी जानी चाहिए जिससे वह अपने व्यापार से संबंधित निर्णय स्वयं ले सके।</p>
<p><strong>इन प्रोडेक्ट की हुई लांचिग</strong><br />जयपुर डेयरी ने छाछ के दो नए फ्लेवर पुदीना छाछ और तड़का छाछ, आइसक्रीम के तीन नए फ्लेवर वनीला शुगर फ्री, अमेरिकन नट्स और स्ट्रोबेरी की लान्चिंग की गई। बीकानेर की उरमूल डेयरी के गाय के दूध थार अमृत की भी लान्चिंग की गई। जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार ने कहा कि 250 एमएल छाछ के दोनों फलेवर 15 रुपए प्रति पैक की दर से उपलब्ध होंगे, जबकि गाय का 500 एमएल दूध 28 रुपए और 1 लीटर दूध 56 रुपए में उपलब्ध होगा। 90 एमएल पैक में आइसक्रीम के तीनों फ्लेवर 25 रुपए प्रति पैक की दर से उपलब्ध होगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 10:39:03 +0530</pubDate>
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                <title>पशुपालन बदल रहा किसानों की तकदीर</title>
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                        <![CDATA[अब पशुपालन में नई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/animal-husbandry-is-changing-the-fate-of-farmers/article-54862"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/pashupalan-badl-rha-kisano-ki-takdeer...kota-news-18-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1 - </strong>जिले के अभयपुरा गांव निवासी किसान दुर्गाशंकर गुर्जर के पास सिर्फ 4 बीघा पुश्तैनी जमीन थी। सिंचाई के संकट के चलते उनके लिए खेती करना संभव नहीं था. ऐसे में उन्होंने इस जमीन पर डेयरी फार्मिंग की शुरूआत की। शुरूआत में उनके पास सिर्फ 1 गाय व 2 भैंस थी। इनका दूध वह गांव में जाकर बेचते थे। आज उनके पास 80 गायें व भैंसें हैं। और वह रोजाना 500 लीटर दूध डेयरी को बेचते हैं। साथ ही वह गोबर बेचकर भी बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। वह दूध के लिए मिल्किंग मशीन का उपयोग करते हैं।</p>
<p><strong>केस 2 -</strong> शंकरपुरा गांव निवासी किसान रामभरोस मीणा ने मुर्गीपालन फार्म खोल रखा है। उनके पास दो बीघा जमीन है। इससे परिवार का खर्चा चलाने में परेशानी आ रही थी। कुछ लोगों की सलाह लेकर उसने सरकार से दो लाख का ऋण लिया और मुर्गी पालन के लिए फार्म बनाया है। इसके बाद अजमेर से चूजे लाकर उन्हें तैयार किया है। मीणा ने बताया कि डेढ़ माह का होने के बाद इनकी बिक्री कर दी जाती है। इससे 30 से 40 हजार रुपए की कमाई हो जाती है। </p>
<p>कोटा जिले में यह केस तो बानगी भर हैं। अब खेती के साथ पशुपालन भी किसानों की तकदीर बदल रहा है। बेमौसम बारिश के कारण रबी व खरीफ फसलों में नुकसान के चलते अब किसानों ने पशुपालन की ओर रुख किया है। इसके चलते अब पशुपालकों की आजीविका भी बढ़ने लगी है। कोटा जिले में वर्तमान में 6 लाख से अधिक मवेशी हैं। जिनसे यहां के पशुपालक लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। अब पशुपालन में नई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है। </p>
<p><strong>दूध उत्पादन में बन रहा अग्रणी</strong><br />कोटा जिला दूध उत्पादन में अग्रणी बनता जा रहा है। इसका प्रमुख कारण जिले में भैंसों की संख्या अधिक होना है। जिले में 2 लाख 40 हजार 628 भैंसवंश है। ऐसे में इनसे हजारों टन दूध का उत्पादन होता है। इनके अलावा जिले में गोवंश की संख्या भी 2 लाख 16 हजार 343 हैं। जिनमें से देशी गोवंश के साथ अन्य नस्लों की गोवंश भी शामिल हैं। इनमें से दूध का काफी मात्रा में उत्पादन हो रहा है। ऐसे में अब खेती की बजाय पशुपालन में युवा वर्ग हाथ आजमा रहा है।</p>
<p><strong>सरकार दे रही पशुपालन को बढ़ावा</strong><br />अनियमित मौसम चक्र के कारण खेती में किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। इस कारण सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रखी है। केन्द्र सरकार की ओर से राष्टÑीय पशुधन मिशन के तहत मुर्गी, भेड़ पालन और चारे से सम्बंधित उद्योग लगाने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। वहीं किसानों को बकरी पालन के लिए 1 से 25 लाख रुपए तक की ऋण सुविधा भी दी जा रही है। इस कारण बकरी फार्म का चलन भी बढ़ने लगा है।</p>
<p><strong>नवाचार दिला रहा सफलता</strong><br />बोराबास निवासी सुकेश गुंजल ने खेती को छोड़कर पूरी तरह से पशुपालन को अपना लिया है। गुंजल ने बताया कि मिल्किंग मशीन ने पशुपालन और डेयरी फार्मिंग में क्रांति ला दी है। उसके पास करीब 20 भैंस और 10 गायें हैं। पशुओं की संख्या बढ़ने पर उसने मिल्ंिकग मशीन खरीद ली है। इससे अब कम समय में दूध निकल जाता है और इससे करीब 15 प्रतिशत तक की वृद्धि भी होती है। उत्पादन बढ़ने से उसे अब अच्छा मुनाफा होने लगा है।</p>
<p><strong>कोटा संभाग में अंडे व ऊन के उत्पादन का विवरण</strong><br /><strong>                  ऊन (किलो में)    अण्डा (लाख </strong><br />2018-19     283.945           143.080   <br />2019-20     260.058           201.411<br />2020-21     398.080           621.460<br />2021-22     599.375           642.873<br />2022-23     339.949           704.521</p>
<p><strong>गांव के अन्य </strong><br /><strong>पशुओं की संख्या</strong><br />गाय    216343<br />भैंस    240628<br />भेड़    22434<br />बकरी    137387<br />घोड़ा    534<br />सूअर    6619<br />ऊंट    1862<br />बंदर    286<br />स्रोत : 20वीं पशुगणना के अनुसार</p>
<p><strong>दूध व मांस के उत्पादन का विवरण</strong><br /><strong>वर्ष             दूध             मांस </strong><br />2018-19    1898.892      12.965<br />2019-20    19767.431    22.161<br />2020-21    1900.67        20.835<br />2021-22    2255.932      28.791<br />2022-23    2285.248      33.969</p>
<p><strong>पशुओं की मौत पर मिल रहा मुआवजा</strong><br />अब राजस्थान में दुधारू पशुओं की मौत पर मुआवजा भी मिलने लगा हैं।  राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य हैं, जहां लम्पी रोग से हुई दुधारू पशुओं  की मौत पर पशुपालकों को मुआवजा दिया गया है। सरकार की ओर से प्रत्येक मृत पशु के मालिक को 40 हजार रुपए प्रति पशु के हिसाब से मुआवजा सीधा पशुपालकों के बैंक खातों में डाला गया है। इसके लिए कामधेनु बीमा योजना के तहत पशुओं की बीमा किया गया था। </p>
<p>अब खेती के साथ पशुपालन भी किसानों की तकदीर बदल रहा है।  बेमौसम बारिश के कारण रबी व खरीफ फसलों में नुकसान के चलते किसानों ने पशुपालन की ओर रुख किया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में दूध सहित अन्य उत्पादों से पशुपालकों की आजीविका बढ़ने लगी है।<br /><strong>- डॉ. गणेश नारायण दाधीच, उपनिदेशक पशुपालन विभाग </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 17:13:02 +0530</pubDate>
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                <title>पशुपालकों को डोर स्टेप पर मिलेगी सुविधाएं, रोजगार बढ़ाने पर जोर</title>
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                        <![CDATA[ राज्य में बेरोजगारी पर निरंतर प्रहार कर रोजगार के नए संसाधन विकसित करने का त्वरित कार्य किया जा रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cattle-herders-will-get-facilities-at-door-step-emphasis-on/article-47317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/cow.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में बेरोजगारी पर निरंतर प्रहार कर रोजगार के नए संसाधन विकसित करने का त्वरित कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन अब एक आजीविका का साधन मात्र नहीं बल्कि रोजगार एवं आय में वृद्धि के  अवसर उपलब्ध करवाने वाला क्षेत्र बनकर उभर रहा है। इसी के मध्यनजर रखते हुए राज्य में पशुपालकों  को बेहतर सुविधा के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।</p>
<p>पशुपालन विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि बजट घोषणा के अंतर्गत पशुपालकों को डोर स्टेप पर पशुपालन विभाग  की विभिन्न सुविधाओं यथा टैगिंग, टीकाकरण, बीमा, पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान, गर्भ परीक्षण आदि से लाभान्वित करवाने के उद्देश्य से प्रदेश में पशुमित्र योजना की घोषणा की गयी थी। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश में पशुमित्र पशुपालन विभाग की विभिन्न सुविधाओं को पशुपालकों के द्वार पर उपलब्ध करवाएंगे साथ ही विभाग की विभिन्न योजनाओं से भी जागरूक करेंगे, जिससे प्रदेश में पशुपालन के क्षेत्र में आय के संसाधनों में भी वृद्धि होगी साथ ही उन्नत नस्लीय पशुपालन की राह आसान हो सकेगी।</p>
<p><strong>5000 बेरोजगार युवाओं को मिलेगा पशुमित्र बनने का अवसर</strong><br />शकुणाल ने बताया कि  योजना के तहत 5000 बेरोजगार युवा प्रशिक्षित पशुधन सहायक/ पशु चिकित्सकों को कार्य निष्पादन अनुसार निर्धारित मानदेय पर पशुमित्र के लिए आवेदन मांगे गए है।  उन्होंने बताया कि यह योजना पूर्णतः स्वरोजगार के लिए है, इसलिए युवा पशुमित्र से यह अपेक्षित रहेगा  कि  पूर्ण सेवा भाव के साथ पशुपालकों के हितों के लिए कार्य संपादित करेंगे। उन्होंने कहा कि पशुपालन राज्य की अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है, इसलिए राज्य में अन्य वर्गों के साथ पशुपालकों के हितों के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।</p>
<p><strong>पशुमित्र करेंगे महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन<br /></strong>अतिरिक्त निदेशक डॉ. नवीन मिश्रा ने बताया कि पशुमित्र (पशुचिकित्सक/ पशुधन सहायक) विभागीय गतिविधियां जैसे पशुओं की टैगिंग, कृत्रिम गर्भाधान, गर्भ परीक्षण, टीकाकरण, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन सम्बन्धी समस्याओं का समाधान, पशु बीमा के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करना, रोग-प्रकोप/ आकस्मिक स्थिति में पशु चिकित्सा कार्य में सहयोग के साथ समय-समय पर विभागीय उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देशन में कार्य करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 16:02:50 +0530</pubDate>
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                <title>कच्चे छप्पर में रहने वाली रवीना ने 12वीं कला वर्ग में 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर किया नाम रोशन</title>
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                        <![CDATA[रवीना के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वह अपनी माता व 4 भाई- बहिनों के साथ दो कमरों के कच्चे छप्पर में रहती है। जहां बिजली कनेक्शन तक नहीं है रवीना के पिता की मौत रवीना के बचपन में ही हो गई थी। वहीं उनकी माता भी बीमार रहती है। परिवार के हालात खराब होने पर भी रवीना ने पढ़ाई जारी रखी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/baaansur-news-raveena--who-lives-in-a-raw-thatch--got-93-percent-marks-in-class-12th-arts/article-11615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bansur--(4).jpg" alt=""></a><br /><p>बानसूर।  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान 12वीं कला वर्ग के परीक्षा परिणाम में नारायणपुर की बेटी ने 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नारायणपुर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। आप को बता दे कि एक छोटे से गांव गढ़ी मामोड़ की रहने वाली छात्रा रवीना गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई कर रही है। जब उसके स्कूल के मास्टर उसके 12वीं में टॉप करने पर उसको बधाई देने उसके घर पहुंचे तो रवीना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे विश्वास ही नहीं हुआ की वह नारायणपुर की टॉपर बन गई है।</p>
<p>रवीना के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वह अपनी माता व 4 भाई- बहिनों के साथ दो कमरों के कच्चे छप्पर में रहती है। जहां बिजली कनेक्शन तक नहीं है रवीना के पिता की मौत रवीना के बचपन में ही हो गई थी। वहीं उनकी माता भी बीमार रहती है। परिवार के हालात खराब होने पर भी रवीना ने पढ़ाई जारी रखी। रवीना स्वयं बकरी चरा कर घर खर्च चलाती है रवीना के परिवार का खर्च पशु पालन से चलता है। रवीना स्कूल से आने के बाद घर के कामों में भी पूरा हाथ बटाती है। घर में पशुओं की देखभाल करती है।</p>
<p>वहीं स्कूल से आने के बाद घर का पूरा काम निपटाकर रवीना रात को दीये की रोषनी में पढ़ाई करती थी। रवीना की इस उपलब्धि पर नारायणपुर एसडीएम सुनीता मीणा और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मंगल राम जाटव ने भी छात्रा को बधाई दी है। वहीं रवीना गुर्जर के टॉपर बनने पर स्कूल और गांव में खुशी का माहौल है।स्कूल के अध्यापक उसके घर पहुंचकर मिठाई खिलाकर बधाई दीं और उसके उज्जवल भविष्य की कामना की। रवीना ने बताया कि मेरी इस सफ लता का श्रेय मेरे परिवार, दोस्त व विद्यालय स्टाफ  को जाता है। रवीना पुलिस में जा कर देश कि सेवा करना चाहती है।<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 13:42:28 +0530</pubDate>
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