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                <title>sustainability - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>sustainability RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएम मोदी ने पेश किए विकसित भारत 2047 के लिए 9 संकल्प : जनता को संभालनी होगी कमान, सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिनिधित्व का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मांड्या में 'विकसित भारत' के लिए नौ संकल्पों का मंत्र दिया। उन्होंने जल संरक्षण, 'एक पेड़ मां के नाम', स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। पीएम ने स्वस्थ भारत के लिए प्राकृतिक खेती और योग पर जोर देते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-presented-9-resolutions-for-developed-india-2047-people/article-150541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi9.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'विकसित भारत के लिए नौ संकल्प' लेने का अनुरोध किया और कहा कि यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित भारत 2047 बनाने की यात्रा में तेजी ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी मठ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल क्षेत्रीय सीमाओं से परे है और सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी आह्वान का प्रतिनिधित्व करती है।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की व्यक्तिगत आदतें और दैनिक विकल्प देश के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा, "यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित कर्नाटक और विकसित भारत की ओर प्रगति को तेज कर सकते हैं।" विकास को केवल सरकार संचालित प्रयास के बजाय जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परिवर्तन की शुरुआत रोजमर्रा के व्यवहार के स्तर से होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने नदी प्रणालियों पर निर्भर क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकता बताया, और नागरिकों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम सब जल संरक्षण और इसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें।" पर्यावरण स्थिरता पर प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आइए हम अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाएं और धरती मां की रक्षा करें।"</p>
<p>स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में साफ-सफाई बनाये रखना साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "चाहे वह धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।" आर्थिक आत्मनिर्भरता के संबंध में, प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय उद्योगों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' दृष्टिकोण को आर्थिक सशक्तीकरण के आधार बताते हुए कहा, "आइए हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं और अपने उद्योगों को मजबूत करें।"</p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देते हुए नागरिकों से देश भर में यात्रा करने और इसकी विविधता को जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम पूरे भारत की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देगा। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और पोषण पर मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने पर जोर देते इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बढ़ता मोटापा बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गयी है। इसके साथ ही नागरिकों से तेल की खपत में 10 फीसदी की कमी का आग्रह किया। कृषि को लेकर उन्होंने किसानों से कहा, "आइए हम रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।"</p>
<p>उन्होंने शारीरिक फिटनेस पर और जोर देते हुए कहा, "योग, खेल और फिटनेस हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।" उन्होने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता में स्थापित किये जाने की बात कही। इस मौके पर उन्होंने जनसेवा की मजबूत भावना का आह्वान करते हुए कहा, "जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत करती है और जीवन को बड़ा उद्देश्य देती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नौ संकल्प एक व्यापक जन-भागीदारी वाले शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां नागरिक स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन सामूहिक रूप से राष्ट्रीय परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामूहिक प्रतिबद्धता "विकसित कर्नाटक और विकसित भारत" के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p>इससे पहले दिन में, उन्होंने मांड्या जिले के ऐतिहासिक आदिचुंचनगिरी मठ परिसर में 'श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर' का उद्घाटन किया, जो दिवंगत संत श्री बालगांगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित एक नया आध्यात्मिक स्थल है। आदिचुंचनगिरी की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह 'गद्दीगे' स्मारक उस विरासत के प्रति श्रद्धांजलि है, जो दशकों से मठ की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p>शैव मत की सदियों पुरानी नाथ परंपरा के तहत निर्मित इस मंदिर को उस गुरु-शिष्य परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जो इस संस्थान की आध्यात्मिक शृंखला को परिभाषित करती है। जैसे ही पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजे, बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए, जिससे यह उद्घाटन भक्ति, विरासत और जन-भागीदारी के संगम में बदल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:52:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सरकार करेगी वन क्षेत्र और जानवरों की सुरक्षा मजबूत: पांच रेस्क्यू वाहनों और 460 मोटरसाइकिलों को दिखाई हरी झंडी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में वन मंत्री संजय शर्मा ने 'फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स' थीम पर वन्यजीवों के लिए 5 रेस्क्यू वाहन और 460 मोटरसाइकिलें रवाना कीं। शाहपुरा में अटल वन का उद्घाटन और ₹30 करोड़ की लागत से 20 प्रे-बेस आॅगमेंटेशन सेंटर की शुरुआत हुई। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राजीविका के साथ एमओयू और डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डिजीवन' भी लॉन्च किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-strengthen-the-protection-of-forest-areas-and-animals/article-147425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sanjay-saharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में शनिवार को फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स थीम पर आरआईसी के सभागार में हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री की ओर से कई महत्वपूर्ण पहल की गई। कार्यक्रम में वन्यजीवों के लिए पांच रेस्क्यू वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई। वन क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 460 मोटरसाइकिलों को भी रवाना किया गया। इस अवसर पर जयपुर के शाहपुरा तहसील में विकसित अटल वन का उद्घाटन भी किया। लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस वन में इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉकिंग ट्रेल, वॉच टावर, सोलर फेसिंग तथा जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अनेक नवाचार शामिल हैं। कार्यक्रम में एक पेड़ मां के नाम अभियान पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ। वनमित्रों को पेट्रोलिंग किट भी वितरित की गई। </p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन को लेकर समझौता</strong></p>
<p>जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवा संवर्धन परियोजना के अंतर्गत राजीविका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। वन प्रबंधन में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए डिजीवन डिजिटल प्लेटफॉर्म के नए मॉड्यूल को भी लाइव किया गया, जिससे वन्यजीव आवास निगरानी एवं कार्बन क्रेडिट प्रबंधन में सहायता मिलेगी। राजस्थान राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी हुआ। </p>
<p>20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन </p>
<p>वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 30 करोड़ की लागत से कोटा, बारां, पाली, सिरोही, चुरू, मुकुंदरा तथा अजमेर के प्रोटेक्टेड क्षेत्र में 20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। साथ ही 6 वन चौकियों, 2 बैरकों एवं 1 क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय तथा 7 नई नर्सरियों का भी लोकार्पण की गया। कार्यक्रम में विधायक गोपाल शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आनन्द कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय सहित संबंधित विभाग के अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:35:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण का किया आह्वान, देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और यह हमारे ग्रह के भविष्य को तय करता है। भारत की 18% आबादी के पास केवल 4% मीठा पानी है, इसलिए जल जीवन मिशन और वर्षा जल संचयन जैसे सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-called-for-water-conservation-on-world-water-day/article-147413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का आग्रह किया और जीवन को बनाए रखने और ग्रह के भविष्य को आकार देने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में, प्रधानमंत्री ने ज़िम्मेदार उपयोग और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल हमारा जीवन है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। उन्होंने देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने और उसका ज़िम्मेदारी से उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस अवसर पर सतत जल प्रबंधन की दिशा में कार्य कर रहे लोगों एवं समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज का दिन उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है जो सतत प्रथाओं में संलग्न हैं, जागरूकता को बढ़ावा देते हैं और संरक्षण की संस्कृति को पोषित करते हैं।”</p>
<p>विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक जल संकट और मीठे जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष विश्व की सरकारें, संगठन और समुदाय इस दिन का उपयोग जल संबंधी चुनौतियों, जैसे कि जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।</p>
<p>भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन इसके पास विश्व के मीठे पानी के संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है और इसके कई क्षेत्रों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन जैसी सरकारी पहलों और बारिश जल संचयन और कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने वाले अभियानों ने इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है लेकिन विशेषज्ञ जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल देते हैं।</p>
<p>जलवायु विषमता के तीव्र होने और पानी की मांग बढ़ने के साथ, संरक्षण की आवश्यकता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है और नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों से इस आवश्यक संसाधन की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने किया नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र और वायु रक्षक वाहनों का शुभारंभ, कहा-राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण सर्वोच्चा प्राथमिकता</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र और 35 वायु रक्षक वाहन लॉन्च किए, प्रदूषण नियंत्रण को राजधानी की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। सरकार प्रतिबद्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-cm-rekha-gupta-inaugurated-new-air-quality-monitoring-center/article-142469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों और 35 वायु रक्षक वाहनों का लोकार्पण किया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और उनकी राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है।</p>
<p>उन्होंने दिल्ली सचिवालय में कहा कि पर्यावरण विभाग द्वारा स्थापित किए गए छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र मौजूदा कमियों को दूर करने और पूरे शहर में वायु गुणवत्ता की बेहतर निगरानी करने में मदद करेंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या 40 से बढ़ाकर 46 हो गई है और आने वाले दिनों में 14 और केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार राजधानी में प्रदूषण को कम करने एवं वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए चौबीसों घंटे और 365 दिन काम कर रही है।</p>
<p>इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री ने 35 वायु रक्षक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के 100 इंजीनियरों की एक टीम संचालित करेगी।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि वायु रक्षक वाहन दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में संचालित होंगे और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 15:50:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा-स्टोन, आर्किटेक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट भारत की ताकत, इंडिया स्टोन मार्ट 2026 की प्रदर्शनी का किया अवलोकन</title>
                                    <description><![CDATA[इंडिया स्टोन मार्ट 2026 के समानांतर आयोजित जयपुर आर्किटेक्चर फेस्टिवल का समापन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया, जिसमें स्टोन, आर्किटेक्चर और शहरी विकास पर मंथन हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/union-minister-meghwal-said-stone-architecture-and-sustainable-development-is/article-142303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लघु उद्योग भारती, सीडॉस और रीको के संयुक्त तत्वावधान में जेईसीसी में आयोजित इंडिया स्टोन मार्ट 2026 के समानांतर चल रहे जयपुर आर्किटेक्चर फेस्टिवल का शनिवार को समापन हुआ। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय फेस्टिवल का समापन केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने संपन्न किया। दिनभर चले आर्किटेक्चर फेस्टिवल के तकनीकी एवं वैचारिक सत्रों के पश्चात केंद्रीय मंत्री  शाम को जेईसीसी पहुंचे, जहां उन्होंने इंडिया स्टोन मार्ट 2026 की प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया। </p>
<p>समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टोन, आर्किटेक्चर और शहरी विकास भारत की आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक पहचान के अहम स्तंभ हैं। उन्होंने कहा  जयपुर आर्किटेक्चर फेस्टिवल जैसे मंच नीति-निर्माताओं, डिजाइनर्स और उद्योग के बीच सार्थक संवाद को मजबूत करते हैं। उन्होंने राजस्थान के स्टोन उद्योग की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूमिका को सस्टेनेबल माइनिंग, वैल्यू एडिशन और आधुनिक तकनीक को अपनाने पर विशेष जोर दिया। विख्यात आर्किटेक्ट जितेंद्र मेहता ने इन्दौर डेवलपमेंट मॉडल पर आधारित सत्र में संतुलित शहरी नियोजन और नागरिक सहभागिता की सफलता को रेखांकित किया। </p>
<p>वहीं रिइनवेंटिंग लोकल स्टोन विद मॉडर्न कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी और स्टोन इन द एज ऑफ ग्लास एंड स्टील जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। समापन दिवस पर आंध्र प्रदेश के खान मंत्री कोल्लू रविंद्र गरु की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने इंडिया स्टोन मार्ट 2026 को सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जुड़ा दूरदर्शी आयोजन बताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 09:38:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन्यजीव संरक्षण के लिए चीन ने तैयार की नयी आद्रभूमि संरक्षण व्यवस्था, इकोलॉजिकल प्रयासों को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग ने तालाबों व दलदलों की सुरक्षा हेतु बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की, जिससे 83 प्रतिशत से अधिक आद्रभूमि संरक्षित होकर वन्यजीव विविधता को सुरक्षित आवास मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-has-prepared-a-new-wetland-conservation-system-for-wildlife/article-141825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग ने अपने तालाब और दलदल स्थलों की सुरक्षा के लिए एक बहु-स्तरित संरक्षण व्यवस्था तैयार की है, जिससे उसकी वन्यजीव आबादी को प्रमुख आवास मिलेगा। बीजिंग नगर पालिका वानिकी और उद्यान ब्यूरो ने सोमवार को बताया कि यह नयी व्यवस्था उसके 83.15 प्रतिशत तालाबों और दलदलों (आद्रभूमि) को संरक्षित करती है। ब्यूरो के अनुसार, यह नयी व्यवस्था वन्यजीव विविधता संरक्षण और दूसरे इकोलॉजिकल प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग के प्राकृतिक रिजर्व, आद्रभूमि पार्क और दूसरे छोटे संरक्षित आद्रभूमि इलाकों का इस्तेमाल करता है। </p>
<p>पिछले पांच वर्षों में बीजिंग ने आद्रभूमि संरक्षण को बेहतर बनाने का काम जारी रखा गया है। अब तक, नगर पालिका की 61,200 हेक्टेयर आद्रभूमि में 50 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पौधों की प्रजातियां और 76 प्रतिशत स्थानीय जंगली जानवरों की प्रजातियां रहती हैं। बीजिंग के ये नये प्रयास आद्रभूमि संरक्षण और बहाली में चीन की बड़ी योजना का हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में, देश ने कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है और आद्रभूमि संरक्षण के लिए अपनी प्रबंधन व्यवस्था में सुधार किया है। राष्ट्रीय वानिकी एवं चारागाह प्राधिकरण ने कल कहा कि इसका कुल आद्रभूमि क्षेत्र अब एशिया में पहले और दुनिया में चौथे स्थान पर है। </p>
<p>प्राधिकरण ने कहा कि 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2026-2030) के दौरान, चीन आद्रभूमि के लिए अपने कानूनी और नियामक ढांचे में और सुधार करेगा, आद्रभूमि संरक्षण के लिए निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा, और आद्रभूमि पारिस्थितिक उत्पादों के मूल्य को महसूस करने के लिए तंत्र स्थापित करने में तेजी लाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण को जन जागरूकता अभियान, स्कूली बच्चों ने तेल और गैस संरक्षण के नारे लिखे गुब्बारे भी आसमान में छोड़े</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में सक्षम-2026 जागरूकता अभियान के तहत संरक्षण क्षमता महोत्सव आयोजित हुआ। तेल-गैस बचाओ, हरित ऊर्जा अपनाओ विषय पर बच्चों व जनता को ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/public-awareness-campaign-on-conservation-of-petroleum-products/article-141756"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण को बेहतर जागरूकता के लिए तंल कंपनियों के संयुक्त तत्वाधान में एक फरवरी से शुरू किए गए जग जागरूकता अभियान सक्षम-2026 के तहत सोमवार को नारायण सिंह सर्किल स्थित जैन नसियां के तोतुका सभागार में संरक्षण क्षमता महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें तेल और गैस बचाओं, हरित ऊर्जा अपनाओं की थीम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। </p>
<p>इस मौके पर यहां इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड के राज्यस्तरीय समन्वयक एवं कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि जनता और विशेषकर बच्चें उपलब्ध ऊर्जा का कुशल और रूढिवादी तरीके से उपयोग करें। </p>
<p>बच्चों को पेट्रोलियम संरक्षण में प्रमुख भूमिका निभाने की अपील की। वर्तमान परिद्श्य में तेल और गैस संरक्षण की आवश्यकता और अपार संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर उपयोग सेदेश में पेट्रोलियम उत्पादो की छीजत को रोका जा सकता है। खपत को कम किया जा सकता है। मनोज कुमार ने स्कूली बच्चों के संग तेल और गैस संरक्षण के नारे लिखे गुब्बारे भी आसमान में छोड़े।</p>
<p>उन्होंने जागरूकता को बच्चों की रैली भी हरी झंडी दिखाकर रवाना की। मुख्य महाप्रबन्धक गेल संजय चौहान ने ऊर्जा संरक्षण की अहमियत को बताया। कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के वर्तमान परिदृश्य पर भी जानकारी साझा की। बीपीसीएल के उप महाप्रबंधक गौरव शर्मा ने सक्षम-2026 में तेल और गैस संरक्षण के लिए सभी को शपथ दिलाई। अंत में एचपीसीएल के मुख्य महाप्रबन्धक केपी सतीश कुमार ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरित ऊर्जा परियोजना समझौते पर डेनमार्क-जर्मनी ने किए हस्ताक्षर, 2030 तक 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की बनाई योजना</title>
                                    <description><![CDATA[डेनमार्क और जर्मनी ने बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड पवन परियोजना पर सहमति जताई। यह सीमा-पार पहल यूरोपीय ऊर्जा बाजार को जोड़ते हुए हरित बिजली आपूर्ति बढ़ाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/denmark-germany-sign-green-energy-project-agreement-plan-to-invest-95/article-140986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(13)2.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। डेनमार्क ने जर्मनी के साथ मिलकर बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड नामक एक प्रमुख अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमति व्यक्त की है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। फ्रेडरिक्सन ने हैम्बर्ग में उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह एक सीमा पार परियोजना है जो यूरोपीय ऊर्जा बाजार को एकीकृत करती है। यह जर्मन घरों, डेनमार्क के घरों और हमारी कंपनियों को हरित विद्युत प्रदान करती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह की पहली परियोजना है। डीपीए की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन में जर्मनी और डेनमार्क ने बाल्टिक सागर में बोर्नहोम द्वीप पर एक संयुक्त ऊर्जा केंद्र स्थापित एवं संचालित करने के लिए भी एक समझौता पर हस्ताक्षर किया। </p>
<p>गौरतलब है कि, इस द्वीप को बाल्टिक सागर में स्थित अपतटीय पवन ऊर्जा संयंत्रों से जर्मनी और डेनमार्क तक विद्युत पहुंचाने वाले केंद्र के रूप में उपयोग करने की योजना है। परियोजना के अंतर्गत दोनों देशों ने आवश्यक उपकरणों के निर्माण एवं रखरखाव की लागत साझा करने पर सहमति व्यक्त की है। </p>
<p>इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया कि शिखर सम्मेलन में उपस्थित बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम के ऊर्जा मंत्रियों ने क्षेत्र में पवन ऊर्जा के विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस उद्योग में 2030 तक लगभग 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की योजना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम हेमन्त सोरेन ने की यूके की मंत्री सीमा मल्होत्रा से मुलाक़ात, झारखण्ड-यूके सहयोग को दी नई दिशा </title>
                                    <description><![CDATA[लंदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूके मंत्री सीमा मल्होत्रा से भेंट कर शिक्षा, कौशल, उत्तरदायी खनन, जलवायु और विरासत संरक्षण में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cm-hemant-soren-met-uk-minister-seema-malhotra-gave-new/article-140584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम सरकार की संसदीय अवर सचिव (समानता एवं इंडो-पैसिफ़कि मामलों की मंत्री) सीमा मल्होत्रा से भेंट कर शिक्षा, कौशल विकास, उत्तरदायी खनन, क्लाइमेट ट्रांजीशन, संस्कृति एवं विरासत संरक्षण जैसे क्षेत्रों में झारखण्ड यूके के बीच व्यावहारिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर चर्चा की। यूके ने झारखण्ड सरकार की मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज स्कॉलरशिप तथा चेवनिंग मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज स्कॉलरशिप की सराहना करते हुए इन्हें भारत यूके साझेदारी का सशक्त और जीवंत उदाहरण बताया। पिछले चार वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से 100 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है। दोनों पक्षों ने सस्टेनेबिलिटी-ङ्क्षलक्ड स्कॉलरशिप मार्गों पर कार्य करने तथा विदेश अध्ययन को मेंटोरशिप, इंटर्नशिप, नेतृत्व विकास और सार्वजनिक सेवा अनुभव से जोडऩे के लिए एक एक निश्चित योजना विकसित करने पर रुचि व्यक्त की।</p>
<p>बैठक में यूके के प्रमुख विश्वविद्यालयों, स्किल्स एवं क्वालिफ़किकेशन संस्थानों के साथ संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर भी कल चर्चा हुई। इसमें खनन प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं सततता, डेटा एवं एआई, गवर्नेंस और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम, फैकल्टी एक्सचेंज, एप्लाइड रिसर्च तथा टीवीईटी और अप्रेंटिसशिप मार्गों की स्थापना शामिल है।</p>
<p>आर्थिक और जलवायु सहयोग के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने उत्तरदायी खनन के क्षेत्र में यूके की क्षमताओं के साथ घनिष्ठ सहयोग का प्रस्ताव रखा, जिसमें ईएसजी सिस्टम, मिनरल ट्रेसबिलिटी, खदान सुरक्षा, स्वच्छ प्रसंस्करण तथा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन शामिल हैं। इस अवसर पर उत्तरदायी क्रिटिकल मिनरल्स पर एक झारखण्ड-यूके वर्किंग ट्रैक स्थापित करने पर भी चर्चा हुई, जो मानकों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार और आपूर्ति-श्रृंखला साझेदारी को सुदृढ़ करेगा।</p>
<p>बैठक में यूके की जलवायु एवं वित्तीय संस्थाओं के साथ मिलकर कोयला क्षेत्रों के विविधीकरण, जलवायु अनुकूलन, श्रमिकों एवं समुदायों के समर्थन हेतु ट्रांजशिन फाइनेंस संरचना विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। झारखण्ड को जस्ट ट्रांजिशिन कार्यक्रमों के लिए एक पायलट राज्य के रूप में स्थापित करने तथा शहरी गतिशीलता और जलवायु वित्त को सहयोग के पूरक क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।</p>
<p>संस्कृति, खेल और विरासत संरक्षण को जन-जन के बीच संपर्क बढ़ाने के सरल एवं प्रभावी माध्यम के रूप में देखा गया। मुख्यमंत्री ने भारत-यूके विरासत संरक्षण समझौते के अंतर्गत झारखण्ड के मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण हेतु यूके सहयोग का आग्रह किया। इस संदर्भ में स्टोनहेंज जैसे वैश्विक सर्वोत्तम उदाहरणों का उल्लेख करते हुए दीर्घकाल में यूनेस्को मान्यता की दिशा में कार्य करने की बात कही गई।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने मंत्री सीमा मल्होत्रा को झारखण्ड भ्रमण का आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को फ़ॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) मुख्यालय का भी अवलोकन कराया गया। साथ ही मंत्री मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री को शनिवार को यूके के प्रतिष्ठित मेगालिथिक एवं मोनोलिथिक विरासत स्थल स्टोनहेंज के भ्रमण का आमंत्रण भी दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:04:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अनंत अंबानी को ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड: वनतारा में पशु कल्याण और प्रजाति संरक्षण के लिए किए गए काम की स्वीकृति</title>
                                    <description><![CDATA[अनंत अंबानी को 'वनतारा' के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड मिला है। वह यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले एशियाई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/global-humanitarian-award-to-anant-ambani-in-recognition-of-the/article-138296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/vantara.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अनंत अंबानी को ग्लोबल ह्यूमेन सोसायटी की ओर से ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड मिला है। वह यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले एशियाई बने हैं। यह पुरस्कार वनतारा की शानदार उपलब्धियों को मान्यता देता है, जो वन्यजीवों को बचाने और संरक्षण के लिए एक अनोखी और विज्ञान पर आधारित पहल है। वनतारा का मॉडल और उसकी वैश्विक साझेदारियां पशु कल्याण और प्रजाति संरक्षण के लिए नए मानक स्थापित कर रहे हैं।</p>
<p>अनंत अंबानी को ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर से सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड ग्लोबल ह्यूमेन द्वारा दिया गया, जो अमेरिकन ह्यूमेन सोसायटी का इंटरनेशनल ब्रांड है। इस सम्मान के साथ वह दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाला है। अनंत यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले एशियाई बने हैं। यह अवॉर्ड सेरेमनी वॉशिंगटन डीसी में हुई, जिसमें वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद थे।</p>
<p>यह अवॉर्ड अनंत अंबानी के वनतारा की स्थापना में किए गए नेतृत्व को पहचान देता है, जो दुनिया के सबसे व्यापक वन्यजीव बचाव और संरक्षण कार्यक्रमों में से एक है। उनका काम बड़े पैमाने पर रेस्क्यू, उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल केयर, लंबी अवधि के रिहैबिलिटेशन और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा पर केंद्रित है। वनतारा का मॉडल वैज्ञानिक शोध, वैश्विक संरक्षण साझेदारियों और पशु कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का संगम है।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान अनंत अंबानी ने कहा, मैं इस सम्मान के लिए ग्लोबल ह्यूमेन सोसायटी का आभार व्यक्त करता हूं। मेरे लिए यह सर्व भूत हित यानी सभी प्राणियों के कल्याण जैसी सनातन भावना को और मजबूत करता है। जानवर हमें संतुलन, विनम्रता और भरोसा सिखाते हैं। वनतारा का उद्देश्य हर जीवन को गरिमा, देखभाल और नई उम्मीद देना है, जो सेवा की भावना से प्रेरित है। संरक्षण कल के लिए नहीं, आज का साझा धर्म है।</p>
<p>ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड सिर्फ उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिनका काम जानवरों और लोगों, दोनों पर विश्व स्तर पर बड़ा असर डाल चुका हो। इसे पहले पाने वालों में शर्ली मैकलेन, जॉन वेन, बेट्टी व्हाइट, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी और बिल क्लिंटन समेत कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के जाने-माने संरक्षणवादी शामिल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 11:57:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन, सस्टेनेबिलिटी व टाउन प्लानिंग जैसे विषयों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[ पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की ओर से इन्क्लूसिव, रिजिल्यंट एंड सस्टेनेबल ह्यूमन सेटलमेंट्स विषय पर तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और नॉलेज सीरीज का आज शुक्रवार को समापन हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-conference-organized-and-discussion-on-topics-like-sustainability-and/article-76637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की ओर से इन्क्लूसिव, रिजिल्यंट एंड सस्टेनेबल ह्यूमन सेटलमेंट्स विषय पर तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और नॉलेज सीरीज का आज शुक्रवार को समापन हुआ। काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर, भोपाल के सहयोग से और जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा प्रायोजित इस कॉन्फ्रेंस के तहत पांच ट्रेक में 125 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए जा रहे हैं। </p>
<p>काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के प्रेसिडेंट प्रो. आर्किटेक्ट अभय विनायक पुरोहित इसके उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया के प्रेसिडेंट एन.के. पटेल, जयपुर हेरिटेज नगर निगम के आयुक्त व जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ अभिषेक सुराणा, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया के काउंसिल सदस्य प्रदीप कपूर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान के प्रोफेसर डॉ. नीरज गुप्ता, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स-राजस्थान चैप्टर के प्रेसिडेंट आर्किटेक्ट तुषार सोगानी, और सीओए टीआरसी, भोपाल के डायरेक्टर डॉ. नवनीत मुनोथ गेस्ट ऑफ ऑनर थे। इस अवसर पर मेजबान पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. सुरेश चंद्र पाढ़ी, प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. मनोज गुप्ता, यूनिवर्सिटी के को-फाउंडर राहुल सिंघी, रजिस्ट्रार डॉ. चांदनी कृपलानी, एफपीए की डीन आर्किटेक्ट मंजरी राय तथा देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित टाउन प्लानर व आर्किटेक्ट उपस्थित थे।</p>
<p>मुख्य अतिथि प्रो. आर्किटेक्ट अभय विनायक पुरोहित ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए हर व्यक्ति को अपना योगदान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि हमें अर्थ के नहीं, बल्कि स्वयं के सर्वाइवल की बात करनी चाहिए। उन्होंने इस तरह की कॉन्फ्रेंस से जो निष्कर्ष निकलते हैं, उन्हें दैनिक जीवन में भी अपनाया जाना चाहिए। एन.के. पटेल ने वर्तमान दौर में टाउन प्लानर्स की भूमिका व जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। अभिषेक सुराणा ने जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा किए जा रहे प्रोजेक्ट्स की जानकारी देते हुए बताया कि हेरिटेज लुक को बरकरार रखते हुए किस प्रकार शहर को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदीप कपूर ने बताया कि आईटीपीआई स्टूडेंट्स के लिए किस प्रकार फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने पूर्णिमा यूनिवर्सिटी को भी इससे जुड़ने की अपील की। </p>
<p>डॉ. नीरज गुप्ता और तुषार सोगानी ने इस प्रकार के आयोजनों की महत्ता और इनसे सीख लेने की बात कही। डॉ. नवनीत मुनोथ ने सीओए टीआरसी, भोपाल की नई पहलों के बारे में बताया। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह के बाद सस्टेनेबल ह्यूमन सेटलमेंट विद रेस्पेक्ट टू सिटीज ऑफ पास्ट विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 12:01:14 +0530</pubDate>
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                <title>ई-वेस्ट पॉलिसी जल्द आएगी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान में खनन क्षेत्र को 33 प्रतिशत ग्रीन कवर सुनिश्चित करना चाहिए। राज्य में बड़ी संख्या में छोटी और बड़ी माइंस हैं, यदि वे 33 प्रतिशत ग्रीन कवर सुनिश्चित करते हैं, तो इससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/e-waste-policy-will-come-soon/article-11621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/conference-group.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में खनन क्षेत्र को 33 प्रतिशत ग्रीन कवर सुनिश्चित करना चाहिए। राज्य में बड़ी संख्या में छोटी और बड़ी माइंस हैं, यदि वे 33 प्रतिशत ग्रीन कवर सुनिश्चित करते हैं, तो इससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। यह बात राजस्थान ज्य प्रदूराषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान सरकार के चेयरमैन सुधांश पंत ने कही। वह जयपुर में कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित ‘द 7आर्स कॉन्फ्रेंस रोडमैप फॉर ए ग्रीनर टुमॉरो’ के 5वें संस्करण में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।  पंत ने कहा कि राजस्थान सरकार ई.वेस्ट पॉलिसी लेकर आ रही है।</p>
<p>जिसका ड्राफ्ट तैयार है और इसे हितधारकों के साथ उनकी टिप्पणियों और सुझावों के लिए साझा किया गया है। सीईओ और डब्ल्यूटीडी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड अरुण मिश्रा ने कहा कि राजस्थान में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। ऊर्जा के इस स्रोत की क्षमता का बेहतर और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। सेंट.गोबेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ग्लास सॉल्यूशंस एंड स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट्स के प्रबंध निदेशकए आइजनहावर स्वामीनाथन ने कहा कि आज के समय में बिल्डिंग्स पर्यावरण की समस्या का एक हिस्सा हैं। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बहुत अधिक है। डिप्टी हैड ऑफ  प्लांट ऑपरेशंस हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड मुकेश गोयल ने कहा कि पृथ्वी केवल एक ही है। यह बात किसी को भूलनी नहीं चाहिए। पेरिस जलवायु समझौते में, दुनिया भर के 700 शहरों के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों को भी ने उत्सर्जन में कटौती के लिए प्रतिबद्ध हैं। पंत ने ग्रीन रेटिंग कंपनियों को भी पुरस्कार प्रदान किए जो ग्रीन-फ्रेंडली प्रोसेस को अपना रही हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 14:27:04 +0530</pubDate>
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