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                <title>sustainability - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>sustainability RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मोदी ने भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों पर डाला प्रकाश, कहा- 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत की समृद्ध जैव विविधता पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों से चीता, हिम तेंदुआ और स्लॉथ बीयर जैसी प्रजातियों का पुनरुद्धार हुआ है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रतिवर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जुड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-environment-day-prime-minister-modi-threw-light-on-indias/article-156050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की समृद्ध जैविक विविधता का उल्लेख करते हुए वन्यजीव संरक्षण एवं वन विस्तार में देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि निरंतर प्रयासों ने देश भर में कमजोर प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में मदद की है। पीएम मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत अपनी विशाल जैव विविधता और विविध पारिस्थितिक तंत्रों पर गर्व करता है जो असंख्य प्रजातियों के साथ-साथ लाखों आजीविका का समर्थन करते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में हमें अपनी जैविक विविधता पर बहुत गर्व है। हमारे विविध पारिस्थितिकी तंत्र अनगिनत प्रजातियों और आजीविका का समर्थन करते हैं।" सरकार की संरक्षण पहलों का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने लुप्तप्राय और कमजोर वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा के उद्देश्य से विशेष पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों की सफलता की बात की । उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुओं, स्लॉथ बीयर और चीतों के संरक्षण प्रयासों ने प्रदर्शित किया है कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वन्यजीव आबादी और पारिस्थितिक आवासों के पुनरुद्धार में कैसे योगदान दे सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "विशेष पुनर्प्राप्ति में हमारे प्रयास भी उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए, स्लॉथ बीयर और चीता के संरक्षण प्रयासों ने इस बात की झलक दी है कि निरंतर प्रतिबद्धता वन्यजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में कैसे मदद कर सकती है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने पिछले साल शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के प्रभाव का भी हवाला दिया, जो नागरिकों को अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस पहल ने देश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल ने हर साल लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।" यह टिप्पणी तब आई जब भारत ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है। पिछले एक दशक में, सरकार ने वन क्षेत्र को बढ़ाने, लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करने और ख़राब पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।</p>
<p>प्रमुख संरक्षण पहलों में से एक प्रोजेक्ट चीता है, जिसके तहत सात दशक से भी अधिक समय पहले देश में प्रजाति विलुप्त होने के बाद अफ्रीकी चीतों को भारत में फिर से लाया गया था। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के प्रयासों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुओं और मध्य भारत में स्लॉथ बीयर के संरक्षण उपायों को आवास संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से तेज किया गया है। प्रधानमंत्री का संदेश विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करने वाले पोस्ट और पहल की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तराखंड में 'वेस्ट टू वेल्थ' क्रांति : पौड़ी गढ़वाल में माल्टा के छिलकों से तैयार हो रहे हर्बल उत्पाद, महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर पौड़ी गढ़वाल में माल्टा के छिलकों से फेस पैक और स्क्रब जैसे हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। 'हिलांस' ब्रांड के तहत निर्मित ये रसायन मुक्त उत्पाद महिलाओं को रोजगार दे रहे हैं। इस अनोखे मॉडल से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और पलायन रुक रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-pauri-garhwal-herbal-products-are-being-prepared-from-malta/article-155548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/uttrakhand1.png" alt=""></a><br /><p>पौड़ी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और महिला स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की पहल जनपद पौड़ी गढ़वाल में नयी सफलता की कहानी गढ़ रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत माल्टा के बेकार समझे जाने वाले छिलकों से हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद तैयार कर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में उमंग स्वायत्त सहकारिता द्वारा संचालित बेडू एवं फल प्रसंस्करण इकाई में महिलाएं माल्टा पील फेस पैक, फेस स्क्रब और हर्बल उबटन जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों के निर्माण में माल्टा के छिलकों के साथ मुल्तानी मिट्टी, चंदन, गुलाब पाउडर, हल्दी, बेसन और नीम जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जा रहा है। पूरी तरह हर्बल और रसायन मुक्त होने के कारण इन उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पहाड़ों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध माल्टा का उपयोग पहले केवल फल और जूस तक सीमित था, जबकि इसके छिलकों को अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता था। अब "वेस्ट टू वेल्थ" मॉडल के तहत इन्हीं छिलकों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर ग्रामीण महिलाओं की आय का नया स्रोत बनाया जा रहा है। ग्रामोत्थान परियोजना के तकनीकी मार्गदर्शन में विकसित इस पहल ने महिलाओं को गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। महिलाएं अब उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर ग्रामीण उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी मदद मिल रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार माल्टा के छिलकों में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट तथा त्वचा के लिए लाभकारी कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। इसी कारण सिट्रस आधारित स्किन केयर उत्पादों की मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। "हिलांस" ब्रांड के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिल रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माल्टा के छिलकों से तैयार हर्बल उत्पाद महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बन रहे हैं और यह पहल भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में यह पहल एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:45:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर पश्चिम रेलवे ने ऊर्जा संरक्षण और विद्युतीकरण में बनाई नई उपलब्धियां</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर पश्चिम रेलवे ने अप्रैल 2026 में ऊर्जा संरक्षण और विद्युतीकरण में नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्तमान में 80% यात्री ट्रेनें इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चल रही हैं। सौर संयंत्रों से 15.80 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि डीजल इंजन बंद रखने से ₹4.72 करोड़ के ईंधन की बचत दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/north-western-railway-made-new-achievements-in-energy-conservation-and/article-155106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/dausa-railwaystarion.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अप्रैल 2026 के दौरान ऊर्जा संरक्षण, सौर ऊर्जा उत्पादन और विद्युतीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार भगत की कोठी इलेक्ट्रिक लोको शेड में अब तक कुल 181 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सफलतापूर्वक कमीशन किए जा चुके हैं, जिनमें 78 डब्ल्यूएपी-7 और 103 डब्ल्यूएजी-9 एचसी शामिल हैं। रेलवे के चारों मंडलों में वर्तमान में 226 जोड़ी यात्री ट्रेनें इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर संचालित हो रही हैं, जो कुल यात्री ट्रेनों का लगभग 80 प्रतिशत है। वहीं माल परिवहन का करीब 61 प्रतिशत कार्य भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से किया जा रहा है। ऊर्जा संरक्षण के तहत अप्रैल 2026 में सौर संयंत्रों से लगभग 15.80 लाख यूनिट बिजली उत्पादन किया गया।</p>
<p>डीजल लोकोमोटिव को निष्क्रिय समय में बंद रखने से 509 किलोलीटर ईंधन की बचत हुई, जिससे करीब 4.72 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई। इसके अलावा जयपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर मंडलों में रूफटॉप सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है तथा अप्रैल 2026 तक 348 किलोवाट सौर क्षमता का कमीशनिंग कार्य पूरा किया गया। रेलवे की ओर से कवच प्रणाली, एलईडी हेडलाइट और केब एसी जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण एशिया राउंड टेबल में बोले टिम कर्टिस, यूनेस्को चेयर्स को बताया शिक्षा और नवाचार की सबसे बड़ी ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय राउंड टेबल में यूनेस्को के क्षेत्रीय निदेशक टिम कर्टिस ने हिस्सा लिया। भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने 'ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस' और नैतिक एआई जैसे नीतिगत विषयों पर चर्चा की। अमृता विश्वविद्यालय तीन यूनेस्को चेयर्स वाला भारत का एकमात्र संस्थान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speaking-at-the-south-asia-round-table-tim-curtis-called/article-154953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px4.png" alt=""></a><br /><p>केरल। यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय राउंड टेबल के दौरान कहा कि यूनेस्को चेयर्स संगठन के वैश्विक नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और नीति-स्तर की चर्चाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं। इस कार्यक्रम में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से 22 से अधिक प्रतिनिधियों, यूनेस्को चेयरधारकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शोध और सामुदायिक पहलों को यूनेस्को की 2026–2027 की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना था। प्रमुख विषयों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और प्रदूषण जैसी “ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस”, डिजिटल परिवर्तन, नैतिक एआई, लैंगिक समानता और युवाओं की भागीदारी शामिल रहे।</p>
<p>कार्यक्रम में बांग्लादेश के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि सुसान वाइज और नेपाल के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि जैको डु टॉइट भी शामिल हुए। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कुलाधिपति माता अमृतानंदमयी देवी से भी मुलाकात की। अमृता विश्व विद्यापीठम भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां तीन यूनेस्को चेयर्स स्थापित हैं—जेंडर इक्वैलिटी एंड वीमेन एम्पावरमेंट (डॉ.भवानी राव के नेतृत्व में), एक्सपीरिएंशियल लर्निंग फॉर सस्टेनेबल इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (डॉ.मनीषा वी.रमेश के नेतृत्व में) और असिस्टिव टेक्नोलॉजीज़ इन एजुकेशन (डॉ.प्रेमा नेदुंगाडी के नेतृत्व में)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा बचत के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम : ईवी कार से पहुंचे सचिवालय कपिल मिश्रा, वर्क फ्रॉम होम पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने ऊर्जा बचत का संदेश देने के लिए ईवी कार का उपयोग किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 'मेट्रो मंडे' और दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे कड़े कदम उठाए हैं। व्यापारियों और अधिकारियों ने भी ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने के इस राष्ट्रीय दायित्व में अपना समर्थन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/energy-conservation-is-not-just-an-option-but-a-national/article-153981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kapil-mishra.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। कपिल मिश्रा ऊर्जा संरक्षण का सन्देश देने के लिए आज ईवी कार चलाकर दिल्ली सचिवालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार दिल्ली वासियों के सहयोग से ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली में मेट्रो मंडे, दो दिन वर्क फ्रॉम होम और न्यूनतम गाड़ियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने सभी मंत्रीगण और अधिकारीगण भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे और अपने लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रम मंत्रालय से एडवाइजरी भी जारी की गई है और इसे लेकर आज सुबह से उन्होंने दिल्ली के कई व्यापारियों एवं उद्योगपतियों से चर्चा भी की है। सभी लोग स्वतः प्रेरणा से प्रधानमंत्री के आह्वान के साथ खड़े हैं और वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक पॉलिसी को लागू कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। प्रधानमंत्री की देशवासियों से ईंधन बचत और ऊर्जा के जिम्मेदार उपयोग की अपील की गई तथा दिल्ली सरकार और दिल्ली वासी इसे पूरा करने के लिए संकल्पित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी की अपील पर दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: एक साल तक कोई मंत्री नहीं करेगा विदेशी दौरा, सरकारी कर्मचारी 2 दिन करेंगे वर्क फ्रॉर्म होम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में बड़े सुधार लागू किए हैं। अब सरकारी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम करेंगे। ईंधन और बिजली बचाने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव किया गया है और मंत्रियों के विदेश दौरों पर एक साल तक पूर्ण रोक लगा दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-on-pm-modis-appeal-no/article-153833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guprta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी कामकाज में ऊर्जा बचत और खर्चों में कटौती के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार अब सरकारी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” करेंगे, ताकि कार्यालयों में बिजली और संसाधनों की खपत कम की जा सके। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत दफ्तरों का टाइम टेबल चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा, जिससे ट्रैफिक दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने कहा है कि अब से आने वाले एक साल तक कोई भी मंत्री विदेश दौरा नहीं करेगा।</p>
<p>सरकार ने कर्मचारियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने का भी फैसला लिया है। इससे निजी वाहनों का उपयोग घटेगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। वहीं खर्चों में कटौती के तहत दिल्ली सरकार के किसी भी मंत्री को अगले एक साल तक विदेश दौरे की अनुमति नहीं होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा बचत, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील की थी। दिल्ली सरकार उसी दिशा में यह कदम उठा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:11:38 +0530</pubDate>
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                <title>भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में विकसित होंगे चंदन वन, अधिकारियों को निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उच्च गुणवत्ता वाले पौधारोपण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के वन क्षेत्र का विस्तार करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-decision-of-bhajanlal-government-instructions-issued-to-sandalwood-forest/article-152555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में वन क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में चंदन के पौधों का चयन उच्च गुणवत्ता का हो और उनकी सुरक्षा व उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पौधारोपण अभियान की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से अभियान संचालित किया जा सके।</p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण और वन विकास अत्यंत आवश्यक है। बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना वाटर पॉजिटिव, जल संरक्षण में नई मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ने 1.37 लाख किलोलीटर पानी बचाकर राजस्थान का पहला "वाटर पॉजिटिव" एयरपोर्ट बनने का गौरव हासिल किया है। पुनर्चक्रण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए एयरपोर्ट ने उपभोग से अधिक जल संचयन किया। ब्यूरो वेरिटाज द्वारा प्रमाणित यह मॉडल मरूस्थलीय प्रदेश में सतत विकास की नई मिसाल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-international-airport-becomes-a-new-example-in-water-positive/article-151998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान में जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जयपुर स्थित जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब आधिकारिक रूप से “वाटर पॉजिटिव एयरपोर्ट” की श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह राजस्थान का पहला और देश के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है। एयरपोर्ट ने अप्रैल, 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 1.03 लाख किलोलीटर पानी का उपभोग किया, जबकि इसी अवधि में जल संरक्षण और पुनर्भरण उपायों के जरिए 1.37 लाख किलोलीटर पानी की बचत दर्ज की गई। यानी एयरपोर्ट ने जितना पानी इस्तेमाल किया, उससे कहीं अधिक पानी को पुनर्चक्रित और संरक्षित किया गया।</p>
<p>इस उपलब्धि के लिए ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म ब्यूरो वेरिटाज ने एयरपोर्ट को आधिकारिक एक्रेडिटेशन प्रदान किया है। एयरपोर्ट परिसर में जल संरक्षण के लिए 18 गहरे एक्वाफर रिचार्ज पिट बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल का संग्रहण कर भूजल स्तर बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल पुनर्चक्रण और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। पानी की कमी वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद एयरपोर्ट प्रशासन ने सतत प्रयासों से जल प्रबंधन का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि अन्य संस्थानों और एयरपोर्ट्स के लिए भी प्रेरणा बनेगी और जल संरक्षण के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:49:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयपुर में ‘डिजाइनिंग फॉर लाइफ’ पर मंथन, ग्रीन बिल्डिंग भविष्य की जरूरत : बिल मैक्वेड</title>
                                    <description><![CDATA['अशरे' (ASHRAE) राजस्थान द्वारा आयोजित चर्चा में ग्लोबल प्रेसिडेंट बिल मैक्वेड ने ग्रीन बिल्डिंग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी में टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा संरक्षण और स्वस्थ भवनों का निर्माण लागत बढ़ाने वाला भ्रम है; यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए निवेश है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ashraes-panel-discussion-on-green-buildings-healthy-buildings-are-essential/article-151594"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bil.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अमेरिकन सोसायटी ऑफ हीटिंग रेफ्रिजरेटिंग एंड एयरकंडीशनिंग इंजीनियर्स (ASHRAE ) राजस्‍थान चैप्‍टर की ओर से ' डिजाइनिंग फोर लाइफ- हाउ हैल्‍दी बिल्डिंग विल शेप इंडियाज हेल्‍थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, एंड इफ्रास्‍ट्रक्‍स्‍चर फ्यूचर' थीम पर पैनल डिस्कशन किया गया । जिसमें अमेरिका से आए मुख्‍य अतिथि 'अशरे' के ग्लोबल प्रेसिडेंट बिल मैक्‍वेड ने कहा कि भारत हेल्‍थकेयर और हॉस्पिटैलिटी में ग्रीन बिल्डिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन जागरूकता अभी भी चुनौती है। ग्रीन और हैल्‍दी बिल्‍डिंग हमारे साथ हमारी आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सौगात होगी। असरे जैसी संस्‍था और इससे जुड़े इंजीनियर्स की जिम्मेदारी है कि इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।</p>
<p>विशिष्ट अतिथि ग्रीन बिल्डिंग कंसल्टेंट पंकज धारकर ने कहा कि भारत में ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ईसीबीसी) ने स्वास्थ्य भवन मानकों के प्रति जागरुकता बढ़ाई है। यह भी भ्रम है कि ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट से भवन निर्माण लागत में वृद्धि होती है। इसमें रेलवे सीआरएस शशि किरण, बिल्डर आनंद मिश्रा, कंसल्टेंट सुधीर माथुर, डॉ शीतू सिंह, आर्किटेक्ट तुषार सोगानी और डॉ शिवराज सिंह ढाका ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में ग्रीन बिल्डिंग के महत्व पर चर्चा की। इस अवसर पर 'अशरे' राजस्थान के अध्‍यक्ष तपन बसु रॉय, भावी अध्‍यक्ष एन राम, सचिव सुधीर माथुर भी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:32:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने पेश किए विकसित भारत 2047 के लिए 9 संकल्प : जनता को संभालनी होगी कमान, सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिनिधित्व का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मांड्या में 'विकसित भारत' के लिए नौ संकल्पों का मंत्र दिया। उन्होंने जल संरक्षण, 'एक पेड़ मां के नाम', स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। पीएम ने स्वस्थ भारत के लिए प्राकृतिक खेती और योग पर जोर देते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-presented-9-resolutions-for-developed-india-2047-people/article-150541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi9.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'विकसित भारत के लिए नौ संकल्प' लेने का अनुरोध किया और कहा कि यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित भारत 2047 बनाने की यात्रा में तेजी ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी मठ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल क्षेत्रीय सीमाओं से परे है और सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी आह्वान का प्रतिनिधित्व करती है।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की व्यक्तिगत आदतें और दैनिक विकल्प देश के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा, "यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित कर्नाटक और विकसित भारत की ओर प्रगति को तेज कर सकते हैं।" विकास को केवल सरकार संचालित प्रयास के बजाय जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परिवर्तन की शुरुआत रोजमर्रा के व्यवहार के स्तर से होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने नदी प्रणालियों पर निर्भर क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकता बताया, और नागरिकों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम सब जल संरक्षण और इसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें।" पर्यावरण स्थिरता पर प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आइए हम अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाएं और धरती मां की रक्षा करें।"</p>
<p>स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में साफ-सफाई बनाये रखना साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "चाहे वह धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।" आर्थिक आत्मनिर्भरता के संबंध में, प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय उद्योगों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' दृष्टिकोण को आर्थिक सशक्तीकरण के आधार बताते हुए कहा, "आइए हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं और अपने उद्योगों को मजबूत करें।"</p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देते हुए नागरिकों से देश भर में यात्रा करने और इसकी विविधता को जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम पूरे भारत की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देगा। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और पोषण पर मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने पर जोर देते इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बढ़ता मोटापा बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गयी है। इसके साथ ही नागरिकों से तेल की खपत में 10 फीसदी की कमी का आग्रह किया। कृषि को लेकर उन्होंने किसानों से कहा, "आइए हम रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।"</p>
<p>उन्होंने शारीरिक फिटनेस पर और जोर देते हुए कहा, "योग, खेल और फिटनेस हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।" उन्होने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता में स्थापित किये जाने की बात कही। इस मौके पर उन्होंने जनसेवा की मजबूत भावना का आह्वान करते हुए कहा, "जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत करती है और जीवन को बड़ा उद्देश्य देती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नौ संकल्प एक व्यापक जन-भागीदारी वाले शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां नागरिक स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन सामूहिक रूप से राष्ट्रीय परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामूहिक प्रतिबद्धता "विकसित कर्नाटक और विकसित भारत" के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p>इससे पहले दिन में, उन्होंने मांड्या जिले के ऐतिहासिक आदिचुंचनगिरी मठ परिसर में 'श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर' का उद्घाटन किया, जो दिवंगत संत श्री बालगांगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित एक नया आध्यात्मिक स्थल है। आदिचुंचनगिरी की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह 'गद्दीगे' स्मारक उस विरासत के प्रति श्रद्धांजलि है, जो दशकों से मठ की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p>शैव मत की सदियों पुरानी नाथ परंपरा के तहत निर्मित इस मंदिर को उस गुरु-शिष्य परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जो इस संस्थान की आध्यात्मिक शृंखला को परिभाषित करती है। जैसे ही पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजे, बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए, जिससे यह उद्घाटन भक्ति, विरासत और जन-भागीदारी के संगम में बदल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:52:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सरकार करेगी वन क्षेत्र और जानवरों की सुरक्षा मजबूत: पांच रेस्क्यू वाहनों और 460 मोटरसाइकिलों को दिखाई हरी झंडी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में वन मंत्री संजय शर्मा ने 'फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स' थीम पर वन्यजीवों के लिए 5 रेस्क्यू वाहन और 460 मोटरसाइकिलें रवाना कीं। शाहपुरा में अटल वन का उद्घाटन और ₹30 करोड़ की लागत से 20 प्रे-बेस आॅगमेंटेशन सेंटर की शुरुआत हुई। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राजीविका के साथ एमओयू और डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डिजीवन' भी लॉन्च किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-strengthen-the-protection-of-forest-areas-and-animals/article-147425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sanjay-saharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में शनिवार को फॉरेस्ट्स एंड इकोनॉमिक्स थीम पर आरआईसी के सभागार में हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री की ओर से कई महत्वपूर्ण पहल की गई। कार्यक्रम में वन्यजीवों के लिए पांच रेस्क्यू वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई। वन क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 460 मोटरसाइकिलों को भी रवाना किया गया। इस अवसर पर जयपुर के शाहपुरा तहसील में विकसित अटल वन का उद्घाटन भी किया। लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस वन में इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉकिंग ट्रेल, वॉच टावर, सोलर फेसिंग तथा जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अनेक नवाचार शामिल हैं। कार्यक्रम में एक पेड़ मां के नाम अभियान पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ। वनमित्रों को पेट्रोलिंग किट भी वितरित की गई। </p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन को लेकर समझौता</strong></p>
<p>जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवा संवर्धन परियोजना के अंतर्गत राजीविका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। वन प्रबंधन में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए डिजीवन डिजिटल प्लेटफॉर्म के नए मॉड्यूल को भी लाइव किया गया, जिससे वन्यजीव आवास निगरानी एवं कार्बन क्रेडिट प्रबंधन में सहायता मिलेगी। राजस्थान राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी हुआ। </p>
<p>20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन </p>
<p>वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 30 करोड़ की लागत से कोटा, बारां, पाली, सिरोही, चुरू, मुकुंदरा तथा अजमेर के प्रोटेक्टेड क्षेत्र में 20 प्रे-बेस ऑगमेंटेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। साथ ही 6 वन चौकियों, 2 बैरकों एवं 1 क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय तथा 7 नई नर्सरियों का भी लोकार्पण की गया। कार्यक्रम में विधायक गोपाल शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आनन्द कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय सहित संबंधित विभाग के अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:35:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण का किया आह्वान, देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और यह हमारे ग्रह के भविष्य को तय करता है। भारत की 18% आबादी के पास केवल 4% मीठा पानी है, इसलिए जल जीवन मिशन और वर्षा जल संचयन जैसे सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-called-for-water-conservation-on-world-water-day/article-147413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का आग्रह किया और जीवन को बनाए रखने और ग्रह के भविष्य को आकार देने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में, प्रधानमंत्री ने ज़िम्मेदार उपयोग और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल हमारा जीवन है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। उन्होंने देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने और उसका ज़िम्मेदारी से उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस अवसर पर सतत जल प्रबंधन की दिशा में कार्य कर रहे लोगों एवं समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज का दिन उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है जो सतत प्रथाओं में संलग्न हैं, जागरूकता को बढ़ावा देते हैं और संरक्षण की संस्कृति को पोषित करते हैं।”</p>
<p>विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक जल संकट और मीठे जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष विश्व की सरकारें, संगठन और समुदाय इस दिन का उपयोग जल संबंधी चुनौतियों, जैसे कि जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।</p>
<p>भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन इसके पास विश्व के मीठे पानी के संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है और इसके कई क्षेत्रों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन जैसी सरकारी पहलों और बारिश जल संचयन और कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने वाले अभियानों ने इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है लेकिन विशेषज्ञ जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल देते हैं।</p>
<p>जलवायु विषमता के तीव्र होने और पानी की मांग बढ़ने के साथ, संरक्षण की आवश्यकता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है और नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों से इस आवश्यक संसाधन की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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