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                <title>war crimes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर बरपाया कहर: फास्फोरस युक्त गोला-बारूद से किया हमला; एक शख्स की मौत, 11 अन्य घायल </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान की आठ बस्तियों पर इजरायली तोपखाने द्वारा प्रतिबंधित फास्फोरस गोला-बारूद के इस्तेमाल से तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोपों के बीच, हिजबुल्लाह की जवाबी गोलाबारी में एक इजरायली की मौत हो गई। नवंबर 2024 के युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच संघर्ष और संप्रभुता का उल्लंघन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/israel-wreaks-havoc-on-southern-lebanon-attacks-with-phosphorus-laden/article-148074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lebnan.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। इजरायली तोपखाने ने दक्षिणी लेबनान की आठ बस्तियों पर फास्फोरस युक्त गोला-बारूद से हमला किया। यह जानकारी लेबनानी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएएनए) ने शुक्रवार को दी। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध क्षेत्रों में फास्फोरस युक्त गोला-बारूद का उपयोग निषिद्ध है। संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस के मानकों के अनुसार, नागरिकों या आबादी वाले क्षेत्रों के खिलाफ ज्वलनशील हथियारों का उपयोग प्रतिबंधित है। यह विशिष्ट पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन में निहित है, जो ऐसे हमलों पर प्रतिबंध लगाता है जिनसे अत्यधिक पीड़ा होने की आशंका हो। फॉस्फोरस का उपयोग गंभीर जलन और आग का कारण बन सकता है, इसलिए नागरिकों के खिलाफ इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन और संभावित युद्ध अपराध माना जाता है।</p>
<p>इजरायल की राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा यानी मैगन डेविड एडोम (एमडीए) ने कहा कि लेबनानी हिजबुल्लाह आंदोलन की गोलाबारी के परिणामस्वरूप उत्तरी इजरायल में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते के बावजूद, लेबनान ने बार-बार इजरायल पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है। इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के पांच रणनीतिक बिंदुओं पर मौजूद है, जिनमें ग़जार गांव का उत्तरी भाग भी शामिल है, जिसे लेबनानी अधिकारी निरंतर कब्ज़ा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन मानते हैं।</p>
<p>इजरायली सेना का दावा है कि वह हमलों में हिज़्बुल्लाह के सैन्य संरचनाओं को निशाना बना रहे हैं। इजरायल ने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि वह हिज़्बुल्लाह के सैन्य विंग के नेताओं को खत्म करने और शिया आंदोलन से उत्पन्न खतरे को समाप्त करने के लिए लेबनान पर हमले जारी रखेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 16:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इजरायली हिरासत केंद्रों को 'बर्बरता की प्रयोगशाला' करार दिया है। अक्टूबर 2023 से 1,500 बच्चों सहित 18,500 फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है। रिपोर्ट में यौन शोषण, भुखमरी और अमानवीय यातनाओं का खुलासा करते हुए इसे 'राजकीय नीति' और नरसंहार का हथियार बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-dreadful-truth-has-been-exposed-in-the-un-report/article-147740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jail.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने इजरायली हिरासत केंद्रों के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है, जिसे अब 'राज्य के सिद्धांत' के रूप में अपनाया जा चुका है। अक्टूबर 2023 से अब तक जुल्म की यह शृंखला 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिनमें 1,500 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं।</p>
<p>ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की दास्तान हैं, जिन्हें बिना किसी आरोप या मुकदमे के सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। करीब 100 कैदियों की हिरासत में हुई मौतें इस व्यवस्था की भयावहता की गवाही देती हैं। इजरायली जेलें अब सुधार गृह नहीं, बल्कि 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' बन चुकी हैं। जहां कैदियों के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी हरकतें की जा रही हैं, जो इंसानियत को शर्मसार कर दें। लोहे की छड़ों और चाकुओं से यौन शोषण, हड्डियों और दांतों को बेरहमी से तोड़ना, भूखा रखना और कैदियों पर कुत्तों से हमला करवाकर उन पर पेशाब करना— ये वे अकल्पनीय प्रताड़नाएं हैं, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक तौर पर भी पूरी तरह तोड़ देना है। यह संगठित बर्बरता अब अंधेरे में नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों की शह पर खुलेआम अंजाम दी जा रही है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि दशकों से मिल रही छूट और राजनीतिक संरक्षण के चलते, फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की व्यवस्थित प्रताड़ना अब कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में जारी 'नरसंहार' का परिभाषित हथियार बन गयी है। 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी नयी रिपोर्ट में कहा, "नरसंहार की शुरुआत के बाद से, इजरायली जेल प्रणाली 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' में बदल गयी है।" </p>
<p>अल्बानीज के अनुसार, "जो कभी अंधेरे और साये में किया जाता था, वह अब खुलेआम हो रहा है। संगठित अपमान, पीड़ा और अधोगति का यह शासन अब उच्चतम राजनीतिक स्तरों से स्वीकृत है।" यानी, जो दर्द पहले छिपाया जाता था, अब उसे सत्ता की शह पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर सहित वरिष्ठ अधिकारियों की लागू की गयी नीतियों ने प्रताड़ना, सामूहिक दंड और हिरासत की अमानवीय स्थितियों को एक संस्थानिक रूप दे दिया है। यह फिलिस्तीनियों को इंसान न समझने की एक सोची-समझी नीति है।</p>
<p>विशेष दूत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों के इन जघन्य उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच और न्याय का सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के समय भी इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और अपराधियों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय' (आईसीसी) के कटघरे में खड़ा होना होगा। अल्बानीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कम से कम 1,500 बच्चे शामिल हैं। हजारों लोग बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद हैं, कई 'जबरन गायब' कर दिये गये हैं और लगभग 100 कैदियों की हिरासत में मौत हो चुकी है।</p>
<p>कैदियों के साथ ऐसी दरिंदगी की गयी है जो कल्पना से परे है। रिपोर्ट में बोतलों, लोहे की छड़ों और चाकुओं से बलात्कार, भुखमरी, हड्डियां और दांत तोड़ना, शरीर को जलाना, थूकना और कुत्तों से हमला करवाना व उन पर पेशाब करवाने जैसी भयानक प्रताड़नाओं का जिक्र है।<br />वर्ष 2025 में प्रताड़ना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी 'संगठित और व्यापक प्रताड़ना की एक वास्तविक 'राज्य की नीति' की निंदा की थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बेहद गंभीर हो गयी है।</p>
<p>इस बर्बरता को दुनियाभर के राजनेताओं से बचाव मिल रहा है। कानूनी संस्थाएं इसे तर्कसंगत बता रही हैं। मीडिया इसे साफ-सुथरा कर पेश कर रहा है। दुनिया की वे सरकारें इसे सहन कर रही हैं, जो इजरायल को हथियार और सुरक्षा देना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रताड़ना केवल जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। निरंतर बमबारी, जबरन विस्थापन, भुखमरी, घरों-अस्पतालों की तबाही और सैन्य व बसने वाले आतंकी समूहों के खौफ ने पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र को एक 'प्रताड़नाकारी माहौल' में बदल दिया है।</p>
<p>अल्बानीज ने भावुक होकर कहा, "गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुसलेम में फिलीस्तीनी पीड़ा की अटूट शृंखला से गुजर रहे हैं। वहां कोई शरण नहीं है, कोई सुरक्षित कोना नहीं है, जीने के लिए कोई महफूज जगह नहीं बची है।" अल्बानीज़ ने इजरायल से प्रताड़ना के सभी कृत्यों को तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को प्रवेश देने और कब्जे को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होने तक दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया और सदस्य देशों से नरसंहार और प्रताड़ना को रोकने के अपने कानूनी दायित्वों को निभाने की अपील की। इनमें इतामार बेन-ग्वीर, बेजालेल स्मोट्रिच और इजरायल काट्ज जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 18:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले को शशि थरूर ने ठहराया गलत, खामेनेई की मौत पर चुप्पी साधने पर केंद्र सरकार को घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[सांसद शशि थरूर ने ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की निंदा करते हुए इसे "सैद्धांतिक रूप से गलत" बताया है। उन्होंने निर्दोष नागरिकों की मौत और भारतीय हितों पर खतरे पर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी की धरती होने के नाते भारत को इस वैश्विक अस्थिरता पर चुप रहने के बजाय अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shashi-tharoor-condemned-the-us-israeli-attack-on-iran-as-wrong/article-146365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shashi-tharoor.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पार्टी के लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कहा है कि अमेरिका तथा इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरना गलत था लेकिन ईरान ने भी उन देशों पर हमला कर गलत ही किया है जो युद्ध में शामिल ही नहीं हैं। शशि थरूर ने शुक्रवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान से खेलना ठीक नहीं है। उनका यह भी कहना था कि जो हालात अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और फिर ईरान के पड़ोसी देशों में किए जा रहे हमले से बन रहे हैं वह गंभीर है। उनका कहना था कि इन सब स्थितियों के बीच भारत का चुप रहना भी ठीक नहीं है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल के हमले को सैद्धांतिक रूप से गलत बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आत्मरक्षा वाली बात को सही नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना कि जब बातचीत चल रही थी और ईरान बात मानने के लिए भी तैयार था तो इसमें आत्मरक्षा की बात कहां से आती है।</p>
<p>उन्होंने युद्ध में शामिल न होने वाले देशों पर ईरान के हमलों को भी गलत बताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है और इस कार्रवाई को कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता है। हमलों में कुछ निर्दोष भारतीय नागरिकों की भी मृत्यु हुई है। ये सभी नागरिक निर्दोष थे और किसी के पक्ष में युद्ध नहीं लड़ रहे थे।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि अब हालात यह हो गये हैं कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। यह भी खबर है कि एक टैंकर पर हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर थाईलैंड के ध्वज वाला था। उनका कहना था कि इस तरह से हमले ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा "हम अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की धरती के लोग हैं। हम शांति चाहते हैं और हमारे विदेश मंत्री भी खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से बात कर रहे हैं और मुझे लगता है कि भारत को और अधिक सक्रिय होना चाहिए। इस माहौल में हम चुप नहीं बैठ सकते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुरक्षा परिषद में खाड़ी देशों पर ईरानी हमले के विरोध में प्रस्ताव पारित : हमलों की जल्द समाप्त करने का किया आह्वान, भारत सहित 130 से ज्यादा देशों ने किया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ। भारत समेत 130 से अधिक देशों ने खाड़ी देशों पर हमलों और समुद्री परिवहन बाधित करने की कड़ी आलोचना की। हालांकि, ईरान ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए अमेरिका-इजरायल पर युद्ध अपराधों और नागरिक मौतों का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/resolution-passed-in-security-council-against-iranian-attack-on-gulf/article-146215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-war2.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 130 से अधिक देशों के साथ बुधवार को उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान के हालिया 'भीषण' हमलों की निंदा की गई है। यह प्रस्ताव ईरान के हमलों की भर्त्सना करता है और शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को अवरुद्ध करने, बाधित करने या हस्तक्षेप करने की ईरान की किसी भी कार्रवाई या धमकी की कड़ी निंदा की गयी है। इसके साथ ही ईरान द्वारा बाब-अल-मंदेब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी कदम की भी निंदा की गई है।</p>
<p>सुरक्षा परिषद के 15 में 13 सदस्यों ने बहरीन की ओर से पेश किये गये इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। किसी भी देश ने इसके खिलाफ मतदान नहीं किया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया। इस प्रस्ताव का भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 130 से अधिक देशों ने सह-प्रायोजन किया।</p>
<p>कुल 135 सह-प्रायोजकों के साथ, प्रस्ताव ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए मजबूत समर्थन दोहराया। इसमें इन देशों के क्षेत्रों के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए हमलों की 'कड़े शब्दों में' निंदा की गई और कहा गया कि ऐसी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। प्रस्ताव में ईरान से पड़ोसी देशों के प्रति किसी भी उकसावे या धमकियों को 'तत्काल और बिना शर्त' रोकने की मांग की गई है।</p>
<p>अमेरिका के प्रतिनिधि ने कहा कि ईरान सभी दिशाओं में हमले करता है। वहीं, डेनमार्क के प्रतिनिधि ने कहा कि इस 'महत्वपूर्ण क्षण में क्षेत्र की आवाजों को सुनना अनिवार्य है।' प्रस्ताव में यह भी दोहराया गया कि व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपने नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का प्रयोग पूर्ण अधिकार होना चाहिए।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने कहा कि यह प्रस्ताव ईरानी शासन की क्रूरता की स्पष्ट निंदा है। श्री वॉल्ट्ज़ ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने राजनयिक बातचीत के हर प्रयास को आज़मा लिया था। उन्होंने कहा, "श्री ट्रंप ने अपनी 'रेड लाइन' खींची थी, ईरान ने उसे फिर से पार कर लिया और अब दुनिया इसके परिणाम भुगत रही है।"</p>
<p>दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत अमीर सईद इरावानी ने परिषद के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे 'अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी' बताया। उन्होंने सुरक्षा परिषद को याद दिलाया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 1,348 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और 17,000 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p>इरानी दूत ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के इन हमलों ने हजारों घरों, स्कूलों और चिकित्सा सुविधाओं को नष्ट कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दावे पूरी तरह से असत्य हैं। उन्होंने इजरायल पर अमेरिका को क्षेत्रीय संघर्ष में घसीटने का आरोप लगाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी सरकार का दावा: अमेरिकी-इजरायली हमलों में 1,300 से अधिक नागरिकों की मौत; 9,669 नागरिक ठिकाने हुए नष्ट,  अमेरिका-इजरायल जानबूझकर बुनियादी ढांचे को बना रहे निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका-इजरायल हमलों में 1,300 नागरिक मारे गए और 7,000 से अधिक घर तबाह हुए। उन्होंने ईंधन डिपो पर बमबारी से फैले जहरीले प्रदूषण और राजनयिकों की हत्या को 'युद्ध अपराध' करार दिया। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मानवीय संकट को रोकने हेतु तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-government-claims-more-than-1300-civilians-killed-in-american-israeli/article-146072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि गत 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों में ईरान में 1,300 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और 9,669 नागरिक ठिकाने नष्ट हो गए हैं। इरावानी ने मंगलवार को प्रेस को दिए एक बयान में बताया कि नष्ट किए गए नागरिक ठिकानों में 7,943 आवासीय घर, 1,617 वाणिज्यिक और सेवा केंद्र, 32 चिकित्सा सुविधाएं, 65 स्कूल और शैक्षणिक संस्थान, रेड क्रिसेंट की 13 इमारतें और कई ऊर्जा आपूर्ति सुविधाएं शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, अमेरिका-इजरायल जानबूझकर और अंधाधुंध तरीके से मेरे देश के नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई सम्मान नहीं कर रहे हैं और इन अपराधों को करने में कोई संयम नहीं दिखा रहे हैं। इरावानी ने कहा कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह आंकड़ें वास्तविक नहीं हैं, इनमें बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p>ईरान के राजदूत ने नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों का उल्लेख करते हुए बताया कि शनिवार रात तेहरान और अन्य शहरों में ईंधन भंडारण केंद्रों पर भारी हमले किये गये, जिससे वातावरण में बड़ी मात्रा में खतरनाक और जहरीले प्रदूषक फैल गए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी का हवाला देते हुए इरावानी ने कहा कि इन विस्फोटों के कारण गंभीर वायु प्रदूषण हुआ और नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ये जघन्य हमले अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों का भी उल्लंघन करते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन और जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत आने वाले नियम शामिल हैं। इरावानी ने अन्य उदाहरणों का भी जिक्र किया, जिनमें शनिवार तड़के तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर हुए हमले शामिल हैं, जिससे कई नागरिक विमान और सुविधाएं नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा होर्मोजगन प्रांत के केशम द्वीप पर एक मीठे पानी के संयत्र पर हमला किया गया, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई।</p>
<p>प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि रविवार तड़के इजरायल ने लेबनान के बेरूत में रामादा होटल पर जानबूझकर आतंकवादी हमला किया, जिसमें चार ईरानी राजनयिक मारे गए। उन्होंने कहा, किसी अन्य संप्रभु राज्य के क्षेत्र में राजनयिकों की लक्षित हत्या एक गंभीर आतंकवादी कृत्य, युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है। इरावानी ने कहा, ईरानी लोगों के खिलाफ इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब कार्रवाई करनी चाहिए। हम अपने लोगों, अपने क्षेत्र और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:58:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बंगलादेश ने युद्ध अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का किया आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[बंगलादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने फिलिस्तीनी-इजरायल  के बीच जारी संघर्ष की तत्काल समाप्ति और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने तथा युद्ध अपराध एवं मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का आह्वान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bangladesh-calls-for-holding-israel-responsible-for-war-crimes/article-76960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/bangladesh-flag.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बंगलादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने फिलिस्तीनी-इजरायल  के बीच जारी संघर्ष की तत्काल समाप्ति और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने तथा युद्ध अपराध एवं मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का आह्वान किया है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक गाम्बिया की राजधानी बंजुल में 15वें इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) शिखर सम्मेलन में बोलते हुए महमूद ने कहा कि हम, ओआईसी के सदस्य देशों को गाजा संकट को समाप्त करने के लिए एक बहु-ट्रैक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओआईसी को इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए सरकारों और संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य संगठनों जैसे अंतर-सरकारी निकायों के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 14:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब: जेलेंस्की</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने आगाह किया कि  नागरिकों के लिए आने वाली सर्दी मुश्किल भरी होगी साथ ही कहा कि  रूसी सेना के यूक्रेन में किये गये अपराधों को एक दस्तावेज 'बुक ऑफ टॉर्चर्स के रूप में जल्द ही जारी किया जायेगा यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/book-on-russian-militarys-war-crimes-in-ukraine-to-be/article-11662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/zelensky-.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">कीव।</span></strong> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने आगाह किया कि<span>  </span>नागरिकों के लिए आने वाली सर्दी मुश्किल भरी होगी साथ ही कहा कि<span>  </span>रूसी सेना के यूक्रेन में किये गये अपराधों को एक दस्तावेज </span>'<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">बुक ऑफ टॉर्चर्स</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">के रूप में जल्द ही जारी किया जायेगा </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब जेलेंस्की</span> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब: जेलेंस्की </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति ने मंगलवार रात को वीडियो के माध्यम से संबोधन करते हुए कहा</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">रूस के यूक्रेन पर हमला करने के कारण हालिया स्थिति में यह स्वतंत्रता के बाद की सबसे कठिन सर्दी होने वाली है।</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि सरकारी अधिकारियों और राज्य के स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आने वाली सर्दी के सीजन की तैयारी के लिए एक मुख्यालय स्थापित करने के लिए चर्चा की गयी है। सीएनएन ने यह रिपोर्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्दी के मौसम में कोयले के संचय और बिजली उत्पादन के लिए गैस खरीदने की समस्या है। इस समय हम विदेश में अपनी गैस और कोयले को नहीं बेचेंगे। सभी घरेलू उत्पाद को हमारे नागरिकों के उपयोग के लिए रखा जायेगा। उन्होंने उद्धृत करते हुए कहा कि वह रूसी हमलों से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए ताप और बिजली संयंत्रों की मरम्मत करने की भी योजना बना रहे हैं। आगामी महीनों में इस कार्यक्रम को लागू करने का काम यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय के शीर्ष<span>  </span>काम में से एक है।</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सीएनएन ने राष्ट्रपति के हवाले से कहा कि यूक्रेन में युद्ध अपराधियों और रूसी सेना के अपराधियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एक पुस्तक </span>'' <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">बुक ऑफ टॉर्चर</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जारी की जायेगी।</span></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 16:41:37 +0530</pubDate>
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