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                <title>coaching hub - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोचिंग शिफ्टिंग पर सियासत तेज: गहलोत ने सरकार से पूछा-किसके दबाव में रुका फैसला?</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रताप नगर कोचिंग हब की दुर्दशा पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और सुरक्षित वातावरण देने में विफल रही है। गहलोत ने 185 करोड़ की एलिवेटेड रोड को अनावश्यक बताया और पूछा कि आखिर किसके दबाव में संस्थानों की शिफ्टिंग रोकी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/politics-intensified-on-coaching-shifting-gehlot-asked-the-government/article-148336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ashok-gehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: कोचिंग संस्थानों की शिफ्टिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर सरकार पर हमला बोला है। गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि भाजपा सरकार न तो युवाओं को नौकरी दे रही और न ही सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण दे पा रही। भाजपा सरकार की अदूरदर्शिता से प्रताप नगर कोचिंग हब की दुर्दशा हो रही है। एक तरफ करोड़ों की लागत से बना देश का पहला व्यवस्थित कोचिंग हब धूल फांक रहा है, दूसरी तरफ सरकार त्रिवेणी नगर से गुर्जर की थड़ी तक 185 करोड़ रुपए की अनावश्यक एलिवेटेड रोड थोप रही है। पहले से पर्याप्त कैंपस वाली आईआईटी जोधपुर को जयपुर में बेवजह कोचिंग हब परिसर दिया जा रहा है। गहलोत ने पूछा है कि आखिर कोचिंग संस्थानों की शिफ्टिंग किसके दबाव में नहीं हो रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:32:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Coaching Hub को शुरू करने के लिए आवासन मंडल ने अब सरकार के पाले में डाली गेंद</title>
                                    <description><![CDATA[ छात्र-छात्राओं को एक ही स्थान पर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही करीब 70 हजार विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए कोचिंग सेंटर का निर्माण किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/housing-board-has-now-put-the-ball-in-the-governments/article-86249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/coching-hub.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश की राजधानी नई दिल्ली में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुई तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी हड़कंप मच गया। शहर के विभिन्न इलाकों में संचालित कोेचिंग सेंटरों की जांच शुरू गई है, जिससे यहां किसी भी कोचिंग सेंटरों में ऐसा कोई हादसा नहीं हो। अब कोचिंग हब में कोचिंग सेंटर को लाने के लिए राजस्थान आवासन मंडल प्रशासन ने नियमों के विपरीत संचालित होने वाले कोचिंग सेंटर पर सख्त कार्रवाई के लिए सरकार को पत्र लिखा है। अब मंडल प्रशासन ने कोचिंग हब को संचालित करने के लिए गेंद एक बार फिर से सरकार के पाले में डाल दी है। </p>
<p><strong>प्रदेश का पहला कोचिंग हब</strong><br />राजस्थान आवासन मंडल ने प्रताप नगर की आवासीय योजना में करीब 65 हजार वर्गमीटर भूमि पर सभी सुविधाओं से युक्त कोचिंग हब का निर्माण कर दिया, लेकिन शहर में नियमों को ताक में रखकर संचालित होने वाले कोचिंग सेंटर में पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में भी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई और कोचिंग सेंटर संचालकों ने कोचिंग हब से दूरी बना ली। मंडल की ओर से करीब 475 करोड़ की लागत से बनाए इस हब में चार साल बाद भी चार ही कोेचिंग सेंटर पहुंच सके हैं। </p>
<p><strong>गोपालपुरा पर संचालित 274 कोचिंग सेंटरों को थमाए थे नोटिस</strong><br />करीब एक साल पूर्व गुजरात के सूरत स्थित कोचिंग सेंटर में हुई आगजनी की घटना के बाद राजधानी जयपुर के कोचिंग सेंटरों का भी सर्वे करवाया था। इसमें आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित कोचिंग सेंटरों का नगर निगम जयपुर ग्रेटर ने सर्वे कराया और मानसरोवर जोन ने करीब 274 कोचिंग सेंटर को नोटिस भी थमाए थे। </p>
<p><strong>पांच ब्लॉकों में 224 सेंटर</strong><br />कोचिंग हब को आवासन मंडल ने दो चरणों में तैयार किया है। इसमें पहले चरण में 140 कोचिंग सेंटरों के लिए तीन पांच ब्लॉक गत कांग्रेस सरकार में ही पूरे कर दिए थे और शेष तीन ब्लॉकों का काम अंतिम चरण में है। वहीं दूसरे चरण में 84 कोचिंग सेंटर का काम लगभग पूरा हो चुका है। कोचिंग हब में पर्याप्त सुविधाओं के होने के बाद भी कोचिंग संचालकों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। गौरतलब है कि पिछले माह कोचिंग हब को डिस्पोजल करने के लिए मंडल अध्यक्ष टी. रविकांत ने भी दौरा किया था और अधिकारियों को इसके निस्तारण की कार्य योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए थे। इसके बाद मंडल प्रशासन ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ एक-एक सेमिनार रखी गई है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। </p>
<p><strong>यह भी है सुविधाएं </strong><br />छात्र-छात्राओं को एक ही स्थान पर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही करीब 70 हजार विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए कोचिंग सेंटर का निर्माण किया गया है। इसके अलावा यहां सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कोचिंग हब परिसर में वॉकिंग ट्रेक, साइक्लिंग ट्रेक, ओपन एयर जिम, इंडोर जिम, हैल्थ चैकअप सेंटर, बॉस्केटबॉल कोर्ट, टेनिस कोर्ट, योगा सेंटर के साथ मेडिटेशन सेंटर भी बनाए गए हैं। सैंट्रल लाइब्रेरी एवं 1200 की क्षमता का आॅडिटोरियम भी बनाया गया है। चार कैफेटेरिया, एक फूड कोर्ट एवं सुरक्षा के लिए परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जा रहा है। </p>
<p>शहर में अवैध रूप से संचालित होने वाले कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। सरकार की कार्रवाई के बाद कोचिंग सेंटर संचालकों को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं कोचिंग हब में मिल सकेंगी।<br />-प्रतीक श्रीवास्तव, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, राजस्थान आवासन मंडल </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jul 2024 09:49:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कोचिंग हब की जून में मिलेगी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[मंडल आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि कोचिंग हब में कोचिंगों के संचालन के साथ ही लोकल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था प्रारंभ हो जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/coaching-hub-will-be-gifted-in-june/article-45259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/z-41.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल की ओर से प्रताप नगर प्रताप नगर हल्दीघाटी मार्ग स्थित देश के पहले कोचिंग हब के प्रथम फेज का काम अंतिम दौर है और जून माह में आमजन को इसकी सौगात मिल सकती है। मंडल आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि विश्व स्तरीय कोचिंग हब के प्रथम चरण का काम लगभग पूरा हो गया है और लोगों का इंतजार जून माह में समाप्त होने को है और जून माह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल आमजन को इसकी सौगात देंगे। उन्होंने बताया कि योजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण के आवंटियों के साथ बुधवार को कोचिंग हब कैंपस में आयोजित इंटरेक्शन मीट में आवंटियों की शंका और समस्याओं का मौके पर समाधान किया। आयुक्त अरोड़ा ने कहा कि कोचिंग हब में कोचिंगों के संचालन के साथ ही लोकल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था प्रारंभ हो जाएगी। छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए बेहतरीन माहौल के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोचिंग हब में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए लगभग 3 करोड़ रुपए का सर्विलांस स्ट्रक्चर विकसित किया गया है। इसके साथ ही पुलिस चौकी और सर्विलेंस व्हीकल भी 24 घंटे तैनात रहेगा। फायर ब्रिगेड सहित सभी तरीके की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए पास ही 300 स्टूडियो अपार्टमेंट भी बनाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अवैध कोचिंग संचालकों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई</strong> : अरोड़ा ने मीट के दौरान आवंटियों द्वारा गोपालपुरा में संचालित अवैध कोचिंग संचालन के विरूद्ध कार्रवाई की मांग पर कहा कि नगरीय विकास मंत्री के निर्देश पर जेडीए द्वारा गोपालपुरा, लालकोठी, विद्याधर नगर, मानसरोवर सहित अन्य कोचिंग संचालकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। शिक्षा और छात्रों से जुड़े मामले को देखते हुए इस पर ज्यादा कठोरता नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ  सीलिंग सहित अन्य कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>तीसरे चरण का आवंटन होगा ओपन काउंटर सेल की तर्ज पर</strong><br />आयुक्त ने कहा कोचिंग हब में तीसरे चरण के आवंटन के लिए इसी माह से ओपन काउंटर सेल की तर्ज पर प्रत्येक सोमवार से बुधवार तक आनलाइन एप्लीकेशन लगाई जा सकेगी। केता मनचाही प्रॉपर्टी और जगह के लिए आॅनलाइन आवेदन कर सकता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बुधवार को शाम 5 बजे इसकी लॉटरी निकाली जाएगी। किसी प्रोपर्टी के लिए एकल आवेदन आने पर बिना लॉटरी के आवंटन कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि कोचिंग हब में 140 यूनिट्स में से 55 यूनिट कोचिंग संचालकों को आवंटित कर दी गई हैं। शेष बची यूनिट्स के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 May 2023 11:21:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> देश के पहले कोचिंग हब में निर्मित संस्थानिक सम्पत्ति की आवंटन प्रक्रिया 25 जुलाई से शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान आवासन मण्डल द्वारा जयपुर के प्रताप नगर में विकसित देश के पहले एवं महत्वाकांक्षी कोचिंग हब प्रोजेक्ट में निर्मित संस्थानिक सम्पत्ति की आवंटन प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ambitious-project-of-rajasthan-housing-board--the-process-of-allotment-of-institutional-property-built-in-the-country-s-first-coaching-hub-will-start-from-july-25/article-15274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/cc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान आवासन मण्डल द्वारा जयपुर के प्रताप नगर में विकसित देश के पहले एवं महत्वाकांक्षी कोचिंग हब प्रोजेक्ट में निर्मित संस्थानिक सम्पत्ति की आवंटन प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शान्ति धारीवाल ने मंगलवार को हॉस्पिटल रोड स्थित राजकीय निवास पर इसके आवंटन से संबंधित पुस्तिका एवं पोस्टर का विमोचन किया। प्रमुख शासन सचिव नगरीय विकास कुंजीलाल मीणा एवं आवासन आयुक्त पवन अरोडा की मौजूदगी में आयोजित एक सादे कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री ने कहा कि आवासन मण्डल ने लीक से हटकर काम करते हुए प्रदेश के आधारभूत ढांचे के विकास की दृष्टि से एक से बढकर एक नई योजनाओं को गति दी है। कोचिंग हब इसका अनूठा उदाहरण है।<br /><br />धारीवाल ने कहा कि प्रताप नगर में कोचिंग हब के बनने से एक ही स्थान पर कोचिंग गतिविधियां संचालित हो सकेंगी। इससे यातायात एवं पार्किंग की समस्या का भी निराकरण हो सकेगा। उन्होंने आवासन आयुक्त पवन अरोडा के जयपुर शहर के कोचिंग सेन्टर्स को एक ही छत के नीचे लाने के विजन एवं दूरगामी सोच की सराहना करते हुए कहा कि कोटा ने जहां कोचिंग सिटी के रूप में नाम कमाया है वहीं अब जयपुर भी कोचिंग हब के रूप में अपनी अलग पहचान बनाएगा। इस अवसर पर नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव कुंजीलाल मीणा ने कहा कि करीब 228 करोड़ रूपये की इस योजना में केन्द्रीयकृत पुस्तकालय के साथ-साथ छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों हेतु आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।<br /><br />आवासन आयुक्त पवन अरोडा ने बताया कि मण्डल द्वारा प्रताप नगर के हल्दीघाटी मार्ग सेक्टर-16 में 65 हजार वर्ग मीटर भूमि पर दो चरणों में कोचिंग हब विकसित किया जा रहा है। इससे लगभग 65 से 70 हजार छात्रों को शैक्षणिक सुविधा का लाभ मिलेगा तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से नवीन रोजगारों का सृजन होगा, जिससे स्थानीय निवासी भी लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में निर्मित 5 ब्लॉक में कुल 140 कोचिंग परिसरों (परिसम्पत्तियों) के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। करीब 1588.06 वर्गफीट से 8025.56 वर्गफीट तक सुपर बिल्टअप क्षेत्रफल के इन सभी कोचिंग परिसरों का आवंटन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिये ऑनलाइन आवेदन 25 जुलाई से 25 अगस्त, 2022 तक किये जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में पांच संस्थानिक ब्लॉक, 90 दुकानों का व्यावसायिक परिसर तथा अन्य विकास कार्य जैसे चारदीवारी, आंतरिक सडक आदि का निर्माण पूर्णता की ओर है।<br /><br /><strong>यह होगी आवेदन की पात्रता</strong><br />आवासन आयुक्त ने बताया कि जयपुर शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों को आवंटन में वरीयता दी जाएगी। कम से कम तीन वर्षों से कोचिंग के क्षेत्र में कार्यरत एवं पंजीकृत संस्थान ही आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के लिये आवेदन शुल्क 5 हजार रूपये (18 प्रतिशत जीएसटी अतिरिक्त) तथा प्रोसेसिंग शुल्क 10 हजार रूपये (18 प्रतिशत जीएसटी अतिरिक्त) रखा गया है। निर्मित कोचिंग परिसरों को क्षेत्रफल के आधार पर 6 श्रेणियों में बांटा गया है। कोई भी आवेदक किसी एक श्रेणी में ही आवेदन कर सकेगा। प्रत्येक श्रेणी में लॉटरी के माध्यम से आवेदकों की वरीयता निर्धारित की जाएगी। वरीयता निर्धारण के पश्चात सफल आवेदकों को संस्थानिक सम्पत्ति का आवंटन लॉटरी की जरिये ही किया जाएगा।<br /><br />आवासन आयुक्त ने बताया कि आवंटन पत्र जारी होने से 180 दिवस के भीतर सम्पूर्ण राशि जमा करवानी होगी। आवंटी संस्था द्वारा विधिवत कब्जा प्राप्त करने से 3 माह की अवधि में संस्था संचालन की कार्यवाही करनी अनिवार्य होगी। बाजार दर से 25 से 30 प्रतिशत कम कीमतों पर होगा आवंटन आवासन आयुक्त ने बताया कि आवासन मण्डल ने कोचिंग परिसरों की आवंटन दरें बाजार मूल्य से 30 प्रतिशत तक कम रखी है। श्रेणीवार प्रति वर्गफीट दर न्यूनतम 4233 रूपये से अधिकतम 4619 रूपये प्रति वर्गफीट निर्धारित की गई है जो कि बाजार में प्रचलित दरों से 25 से 30 प्रतिशत तक कम है। नगर निगम को देय राशि एवं अन्य विविध व्यय अलग से देने होंगे।<br /><br /><strong>समय का किया सदुपयोग</strong><br />आवासन आयुक्त ने बताया कि सामान्यतः विभागों में निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद ही आवंटन की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाती है लेकिन कई बार इससे लागत बढने के साथ-साथ अनावश्यक विलम्ब होता है। आवासन मण्डल ने कोचिंग हब में निर्माण के अंतिम चरण के साथ ही कोचिंग परिसरों के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। आवेदन प्राप्त करने, प्राप्त आवेदनों की संवीक्षा तथा सफल आवेदकों की लॉटरी द्वारा वरियता सूची निर्धारित करने में डेढ से दो माह का समय स्वाभाविक रूप से लगेगा। इस अवधि में कोचिंग परिसरों के आन्तरिक एवं बाहरी विकास के काम पूर्ण कर लिये जाएंगे।<br /><br /> <br /><br class="MsoNormal" /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 16:36:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कोचिंग हब में आत्महत्याओं का अंतहीन दौर</title>
                                    <description><![CDATA[कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sucide-in-coaching-hub/article-11685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546546516.jpg" alt=""></a><br /><p>कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है। अकेले कोटा में ही कोचिंग के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या यही कोई दो से ढ़ाई लाख तक है। कोटा के कोचिंग हब में 4 जून को एक और होनहार छात्रा आयुषी ने जीवन लीला समाप्त कर ली। इस साल अब तक यह छठीं आत्महत्या है। इंजीनियर या डॉक्टर बनने आए बच्चों का बीच राह में मौत के आगोश में समा जाना हृदय विदारक होने के साथ ही साथ कहीं गहरे तक सोचने को मजबूर कर देता है। आखिर क्या कारण है कि उज्ज्वल भविष्य व गरिमामय प्रोफेसन से जुड़ने की तैयारी में नई पीढी के युवा राह पर उतरते ही इस कदर निराशा के दलदल में फंस जाते हैं कि बिना आगे-पीछे सोचे मौत को गले लगाने में क्षण भर भी नहीं हिचकते हैं। कोटा में कोचिंग कर रहे छात्रों में जिस तेजी से आत्महत्याओं का दौर चला है वह अपने आपमें गंभीर होने के साथ ही बच्चों के परिजनों, कोटावासियों या राजस्थान ही नहीं देश के मनोवैज्ञानिकों, राजनेताओं, प्रशासन, शिक्षाविदें को गहरी सोच में ड़ाल दिया है। कोरोना काल में कोचिंग गतिविधियां बंद होने से आत्महत्याओं का यह अंतहीन सिलसिला कुछ कम अवश्य हुआ पर कोंिचग संस्थानों के चालू होते ही आत्महत्याओं का जो सिलसिला शुरु हो गया है वह अपने आप में चिंतनीय हो जाता है।</p>
<p>पिछले दिनों कोटा में कोचिंग कर रही छात्रा कृति ने सरकार और अपने माता-पिता को मृत्युपूर्व अपने नोट में जो संदेश दिया है वह आंख खोलने के लिए काफी है। अपनी मां को लिखा है कि ‘आपने मेरे बचपन और बच्चा होने का फायदा उठाया और मुझे विज्ञान पसंद करने के लिए मजबूर करती रही। इस तरह की मजबूर करने वाली हरकत 11वीं पढ़ रहीं मेरी छोटी बहन के साथ मत करना, वो जो करना चाहती है, जो पढ़ना चाहती है वह उसे करने देना कुछ इसी तरह से सरकार को लिखा है कि अगर वे चाहते हैं कि कोई बच्चा नहीं मरे तो जितनी जल्दी हो सके इन कोचिंग संस्थानों को बंद करवा दें, यह कोचिंग खोखला बना देती है। कृति के इन संदेशों में कितनी सचाई और दर्द छिपा है यह अपने आप बयां कर रहा है। आखिर बच्चों का बचपन बढ़ों की इगों के आगे टिक नहीं पा रहा है और गला काट प्रतिस्पर्धा का कारण बनने के साथ ही बच्चों को मानसिक दबाव और कुंठा की राह धकेल रहा है, यह सच्चाई हैं।</p>
<p>कभी राजस्थान की औद्योगिक नगरी के रुप में जाना जाने वाला कोटा शहर बीते कुछ दशकों से शिक्षा नगरी के नाम से पहचान बना चुका है। आईआईटी और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने की कोचिंग के लिए कोटा शहर की पहचान पूरे देश में कोचिंग हब के रुप में है। कुकुरमुत्ते के छाते की तरह कोटा में कोचिंग व्यवसाय ने पांव पसारे हैं। अकेले कोटा में ही कोचिंग के लिए आने वाले छात्र-छात्राओें की तादाद यही कोई दो से ढ़ाई लाख तक है। एक मोटे अनुमान के अनुसार देश में कोचिंग का व्यवसाय कोई 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का माना जा रहा है। इसमें से अकेले कोटा में कोचिंग का कारोबार एक हजार करोड़ रुपए से अधिक है। साफ  है कोचिंग पूरी तरह से व्यवसाय का रुप ले चुकी है, ऐसे में मानवीय संबंध या गुरु-शिष्य के संबंध कोई मायने नहीं रखते। अपनत्व या आपसी संवेदना तो दूर-दूर की बात है। कोचिंग संस्थान पांच से छह घंटों तक कोचिंग कराते है। शेष समय हॉस्टल में अध्ययन में बीतता है। पहले से ही मानसिक दबाव में रह रहे बच्चे कोचिंग संस्थानों की नियमित परीक्षाआें के माध्यम से रेकिंग के दबाव में इस कदर रहते हैं कि संवेदनशील बच्चे तो इस दबाव को सहन ही नहीं कर पाते। कोचिंग संस्थानों के लिए तो यह निरा व्यवसाय बनकर रह गया है। उन्हें बच्चों के मनोविज्ञान को समझने की ना तो जरुरत महसूस होती है और ना ही इसकी परवाह। दूसरी तरफ  परिजन ऊंचे-ऊंचे ख्बाब देखते हुए बच्चों का इन कोचिंग संस्थानों में प्रवेश कराकर अपने दायित्व की इतिश्री कर लेते हैं। बीच सत्र में छोड़ने की स्थिति में फीस वापस नहीं करने की स्थिति में बच्चों पर दबाव बना रहता है। हॉस्टल या पेइंग गेस्ट के रुप में रहने वाले स्थान पर सेहतमंद खाने की व्यवथा होती है ना ही आपसी दुख दर्द को बांटने वाली बातें करने वाला कोई। रेकिंग के गिरते चढ़ते ग्राफ के चलते बच्चे अत्यधिक दबाव में आ जाते हैं। बच्चों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ जाता है और इसका परिणाम सामने हैं।</p>
<p>कोटा में चल रहे आत्महत्याओं के दौर से केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ही चिंतित है। सरकार और मनोविज्ञानियों ने अपने स्तर पर प्रयास भी शुरु किए पर वह अभी कारगर नहीं हो पा रहे हैं। कोरोना से पहले केन्द्र सरकार ने आत्म हत्या के कारणों का अध्ययन कराने के लिए कमेटी गठित की। तो जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ। बच्चों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए कोचिंग विद फन का कंसेप्ट लाया गया। जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के लिए गाइड लाइन जारी करने के साथ ही होप हेल्प लाईन को शुरु किया गया। जिला प्रशासन की दखल के बाद फन डे, योग, मेडिटेशन के माध्यम से पढ़ाई के तनाव को कम करने के प्रयास शुरु किए गए। परिजनों ने भी अपने बच्चों से निरंतर सम्पर्क बनाना शुरु किया। काउसलिंग व स्क्रीनिंग व्यवस्थाएं भी नियमित करने का प्रयास आरंभ हुआ। कोटा में कोचिंग छात्रों की आत्म हत्या के कारण कोई भी रहे हो पर यह बेहद चिंतनीय है। चिंतनीय यह भी है कि कोचिंग अब संस्थागत कारोबार का रुप ले चुकी है।</p>
<p><strong>- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 10:39:12 +0530</pubDate>
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