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                <title>fruits - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - प्रतिबंधित रसायन से फल पकाने वालों पर कसा शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[गोदामों की जांच के लिए बनाई टीमें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---tightening-grip-on-those-who-ripen-fruits-with-banned-chemicals/article-81905"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(12)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रतिबंधित रसायन और केमिकल से फल पकाने वालों के खिलाफ कृषि उपज थोक फलसब्जी मंडी समिति ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए मंडी समिति की ओर से कुछ फल विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा आगामी दिनों में इनके गोदामों की जांच भी की जाएगी। जांच में प्रतिबंधित रसायन और केमिकल से फल पकाना पाया गया तो सम्बंधित विक्रेता का लाइसेंस निलम्बित किया जाएगा। इसके  लिए समिति ने पूरी कार्य योजना तैयार कर ली है। गोदामों की जांच की टीमों का गठन किया गया है। जो आकस्मिक निरीक्षण कर गोदामों में वस्तुस्थिति की जांच करेगी। फल पकाने के मामले आए सामने: तरबूज व खरबूज सहित अन्य फल गर्मियों के मौसम में लोगों की पहली पसंद होती है। इसकी ठंडक और मिठास जहां एक ओर गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं यह स्वास्थ्य के लिए भरपूर फायदेमंद भी साबित होता है। गर्मियों में इसकी बढ़ती मांग के चलते इसे जल्दी पकाने के लिए केमिकल का सहारा लिया जा रहा है। जो स्वास्थ लिए हानिकारक होता है। केमिकल के प्रयोग से यह फल तेजी से पक जाता है। गत दिनों शहर के कई गोदामों में प्रतिबंधित रसायनों से तरबूज, खरबूज, कैले, पपीता, आम सहित अन्य फलों को पकाने के मामले सामने आए थे। फल विक्रेता इसमें सैकरीन के साथ लाल कलर का इंग्जेक्शन लगाकर फल को मिठा कर रहे थे। जिससे जनता के स्वास्थ्य बुरा प्रभाव पड़ रहा था। इस सम्बंध में कोई कार्रवाई नहीं होने से प्रतिबंधित रसायनों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा था।  </p>
<p><strong>सभी के लिए घातक होता है यह रसायन</strong><br />भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने घातक रसायनों के उपयोग पर प्रतिबंध के लिए पूर्व में निर्देश जारी कर रखे है। फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक 2011 के उप विनियम के प्रावधान के तहत कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध है। कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली एसिटिलिन गैस फल पकाने में शामिल लोगों के उतनी ही हानिकारक है जितना यह फल का सेवन करने वालों के लिए है। बाजार में बिकने वाले तरबूज व खरबूजे व आम को कृत्रिम रूप से पकाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। हालांकि आजकल बाजार में मिलने वाले खरबूजे अक्सर एक समान रंग के होते हैं। उन पर किसी भी प्रकार के दाम या निशान नहीं होते। जिससे यह संदेह होता है कि इन्हें केमिकल की सहायता से एक ही रात में पकाया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया मामला तो हरकत में आया विभाग</strong><br />शहर में विभिन्न स्थानों पर गर्मियों में तरबूज, खरबूज और अन्य फलों की बढ़ती मांग के चलते जल्दी पकाने के लिए कुछ फल विक्रेता केमिकल का सहारा ले रहे थे। इससे आमजन के शरीर को नुकसान पहुंच रहा था। इस सम्बंध में गत 31 मई को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि प्रतिबंधित रसायनों और केमिकल का उपयोग फलों को पकाने में धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। इस सम्बंध में जिम्मेदार विभाग कोई कार्रवाई नहीं रहे हैं। मामला उजागर होने पर थोक फल सब्जीमंडी समिति ने कुछ फल विक्रेताआेंं को नोटिस जारी कर हिदायत दी। वहीं गोदामों की जांच के लिए टीमों का गठन किया।</p>
<p>प्रतिबंधित रसायन से फल पकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर कुछ फल विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद भी गोदामों की जांच के लिए विभाग के कर्मचारियों की टीमें बनाई गई है, जो नियमित रूप से गोदामों की औचक जांच करेगी। इस दौरान प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग मिलने पर सम्बंधित फर्म का लाइसेंस निलम्बित किया जाएगा।<br /><strong>- शशिशेखर शर्मा, कार्यवाहक सचिव, थोक फलसब्जी मंडी समिति</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 16:55:01 +0530</pubDate>
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                <title>सेब महंगाई से लाल, अनार के दाम में भी उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apple-red-due-to-inflation--price-of-pomegranate-also-increased/article-54948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/seb-mehngayi-s-laal,-anaar-k-daam-me-bhi-uchaal...kota-news-photo-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश की मार सिर्फ टमाटर और हरी सब्जियों पर ही नहीं पड़ी है, बल्कि सेब उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से 30 प्रतिशत से अधिक सेब की फसल बर्बाद हो गई है। इस कारण कोटा जिले में सेब के दाम में भारी उछाल आ गया है। शहर की प्रमुख मंडी में सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। वहीं अनार के दाम में भी तेजी बनी हुई है। इसके दाम भी 140 रुपए किलो हो गए हैं।</p>
<p><strong>फल व सब्जी के दाम</strong><br />सेब    100-140<br />अनार    80-140<br />केला    30-40<br />टमाटर    60-70 <br />भिंडी    40-60<br />अदरक    130-140 <br />बैंगन    40-60<br />मिर्च     40-60<br />फूल गोभ    60-80<br />टिंडा    40-60<br />अरबी    40-60<br />मूली    50-60<br />(भाव रुपए प्रति किलो)</p>
<p><strong>सेब की आपूर्ति प्रभावित</strong><br />देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस कारण उत्पादन में कमी आने से बाजार में सेब की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है। जिससे सेब की कीमतें में भारी उछाल आया है। इससे आमजन को महंगे सेब खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय फल व्यापारियों ने बताया कि कोटा में सेब की सबसे ज्यादा आवक हिमाचल प्रदेश से होती है। गत दिनों वहां हुई भारी बारिश के कारण सेब के बाग नष्ट हो गए हैं। जिससे  कोटा में सेब की आवक कम होने लगी है। इस कारण दाम में तेजी आई है। </p>
<p><strong>मंडी में तेजी से बढ़े दाम</strong><br />धानमंडी स्थित फल व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि मंडी में कुछ दिन पहले सेब 70 से 90 रुपए किलो बिक रहा था। पूर्व में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सेब आ रहा था। इस कारण सेब के दाम स्थिर थे। कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश में बारिश से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस कारण वहां से सेब की आवक बंद हो गई है। इस समय केवल उत्तराखंड से सेब आ रहा है। इसलिए सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। इसके साथ अनार के दाम में भी उछाल बना हुआ है। फल मंडी में अच्छी किस्म का अनार 90 से 140 रुपए किलो के बीच मिल रहा है।</p>
<p><strong>इधर किचन में होने लगी टमाटर की एंट्री</strong><br />इधर स्थानीय सब्जीमंडी में टमाटर के दामों में निरन्तर गिरावट हो रही है। कोटा शहर में जो टमाटर 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था उसके दाम शुक्रवार को थोक फल सब्जी मण्डी में 60 से 70 रुपए प्रतिकिलो पर आ गए। भावों में आई नरमी से अब मंडी में हर सब्जी की दुकान में टमाटर दिखाई देने लगा है।  बारिश के चलते टमाटर की फसल को खासा नुकसान पहुंचने से मार्केट में कमी हो गई थी और दाम चार गुना महंगे हो गए थे।अब टमाटर के दामों में गिरावट हो रही है। मंडी में टमाटर के प्रमुख व्यापारी शब्बीर वारसी ने बताया कि एक सप्ताह पहले टमाटर की आवक 1300 से 1500 कैरेट प्रतिदिन हो रही थी। वहीं अब बैंगलुरु व शिमला से करीब 2000 कैरेट टमाटर की आवक हो रही है। आवक बढ़ऩे से दाम कम हुए हैं। </p>
<p><strong>चाय में आया अदरक का स्वाद </strong><br />महंगाई के दौर में अदरक ने भी चाय से दूरी बना ली थी। अदरक के दाम 250 रुपए प्रतिकिलो पर पहुंच गए थे। जिससे चाय से अदरक का स्वाद चला गया था। घर से लेकर चाय की दुकान तक अदरक दूर हो गई थी। लेकिन अब महंगाई कम हुई तो स्वाद वापस दिखने लगा है। शुक्रवार को मंडी में अदरक 140 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। हालांकि अभी भी ग्राहक ज्यादा अदरक नहीं ले रहे हैं। कोटा की मंडी में इन दिनों जयपुर व दिल्ली से नई अदरक की आवक शुरू हो गई है। इसके कारण अदरक के भाव में कमी आई है।</p>
<p>पहले टमाटर महंगा होने के कारण घर की रसोई से टमाटर का स्वाद गायब हो गया था। अब सेब के दाम में तेजी आने लगी है। हर माह कोई न कोई सब्जी या फल में तेजी आती रहती है। खाने की चीजों में अब लगातार महंगाई होती जा रही है। <br /><strong>- उमा तोमर, गृहिणी</strong></p>
<p>पिछले एक महीने से घर की रसोई से टमाटर और अदरक का स्वाद ही फीका हो गया था, लेकिन अब इनके दाम में कमी आई है। अब सेब व अनार के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलहाल सेब व अनार खरीदने से दूरी बना रखी है।<br /><strong>- पारुल वर्मा, गृहिणी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:37:35 +0530</pubDate>
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                <title>हर साल सीजन में 18,000 टन आम खा जाते हैं कोटा वासी</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-residents-eat-18-000-tonnes-of-mangoes-every-year-in-season/article-53302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/630-400-size-की-कॉपी.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आम फलों का ही नहीं कोटा वालों के दिल का भी राजा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर सीजन में प्रतिदिन में 100 से 125 टन आम की बिक्री यहां होती है। कोटा की प्रमुख फल-सब्जी मंडी में पूरे सीजन में 9 से 10 वैरायटी के आम आते हैं। अलग-अलग समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों की मशहूर किस्मों की आवक यहां होती है, जो 50 रुपए से 250 रुपए प्रति किलो तक के भाव में बिकते हैं। कोटा में फरवरी माह से आम आना शुरू हो जाते हैं और जुलाई माह तक इनकी आवक जारी रहती है। वहीं अप्रैल से जून माह तक सीजन में जमकर आम खाए जाते हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 100 टन से अधिक बिक्री</strong><br />जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है। ऐसे में पूरे सीजन में 18000 टन आम लोग खा जाते हैं। कोटा में सर्वाधिक बिक्री बादाम, तोतापुरी और हापुस की होती है। हमारे यहां आम की आवक कर्नाटक, महाराष्टÑ, केरल,आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु व उत्तरप्रदेश से होती है।</p>
<p><strong>आम की लजीज डिशेज की भी डिमांड</strong><br />कोटा में आम से बनी डिशेज की काफी डिमांड बढ़ी है।  विभिन्न आयोजनों में मैंगो ज्यूस, मैंगो आइसक्रीम, मैंगो श्री, मैंगो केसर लस्सी, मैंगो आॅफर और मैंगो शेक को काफी पसंद किया जा रहा है। अब तो वैवाहिक आयोजनों में आम की डिशेज को शामिल किया जाने लगा है।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा इनकी होती है बिक्री</strong><br />फल व्यवसायी बताते हैं कि कोटा संभाग में सबसे ज्यादा बादाम, तोतापुरी और हापुस आमों की बिक्री होती है। सीजन में इन किस्मों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा बारिश के मौसम यानि जुलाई माह में लंगड़ा, दशहरी व चौसा किस्म के आम आते हैं।</p>
<p><strong>देशी आम के शौकीन भी कम नहीं</strong><br />कोटा के लोग देसी आम को भी काफी पसंद करते हैं। यहां की फल मंडी में बारां, झालावाड़ और कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न किस्म के देसी आम बिकने के लिए आते हैं। देसी आम भी अपने स्वाद के लिए काफी मशहूर हैं और सीजन के दौरान इनकी भी काफी बिक्री होती है।</p>
<p><strong>कहां से आता है कौनसा आम</strong><br />-हापुस: फरवरी से जून तक महाराष्टÑ व कर्नाटक से<br />-केसर: मार्च से जून तक गुजरात से<br />-तोतापुरी: फरवरी से जुलाई तक कर्नाटक व तमिलनाडु से<br />-सिंदुरी: फरवरी से मई तक कर्नाटक से<br />-नीलम: फरवरी से मई तक कर्नाटक व आंध्रप्रदेश से <br />-बादाम: फरवरी से मई तक कर्नाटक, केरल व आंध्रप्रदेश से<br />-लंगड़ा, दशहरी व चोसा: जून से अगस्त तक उत्तरप्रदेश से </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आम का स्वाद काफी पसंद आता हैं। इस कारण सीजन के दौरान आम की पेटी खरीद कर लाता था। उसका संयुक्त परिवार हैं। ऐसे में आम की ज्यादा जरूरत होती थी। बड़ों से लेकर बच्चों तक इसके स्वाद के दीवाने रहते हैं। इसलिए पूरे सीजन में वह आम खरीदकर लाता है।<br /><strong>- मुकेश गर्ग, ग्राहक</strong></p>
<p>छह माह के सीजन में अप्रैल से जुलाई तक प्रतिदिन कोटा संभाग में 100 से 125 टन आम की खपत होती है। इस दौरान त्यौहार और शादियां होने के कारण आम की बिक्री और बढ़ जाती है। कोटा की फल मंडी में देश के विभिन्न राज्यों से आम की आवक होती है। यहां की मंडी से माल कोटा संभाग के अन्य जिलों में भेजा जाता है। सीजन में आम की हजारों टनों की बिक्री होती है। <br /><strong>- शब्बीर वारसी, फल व्यवसायी, फल सब्जीमंडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 13:28:13 +0530</pubDate>
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                <title>स्वास्थ्य से खिलवाड़: घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री जारी </title>
                                    <description><![CDATA[करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/playing-with-health-sale-of-substandard-and-adulterated-food-items-and-rotten-fruits-continues/article-11875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/62.jpg" alt=""></a><br /><p>करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। आम आदमी अब यहाँ पर घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थो की शिकायत करते हुए मिल रहा है। सबसे ज्यादा दूधियाओं की मनमानी चल रही है जो कि शुद्ध तो बेचना ही नहीं चाहते। पानी मिला एवं क्रीम निकला दूध यहाँ खूब बिक रहा है</p>
<p>गांवों से मोटर साईकिलों पर एवं अन्य साधनों से दूधियां दूध लाते है वह पहले उनकी क्रीम निकलवाते है इसके बाद लोगों को दूध देते है। दूधियां कभी आधा प्योर और आधा फिल्टर दूध (क्रीम निकला हुआ) मिलाकर दूध बेचते है तो कभी प्योर दूध में पानी मिलाकर बेचते है इस प्रकार जन स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड रहा है। देशी घी की तो बाजार में इतनी ब्रांडों के वाजार में है कि उनमें असली कौनसी और नकली कौनसी इसका भेद ही नहीं हो पा रहा है। देशी घी 200-250 तथा 300से 400 और पांच सौ रूपये तक का मिल रहा है यह समझ में नहीं आता कि यह अलग-अलग भाव क्यों है। करौली में देशी घी बेचने वाले जो कि बाहर अन्य प्रांत से देशी घी लाकर बेचते है</p>
<p>वह बगैर लेखा जोखा के बगैर बिल के ही काम कर रहे है। ऐसे में सरकार को राजस्व का चूना भी लगा रहे हैं। करौली में जब मिलावटी एवं घटिया खाद्य पदार्थो एवं सडे-गले फलों की बिक्री की बात लोगों द्वारा उठाई जाती है तो जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा महज खानापूर्ति शुरू की जाती है चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर बार केवल हिदायत देना और चेतावनी देकर ही अपना कर्तव्य पूरा मान लेते हेैं जबकि सैम्पलिंग भी होनी चाहिए वह भी वहाँ से जहाँ की थोक में वस्तुएं लोग बेचते है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं खाद्य निरीक्षक यह तो कहते है कि करौली जिले में मिलावटी खाद्य वस्तुओं, रंगदार मिठाई, नमकीन, सडे-गले फलों के उपभोक्ताओं को खाने के बाद बीमारियां बढ जाती है इन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की जाती है किंतु कितने सैम्पल हुए और उनमें पिछले समय के जो सैम्पल लिए और जो जांच में मिलावट होना पाया गया उन मिलावटियों या अन्य के खिलाफ क्या कार्यवाही हुई क्या पुलिस में मामला दर्ज कराया गया इन सब प्रश्नों को वह गोलमोल कर जाते है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 12:24:18 +0530</pubDate>
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