<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/liver-transplant/tag-23963" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>liver transplant - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/23963/rss</link>
                <description>liver transplant RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चिकित्सकों ने किया कमाल, बिना मैचिंग किया सफल लिवर ट्रांसप्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[रक्त में एंटीबॉडीज के अभाव में रोगी के शरीर ने उसे रिजेक्ट भी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-did-the-successful-liver-transplant-without-matching-amazing/article-108206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा विज्ञान की तरक्की ने जहां उन्नत तकनीकें ईजाद की है, वहीं उपचार को आसान बना दिया है। नतीजतन उपचार की सफलता दर भी बढ़ गई है। हाल ही में महात्मा गांधी अस्पताल के सेंटर फॉर डाइजेस्टिव साइंसेज के लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ टीम को ऐसी ही एक उल्लेखनीय सफलता मिली है। मामला राज्य के पहले एबीओ इनकंपिटिबल लिवर ट्रांसप्लांट का है। खास बात ये है कि एक जरूरतमंद लिवर की खराबी वाले गंभीर रोगी को अन्य ब्लड़ ग्रुप के डोनर के प्राप्त लिवर लगाया गया। जो कि पूरी तरह सफल भी रहा। इसके साथ ही उन रोगियों के लिए भी जीवन की राह खुल गई है जिनके पास मैचिंग ग्रुप का डोनर नहीं है। लिवर और एच पी बी सर्जरी विशेषज्ञ डॉ नैमिष एन मेहता ने बताया कि बूरथल निवासी 44 वर्षीय मदन गोपाल मीना को पिछले डेढ़ वर्ष से पीलिया की वजह से बार बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था।</p>
<p>उन्हें पेट में पानी भरने बार बार बेहोशी जैसी शिकायत थी। स्थिति लिवर फेलियर तक पहुंच गई थी। रोगी को जब बेहोशी की हालत में महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पता लगा कि उनकी जान अब लिवर प्रत्यारोपण से ही बचाई जा सकती है। चुनौती यह भी थी कि मैचिंग ब्लड ग्रुप का डोनर नहीं मिल पा रहा था। उनकी पत्नी बसना देवी का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था जबकि रोगी का बी पॉजिटिव। एबीओ इनकंपिटिबल ट्रांसप्लांट के लिए  ब्लड सेंटर डायरेक्टर डॉ आर एम जायसवाल और डॉ श्वेता शर्मा की मदद ली गई। जिन्होंने डोनर के ब्लड ग्रुप को मैच करने के लिए विशेष प्लाज्मा फेरेसिस द्वारा रोगी के शरीर से 'ए' एंटीबॉडीज को कम किया। भविष्य में भी रोगी को कोई समस्या ना हो इसके लिए इम्यूनो मॉड्यूलर थेरेपी भी दी गई। यह प्रक्रिया ऑपरेशन से कुछ दिन पूर्व की गई। इस तरह डोनर द्वारा प्राप्त लिवर के हिस्से को रोगी के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। रक्त में एंटीबॉडीज के अभाव में रोगी के शरीर ने उसे रिजेक्ट भी नहीं किया।</p>
<p>ऑपरेशन में डॉ नैमिष एन मेहता के साथ हेपेटोलॉजिस्ट डॉ करण कुमार, ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ आनंद नागर, डॉ विनय महला, गहन चिकित्सा डॉ आनंद जैन, ट्रांसप्लांट एनेस्थेटिस्ट डॉ गौरव गोयल तथा डॉ कौशल बघेल भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। हेपेटोलॉजिस्ट डॉ करण कुमार ने बताया कि कि इस ऐतिहासिक सफलता ने राज्य का नाम देश और दुनिया में रौशन किया है। साथ ही बिना मैचिंग के डोनर के जरिए सैकड़ों लिवर रोगियों के लिए आशा भी जागी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-did-the-successful-liver-transplant-without-matching-amazing/article-108206</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-did-the-successful-liver-transplant-without-matching-amazing/article-108206</guid>
                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 16:54:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/9.jpg"                         length="340996"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में पहली बार CRRT पर रहते हुए मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[मरीज अनुज की पत्नी पूनम ने उन्हें अपना आधा लिवर दिया। 12 घंटे लंबी चली इस सर्जरी को डॉक्टर्स के अथक प्रयासों ने सफल बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/liver-transplant-of-a-patient-while-on-crrt-for-the/article-52038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/1-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है जब लिवर ट्रांसप्लांट के वक्त मरीज डायलिसिस पर था। लिवर और किडनी फेलियर से जूझ रहे अनुज को जयपुर के डॉक्टर्स दूसरा जीवन प्रदान किया है। शहर के संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स लगातार डायलिसिस पर चल रहे मरीज का इमरजेंसी में लिवर ट्रांसप्लांट करने में सफल रहे हैं। सोमवार को यहां हॉस्पिटल में आयोजित हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर्स की टीम ने जटिल केस के बारे में जानकारी दी।</p>
<p><strong>100 प्रतिशत वेंटिलेटर सपोर्ट पर था मरीज</strong><br />संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट के सचिव योगेंद्र दुर्लभजी ने बताया कि मरीज को एक्यूट लिवर फेलियर और एक्यूट किडनी फेलियर था। एक समय उसके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बनाए रखने के लिए 100 प्रतिशत वेंटिलेटर सपोर्ट देने की आवश्यकता पड़ रही थी। हमारे विशेषज्ञों ने जब उसे देखा तब उसके बचने की संभावना सिर्फ एक प्रतिशत थी। सारी जांच करने के लिए हमने यह सलाह दी कि मरीज को बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा, जबकि उसकी किडनी भी काम नहीं कर रही थी जिसके कारण उसके खून को कृत्रिम रूप से शुद्ध करने के लिए लगातार डायलिसिस किया जा रहा था। इसे सीआरआरटी यानी कंटीनस रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी कहते हैं। </p>
<p><strong>पत्नी ने दिया आधा लिवर, 12 घंटे में हुआ ट्रांसप्लांट</strong><br />इस तरह का लिवर ट्रांसप्लांट राजस्थान में पहली बार हुआ है और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में इसे बेहद जटिल प्रत्यारोपण सर्जरी में माना जा रहा है। मरीज अनुज की पत्नी पूनम ने उन्हें अपना आधा लिवर दिया। 12 घंटे लंबी चली इस सर्जरी को डॉक्टर्स के अथक प्रयासों ने सफल बनाया। धीरे-धीरे उनकी किडनी ने भी काम करना शुरू कर दिया। सर्जरी के बाद मरीज को 10 दिनों के लिए आईसीयू में निगरानी के लिए रखा गया इसके बाद उन्हें सामान्य वार्ड में 10 दिन रहने के बाद उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इस बेहद जटिल सर्जरी को सफल बनाने में डॉ. राजेश भोजवानी, डॉ. बोरा, डॉ. सुभाष मिश्रा, डॉ. श्याम, डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. बीके मालपानी, डॉ. दिनेश अग्रवाल, डॉ. वीके पाराशर, डॉ. दिलीप सिंह राणा, डॉ. सांवरमल, डॉ. आशीष पारीक, डॉ. पीयूष माथुर और डॉ. चंद्रशेखर का विशेष सहयोग रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/liver-transplant-of-a-patient-while-on-crrt-for-the/article-52038</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/liver-transplant-of-a-patient-while-on-crrt-for-the/article-52038</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 20:47:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-07/1-%2810%291.png"                         length="476544"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्य का पहला इमरजेंसी लिवर ट्रांसप्लाण्ट रहा सफल, बचाई रोगी की जान</title>
                                    <description><![CDATA[सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डॉक्टर्स टीम को एक और चमत्कारिक सफलता मिली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/states-first-emergency-liver-transplant-was-successful-patients-life-was/article-11890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cfds-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डॉक्टर्स टीम को एक और चमत्कारिक सफलता मिली है। हाल ही में अस्पताल की लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने एक्यूट लिवर फेलियर की आपात स्थिति में झालावाड़ की 50 वर्षीय महिला का लिवर ट्रांसप्लांट किया है। लिवर ट्रासप्लाण्ट विभाग के डाइरेक्टर तथा मुख्य लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जन डॉ. नैमिश मेहता ने बताया कि यह राज्य में आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लाण्ट का यह पहला मामला है। यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है। रोगी कालीबाई तथा डोनर राजेश अब स्वस्थ हैं। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइन्सेज एण्ड टैक्नोलोजी जयपुर के एमेरिटस चयरपर्सन डॉ. एमएल स्वर्णकार ने बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल राज्य का प्रमुख लिवर ट्रांसप्लाण्ट सेंटर है जहां अब तक 26 लिवर प्रत्यारोपण हो चुके हैं। अस्पताल द्वारा अंगदान तथा अंग प्रत्यारोपण के लिए अहम प्रयास किये जा रह है। समाज में अंगदान खासकर लिंकिंग डॉगर डोनेशन के लिए सभी अस्पतालों, स्वयंसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए। चेयर पसंन डा विकास स्वर्णकार ने बताया कि यदि समय पर अंगदान किया जाये तो हर साल सैकड़ों जरूरतमंद रोगियों की जान बचाई जा सकती है। महात्मा गाधी अस्पताल जयपुर में यह लिवर प्रत्यारोपण राजस्थान गवर्नमेंट है। स्कीम के तहत किया गया जिसमें रोगी को कैशलेस उपचार दिया गया।</p>
<p>डॉ. नैमिश मेहता ने बताया कि ड्रग साइड इफेक्ट के कारण रोगी को लियर फेलियर की स्थिति का सामना करना पड़ा। अस्पताल पहुंचते ही रोगी को पेंटीलेटर की मदद की जरूरत पड़ी। उसके दिमाग पर सूजन का गंभीर खतरा भी था। ऐसी स्थिति में 80-85 प्रतिशत रोगी जान चा देते हैं। रोगी की जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर प्रत्यारोपण था। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि घर वालों को अचानक हुए लिवर फेलियर की जानलेवा स्थिति का आभास भी नहीं होता है और वे इतनी बड़ी सर्जरी के लिए तैयार नहीं हो पाते हैं। हिमेटोलोजिस्ट डॉ करण कुमार ने परिवार की फासिलिंग कर गंभीरता के बारे में बताया। तब इनके तीनों बेटा लिवर डोनेशन की इच्छा व्यक्त की। जांचों में बेटे राजेश को लिवर डोनेशन के लिए उपयुक्त पाया गया। ट्रांसप्लाण्ट सम्बन्धित दस्तावेज तैयार कर स्टेट ऑथराइजेशन कमेटी से स्वीकृति ली गई।</p>
<p>आपात स्थिति में देर रात ऑपरेशन शुरू हुआ जो बारह घण्टे तक चला। एक साथ दो ऑपरेशन थियेटर्स में ऑपरेशन हुए। पहले में लिवर डोनर के लिवर का एक हिस्सा निकाला गया। दूसरे ऑपरेशन थियेटर में महिला का खराब हुआ लिवर निकाला गया तथा डोनेशन से प्राप्त लिवर का हिस्सा प्रत्यारोपित किया गया। खास बात यह है कि अस्पताल में भर्ती होते समय भी रोगी वेंटीलेटर पर था। डोनर की जाँच तथा ट्रांसप्लाण्ट सम्बन्धित डॉक्यूमेंटेशन तथा सरकारी अनुमति में भी लगभग आठ से दस दिन का समय लग जाता है। इस आपात सर्जरी में महज एक दिन में सारी प्रक्रिया पूरी की गई। दोनों ही ऑपरेशन सफल रहे हैं। डोनर का लिवर पहले की तरह दो माह में सामान्य आकार ले लेगा।</p>
<p>टीम में डॉ. नैमिश मेहता,  डॉ. विनय कपूर, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. आर पी चौबे, डॉ. आनन्द नागर, डॉ शाश्वत सरीन, डॉ. विनय महला, डॉ. अरविन्दो कुमार दास तथा हिपेटोलोजिस्ट डॉ. विवेक आनन्द सारस्वत तथा डॉ करण कुमार तथा निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. गणेश निमझे तथा डॉ. गोयल तथा ट्रांसप्लान्ट कोर्डिनेटर आर्यन माथुर प्रमुख सहयोगी रहे।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/states-first-emergency-liver-transplant-was-successful-patients-life-was/article-11890</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/states-first-emergency-liver-transplant-was-successful-patients-life-was/article-11890</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 13:18:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/cfds-copy.jpg"                         length="137250"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        